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New bites

कोई एक व्यक्ति से हमें बुरा अनुभव होता है,

फिर हम सभी इंसानों को बूरा समझने लगे,
तो फिर गलतियां हमसे ही होगी।

हर एक इंसान में अच्छाई या बुराई ही पनपतीं है,
वह ग़लत बात है।

किसी में अच्छाई भी पनपतीं है तो किसी में बुराई।

अच्छे इंसानों पर भी आप भी बूरे होगे,
वह प्रश्न कब पैदा होता है।

मालूम है?
जब बुराई अच्छाई का नक़ाब पहनकर पहले पास आती है,
फिर वह अपने वास्तविक रूप में आकर असली रूप दिखलातीं है।

तब वह पीड़ित इंसान,
सभी अच्छे इंसानों को भी बूरा समझने लगता है।

किन्तु कुछ विवेक शक्ति भी होनी चाहिए,
अच्छाई और बुराई को समझने की।

एक बार धोखा खाए हुए इंसान में वह समझ अच्छी तरह आ जानी चाहिए।

रावण ने सीतामाता का हरण,
साधु वेश धारण करके किया,

वह रावण की नियत और सोच खराब थी,
साधु और साधुत्व नही।

इसलिए जिंदगी में नक़ाब पहनें मिलते रहते हैं चहेरे,
आज़मा लेना चाहिए जरुर, असलियत के दिख जाते है चहेरे।

parmarmayur6557

फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...

इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)

मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)

तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...

फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK

heenagopiyani.493689

શમણાં પણ જોને આભમાં
વિખરાયાં
કાટમાળ થઈ ધરતી પર
પથરાયાં…
-કામિની

kamini6601

सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)🌟 शीर्षक: हार मानने से पहले
रमेश एक छोटे से गाँव का लड़का था। उसके पिता मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में काम। घर की हालत ऐसी थी कि कई बार रात का खाना भी पूरा नहीं होता था।
स्कूल में रमेश को कोई खास नहीं समझता था। उसके कपड़े पुराने थे, जूते फटे हुए। कुछ बच्चे हँसते हुए कहते—
“इससे कुछ नहीं होगा।”
हर बार ये शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ जाते।
एक दिन परीक्षा का रिज़ल्ट आया। रमेश फिर फेल हो गया। वह स्कूल के पीछे अकेला बैठकर रो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी ज़िंदगी भी उसी रिज़ल्ट की तरह “फेल” हो चुकी है।
घर आकर उसने माँ से कहा,
“अम्मा, मुझसे पढ़ाई नहीं होती। मैं काम करने चला जाऊँगा।”
माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा और धीरे से बोली—
“बेटा, हार वो नहीं जो गिर जाए, हार वो है जो उठना छोड़ दे।”
वही एक वाक्य रमेश की ज़िंदगी का मोड़ बन गया।
अगले दिन से रमेश ने एक नियम बना लिया—
रोज़ सुबह जल्दी उठना, दो घंटे पढ़ाई, और दिन में जो भी समझ न आए, दोबारा कोशिश।
कई बार वह थक जाता, कई बार मन करता छोड़ देने का। लेकिन माँ का वो वाक्य उसे हर बार रोक लेता।
समय बीतता गया। साल बदले।
और वही रमेश, जिसे कभी “बेकार” कहा गया था, आज सरकारी नौकरी में चयनित हो गया।
जिस दिन उसने माँ को सफलता की खबर दी, माँ की आँखों में आँसू थे—खुशी के।
✨ सीख
हालात चाहे जैसे हों, अगर इंसान हार मानने से पहले एक बार और कोशिश कर ले—तो किस्मत भी रास्ता बदल देती है।🌟 सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)
राजु एक साधारण से गाँव में रहने वाला लड़का था। उसके घर में न ज़्यादा पैसे थे, न बड़ी सुविधाएँ। लेकिन उसके पास एक चीज़ बहुत खास थी — सपने देखने की आदत।
जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब राजु पुरानी कॉपियों के खाली पन्नों पर कहानियाँ लिखा करता था।
वह लिखता था—
कभी किसान की पीड़ा,
कभी माँ की ममता,
तो कभी अपने ही संघर्ष की कहानी।
उसका सपना था—
“एक दिन मैं बड़ा लेखक बनूँगा, मेरी कहानियाँ लोगों के दिल तक पहुँचेंगी।”
लेकिन राह आसान नहीं थी।
स्कूल में लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे—
“कहानी लिखने से कोई बड़ा आदमी बनता है क्या?”
घरवाले कहते—
“पहले नौकरी सोचो, ये लिखना-पढ़ना बेकार है।”
कई बार राजु का हौसला टूट जाता।
एक दिन उसने अपनी डायरी बंद करते हुए सोचा—
“शायद वे सही हैं… मुझसे नहीं होगा।”
उसी रात उसने एक किताब पढ़ी, जिसमें लिखा था—
“सपने वो नहीं जो सोते वक्त आएँ, सपने वो हैं जो सोने न दें।”
ये पंक्ति राजु के दिल में उतर गई।
अगले दिन से उसने तय किया—
रोज़ लिखेगा, चाहे कोई पढ़े या नहीं।
रोज़ सीखेगा, चाहे कोई सराहे या नहीं।
वह सुबह जल्दी उठकर लिखता,
दिन में काम करता,
और रात को फिर शब्दों से दोस्ती करता।
उसकी कहानियाँ पहले मोबाइल पर पढ़ी गईं,
फिर सोशल मीडिया पर,
और एक दिन…
एक प्रकाशक की नज़र राजु की लेखनी पर पड़ी।
कुछ समय बाद राजु की पहली किताब छपी।
जब उसने किताब पर अपना नाम देखा —
“लेखक : राजु”
तो उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो आँसू हार के नहीं, सफलता के थे।
आज राजु एक जाना-माना लेखक है।
लेकिन वह आज भी वही बात कहता है—
✨ सीख
अगर सपना सच्चा हो और मेहनत ईमानदार,
तो हालात चाहे जैसे हों,
सफलता रास्ता खुद बना लेती हैFollow the PRB STORY CLUB channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb80wc69MF92VvNWbp1

