Quotes by Dhamak in Bitesapp read free

Dhamak

Dhamak Matrubharti Verified

@heenagopiyani.493689
(198.6k)

મારુ સોગ બહુ મોટું છે પણ છેલ્લો ભાગ છે
પાછતળનો તેનું થોડોક તમને અહીં પ્રસ્તુત છે

epost thumb

कहाँ खो गई?

तुझे ढूँढूँ मैं, पर तू मिले नहीं...
सारे घर में आगे-पीछे,
मैं ढूँढूँ तुझे यहाँ-कहीं...
पर तू तो... पर तू तो... कहाँ खो गई?
इतनी ज़्यादा तू... खुद में क्यों खो गई?
मैंने रोका था बहुत, पर तू तो रुकी नहीं...
(आई... आई... आई...)
ऐसे अचानक तू कैसे बदल गई?
जैसे कोई पराई हो, वैसी तू तो हो गई...
(आई... आई... आई...)
इतनी ज़्यादा तू... खुद में क्यों खो गई?
मोहब्बत की wo राह अब सूनी हो गई...
(आई... आई... आई...)
मैं यहीं रह गया और तू चली गई...
अल्फ़ाज़ खत्म हुए और बात पूरी हो गई...
(आई... आई... आई...)
भीगी आँखों से देखूँ, पर तू दिखती नहीं...
तू तो गई... तू तो गई...
आई... आई... आई...
जाने में...
कहाँ खो गई?

Read More

Shivratri special
song with my original lyrics

epost thumb

​आइने में जो अक्स है, वो सबसे जुदा है
मेरे जैसा बनाना, बस उस रब्ब की अदा है
जब कुदरत ने मुझे 'Unique' ही बनाया है
तो क्यों मैं किसी और का साया बनूँ?
अपनी हकीकत छोड़, क्यों पराया बनूँ?

I'm the only one, मेरे जैसा कोई नहीं
तो मैं किसी और जैसी क्यों बनूँ? (No way...)
मेरी रूह की नक़ल, कोई कर नहीं सकता
फिर मैं किसी और के रंग में क्यों ढलूँ?

नैन-नक्श उनके हसीन होंगे, माना मैंने
पर मेरा वजूद भी तो एक मुकम्मल ख्वाब है
दुनिया कहती है 'किसी और जैसा बनो'
पर मैं अपनी चमक से, खुद का आफताब बनूँ

Just me, myself, and I...
I’m an original...
Not a copy.
DHAMAK

Read More

व्योमकेश… व्योमकेश…
डमरू बोले नाम तेरा व्योमकेश…
व्योमकेश… व्योमकेश…
चंद्र-गंगा संग बसता व्योमकेश…

जटाओं में समाया आकाश, तारों का संग,
चंद्रमा झलके, नक्षत्रों का रंग।
गंगा बहती केशों से, शांति की धारा,
महाकाल का रूप, अनंत का किनारा।

व्योमकेश… व्योमकेश…
डमरू बोले नाम तेरा व्योमकेश…
व्योमकेश… व्योमकेश…
चंद्र-गंगा संग बसता व्योमकेश…

त्रिशूल थामे, तीसरी आंख चमके,
भूत-प्रेत भी झुकें, जब शक्ति दमके।
मौन में बसते, अनादि का स्वामी,
भक्तों के संग, माया का ज्ञानी।

जय बम बम बोले… जय व्योमकेश!
हर-हर महादेव…
व्योमकेश… व्योमकेश! 🔱
DHAMAK

Read More

FIR vahi subah Hai

epost thumb

फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...

इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)

मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)

तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...

फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK

Read More

मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास)

मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास
ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास
मैं और मेरा मोबाइल

जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए
रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए
घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है
सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है

कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ
हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ
मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया
मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया

ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं

Read More

स्वार्थ के इस मेले में अब, रिश्ते कैसे परखे जाएँ,
साथ निभाने वाले ही अब, राहों में भटकाएँ।

मीठी मुस्कान के पीछे यहाँ, बरसों पुराने बैर छुपे,
कौन है अपना, कौन है पराया, हर चेहरे में ज़हर भरे।

नहीं है जानता कोई यहाँ, कौन किसका साया है,
अपनी ही राह चलना बेहतर, उम्मीद रखना माया है।

नहीं जानता कोई यहाँ, किसका कौन सा रिश्ता है,
अपनी ही मंज़िल खुद बनानी, बाकी सब माया है।
DHAMAK

Read More