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New bites

मेरे लिटिल किड्स...
मेरे लड्डू...
मेरे कान्हा...
मेरे लिटिल हार्ट...
मेरे बच्चे...
मेरे क्यूटी पाई...
तुम सिर्फ़ मेरा प्रेम नहीं हो...
तुम वो सुकून हो जहाँ मेरा दिल ठहर जाता है।
तुम वो भरोसा हो जिसे मैं हर दुआ में संभालकर रखती हूँ।
प्रेम का सातवां वचन शायद यही है कि— हालात बदल जाएँ, रास्ते मुश्किल हो जाएँ, फिर भी दिल में एक-दूसरे के लिए जगह वही रहे।
मेरे हार्ट बीट...
तुम मेरी आदत नहीं, मेरी मुस्कान की वजह हो।

parmarsantok136152

Good night my little heart ❤️

parmarsantok136152

अगर प्रेम सिर्फ़ चाहत होता, तो शायद शब्दों में खत्म हो जाता...
पर तुम मेरे लिए सिर्फ़ प्रेम नहीं हो।
तुम मेरी दुआ, मेरा सुकून, मेरा विश्वास और मेरी मुस्कान की वजह हो।
कुछ रिश्ते साबित नहीं किए जाते... बस दिल से निभाए जाते हैं।

parmarsantok136152

आसमान
मुझे पसंद है
खुले आसमान को देखना,
उसके बदलते रंगों को महसूस करना।
सुबह
पानी-सा साफ़,
निश्छल, ठहरा हुआ।
आधा गुज़रा दिन
चमकता नीला,
उम्मीदों की तरह उजला।
ढलती शाम
कभी केसरिया,
कभी सुनहरी उदासी में लिपटी।
और रात
जब चाँद उतरता है,
तो अँधेरी चाँदनी में
ख़ामोश रौशनी बिखर जाती है।
पर इन सब से ज़्यादा
मुझे पसंद है ये जानना
कि इतने रंग बदलने के बाद भी
आसमान
सदियों से
एक ही जगह ठहरा है।
न भागता है,
न थकता है,
बस रहता है…
सब कुछ सहते हुए।
प्राची तंवर…..

prachitanwar111

बड़ा होने की जल्दी थी...

बड़ा होने की बहुत जल्दी थी बचपन में,

लगता था...

बस एक बार बड़े हो जाएँ,

फिर ज़िंदगी अपनी होगी।

न कोई डाँटेगा,

न पढ़ाई का डर होगा,

न सुबह-सुबह स्कूल जाने की जल्दी होगी।

सोचते थे...

जेब में पैसे होंगे,

दोस्त होंगे,

घूमेंगे,

जो मन करेगा वो करेंगे।

लेकिन...

किसे पता था,

बड़ा होने का मतलब

सिर्फ़ उम्र का बढ़ना नहीं होता।


---

जब स्कूल में था,

तो लगता था कॉलेज की ज़िंदगी सबसे खूबसूरत होगी।

नई दुनिया होगी,

नए दोस्त होंगे,

और मेरे पास भी एक Ranger साइकिल होगी।

जिसे चलाकर मैं पूरे शहर में घूमूँगा।

लेकिन कॉलेज आया...

और साइकिल नहीं आई।

कुछ सपने रास्ते में ही रह गए।


---

फिर सोचा...

कॉलेज खत्म होगा,

तो नौकरी मिलेगी।

अपनी कमाई होगी।

माँ-बाप को खुश रखूँगा।

घर की हालत बदल दूँगा।

लेकिन...

