Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

राइट टू रिकॉल पार्टी और राघव चड्ढा की आम आदमी पार्टी के Right To Recall कानून ड्राफ्ट प्रक्रिया में क्या क्या फर्क है, और इनके द्वारा बताया गया रिकॉल प्रक्रिया कितने दिनों में शुरू होगा?
------------------------ जानने के लिए पूरा पोस्ट पढ़ें↓

(01) Right to Recall Party के कानून में Recall प्रक्रिया: चुनाव के बाद 7 दिन में शुरू होगा।

Raghav Chaddhas के कानून में Recall प्रक्रिया: 1.5 साल में! इन डेढ़ साल में कई कई गलत कानूनों को MLA/MP'S अपनी पार्टी अध्यक्ष के दबाव/लालच के कारण समर्थन कर सकता हैं। इससे जनता का नुकसान होगा!
.
(02) कितने लोग रिकॉल की प्रक्रिया की "शुरुआत" कर सकते हैं?

Right to Recall Party का Recall प्रक्रिया में: केवल 1 वोटर से शुरुआत हो सकता है।

आम आदमी पार्टी के - Raghav Chaddhas के Recall प्रक्रिया में: लोकसभा या विधानसभा के 35 से 40% वोटर,से हीं होगा! जिसके अभाव में रिकॉल शुरू हीं नहीं होगा! इससे जनता का नुकसान होगा।
.
(03) रिकॉल कैसे करेंगे ?

Right to Recall Party: पंजीकृत (रजिस्टर्ड) मोबाइल से sms, app द्वारा (घर बैठे) या सरकारी ऑफिस में जाकर रिकॉल को स्वीकृति देकर वोट वापसी पासबुक में दर्ज करा सकेंगे।

Raghav Chaddhas Recall : सरकारी ऑफिस में जाकर हस्ताक्षर करना होगा जिसके सैंपल उनके पास न होने पर सरकारी अधिकारी, आपके हस्ताक्षर को नकार सकता है।
.
(04) क्या कोई रसीद मिलेगी ?

Right to Recall Party : वोट वापसी पासबुक— जो की हर वोटर को मिलेगी, में वोटर रिकॉल की स्वीकृति दर्ज की जाएगी। यह वोट वापसी पासबुक रसीद के समान होगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : नहीं, जिसके अभाव में आपकी रिकॉल की स्वीकृति को नकारा जा सकता है, जिससे रिकॉल के स्वीकृतियों के नंबर घटेंगे। डुप्लीकेट साइन करके स्वीकृतियों की संख्या बहुत बढ़ाई भी जा सकती है। इससे जनता का नुकसान होगा।
.
(05) क्या रिकॉल की स्वीकृतियां तुरंत सार्वजनिक होंगी?

Right to Recall Party : हाँ, सभी स्वीकृतियां वोट वापसी पासबुक में रजिस्टर्ड होंगी। स्वीकृतियां सार्वजनिक होने से उनमें उलट फेर नहीं किया जा सकेगा।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : नहीं, स्वीकृतियां सार्वजनिक नहीं होने से स्वीकृतियों के संख्या में उलट फेर संभव होगा।
.
(06) कानून में बदलाव कैसे होगा?

Right to Recall Party: 51% नागरिक इस कानून की कोई भी धारा संसद से निकलवा या जुड़वा सकेंगे।

Raghav Chaddhas Recall : केवल संसद हीं बदलाव कर सकते हैं!! इससे जनता का नुकसान होगा।
.
(07) स्वीकृतियों की संख्या कितनी होगी?

Right to Recall Party : MLA/MP को जितने वोट मिले हैं, उससे 1% (कुल वोटरों का) अधिक।

Raghav Chaddhas Recall : कुल वोटरों का 35 से 40%। अगर MP/MLA 25% वोट से जीते हों तो भी 35 से 40% लोगों की स्वीकृतियां चाहिए। रिकॉल बहुत कठिन होगा।
.
(08) क्या पिटीशन वेरिफाई करनी होगी?

