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Parmar Mayur

Parmar Mayur

@parmarmayur6557


आप एक नहीं अकेले हो तो,
आप की और आपके जीवन की,
कोई क़ीमत नहीं है।

वह बात बांग्लादेश से सीखने को मिलती हैं।

जब आपके पास असीमित सत्ता और ताकत है,
तो आपको कोई निती नियमों का डर रहेता नहीं है।

वह बात हमें अमेरिका जैसा देश सीखाता है,
बात समझने जैसी है।

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जो हाथ इतनी ठंड में भी,
कम्बल ओढ़ाते है।

जो कंप रहे हाथों से भी,
गरमागरम चाय बनाकर देते हैं।

बस वो हाथ जिस किसी के भी हो उन हृदय और हाथों की कदर करना,

सही में,

वह ईश्वर को की गई प्रार्थना के समान है।

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एक बड़े मकान पर एक रिक्शा चालक सवारी लेने आया था।

वह कब से मकान के बहार बैठा बैठा मकान से सवारी बहार आए उसका इंतजार करता था।

वह मकान बहुत बड़ा था,मकान के उपर एक तख्ती पे बड़े अक्षरों में लिखा था "पितृ कृपा"।

ड्राईवर देख ही रहा था, तब मकान से एक वृद्ध को एक बस्ते के साथ रखने एक लड़का आया।

वृद्ध को देखने पर लग रहा था वह बहुत दुःखी हें, उसकी आंखों के भीतर छुपे अश्रु बता रहे थे।

लड़का ओटो के पास आकर ड्राईवर को किराया देकर बोला इनको आनंद वृद्धाश्रम छोड़ देना।

ओटो वाला देखता रहा और कर भी क्या सकता था?

उसने उस वृद्ध को ओटो में बिठाया और वृद्धाश्रम की तरफ ओटो को ड्राइव किया।

वृद्ध जातें जातें उस घर पर बनी तख्ती देख रहा था।

ड्राईवर सब समझ गया था फिर भी मन में एक प्रश्न परेशान कर रहा था इतने बड़े मकान पर बड़े अक्षरों से पितृ क़पा लिखा था फिर भी वृद्ध का यह हाल?

वृद्ध आदमी बोला: बेटा वह घर मेरे पिताजी ने बनाया था।
बस मुझे वह तख्ती कुछ यादें स्मृतियों में वापस ला रही है।

मुझे आज इस बात का दर्द नहीं हैं कि में अपने घर से दूर जा रहा हूं।

मुझे दर्द इस बात का हो रहा है कि अब वह तख्ती वहां ज्यादा दिन ना रहे तो अच्छा है क्युकी उसका लड़का भी बड़ा हो रहा है।

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कुछ लम्हों को जी लेना चाहिए।
वक्त कहां वापस लौटता है?

तुम पर्वतों के बीच से निकल रहे
सूर्य को देख रहे हो,

यदि कोई मिल जाए साथ में चाय पीनेवाला तो?

फिर क्या???
यार साथ में चाय पी लेनी चाहिए।

सागर का शांत किनारा हो,
और उछलती लहरों का ही शोर हो।

फिर क्या???
कोई रेत पर बैठे बैठे बातें करता मिल जाए तो?

दोस्त दो बातें कर लेनी चाहिए,

अरे, सूर्यास्त को भी हंसते हुए देखा जा सकता है।

सही में कोई अपना मिल जाएं तो
पानी, पर्वत में छुप रहे भानु को देखा जा सकता है।

सही में कुछ लम्हों को महसूस करके ही जिंदगी क्या है?

सही मायने में समझा जा सकता है।

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जिनके हाथों में कलम है वो जब सत्ता की चापलूसी करने लगे तब इंसाफ की आशा कम रखनी चाहिए।

एक लेखक, पत्रकार या फ़िर कवि कभी सत्ता से डरता नहीं है।

वह अपनी कलम से समाज की सच्चाई को उजागर करता है।

जो सही है उसकी सराहना भी करता है।

सत्ता की जनता के प्रति जो नाकामियों है वह बतलाता है, उनकी टीका करता है।

एक बलात्कारी को आसानी से बेल मिल जाती है
निर्दोषों को इंसाफ दिलाने में मां-बाप की जान निकल जाती है।

किसीने सही में कहां है कि कानून वो अमीरों द्वारा बनायीं गई ऐसी जाल है।

जिसमें गरीब लोग फंसकर तड़पते रहे और अमीर लोग पैसों के बल पर उन पर राज करे।

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वो पंछी पिंजरें में कैद था,
कैद कहां किसीको अच्छी लगती है।

वह सुंदर था,
बस उसकी सुंदरता ही पीजरे में लेकर आयी है।

नहीं, नहीं।
पीजरे में कैद करनेवाले की 'माया' उसको 'कैद' में लायीं है।

सुंदर तो वह आकाश में उड़ता था तब भी ज्यादा था।

एकबार मुक्त करो बंधनों से,
फिर देखो बन्धन से मुक्ति में तीनों तरफ की खुशियां आती है।

आप,पंछी और सर्व शक्तिमान ईश्वर।

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चलो ना यारों कुछ जमाने से हटकर अलग-थलग करते हैं,

कोई दे दर्द दिल को भले हमारे, हम उसके सुख की प्रार्थना करते हैं।

- Parmar Mayur

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जिंदगी में एक बात समझने लायक है।

हमको हंसाते लोग,

हम हो हताश तब उत्साह जगाते लोग,

हमारे मन-मस्तिष्क में उमंग भरते लोग,

और

हमें हमेशा सच्चा मार्गदर्शन देनेवाले लोगों के साथ समय बिताना चाहिए।

तो फिर,

डॉक्टर,
वकील,
या फिर,

धर्म के पाखंडी लोगों से समय मांगना नहीं पड़ेगा।

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डिसम्बर जा रहा है।
कुछ लम्हों को कुछ यादों को साथ लेकर।

हा फिर भी हमें लगता नहीं है कि,
कुछ अच्छे लम्हों को, यादों को सिमट लेना चाहिए।

स्मृतियों में,

आ रहे नये साल को खुशियां से ज़ीने के लिए,
वो पल या यादें काम आएगी।

हा, मुझे तो लगता है जरुर आयेंगी।

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मैंने दीवार पर लटक रहे कैलेंडर को जैसे ही हटाया।

वो पुराना कैलेंडर हंसा,
और इतना ही कहा कि,

दोस्त जिंदगी का भी कुछ ऐसा ही है,
वक्त खत्म हो जाएगा फिर हमें हटना ही पड़ेगा।

हा किन्तु,

मेरी तरह एक- एक पन्ना तुटकर भी किसीको हररोज 'अच्छा और सच्चा वक्त' दिखलाकर जाना।

- Parmar Mayur

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