डिग्री हाथ में आई,

और नौकरी नहीं आई।

सपने फिर थोड़े छोटे करने पड़े।


---

फिर घर से दूर जाना पड़ा।

उन लोगों से दूर,

जिनके साथ बैठकर खाना खाता था।

जिनके साथ हँसता था।

जिनसे लड़ता था।

जिन्हें छोड़ने का कभी सोचा भी नहीं था।


---

अब कमरा है,

चार दीवारें हैं,

और एक मोबाइल है।

जिसमें घर की तस्वीरें हैं।

और उन्हीं तस्वीरों को देखकर

कभी-कभी आँखें भर जाती हैं।


---

बचपन में लगता था

पैसे होंगे तो खुश रहेंगे।

आज पैसे कमाने निकल पड़े हैं,

पर खुशी कहीं पीछे छूट गई है।


---

अब समझ आता है,

पापा इतने चुप क्यों रहते थे।

माँ रात को देर तक जागती क्यों थी।

घर चलाना कितना मुश्किल होता है।

और ज़िम्मेदारियाँ

कितनी भारी होती हैं।


---

बचपन में

बीस रुपये खो जाएँ,

तो पूरी दुनिया खत्म लगती थी।

आज हजारों खर्च हो जाते हैं,

फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है।


---

पहले दोस्त बिछड़ते थे,

तो रो लेते थे।

आज अपने बिछड़ जाते हैं,

और रोने का भी वक़्त नहीं मिलता।


---

बचपन में

जल्दी बड़ा होना चाहते थे।

आज दिल करता है

कोई वापस उस स्कूल की घंटी बजा दे।

कोई फिर से होमवर्क दे दे।

कोई फिर से कह दे—

"बेटा, अभी तुम छोटे हो..."


---

क्योंकि अब समझ आया है,

बड़ा होना कोई उपलब्धि नहीं थी।

बड़ा होना तो

धीरे-धीरे अपने सपनों का छोटा होते जाना था।


---

कुछ सपने पूरे नहीं हुए।

कुछ लोग साथ नहीं रहे।

कुछ रिश्ते छूट गए।

कुछ इच्छाएँ अधूरी रह गईं।


---

लेकिन फिर भी...

हर सुबह उठकर

हम मुस्कुरा देते हैं।

क्योंकि हम लड़के हैं।

हमें बचपन से सिखाया गया है—

दर्द छुपाना,

ज़िम्मेदारियाँ उठाना,

और चलते रहना।


---

और शायद...

हर लड़के की कहानी कहीं न कहीं

यही होती है।

बचपन में बड़ा होने का सपना,

और बड़े होकर...

बस थोड़ा सा बचपन ढूँढते रह जाना। 🖤🥀

— आकाश गुप्ता ✍️
Insta || witha_kash

brokenboy190253

IN GUJARATMITRA NEWSPAPER..

niraliipatel.127808

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी
ख्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल
किताबों में मिले...!! 🍁🍂

narayanmahajan.307843

"एक तस्वीर का सहारा है
वही ग़म है, वही गुजारा है
ये ग़लतफ़हमी खा गई हमको
हमको लगता था, वो हमारा है ..!!

anisroshan324329

ડોક્ટરની ડાયરી..
ડૉ. શરદ ઠાકર..

ઘણા બધા પોતાના અને બીજા ડૉક્ટરના...
જીવનમાં બનેલા ઘટનાના અનુભવો
રજૂ કરતી ખૂબ જ સુંદર બુક છે...
જો કે ઘણી બુકો મે આ લેખકની વાચી છે.
એમ મને માણસો કરતા બુકો સાથે વધુ લગાવ છે...
સારા માણસો મને મળ્યા નહીં...
તો સારી બુકો સાથે મારી દોસ્તી છે..
મારે ધણી બધી વાર કોઈની જરૂર હોય ..ને...
ત્યારે કોઈ વ્યક્તિ કરતા બુક મારી નજીક હોય છે..
તે પણ ઘણા વર્ષોથી..
મને બુક સમજાવે છે..
ધણી બધી વાતો..☺️

chiragvora055249

🫵

shivrajbhokare342239

"Sirf tum aapne"

arnagvanshi051673

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dadabhagwan1150

तमाशा ख़त्म हुआ,
तो जेबें टटोलीं मैंने

किताब-ए-उम्र बड़े चाव से
खोलीं मैंने

दुकान-ए-वक़्त पे
इक सख़्त सौदा कर आया

जो असल था, वो बहा आया,
जो नक़ल था, ले आया

anisroshan324329

तुम्हारा ज़िक्र हो और मौसम ख़ामोश रहे,
इतनी बेवफ़ाई तो बादल भी नहीं करते।

anisroshan324329

अब तुम से मिलना नहीं है
तुम्हे भूलना है

anisroshan324329

कुछ जज़्बात लिखे हैं

जो कलम से हृदय तक जाएँगे

हम जमीन पे बैठकर आसमान लिख जाएँगे !!

