Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

যারা "মিশন ইন্ডিয়ানা"র প্রথম ১০টি পর্ব পড়েছেন তারা দয়া করে আমাকে ম্যাসেজ করুন।

deep86

new bl story

shivankshirathore736036

मुझे नही पता इश्क क्या सजा देगा
लोग कहते है थोड़ा तो मजा देगा

दिल की धड़कन बड़ेगी , बड़ेगी बेचेनिया
रातो को कमबख्त जगा देगा

यू तो इश्क पर कई किताबे पड़ी
बाकी तो वक्त ही समझा देगा

कभी खुशी देगा कभी गम देगा
साला आँखो दरिया बना देगा .

mashaallhakhan600196

શરદપૂનમની આજ અજવાળી
રાત છે
રાધાને કાનના પરિણયની
વાત છે
વિધાતાના લેખમાં વિરહની
ઘાત છે
પણ રાધા કાનના પ્રેમ આગળ
કાનો મ્હાત છે…
-કામિની

kamini6601

फूल खिलते हैं बिखर जाते हैं,
दिल मिलते हैं, बिछड़ जाते हैं...

mrsfaridadesar

मनुष्य का ध्येय क्या है? वास्तव में हिन्दुस्तान के मनुष्य परमात्मा बन सकते हैं। खुद का परमात्मापन प्राप्त करना, वह सबसे अंतिम ध्येय है। - दादा भगवान

अधिक जानकारी के लिए: https://dbf.adalaj.org/NRqWJDK8

#quote #quoteoftheday #spiritualquotes #spirituality #hindiquotes #dadabhagwanfoundation #DadaBhagwan

dadabhagwan1150

#उपवासाचे_पदार्थ

⭐राजगिरा पीठ रताळे वडे

⭐साहित्य
लाल रताळी दोन
(पांढरी पण वापरू शकता)
दोन वाट्या राजगिरा पीठ
अर्धी वाटी दाण्याचे कूट
साखर एक चमचा
वाटीभर ताक
बारीक मिरची चिरुन आणि मीठ चवीनुसार
जीरे चमचाभर
कोथींबीर

⭐कृती
लाल रताळी धुवून किसून घेतली
हा कीस कच्चाच घेतला
राजगिरा पीठ दाण्याचे कूट साखर बारीक मिरची जिरे चिरलेली कोथींबीर
हे सर्व मीठ व ताक घालुन एकत्र केले
वर थोडे गरम तेलाचे मोहन घालून
लागल्यास थोडे पाणी घालुन भिजवुन गोळा करून ठेवून
अर्धा तास झाकुन ठेवले

⭐अर्ध्या तासानंतर तेल कडकडीत तापवून आच मंद केली
व हाताला थोडे तेल लावुन तयार मिश्रणाचे वडे हातावर थापून मध्ये भोक पडले
मंद आचेवर खरपूस तळून घेतले

⭐बाहेरून कुरकुरीत व आतून छान खुसखुशीत होतात
सोबत ताक

तळलेले नको असल्यास याचे थालीपीठ सुद्धा उत्तम होते...

jayvrishaligmailcom

ज्यादा नहीं बस थोड़ा वक्त चाहिए
वक्त को समझने के लिए..
समझ को वक्त चाहिए पहचानने के लिए..
डॉ अनामिका
#हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_शब्द #हिंदी_पंक्ति

rsinha9090gmailcom

good morning ❣️

mrsfaridadesar

"जो मन को नियंत्रित नहीं करते, मन उन्हे नियंत्रित कर लेता है और उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।"

deepakbundela7179

✧ When Simplicity Was God ✧

There was a time when man had no science,
yet a thirst to know burned within.
He looked at the sky — and bowed,
touched the earth — and felt grateful.

No one had to teach him religion,
for life itself was the teacher.
The same fire cooked every meal,
and every mouth knew the same taste.

There were no rich, no poor —
only different bowls,
never a difference in the flavor of life.

