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(સાધારણ બોલો છો તે શું છે)
હું ....સમજાવું 😊.

સાધારણ થી સુંદર બીજું કાંઈ નથી,
નાનું ફૂલ પણ એ જ કહી જાય છે.

(એટલે સાધારણ હોવું કાંઈ ખોટું નથી)😀
(ઢમક) DHAMAK

heenagopiyani.493689

હવામાં ઊંચે ઉડતો પતંગ એક જ વાત શીખવે છે કે જેમ પવનનો સાથ મળતાં એ ઊંચે ઉડે છે અને સમય પૂર્ણ થતાં નાશ પામે છે એમ જ આપણે પણ જિંદગીમાં મળતી તક યોગ્ય રીતે વાપરી ઉચ્ચ પદે પહોંચવું. સાથે સાથે ધ્યાન રાખવું કે આ સ્થાન ચિરંજીવ નથી. સમય બદલાતાં ફરીથી નીચે આવવું જ પડે છે. આથી જ્યાં સુધી ઉચ્ચ પદ પર છીએ ત્યાં સુધી જે તમારી નીચેનાં વ્યક્તિઓ છે એમની કદર કરી લેવી. શું ખબર કાલ ઊઠીને આપણાં બંનેની પરિસ્થિતિ એકદમ વિરૂદ્ધ હોય? ત્યારે આપણાં કર્મો એ વ્યક્તિ આપણને યાદ અપાવે તો તકલીફ થાય એવી સ્થિતિ ઊભી ન થવી જોઈએ. બાકી જીવનનો અંત તો ગમે ત્યારે થવાનો જ છે. આ અંત પછી પણ જીવતાં રહેવું હોય તો લોકોની સારી યાદોમાં સ્થાન પામવા પ્રયત્ન કરવા.

s13jyahoo.co.uk3258

वो फटी- तूटी पतंगें,
जर्मी पर 'बिखरकर' गिरी पड़ी थी,
या कोई जगह लटकी हुई थी।

जिंदगी में 'किसी की खुशी के लिए',
खुद का बलिदान देना पड़े तो कैसे देना,

वह कितना सरल और सहज,
तरीके से 'समझाकर' चली गई।

parmarmayur6557

Dreams run in my blood becoming the fifth doctor in my family

manishakumari419144

शाम के छः बजकर बीस मिनट।
घर में सन्नाटा।
केवल फ्रिज की हल्की-सी गुनगुनाहट और दूर कहीं पड़ोस के बच्चे का साइकिल का घंटा।

मैं किचन से निकली।
ड्रॉइंग रूम की मेज पर नज़र पड़ी।
वही आधा गिलास।
पानी का।
ठंडा।
ऊपर से बर्फ का एक छोटा-सा टुकड़ा अभी भी पिघल रहा था।
किनारे पर हल्का-सा पानी का दाग।

कल रात उसने रखा था।
रात के ग्यारह बजकर कुछ मिनट।
टीवी बंद करके उठा था।
गिलास भरा।
दो घूँट पीए।
बाकी छोड़ दिया।
फिर बोला—"सोने चलते हैं।"

मैंने कहा—"गिलास तो उठा लो।"
उसने कहा—"सुबह कर लेंगे।"

सुबह हुआ।
गिलास वहीँ।
दोपहर हुई।
गिलास वहीँ।
अब शाम हो गई।
गिलास अभी भी वहीँ।

मैंने सोचा—उठा लूँ।
धो दूँ।
पर हाथ नहीं बढ़ा।
क्योंकि ये सिर्फ़ गिलास नहीं था।
ये एक छोटा-सा समझौता था।
एक छोटी-सी जंग।
जो हम दोनों लड़ रहे थे—बिना बोले।

अगर मैं उठाती, तो मानो मैं हार मान रही हूँ।
अगर वो उठाता, तो मानो वो झुक गया।
और हम दोनों को ही ये लग रहा था कि जो पहले झुकेगा, वो हारा हुआ होगा।

तो गिलास वहीं रहा।
पानी अब गुनगुना हो गया।
बर्फ गायब।
और ऊपर हल्की-सी धूल जम गई।

मैं कुर्सी पर बैठ गई।
गिलास को घूरती रही।
फिर धीरे से बोली—
"अब तो बस करो।
एक गिलास पानी ही तो है।"

