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चाँद पर पहुँची… और हम? विदेश की महिलाएँ रॉकेट पकड़कर चाँद पर पहुँच गईं। और अपनी कुछ बहनें… अब भी मोहल्ले की बालकनी में खड़ी हैं, हाथ में दूरबीन नहीं – दूसरों की ज़िंदगी नापने का स्कैनर लेकर। “वो कितनी गोरी है…” “ये कितनी काली है…” “अरे! मैं तो उससे ज़्यादा सुंदर हूँ।” “मुझ पर तो लाखों मरते हैं।” “मैं खाना ऐसा बनाती हूँ कि गैस सिलेंडर भी इमोशनल हो जाए।” और उधर सामने वाली… “देखो कैसे चलती है।” “देखो कैसे कपड़े पहनती है।” “इसके चेहरे पर तो ऐंठन है, इसे ऐटिट्यूड कहते हैं।” मैंने कहा – “बहन, दुनिया मंगल और चाँद पर कॉलोनी बसाने की सोच रही है…” वो बोली – “अच्छा छोड़ो, पहले ये बताओ… उसकी साड़ी असली है या कॉपी?” विकास रॉकेट की स्पीड से भाग रहा है, और हम अब भी गोरी-काली, सुंदर-बदसूरत, रोटी-सब्ज़ी के स्टेशन पर उतरे खड़े हैं। इसलिए… वो चाँद तक पहुँच गईं, और हम… अब भी पड़ोस की छत तक ही सीमित हैं। 😂
सभी लड़कों के लिए एक जरूरी संदेश – सावधान रहें, समझदार बनें आज के समय में हर लड़की गलत नहीं होती, लेकिन यह भी सच्चाई है कि कुछ रिश्ते प्यार से नहीं, फायदे से शुरू होते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि जैसे ही किसी लड़के के पास – अच्छी नौकरी होती है, – सरकारी जॉब होती है, – या प्रॉपर्टी / पैसा होता है, कुछ लड़कियाँ जानबूझकर नज़दीकियाँ बढ़ाती हैं, मीठी बातें करती हैं, भरोसा जीतती हैं, और फिर परिवार के दबाव से शादी की स्थिति बना दी जाती है। कभी-कभी इसमें लड़की से ज्यादा उसके माता-पिता की योजना होती है – ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए, खर्च कम हो जाए और घर बैठी बेटी का सेटलमेंट हो जाए। इसलिए: • सिर्फ मीठी बातों पर भरोसा न करें • जल्दी इमोशनल न हों • परिवार से छुपाकर बड़े फैसले न लें • रिश्ते में समय लें, इंसान को परखें • और यह जरूर देखें कि सामने वाला आपको इंसान समझता है या मौका यह संदेश किसी लड़की को बदनाम करने के लिए नहीं है, बल्कि लड़कों को सतर्क और सुरक्षित रखने के लिए है। प्यार करें – लेकिन आंखें खुली रखकर।
अगर लेखक इमोशंस और भावनाएँ नहीं लिखते… अगर कवि अपने शब्दों में आग नहीं भरते… तो सच कह रही हूँ — आज जो समाज में थोड़ा-बहुत बदलाव दिख रहा है, वो बदलाव कभी नहीं आता। तब सोच नहीं बदलती, सिर्फ़ समय बदलता… और स्त्रियाँ आज भी उन्हीं पुरानी बेड़ियों में जी रही होतीं। जो स्त्रियाँ आवाज़ उठातीं भी, उनकी आवाज़ दबी रह जाती… चार दीवारों में घुट जाती, भीड़ में खो जाती। लेकिन लेखक आए… कवियों ने लिखा… कहानियों ने सवाल खड़े किए… टीवी, किताबें, मंच और आज की इंस्टा रील्स ने दुनिया को सोचने पर मजबूर किया। इन्हीं शब्दों ने स्त्री के संघर्ष को कमज़ोरी नहीं, ताक़त बनाया। इन्हीं कलमों ने चुप्पी को आवाज़ दी। इसलिए — सलाम उन लेखकों को ✍️ सलाम उन कवियों को ✨ जिन्होंने स्त्री समाज को सिर्फ़ सहना नहीं, - archana
मैंने प्रेम को पूजा समझा… उन्होंने खेल बना दिया, मैंने समर्पण को जीवन समझा… उन्होंने बोझ बना दिया, कसूर मेरा बस इतना था कि सच्चा रहा, और उन्होंने सच्चे दिल को भी गुनाह बना दिया… अगर चाहो तो मैं इसे - archana
