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New bites

कुछ सवालों के जवाब हमारे भीतर ही छुपे होते हैं।
पढ़िए एक लड़की की कहानी "मैं कौन हूँ?"
और कुछ सवाल अपने आप से भी पूछना की मैं कौन हूँ?
https://www.matrubharti.com/book/19980429/main-kon-hu

nehakariyaal4845

मैं हिम्मत जुटा रहा हूं।।

ritiksingh733477

शायद इसलिए बनी थी नारी के लिए चारदीवारी
क्योंकि मालूम था बाहर बैठे हैं हवस के पुजारी।

हवस का शिकार बनती हैं जब कोई नारी
हालत सुनकर उसकी आ जाता हैं आंखों में पानी।
उसकी अस्मत को लूट कर, जिस्म को नोच कर ,
सड़क किनारे, नदी नालों में, पुल के नीचे
फेंकी गई बिना कपड़ो की लाश को देख कर ,
डरने लगी है आज हर नारी कल कहीं
आ ना जाए उसकी या उसकी बेटी की बारी।

शायद इसलिए होती थी पुराने जमाने में चारदीवारिया ,
जिनमें महफूज रहती थी मां बहन बीवी बेटियां।

bita

#Motivation # kuch gehri baat h isme 🙂

sunitasunita949243

थक गई है रो कर आँखें मेरी
अब पलके उम्र भर का सुकून लेकर
हमेशा के लिए सोना चाहता है,,,,,

बहुत इल्जाम लगे मुझ पर
जैसी थी नहीं मैं वैसी बताया गया
क्या करूं अब खुद को संभाल कर ?
खुद को बिखरने से भी न रोका गया ,,,,,,

_Manshi K

manshik094934

Punjabi.....!

gautamsuthar129584

🌌 ફકિર અને મોજનું રહસ્ય 🌌



એક માનવી શાંતિની શોધમાં એક ફકિર પાસે આવે છે. એ પ્રાર્થના કરે છે —

"હે પ્રભુ, મને આવતા જન્મમાં મોજ આપજો."



ફકિર હળવી સ્મિત સાથે કહે છે —

"મોજ તો આ જ જન્મમાં છે, બીજા જન્મની શું રાહ જોશો?

જો આ ક્ષણે નદી વહે છે, મારી ઝૂંપડી પાસે પ્રાણી–પક્ષીઓ છે,

અને હું તો આ પળમાં જ મોજમાં છું.

મોજ માટે ફકિર બનવું પડે, દુનિયાનું મોહ છોડી દેવું પડે."

nensivithalani.210365

Goodnight friends

kattupayas.101947

लगा लो बंदिशें फिर से हम पर
दोहरा दो वही रिवाज पुरानी
दे दो सौगात में हमें फिर से नई बता कर
घूंघट, पर्दा और चार दिवारी
लेट जाने दो जलती चिता पर, हो जाने तो सती हमें
ताकि कोई कर न सके अपनी मनमानी,,,,,,,

नर्क से अच्छा , मार दो मां के गर्भ में हमें
कोई जिल्लत न सहना पड़े इस जमाने की
रूह कांप उठती है हमारी खुद को पाकर सुनसान सड़कों पर
हर रोज नई सुर्खियां बटोर रही है
एक मासूम लड़की की इज्जत की कहानी ,,,,,,,,

बलात्कार शब्द दिल झकझोर देता है
आंखों में आ जाती है डर की निशानी
कल उन दरिंदों का शिकार मै तो नहीं
रहने दो बस अब रहने दो महफूज हमें यहां
लगा लो बंदिशें फिर से हम पर
दोहरा दो वही रिवाज पुरानी ,,,,,,,,,


_Manshi K

manshik094934

आपको पता है कि एक तरफा प्यार कैसा होता है बड़ा दर्द होता है एक तरफा प्यार में.
जब आप अपने प्यार को किसी और के साथ देखते हो ना सच बताऊं तो आंखें नहीं दिल रोता है🦋🦋🦋🖤🖤 सच बताऊं तो आज मैंने महसूस किया

gulaboo22

Happy marriages

kattupayas.101947

Just when we were together

kattupayas.101947

Marriage quotes

kattupayas.101947

Good evening friends

kattupayas.101947

Living a life

gunjangayatri949036

Farsana EP: A Pillar of Compassion and Excellence in Healthcare

Farsana EP, the esteemed spouse of Niyas KN, stands as a celebrated figure in Saudi Arabia’s healthcare landscape. As the Head Nurse at Dallah Hospital, she has not only risen through the ranks with unwavering dedication but has also become a symbol of grace, resilience, and leadership in a demanding profession.

