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జీవితం అన్నీ పోగొట్టుకున్న
కానీ ఒక్కటి మిగిలింది —
ధైర్యం

అది నా దేవుడు
అది నా ఆలయం
అది నా మంత్రం

కన్నీళ్లు ఎండిపోయిన చోట
చీకటి కప్పేసిన గదిలో
ఒంటరితనం కౌగిలించుకున్న రాత్రుల్లో

అదే నన్ను లేపింది
అదే నన్ను నడిపింది
అదే నా చేతిలోకి కత్తి ఇచ్చింది

పడిపోయినప్పుడు
ఎవరూ లేకపోయినప్పుడు
ప్రపంచం నవ్వినప్పుడు

అది నా గుండెలో గర్జించింది
“ఇంకా సమయం ఉంది
ఇంకా ఊపిరి ఉంది
ఇంకా నీలో నీవు ఉన్నావు”

అన్నీ తీసుకున్నావు అని
ఏడవనివ్వని ఆ ధైర్యం
నా దేవుడు

అది దేవుడు కాదు
అది నేనే

కానీ
అది లేకపోతే
నేను లేను

జీవితం అన్నీ పోగొట్టుకున్నా
ఒక్క ధైర్యం మిగిలితే చాలు
అదే నా దేవుడు
అదే నా గెలుపు

jkvproduction131644

विंडोतुन प्लॅटफॉर्म दिसायला लागला, हळू हळू गर्दी स्पष्ट झाली. रनींग मध्ये जंप करून विंडो सीट पकडली त्या मागे काही तरी होतं. शून्य स्पीड आणि गाडी थबकली पण ती कुठे आहे? माझे डोळे सगळी कडे निरखून शोधत होते एका चेहऱ्याला. तीच गर्दी निवळली, स्टेशनच्या शेड मधून झिरपलेला सूर्य प्रकाश माझ्या डोळ्यांवर आला, उन्हातुन दिपलेले डोळे उघडले आणि समोरच नेहमीच्या बेंच वर "ती" दिसली.

"ती", जिला मी रोज विंडो सीट वरून बघत बसायचो, खरं तर रोज वाट बघायची तीला पाहण्याची. ती पण रोज त्याच बेंच वर बसलेली असते. शांत, शीतल, हसरा चेहरा, कधी नजर वर करून समोर न पाहणारी, म्हणतात ना एकदम 'सर्वगुणसंपन्न'. माझ स्वप्न की तिने एकदा तरी वर पहाव आणि नकळत माझ्या शी नजरभेट व्हावी. पण गेल्या सहा महिन्यात असा योग नाही जुळला.

"अरे चैन खिचा है।" शब्द कानावर पडले. माझ्या चेहऱ्यावर स्मितहास्य तेही गुलाबि 😊. आता ट्रेन थोडा वेळ अजून थांबणार म्हणून मी जितका वेळ मिळतोय तिला पहात होतो. इतक्यात समोरची 3 नंबर ची ट्रेन आली तिची उठायची तय्यारी सुरु झाली, त्यात माझ्या मनाची झाली फरफट.

ती उभी राहिली आणि ज्या बेंच वर बसलेली त्यावर लिहिलेलं "𝐇𝐚𝐧𝐝𝐢𝐜𝐚𝐩𝐬 𝐎𝐧𝐥𝐲", ते वाचत नाही तोवर तिने बॅगमधून एक पांढरी-लाल छडी काढली, आजूबाजूचा अंदाज घेत नजर खाली ठेऊनच ती आलेल्या ट्रेन कडे वळली.

अशी "ती", गेली सहा महिने मी जिच्या नजरेची वाट बघत होतो पण तिच्या नजरेत तर काहीच न्हवतं.....

....ती माझ्या आयुष्यातली शेवटची विंडो सीट होती....

