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The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

rajukumarchaudhary502010

તારુ એક એક ટીપું મારા તનમાં સમાઈ,
પછી તો મને હૃદયથી તું કેમ કરી ભૂલાઈ.

#TeaLover
#Mrugzal
#EmptyHeart

johanjohan3745

दोहे- वैवाहिक बंधन के पच्चीस वर्ष
**********
पावन परिणय को हुए, पूर्ण वर्ष पच्चीस।
हम दोनों के मध्य है, तालमेल छत्तीस।।

कटे वर्ष पच्चीस हैं, पति उपाधि से आज।
चाह रहे क्या खोल दूँ, सुख-दुख के सब राज।।

बंधन फेरे सात के, हुए ‌ वर्ष ‌ पच्चीस।
जीवन के इस समर में, निकली अपनी खीस।।

पत्नी जी के राज का, आया नया पड़ाव।
निज शासन की क्या कहें, नहीं रहा कुछ भाव।।

अंजू जी की चल रही, बहुमत की सरकार।
गठबंधन की अब नहीं, है उनको दरकार।।

बहुत कठिन संयोग है, चले जिंदगी पाथ।।
जीवन पथ हम बढ़ रहे, दया दृष्टि के साथ।

जीवन बगिया में खिले, रंग बिरंगे फूल।
धूल धूसरित हो रहे, सपने चुभते शूल।।

इक पड़ाव पर आ गए, नहीं और की चाह।
बाकी मर्जी ईश की, वही दिखाएँ राह।।

सुख दुख के इस दौर का, कैसे करुँ बखान।
अज्ञानी मैं ले रहा, अंजू जी से ज्ञान।।

पुरखे भी यमलोक से, भेज रहे उपहार।
बौछारें आशीष की, अनुपम प्यार दुलार।।

आप सभी से चाहिए, बस इतनी सौगात।
सुखदा द्वय जीवन रहे, शीत उष्ण बरसात।।

जन्म दिवस अब हो गया, बीते दिन की बात।
स्मृतियाँ संचित रहें, सुखद ईश सौगात।।

रहे कृपा भगवान की, शेष सुखद हों वर्ष।
जैसे हैअब तक कटे, शेष सुखद सह हर्ष।।

सुधीर श्रीवास्तव

sudhirsrivastava1309

"Kahoon Na Kahoon" A valentine's special album is out now! Enjoy everyone. I would love to have feedback please.

https://open.spotify.com/album/52wgZlTC1P9jF0hwpeYub7?si=ofh2o4AVR_OCnYVpuyaCzA

vrajkan

अब जाकर कही थोडा भूल पाया मैं तुझे,
एक उम्र तेरे ख्यालों मे जागता रहा हूं मैं..❤️😇

hardik89

તારાં આલિંગનમાં સધળી ચિંતાથી મુક્ત થવા માંગુ છું,
દુનિયાના આ શોરબકોરથી હું દૂર જવા માંગુ છું.

ભલે હો રણ જેવી તરસ આ આખા આયખામાં,
તારી હેલીમાં ભીંજાઈને તૃપ્ત થવા માંગુ છું.

નથી જોઈતી મારે આભની આ નિરર્થક ઊંચાઈઓ,
તારી બાહોંના નાનકડા આભમાં સમાવા માંગુ છું.

સમયની આ ગતિ પણ કદાચ ત્યાં જ થંભી જશે,
એક ક્ષણ માટે તારામાં અનંત થવા માંગુ છું.

સીમાડાઓ ઓળંગી ગયા છે બધા જ આ મનનાં,
હવે હું તારા પ્રેમમાં સાવ નિઃશેષ થવા માંગુ છું.

palewaleawantikagmail.com200557

मध्य प्रदेश के धूल भरे रास्तों और शांत खेतों के बीच बसा 'जमालपुर' कोई आम गाँव नहीं है। यहाँ की हवाओं में एक पुरानी चेतावनी गूँजती है—'जैसे ही सूरज ढले और आसमान सुर्ख हो, अपने दरवाज़े बंद कर लो।' 14 साल का रेहान, अपनी मासूम शरारतों और बेखौफ मिजाज के साथ, उस प्राचीन लोक-कथा को महज एक वहम मानता है। लेकिन एक मनहूस शाम, मग़रिब की अज़ान के वक्त, वह अनजाने में उस शापित पीपल के पेड़ की सोई हुई दहशत को जगा देता है।पुरानी इस्लामी लोक-कथाओं (Islamic Folk Horror) पर आधारित यह कहानी आपको उस अनजाने डर से रूबरू कराएगी जो हमारी संस्कृति और इतिहास की परतों में कहीं दबा हुआ है। एक ऐसा सस्पेंस जो आखिरी पन्ने तक आपकी सांसें थामे रखेगा।"