🏥 Professional Achievements

• Leadership in Nursing: Farsana oversees critical care operations, mentoring junior nurses and ensuring the highest standards of patient care. Her leadership fosters a culture of empathy and precision.
• Clinical Expertise: With years of hands-on experience, she has mastered complex procedures and emergency protocols, often being the go-to expert in high-pressure situations.
• Recognition & Awards: Her excellence has been acknowledged through internal hospital honors and commendations from both peers and patients, reflecting her impact beyond routine duties.
• Cross-Cultural Bridge: As an expatriate professional, Farsana has gracefully navigated cultural dynamics, becoming a trusted figure among diverse patient communities and staff.


💖 Humanitarian Impact

• Patient Advocacy: Known for her gentle demeanor and fierce advocacy, Farsana ensures that every patient—regardless of background—receives dignified and personalized care.
• Community Outreach: She has participated in health awareness drives and wellness initiatives, extending her influence beyond hospital walls.
• Mentorship & Empowerment: Farsana actively supports young nurses, especially women from South Asia, encouraging them to pursue excellence and leadership in healthcare.


🌿 Personal Legacy

• Balancing Roles: Farsana’s journey is a testament to balancing professional rigor with personal devotion. Her partnership with Niyas KN reflects mutual respect and shared values rooted in service and inspiration.
• Cultural Ambassador: She embodies the spirit of South Indian resilience and warmth, bringing cultural authenticity to her workplace and community.

niyaskn

वो प्यार… जो सीमाओं से परे था।
मीरा, गाँव की सबसे खूबसूरत और बिंदास लड़की। आरव, जिसका दिल पहली नज़र में ही मीरा पर आ गया।
लेकिन गाँव की तंग गलियों और पक्की हवेलियों के पीछे छिपे हैं राज़, दुश्मनियाँ और बंदूकों की परछाइयाँ।

जब मीरा और आरव का इश्क़ खुलेआम होने लगता है, तो उनके खिलाफ खड़ी हो जाती है पूरी दुनिया।
क्या उनका प्यार इन बंदूकों और साज़िशों के पार ज़िंदा रह पाएगा?
या फिर ये दास्तान अधूरी रह जाएगी...?

kahanikaar.abhishek.

સારસ પંખી

(બે પ્રેમી પંખી જ્યારે પ્રેમમાં હોય
એકબીજા સાથે વાત ન કરી શકતા હોય)

નર)
"આપણે બે સારસ પંખી જાણે કે એક જ દરવાજાના બે ભાગ છીએ. હું તને મળવા માટે પાંખ ખોલું છું, ત્યારે તું દૂર થઈ જાય છે. તું મારી પાસે આવે છે, ત્યારે હું દૂર જતો રહું છું. આપણે બન્ને એકબીજા સાથે વાત કરવા ઈચ્છીએ છીએ, પણ ખબર નહીં કેમ, આપણા શબ્દો એકબીજા સુધી પહોંચી જ નથી શકતા. આપણે એકબીજાથી દૂર ભાગીએ છીએ."
​(માદા)
"ગઈ રાત્રે સપનામાં મેં તને ફરી જોયો. હું દુઃખી હતી, જ્યારે તું મારી સાથે વાત કરતો હતો. મેં મારા કાન બંધ નહોતા કર્યા, પણ હું કંઈ બોલી ના શકી. મનમાં રહેલી વાત છુપાવવી ખૂબ અઘરી હોય છે. તું મને મારાથી પણ વધારે ઓળખે છે. અને એક વાત, મારું અસ્તિત્વ ત્યાં છે, જ્યાં તારું અસ્તિત્વ છે."

heenagopiyani.493689

લડકીયોકો ઇમ્પ્રેશ કરને કે લિયે
ઔર બડી બડી બાતે બોલો....
😜😜😜🤣🤣🤣🤣

jighnasasolanki210025

जीवनोंपनिषद

✧ भूत, भविष्य और धर्म ✧

✍🏻 — 🙏🌸 अज्ञात अज्ञानी

भूत की ज़रूरत (विस्तार)

भूत का महत्व तब है जब हमें किसी समस्या की जड़ खोजना हो।
बीमारी की दवा तब ही चुनी जाती है जब डॉक्टर उसके कारण (भूत) को समझे।
किसी दुर्घटना का कारण जानने के लिए भी पीछे जाना पड़ता है।
समाज में भ्रष्टाचार क्यों है, हिंसा क्यों है, या संस्कृति क्यों बिगड़ी —
इन प्रश्नों के उत्तर भूत में ही मिलते हैं।