rajukumarchaudhary502010

નારી શું ઈચ્છે છે? અને નર શું વિચારે છે? આ પ્રશ્ન જો બન્ને માંથી એક ને વારંવાર થયા કરે તો સમજવું સંબંધ રિબોન્ડિંગ માંગે છે.

yashibc123gmail.com135615

https://youtube.com/shorts/cb-771yxHxc?si=WfoI2aZFEgLrr8BC
गरीब लड़के ने अमीर व्यापारी को सिखाया जीवन का सबसे बड़ा सबक | Heart Touching Moral Story | Baccho Ki Kahani"**

surajprakash.857127

થાણેની હવામાં અનેરો ઉમંગ,
ભવ્ય ત્રિમંદિર પ્રતિષ્ઠાનો રંગ!

ત્રિમંદિર એટલે આધ્યાત્મિક પ્રગતિ માટેનું નિષ્પક્ષપાતી મંદિર! ત્રિમંદિર વિશે વધુ વાંચો અહીં: https://dbf.adalaj.org/haKDYYCK

#thane #PranPratishtha #temples #templesofindia #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

कभी-कभी कुछ किताबें केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं, और “अंतर्मन” ऐसी ही एक संवेदनशील कृति है जो पाठक को उसके अपने भावों से जोड़ देती है। यह पुस्तक शब्दों से अधिक एहसासों की अभिव्यक्ति है, जहाँ हर कविता आत्मसंवाद बन जाती है और हर पंक्ति दिल की गहराइयों को छूती है। छत्तीसगढ़ की संवेदनशील लेखिका श्वेता पांडेय ने इस काव्य-संग्रह में प्रेम, विरह, माँ-पिता का स्नेह, रिश्तों की जटिलताएँ, समाज की सच्चाइयाँ और आत्मचिंतन जैसे जीवन के विविध रंगों को बड़ी सादगी और गहराई से उकेरा है। “वो पहला इश्क मेरा”, “माँ का प्यार” और “अब खुद से मिलने चली हूँ” जैसी रचनाएँ पाठक को अपने भीतर झाँकने पर मजबूर करती हैं। इससे पूर्व प्रकाशित उनका कविता-संग्रह “सफर कोरे पन्नों की” पाठकों द्वारा सराहा जा चुका है और सोशल मीडिया साहित्यिक मंचों पर उनकी लेखनी को व्यापक पहचान मिली है। Top National Writer Of India 2024 के अंतर्गत Top Epic Pen Star Award सहित अनेक सम्मान प्राप्त कर चुकी श्वेता पांडेय ने 40 से अधिक पुस्तकों में सह-लेखिका के रूप में योगदान दिया है। “अंतर्मन” उन सभी पाठकों के लिए है जो कविता में शोर नहीं, बल्कि संवेदना, सच्चाई और आत्मा की आवाज़ तलाशते हैं - एक ऐसी पुस्तक जो पढ़ते-पढ़ते पाठक को उसके अपने अंतर्मन से जोड़ देती है।

