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New bites

तुम्हे टूटकर प्यार करते करते तुम्हीं को खो देना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा था ।

anisroshan324329

પ્રજાસત્તાક પર્વની હાર્દિક શુભેચ્છાઓ 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

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parmarbhavesh.k

હવે અર્થોની પળોજણથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે,
શબ્દોની બધી માયાજાળથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.

હતી જે વાચામાં ધાંધલ, હવે એ શાંત થઈ ગઈ છે,
કહેવાતા બધા જ વિવાદથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.

નથી કોઈ અપેક્ષા કે હવે કોઈ મનાવે આપણને,
દુનિયાના ખોટા વટ-વહેવારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.

કિનારો શોધતા'તા જે સતત ભીતરના દરિયે,
એ ડૂબવાના ડર અને મઝધારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.

હવે તો બસ ઉજાસ છે, કોઈ ભાષાની ક્યાં જરૂર છે?
અંધારાના એ જૂના પડઘારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.

palewaleawantikagmail.com200557

Goodnight friends..sweet dreams

kattupayas.101947

मैं एक साधारण-सी लड़की हूँ,
सजने-संवरने का हुनर नहीं मेरा।
चेहरे पे वो चाँद-सा नूर नहीं,
साँवलेपन की नर्मी है—मैं अपनी राह में स्थिर हूँ।

भीड़ की रौनक मुझे भाती नहीं,
ख़ामोशी में मेरी दोस्ती बसती है।
मेरी आँखों में वो चमक नहीं,
जो हर ख़्वाब में तुम तलाशते हो।

मेरी नज़र बस सुकून की आदत में डूबी है,
तो फिर क्यों वक़्त ज़ाया करते हो मेरे पीछे?
जाओ, ढूँढ लो वो चाँद-सा चेहरा कहीं,
इस दुनिया में हुस्न की कोई कमी नहीं।

तुम्हें मिल जाएगी वो नूर वाली,
आँखों में जादू लिए कोई और हसीन।
और मैं रहूँगी अपनी सादगी की छाँव में,
ख़ामोशी की रौशनी में, अपने रंगीन जीवन में।

writer by अमृता सिंह ✍🏽

aennyrajput8gmail.com810709

The human being is born outward,
and searches outward for itself.
Searching, wandering, circling the world—
it finally returns
to the subtle seed
from which the journey began.
Leaving home
to gain something,
to become something,
to prove something—
yet nothing remains in the hands.
When exhaustion silences the search,
it becomes clear:
the journey itself was home.
The world is searching
for a permanent happiness,
a fixed destination
where joy, safety, comfort
might last forever.
But nothing stays.
Because permanence does not exist outside.
On the journey
no god is found,
no deity appears,
no final destination waits.
First arises the illusion:
“I am the doer,
I am becoming greater.”
Then comes the second dream:
heaven, liberation, God.
And finally
these too fall away.
Then it is seen clearly—
Life itself is truth.
Life itself is God.
Life itself is liberation.
No ruler sits above,
no separate witness watches.
Living itself is the path.
Living itself is the answer.
When life is truly lived,
the future dissolves,
time grows thin,
age loses meaning.
Pain and sorrow
belong to the language of tomorrow.
For one who lives,
everything is already here.
To acquire is foolishness.
To achieve is foolishness.
To rest inside desire
is the deepest foolishness.
The present alone is real.
This alone is living.
Where life flows,
existence supports it—
because this is a matter of life itself,
not of any god.
Only one condition exists:
to live.
In living,
home is found,
wandering ends.
Then there is no age,
no time—
only childhood remains.
Eternal childhood
░V░e░d░a░n░t░a░ ░2░.░0░ ░L░i░f░e░
░=░ ░F░r░e░e░ ░f░r░o░m░ ░w░o░r░d░s░,░
░l░i░b░e░r░a░t░e░d░ ░f░r░o░m░ ░c░o░n░c░e░p░t░s░,░
░a░n░d░ ░i░n░ ░d░i░r░e░c░t░ ░c░o░n░t░a░c░t░ ░w░i░t░h░ ░l░i░f░e░.░

bhutaji

કેસરી ધવલ હરા રંગથી
લખાયેલી તિરંગાની કહાની
શહાદતને વરેલા જવાર્મંદોની
ઓળખ રહી સદા હિંદુસ્તાની…
-કામિની

