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सही वक्त को जितना जल्दी हो पहचान ले मेरे दोस्त क्या पता जिस घड़ी का तू इन्तेजार कर रहा है, उसे कोई और पहने घूम रहा हो . -MASHAALLHA
कभी कभी तो ऐसा लगता है मानो मै किसी की कहानी का एक फालतू सा किरदार हूं, जिसके होने या ना होने से कहानी पर कोई असर नही पड़ेगा . -MASHAALLHA
मुक्कदर मे शायद वो शक्स है ही नही जिसको सजदो मे गिर कर मांगा है हमने . -MASHAALLHA
बस इस तरह से मुस्कुरा दे जरा फिर एक दफा इतरा दे जरा होगी कई जाने कितनी हसीं पर तुझसी कहा कोई अप्सरा . -MASHAALLHA
दिखा जो चांद तो सब्र आया मुझे मेरे महबूब का चेहरा नजर आया मुझे कितनी ही मुद्दत लगी उसे मनाने मे तब जाकर उसने सिने से लगया मुझे . -MASHAALLHA
गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई, ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी, लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की, फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई . -MASHAALLHA....
छिन लिया सब कुछ मेरा, और मुझसे दुआए मगवाने लगे, गरदीश मे है सितारे और मुझे अब नजर आने लगे, बेचेन है मन और उलझा हुआ है मेरा जहां ये किस तरह मुझको सताने लगे, मै क्या करु ऐ खुदा कि तू मान जाये, अब तो आंखो मे भी आंसू आने लगे . -MASHAALLHA...
कल भी कितना खुबसुरत होता है ना जिसके लिए हम आज का गला घोट देते, फिर जब वह कल आता है ना तो फिर हम आज को कौसते है . -MASHAALLHA
मिला नही मुझको जिसकी रही तलाश मर मर के जी रहे है बस चलने लगी है लाश, रोका है किसने मुझको यू चढ़ते उरोज से चन्द कदम बाकि थे फिर मंजिले थी पास, अब सोचते है कुछ मकसद है खो दिया काज का किला था सब गिर गये है ताश . -MASHAALLHA...
कुछ जंजीरे है जो कभी तुटती नही, बस उन जंजीरो की चाबी बदलती रहती है . (जिम्मेदारी) . -Mashaallha
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