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archana

archana

@archanalekhikha
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“कुछ लोग पूछते हैं—
‘अरे, तुम्हारी तो बहुत इज़्ज़त थी…
ये क्या हो गया तुम्हारे साथ…?’
फिर वही लोग,
मेरी कहानी पर हँसते हैं,
मेरे जख्मों पर सवाल नहीं…
मज़ाक करते हैं… 💔
मैं जवाब नहीं देती…
क्योंकि मुझे पता है,
उन्हें सच नहीं—
बस तमाशा चाहिए…
हाँ, मैं अकेली हूँ…
और वो सब एक झुंड हैं…
शायद इसलिए उन्हें लगता है कि मैं हार रही हूँ…
पर सच ये है—
भीड़ हमेशा शोर करती है,
और सच्चाई… खामोशी में भी जीत जाती है… ✨🖤
— मैं हार नहीं रही,
बस सही समय का इंतज़ार कर रही हूँ…
❤️ जो समझते हैं, उन्हें शब्दों की जरूरत नहीं…

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कुछ लड़कियाँ कहती हैं—
“हम पर तो हजार लड़के मरते हैं…”

सच बताऊँ…?
मरते नहीं हैं,
तुम उन्हें जगह देती हो।

कोई भी बिना वजह पीछे नहीं पड़ता,
जब तक तुम खुद उसे इशारा न दो,
जब तक तुम अपनी नज़रों से उसे हक़ न दे दो।

जो लड़की अपनी नज़रें झुका कर,
अपनी हद में रहती है—
उस पर कोई उंगली उठाने की हिम्मत नहीं करता।

ये “हम पर मरते हैं” वाला घमंड नहीं,
ये बस तुम्हारी दी हुई इजाज़त होती है।

इज़्ज़त भी हम खुद बनाते हैं,
और गिराते भी हम खुद ही हैं… 💯

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आज किसी ने मेरे बच्चों की तुलना करते हुए कहा—
“तुम्हारे बच्चे इतने खूबसूरत नहीं हैं… बस ठीक-ठाक हैं।”
मैं मुस्कुरा दी…
क्योंकि मुझे पता है,
रूप-रंग वक्त के साथ बदल जाता है,
पर संस्कार और दिल की खूबसूरती उम्र भर साथ रहती है।
मैंने शांति से कहा—
“मेरे बच्चों का चेहरा नहीं,
उनका दिल अच्छा होना चाहिए…
उनके संस्कार बड़े होने चाहिए।”
वो हँसते हुए बोली—
“इससे कुछ नहीं होता… बस खुद को दिलासा देती रहो।”
उसकी बात में ताना था,
और मेरे जवाब में सुकून।
मैंने बस इतना कहा—
“अगर दुनिया में सच में ऐसे लोग हैं
जो चेहरे नहीं, सीरत देखते हैं…
तो सोचो, वो इंसान कितना बड़ा होगा।”
बस…
मेरे इतना कहते ही
उसकी आवाज़ खुद ही धीमी पड़ गई।
क्योंकि
सच्चाई हमेशा चुप करा देती है,
और संस्कार… हर खूबसूरती से बड़े होते हैं। ✨

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मैं तो उनकी भी इज़्ज़त करती हूँ,
जो मेरी इज़्ज़त करना नहीं जानते…
क्योंकि मेरी परवरिश उनकी सोच से बड़ी है।

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“दिल की अच्छाई बाद में देखी जाती है…
पहले लोग चेहरा और हैसियत ही तौलते हैं…” 💔✨
- archana

“फूलों के साथ रहकर भी……
अपनी फितरत नहीं बदलते…
उनका काम ही है—
चुभना… और दर्द देना…”

“जब टेंशन में पत्नी बन गई तांत्रिक… और पति निकले CID 🤣🔥”

एक समय ऐसा आया…
घर में टेंशन ही टेंशन 😤
लोग मुझे ही गलत साबित करने में लगे हुए…
मैं इतनी परेशान कि दिमाग बोला —
“मैं जा रहा हूँ छुट्टी पर” 🧠✈️

तभी किसी ज्ञानी आत्मा ने एंट्री मारी —
👉 “पति-पत्नी की फोटो कांच की सीसी में रख दो… प्यार बढ़ेगा ❤️”

बस… मेरी अक्ल ने भी उसी टाइम छुट्टी ले रखी थी 😌
मैंने सोचा — “चलो यही सही!”

फिर क्या…
मैंने पूरा सीक्रेट ऑपरेशन चालू किया 🤫
फोटो ली, सीसी में डाली, ढक्कन बंद…
और अलमारी के ऐसे कोने में छुपाई…
जहाँ आम इंसान तो क्या… खुद भगवान भी न ढूंढ पाए 😎

लेकिन…
मैं भूल गई थी कि मेरा पति कोई आम इंसान नहीं है…
👉 वो “CID स्पेशल एडिशन” हैं 🔍🤣

घर में एक पिन भी गुम हो जाए…
तो 5 मिनट में बरामद कर देते हैं 😭

और वही हुआ…
जनाब ने अलमारी का पोस्टमार्टम कर डाला 🕵️‍♂️
और निकाल ली वो “सीक्रेट सीसी” 😳

फिर शुरू हुआ इंटरोगेशन —
“ये क्या है?”
“इसमें क्या बंद किया है?”
“कौन सा नया नाटक चल रहा है?” 😡

मैं अंदर से — डर 💀 + हंसी 🤭 + पछतावा 😭
सब एक साथ महसूस कर रही थी…

पहले तो मैंने गोल-गोल जवाब दिए…
सोचा शायद बच जाऊं 😅
लेकिन सामने वाला भी CID निकला भाई 😭