Right to Recall Party : वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया में कोई (petition) जांच की आवश्यकता नहीं होगी। स्वीकृतियों की संख्या, नाम के साथ हर हफ्ते सार्वजनिक होंगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : सरकारी अधिकारी हस्ताक्षर और संख्या की जांच करेगा जिसमें नागरिकों का समय खराब होगा, भ्रष्टाचार होगा और रिकॉल टाला जाएगा। जनता का नुकसान होगा।
.
(09) क्या पिटीशन के बाद MLA/MP निकाले जाएंगे?

Right to Recall Party : Petition की जरूरत नहीं। रिकॉल की प्रक्रिया के बाद MP/MLA निकाले जाएंगे।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : Petition के बाद 51% वोटर वोट करके निकालने के लिए हां कहेंगे, फिर MLA/MP निकाले जाएंगे। तो फिर पिटीशन क्यों चाहिए? क्योंकि जनता का नुकसान करना है!
.
(10) रिकॉल का आधार क्या होना चाहिए?

Right to Recall Party : जनता को ठीक लगेगा तो रिकॉल कर लेगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : रिकॉल का आधार "सिद्ध" (proven) कदाचार, भ्रष्टाचार, हेराफेरी, गंभीर रूप से काम ना करना होना चाहिए? यह कौन तय करेगा ? कैसे होगा यह राघव जी ने बताया ही नहीं। क्योंकि जनता को मामू बनाना है!
.
(11) क्या कोई रिकॉल संभव होगा?

Right to Recall Party : नागरिक कोई भी खर्च, जोखिम, परेशानी के बगैर भ्रष्ट MLA MP की कुर्सी से बदल सकेंगे।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : 18 महीने तक कोई रिकॉल नहीं, फिर 35 से 40% नागरिकों की हस्ताक्षर की हुई पिटीशन की जांच होगी!, फिर 51% वोटर की हामी के बाद के रिकॉल होगा?। यह सब के रहते केवल हस्ताक्षर के नाम पर वसूली, भ्रष्टाचार, जाति, धर्म के नाम पर सर फोड़ना होगा। जनता का बहुत नुकसान होगा।
.
(12) जिन देशों में यह रिकॉल है वहां क्या स्थिति है ?

Right to Recall Party: अमेरिका के California राज्य में और बाकी देशों में भी ऐसे पॉजिटिव रिकॉल से वहां अच्छे से चल रहा है। इस प्रक्रिया स्थिरता आती है और भ्रष्टाचार में बहुत कमी आती है।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : Peru, Bolivia, Equador यहां पर हजारों Petition file होते रहते हैं और भयंकर अस्थिरता होती है। इस प्रक्रिया का परिणाम अस्थिरता और हजारों की संख्या में पिटीशन फाइलिंग है। जनता का बहुत नुकसान होता है!
.
(13) क्या भारत में पहले से कहीं रिकॉल लागू है?

Right to Recall Party के जैसे ड्राफ्ट वाला Right To Recall कानून: यह प्रक्रिया भारत में कहीं भी लागू नहीं है।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : ऐसी ही प्रक्रिया 10 राज्यों में अलग-अलग समय पर केवल सरपंच पर लागू हुई है। 1994 से लेकर 2025 तक, केवल 2 हीं सरपंच, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में रिकॉल हुए हैं।

To be continued....

sonukumai

जुर्म ये दोबारा किया जाएगा,

छत से फिर इशारा किया जाएगा



आऊंगा अगले जन्म मे यह सोचकर



शायद तुम्हे इस बार हमारा किया जाएगा...

anisroshan324329

मैं तो समझा था मोहन वो मेरा दर्द बाँट रहा है..
क्या ख़बर थी कि वो अपना वक़्त काट रहा है..