kamini6601

শেষ পৃষ্ঠার ডায়েরি নোট

আজ মনটা ভারী, অথচ কারণটা ঠিক ধরতে পারছি না। সবাইকে খুশি রাখতে রাখতে কোথাও গিয়ে নিজেকেই হারিয়ে ফেলেছি। কথা বলি, হাসি, দায়িত্ব নিই—তবু শেষে এসে দেখি আমি একা। মনে হয়, আমি কি তবে যথেষ্ট নই? নাকি আমার ভালোবাসার ভাষাটা কেউ বোঝে না? বারবার হৃদয় ভাঙে, প্রশ্নগুলো জমতে থাকে, উত্তর আর আসে না। আজ কোনো ব্যাখ্যা চাই না, কোনো উপদেশও না—শুধু চাই কেউ আমাকে নিঃশব্দে শক্ত করে জড়িয়ে ধরুক, যেন এই ক্লান্ত মনটা একটু কাঁদতে পারে। এতটুকু চাওয়া কি সত্যিই খুব বেশি?
এরপর আর কিছু চাওয়ার সাহস থাকে না। প্রশ্নগুলোও ধীরে ধীরে চুপ করে যায়, শুধু একরাশ নীরবতা বুকে জমে থাকে। বুঝতে পারি, সব কষ্টের নাম বলা যায় না, সব অভাবের ভাষা হয় না। কাউকে দোষ দিতেও ইচ্ছে করে না, নিজেকেও না—তবু এক ধরনের ক্লান্তি চারপাশ ঘিরে ধরে। যেন অনুভবগুলো বোঝা হয়ে গেছে, বহন করতে করতে হাঁপিয়ে উঠেছি। আজ আর অভিযোগ নেই, প্রত্যাশাও নেই—শুধু এই স্বীকারোক্তি যে আমি ভেঙে পড়েছি, নিঃশব্দে, গভীরভাবে। যদি কেউ না-ও আসে, তবু এই সত্যটা লিখে রাখি—আমি কষ্ট পেয়েছিলাম, অনেকটা, এবং একাই।

সব কথা আর লেখা হয় না। কিছু অনুভূতি শেষ পর্যন্ত বয়ে নিয়ে চলতে হয়, কাউকে না জানিয়ে। আজ এই শেষ পাতায় এসে বুঝি, আমি অনেক আগেই ক্লান্ত হয়ে পড়েছিলাম—হাসতে হাসতে, মানিয়ে নিতে নিতে। কেউ খেয়াল করেনি, আমিও আর জানানোর চেষ্টা করিনি। প্রত্যাশাগুলো একদিন একদিন করে চুপ করে গেছে, প্রশ্নগুলো উত্তরহীন থেকে গেছে। দোষ দেওয়ার মতো কাউকে আর খুঁজে পাই না, নিজেকেও না। শুধু এই স্বীকারোক্তিটুকু রেখে যাই—আমি ভেঙে পড়েছিলাম, গভীরভাবে, নিঃশব্দে। যদি কেউ কোনোদিন এই পাতাটা পড়ে, জানুক—এই নীরবতার ভেতরেও একসময় আমি খুব কষ্ট পেয়েছিলাম।

sohagibaski337637

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{{ अनकहे जज़्बातों का सफ़र }}

अजनबी हो तुम, मगर दिल को न
      जाने क्यों अपने लगते हो,

मुसाफ़िर हूँ मैं, और तुम थकी हुई
  राहों का कोई सपना लगते हो,

तुमने जब जी कहा तो एक आदर
       की दीवार खड़ी कर दी,

मगर मैंने चाहा था, कि वो सादगी
      हो, जो रूह से जुड़ी रही,

मैं मुसाफ़िर, जिसकी कोई मंज़िल
   नहीं, बस चलते जाना काम है,

पर तुमने  हक़ से  नाम  जो  दिया
    अब वही मेरी नई पहचान है,

तुम्हारी उस  ज़िद में, एक मासूम
    सा अधिकार नज़र आता है,

जैसे कोई  सूखा  पत्ता, अचानक
   सावन की बौछार पा जाता है,

एक नाम (P) भी आया जो लबों
तक आकर ठहर गया,

पुराना ज़ख्म था कोई जो फिर से
         आँखों में उभर गया,

मैं  तुम्हें  पुकार  न  सकूँगा,  उस
     नाम से कुछ यादें पुरानी हैं,

मगर तुम्हारे लिए मेरे पास, एक
     नई और पाक कहानी है,

तुम ज़िद्दी ही सही पर तुम्हारी ये
     ज़िद दिल को छू जाती है,

मेरी वीरान सी मुसाफ़िरी में एक
      मीठी सी धुन जगाती है,

सुनो हँसती रहना तुम कि तुम्हारी
   हँसी ही मेरा सुकून-ए-क़ल्ब है,

मैं  इक  मुसाफ़िर  ही  भला,  पर
तुम्हारा ये साथ ही मेरा अब सब है,

कोई रिश्ता हो न हो पर ये रूह का
              गहरा साया है,

मैंने अपनी हर भटकन में, बस तुम
  जैसा ही कोई पाया है…🤝😇
╭─❀🥺⊰╯ 
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 #LoVeAaShiQ_SinGh 😊°
  ⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪   
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यूं ही बस एक ख्याल ऐसा भी..✍🏼😊

loveguruaashiq.661810

नई कहानी नया नया उपन्यास
चेकपोस्ट: चाणक्य
एक बूढ़े कुत्ते की जबरदस्ती को कहानी
फनी और मस्त
प्रस्तावना (Introduction)