" क्या आप तैयार हैं 'मग़रिब की लानत' का सामना करने के लिए?"
(कहानी को पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें या पिन 📍 📌 कॉमेंट को चैक करें।

मग़रिब की लानत – जहाँ साये इंसानों का शिकार करते हैं।
(Indian folker Islamic Creepy legends)

https://play.google.com/store/books/details?id=7Dm9EQAAQBAJ

thank you 🤗 Radhe Radhe

sonusamadhiya10gmail.com151631

Happy valentines day ❤️

inkimagination

आज गले लगाने का दिन है
और मेरी वेलेंटाइन दिल्ली में बैठी है

anisroshan324329

मिठास के शौक़ीन तो हम भी हैं लेकिन,
जो बात होंठो में है वो ...
केटबरी kitket kisssmi चॉकलेट में कहा

anisroshan324329

में सुधर सुधर के सुधरा हु फिर से बिगड़ जाऊंगा
तुम पूछोगे कैसे हो में तब ही मर जाऊंगा

anisroshan324329

सहजतेचे हात

एका हसणाऱ्या चेहऱ्याच्या मागे,
किती कथा आणि दुःख दडलेले आहेत.
कोणालाही दिसत नाही, पण त्याचे मन भरलेले आहे,
आणि त्या सावलीत आपण सगळेच सामावलेले आहोत.

फक्त हात देणं, एक छोटासा स्पर्श,
जणू गडद अंधारात एक प्रकाश प्रज्वलित करणे.
कधी फक्त ऐकणं पुरेसं असतं,
कधी फक्त हसणं पुरेसं असतं,
माणसाचे मन हलके होते, दुःख थोडं दूर जाते.

जगणं सोप्पं होतं, जेव्हा आपण एकत्र राहतो,
आणि प्रत्येक छोट्या-छोट्या मदतीत प्रेम उमलतं.
रस्त्यावरचा गरीब, बाजूच्या बुडक्या हाताचा स्पर्श,
सांभाळलेल्या शब्दांचा हलका गंध,
जगण्याची गोडी आणतो,
सगळ्या वेदना थोड्या सहज होतात.
एक हसणारा चेहरा, एक दयाळू हात,
जग बदलतो, जणू काही क्षणांत.

आपण जर थोडेसे द्याल, थोडे ऐकले, थोडे हसले,
तर जगणं सगळ्यांसाठी थोडं सुंदर बनतं.
@Fazal Abubakkar Esaf

fazalesaf2973

क्या ये बात सही है ?

भारत में पहले सड़क बनती है, फिर सड़क तोड़कर नाला बनता है। फिर से नई सड़क बनती है और फिर पाइप के लिए खुदाई। यह चक्र जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने वाले भ्रष्ट नेता और अफसरों की साज़िश है। 😱🥱

rajukumarchaudhary502010

क्या ये बात सही है ?

भारत में पहले सड़क बनती है, फिर सड़क तोड़कर नाला बनता है। फिर से नई सड़क बनती है और फिर पाइप के लिए खुदाई। यह चक्र जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने वाले भ्रष्ट नेता और अफसरों की साज़िश है। 😱🥱

rajukumarchaudhary502010

PAAGLA – A heart that speaks through words. 💭✨ Sharing emotions, shayari, quotes, and stories that touch your soul. From love to pain, from motivation to dreams – here, every line is written to connect with your heart. ❤️📖

https://youtube.com/shorts/IzJWOapCUqk?si=AihbmJxqewGi0SVv

jaiprakash413885

"મળી જાય વફાદાર તો એક વ્યક્તિમાં જ આખી દુનિયા છે. "

શીર્ષક :-

" તારી સાથે "

કરવી છે વાત હજારો તારી સાથે,
હર એક વાત વહેંચવી છે તારી સાથે.

બધા દુ:ખ - સુખ વહેચવા છે તારી સાથે,
પન સમય નથી તારે ને મારે.

દરેક સવાર થાય વાતો તારી સાથે,
ને રાતે મીઠી મીઠી વાતો તારી સાથે.

કોઈ ઓળખાય ન હતી તારી સાથે,
પન કઈક અલગ સબંધ છે તારી સાથે.

માન્યુ નોતુ કે મુલાકાત થશે તારી સાથે ,
પન લાગે એવું દરેક પલ વિતાવી તારી સાથે.

નહોતી લખવી આ કવિતા પન કબર જ નઇ,
પન કયારે લખાઈ ગઈ વાત કરતા કરતા તારી સાથે..


- ભાવિકા અંબાસણા

bhavu12

Happy Hug Day

sonalpatadiagmail.com5519