पर जवाब किसी ने नहीं दिया।
न गिलास ने।
न घर की खामोशी ने।
न उसने—जो अभी तक ऑफिस से लौटा नहीं था।

मैंने हाथ बढ़ाया।
गिलास उठाया।
एक घूँट पीया।
ठंडक अब नहीं थी।
स्वाद भी नहीं।
बस एक पुरानी आदत।

फिर गिलास सिंक में रख दिया।
पानी बहाया।
साफ़ किया।
सुखाकर रख दिया।

पर मन में कुछ टूटा नहीं।
न कुछ जीता।
बस एक आधा गिलास खत्म हुआ।
जैसे हमारा एक छोटा-सा हिस्सा भी खत्म हो गया हो।

अब मेज पर कुछ नहीं।
खाली।
साफ़।
और बहुत शांत।

शायद यही चाहिए था।
न गिलास।
न पानी।
न लड़ाई।
बस खाली मेज।
और थोड़ा सा सुकून।

कल सुबह फिर से कोई गिलास रखेगा।
शायद पूरा।
शायद आधा।
पर आज के लिए—बस इतना ही।

a9560

मुझे नहीं पता क्या हुआ था उस रात,
तू दूर चली गई मुझसे छुड़ा कर अपना हाथ,
आज इतने दिनों बाद दिखे तो सोचा पूछ लूँ,
क्या तुम खुश हो गैरों के साथ।

jaiprakash413885

🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

" પીંજરું નીકળતું નથી "

શીખ આપવાની રીત ન્યારી જિંદગીની,
એ શીખવે જે, એ કોઈ શીખવતું નથી.

એ દોસ્ત, મને ન યાદ કરાવીશ તું એને,
બાદમાં, દિલ એને કેમેય વીસરતું નથી.

પ્રણયમાં મતલબની દોસ્તી ન મિલાવ,
પાષાણ દિલ કદી પણ પીગળતું નથી.

પંખી તો પાજરેથી નીકળી ગયું, પણ!
એ પંખીમાંથી પાંજરું નીકળતું નથી.

નિર્મળ તો લાગણીથી ભીંજાઈ જાય,
નિષ્ઠુરને "વ્યોમ" પણ ભીંજવતું નથી.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી ), મુ. રાપર

omjay818

सुबह सात बजकर बीस मिनट हुए थे।
आज भी वही रूटीन।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
दर्पण के सामने खड़ी हुई।
लाइट जलाई।
ट्यूबलाइट की ठंडी सफ़ेद रोशनी चेहरे पर पड़ी।

मैंने दाँत ब्रश किया।
मुँह धोया।
फिर हाथों से चेहरा पोंछा।
और फिर... वही काम।
जो पिछले तीन साल से हर सुबह करती हूँ।
मुस्कुराई।
दर्पण में देखकर।
बस एक बार।
हल्की-सी।
जैसे कोई पुराना दोस्त मिल गया हो।

आज भी मुस्कुराई।
पर कुछ अजीब लगा।
मुस्कान टिकी नहीं।
होंठ उठे तो थे, पर आँखों तक नहीं पहुँची।
जैसे होंठों ने धोखा दे दिया हो।
या शायद आँखों ने मना कर दिया हो।

मैंने फिर कोशिश की।
इस बार ज़ोर से।
दाँत दिखाकर।
वो मुस्कान जो ऑफिस में सबको दिखाती हूँ।
"गुड मॉर्निंग सर", "हाँ जी बिल्कुल", "नो प्रॉब्लम" वाली।
पर दर्पण ने कह दिया—नहीं।
ये भी झूठी लग रही है।

अब थोड़ा गुस्सा आया।
मैंने आईने से नज़रें मिलाईं।
और बोली—
"क्या प्रॉब्लम है तुझे?
बस एक मुस्कान ही तो चाहिए।
कितना मुश्किल है?"

आईना चुप रहा।
बस मेरी आँखें मुझे घूरती रहीं।
थकी हुई।
थोड़ी सूजी हुई।
और बहुत पुरानी।

मुझे याद आया—
पिछली बार कब सचमुच मुस्कुराई थी मैं?
नहीं, वो हँसी नहीं जो फ़ोन पर आती है।
नहीं, वो मुस्कान नहीं जो पड़ोसन को देखकर देनी पड़ती है।
वो मुस्कान जो अंदर से आती है।
जो छाती में गुदगुदी करती है।
वो कब आई थी आखिरी बार?