उतर जाएगा नई नस्लो का बुखार जब हम अपनी मोहब्बत का क़िस्सा सुनाएँगे

कुछ दिल बताऊंगा जो पत्थर हैं कुछ पत्थर हैं जो धड़क जाएँगे

लड़ जाएँगे जमाने से उसके लिए

सुबह दूध पीने वाले, शाम को सिगरेट जलाएँगे

anisroshan324329

आज में अहमदाबाद आया हूं
कौन कौन है यहां से

मुझे ये बताओ मुझे घूमने जाना है
कौनसी जगह अच्छी है

और खाना कहा अच्छा मिलता हैं

anisroshan324329

उसकी तस्वीर दिल में किसी कील की तरह टंगी हुई हैं

उसे निकाल भी लिया जाए तो निशान रह जाएगा

इस निशान को रहने दो ना

कम-से-कम उस शख्स की याद तो दिलाएगा..!!

anisroshan324329

"प्रेम: पाना या तपना?"

मैं सोचती हूँ... प्रेम क्या है?
पा लेना?
या उसकी चाह में खुद को जला देना?

सूरज से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
रोशनी से, जो उसी की है...
या अँधेरे से,
जिसकी एक झलक पाने को
वो पूरा दिन आसमान में तपता है?

चाँद से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
अँधेरे से, जो उसका घर है...
या रोशनी से,
जिसे चुरा कर लाने को
वो पूरी रात दर्द में चमकता है?

नदी से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
अपनी लहर से, जो उसी का नाच है...
या समुंदर से,
जिसमें मिलने की आस में
वो हर रोज़ पत्थर से टकराती है,
रास्ता भटकती है,
पर रुकती नहीं?

शायद प्रेम पा लेना नहीं...
शायद प्रेम है
किसी एक झलक के लिए,
किसी एक मिलन के लिए,
उम्र भर तपते रहना,
चमकते रहना,
बहते रहना।

और अगर मिल भी जाए...
तो क्या सूरज अँधेरे में बसा रहता है?
क्या चाँद रोशनी को क़ैद कर लेता है?
क्या नदी समुंदर होकर बहना भूल जाती है?

नहीं।
प्रेम पाने का नाम नहीं।
प्रेम उस आग का नाम है
जो बुझती नहीं... मिल जाने पर भी।
प्राची तंवर ……

prachitanwar111

लसूणी पालक बटाटा काचऱ्या..

साधी सोपी आणि अत्यंत पौष्टिक...
एक छोटी कोवळ्या पालकाची गड्डी
बारीक कापलेला लसूण
मिरी पावडर
चवीनुसार मीठ
गरम मसाला पावडर
प्रथम बटाट्याचे पातळ काप करुन घ्यावेत
पॅन मधे तूप घालून
लालसर होस्तोवर परतून घ्यावे
वर मीठ आणि मिरपूड घालून प्लेट मधे काढावे
आता पालक पेंडी थोडे देठ ठेवून निवडावी
पॅन मधे तुप घालून त्यावर थोडे जिरे घालावे
चिरलेला लसूण घालून
खमंग होई पर्यन्त परतून घ्यावा
लगेच पालकाची पाने टाकावी
थोडे परतावे
झाकण ठेवण्याची गरज नाही
पाच मिनिटात पालक शिजतो
थोडे मीठ व गरम मसाला पावडर घालून प्लेट मध्ये काढावे
लोह व्हिटॅमिन आणि मिनरल
ही डिश जीवनसत्वांचा मोठाच खजिना 💗

jayvrishaligmailcom

*"बदलते वक़्त का चेहरा"*

जो कहता था, "वक़्त आए तो भी कभी न बदलूंगा मैं"
वक़्त के करवट लेते ही, सबसे पहले बदलते उसे देखा मैंने...

जो लम्हा भी जुदाई न सहता था कभी,
वही दूरी के बहाने ढूँढते देखा उसे मैंने...

उसे मालूम था, उसके बिना ख़ाक हो जाऊँगी मैं,
फिर भी मेरे जज़्बातों का सौदा करते देखा उसे मैंने...

मैं तो टूट कर बिखरी उसकी जुदाई में,
और महफ़िल में यारों के, जाम-ए-जश्न पीते देखा उसे मैंने...
प्राची तंवर ……

prachitanwar111

मैंने देखा तो वो मेरे ख़िलाफ़ खड़ा था,
फिर पता चला वो मेरी तरफ़ से लड़ के गया।

लगा कि उसने मुझे बीच राह छोड़ दिया,
वो मुझको मेरे ही पैरों पे खड़ा कर के गया।

मैंने सोचा था कि वो जीत कर खुश होगा बहुत,
वो मेरी हार पे चुपचाप रो के गया।

nihalsinghsingh.134307

उसनें अनजाने में मुझसे अपनें
प्यार का इज़हार किया था
मुझको रखकर पेशोपेश में
दिल किसी और को दिया था

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313