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New bites

“वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, जिम्मेदारी की पहचान होती है।” 🚔
वर्दी मेरी पहचान, इंशाफ मेरा मिशन,👮👮

मेरा भी वो दौर जरूर आयेगा ? जब ये सितारे मेरे कंधे पर चमकेगे ।

parmarsantok136152

💫शायरी 💫

पन्नों की शोर में छुपा है ज्ञान,
हर सवाल में छुपा है जीवन का इम्तहान।
*जो पढ़ता है, जो सोचता है, जो जीता है,
वही बनता है अपने देश का प्रहरी महान।

parmarsantok136152

My Tamil short story "veyil kaalam" will going to be published on matrubharti @4.30pm 23/3/26.please read and expecting your support and love.. goodnight

kattupayas.101947

✨ हौसलों की रौशनी ✨

अँधेरों में भी वो खुद को जलाती रही,
हर गिरावट से ऊँचाइयाँ बनाती रही,
ना हार में रोई, ना जीत में घमंड किया,
वो तो बस अपने सपनों को सच बनाती रही। 💫

parmarsantok136152

कोई आहट सी जगे रूह में,
बरस आए मेरे दो नैन…
सावन सा भी न हुआ दिल,
फिर भी बादल गरज उठे कहीं।
जो दस्तक भी दे, तो फर्क पड़े,
मेरे सवाल छुपे हैं खामोशी में…
प्यार की मंज़िल अब भी दूर,
और रास्ते सोए हैं बेहोशी में।
कहीं तो गुज़रता वक्त ठहरे,
नयनों में भरी ये बूंदें कहें—
थोड़ा सा हल्का कर दे दिल को,
जो मेरे चेहरे से चुपचाप बहें…
_Mohiniwrites

neelamshah6821

कविता का शीर्षक है 🌹 लुटेरे
https://youtube.com/shorts/SN0JSWxRWLI?si=v1KH9jg_wkdClzxJ
लुटेरों की नगरी में शोर हुआ
आवाज में बहुत पीड़ा के स्वर थे
पूरी कविता का वीडियो देखिए
यूट्यूब पर ममता गिरीश त्रिवेदी

mamtatrivedi444291

श्री रामायण नमः।।🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

प्रतिपल मैं यह रखता मंशा,
प्रतिपल मेरे मन में क्रोध।
मैं अनुयायी अपने मन का,
हृदय और मन में है संगत विरोध।
बिन मतलब के चलती जिह्वा,
पश्चाताप में करे अनुरोध।
हृदय कहे सब भूल जाने को,
पर प्रतिपल मांगे मन प्रतिशोध।

jeetthepoetofthepast

“प्रकृति की पुकार” 🌿

मैं प्रकृति हूँ, मुझमें पर टिकी है दुनिया सारी।
मेरे ही बच्चे मुझे देते कष्ट भारी,
विधाता से यही है आस,
कभी तो करवाए मेरे बच्चों को
उनकी गलती का एहसास।

मैं विनाश की ओर चली,
मानवता की बलि चढ़ी।
मानव सोच रहा—यह क्या हुआ?
मेरे ही हाथों मेरा विनाश निश्चित हुआ।

भयंकर गर्मी है—ना?
क्या सोच रहे हो?
सूर्य देवता नाराज़ हैं,
उनसे क्या पूछते हो?

चारों तरफ सड़क ही सड़क है,
पेड़ों का निशान कहीं नहीं।
इमारतों पर लगे ऐसे कूलर हैं,
क्या पेड़ों का स्थान कहीं?
जंगलों को काट रहे,
अपना स्वार्थ साध रहे।
जितनी तुम्हारी तादाद है,
अब उतने पेड़ भी बचे नहीं,
जमीन बन गई बंजर।

पेड़ों को तो बचाया नहीं,
जानवरों को ही छोड़ देते।
जगह-जगह पॉलिथीन डालकर,
क्यों उन्हें मार देते?

सोचो, क्या यह पॉलिथीन इतना ज़रूरी है?