आखिरकार… मैंने हिम्मत जुटाई 😤
और बोल ही दिया —

“देखो… फोटो भी तो आपकी ही रखी है ❤️
किसी और की भी रख सकती थी… पर नहीं रखी 😏
👉 क्योंकि मैं आपसे प्यार करती हूँ… इसलिए आपको ही कैद किया है 🤣”

बस फिर क्या…
उनका गुस्सा — 📉
और मेरा आत्मविश्वास — 📈🤣

वो बोले —
“इतनी मूर्खता! ये सब करने की जरूरत क्या है?” 🤦‍♂️

और मैं मन ही मन —
👉 “प्यार बढ़ाने का शॉर्टकट भी फेल हो गया 😭😂”

वैसे मैं इन सब चीजों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करती… 😌
लेकिन कहते हैं ना… जब इंसान परेशानी में होता है,
तो कभी-कभी दिमाग नहीं… दिल फैसले ले लेता है 💔😅

और उस वक्त…
मैंने भी वही छोटी-सी मूर्खता कर दी 🤭

अब सोचती हूँ…
👉 ऑनलाइन नुस्खों से नहीं,
सीधी बात और समझदारी से ही रिश्ते संभलते हैं ❤️

बाकी…
थोड़ी-बहुत पागलपन वाली हरकतें ही
ज़िंदगी को यादगार बना देती हैं 😂✨

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उस वक्त… मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था।
जब मेरा शरीर दिन-ब-दिन कमजोर हो रहा था…
वजन गिरता जा रहा था…
हड्डियाँ दिखने लगी थीं…
तब भी… मैं मुस्कुराती रही।
हँसती रही…
ताकि मेरे बच्चों को महसूस न हो कि उनकी माँ अंदर से कितनी टूट रही है।
घर संभालना…
बच्चों को संभालना…
और ऊपर से ताने सुनना…
"नाटक कर रही है…"
"कुछ नहीं हुआ इसे…"
यहाँ तक कि… मेरी अपनी सास ने भी कभी समझने की कोशिश नहीं की।
बस एक ही शब्द—
"नाटक"
दिल तब टूटता है…
जब दर्द शरीर में नहीं…
रिश्तों में होने लगे।
मैं सोचती थी…
आखिर कोई इंसान ऐसा नाटक क्यों करेगा…
जिसमें उसका शरीर ही जवाब दे रहा हो?
सबसे ज्यादा चुभी वो बात…
जो मैंने अपने ही कानों से सुनी—
"मर भी जाएगी… तो क्या फर्क पड़ेगा…"
उस दिन समझ आ गया…
सच में… यहाँ कोई किसी का नहीं होता।
मेरा बीपी इतना बढ़ जाता था कि
200… 220… कभी 240 तक पहुँच जाता था…
सोचो उस हालत में भी मैं
घर, बच्चे… सब संभाल रही थी।
मैं पिछले 5–6 सालों से बीमार थी…
शायद इसलिए…
उन्हें मैं एक बोझ लगने लगी थी।
लेकिन फिर…
शायद किस्मत मुझे यहाँ ले आई—
लिखने के लिए।
मैंने लिखना शुरू किया…
और धीरे-धीरे… मेरा मन शांत होने लगा।
अगर मैं यहाँ नहीं आती…
तो शायद आज मैं टूटकर बिखर चुकी होती।
शायद… जी भी रही होती या नहीं…
ताने ऐसे मिलते थे…
जैसे मैं कोई इंसान नहीं…
एक बोझ हूँ।
लेकिन आज…
मैं खड़ी हूँ।
टूटी नहीं हूँ

"मैं नाटक नहीं कर रही थी…
मैं हर दिन खुद को बचा रही थी।"

"बीमार शरीर से ज्यादा…
लोगों की सोच ने मुझे तोड़ा था।"

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पता है… मैं जब भी किसी की पोस्ट देखती हूं ना… ❤️
तो बस ऐसे ही लाइक नहीं करती…
मैं ये सोचकर लाइक करती हूं कि…
पता नहीं वो इंसान किस हालात में होगा…
शायद उसे मेरी एक लाइक से थोड़ी खुशी मिल जाए… ✨
क्योंकि सच तो ये है…
मेरे पास पैसे नहीं हैं…
कि मैं किसी की बड़ी मदद कर सकूं… 💔
पर दिल से मदद तो कर सकती हूं ना…
इसलिए मैं हर पोस्ट को दिल से लाइक करती हूं…
और यही सोच लेती हूं…
कि इससे बड़ा दान मेरे लिए क्या हो सकता है… ❤️
हां… ताने भी मिलते हैं…
“खुद फ्री का खाती है…” 😔
पर कोई नहीं…
जब ऊपर वाला मुझे काबिल बनाएगा…
तब शायद मैं सच में किसी की बड़ी मदद कर पाऊंगी…
अभी के लिए…
मेरी हर लाइक… मेरी तरफ से एक छोटी सी दुआ है… ✨

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**“फिलहाल मुझे भी किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं मिली है…
पर मैं रुकी नहीं हूँ… मैं कोशिश कर रही हूँ…
शायद अभी मैं सिर्फ लिख रही हूँ…
शायद अभी कुछ बड़ा नहीं हो रहा…
पर मेरे अंदर एक उम्मीद है…
कि एक दिन यही कोशिश रंग लाएगी…
बस एक दुआ है—
मुझे उन लोगों के सामने कभी शर्मिंदा न होना पड़े…
जो आज मेरा मजाक बना रहे हैं… ❤️✨”**

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