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નવરાત્રી.
આ શબ્દ એટલે ગરબાનો પર્યાય,

નવરાત્રીનું સ્મરણ થતાં જ માં શકિતના ગરબા અને રાસનું દ્રશ્ય આંખો સમક્ષ દશ્યમાન થઈ જાય છે.

ગરબો કે ગરબી એ આધશકિત ની આરાધના, ઉપાસના કે ભક્તિ કરવા માટેની એક વિશેષ તરેહ કહો તો તરેહ કે પછી પદ્ધતિ.

માં શક્તિની મૂર્તિ કે ફોટો મધ્ય ભાગે મુકીને બધાંજ લોકો તેની ચોતરફ પ્રદક્ષિણા એટલે કે ગરબો કરે છે,

પ્રદક્ષિણા સાથોસાથ માં શકિતનું ગીત,ગરબી દ્વારા આહ્વાન કે સ્મરણ કરે છે.

નવ દિવસ ચાલતાં આ ધાર્મિક પર્વની મારા મતે તો આ જ સાચી રૂપરેખા રહી છે.

હવે જ્યારે અત્યારની કડવી વાસ્તવિકતા જોતાં લાગે છે કે હવે નવરાત્રી એ ધાર્મિક પર્વ નહીં પરંતુ એક જબરદસ્ત ઇવેન્ટ નું સ્વરૂપ ધારણ કર્યું છે.

સત્ય છે.
કડવું પણ છે.

દરેકનો મત અલગ અલગ હોય શકે છે.

નવરાત્રી ને ઇવેન્ટ કહેવાય?
હા કહી શકાય.

કોઈ માટે પૈસા કમાવા માટેની ધર્મના નામે ફક્ત ઇવેન્ટ.

કોઈ રાજકીય નેતા માટે પોતાની વોટબેંકની સાચવણી અને વધારો કરવા માટેની ઇવેન્ટ.

કોઈ માટે મોબાઈલમાં સેલ્ફી પાડવાં માટે જ તેનાં મતે આયોજન કરેલી ઇવેન્ટ.

કોઈ માટે ફક્ત નાસ્તા પાણી કરવા માટેની ઇવેન્ટ.

કોઈ માટે (ધ)તન મિલાપ કરવા માટે કે નિહાળવા માટે ની ઇવેન્ટ.

કોઈ માટે ગરબો આરાધના નહીં પરંતુ ફક્ત કુદવા અને મનોરંજન માટે ની ઇવેન્ટ.

આજના તબક્કે જોતાં તો મને લાગે છે.
બીજાનું તો ખબર નહીં.

દરેક માટે ઇવેન્ટ પણ નથી કોઈ માટે તે ધાર્મિક ઉત્સવ છે.

શકિતને પામવાનો.
શકિતને જાણવાનો.
શકિતને અનુભવવાનો.

જેને નવ ગર્ભ દીપ સંસ્કાર પોતાની પેઢી માટે પામવાં છે તેનાં માટે નવરાત્રી એક ચૈતન્ય સૃજન છે.

નવરાત્રી માં નવ નો અંક ખુબજ મહત્વનો છે.

નારી માટે નવ દિવસ ગરબોએ ગર્ભદીપ પ્રાગટ્ય સંસ્કાર નો પ્રથમ નવ પગથિયાં ની પા,,, પા,, પગલી છે.જે પોતાની આત્માનાં શૃંગ શિખરે પહોંચવા મદદગાર થાય છે.

નવરાત્રી એ નારીમાં નવો જ ઉત્સાહ ભરતો અનેરો ધાર્મિક ઉત્સવ છે અને ધાર્મિકતા હંમેશા શ્રદ્ધા, વિશ્વાસથી મજબૂત થાય છે.

