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New bites

જિંદગીમાં કોઈ પોતાનું નથી હોતું ખાલી મનનો "વહેમ" છે.
"વિશ્વાસ" તૂટ્યો તો માણસ" પારકો" થઈ જાય અને "શ્વાસ" રોકાયો તો "શરીર" પારકું થઈ જાય છે.

dipika9474

एक खेळ , साधा नाही मृत्यूचा...
आपल्या भेटीला लवकरच येत आहे..
GAME OF DEATH ☠️💀
भयकथा...

devgankadali34.192151

#24 वोट वापसी मुख्यमंत्री

यह प्रस्तावित क्रानून मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाता है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। यह क़ानून आने से प्रत्येक मतदाता को एक बोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप मुख्यमंत्री के काम से संतुष्ट नहीं है, और उसे बदलना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका बोट नही है। बल्कि एक

सुझाव है। इस कानून का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें- Tinyurl.com/VvpCm

मुख्यमंत्री को बदलने की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निचे दिए है

(1)

मुख्यमंत्री के लिए आवेदन: 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर 10,000 रु का शुल्क लेकर उसे मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित करेगा, और एफिडेविट को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।

(2)

पदासीन मुख्यमंत्री निचे दी गयी दो स्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है:

नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा

मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग।

(3)

यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों या मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 10 लाख अधिक हो जाती है तो विधायक सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री नियुक्त सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।

स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, 3 करोड़ आबादी एवं 200 विधानसभा सीटो के राज्य में X मौजूदा सीएम है, और उसे विधानसभा में 120 विधायको का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये, इन 120 विधायको को चुनाव में कुल 1 करोड़ मत मिले थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 80 लाख है।

1. मान लीजिये, Y सीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 90 लाख नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी x सीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन विधायको का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 1 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो x अपना इस्तीफा दे सकता है।

2. अब मान लीजिये, ४ को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि x सीएम के रूप में संतोषप्रद काम कर रहा है, अतः X की स्वीकृतियां बढ़कर यदि 1.15 करोड़ हो जाती है, तो भी X सीएम बना रहेगा।

राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा - अथर्ववेद

sonukumai

चाँद पर पहुँची… और हम?
विदेश की महिलाएँ
रॉकेट पकड़कर चाँद पर पहुँच गईं।
और अपनी कुछ बहनें…
अब भी मोहल्ले की बालकनी में खड़ी हैं,
हाथ में दूरबीन नहीं –
दूसरों की ज़िंदगी नापने का स्कैनर लेकर।
“वो कितनी गोरी है…”
“ये कितनी काली है…”
“अरे! मैं तो उससे ज़्यादा सुंदर हूँ।”
“मुझ पर तो लाखों मरते हैं।”
“मैं खाना ऐसा बनाती हूँ कि गैस सिलेंडर भी इमोशनल हो जाए।”
और उधर सामने वाली…
“देखो कैसे चलती है।”
“देखो कैसे कपड़े पहनती है।”
“इसके चेहरे पर तो ऐंठन है, इसे ऐटिट्यूड कहते हैं।”
मैंने कहा –
“बहन, दुनिया मंगल और चाँद पर कॉलोनी बसाने की सोच रही है…”
वो बोली –
“अच्छा छोड़ो, पहले ये बताओ…
उसकी साड़ी असली है या कॉपी?”
विकास रॉकेट की स्पीड से भाग रहा है,
और हम अब भी
गोरी-काली, सुंदर-बदसूरत, रोटी-सब्ज़ी
के स्टेशन पर उतरे खड़े हैं।
इसलिए…
वो चाँद तक पहुँच गईं,
और हम…
अब भी पड़ोस की छत तक ही सीमित हैं। 😂

archanalekhikha

हमें जो स्वस्थ यौवन मिला है तो
ईश्वर की 'श्रेष्ठ कृपा' है।

ये यौवन किसी इंसान को काम आता है,
तो यौवन सही अर्थ में 'सक्षम' है।

जो बच्चों को अपनी बाहुओं से उठाकर 'ख़ुश' कर सकें,
वो यौवन 'ममता का पर्याय' बन सकता हैं।