momosh99

hello everyone jo meri story thi
safar -e- dil :जब नफरत जुनून में बदल जाए ❤️‍🔥
aur bhi achhi achhi kaha niya
mere matrubharti profile pe he
matrubharti app open kare
Abantika search kare
jaha mera yahi wala photo ayega
aplog waha READ Kar sakte hai
1. MAFIA KI ZID 🔥
2. PATI BRAHMACHARI
3. DEVIL’S SHADOW
4. BLUSHING DIARY
5. damsar
6.suddh desi romance:कोलकाता to बिहार

thank you
good night 😴 🥱 🌃

leoleo315756

મેળવવા કરતા ઘણું કઠણ નિભાવવું છે:એ પછી રૂપિયા હોય, ઈજ્જત હોય કે પ્યાર !!!!
તને ગર્વ થવો જોઈએ કે હું તારા માટે પ્રીતમ,દોસ્ત કરતાં અધિક છું દિલથી.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

મારી હસ્તરેખામાં તારું નામ હતું જ !! પરંતુ ઉતાવળમાં કોણ ભૂલ કરી ગયું!!
મારી હથેળીમાં તારું નામ ભૂંસી ગુમનામ નામ આ કોનું લખાઈ ગયું???
. - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

✍️ मेरी आत्मकथा
“मिट्टी से शब्दों तक”आत्मजीवनी
✍️ राजु कुमार चौधरी
मेरा नाम राजु कुमार चौधरी है। मेरा जन्म 17 अप्रैल 2005 को नेपाल के मधेश प्रदेश, पर्सा ज़िले के जगरनाथपुर गाउँपालिका, वार्ड नं. 6, प्रसौनी में हुआ। मेरी माता का नाम प्रतिभा देवी और पिता का नाम बिजेश चौधरी है। मैं अपने माता-पिता के संस्कार, संघर्ष और आशीर्वाद के साये में पला-बढ़ा हूँ।
बचपन और परिवार
मेरा बचपन गाँव की मिट्टी, खेतों की हरियाली और सरल जीवनशैली के बीच बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने मुझे बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी।
माता ने मुझे धैर्य, संवेदनशीलता और प्रेम का महत्व सिखाया, जबकि पिता ने अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया।
शिक्षा
मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ही क्षेत्र के विद्यालय से प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति मेरी रुचि शुरू से ही अच्छी रही।
मैंने कक्षा 12 (इंटरमीडिएट) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। वर्तमान में मैं B.A.D. (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की पढ़ाई कर रहा हूँ।
शिक्षा मेरे लिए केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्म-विकास और समाज सेवा का मार्ग है। मैं मानता हूँ कि एक शिक्षित व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
लेखन की शुरुआत
किताबों और कहानियों से मेरा लगाव किशोरावस्था में और गहरा हो गया। मैंने महसूस किया कि शब्दों में शक्ति होती है — वे दिलों को छू सकते हैं, सोच बदल सकते हैं और प्रेरणा दे सकते हैं।
धीरे-धीरे मैंने स्वयं कहानियाँ और कविताएँ लिखना शुरू किया। मेरे लेखन में प्रेम, संघर्ष, सामाजिक सच्चाई और रहस्य का समावेश रहता है।
संघर्ष और संकल्प
जीवन में कई चुनौतियाँ आईं, लेकिन मैंने हर कठिनाई को सीख में बदला। मेरा विश्वास है कि संघर्ष ही सफलता की नींव है।
मैं लगातार सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत हूँ।
मेरा लक्ष्य
मेरा सपना है कि मैं एक सफल लेखक और शिक्षित समाज निर्माता बनूँ।
मैं चाहता हूँ कि मेरे शब्द लोगों के जीवन में आशा, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संचार करें।
समापन
मैं राजु कुमार चौधरी, एक छोटे से गाँव से निकलकर बड़े सपनों की ओर बढ़ता हुआ एक साधारण युवक हूँ।
मेरी यात्रा अभी जारी है — और हर दिन मैं अपने सपनों के एक कदम और करीब पहुँच रहा हूँ।
"हर शब्द में जादू, हर कहानी में रहस्य — यही मेरी पहचान है।"