मानव ने क्या खेल रचाया,
प्रदूषण हर ओर फैलाया।
नदियों में अब जहरीला पानी है,
फैक्ट्री की गैस प्राण-वायु पर भी भारी है।
बहते पानी को जैसे रोक दिया,
इतना कचरा उसमें झोंक दिया।
खुद भी नहाए, जानवरों को भी नहलाया,
अपने कपड़े भी धुलवाया।
जल की ऐसी हालत देखकर
जलचर भी घबराए, जलचर भी घबराए।

मोबाइल ने जन-जन को घेरा है,
और टावर से निकली तरंगों ने
पक्षियों को घेरा है।
जिंदा पक्षियों को लाश बना दिया,
इंसानों का तो दिमाग भी घुमा दिया।
मानव डरा हुआ है, सहमा है,
सोच रहा—मेरा क्या होना है l
अभी देर नहीं हुई है,
जागो प्यारे, जागो।
अब जल्दी तुम पेड़ लगाने भागो,
अब जल्दी तुम पेड़ लगाने भागो।
Created by: Sneha Gupta
Grade : 10th

dineshgupta823378

Radhe......!!!!

ishwarahir173912

*आम आदमी के कवि हैं गोलेन्द्र पटेल*

गोलेन्द्र पटेल वर्तमान समय के महत्त्वपूर्ण युवा कवि-लेखक हैं। उनकी कविताओं में पीड़ा प्रबोधन की लय और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। व्यवस्था, जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों गोलेन्द्र पटेल की कविताओं का परम लक्ष्य है। वे आम आदमी के साहित्यकार हैं। कालजयी रचनाकार के रूप में सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे निरंतर संघर्षरत हैं। उनकी रचनाएं सम्यक सांस्कृतिक रूप से दरिद्र हो रहे समाज के लिए चेतावनी हैं। गोलेन्द्र पटेल ने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज की समस्याओं, विशेषकर किसानों, गरीबों, दलितों , स्त्रियों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और निम्न वर्ग की दुर्दशा को उजागर कर रहे हैं। उनकी रचनाएं समाज के शोषित, दलित और मेहनतकश वर्ग की आवाज़ हैं। वे ऐसे युवा साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए समाज में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया है, कर रहे हैं। गोलेन्द्र पटेल की रचनाऍं समाज, राजनीति, संस्कृति और व्यवस्था पर एक क्रिटीक की तरह हैं, क्योंकि सच्चा कवि व्यवस्था का पोषक नहीं, आलोचक होता है। वह सहमतियों का गान नहीं लिखता, असहमतियों की साखी रचता है। इस अर्थ में असहमतियों की साखी रचने वाले कवि हैं गोलेन्द्र पटेल।

गोलेन्द्र पटेल अपनी कविताओं के माध्यम से उन तमाम शोषितों और वंचितों को आवाज़ देते हैं। उनकी कविताओं में आक्रामकता है, व्यवस्था का विरोध है। गोलेन्द्र पटेल अपनी रचनाओं में एक ऐसी काव्य भाषा की इजाद करते हैं, जो अंधी काव्य-भाषा की रुमानियत और अतिशय कल्पनाशीलता से मुक्त है। उनकी भाषा सहज और सरल है। गोलेन्द्र पटेल जी का व्यक्तित्व बेहद सरल और छल-कपट से दूर है। यही सहजता उनकी रचनाओं में झलकती है। जिसके बल पर वे जन-जन के मन में जगह बना रहे हैं। गाँव की असली संस्कृति गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में दिखती है। गोलेन्द्र जी अपनी रचनाओं से जनचेतना को जागृत कर रहे हैं। गोलेन्द्र जी की भाषा हिंदी कविता की बनी बनाई परंपरा से अलग है। वे कविता की दुनिया में भाषा का भ्रम तोड़ते हैं। वे जनता की यातना और दुःख से उभरी तेजस्वी भाषा में कविताएं करना पसंद करते हैं। गोलेन्द्र की कविताओं का विषय ज्यादातर राजनीति, राजनेता, जाति-धर्म के ठेकेदार रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि देश में व्याप्त ज्यादातर मानवजनित समस्याओं का कारण राजनीतिक और सामाजिक संकीर्णताएं हैं। उनकी लेखनी ने न केवल साहित्य को समृद्ध कर रहा है, बल्कि समाज को जागरूक करने का काम भी कर रहा है। गोलेन्द्र पटेल की रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी और उनकी रचनाधर्मिता अनमोल धरोहर के रूप में सदैव याद की जाएंगी एक न एक दिन।