कोई स्त्री जब हो संकट में और उसकी रक्षा कर सकें,
सही में तब यह यौवन 'रक्षक' कहलाता है।

किसी वृद्ध के 'बुढ़ापे का सहारा' बन सके,
वो यौवन सही अर्थ में 'दयावान' है।

parmarmayur6557

✤┈SuNo ┤_★_🦋
झुक जाने से अगर कोई, रिश्ता
             संवर जाए,

तो  बेहतर है  कि दिल से, वो
       अंहकार उतर जाए,

सही  और  गलत  की जंग में
       अक्सर घर टूटते हैं,

जीत ले कोई चाहे बहस, मगर
          इंसान छूटते हैं,

माफी वही मांगता है, जिसका
       दिल महान होता है,

वरना अकड़ में तो हर शख्स
     खुद में भगवान होता है,

मिट्टी का खिलौना है ये जीवन
      क्यों इतना गुमान करें,

चलो आज फिर से हम अपनों
          का सम्मान करें,

न तू बड़ा न मैं बड़ा,  बस  ये
        साथ सलामत रहे,

दिलों में नफरत नहीं बस खुदा
         की इबादत रहे..❣
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#𝕁𝕒𝕚_𝕊𝕙𝕣𝕖𝕖_𝕂𝕣𝕚𝕤𝕙𝕟𝕒_ 🙏🏼
#𝐉𝐀𝐈_𝐒𝐇𝐑𝐄𝐄_𝐑𝐀𝐌 .🚩
#𝔾𝕠𝕠𝕕_𝕄𝕠𝕣𝕟𝕚𝕟𝕘_ 🌞
╭─❀🥺⊰╯ 
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#motivatforself 😊°  
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪   
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥

loveguruaashiq.661810

Jay badri vishal lal
miss you Gurez

virdeepsinh

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

આલ્બમ ખોલી જોયું તારી તસવીર જોઈ રાત્ત તો સુધરી સાથે સવાર પણ.....!!!
*દિવુ"એવું તો શું તારા મુખમાં ખેંચાણ કે દીકરી બની સાસરે પ્રયાણ.....!!!
. - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

new psychological thriller, mysterious, suspense book is ready for the readers ☠️☄️✨

pithadiyadhruv930187

लाइफ में, कुछ तो, सिक्रेट होना चाहिये ।
वरना लोग हमारी, व्येलू करना छोड देते हैं।।

nandiniagarwal835328

"kis kis ko fictional story pasand hai jara comment karo supporters 👍🏻✨"

pithadiyadhruv930187

500K downloads for my stories. Thank you readers for your continious support over two years.

kattupayas.101947

“ज़िंदगी: एक छोटी-सी यात्रा” 🍂⌛✨
https://whatsapp.com/channel/0029VbBgJYA1SWt3jmeneP2I

jiwatma

હું પણ ખોટો સાબિત થયો છું ઘણી વાર,
ભૂલનો સ્વીકાર કરી સાચો રસ્તો શોધ્યો છે,

અંધકાર ચૌતરફ ફેલાયેલો છે ઘણી વાર,
દીવો પડખે રાખી સાચો ઉજાસ શોધ્યો છે,

અહંકારના ભારથી પડ્યો છું ઘણી વાર,
નમ્રતાના માર્ગે જઈ પોતાને શોધ્યો છે,

શું કહેશે જગ જન એ વિચાર્યું નથી ઘણી વાર,
આત્મસ્વર સાંભળી જીવનનો અર્થ શોધ્યો છે.