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ruhisp

💔imran 💔

imaranagariya1797

ये मोहब्बत थी
या किसी तन्हा शाम की आदत,
जो धीरे-धीरे
मेरे कमरे में फैल गई।
तुम आईं
और शब्दों को कम बोलना सिखा गईं,
मैंने ख़ामोशी को
तुम्हारा जवाब समझ लिया।
मैं हर रोज़
अपने हिस्से का सच
तुम्हारे नाम लिखता रहा,
तुम हर बार
उसे पढ़े बिना
मोड़कर रख देती रहीं।
कभी-कभी सोचता हूँ—
इश्क़ वो नहीं होता
जो मिल जाए,
इश्क़ शायद वो होता है
जो आदमी को
थोड़ा और अकेला कर दे।
आज भी
तुम्हारी याद
किसी पुराने खत की तरह है—
ना फाड़ सकता हूँ,
ना दोबारा पढ़ने की हिम्मत है।

आर्यमौलिक

deepakbundela7179

जिंदगी में मुश्किल समय एक Puzzle की तरह होता है।

समाधान भी मिलता है,

शांत दिमाग और स्थिर ह्रदय से
सोचने पर कोई भी विपरीत परिस्थितियों में
भी रास्ता मिलता हैं।

parmarmayur6557

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

"कंधों पर बस्ते का बोझ था, तब मन स्थिर था...
अब कंधों पर ज़िम्मेदारियां हैं, तो मन विचलित है।
ये एडल्टहुड भी अजीब है दोस्त,
आज़ादी तो मिली, पर सुकून कहीं खो गया है।"


​"बचपन में माँ की उँगली पकड़ कर चलते थे तो गिरने का डर नहीं था। आज एडल्टहुड में अकेले चल रहे हैं और डर ये नहीं कि हम गिरेंगे, डर ये है कि अगर हम गिर गए तो माँ-बाप का भरोसा टूट जाएगा। ये ज़िम्मेदारी का बोझ ही सबसे बड़ा 'विचलन' पैदा करता है।"
"एडल्टहुड एक ऐसी फिल्म है जिसका 'ट्रेलर' तो हमें बड़ा फैंसी दिखाया गया था, लेकिन 'मूवी' शुरू होते ही पता चला कि यहाँ तो हर सीन में सस्पेंस और स्ट्रगल है। पर याद रखना, विचलित वही होता है जो चल रहा है। जो बैठा है, वो तो जड़ है।"


​"अजीब कशमकश है न? कल तक हम अपनी मर्ज़ी के मालिक बनना चाहते थे, और आज जब अपनी मर्ज़ी चलाने का वक्त आया, तो ज़िम्मेदारियों के बोझ ने मन को विचलित कर दिया है। कभी-कभी रात को छत की तरफ देखते हुए ये खयाल आता है कि क्या हम वाकई वही बन रहे हैं जो हम बनना चाहते थे? या फिर सिर्फ 'बड़े' होने की इस भीड़ में शामिल होकर अपनी पहचान कहीं खो दी है। एडल्टहुड की इस दौड़ में हम अक्सर दूसरों को खुश करने के चक्कर में खुद से ही विचलित हो जाते हैं। पर शायद, यही भटकाव हमें ये सिखाने आता है कि दुनिया की भीड़ में सबसे ज़रूरी इंसान, जिसे हमें ढूंढना है, वो हम खुद हैं।"
​"दोस्त, क्या आपको भी कभी लगता है कि एडल्टहुड एक ट्रैप है? अपनी बात कमेंट्स में बताओ।"

leoleo315756

good night

inkimagination

પૈસા તો કમાઈ લેવાય, પણ સાચા માણસો મેળવવા અઘરા છે. જેણે તમને શૂન્યમાંથી બેઠા કર્યા હોય એને ક્યારેય ભૂલતા નહીં. ❤️
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parmarbhavesh.k

https://youtube.com/shorts/KidfuDKctw4?si=5-aM-KbVTylB17Qp
"गरीब लड़के ने जादुई कुएं से माँगी एक इच्छा, आखिर में जो हुआ... 😱🔥 | Heart Touching Story"

surajprakash.857127

मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास)

मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास
ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास
मैं और मेरा मोबाइल

जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए
रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए
घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है
सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है

कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ
हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ
मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया
मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया

ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं

heenagopiyani.493689