આવાં ધાર્મિક ઉત્સવ ની જડો આધુનિકતા નાં નામે નબળી ના પડે અને માં શકિતની ઉપાસના તેનાં નિતી નિયમોને આધિન થાય તો ઉત્સવની ગરિમા જળવાઈ રહે છે.

parmarmayur6557

🌏✨ World Dream Day ✨🌏

World Dream Day is a reminder to believe in the power of our dreams. With courage and hope by our side, every dream has the potential to turn into reality. 🌟

nensivithalani.210365

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है पंछी का बसेरा

mamtatrivedi444291

જ્યાં 'ઈગોઈઝમ' છે ત્યાં ભગવાન નથી. જ્યાં ભગવાન છે ત્યાં 'ઈગોઈઝમ' નથી. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/Q9fDkNiM

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dadabhagwan1150

📖 Story – सफलता का असली नियम

राजेश एक छोटा सा व्यापारी था। शुरुआत में उसने सोचा – “सस्ता बेचो, ज्यादा बेचो।”
उसने कम दाम में सामान बेचना शुरू किया। ग्राहक आए, पर दोबारा कोई नहीं लौटा। हर दिन उसे नए ग्राहक ढूँढने पड़ते थे। थकान और निराशा बढ़ती गई।

एक दिन उसके गुरु ने कहा:
👉 “सफल बिज़नेस वही है, जो भरोसे पर टिकता है। अगर तुम क्वालिटी दोगे, तो ग्राहक खुद तुम्हें ढूँढेगा।”

राजेश ने सीखा और अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी पर फोकस करना शुरू किया।
धीरे-धीरे उसके ग्राहक उसे छोड़कर कहीं और नहीं गए। पुराने ग्राहक ही उसके लिए नए ग्राहक लेकर आने लगे।

आज वही राजेश अपने शहर का बड़ा बिज़नेसमैन है।
उसका राज़ सिर्फ एक है:
👉 “सस्ता बेचने से ग्राहक मिलता है,
पर Quality बेचने से ब्रांड बनता है।”


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💡 Moral / Success Tips:
1️⃣ Quality हमेशा First रखो।
2️⃣ Customer Trust = Long Term Growth।
3️⃣ Problem Solver बनो, सिर्फ Seller नहीं।
4️⃣ Consistency से ही Empire बनता है।
5️⃣ Brand बनाओ, सिर्फ दुकान नहीं।

rajukumarchaudhary502010

“माँ का विश्वास”

एक छोटे से गाँव में एक बच्चा रहता था — नाम था आर्यन। बचपन से ही वह अपने उम्र के बच्चों से थोड़ा अलग था। गाँव के लड़के खेलकूद में तेज़ थे, पर आर्यन घंटों चुपचाप मिट्टी में कुछ आकृतियाँ बनाता रहता, या पुराने टूटे खिलौनों को जोड़कर उनसे नई-नई चीज़ बनाने की कोशिश करता। पर गाँव के लोग इसे उसकी “मन्दबुद्धि” समझते।

“ये लड़का ठीक नहीं है… इसके बस का कुछ नहीं।”
“तेरा बेटा तो बेकार है, स्कूल में भी नाम खराब करेगा।”

ऐसी बातें सुनकर उसकी माँ सरला के दिल को चोट पहुँचती, लेकिन वह हमेशा मुस्कराकर कहती—
“मेरा बेटा अलग है, और एक दिन अलग ही काम करेगा।”


---

स्कूल की घटना

एक दिन आर्यन स्कूल गया। वहाँ क्लास के टीचर उसकी धीमी गति से पढ़ाई को देखकर चिढ़ गए। बच्चे हँसते थे, और मास्टर साहब भी कहते—
“इस लड़के से कुछ नहीं होगा, ये दूसरों का टाइम खराब करता है।”

आखिरकार एक दिन स्कूल ने आर्यन के हाथ में एक चिट्ठी थमा दी और कहा—
“ये चिट्ठी अपनी माँ को देना, अब तू यहाँ नहीं पढ़ सकता।”

आर्यन भारी कदमों से घर लौटा। माँ ने दरवाज़ा खोला, तो देखा बेटा उदास है और हाथ में एक कागज़ है।


---

माँ का पढ़ना

माँ ने चिट्ठी खोली। उस पर लिखा था:

