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New bites

वो एक अजनबी नजदीक आया ही था मोहन..
वापस अजनबी होकर बहुत दूर जाने के लिए..

momosh99

खूबसूरती का तो मोहन तूने क्या खूब भण्डार पाया..
मगर तू दिल ये अपना क्यों खूबसूरत लेकर नहीं आया ..

momosh99

અતીતની સ્મૃતિઓ આજ
યાદોને ઝૂલે
રમતાં હતાં બાણપણમાં
દોરડાને ઝૂલે…
-કામિની

kamini6601

कविता

parthpatil927048gmail.com003294

ये जो समंदर-सा अहसास है,
इन नदियों के पास कहाँ।

ये तो घूमती है,
भटकती है,
गूंजती है,
फिर हवाओं को अपने में समाती है।

मुड़कर देखती भी नहीं,
टहलती जाती है एक ओर।

जो बसावटे हैं, उन्हें छोड़,
जो वनस्पति है, उन्हें छोड़,
आगे की ओर—जैसे कोई भागा जा रहा हो।

ये मिलना चाहती हो किसी जिम्मेदार से,
जैसे इनका कोई अपना बनाता हो।
इन्हें हवा में उड़कर मिलो दूर से,

जैसे कि समंदर तपकर उड़ता है
इन नदियों के लिए,
उन पहाड़ों पर जो बसे हुए हैं।
नदियों के ऊपर,

ये मंडराती हुई
मिलती है समंदर से—
जो खड़ा हो
जैसे सिर्फ इनसे मिलने पर।

समंदर तो खुद एक देवता है,
जिसमें खोज अभी बाकी है,
जिसकी पहुँच अभी बाकी है।

जिसकी लहरों में खुद संसार बसा है,
जिसकी ज़मीनें दुनिया को जोड़ती हैं,
और नदियाँ इसको पूजती हैं।


ये तो खारा है।
नदियाँ घूमती हैं।
नदियाँ मीठी हैं।

gautamverma801543

क़त्ल करती तो दुनिया की नज़र में आ जाती
समझदार मेहबूबा थी इश्क कर के छोड़ गई

anisroshan324329

बदला नही था वक्त हम ही बदल गये
औरो के फासलो से हम तो सम्भल गये
तू इंतेकाम लेने आया है किस बात का
हम तो पहले ही कितना कुछ भुगत गये.

mashaallhakhan600196

‘હે દાદા ભગવાન! તમે તો મોક્ષ લઈને બેઠા છો. અમને તમે મોક્ષ આપો. નહીં તો અમને નિમિત્ત ભેગું કરી આપો!’ આ પ્રાર્થનાથી આપણું કામ થઈ જાય! - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