                          
                         संपूर्ण

shittu99

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
दीवारों में दरार आए, तो मरम्मत की
जाती  है,  पूरी  बस्ती  को  उजाड़ा 
                  नहीं  जाता,

कपड़ा कहीं से फट जाए, तो रफू
किया जाता है, बदन से  लिबास
            उतारा नहीं जाता,

शिकायतें कितनी भी हों, ज़रा बैठ
            कर सुलझा लेना,

उलझनों की वजह से हाथ उम्र भर
       का छोड़ा नहीं जाता…🤏

शुभ रात्रि..😴
╭─❀💔༻ 
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh
╨──────────━❥

loveguruaashiq.661810

मैडम जी शायरी किंग ऐसे ही नहीं कहते हैं
हर लफ्ज़ का अर्थ
मोहब्बत से देते है
उलझ जाओगी तुम इश्क़ के जाल में न पड़ो

anisroshan324329

जीभ के जलने पे
मुझसे चाय नहीं छोड़ी जाती
और आप कहती हो मोहब्बत छोड़ दे

anisroshan324329

अब ना शिकवा है तुझसे और ना कोई ग़िला है
मैं खुश हूँ ये सुन कि फ़रेबी को फ़रेबी मिला है

anisroshan324329

#Thanks_all_of_you

http://rajeevranalidhori.blogspot.com/2026/01/blog-post_22.html

आज मेरे #ब्लॉग_पाठक देशों का #शतक पूरा हुआ
बहुत बहुत आभार सभी 100 देशों के पाठकों को जिन्होंने मेरे ब्लॉग को पढ़ा है।
#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी
#rajeev_namdeo

rajeevnamdeoranalidhori247627

हैरी पॉटर एंड द फिलॉसफर्स स्टोन: बुक रिव्यू (और थोड़ा मसालेदार!)
अरे वाह, जे.के. रोलिंग की "हैरी पॉटर एंड द फिलॉसफर्स स्टोन" (अमेरिका में "सॉर्सेरर्स स्टोन" के नाम से मशहूर) 1997 में आई थी, और ये वो किताब है जिसने पूरी दुनिया को जादू की छड़ी से मोहित कर दिया! कल्पना कीजिए: एक साधारण लड़का, जो अलमारी में सोता है, अचानक पता चलता है कि वो एक महान जादूगर है। ये किताब नहीं, बल्कि एक जादुई पोर्टल है जो आपको हॉगवर्ट्स की दुनिया में खींच लेता है – जहां उड़ती झाड़ू, बात करने वाले सांप, और अमरता देने वाला पत्थर इंतजार कर रहे हैं!
प्लॉट का जादू: हैरी पॉटर, 11 साल का अनाथ, अपने तंगदिल चाचा-चाची के साथ जी रहा है, लेकिन एक दिन हैग्रिड नाम का विशालकाय जादूगर आता है और कहता है, "तुम एक जादूगर हो, हैरी!" फिर शुरू होता है हॉगवर्ट्स का सफर – क्विडिच मैच जहां गेंदें उड़ती हैं, स्पेल्स जैसे "विंगार्डियम लेवियोसा" जो चीजें हवा में तैराती हैं, और एक बड़ा रहस्य: फिलॉसफर्स स्टोन, जो मौत को चकमा दे सकता है। लेकिन वोल्डेमॉर्ट (जिसका नाम लेने से सब डरते हैं) उसकी ताक में है! प्लॉट इतना तेज है कि पेज पलटते रहेंगे, और थीम्स? दोस्ती की ताकत, बहादुरी का जज्बा, और अच्छाई की जीत – सब कुछ इतने मजेदार तरीके से बुना गया कि आप हंसेंगे, डरेंगे, और तालियां बजाएंगे।
कैरेक्टर्स की चमक: हैरी वो हीरो है जिससे हर बच्चा रिलेट कर सकता है – डरा-सहमा लेकिन दिलेर। रॉन वीजली? वो दोस्त जो हमेशा साथ देता है, लेकिन थोड़ा डरपोक और हंसमुख। हर्मायनी ग्रेंजर? ब्रेनियक गर्ल जो किताबों से जादू करती है! और डंबलडोर? वो बूढ़ा जादूगर जो हमेशा बुद्धिमान बातें कहता है, जैसे "यह चुनाव हैं जो हमें सच्चा बनाते हैं, न कि हमारी क्षमताएं।" स्नैप का रहस्यमयी अंदाज और वोल्डेमॉर्ट का डरावना छाया – सब मिलकर कहानी को जीवंत बनाते हैं। रोलिंग ने बच्चों की दुनिया को इतनी रियलिटी दी है कि लगता है हॉगवर्ट्स असली है!
क्या बनाता है इसे सुपर रोचक? कल्पना की उड़ान! फ्लाइंग कारें, इनविजिबिलिटी क्लोक, और चॉकलेट फ्रॉग्स जो कूदते हैं – ये सब पढ़कर आपका बचपन लौट आएगा। मजेदार फैक्ट: रोलिंग ने ये किताब एक कैफे में लिखी थी, जब वो गरीब थीं, और आज ये दुनिया की सबसे बेस्टसेलिंग सीरीज है! हास्य के पल, जैसे रॉन का स्पेल गलत होना, और सस्पेंस के ट्विस्ट्स – ये किताब सिर्फ पढ़ने की नहीं, जीने की है।
कमियां? अगर आप वयस्क हैं, तो शुरुआत थोड़ी बच्चों वाली लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे पढ़ेंगे, गहराई मिलेगी। अगर सीरीज की पहली किताब नहीं पढ़ी, तो... वेल, ये पहली है ही!
रेटिंग: 5/5 स्टार्स! अगर फैंटेसी, एडवेंचर, और थोड़ा जादू पसंद है, तो ये किताब आपकी जिंदगी में "एक्सपेलियार्मस" की तरह सब कुछ बदल देगी। पढ़िए, और हॉगवर्ट्स एक्सप्रेस में सवार हो जाइए – टिकट फ्री है! 🪄https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