शायद उसी शाम जब राहुल ने कहा था—
"तू ऐसे ही मुस्कुराती रहे, बस।
बाकी सब मैं संभाल लूँगा।"

उसके बाद कभी नहीं आई।
न उसकी बात आई।
न वो शाम।
न वो मुस्कान।

मैंने हाथ बढ़ाया।
आईने पर उँगली रखी।
अपने होंठ छुए।
ठंडे थे।
जैसे किसी और के होंठ हों।

फिर धीरे से बोली—
"ठीक है।
न सही।
आज नहीं तो कल।
पर एक दिन फिर आएगी।
मुझे पता है।"

आईने ने जवाब नहीं दिया।
पर इस बार उसकी चुप्पी में कुछ अलग था।
जैसे वो कह रहा हो—
"मैं इंतज़ार कर रहा हूँ।
तू बस मत छोड़ना कोशिश।"

मैंने लाइट बंद की।
बाथरूम से निकली।
आज भी ऑफिस जाना था।
आज भी वही "गुड मॉर्निंग" वाली मुस्कान लगानी थी।

पर जाते हुए एक बार फिर मुड़ी।
अँधेरे में भी दर्पण पर हल्की-सी चमक थी।
शायद मेरी आँखों की।
या शायद उस मुस्कान की जो अभी आने वाली है।

बस इतना ही।
एक दिन।
एक कोशिश।
और थोड़ा सा भरोसा।

a9560

मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

15 जनवरी— सेना-दिवस पर विशेष
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सैनिक! तुझको शत-शत प्रणाम।

संघर्ष कठिन सामने देख,
पग पीछे नहीं किये तुमने;
जनहित में, होकर महादेव-
विष के भी घूँट पिये तुमने।

बस, डटे रहे निज घाव लिये,
अनथक बिन विचलन, बिन विराम।

तेरी दृढ़ता के आगे नत,
जीवन के झंझावात रहे;
पथ से तू डिगा नहीं किंचित् ,
निष्प्रभ सारे आघात रहे।

हारे हैं तुझसे दण्ड-भेद,
हारे हैं तुझसे साम-दाम।

वीरता तुम्हारी रही बोल,
हैं वार तुम्हारे सीने पर;
माँ देख-देख व्रणहीन पृष्ठ,
गर्वित है तेरे जीने पर।

जन-जन आशीष रहा सन्मन,
ज्योतिर्मय युग-युग रहे नाम।

-- घनश्याम अवस्थी
गोंडा, उत्तरप्रदेश
सम्पर्क-- 9451607772

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ghanshyamawasthi.678074

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
ज़माने की बैसाखियों की ज़रूरत
                नहीं मुझे,

मेरे  इरादों  में  अभी  वो  उड़ान
                  बाकी है,

लोग ढूँढते होंगे मंज़िलें, दूसरों के
          नक्श-ए-कदम पर,

मुझे तो खुद अपने पैरों से नयी
          राह बनानी है…🫰
╭─❀💔༻ 
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
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loveguruaashiq.661810

🙏🏻😊🙏🏻

falgunidostgmailcom

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
उसे हुनर आता है, दरिया के बीच
           कश्ती डुबोने का,

तुम किनारे की उम्मीद में अपनी
          हस्ती मत खो देना,

वो तो औरत है उसे रुख बदलने
         में वक़्त नहीं लगता,

तुम अपनी  साख बचाए  रखना
  उसे तमाशा मत बना देना..🔥
╭─❀💔༻ 
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
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loveguruaashiq.661810