बिहार: अतीत की गौरवशाली गाथा और भविष्य की अनकही कहानीबिहार:
अतीत की गौरवशाली गाथा और भविष्य की अनकही कहानी
बिहार—एक ऐसा प्रदेश, जिसका नाम आते ही लोगों के मन में अलग-अलग तस्वीरें उभरती हैं। किसी को यह इतिहास की भूमि लगता है, तो किसी को संघर्ष का प्रतीक। लेकिन सच्चाई यह है कि बिहार इन दोनों से कहीं अधिक है। यह वह धरती है, जिसने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता और लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाया। बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक जीवित एहसास है—जो दर्द से गुज़रकर भी उम्मीद करना जानता है।
इतिहास की गोद में पला बिहार
बिहार का इतिहास इतना समृद्ध है कि उसके बिना भारत की कहानी अधूरी लगती है। यही वह भूमि है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया और पूरी दुनिया को अहिंसा व शांति का मार्ग दिखाया। यही वह जगह है जहाँ महावीर स्वामी ने जैन धर्म का प्रचार किया। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने उस दौर में शिक्षा का दीप जलाया, जब दुनिया का बड़ा हिस्सा अज्ञानता में डूबा हुआ था।
यहाँ की धरती ने चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे महान शासक दिए, जिनकी नीतियाँ आज भी अध्ययन का विषय हैं। लोकतंत्र की जड़ें भी यहीं से जुड़ी मानी जाती हैं। यह इतिहास बिहार को सिर्फ गौरव नहीं देता, बल्कि जिम्मेदारी भी देता है—कि वह फिर से अपनी पहचान को मजबूत करे।
संस्कृति जो आत्मा से जुड़ी है
बिहार की संस्कृति उसकी आत्मा है। यहाँ की परंपराएँ सादगी और गहराई से भरी हुई हैं। छठ पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ इंसान प्रकृति के सामने नतमस्तक होकर सूर्य को धन्यवाद देता है। यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि अनुशासन, शुद्धता और सामूहिकता का प्रतीक है।
भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका जैसी भाषाएँ यहाँ की संस्कृति को और समृद्ध बनाती हैं। लोकगीत, सोहर, कजरी, विवाह गीत—इनमें बिहार की खुशियाँ, दर्द और रिश्तों की मिठास झलकती है। गाँव की चौपाल, खेतों में काम करते किसान, और शाम को ढलते सूरज के साथ लौटते मजदूर—ये दृश्य बिहार की असली पहचान हैं।
संघर्ष: जो मजबूरी बना, लेकिन हार नहीं
बिहार का नाम अक्सर संघर्ष से जोड़ दिया जाता है। बेरोज़गारी, बाढ़, सूखा और पलायन—ये समस्याएँ वर्षों से यहाँ की सच्चाई रही हैं। लाखों बिहारी रोज़गार और बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घर-परिवार से दूर चले जाते हैं। कोई दिल्ली जाता है, कोई मुंबई, तो कोई पंजाब या खाड़ी देशों तक।
लेकिन यह पलायन कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का प्रमाण है। एक बिहारी जब अपना गाँव छोड़ता है, तो वह सिर्फ अपना सामान नहीं उठाता, बल्कि माँ-बाप की उम्मीदें, गाँव की दुआएँ और अपने प्रदेश का नाम भी साथ लेकर चलता है। यही कारण है कि देश के हर कोने में बिहारी अपनी मेहनत और ईमानदारी से पहचान बनाते हैं।
शिक्षा और मेहनत: बिहार की असली ताकत
अगर बिहार को सही मायनों में समझना है, तो उसकी शिक्षा के प्रति दीवानगी को समझना होगा। यहाँ एक साधारण परिवार का बच्चा भी बड़े सपने देखता है। वह कठिन हालात में भी पढ़ाई नहीं छोड़ता। प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार के युवाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यहाँ प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही।
IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक—हर क्षेत्र में बिहार के लोग अपनी छाप छोड़ रहे हैं। यह साबित करता है कि समस्या प्रतिभा की नहीं, अवसरों की रही है। अगर बिहार को सही दिशा और संसाधन मिलें, तो यह राज्य फिर से देश का नेतृत्व कर सकता है।
ग्रामीण बिहार: जहाँ सादगी बसती है
बिहार का असली चेहरा उसके गाँवों में बसता है। आज भी यहाँ रिश्तों में अपनापन है। पड़ोसी सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं। सीमित साधनों के बावजूद, लोग दिल से अमीर हैं। गाँव की सुबह मुर्गे की बाँग से शुरू होती है और रात लालटेन की रोशनी में कहानियों के साथ खत्म होती है।
खेती आज भी यहाँ की रीढ़ है। किसान मौसम की मार झेलते हैं, फिर भी उम्मीद नहीं छोड़ते। हर नई फसल के साथ वे एक नए सपने को बोते हैं—कि आने वाला कल बेहतर होगा।
बदलता बिहार: उम्मीद की नई किरण
आज बिहार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सड़कों, पुलों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में धीरे-धीरे सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है। युवा अब सिर्फ सरकारी नौकरी के सपने तक सीमित नहीं, बल्कि स्टार्टअप, स्वरोज़गार और नए विचारों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
डिजिटल दुनिया ने बिहार के युवाओं को एक नया मंच दिया है। अब छोटे शहरों और कस्बों से भी प्रतिभा सामने आ रही है। यह बदलाव भले ही धीमा हो, लेकिन स्थायी है।
बिहार की सबसे बड़ी पूँजी: उसका युवा
बिहार का युवा आज सवाल करता है, सोचता है और बदलाव चाहता है। वह अपने राज्य को पिछड़ा कहलाते नहीं देखना चाहता। उसके भीतर गुस्सा भी है और जुनून भी। अगर इस ऊर्जा को सही दिशा मिले, तो बिहार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
निष्कर्ष
बिहार को सिर्फ उसकी समस्याओं से नहीं, उसकी संभावनाओं से पहचाना जाना चाहिए। यह वह धरती है जिसने अतीत में दुनिया को रास्ता दिखाया और भविष्य में भी दिखा सकती है। बिहार दर्द से गुज़रा है, लेकिन टूटा नहीं है। उसकी मिट्टी में आज भी संघर्ष से जन्मी उम्मीदें सांस लेती हैं।
बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं—यह एक भावना है, एक पहचान है, और एक सपना है, जो आज भी बेहतर कल की तलाश में ह