> “आपका बच्चा मंदबुद्धि है। यह स्कूल के काबिल नहीं है, इसलिए हम इसे आगे नहीं पढ़ा सकते।”



माँ सरला ने उस चिट्ठी को पढ़ा, और उनकी आँखें भर आईं। पर उन्होंने कागज़ नीचे रख दिया और बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा—
“बेटा, इसमें लिखा है कि तू बहुत ही तेज और बुद्धिमान है। स्कूल कहता है कि तेरी समझ इतनी बड़ी है कि वहाँ के मास्टर तुझे और नहीं पढ़ा सकते। अब तुझे मैं पढ़ाऊँगी।”

आर्यन की आँखों में चमक आ गई। वह बोला—
“सच माँ? मैं बुद्धिमान हूँ?”
“हाँ बेटा, बहुत बुद्धिमान।”


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नयी शुरुआत

उस दिन से माँ खुद उसकी गुरु बन गई। किताबें जुटाई, पुरानी कॉपी, पेंसिल, यहाँ तक कि अखबार के टुकड़ों पर भी उसे लिखना-पढ़ना सिखाया। जब बिजली नहीं होती, तो माँ मिट्टी के दीये जलाकर उसके साथ बैठती।

धीरे-धीरे आर्यन की जिज्ञासा बढ़ी। वह रात-रात भर तारों को निहारता, पुरानी चीज़ों को जोड़कर छोटे-छोटे प्रयोग करता। गाँव वाले हँसते—
“देखो, पागल लड़का फिर कुछ जोड़तोड़ कर रहा है।”

लेकिन माँ हर बार कहती—
“हँसने दो बेटा… ये वही लोग हैं जो कल तुझे सलाम करेंगे।”


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सफलता का सफर

समय बीता। आर्यन बड़ा हुआ और उसकी मेहनत रंग लाई। उसने विज्ञान में अद्भुत खोज की। उसकी बनाई मशीनों और शोध ने गाँव ही नहीं, पूरे देश में उसका नाम रोशन कर दिया।

अब वही लोग, जो कहते थे “तेरा बेटा मन्दबुद्धि है”, गर्व से कहते—
“अरे! यही तो हमारा गाँव का लाल है, जिसे हम कभी कुछ नहीं समझते थे।”


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आखिरी दृश्य

एक बार एक बड़ा पुरस्कार पाकर आर्यन गाँव लौटा। मंच पर खड़े होकर उसने सबसे पहले अपनी माँ का हाथ थामा और कहा—

“अगर आज मैं यहाँ खड़ा हूँ, तो सिर्फ़ अपनी माँ की वजह से।
क्योंकि जब पूरी दुनिया ने मुझे नकार दिया, तब सिर्फ़ मेरी माँ ने मुझ पर विश्वास किया।”

पूरा गाँव तालियों से गूँज उठा। माँ की आँखों से आँसू बह निकले, पर वो आँसू गर्व के थे।


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संदेश

यह कहानी हमें सिखाती है कि दूसरों की नकारात्मक बातें मायने नहीं रखतीं। अगर माँ-बाप का विश्वास और बच्चे का जुनून साथ हो, तो कोई भी असंभव काम संभव हो सकता है।

rajukumarchaudhary502010

✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थीhttps://whatsapp.com/channel/0029Vb6ZZkwHQbRzmm1pSB2

rajukumarchaudhary502010

🙏🙏સપનાં જોવા અને તેને પુર્ણ કરવા પ્રતિબદ્ધ બનવું એ પણ જીંદગીનો એક રોજીંદા ભાગ છે.