आध्यात्मिक जीवन: सरल बोध और मुक्ति का मार्ग ✧
आध्यात्मिकता का अर्थ
धन, साधन, धर्म या पद से ऊपर उठकर
जीवन को उसके स्वभाव में जीना है।
कई लोग
धन पाते हैं, साधन पाते हैं, शिक्षा पाते हैं—
पर जीवन नहीं जी पाते।
और जो जीवन नहीं जी पाया,
वह चाहे सब पा ले—भीतर से खाली ही रहता है।
जीवन को यदि सच में जी लिया,
तो मुक्ति अपने आप घटती है।
जैसे—
दीपक जला दिया जाए
तो प्रकाश पैदा करने की कोशिश नहीं करनी पड़ती।
प्रकाश अपने आप फैलता है,
अंधेरा अपने आप हट जाता है।
वैसे ही—
जीवन को उसके स्वभाव में जीने दो।
प्रकाश आएगा, अंधेरा जाएगा—
बिना प्रयास, बिना संघर्ष।
दीपक और जीवन-बोध
दीपक जलाना एक छोटा-सा कर्म है,
पर उसका परिणाम बड़ा होता है।
जीवन-बोध भी ऐसा ही है।
जिस ऊर्जा से धन, सुविधा, पहचान मिली—
यदि उसी ऊर्जा से
शांति और आनंद नहीं मिला,
तो समझो दिशा चूक गई।
तब आध्यात्मिक होना कोई विकल्प नहीं,
अनिवार्यता बन जाता है।
आध्यात्मिक जीवन का अर्थ है—
धन, साधन, प्रसिद्धि से मुक्त होकर
भीतर के एकांत में जीना।
इसके लिए
न शास्त्र चाहिए,
न भारी ज्ञान,
न कोई विशेष योग्यता।
ऊर्जा का प्राकृतिक बहाव: आनंद का मूल
ऊर्जा का स्वभाव है—
बहना, चलना, फैलना।
जैसे नदी
रुकने पर सड़ जाती है,
वैसे ही ऊर्जा
यदि केवल धन, धर्म, विज्ञान, प्रसिद्धि में खर्च हो
तो भीतर का आनंद सूख जाता है।
आनंद और शांति भी ऊर्जा से ही आते हैं—
पर भीतर बहने वाली ऊर्जा से।
आध्यात्मिकता का अर्थ है—
ऊर्जा को उसके प्राकृतिक बहाव में छोड़ देना।
कोई नियम नहीं,
कोई दबाव नहीं,
कोई संघर्ष नहीं।
अस्तित्व के साथ बहो।
प्रकृति के हवाले खुद को छोड़ दो।
भीतर प्रसन्न रहो—
यही बोध है।
इसे स्कूल, संस्था, पाठ्यक्रम बनाना
मूर्खता है।
यहीं से छल, व्यापार और नाटक शुरू होता है।
आध्यात्म की परिभाषा बहुत छोटी है—
मौन, आनंद, प्रेम और शांति में जीना।
जो-जो इसमें जोड़ा जाता है,
वही अशांति का कारण बनता है।
ऋषि जीवन: आदेश-मुक्त स्वभाव
हमारे ऋषि, मुनि, संत
इसी तरह जिए।
कोई आदेश नहीं,
कोई नियम नहीं,
कोई सामाजिक दबाव नहीं।
अपने स्वभाव में जीना—
यही उनका धर्म था।
यह कोई बड़ा ज्ञान नहीं,
बस एक सरल अवस्था है।
यदि धर्म, गुरु, व्यवस्था जरूरी होती,
तो यह जीवन
अनपढ़ और साधारण लोग नहीं जी पाते।
यही योग है,
यही आध्यात्म है,
यही ईश्वर-जीवन है।
ईश्वर कौन है?
कोई अलग बैठा ईश्वर नहीं।
एक सत्ता है
जिसमें सब घट रहा है—
पाप भी, पुण्य भी।
ईश्वर को मान लेने से
जीवन बेहतर नहीं हो जाता।
बेहतर होता है
जब जीवन में
आनंद, प्रेम और शांति उतरते हैं।
यही ईश्वर-शक्ति के शिखर हैं।
कोई गुरु
इन्हें दे नहीं सकता।
इन्हें जीना पड़ता है।
जीवन जैसा है,
उसे वैसा ही स्वीकार करना—
यही आध्यात्म है।
कोई दिखावा नहीं,
कोई तुलना नहीं,
कोई प्रतिस्पर्धा नहीं।
जी रहे हो—
तो दुखी मत बनो।
आज तुम सहभागी बनो,
कल कोई और बनेगा—
यही धर्म है।
जहाँ दुख दिखे—
वहाँ प्रेम दो,
हिम्मत दो,
भोजन दो,
सहारा दो।
धन जरूरी नहीं—
अंधे को सड़क पार करा देना भी धर्म है।
सच्ची सेवा: व्यक्तिगत बनाम संस्थागत
संस्था से शुद्ध सेवा मुश्किल है।
अक्सर
100 में से
75 भीतर ही खप जाते हैं,
25 सेवा बनते हैं—
वह भी प्रचार के साथ।
व्यक्ति
100% सेवा दे सकता है।
श्रेष्ठ वही संस्था है
जो दान न ले,
खुद साधन पैदा करे
और बिना शोर सेवा करे।
जो सेवा
ईश्वर, पुण्य, प्रचार से जुड़ जाती है,
वह दूषित हो जाती है।
पेड़ लगाओ—
बिना बैनर।
भूखे को खिलाओ—
इस तरह कि उसे पता भी न चले
किसने खिलाया।
यही असली सेवा है।
यही धर्म है।
यही शिक्षा है।
यही प्रेम है।
यही शांति है।
यही मुक्ति है