મનોજ નાવડીયા

manojnavadiya7402

अरे . बहु जी ' बर्तन साफ होने में नही आ रहे है।
गर्म पानी दे जाओ ' प्रेमवती अपनी सेठानी को आवाज लगाती है। ' और सेठानी गर्म पानी लेकर बुढी ' अम्मा को पानी देती है। लो . अम्मा जी पानी अब साफ होंग बर्तन '
तभी प्रेमवती घूरते हुए। जै का सेठानी कटोरा भरकर झूठन इसे कूड़े मे डालोगी ' सेठानी हां अम्मा जी '
प्रेमवती अरे हम वार ' की बात कहो तो साची है।
पड़ी लिखी हो कर घर का आधा खाना बचा हुआ कुड़ेदान की जगह सड़क पर घूम रहे पशु पक्षी को डाल दो तो किसी का भला हो। सेठानी चौकते हुए हां अम्मा जी सही बोले है।
सेठानी को प्रेमवती के कहा बुरा न लगा। एक बर्तन मे झूठन ' व खराब खाना सब्जियो फल के छिलके बर्तन में इक्कट्ठे किये ' और बाहर सड़क के पशु को डालना शुरू कर दिया ।
सेठनी सोचने लगी जो बाते ' मोबाइल पर पढ़ती थी, मैसैस ' . कूड़ेदान मे मुंह डाल कर खाने से ' पशुओ को कितनी चोट लगती है। जो बात हर समय हाथ मे लगा, मोबाइल न समझा सका वो बात बूढी अम्मा ने सिखा दी।

nandiniagarwal835328

सच्चे रिश्ते कुछ नहीं मांगते,
शिवाय वक्त और इज्जत के।

nandiniagarwal835328

सपनों में भी तुम्हारे सिवा किसी और का ख्याल नहीं, आता । वे हिसाब प्यार करते है हम।
ख्वाबों मे भी तुम्हारा साथ निभाते है हम ,
तुम हो कि हर पल ठुकराते हों  हमे,
हर पल तुम्हारे आने की आहट दरवाजे पर महसूस करते हैं हम ।
तमन्ना कभी पूरी नहीं हुई , ' 
फिर भी तेरी आंखें मे अपनी पूरी दुनिया देखते है हम ।
तुम से प्यारा कोई लगता नहीं  हमे,
तुम्हारी आदत हो गयी है ,
कैसे जुदा हो कर - रहे हम।
एक पल तुम्हारी अवाज न सुने पल भर का समय सौ बर्ष के बराबर बीताते हम वही शादी से पहले वाली चाहत बन जाये हम।
हर पल सांसो पर तुम्हारा नाम हर संगीत मे गुनगुनाते है हम ,
सोलह श्रृंगार मेरे तेरे लिए जैसे भी हैं साजन की सजनी है आखिर हम ,
गिला शिकवा दुर करके तो देखो चाहत मे नजर फिर भी आयेगे हम ,
रूठो न हम से ऐसे फिर कभी लौट कर न आये हम।
अगले जन्म का वादा नही करते दुसरे घर से ढोली आयी , इस चौखट से अर्थी पर ही जाऊँगी मै ,
ज्यादा देर न हो जाये हमारी वफा को पहचान लो कदर , समझो बीच मंझधार मे न वि छडेगे हम।

nandiniagarwal835328

क्यों समाज तूने यह रीत बनाई है
अपनी बिटिया हुई पराई है
न तू सीता है, न तू राधा है
त्याग की मूरत ऐसी बनाई है,
कितने बने महल-द्वारे
घर की चारदीवारी
चौखट बनी लक्ष्मण रेखा है,
देश को आजादी मिली
पर तू कभी आजाद न हुई है ,
गली-गली चौबारे पर बैठा बहरूपिया है
मौसम की तरह दुनिया रंग बदलती है
नारी तेरा रंग बदलना
दुनिया को रास न आया है,
अपनों को भूल न सके
पराए को अपनाया, समझ न सके
ऐसे भंवर में फंसी न रह सके
न निकल सके,
दिन गुजरे महीने बीते
दुखों की गिनती सालों में हो जाती है,
ऐसी रहती तू जैसे पंख काट दिए पंछी के,
क्यों जुर्म करें नारी पर ये लक्ष्मी है,
सरस्वती है,
जब अति हो जाए मां दुर्गा का अवतार है
औरत ही नानी, औरत ही दादी
औरत ही मां, बुआ, मौसी है
औरत न हो तो ये दुनिया अधूरी है।