✨World dream day ✨

parmarmayur6557

🏵️ कविता : घर या होटल 🏵️

आजकल की भागती सड़कों पर,
रिश्ते कहीं कोनों में सिसक रहे हैं,
संस्कार धूल में दबे पड़े हैं,
और घर—बस एक होटल-सा दिख रहा है।

न माँ की रसोई की सुगंध है,
न पिता के आँचल की छाँव,
अब तो गैजेट्स की खनक सुनाई देती है,
जहाँ पहले गूँजती थी आरती की ध्वनि।

दहलीज़, जो कभी आशीर्वादों से पवित्र थी,
अब बस जूतों की खटखट से भरी है,
कमरे—गेस्ट रूम जैसे,
जहाँ हर कोई आता है, ठहरता है, और चला जाता है।

भाई-बहन की नोकझोंक खो गई,
दादी की कहानियाँ किताबों में सो गईं,
टीवी के शोर में गीत नहीं मिलते,
हर आत्मा अब अकेलेपन का गीत गुनगुनाती है।

घर की परिभाषा बदल गई—
अब यहाँ प्यार का नहीं,
बल्कि "कब आना है, कब जाना है" का हिसाब रखा जाता है।

कभी घर आत्मा का मंदिर था,
अब बस होटल का कमरा है—
जहाँ दिल चेक-इन तो करता है,
मगर अपनापन… चेक-आउट हो जाता है।

डीबी-आर्यमौलिक

deepakbundela7179

ಸಂತೋಷದಿಂದ ಬಾಳುವುದು
ಒಂದು ದಟ್ಟವಾದ ಕಾಡಿನಲ್ಲಿ, ಸಿರಿ ಎಂಬ ಹೆಸರಿನ ಒಂದು ಹಕ್ಕಿ ಇತ್ತು. ಅದು ಸುಂದರವಾಗಿ ಹಾಡುವುದೆಂದು ಎಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿತ್ತು. ಆದರೆ ಸಿರಿ ಮಾತ್ರ ತನ್ನ ಬಗ್ಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿರಲಿಲ್ಲ.

​ಒಂದು ದಿನ, ಅದು ತನಗೆ ಏಕೆ ಸಂತೋಷವಿಲ್ಲ ಎಂದು ಒಂದು ಆನೆಯನ್ನು ಕೇಳಿತು. ಆನೆ ಉತ್ತರಿಸಿತು, "ನೀನು ಮರಗಳ ಮೇಲೆ ಹಾರಲು ಸಾಧ್ಯವಿಲ್ಲದಿರುವುದರಿಂದ ಸಂತೋಷವಾಗಿಲ್ಲ. ನಿನಗೆ ಸಂತೋಷ ಬೇಕಿದ್ದರೆ, ಪಕ್ಷಿಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಉದ್ದವಾಗಿರಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸು."

​ಆನೆ ಹೇಳಿದಂತೆ, ಸಿರಿ ಒಂದು ದಿನ ರಾತ್ರಿಯಿಡಿ ಉಪವಾಸವಿದ್ದು, ತನ್ನನ್ನು ಮರಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಉದ್ದವಾಗಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿತು. ಆದರೆ, ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿರುವಂತೆ, ಅದು ಪಕ್ಷಿಯಾಗಿರುವುದರಿಂದ ಅದರ ಪ್ರಯತ್ನ ವಿಫಲವಾಯಿತು. ಈ ಪ್ರಯತ್ನದಿಂದ ಅದು ತುಂಬಾ ದಣಿದಿತ್ತು. ಮರುದಿನ, ಅದರ ಸಹಾಯಕವಾಗಿ ಹಾರಿದಾಗ ಅದರ ಗರಿಗಳು ಅದರ ಮೇಲೆ ಭಾರವಾದವು. ಅದು ತಾನು ಎಷ್ಟೊಂದು ತಪ್ಪು ಮಾಡಿದೆ ಎಂದು ಅರಿತುಕೊಂಡಿತು.