हर बच्चे का बचपन आसान नहीं होता,
यह कलयुग है यहाँ हर मंदिर में भगवान नहीं होता,
सबका घर आबाद नहीं होता,
कुछ डरते हैं स्कूल से वापस आने में, हर बच्चे का डर मोटी-मोटी किताब नहीं होता,
सबके दूर-दूर तक रिश्तेदार नहीं होते,
सबके वो तीन खास यार नहीं होते,
सबकी माँ प्यार नहीं कर पाती, सबके पिता ज़िम्मेदार नहीं होते,
कुछ लोगों के घर में भी अजनबी रहते, हर किसी के घर वाले परिवार नहीं होते।
जिसने पेट भरा हो माँ के बलिदानों से, जिसने बाप का गुस्सा पिया होगा,
जिसने हर महीने अपनी परवरिश का आँसुओं से किराया दिया होगा,
उस बच्चे ने भला कैसा बचपन जिया होगा?
पर बचपन उसे भी याद रहता है जो भुलाना चाहता है,
इतिहास दोहराता होगा कभी-कभार, बचपन बार-बार दोहराता है।"

nidhimishra705356

"आमा म होमवर्क सकेर छिट्टै फर्किन्छु है" निर्मलाले सानो प्लास्टिकमा आफ्ना साथीहरूका लागि केही अम्बा पोको पारिन्, आफ्नो पुरानो साइकल निकालिन् अनि मुस्कुराउँदै घरको आँगनबाट निस्किइन्।

दिन ढल्यो, साँझ पर्यो, तर निर्मला फर्किनन्। ब :म दिदीबहिनीको घरबाट दिउँसो २ बजे नै निर्मला निस्किसकेको भनिएको थियो तर उनी साँझ ८ बजेसम्म घर पुगिनन ।

आत्तिएकी आमा र परिवार जब प्रहरी चौकी पुगे, त्यहाँ उनीहरूले राज्यको पहिलो धोका पाए।
छोरी हराएको पीडामा छटपटाइरहेका आमाबुवालाई बर्दीधारी रक्षकहरूले जवाफ दिए– "पोइला गइहोली, के'टासँग घुम्दै होली।" यदि त्यो रात प्रहरीको त्यो असंवेदनशीलता नभएको भए, यदि तत्काल ‘सर्च अपरेसन’ चलेको भए, सायद कथाको अन्त्य अर्कै हुन सक्थ्यो।