nandiniagarwal835328

क्या है बनारस

सिर्फ़ घाट की सीढ़ियाँ नहीं,
समय की गोद में बैठी
एक अनंत कथा है बनारस...

हर पाप, हर पीड़ा को
अपने आँचल में समेटती,
माँ गंगा है बनारस.....

हर साँस में मंत्र,
हर मौन में विश्वास,
सब कुछ समेटा है बनारस...

काशी की पवित्रता,
अस्सी घाट का शोर,
शिव की नागरी है बनारस...

जहाँ चिता की आग भी
सिखा दे जीवन का पाठ,
वहीं मोक्ष का द्वार है बनारस...

हर गली, हर कोना
अपनी कहानी सुनाता है,
हर दीवार में लिपटा
इतिहास है बनारस...

सुबह की पहली रोशनी में
घंटियों की गूंज,
शाम के जलते दीपों में
आसमान की मुस्कान है बनारस...

हवा के झोंके में छुपा,
ज़िंदगी का गीत है बनारस...

शहर नहीं, प्रेम का दूसरा
नाम है बनारस...

chaurasiyas

Waiting for right ideas

kattupayas.101947

क्यों हम साधारण नागरिक रिकालिस्ट्स बन गए?

तो किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया? हमें नहीं पता कि, किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया। न ही हम यह जानते है कि हमारे द्वारा लिखे गए विवरणों को पढ़कर कई कार्यकर्ता क्यों रिकालिस्ट्स बन गए। न ही हमें इस कारण का कोई अंदाजा कि क्यों 1920 में महात्मा चन्द्रशेखर आजाद रिकालिस्ट्स बन गए, और क्यों 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी रिकालिस्ट बन गए थे। हालांकि इस सम्बन्ध में हमारे पास कोई ठोस कारण नहीं है, कि किस विचार ने हमें रिकालिस्ट्स बनने की प्रेरणा दी। लेकिन जितना हम देख पाते है, हमें इसके दो संभावित कारण नज़र आते है;

1. सहज बोध यानी कॉमन सेन्स (Common sense)

2. अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा बांग्लादेश आदि से होने वाले युद्ध का भय।

(2.1) सहज बोधः पहला कारण सीधा सादा सहज बोध है। सामान्य समझ, जो कि हर मनुष्य में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होती है। सबसे पहले हम आपसे एक सवाल करना चाहेंगे। यदि आप इस सवाल का जवाब देने से इंकार करते है, तो हम आपको अपनी बात नहीं समझा पाएंगे। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप इस सवाल का अपने विवेक से जवाब दें। इसके उपरान्त ही आगे पढ़े।

मान लीजिये कि आप एक कारखाने के मालिक है, जिसमे 1000 कर्मचारी और प्रबंधक वगेरह कार्य करते है। और अचानक सरकार निम्नांकित क़ानून लागू कर देती है:

1. आप किसी भी प्रबंधक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले, तथा किसी भी कर्मचारी को 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं

निकाल सकेंगे।

2. आपको सभी कर्मचारियों को अगले 5 वर्ष के लिए और प्रबंधको को उनकी 35 वर्षीय सेवाकाल के लिए देय वेतन हेतु अग्रिम भुगतान के चेक देने होंगे।

3. यहां तक कि यदि कोई आपके कारखाने से सामान की चोरी कर रहा है तो, किसी न्यायधीश की अनुमति बिना, न तो आप उसे निकाल सकेंगे न ही दंड दे सकेंगे, न ही उसे आपके कारखाने में आने से रोक सकेंगे।

हमारा आपसे सवाल है कि ऐसी स्थिति में 'अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'?