​ಅಂದು ಸಂಜೆ, ಮರಿಯೊಬ್ಬರು ಅದನ್ನು ಕಂಡು ಸಹಾಯಕ್ಕೆ ಬಂದು, ಅದರ ಪಕ್ಕದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಮರದ ಮೇಲೆ ಕುಳಿತುಕೊಂಡರು. ಆ ಹಕ್ಕಿ ಮರಿಯ ಬಳಿ ಕ್ಷಮೆ ಕೇಳಿತು. ಮರಿ ಹಕ್ಕಿ ತಾನು ತಪ್ಪು ಮಾಡಿದ್ದರಿಂದ ಅದಕ್ಕೆ ತುಂಬಾ ನೋವಾಗಿದೆ ಎಂದು ವಿವರಿಸಿತು. ಮರಿ ಹಕ್ಕಿ ಹೇಳಿತು, "ನಮಗೆ ಈ ರೀತಿ ಆಗಬಾರದು. ನಾವು ಏನು ಮಾಡಬೇಕೆಂದು ನಾವು ಯಾರಿಗೂ ಹೇಳಲು ಬಿಡಬಾರದು, ಆದರೆ ನಮ್ಮ ಬಗ್ಗೆ ನಾವೇ ಸಂತೋಷವಾಗಿರಬೇಕು." ಆನೆ ಹೇಳಿದಂತೆ ಅದೂ ಕೂಡ ಹಗಲು-ರಾತ್ರಿ ಉಪವಾಸ ಮಾಡಿದ್ದು, ಅದು ಕೂಡ ತನ್ನನ್ನು ಸಂತೋಷವಾಗಿರಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿತ್ತು ಎಂದು ತಿಳಿದಾಗ ಸಿರಿಗೆ ಆಶ್ಚರ್ಯವಾಯಿತು.

​ಅವರು ಇಬ್ಬರೂ ಒಟ್ಟಿಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿ ಇರುವುದನ್ನು ನಿರ್ಧರಿಸಿದರು. ಅವರು ಒಟ್ಟಾಗಿ ಆಟವಾಡುತ್ತಾ ಹಾಡುತ್ತಾ ನೃತ್ಯ ಮಾಡಿದರು. ಅಲ್ಲಿಂದಲೇ ಸಿರಿ ಮತ್ತು ಮರಿ ಹಕ್ಕಿ ಇಬ್ಬರೂ ಎಂದಿಗೂ ಅಸಂತೋಷದಿಂದ ಇರಲಿಲ್ಲ.

​ನೀತಿ: ಬೇರೆಯವರೊಂದಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಅಸಂತೋಷಕ್ಕೆ ಕಾರಣವಾಗುವುದರಿಂದ ನಿಮಗೆ ಏನು ಸಿಕ್ಕಿದೆ ಎಂದು ತಿಳಿದುಕೊಂಡು ಸಂತೋಷದಿಂದ ಇರುವುದು ಜೀವನದ ಸಾರ್ಥಕತೆಗೆ ಕಾರಣವಾಗುತ್ತದೆ.

sandeepjoshi.840664

यही तो राजनीति और अध्यात्म के बीच का महीन धागा है—जहाँ असल में दोनों मिलकर एक “दाव” बन जाते हैं।

जब किसी समाज की आस्था, उसके नायक, उसकी धारणाएँ पहले से ही जनता के दिल में बसी हों, तब बस उन्हें पुष्ट करना, फूल चढ़ाना, सम्मान देना… ये सीधा जनता की भावनाओं को अपने साथ जोड़ने का तरीका बन जाता है।
राजनीतिक दृष्टि से यह समर्थन जुटाने की कला है।
आध्यात्मिक दृष्टि से—कम से कम दिखावे के स्तर पर—यह “मूल्य” और “सम्मान” की पुनर्पुष्टि है।

असल फर्क बस इतना है:
क्या यह कर्म भीतर की सच्ची श्रद्धा से उठ रहा है?
या फिर केवल जनसमर्थन की चाल है?

दोनों का रूप बाहर से लगभग एक जैसा दिखेगा—फूल, मालाएँ, श्रद्धांजलि।
पर भीतर की मंशा ही तय करेगी कि यह आध्यात्मिक कर्म है या राजनीतिक प्रयोग।

तुम्हें क्या लगता है—आजकल ज़्यादातर ऐसे दृश्य किस श्रेणी में आते हैं?