मैंने दो तरह की स्त्रियाँ देखी हैं… एक तरफ वो… जो दुखी है, इज़्ज़त नहीं मिली, फिर भी संतुष्ट है, क्योंकि उसने दर्द के साथ जीना सीख लिया है… और दूसरी तरफ वो… जिसके पास सोना-चांदी, पैसा, शान-शौकत सब है, फिर भी मन खाली है, क्योंकि संतोष चीज़ों से नहीं, एहसासों से मिलता है…
मां, नए साल में एक ही फरियाद है… मुझे नहीं पता तू पत्थर की मूर्ति में है या मंदिरों में बसती है, मैं तो तुझे अपने दर्द, अपने आंसुओं और अपने टूटे हुए हौसलों में महसूस करती हूं। बस शिकायत इतनी है कि जो मुझे हर बार तोड़ना चाहते हैं, मेरा मज़ाक उड़ाते हैं, मेरी इज्ज़त को तमाशा बनाते हैं, मां… तू ही उन्हें जवाब दे। ऐसा जवाब दे कि उनके अहंकार को सच का तमाचा लगे… ताकि उन्हें समझ आए कि तेरी बेटी कमजोर नहीं है, टूटी नहीं है। वरना लोग फिर जीत जाएंगे, फिर हंसेंगे, फिर मुझे बदनाम करेंगे… मां, तू बस इतना कर… मेरी खामोशी की लड़ाई तू अपने न्याय से पूरी कर दे। यकीन बस तुझ पर है।🥹
मुझ पर हंसने वालों को, अब तुम ही जवाब देना मां… ताकि मैं गर्व से, सिर ऊँचा कर उठा कर चल सकूं। 🙏✨
नया साल उनको भी मुबारक, जो हमारे बारे में ज़हर उगलते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हर पल हमें गिरता हुआ देखना चाहते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमारी मुस्कान से जल उठते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो सामने खामोश और पीछे वार करते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमारी तरक्की देखना गँवारा नहीं करते। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमारे रिश्ते की मजबूती से डरते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हम दोनों पति-पत्नी को खुश पसंद नहीं करते हैं नया साल उनको भी मुबारक, जो हमारी राहों में काँटे बिछाते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमें दिमाग से पैदल समझते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो खुद रास्ता भटक कर हमें कमज़ोर कहते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमें बिल्कुल मूर्ख समझते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमें किसी काम का नहीं समझते हैं। नया साल उनको भी मुबारक, जो हमें कुछ नहीं… मगर खुद को सबकुछ समझते हैं। और… नया साल उनको भी मुबारक, क्योंकि हम हर साल टूटते नहीं — और ज्यादा चमकते हैं ✨
मुझसे हर वक़्त औरों की तुलना की गई, मेरी मेहनत, मेरी नीयत भी तौली गई। छोटी-छोटी बातों पर हंसी उड़ाई गई, मेरी सादगी, मेरी सच्चाई भी कहानी बना दी गई। रंग-रूप पर तंज, हर कदम पर ताना, मेरी ईमानदारी को भी बना दिया बहाना। कहा—“इतना अच्छा कोई होता नहीं, ये तो दिखावा है”, सचाई को ढोंग कहा, यही उनका नया नकाब है। पर सुन लो दुनिया— मैं न टूटी हूँ, न झूठ का हिस्सा बनी हूँ, मैं अपनी सच्चाई पर आज भी उतनी ही ठहरी हूँ। जो सच्चे होते हैं, वही ज्यादा चोट खाते हैं, पर वही इतिहास में खुद को सच्चा साबित कर जाते हैं। कल जो हंसे थे, एक दिन शर्माएंगे, मेरी सच्चाई को समझकर सिर झुकाएंगे। मैं वही रहूँगी—सीधी, सच्ची, साफ़, और यही मेरी सबसे बड़ी ताकत का इख़्तियार। ✨
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