rajukumarchaudhary502010

"માઁ તે માઁ બીજા બધા વગડાના વા "
,,,

ત્તને આ ધરતી પર લાવવા કેટલાયે વ્રત ઉપવાસ માનતા બાધા એમણે કરી હશે! અંતરનાદ અને આર્તનાદ થકી તું માઁ ના ઉદરમાં આવ્યો હશે! કેટ કેટલી પરેજી પાળી હશે! અગણિત ધક્કા દવાખાને ખાધા હશે! તારા પપ્પાની કાળી મજૂરીની બચત બધી જ તારા દવાખાનામાં અને તું તંદુરસ્ત જન્મે એ માટે એ મૂડી દવાખાને ખર્ચાઈ હશે! નવ નવ માસે ભાવતું ભોજન એ માં એ ત્યાગ્યું હશે! નવ નવ માસ સુધી અસહ્ય પીડા સહી હશે,કેટલાય દિવસના ઉજાગરા થયા હશે! તને પેટમાં પીડા ના થાય એટલે દવાખાને જઈ એ માં એ ઈન્જેકશન ખાધા હશે,ગમતું ફરવાનું,ગમતાંને મળવાનું,તારા લીધે ટાળ્યું હશે! મીંઘા કપડાં તારા માટે જ પહેર્યા વગરના જૂનાં થઇ ફાટી ગયાં હશે! આ બધું તારા માટે કર્યું હશે,દીકરા! તું નવ માસે જન્મ્યો તો એ માં એ યૌવન ચીરી ડોકટરે તને પેટીમાં રાખ્યો હશે! ત્તે છતાં તારી જન્મવાની પીડા ભૂલી એ માઁ મુખમાં મુશ્કાન રાખી,તને છાતીએ સ્તનપાન કરાવી તારા પેટની તૃપ્તિ કરી હશે! તારા કારણે આ જગતમાં બધી જ પીડા,દુઃખ,સહન કર્યું હશે! તારા ઉછેર પાછળ એ માઁ એ તમામ ગમતી પ્રવૃતિઓ ઓછી કરી છોડી દીધી હશે કેમકે તને સ્કૂલ મુકવા જવો,નાસ્તો કરવો,દફ્તર તૈયાર કરવું,સવારમાં વહેલાં જાગવું,તારાં કપડાં ધોવા,એને ઈસ્ત્રી કરવી અને નાસ્તાનો ડબ્બો ભરવો,ભાવતું બધું જ નીત બનાવવું,તારા ટ્યુશન માટે રીક્ષા કરવી,માઁ એ જાગવું,મીંઘી ફી ભરી સારી સ્કૂલ-કોલેજમાં મુકવો,મોંઘો મોબાઈલ લઈ દેવો,અને મીંઘી બાઈક આપવી,સાથે સાથે મોટરકારની માગણી સંતોષવી અને પછી એ દીકરો મોંઘી ગર્લફ્રેન્ડને બેસાડી મોંઘી હોટલમાં જમાડે અને મોંઘી બ્રાન્ડેડ ગિફ્ટ આપે અને જેણે જનમ આપ્યો,કષ્ટ વેઠ્યું એ બાપ અને માં ને જયારે એ ગર્લફ્રેન્ડ વહુ બની ઘરમાં લાવે ત્તયારે વૃદ્ધાશ્રમ દેખાડે ત્યારે એ દીકરાને શું કહેવું !! જરા વિચારજો!!!
એક નમ્ર સૂચન -"એક આંટો વૃદ્ધાશ્રમમાં ક્યારેક મારજો,સત્ય સમજાઈ જશે.....!!!!!"
. - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