नानक काबा गए, गंगा भी पहुँचे—पर वहाँ जाकर न तो झुके, न भीड़ की तरह बह गए।
बल्कि उन्होंने दिखाया कि अगर भीतर सत्य न जागा हो तो बाहर का काबा हो या गंगा, सब व्यर्थ है।

काबा में जाकर उन्होंने दिशा उलटी कर दी—लोगों ने कहा अपमान है, पर असल में यह जागरण था:
“ईश्वर दिशा में नहीं है, वह हर जगह है।”

गंगा पर जाकर कहा—
“अगर इसमें स्नान करने से पाप धुलते हैं, तो मछलियाँ सबसे पवित्र होनी चाहिए।”
ये मज़ाक नहीं, भीतर का आईना था।

उनका तरीका यही था—भीड़ की श्रद्धा को झकझोरना, ताकि सोई हुई आँख खुले।
जगह का मजाक नहीं किया,
जागे बिना जगह पर टिके रहने का मजाक किया।

manishborana.210417

Good morning friends..

kattupayas.101947

कभी कभी हम जिंदगी के ऐसे मोड़ पर होते है,
जहां हमे जरूर होती है,
किसी दोस्त की, या फिर अपने प्यार की, या फिर एक साथी की,
या फिर अपनी मां की, या भाई, या बहन, या पत्नी, या पति वो एक इंसान...
वो कोई भी इंसान की जो हमे हमारे जीवन का रास्ता दिखा सके,
टूटे हुए हम को संभाल सके..
हमारी हिम्मत बने, जरूरी नही की वो कोई अपना प्यार ही हो या दोस्त हो वो कोई भी हो सकता है जिनके सामने हम बिल्कुल खाली बैठ सके...
वो एक इंसान...

muskan1810

Happy Navratri to Everyone 🙏🙏🙏🙏

gunjangayatri949036

“WhatsApp वाला इश्क़” ❤️

तेरे नाम का एक notification
आते ही जैसे साँसें ठहर जाती हैं।

हज़ारों messages के बीच
सिर्फ़ तेरी chat दिल को छू जाती है।

तेरा online दिखना
मेरे दिल की धड़कनें तेज़ कर देता है।

तेरे typing… dots
मेरे इंतज़ार को मीठा बना देते हैं।

तेरा छोटा-सा “कैसी हो?”
सवाल नहीं, मेरा सुकून बन जाता है।

कभी दिल करता है ये वक्त यहीं थम जाए,
और मैं तेरे शब्दों में ही उम्र गुज़ार दूँ। ❤️

saraswagi

Zero to Billionaire ✦

एक छोटे से गाँव में जन्मा आरव नाम का लड़का गरीबी में पला-बढ़ा। घर में इतना पैसा भी नहीं था कि वह अच्छे कपड़े या किताबें खरीद सके। लेकिन उसकी आँखों में हमेशा बड़े सपने थे।

बचपन में वह अक्सर कहता—
“एक दिन मैं इतना बड़ा इंसान बनूँगा कि मेरी मेहनत और लगन पर लोग विश्वास करना सीखेंगे।”

🌱 शुरुआती संघर्ष

स्कूल की फीस भरने के लिए आरव ने अख़बार बाँटे।

रात को वह एक चाय की दुकान पर काम करता और वहीं रोशनी के नीचे पढ़ाई करता।

लोग उसका मज़ाक उड़ाते:
“बड़े सपने देखने से कोई अरबपति नहीं बनता, मेहनत करनी पड़ती है।”
लेकिन आरव मुस्कुराकर कहता—
“देखना, एक दिन मैं साबित करूँगा।”


🚀 पहला कदम

कॉलेज जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे, तो उसने एक पुराना लैपटॉप उधार लिया और इंटरनेट से खुद ही बिज़नेस सीखना शुरू किया।