Then science arrived.
Man began to gaze at the stars,
but lost sight of his own eyes.
Religion turned into a marketplace,
and peace became a product.

Meditation now comes in packages,
prayers are drowned in noise.
Lamps still burn in temples,
but darkness deepens within.

Everyone now has dreams,
yet the soul is missing somewhere.
Science promises the future,
religion — the afterlife,
and the present stands empty.

Now devotion lives on stage,
saints glow in the spotlight,
and man sits in the dark.

And the question rises —
is there anything of the soul left at all?

Yes — but it lives in solitude.
Only the one who can break his dreams
can still hear it whisper.

Now, God is no longer in temples,
but in one’s honesty.
The guru is no longer a word,
but the reflection within.

A day will come again —
when science and soul will unite,
when simplicity will once more be God,
and silence will speak again.


---

✍🏻 🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

bhutaji

“सहनशील पत्नी”

पत्नी ने तो पति की गलतियाँ भी सह लीं,
उसकी बेरुख़ी भी, उसके झूठ भी,
यहाँ तक कि उसके जीवन में आई दूसरी औरत को भी सह लिया।
वो जानती थी — अब उसका हक़ कोई और बाँट रहा है,
पर उसने झगड़ा नहीं किया, सवाल नहीं उठाया…
बस अपने हिस्से की चुप्पी ओढ़ ली।

पर जब कभी उसके दिल का लावा फूट पड़ा,
पति ने कहा — “अब तो तू क्लेश करने लगी है।”
जिसने वर्षों तक सहेजकर घर को बचाया,
उसी को दोषिनी बना दिया गया।
सच है, औरत जब तक सहती है, सब उसे आदर्श कहते हैं,
पर जब बोलती है — वही आदर्श एक पल में “क्लेश” बन जाता है।

archanalekhikha

✧ જ્યારે સાદગી ઈશ્વર હતી ✧

જ્યારે મનુષ્ય પાસે વિજ્ઞાન નહોતું,
પણ જાણવાની તરસ હતી,
તે આકાશને જોતો નમ્ર બની જતો,
ધરતીને સ્પર્શતો આભારી થઈ જતો।

તેને ધર્મ શીખવાડવો પડતો નહોતો,
કારણ કે જીવન પોતે પાઠશાળા હતું।
ચૂલો બધાનો એકસરખો સળગતો,
ભોજનનો સ્વાદ સૌના મોઢે સમાન હતો।

કોઈ ધનિક નહોતું, કોઈ ગરીબ નહોતું,
ફરક ફક્ત વાસણનો હતો,
જીવનના સ્વાદમાં ભેદ નહોતો।

જ્યારે વિજ્ઞાન આવ્યું,
મનુષ્યે તારાઓમાં નજર નાખી,
પણ પોતાની આંખોમાં ઝાંખી ગુમાવી।
ધર્મ બજાર થયો,
અને શાંતિ એક પ્રોડક્ટ બની ગઈ।

સાધના હવે પેકમાં મળે છે,
પ્રાર્થના હવે અવાજમાં ગુમ છે,
મંદિરમાં દિપક બળે છે,
પણ અંતરમાં અંધકાર વધુ છે।

હવે દરેક પાસે સ્વપ્ન છે,
પણ આત્મા ક્યાંક ખોવાઈ ગઈ છે।
વિજ્ઞાન ભવિષ્ય આપે છે,
ધર્મ પરલોક —
પણ વર્તમાન ખાલી છે।

હવે ભક્તિ મંચ પર છે,
સંતો લાઈટમાં છે,
અને માણસ અંધારામાં છે।

અને પ્રશ્ન ઉભો થાય છે —
શું આ બધામાં હજુ પણ
આત્માની ચીજ બચી છે?