બાયોલોજી: એક અતૂટ પ્રેમ 🧬❤️
"સફરની શરૂઆત તો Biology થી કરી હતી, પણ કોને ખબર હતી કે આ અડાબિડ રસ્તાઓ ક્યાં લઈ જશે! Biology ના એ સાંકડા રસ્તા પર કદાચ મંઝિલ ના મળી, પણ એ જ રસ્તે મને જિંદગીના એક બહુ મોટા અને પહોળા રસ્તા પર લાવીને મૂકી દીધી."
"પણ મારી જિંદગી જાણે છે કે Biology સાથેનો મારો પ્રેમ ઓછો નથી થયો, ઉલટાનો વધ્યો છે! Biology ની એ મંઝિલ જે મારા મગજના કોઈ ખૂણે હજી પણ જીવંત છે, ત્યાં પહોંચવા માટે જિંદગીનો આ નવો અને પહોળો રસ્તો મને બહુ મદદ કરવાનો છે."
"જ્યારે Biology ના સાંકડા રસ્તાએ જિંદગીના વિશાળ રસ્તા પર 'ટેક-ઓફ' કર્યું, ત્યારે બંને રસ્તાઓ એક 'સમાંતર રેખા' બનીને એકાકાર થઈ ગયા. Biology સાથેનો મારો પ્રેમ એક અલગ જ સ્તર પર છે, જેને હું ક્યારેય છોડી નહીં શકું. એ તો મારો શ્વાસ છે!" ✨✈️
#Amreli #Bagasara #AmreliGujarat #BagasaraCity #PrideOfAmreli #GujaratiQuotes
#ScienceOfLife
#InnerStrength
#Visionary
#ThoughtfulLiving

chalonikalizindaginisafare

આવું સુકૂન બીજે ક્યાં મળે
ધરતી પરનું
સ્વર્ગ મને તારામાં મળે…
-કામિની

kamini6601

તું મારાં માટે કોઈ વેલેન્ટાઈન નથી
તું તો મારી આખી જિંદગી છે.
શ્વાસ સાથે લેવાતો લયનો સુર છે,
જે જીવવાનું નામ જિંદગી છે.

પ્રેમ કોઈ એક દિવસનો મોહતાજ નથી,
ભવભવથી ચાલી આવેલી એ જ રીત છે.
નામ બદલાયા છે સમય બદલાયો પણ,
તારી ને મારી લાગણી આજે પણ અકબંધ છે.

તું અને હું એકબીજાની સાથે નથી છતાં,
એકબીજાથી દૂર પણ નથી.મૌનમાં પણ
હાજરી તારી છે એવું કોઈ અંતર જ નથી.
તું નજર સામે નથી છતાં,હ્રદયમાં તારો વસવાટ છે.

દૂર હોવાનો ભ્રમ છે માત્ર,અસલમાં તો તું જ સાથ છે.
સમય પૂછે છે પુરાવો પ્રેમનો,અમે શાંતિથી સ્મિત કરીએ .
કારણ કે શબ્દો કરતાં વધુ,અમે એકબીજામાં જીવીએ છીએ.
હોવાં માત્રથી નહીં એકાંતની મોજમાં પણ તું જ શ્વસે છે.

palewaleawantikagmail.com200557

कितना रखूँ मैं अपनी खताओं का हिसाब..
क्योंकि तेरी अदाएं हुए जा रहीं हैँ बेहिसाब..

momosh99

तेरी हर उदासी को अपनी हार समझता हूं मैं
दिल चीख पड़ता है जब तुझे याद करता हूं मै
जब तू रूठ जाती है मुझसे यू बेवजाह
एक कोने में बैठा तन्हाई से बात करता हूं मै .

mashaallhakhan600196

On this Valentine’s Day, let’s promise to remain sincere with one another.