"संसार में कई प्रकार के कर (Tax) होते हैं—आयकर, संपत्ति कर, और जीएसटी। लेकिन २० फुट की उस धूल भरी सड़क पर एक ऐसा 'अघोषित कर' चलता है जिसे दुनिया 'आशीष-चाणक्य बिस्किट लेवी' के नाम से जानती है।

यह कहानी एक ऐसे असाधारण जीव की है, जिसने बुढ़ापे को मजबूरी नहीं, बल्कि 'मजबूत वसूली' का हथियार बनाया है। 'चेकपोस्ट चाणक्य' कोई साधारण श्वान नहीं है; वह कूटनीति का वह शिखर है जहाँ पहुँचकर बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बिस्किट का पैकेट खोल देते हैं। इस प्रस्तावना का उद्देश्य पाठक को उस मानसिक दबाव से अवगत कराना है, जिससे आशीष जैन रोज़ गुज़रते हैं। यह दास्तान है उस मूक समझौते की, जहाँ एक तरफ आशीष की अटूट उदारता है और दूसरी तरफ चाणक्य की 'ऑस्कर-विजेता' नौटंकी। आइए, प्रवेश करते हैं बिस्किट और एक्टिवा के उस अनूठे संसार में, जहाँ नियम सिर्फ एक ही कुत्ता बनाता है।"

jainashish0014

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खुली ज़ुल्फें, माथे पर  बिंदी, और
       उस पर ये कातिल अदा,

उफ़ ये  हाथ में  चाय  का  प्याला
मतलब जान लेने का नया तरीका?

नज़रें मिलीं, तो धड़कन रुकी, जो
    मुस्कुराए तो कयामत होगी,

इतना  सितम न  ढाओ  मुझ  पर
वरना शहर में मेरी शहादत होगी.🙈
╭─❀🥺⊰╯ 
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loveguruaashiq.661810

Happy 77th Republic Day to all respected indian

hsc

कहां वो सच्चा संविधान हैं ...!
जिसके लिए ये जग देता था..!
विश्व गुरु का मान हैं ...!
कहां वो भारत में श्रेष्ठ कर्म की विधि-विधान ..!
यहां तो बस लिंग-भेद पर होता सदा पक्षपात हैं !
मुखौटा लगाए घूम रहे हैं ...
यहां स्वत: ही कंस-दुशासन का राज हैं !
सम्मान नारियों का यह झूठी अफ़वाह हैं !
बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ ... !
यह एक छल और आडंबर हैं !
हक़ की बात जहां आए ,
पुरुष प्रधान यह स्वर्णित हो जाएं !
अब भी कहते हो , गणतंत्र दिवस मनाएंगे ...!
और उनकी नीतियों की अवहेलना हर बार कर जाएंगे !
आओ नया संविधान बनाएं ...
सदाचार और सद्विचार का आगाज़ फैलाएं ...!
जहां हर नारी भारत माता हो ....
और सम्मान का अधिकारी हो ...!
तब होगा सच्चा गणतंत्र दिवस ...
तब सच्चा गणतंत्र दिवस ....!!
स्वरचित : अर्चना सिंह ✍🏻
धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐

architapriya330688

college

manishakumari419144

Happy Republic day

mitra1622

जब मन अकेला लड़ रहा हो तो सब से दूर जाना ही बेहतर है

anisroshan324329

Mohtarma Tuti Bhi, Or Bhikhri Bhi, Magar Aesa Nikhri Ki Log Heran Reh Gaye..!!

मम्मी पूछ रही थी
कोई पसंद तो नहीं है ना
पर में बोल नहीं सकता हूं
क्योंकि मेरी पसंद यहां की एक भी नहीं है

anisroshan324329

ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा।
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गँवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए।
तिरंगा लहरा रहा है शान से, हम सब झुकें इसके सम्मान में,
यही है हमारी पहचान, बसा है जो हर हिंदुस्तानी की जान में।
गणतंत्र का ये पर्व हमें, एकता का पाठ पढ़ाता है,
भारत माँ के वीरों का, बलिदान याद दिलाता है।
ना जियो धर्म के नाम पर, ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियो वतन के नाम पर।
देश की मिट्टी की खुशबू, रगों में लहू बनकर बहती है,
ये गणतंत्र की गूँज, हर दिल में 'जय हिंद' कहती है।
लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज़ आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा।
मैं रहूँ या न रहूँ, पर ये वादा है मेरा तुझसे,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, मौत से शर्त लगाये बैठे हैं।
सलाम है उन वीरों को, जिनकी वजह से हम आज़ाद हैं,
गणतंत्र दिवस की शान में, हम सर झुकाये बैठे हैं।

nidhimishra705356

Happy Republic Day!