jhakajal

तेरी यादें तुझसे मिलने को मजबूर करती हैं... I
मेरी हसरते देहलीज पर तेरी रोज मरती हैं... II

deepakbundela7179

Bhairav Battalion 🪖 | India's New Light Commando Force

આ વખતના ૭૭ મા પ્રજાસત્તાક દિનની પરેડમાં કર્તવ્ય પથ પર સિંહ ગર્જના કરતી ભારતીય સેનાની એક નવી રેજિમેન્ટ કૂચ કરતી જોવા મળી હતી.આ નવી રેજિમેન્ટનું જેવું નામ છે એવું જ કાર્ય છે. તો ચાલો જાણીએ, ભૈરવ બટાલિયન વિશે; સાથે જાણીશું તેની રચના, ઉદેશ્ય, રોલ - મિશન વગેરે.

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mothiyavgmail.com3309

इलेक्ट्रॉन–नाभिक स्थिरता सिद्धांत

(सूत्रों के आधार पर पूर्ण व्याख्या)

1. प्रस्तावना

परमाणु के अंदर नाभिक (nucleus) धनात्मक आवेश (+Z) रखता है और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश (−e) रखते हैं। भौतिकी का मुख्य प्रश्न यह है कि इतने अधिक आकर्षण बल के बावजूद इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर क्यों नहीं जाता? इस सिद्धांत में इसका उत्तर केवल सूत्रों (सूत्‍रों) के माध्यम से दिया गया है।

2. नाभिक–इलेक्ट्रॉन के बीच बल (Fi)

नाभिक द्वारा i-th इलेक्ट्रॉन पर लगाया गया आकर्षण बल Coulomb नियम से दिया जाता है:



जहाँ:

Fi = i-th इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला आकर्षण बल

K = Coulomb स्थिरांक

Z = नाभिक का आवेश (protons की संख्या)

e = इलेक्ट्रॉन का आवेश

rᵢ = i-th इलेक्ट्रॉन की नाभिक से दूरी

👉 यह बल हमेशा नाभिक की ओर होता है।

3. दूरी का प्रभाव (rᵢ का रोल)

सूत्र से स्पष्ट है:



अर्थात:

यदि rᵢ कम होता है → Fi बहुत अधिक बढ़ जाता है

यदि rᵢ अधिक होता है → Fi कम हो जाता है

यदि केवल यही बल कार्य करता, तो इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जाना चाहिए था।

4. इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बल (Fᵢⱼ)

परमाणु में एक से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन दूसरे इलेक्ट्रॉन को प्रतिकर्षित करता है:



जहाँ:

Fᵢⱼ = i-th और j-th इलेक्ट्रॉन के बीच प्रतिकर्षण बल

rᵢⱼ = दोनों इलेक्ट्रॉनों के बीच दूरी

j ≠ i = इलेक्ट्रॉन स्वयं अपने ऊपर बल नहीं लगाता

👉 यह बल नाभिक से बाहर की दिशा में कार्य करता है।

5. बलों का संतुलन (Force Balance)

i-th इलेक्ट्रॉन पर दो मुख्य प्रभाव होते हैं:

(A) अंदर की ओर बल



(B) बाहर की ओर प्रभाव

इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण

इलेक्ट्रॉन की गति से उत्पन्न प्रभाव

जब:



तब इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दूरी (rᵢ) पर स्थिर हो जाता है।

6. इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरता?

यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बहुत पास जाए:

rᵢ बहुत कम हो जाता है

Fi अत्यधिक बढ़ जाता है

ऊर्जा न्यूनतम से कम होने लगती है (जो संभव नहीं)

इसलिए प्रकृति एक न्यूनतम दूरी बनाए रखती है जहाँ बल संतुलित रहते हैं।

7. सिद्धांत का निष्कर्ष

इस सिद्धांत के अनुसार:

नाभिक इलेक्ट्रॉन को Fi बल से अपनी ओर खींचता है।

इलेक्ट्रॉन आपस में Fᵢⱼ बल से एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।

दूरी घटने पर आकर्षण बढ़ता है, पर बाहर की ओर प्रभाव भी बढ़ता है।

एक विशेष दूरी पर ये सभी प्रभाव संतुलित हो जाते हैं।

👉 इसी संतुलन के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरता और परमाणु स्थिर रहता है।

8. ऊर्जा की दृष्टि से व्याख्या (Energy Point of View)

इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा दो भागों से मिलकर बनती है:

(A) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच स्थितिज ऊर्जा:



ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि यह आकर्षण बल की ऊर्जा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, स्थितिज ऊर्जा अधिक ऋणात्मक होती जाती है।

(B) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

इलेक्ट्रॉन की गति के कारण उसमें गतिज ऊर्जा होती है:



जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, उसकी गति बढ़ती है और गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है।

prabhjotsinghnagra003282

कविता: तुम होती

"काश तुम होती, मुझे समझ पाती,
मेरी खामोशी को पढ़ लेती।
काश तुम होती, मुझसे कहती,
दिल की बातों को नजर से सुनती।

मेरे बारे में थोड़ा जान लेती,
मेरी पीड़ा को पहचान लेती।
तुम तो समय हो, बहते हुए मिले ,
तुम्हें क्या फर्क पड़ता है, रुके या चले।

मैं तुम्हारे पीछे दौड़ रहा हूँ,
हर दिन खुद को भुला रहा हूँ।
अगर कभी तुम मेरे पीछे आती,
तो मेरी थकान मिट जाती।

यही है भाग-दौड़ का जीवन,
हर चेहरे के पीछे छिपा है एक सावन।
भीड़ में रहकर भी मैं तन्हा हूँ,
अपने ही साए से अनजान हूँ।

यार, मैं सच में अकेला हूँ,
बिना आवाज़ का सवाल हूँ।
कोई बस एक बार पूछे,
“कैसे हो?” — मन कहता है बहुत अच्छे ।"

पल्लव सान्याल

pallavsanyal205886

कविता:हे रात…

हे रात, तुम क्या जानती हो
तुम्हारी गोद में जागते सब ,
वे नींद में नहीं होते —वे अपने को
दफ़्न कर रहे होते हैं कब।

उनकी सीने में दुख का अथाह सागर,
उनकी धड़कन में जलती तेज लौ का अथाह डागर ,
हर साँस के साथ चलती उतरती
अनकही सी मौत को वो निहारती।

वे आसमान के चमकीले तारे नहीं हैं,
जो खुलकर चमक सकें,
वे बुझती-बुझती लौ हैं
जो काँपते-काँपते थम जाती हैं।

खुशियाँ कब की राख हुईं,
हँसी बस एक दिखावा हुई,
विनाश के उस मोड़ पर
खतम हुआ है उनका उस ठोर पर।

ज़िंदा लोग अँधेरे से डरते हैं,
उन्हें भोर का इंतज़ार रहते है,
पर जिनके भीतर सूरज मरते है,
वे हर पल अँधकार सहते है।