હા, પણ હવે એ એકલતામાં છે।
જે પોતાના સ્વપ્ન તોડી શકે,
તે જ એને સાંભળી શકે।

હવે ધર્મ મંદિર નથી,
પણ મનુષ્યની ઈમાનદારી છે।
હવે ગુરુ શબ્દ નથી,
પણ પોતાના અંતરનું પ્રતિબિંબ છે।

એક દિવસ ફરી આવશે,
જ્યારે વિજ્ઞાન અને આત્મા એક થશે —
જ્યારે સાદગી ફરી ઈશ્વર બનશે,
અને મૌન ફરી ભાષા બનશે।


---

✍🏻 🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

bhutaji

जब ईश्वर, आत्मा, और विज्ञान एक ही धरातल पर आ जाएँ —
तो न किसी को विश्वास बेचने की ज़रूरत रहेगी,
न किसी को डर दिखाने की।

क्योंकि तब ईश्वर कोई सत्ता नहीं,
एक सिद्ध नियम होगा —
जैसे गुरुत्वाकर्षण,
पर भीतर की दिशा में।

आत्मा तब रहस्य नहीं रहेगी,
बल्कि अनुभव की स्वाभाविकता होगी —
हर सांस में उपस्थित, हर विचार में जागरूक।

और विज्ञान जब इस सत्य को छू लेगा,
तो प्रयोग और प्रार्थना एक ही बात हो जाएगी।
फिर कोई पाखंडी नहीं रह सकता —
क्योंकि झूठ केवल वहीं टिकता है
जहाँ मनुष्य भीतर और बाहर दो बोलियाँ बोलता है।

सहजता का यही अर्थ है —
जीवन एक दिशा में बह रहा हो,
बिना भय, बिना प्रदर्शन।
तब धर्म नहीं चाहिए,
और अधर्म का प्रश्न भी नहीं उठता।

अज्ञात अज्ञानी

bhutaji

एक धरती थी — सबकी,
अब हर टुकड़ा किसी भगवान का इलाका है।
हर भगवान के पीछे
एक भीड़ है,
हर भीड़ के पीछे
डर की कोई पुरानी कहानी।

कहते हैं — हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं,
पर असल में
अपने भ्रम की दीवारें रंग रहे हैं
खून से।

कोई “हम” कहता है, कोई “तुम”,
कोई “सत्य” कहता है, कोई “शत्रु”।
और इस खेल में
मनुष्य गुम है —
वह अब सिर्फ़ प्रजाति है,
जिसे दूसरे प्रजाति से डर लगता है।

शहीद अब सत्य के लिए नहीं मरता,
नाम के लिए मरता है।
देश अब सीमा नहीं,
एक चौखट है डर की।

यह कलियुग नहीं,
हमारे मन का आईना है —
जहाँ इंसान बनने की हिम्मत
सबसे कठिन साधना बन गई है।
अज्ञात अज्ञानी

bhutaji

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
आपका दिन मंगलमय हो

sonishakya18273gmail.com308865

Thanks to Matrubharti

kattupayas.101947

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है! संवेदना ज्ञान धारा

mamtatrivedi444291

Good morning friends have a great day

kattupayas.101947

तुमने मांगा हमने ला दिया
एक अहसान था जो चुका दिया

तुमसे नजर ना मिले अब शायद
इतना पराया हमे बना दिया

एक अहसास था तेरे होने का
नाजाने किसने भूला दिया

एक महक आयी तेरी ओर से
शायद तूने अतर बहा दिया

क्या नूर है तेरी हुस्न का
ये चांद को हरा दिया

किताबी थी खाली पन्नो की
तुमने ये क्या लिखवा दिया

हमतो बेहद समझदार थे
हमको ये कहा उलझा दिया

क्या करू तुम्हारा अब
हमको ये कहा पहुंचा दिया

कोई मजनू कहे कोई आवारा
तुमने हमको ये क्या बना दिया .

mashaallhakhan600196

“भारतीय वैश्य ग्लोबल फ़ाउंडेशन”, द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में जाने का मौक़ा मिला.Bhartiya Vaishya

piyushgoel6666

Goodnight friends

kattupayas.101947