भोलिपल्ट बिहान। साउन ११ गते। घरभन्दा केही परको उखुबारीमा निर्मलाको नि' र्जीव शरीर भेटियो। त्यो दृश्यले मान्छेको मात्र होइन, मानवताकै सातो उडाएको थियो। तर, त्यो वि 'भत्स घ 'टनाभन्दा ड 'रलाग्दो दृश्य त त्यसपछि देखियो।

अप 'राध अनुसन्धानमा घट 'नास्थललाई ‘मन्दिर’ मानिन्छ, तर त्यहाँ रक्षकहरू नै भक्षकको मतियार बनेजस्ता देखिए। एउटा अबोध बालिकाको श' *व नजिकै भेटिएको सुरुवाल– जुन ब * त्का 'रको सबैभन्दा ठूलो प्रमाण हुन सक्थ्यो– त्यसलाई प्रहरीले नै पानीमा चोबलेर पखालिदिए। के त्यो केवल अज्ञानता थियो? वा कसैको पाप पखाल्न गरिएको नियोजित षड्यन्त्र?

भीड जम्मा भयो। निर्मलाको साइकल र कापी-किताबहरू श* 'वभन्दा केही पर असरल्ल थिए, तर त्यहाँ कुनै संघर्षको चिन्ह थिएन। मानौँ, ह' *त्या अन्तै कतै गरेर श 'व त्यहाँ सजाइएको थियो। तर, प्रमाण नष्ट गर्ने हतारोमा फरेन्सिक टोली नपुग्दै श 'व उठाइयो। सत्य त्यही उखुबारीको माटोमुनि सधैँका लागि दबियो।

त्यसपछि खेलियो झन् ठूलो खेल जनताको आ 'क्रोश बढ्दै जाँदा राज्यले एउटा ‘पात्र’ खडा गर्यो– दिलिप सिंह विष्ट। ४१ वर्षीय मानसिक सन्तुलन गुमाएका एक व्यक्ति।

प्रहरीले एउटा तयारी पटकथा सुनायो, "यसैले हो निर्मलालाई मा* 'रेको।" प्रमाणको नाममा उसको खल्ती च्यातिएको कमिज देखाइयो।

बन्द कोठाभित्र दिलिपलाई के गरियो, त्यो पछि मात्र बाहिर आयो। "तँ यो
अ *पराध स्वीकार गर, हामी तँलाई मासु र र 'क्सी दिन्छौं, नत्र मा *रिदिन्छौं"– एउटा मानसिक रोगीलाई दिइएको यो प्रलो 'भन र या 'तना न्याय प्रणालीको अनुहारमा लागेको कालो पोत थियो।

तर, झूटको आयु छोटो हुन्छ। निर्मलाको श 'रीरबाट संकलन गरिएको (जतिसुकै विवादित भए पनि) DNA र दिलिपको DNA मिलेन।
विज्ञानले राज्यको झूटलाई स्वीकार गर्न मानेन। एउटा निर्दोष जोगियो, तर असली अ* 'पराधी अझै पर्दा पछाडि नै मुस्कुराइरह्यो।

निर्मलाको न्याय माग्दा सडक आ 'गो बन्यो। सिङ्गो देश रोयो। कञ्चनपुरको सडकमा नारा लाग्यो, "सरकार, निर्मलालाई न्याय दे!" तर सरकारले न्यायको साटो गो' *ली चलायो।

भदौ ८ गते। १७ वर्षीय सन्नी , जो निर्मलाका लागि न्या 'य माग्दै सडकमा आएका थिए, प्रहरीको गो* *ली लागेर ढले। एउटा ह' *त्याको छानबिन गर्नुपर्ने राज्यले अर्को ह* 'त्या गरेर जवाफ दियो।

आज वर्षौं बितिसक्यो। घट* 'नास्थल नजिकैको सेनाको ब्यारेक, ब :'म दिदीबहिनीको त्यो घर,पटकपटक फेरिएका बयानहरू, घ 'टना हुँदा बित्तिकै रंगरोगन लगाइएका ती कोठाहरू, सुरवाल पखाल्ने प्रहरीहरू र शंकाको घेरामा रहेका 'भीआईपी' अनुहारहरू– सबै रहस्यकै गर्भमा छन्।