लाशों की कोई सुबह नहीं है,
न कोई नया खिलता सवेरा है,
उनके हिस्से में लिख दी गई
अनंत रात का एक डेरा है।

इसलिए हे रात, समझ लो तुम,
जो तुम्हारा हाथ कसके थामे हैं,
वे इस दुनिया में जीते नहीं हैं,
बस साँसों का बोझ उठाए रखते हैं।

चलते-फिरते साए हैं वे,
जिनमें जीवन की कोई आह नहीं है,
नाम भले ही इंसान का ये—
हक़ीक़त में साँस लेती वह लाश हैं।

पल्लव सान्याल

pallavsanyal205886

नींद आखिर ठहरेगी भी कैसे ?
सब मिलाकर दो ही तो करवटें हैं
एक यादों की तरफ,
एक उम्मीदों की तरफ।

anisroshan324329

શું કામ દુઃખી થવું ! શું કામ આપઘાત કરવો!! શું કામ ઝેર પીવું,શું કામ ડૂબી મરવું, શું કામ વીજળી હાર્યે બાથ અને શું કામ ખાવો પડે ગળે ફાંસો??
❤️
ધીરજ રાખ દોસ્ત થોડી ધીરજ રાખ,ધંધામાં ધ્યાન દે,રૂપિયા કમાઈ લે,તારા માટે પૂજા કરેં છે,પીપળાની!!!!કોઇ સુંદર છોકરી !!!
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य

savdanjimakwana3600

दोहा - श्री जी कनक प्रभा

कला जन्म से थी हुईं, जीवन की मुस्कान।
कनक प्रभा हो पथ चली, शासन माता जान।।

सूरजमल जिनके पिता, छोटी बाई मातु।
कनक बन गई एक दिन,सोना जैसी धातु।।

श्री तुलसी ने कला को, दिया नया था नाम।
कनक प्रभा की कीर्ति से, फैला नव पैगाम।।

तेरा पंथी साधिका, तुलसी दीक्षा पाय।
साध्वी प्रमुखा रूप में, पद को किया सुभाय।।

कनक प्रभा जी साधिका, बहुगुण की थीं खान।
जैन, भिक्षुणी, लेखिका, सन्यासी सम्मान।।

कनक प्रभा जी का हुआ, अमर जगत में नाम।
बिना मोह माया किया, रखे भाव निष्काम ।।

तुलसी कृतियों का किया, सदा आपने गान।
तनिक नहीं था आप में, लोभ, मोह अभिमान।।

सकल जगत में आपका, बड़ा मान सम्मान।
चरण वंदना सब करें, कृपा आपकी जान।।

शासन माता को करूँ, नमन जोड़ कर हाथ।
सूक्ष्म रूप में ही सही, रहो हमारे साथ।।

महिलाओं को कनक ने, नई दिखाई राह।
उन्नति पथ पर ले बढ़ें, ये थी उनकी चाह।।

साध्वी जी ने गढ़ दिया, एक नया प्रतिमान।
विविध पदों पर काम कर, रहीं सदा गतिमान।।

शासन माता कनक ने, पाया कउत्तम स्थान।
इक्यासी की उम्र में, जीशवन का अवसान।।

धन्य-धन्य जीवन हुआ, यश गाथा उत्कर्ष।
जिनसे प्राणी सीखते, क्या होता है हर्ष।।

तेरापंथी साध्वी, ऊँचा तव स्थान।
तीस वर्ष में मिल गया, साध्वी प्रमुखा मान।।

कनक प्रभा जी आपको, शत-शत बार प्रणाम।
जैन धर्म को आपने, दिया नया आयाम।।

महरौली में आपका, हुआ देह का त्याग।
जैन धर्म के लोग सब, मानें इसे प्रयाग।।

दिव्या पर करिए कृपा, कनक प्रभा जी आप।
और निधी का संग में, हरो शोक संताप।।

सुधीर श्रीवास्तव

sudhirsrivastava1309