गोलेन्द्र पटेल की रचना के केंद्र में सबसे अधिक शोषित-पीड़ित, स्त्री एवं दलित-वंचित हैं, क्योंकि उनकी रचनाएं मानव जीवन के सच को उजागर करती हैं। गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में समाज के प्रतिबिंब हैं। वे समाज के अंतर्मन को झकझोरेने वाले कवि हैं, वे समाज की नब्ज समझने वाले कवि हैं। उनकी संवेदना आम आदमी के साथ जुड़ी है। उनकी कविताओं में उनके गाँव जवार के लोग, गवईं बिम्ब, प्रतीक देखने को मिलता है। उनकी रचनाएं सामाजिक मूल्यों को दर्शाती रही हैं, उन्होंने समाज के हर वर्ग को अपने शब्दों में शामिल किया है और उनके हलफ़नामे को अपनी रचना के रूप में समाज के सामने रख रहे हैं। गोलेन्द्र पटेल की कविताओं में भारत का सच्चा समाज बोलता है। गोलेन्द्र समतामूलक समाज निर्माण के प्रबल समर्थक हैं। गोलेन्द्र की वैश्विक क्रांतिधर्मी चेतना में सार्वभौमिक सृजनात्मक दृष्टि है।

golendrapatel143194

मैं धैर्यवान धरित्री,,,,🌹🙏🌹

drbhattdamayntih1903

🙂💔

avinashgondukupe96025gmail.com5127

मेहनत का फल,,,

drbhattdamayntih1903

चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

My Tamil short story is now live on Matrubharti..

kattupayas.101947

💫उस चाँदनी रात के नीचे💫

वो चाँदनी रात थी,
पर ज़मीन पर अँधेरा था,
नन्ही उम्र की मासूम आँखों में
अब भी सपना सवेरा था।
वो गुड़िया, जिसने कभी डर को जाना न था,
आज दानवों की दुनिया में अकेली ठहरी,
पर हिम्मत उसकी ऐसी थी,
कि आँसू भी थम गए — जब उसने "ना" कहकर ज़माना गहरी।
उसका छोटा भाई —
जिसके हाथों में अभी खिलौने थे,
वो दीवार बना खड़ा रहा,
जैसे रक्षक कोई, टूटे हुए सपनों के कोने थे।
दर्द ने घेरा, ज़ुल्म ने रौंदा,
पर आत्मा नहीं टूटी उनकी,
उनकी खामोशी आज भी चीख बनकर
हर औरत की आँखों में बोलती।
अब वो नहीं हैं —
पर उस वीरान जगह पर जब हवा चलती है,
तो लगता है जैसे कोई कह रहा हो —
“हम हारे नहीं, बस कहानी अधूरी रह गई।”

parmarsantok136152

प्रियतमा को देखकर नशा चढ़े तो कौन सा आश्चर्य,
समंदर भी लड़खड़ा जाता है पूर्ण चंद्रमा को देखकर।🥳💞

narayanmahajan.307843

શુભ સવારનો સારો સંદેશ

harshadpatel194722

દવા બની જા,
સહારો બની જા,

એકલો હોય જે,
એનો સાથી બની જા,

નિરાશા ઘેરાય જેને,
એને આશા આપી જા,

રડતું હોય જે મન,
એને હસાવી તું જા,

અંધકારમાં જે ખોવાયો,
એને પ્રકાશ પાથરી જા,

થાકયું છે જેનું જીવન,
એનો આશરો બની જા.

મનોજ નાવડીયા

Happy poetry day..

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manojnavadiya7402

✔️💯

narendraparmar2303

प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः – एक झलक

gautamreena712gmail.com185620