निर्मलाका बुबा यज्ञराज पन्त, जो न्याय माग्दामाग्दै सडकमा बर्राउने अवस्थामा पुगे, उनको मानसिक सन्तुलन डगमगायो। आमा दुर्गा देवी, जो राज्यसँग लड्दालड्दै थाकिन्, अन्ततः हार मानिन्।

यो कथाको अन्त्य अझै लेखिएको छैन। निर्मलाको ह'त्यारा आज पनि स्वतन्त्र हिँडिरहेको छ। उनको नाममा कार्यक्रम चलाउनेहरू गृहमन्त्री बने, प्रधानमन्त्री, कानुनमन्त्री, आइजीपी, डीआइजी सबै फेरिए।
तर नफेरिएको एउटा मात्रै सत्य के हो भने—

"निर्मलाको आत्माले अझै शान्ति पाएको छैन।"
निर्मला पन्तप्रति हार्दिक श्रद्धाञ्जली!

#NirmalaPanta

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rajukumarchaudhary502010

જય દ્વારકાધીશ 🦚🌸🚩#suvichar #trending#Jay Dwarkadhish#like

parmarbhavesh.k

"जन्म ही मृत्यु का संकेत हैं" 🍂✨
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jiwatma

सूर्योदय हर रोज कहे, हार नहीं स्वीकार।
टूटे सपने जोड़ कर, फिर से हो तैयार॥

#डॉ_अनामिका

rsinha9090gmailcom

હા હું ગુનેગાર છું
પ્રેમ કરવાની સજા તો મળવી જ જોઈએ

urvashioza254340

ખોડીયાર જયંતિ ❤️🙇🚩#training #motivation#like#bhakti

parmarbhavesh.k

અવળી સમજણ એ દુઃખ છે ને સવળી સમજણ એ સુખ છે. સમજણ કઈ મળે છે તે જોવાનું. અવળી સમજણની આંટી પડી તો દુઃખ, દુઃખ ને દુઃખ અને એ આંટી છૂટી ગઈ તો સુખ, સુખ ને સુખ! બીજું દુઃખ-સુખ છે જ નહીં આ દુનિયામાં! - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/C4XKjWBN

#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

हमारे जीवन के प्रत्येक पल बहुत कीमती है।
फिर उन लम्हों को ऐसे ही क्यूं बर्बाद करना चाहिए?

समय का रिवर्स गियर नहीं होता है,
तो फिर जिंदगी मिलेंगी ना दोबारा।

प्रत्येक पलों को हंसी खुशी से बिताना चाहिए।
जो सच्चे,बच्चे और बूढ़े हैं,
उनके साथ थोड़ा वक्त बिताना चाहिए।

खुशीयों अपने-आप दुगुनी होगी।

किसी के दर्द को सुनकर सच्चे अर्थ में,
दवाई बनना चाहिए।

किसी के दुःखों के कारण नहीं,
किन्तु दर्द निवारक बनाना चाहिए।

जिंदगी का हर एक लम्हा एक उत्सव की तरह लगेगा,
जब हमारे हृदय में निस्वार्थ, ईर्षा रहित खुशी जन्म लेंगी।

बस जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहिए।

parmarmayur6557

જય શ્રી કૃષ્ણ 🙏🏻
સુપ્રભાત 🌅

આવી છે સવાર નવી , લઈને નવા સપના
નવી આશાઓ અને સાથે નવો ઉત્સાહ.
અંધારરૂપી ઉદાસી , નિરાશા અને આળસને
કરીને ટાટા બાય બાય જોડાઈ જઈએ
ફરી એક નવા દિવસના સફરમાં 🙏🏻✨

તો ચાલો ત્યારે...🌺

urvashioza254340

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

बस इकलौता ये डर है....
उसे खोने से भी डर है ,
और उसके बयां करने से भी डर है
उसके जाने से भी डर है
उसके रुक जाने से भी डर है
उसकी परवाह खो देने से डर है
लेकिन उस की परवाह पाने से भी डर है

हा ये इकलौता डर है....जिससे मुझे बहुत डर है

written by me....🥀🥀

ayushisharma9802gmail.com140150