👉 भूत इसलिए उपयोगी है कि वह कारण बताता है।
लेकिन भूत पर अटक जाना, बार-बार वही कहानियाँ दोहराना —
यह समाधान नहीं, बल्कि रुकावट है।

श्लोक १

भूतं कारणमित्युक्तं, रोगदुःखविनाशनम्।
अन्वेष्टव्यं प्रयोजनं, न तु तत्र निवेशनम्।।

व्याख्या:
भूत कारण को बताता है,
दुःख और रोग का निदान वहीं से समझ आता है।
पर भूत को केवल खोजो,
उसमें बसो मत।

भविष्य की ज़रूरत

भविष्य दिशा देता है।
समाज को सुधारने के लिए कानून चाहिए, शिक्षा चाहिए, योजनाएँ चाहिए।
ये सब भविष्य की ओर दृष्टि रखकर ही बनते हैं।
किसान भी बोआई करते समय भविष्य की फसल देखता है।
माता-पिता बच्चों को पढ़ाते हैं क्योंकि वे उनके भविष्य की कल्पना करते हैं।

👉 भविष्य इसलिए आवश्यक है कि वह दिशा और आशा देता है।
लेकिन भविष्य पर ही टिका रहना,
अभी को भूल जाना,
सिर्फ सपनों में खो जाना —
यह भ्रम है।

श्लोक २

भविष्यं मार्गदर्श्यर्थं, नियमशिक्षापरायणम्।
दृष्टव्यं केवलं तत्र, न तु स्वप्नविलासनम्।।

व्याख्या:
भविष्य मार्ग दिखाने के लिए है,
शिक्षा और व्यवस्था का आधार है।
लेकिन भविष्य में खोकर जीना
सिर्फ स्वप्न का खेल है।

धर्म और आध्यात्म में भूत–भविष्य

जब हम धर्म और आध्यात्म की बात करते हैं,
तो वहाँ भूत और भविष्य की कोई आवश्यकता नहीं।
क्योंकि धर्म सत्य है,
और सत्य केवल इस क्षण में उपलब्ध है।

👉 जो गुरु केवल पुरानी कहानियाँ सुनाकर भूत का महिमामंडन करते हैं,
या भविष्य के स्वर्ग और मुक्ति के सपने बेचते हैं,
वे धर्म नहीं, बल्कि पाखंड करते हैं।

श्लोक ३

न भूतं धर्ममार्गे, न चापि स्वप्नभविष्यकम्।
वर्तमानं तु धर्मः स्यात्, साक्षात् सत्यं सनातनम्।।

व्याख्या:
धर्म में न भूत का कोई महत्व है,
न भविष्य का कोई स्थान है।
धर्म केवल वर्तमान है,
यही सनातन सत्य है।

अनुभव और भूत

हाँ, हमारे अनुभव भूत में दर्ज रहते हैं।
हम पीछे देखकर सीख सकते हैं।
लेकिन अनुभव को पकड़कर बैठ जाना,
या उनका अंध-पूजन करना —
यह अज्ञान है।

👉 अनुभव का उपयोग है केवल सीखने के लिए,
ना कि पूजा करने के लिए।

श्लोक ४

अनुभवो भूतनिष्ठः, शिक्षार्थं परिगृह्यते।
पूज्यं न तु संसक्त्यै, ज्ञानं तत्र विवेकतः।।

व्याख्या:
अनुभव भूत में हैं,
पर उनका उपयोग केवल शिक्षा के लिए है।
उन्हें पूजना या उनमें उलझना अज्ञान है।

पाखंड का खेल

आज अधिकांश धर्मगुरु यही करते हैं।
वे भूत की कहानियाँ पीटते हैं,
महानता का भ्रम रचते हैं,
और भविष्य के सपने बेचते हैं।
स्वर्ग, मोक्ष, चमत्कार —
सब भविष्य की बिक्री है।
यही सबसे बड़ा पाखंड है,
जो वर्तमान को अपमानित करता है।

श्लोक ५

भूतं पीट्य महात्म्यं, भविष्यं स्वप्नविक्रयः।
धर्मो नायं पाखण्डः स्यात्, वर्तमानं हि कीर्त्यते।।

व्याख्या:
भूत को पीटना और भविष्य के स्वप्न बेचना धर्म नहीं।
यह पाखंड है।
धर्म केवल वर्तमान है।