Click here to download the Valentine’s Day wallpaper: https://dbf.adalaj.org/awrZCbz0

#valentineweek #valentinespecial #happyvalentinesday #love #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

हमारी इए कहानी बहुत लोकप्रिय हुई है आप हमारे ID पर जाकर पढ सकते है विल्कूल फ्रि में

rajukumarchaudhary502010

सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

My Contract Wife 2.0
In the heart of a bustling city, where skyscrapers pierced the clouds and neon lights flickered like distant stars, Aarav found himself trapped in a marriage that was never meant to be.
A year ago, he had signed a contract—a simple piece of paper with a few clauses that promised mutual benefits but little emotional connection. His "wife," Ayesha, was a woman he barely knew. She was beautiful, poised, and graceful, but their relationship was nothing more than a carefully structured agreement.
Aarav, a successful tech entrepreneur, had been under immense pressure from his parents to marry someone from their prestigious social circle. But Aarav had no interest in the social games of elite families. Ayesha, on the other hand, was from a family struggling to maintain their legacy. The contract was her escape, her ticket to a life of comfort, but it was never supposed to be about love.
But things changed.
Aarav had hired Ayesha as his “wife” for the sake of family and appearances. They lived together, shared the same space, but never really lived together. Conversations were sparse, emotions were muted, and everything between them felt like a business deal.
Until one fateful night.
It was his birthday. Aarav had invited a few colleagues and old friends for a small gathering at his penthouse. The guests were a mix of old-school businessmen and young entrepreneurs, and the atmosphere was filled with laughter, wine, and music.
Ayesha had spent the evening in the corner of the room, sipping her drink and talking to no one. She wasn't part of the crowd, and they were always careful to avoid her. After all, what did a woman like her have in common with a room full of ambitious go-getters?
But then, Aarav saw something in her—something he had never noticed before. She was beautiful, yes, but it was more than that. There was an intelligence in her eyes, a quiet confidence that made her stand out from the rest. In a brief moment, as their eyes met, he felt a strange pull, as if he were seeing her for the first time.
The party continued, but the distance between them began to shrink.https://youtube.com/@prbgroupprivatelimited?si=rfexF5LftoypLfkS

rajukumarchaudhary502010

My Contract Wife 2.0
In the heart of a bustling city, where skyscrapers pierced the clouds and neon lights flickered like distant stars, Aarav found himself trapped in a marriage that was never meant to be.
A year ago, he had signed a contract—a simple piece of paper with a few clauses that promised mutual benefits but little emotional connection. His "wife," Ayesha, was a woman he barely knew. She was beautiful, poised, and graceful, but their relationship was nothing more than a carefully structured agreement.
Aarav, a successful tech entrepreneur, had been under immense pressure from his parents to marry someone from their prestigious social circle. But Aarav had no interest in the social games of elite families. Ayesha, on the other hand, was from a family struggling to maintain their legacy. The contract was her escape, her ticket to a life of comfort, but it was never supposed to be about love.
But things changed.
Aarav had hired Ayesha as his “wife” for the sake of family and appearances. They lived together, shared the same space, but never really lived together. Conversations were sparse, emotions were muted, and everything between them felt like a business deal.
Until one fateful night.
It was his birthday. Aarav had invited a few colleagues and old friends for a small gathering at his penthouse. The guests were a mix of old-school businessmen and young entrepreneurs, and the atmosphere was filled with laughter, wine, and music.
Ayesha had spent the evening in the corner of the room, sipping her drink and talking to no one. She wasn't part of the crowd, and they were always careful to avoid her. After all, what did a woman like her have in common with a room full of ambitious go-getters?
But then, Aarav saw something in her—something he had never noticed before. She was beautiful, yes, but it was more than that. There was an intelligence in her eyes, a quiet confidence that made her stand out from the rest. In a brief moment, as their eyes met, he felt a strange pull, as if he were seeing her for the first time.
The party continued, but the distance between them began to shrink.

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010