उसने छोटे-छोटे फ्रीलांस काम करने शुरू किए।

कुछ महीनों में उसने अपनी पहली छोटी कंपनी बनाई, जो डिजिटल मार्केटिंग करती थी।


🔥 असफलताएँ और सीख

पहले दो साल कंपनी बार-बार घाटे में गई।

दोस्त और रिश्तेदार तक बोले— “ये लड़का सिर्फ़ समय बर्बाद कर रहा है।”
लेकिन आरव हर हार से सीखकर और मज़बूत होता गया।


💡 बड़ा आइडिया

एक रात, उसने देखा कि छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन अपने प्रोडक्ट बेचने का आसान तरीका नहीं मिलता।
उसने एक ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म बनाया, जहाँ छोटे दुकानदार भी बिना ज़्यादा खर्च के अपना स्टोर खोल सकते थे।

धीरे-धीरे यह प्लेटफ़ॉर्म पूरे देश में फैल गया।
लाखों लोग उस पर जुड़े और उसके स्टार्टअप की वैल्यू अरबों तक पहुँच गई।

👑 अरबपति बनने का सफ़र

सिर्फ़ दस साल में, वही लड़का जो कभी चाय की दुकान पर काम करता था, अब दुनिया के सबसे तेज़ी से उभरते अरबपतियों में गिना जाने लगा।
लेकिन उसने कभी अपनी जड़ें नहीं भूलीं।
उसने अपने गाँव में स्कूल और अस्पताल बनाए, ताकि और कोई बच्चा सिर्फ़ गरीबी की वजह से अपने सपनों से वंचित न रहे।


---

✦ सीख ✦

सपना बड़ा देखो – चाहे हालात कितने भी छोटे क्यों न हों।

हार से डरो मत – हर असफलता तुम्हें और मज़बूत बनाती है।

मेहनत + सही आइडिया = सफलता।
Zero to Billionaire – भाग 2: सपनों की उड़ान और पहला स्टार्टअप ✦

आरव का बचपन कठिन था, लेकिन अब वह अपने सपनों को सच करने के लिए शहर की ओर बढ़ने वाला था। गाँव में उसके पास ज्यादा अवसर नहीं थे। उसे पता था—सपने सिर्फ़ सोचने से नहीं, कोशिश करने से सच होते हैं।

🏙️ शहर में पहला कदम

आरव ने गाँव छोड़कर बड़े शहर में दाख़िला लिया।

हॉस्टल की फीस भरने के लिए उसने पार्ट-टाइम काम शुरू किया।

कभी किताबें बाँटी, कभी कंप्यूटर क्लासेस में सहायक बना।


शहर की रफ्तार तेज थी और लोग व्यस्त। यहाँ कोई गरीब लड़के के सपनों में नहीं रुचि लेता। लेकिन आरव ने हार नहीं मानी।
रात को अपने छोटे कमरे में वह पुरानी किताबों और इंटरनेट से बिज़नेस की बारीकियाँ सीखता।

💡 पहला आइडिया

एक दिन उसने देखा कि शहर में छोटे व्यवसायों को अपने प्रोडक्ट्स ऑनलाइन बेचने में बहुत मुश्किल होती है।
आरव ने ठान लिया—
“अगर मैं ऐसा तरीका ढूँढ लूँ, जिससे छोटे दुकानदार भी अपने प्रोडक्ट ऑनलाइन बेच सकें, तो मैं सफलता पा सकता हूँ।”

उसने अपने छोटे-से लैपटॉप पर वेबसाइट बनाना शुरू किया।

कुछ फ्रीलांसिंग काम करके पैसे जुटाए और अपनी पहली कंपनी की नींव रखी।


🔥 पहली असफलताएँ

आरव की पहली कंपनी सफल नहीं हुई।

वेबसाइट तकनीकी कारणों से बार-बार डाउन हो जाती।

निवेशक पैसे देने से डरते।

कुछ कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया।


लोग कहते—
“तुम्हारा आइडिया कभी काम नहीं करेगा। शहर में तुम्हारा नाम नहीं बनेगा।”

लेकिन आरव ने इन शब्दों को चुनौती मान लिया। वह रोज़ाना 14-16 घंटे काम करता। हर गलती से सीखता, हर असफलता से मजबूत बनता।