कृपया इस सवाल का जवाब देने के बाद ही आप आगे पढ़े। हम अपना प्रश्न फिर से दोहराते है: 'क्या इन कानूनो के आने के बाद, अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में कर्मचारियों और प्रबंधको के अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'?

दूसरे शब्दों में, यदि हम नागरिको के पास जजो, सांसदों, विधायको, मंत्रियो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं हुआ तो, ये सभी पदाधिकारी भ्रष्ट और अनुशासनहीन हो जाएंगे। इसीलिए महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने 1925 में कहा था कि वोट वापसी कानूनो के अभाव में लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा'। ठीक यही बात महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के प्रथम पृष्ठ में कही थी कि -

यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं हुआ तो, वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा।

जूरी प्रक्रियाएं ग्रीस में 600 ईसा पूर्व लागू हुयी थी। जिसके परिणामस्वरूप ग्रीस अपने आप को इतना ताकतवर बना पाया कि उन्होंने सिर्फ 1 लाख सैनिको की मदद से अपने साम्राज्य का विस्तार तुर्की से लेकर यमुना नदी के किनारे तक कर लिया था। अमेरिका में 1750 ईस्वी में बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाएं लागू हुई, और यह मुख्य कारण था जिससे अमेरिका इराक़, सऊदी अरब, पाकिस्तान और लीबिया को कब्जे में कर पाया। अमेरिका की सूची में अगले नाम ईरान और भारत है। लेकिन किसी सामान्य समझ के व्यक्ति को वोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओं की उपयोगिता समझने के लिए इतिहास की किताबो के पन्ने पलटने या अमेरिका के उदाहरण देखने की जरुरत नहीं है - क्योंकि बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओ का महत्त्व समझने के लिए जिस चीज की आवश्यकता है, वह 'कॉमन सेन्स' है।

हमारे देश से जुडी नागरिक समस्याएं किसी भी प्रकार से उस कारखाने की स्थिति से अलग नहीं है, जहां कारखाने के मालिक को अपने कर्मचारियों और प्रबंधको को 5-35 वर्ष तक नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है। हमारे देश की समस्याओ का समाधान भी वही है, जो कि अमुक कारखाने की समस्याओ का समाधान है 'भ्रष्ट जजो, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के बहुमत को दे दिया जाए'। यह पुस्तक जूरी प्रक्रियाओ एवं बोट वापसी कानूनो के बारे में है, जिनकी सहायता से भारत के नागरिक "बहुमत का प्रदर्शन" करके भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओ को नौकरी से निकाल सकेंगे। पुस्तक में वे विवरण भी दर्ज किये गए है, जिनका पालन करके इन प्रक्रियाओ को जन साधारण देश में लागू करवा सकेंते है ।

*The Greatest Revolutionary Book in the history of mankind " VOTEVAPSI DHANVAPASI " describing root cause of every problem our society/ Country is facing as a whole & most importantly permanent solutions to end the same* 🇮🇳 🔥

*भारत के इतिहास में सबसे बड़े आंदोलन/क्रांति की मेनिफेस्टो बुक Amazon, Flipkart व Notion press में जाहिर हो चुकी है कृपया आप इसे लिंक से खरीद ले* 👇🔥🇮🇳

सूचना : *वोटवापसी जूरी खंबा आंदोलन(राईट टू रिकॉल पार्टी इसका एक हिस्सा है)का राष्ट्रिय घोषणा पत्र* अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है :
.
पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* "
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भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ
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(1) Notion press store :
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Discount coupon code : RECALLIST
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वोट वापसी धन वापसी भाग -1
.
https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1
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वोट वापसी धन वापसी भाग - 2
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https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2
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sonukumai

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वो शख़्स मेरे लिए आज भी ख़ास है

jaiprakash413885