Let's make our nation proud with integrity and togetherness!

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#happyrepublicday #republicday #nation #republicdayindia #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

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सत्ता समाज और सुरक्षा का शमशान
      मुर्दा समाज के जीवित लोगों,

आज मैं यहाँ किसी का पक्ष लेने नहीं
बल्कि हम सबकी सामूहिक अंतरात्मा
     का पोस्टमार्टम करने आया हूँ,

गोरखपुर की इस घटना ने यह साबित
              कर दिया है कि,

हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ
     बेटी बचाओ केवल एक नारा है,

और  बेटी  का  शोषण,  एक  कड़वी
                   हकीकत,

जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, ज़रा
सोचिए, उस 13 साल की  बच्ची  ने
जब उन होटल के कमरों में मदद के
         लिए चीख मारी होगी,

तो  उसे  क्या  मिला.?  कानून  की
सुरक्षा.? नहीं उसे मिला एक होटल   
मालिक और  एक मैनेजर, जिन्होंने
मानवता  को पैरों  तले कुचल दिया,

जब समाज के  व्यापारिक संस्थान
रेप की मंडियां बन जाएं, तो समझ
लीजिये कि  हमारा  पतन शुरू हो
                  चुका है,

देशभक्ति  का  ढोंग  बंद  करो  हम
   बॉर्डर पर दुश्मनों को कोसते हैं,

लेकिन हमारे घर के अंदर छिपे इन
     आस्तीन के सांपों का क्या.?

जो लोग एक बीमार बच्ची को दवा
खिला- कर  उसका  बलात्कार कर
सकते हैं, वे किसी  आतंकवादी  से
                 कम नहीं हैं,

क्या  ऐसे  लोगों  को  पालने वाला
समाज,  खुद  को   देशभक्त   कह
                 सकता है.?

असली  देशभक्ति देश की मिट्टी से
नहीं देश के नागरिक की सुरक्षा से
                  होती  है,

सत्ता और व्यवस्था की नपुंसकता
हम गर्व करते हैं कि हमारी सरकारें
कठोर हैं, लेकिन क्या यह कठोरता
         केवल विज्ञापनों में है.?

अगर एक  बच्ची को 15 दिनों तक
नर्क में रखा  जाता है  और  पुलिस
या प्रशासन  को  भनक  तक  नहीं
लगती, तो यह व्यवस्था  की  सबसे
                 बड़ी हार है,

सजा  ऐसी  होनी  चाहिए  कि उसे
सुनकर ही  आने  वाली  नस्लों  की
रूह कांप जाए, न्याय में देरी, न्याय
                की हत्या है,

क्या हम वाकई आजाद हैं,? आज
तिरंगा फहराते वक्त क्या  हमें शर्म
              नहीं  आएगी.?

सोचने वाली बात है, हम  चाँद पर
पहुँच गए लेकिन अपनी बेटियों को
सुरक्षित  घर  से  बाहर  भेजने  की
  हिम्मत आज भी नहीं जुटा पाते,

ये कैसी आजादी है जहाँ एक बच्ची
का  बचपन  बाजारों  में  नीलाम हो
                    रहा है.?

मेरा सीधा  वार है, उन  नेताओं  पर
जो चुनाव के  वक़्त बेटियों की बात
करते हैं, लेकिन  ऐसी  घटनाओं पर
            चुप्पी साध लेते हैं,

उस कानून पर जो कागजी दांव-पेच
में अपराधियों  को  भागने का मौका
                   देता है,

और  उस  समाज  पर  जो  अपनी
आंखों के  सामने  होते अन्याय को
अपना मामला नहीं है कहकर टाल
                  देता  है,

अगर आज इन दरिंदों आदर्श पांडेय
अभय सिंह, और  अंकित  को  बीच
चौराहे पर ऐसी सजा नहीं मिली जो
                 मिसाल बने,

तो याद रखिएगा अगली बार शिकार
किसी और की बेटी होगी,  और  चुप
      रहने की बारी आपकी...🔥

मेरा भारत महान 🇮🇳
वंदे मातरम् 🇮🇳
#Happy_republic_day
╭─❀🥺⊰╯ 
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loveguruaashiq.661810

Nehruji is phenomenon. but congress???

kattupayas.101947

Some gandhiji quotes

kattupayas.101947