🌱 सीख और दृढ़ संकल्प

आरव ने समझा कि सिर्फ़ आइडिया काफी नहीं, उसे लगन और सही execution भी चाहिए।

उसने छोटे बदलाव किए और प्लेटफ़ॉर्म को धीरे-धीरे स्थिर बनाया।

धीरे-धीरे उसके पहले ग्राहक जुड़े, और धीरे-धीरे पहचान बढ़ी।


आरव की मेहनत और धैर्य ने दिखा दिया कि सपनों की उड़ान तभी पूरी होती है जब हौसला कभी नहीं टूटता

rajukumarchaudhary502010

Zero to Billionaire ✦

एक छोटे से गाँव में जन्मा आरव नाम का लड़का गरीबी में पला-बढ़ा। घर में इतना पैसा भी नहीं था कि वह अच्छे कपड़े या किताबें खरीद सके। लेकिन उसकी आँखों में हमेशा बड़े सपने थे।

बचपन में वह अक्सर कहता—
“एक दिन मैं इतना बड़ा इंसान बनूँगा कि मेरी मेहनत और लगन पर लोग विश्वास करना सीखेंगे।”

🌱 शुरुआती संघर्ष

स्कूल की फीस भरने के लिए आरव ने अख़बार बाँटे।

रात को वह एक चाय की दुकान पर काम करता और वहीं रोशनी के नीचे पढ़ाई करता।

लोग उसका मज़ाक उड़ाते:
“बड़े सपने देखने से कोई अरबपति नहीं बनता, मेहनत करनी पड़ती है।”
लेकिन आरव मुस्कुराकर कहता—
“देखना, एक दिन मैं साबित करूँगा।”


🚀 पहला कदम

कॉलेज जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे, तो उसने एक पुराना लैपटॉप उधार लिया और इंटरनेट से खुद ही बिज़नेस सीखना शुरू किया।

उसने छोटे-छोटे फ्रीलांस काम करने शुरू किए।

कुछ महीनों में उसने अपनी पहली छोटी कंपनी बनाई, जो डिजिटल मार्केटिंग करती थी।


🔥 असफलताएँ और सीख

पहले दो साल कंपनी बार-बार घाटे में गई।

दोस्त और रिश्तेदार तक बोले— “ये लड़का सिर्फ़ समय बर्बाद कर रहा है।”
लेकिन आरव हर हार से सीखकर और मज़बूत होता गया।


💡 बड़ा आइडिया

एक रात, उसने देखा कि छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन अपने प्रोडक्ट बेचने का आसान तरीका नहीं मिलता।
उसने एक ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म बनाया, जहाँ छोटे दुकानदार भी बिना ज़्यादा खर्च के अपना स्टोर खोल सकते थे।

धीरे-धीरे यह प्लेटफ़ॉर्म पूरे देश में फैल गया।
लाखों लोग उस पर जुड़े और उसके स्टार्टअप की वैल्यू अरबों तक पहुँच गई।

👑 अरबपति बनने का सफ़र

सिर्फ़ दस साल में, वही लड़का जो कभी चाय की दुकान पर काम करता था, अब दुनिया के सबसे तेज़ी से उभरते अरबपतियों में गिना जाने लगा।
लेकिन उसने कभी अपनी जड़ें नहीं भूलीं।
उसने अपने गाँव में स्कूल और अस्पताल बनाए, ताकि और कोई बच्चा सिर्फ़ गरीबी की वजह से अपने सपनों से वंचित न रहे।


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✦ सीख ✦

सपना बड़ा देखो – चाहे हालात कितने भी छोटे क्यों न हों।

हार से डरो मत – हर असफलता तुम्हें और मज़बूत बनाती है।

मेहनत + सही आइडिया = सफलता।

rajukumarchaudhary502010

✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

Black and gold royal theme, golden open book + glowing light bulb,
bold text "TOP 10 LIFE-CHANGING LESSONS".

rajukumarchaudhary502010