निष्कर्ष

भूत और भविष्य संसार के लिए उपयोगी हैं —
भूत कारण बताता है,
भविष्य दिशा देता है।
लेकिन धर्म और आध्यात्म केवल वर्तमान का नाम है।
वर्तमान ही ईश्वर है,
वर्तमान ही सत्य है।

श्लोक ६

भूतं कारणमित्याहुः, भविष्यं च अपेक्षते।
वर्तमानं तु धर्मः स्यात्, सत्यं नित्यमिह स्मृतम्।
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bhutaji

किसी से प्रेम होते ही पुरुष समाहित हो जाना चाहता है उसमें, जैसे नदी नाले समा जाते हैं किसी समुद्र में..वहीं प्रेमिका पहले उसे समझती है, जैसे कारीगर समझता है किसी धातु के स्वभाव को..

प्रेमी और प्रेमिका के प्रेम में यही अंतर है कि प्रेमी अगले पल से ही सब कुछ लुटा देना चाहते हैं अपना, वहीं प्रेमिका जानती है कि उसका किसी पर भी सब कुछ लुटा देना इतना आसान नहीं है, इसीलिए उसे समय लगता है..परंतु एक बार जब प्रेमिका को ये विश्वाश हो जाता है कि उसने सही शख्स से प्रेम किया है उसके बाद प्रेमी कभी भी प्रेमिका द्वारा उसके लिए किए जाने वाले त्यागों की बराबरी नहीं कर पाता है...

और प्रेमिका कभी भी इस बात को नकार नहीं सकती है कि उसके प्रेमी ने उसपर अगले पल से ही अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था..जबकि अभी वो उसके असली स्वभाव को ढंग से जानता भी नहीं था..

समय बीतता जाता है, एक दिन सब कुछ ख़त्म होने को आता है, प्रेमी गिनाने लगता है अपने सारे एहसान, हर छोटी छोटी चीज जो उसने अपनी मर्जी से की थी प्रेमिका के लिए..वहीं प्रेमिका चुपचाप सब कुछ सुनती है, और उसकी बातों का जवाब दिए बिना ही, अलविदा कहे बिना ही कहीं गुम हो जाती है..

प्रेमी की बातों का जवाब दिए बगैर जाना प्रेमी को इस घमंड में रखता है कि प्रेमिका के पास कोई जवाब नहीं था उसकी बातों का..

वहीं प्रेमिका बस इसीलिए चुप थी क्योंकि वो जानती थी कि जो साथ रहकर उसके त्यागों को या उसके समर्पण को नहीं समझ पाया, उसे ये सब गिना कर तो कतई नहीं समझाये जा सकते हैं..

फिर एक दिन सब कुछ ठीक नहीं होता है, एक दिन सब कुछ ख़त्म हो जाता है..!!

hindbharat

जीवनोंपनिषद

✧ भूत, भविष्य और धर्म ✧

✍🏻 — 🙏🌸 अज्ञात अज्ञानी

भूत की ज़रूरत (विस्तार)

भूत का महत्व तब है जब हमें किसी समस्या की जड़ खोजना हो।
बीमारी की दवा तब ही चुनी जाती है जब डॉक्टर उसके कारण (भूत) को समझे।
किसी दुर्घटना का कारण जानने के लिए भी पीछे जाना पड़ता है।
समाज में भ्रष्टाचार क्यों है, हिंसा क्यों है, या संस्कृति क्यों बिगड़ी —
इन प्रश्नों के उत्तर भूत में ही मिलते हैं।

👉 भूत इसलिए उपयोगी है कि वह कारण बताता है।
लेकिन भूत पर अटक जाना, बार-बार वही कहानियाँ दोहराना —
यह समाधान नहीं, बल्कि रुकावट है।

श्लोक १

भूतं कारणमित्युक्तं, रोगदुःखविनाशनम्।
अन्वेष्टव्यं प्रयोजनं, न तु तत्र निवेशनम्।।

व्याख्या:
भूत कारण को बताता है,
दुःख और रोग का निदान वहीं से समझ आता है।
पर भूत को केवल खोजो,
उसमें बसो मत।

भविष्य की ज़रूरत

भविष्य दिशा देता है।
समाज को सुधारने के लिए कानून चाहिए, शिक्षा चाहिए, योजनाएँ चाहिए।
ये सब भविष्य की ओर दृष्टि रखकर ही बनते हैं।
किसान भी बोआई करते समय भविष्य की फसल देखता है।
माता-पिता बच्चों को पढ़ाते हैं क्योंकि वे उनके भविष्य की कल्पना करते हैं।