bhutaji

आसमान में उड़ रही पतंग को,
आसमां में है, इसका अभिमान आया।

बस फिर क्या?
खूब जोर करने लगी।

छोड़ दी हाथों में पकड़ रखीं दौर को,
सीधी जमीं पर आकर गिर पड़ी।

parmarmayur6557

સપના તો હોય છે સપનાઓ
અને તે હોય છે ફક્ત તુટવા માટે.
તમારી નશીલી આંખો જ કાફી છે
ફક્ત અમારા હોંશ લુંટવા માટે.

amiralidaredia175421

Astrology is Real or Fake?

Astrology is a wisdom that connects Astronomy with Individual’s Life through Birth chart prepared According to Birth place Longitude and Latitude,Birth Time and Birth Date.

Astronomy is Real and Scientific… but That Astronomy is Connected with Individual ‘s life through Imagination of Traits of Zodiac signs, Nakshatras and Planets. Eg: the shape of Leo sign is like lion.. and it governs the Traits of Authority. This is an imagination.

So Astrology is a Combination of Science as well as Imagination. The Astronomical Effects can be proven through Logic, Reason and Evidences but Astrological effects are Subjective, personalised and Based on Individual’s Own beliefs or thinking.

So, Science+ Art = Wisdom

Various Other Subjects are also connected with Astrology like Mathematics, Phycology and Panchangam .. which makes the subject Comprehensive and detail oriented. There are many Parts and Systems of Astrology, like Madical Astrology,Career Astrology, Relationship Astrology,Mundane Astrology.. And Systems like Traditional parashar Astrology,Brighu Nadi System, Lal Kitab,Kp System,Asthakvarga..

The core purpose of Astrology is to Spread Awareness and guidance about Individual’s Life.. and Predict Future Aspects of Individual’s Life.

In total

Astrology can Guide both the Aspects of human Life Reality and Human Luck.

yashibc123gmail.com135615

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
उधार के परों से’ अब आस
           कौन रखे,

ज़मीं की  बंदिशों का’ पास
             कौन रखे,

वो नीले आसमां तक’ रास्ता
           मेरा ही होगा,

किसी के  नक़्श-ए-पा की’
        प्यास कौन रखे,

मिलेगी मंज़िलें मुझको मेर
          ही हौसले से,

ग़ैरों के  वादों पर’  विश्वास
           कौन रखे,

सफ़र  अपना  है’ तो  फिर
   मुश्किलें भी अपनी हैं,

भला रफ़्तार में’ अब  कोई
       कयास कौन रखे,

लिखूंगा मुक़द्दर मैं अपनी ही
   परवाज़ से अब, ज़ख्मी’

पुराने क़िस्सों को’ दिल के
   पास कौन रखे…🔥🫰
╭─❀💔༻ 
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loveguruaashiq.661810

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है 🌹 खुशी का द्वार
https://youtu.be/OhRr-95y6og?si=3t289bDkV7GXRjlr

mamtatrivedi444291

આ ઉતરાયણ પર કુંવારાઓના પેચ લડી જાય.🤩🤩
અને
પરણેલેઓને થોડી ઢીલ મળી જાય એવી ઈશ્વરને પ્રાર્થના 😜😜

🪁🪁HAPPY UTTRAYAN To ALL 🪁🪁 🤩પરણેલાઓને ખાસ સૂચના:🤩
બીજાની ફરકી પર નજર નાખવાના ચક્કરમા તમારો પતંગ ગોથુ ના ખાઈ જાય એનુ ખાસ ધ્યાન રાખજો ....
😜😜😜😂😂😂

jighnasasolanki210025