👉 भविष्य इसलिए आवश्यक है कि वह दिशा और आशा देता है।
लेकिन भविष्य पर ही टिका रहना,
अभी को भूल जाना,
सिर्फ सपनों में खो जाना —
यह भ्रम है।

श्लोक २

भविष्यं मार्गदर्श्यर्थं, नियमशिक्षापरायणम्।
दृष्टव्यं केवलं तत्र, न तु स्वप्नविलासनम्।।

व्याख्या:
भविष्य मार्ग दिखाने के लिए है,
शिक्षा और व्यवस्था का आधार है।
लेकिन भविष्य में खोकर जीना
सिर्फ स्वप्न का खेल है।

धर्म और आध्यात्म में भूत–भविष्य

जब हम धर्म और आध्यात्म की बात करते हैं,
तो वहाँ भूत और भविष्य की कोई आवश्यकता नहीं।
क्योंकि धर्म सत्य है,
और सत्य केवल इस क्षण में उपलब्ध है।

👉 जो गुरु केवल पुरानी कहानियाँ सुनाकर भूत का महिमामंडन करते हैं,
या भविष्य के स्वर्ग और मुक्ति के सपने बेचते हैं,
वे धर्म नहीं, बल्कि पाखंड करते हैं।

श्लोक ३

न भूतं धर्ममार्गे, न चापि स्वप्नभविष्यकम्।
वर्तमानं तु धर्मः स्यात्, साक्षात् सत्यं सनातनम्।।

व्याख्या:
धर्म में न भूत का कोई महत्व है,
न भविष्य का कोई स्थान है।
धर्म केवल वर्तमान है,
यही सनातन सत्य है।

अनुभव और भूत

हाँ, हमारे अनुभव भूत में दर्ज रहते हैं।
हम पीछे देखकर सीख सकते हैं।
लेकिन अनुभव को पकड़कर बैठ जाना,
या उनका अंध-पूजन करना —
यह अज्ञान है।

👉 अनुभव का उपयोग है केवल सीखने के लिए,
ना कि पूजा करने के लिए।

श्लोक ४

अनुभवो भूतनिष्ठः, शिक्षार्थं परिगृह्यते।
पूज्यं न तु संसक्त्यै, ज्ञानं तत्र विवेकतः।।

व्याख्या:
अनुभव भूत में हैं,
पर उनका उपयोग केवल शिक्षा के लिए है।
उन्हें पूजना या उनमें उलझना अज्ञान है।

पाखंड का खेल

आज अधिकांश धर्मगुरु यही करते हैं।
वे भूत की कहानियाँ पीटते हैं,
महानता का भ्रम रचते हैं,
और भविष्य के सपने बेचते हैं।
स्वर्ग, मोक्ष, चमत्कार —
सब भविष्य की बिक्री है।
यही सबसे बड़ा पाखंड है,
जो वर्तमान को अपमानित करता है।

श्लोक ५

भूतं पीट्य महात्म्यं, भविष्यं स्वप्नविक्रयः।
धर्मो नायं पाखण्डः स्यात्, वर्तमानं हि कीर्त्यते।।

व्याख्या:
भूत को पीटना और भविष्य के स्वप्न बेचना धर्म नहीं।
यह पाखंड है।
धर्म केवल वर्तमान है।

निष्कर्ष

भूत और भविष्य संसार के लिए उपयोगी हैं —
भूत कारण बताता है,
भविष्य दिशा देता है।
लेकिन धर्म और आध्यात्म केवल वर्तमान का नाम है।
वर्तमान ही ईश्वर है,
वर्तमान ही सत्य है।

श्लोक ६

भूतं कारणमित्याहुः, भविष्यं च अपेक्षते।
वर्तमानं तु धर्मः स्यात्, सत्यं नित्यमिह स्मृतम्।।

व्याख्या:
भूत कारण के लिए है,
भविष्य अपेक्षा के लिए।
लेकिन धर्म केवल वर्तमान है,
और वही शाश्वत सत्य है।

सारांश

भूत कारण है।
भविष्य दिशा है।
पर धर्म केवल वर्तमान है।
जो इस क्षण में जीता है,
वही धर्म, ईश्वर और सत्य — तीनों को जान लेता है।

— 🙏🌸 अज्ञात अज्ञानी

#धर्म #आध्यात्मिक Philosophy ( philo- "loving" + sophia "knowledge" ) #vedanta #spiritualit

manishborana.210417

He turns shared struggles into shared strength.

niyaskn

In every action, Niyas KN plants seeds of unity.

niyaskn