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New bites

तुम मुझसे रूठी हो,
पर मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम है।
हर पल तुम्हारी हँसी की आवाज़ मेरी सांसों में गूंजती है,
और हर खामोश लम्हा तुम्हारी याद से भर जाता है।

मैं जानता हूँ, मेरी बातों में कभी-कभी तूफ़ान आ जाते हैं,
पर मेरे दिल के कोने में सिर्फ़ तुम्हारी जगह है।
तुम्हारे बिना हर रंग फीका लगता है,
और हर गीत अधूरा सा लगता है।

अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बिना दुनिया बेरंग है,
तो क्या तुम मुझे माफ़ कर दोगी?
अगर मैं हाथ बढ़ाऊँ और कहूँ,
“चलो फिर से हँसें, साथ में,”
क्या तुम उस पल को फिर से मेरे साथ जीओगी?

मैं वादा करता हूँ,
ना कोई बड़ी बात होगी, ना कोई झगड़ा याद रहेगा।
सिर्फ़ तुम और मैं,
और वो नन्ही-सी मुस्कान जो तुम्हारे होंठों पर लौट आए।

तो क्या तुम मेरी दुनिया में फिर से लौटोगी,
और मेरे हर एक दिन को रोशनी से भर दोगी?

a9560

नाम: खामोशी में तेरी

तुम पास हो, फिर भी दूर हो,
हर नजर मिलती है, पर हाथ नहीं मिलता।
कदम तेरे मेरे पास आते हैं,
पर राहें अचानक किसी अजनबी की तरह मोड़ लेती हैं।

तुम हंसते हो, और मेरी धड़कनें बढ़ जाती हैं,
शब्दों में कहीं दबा सा,
कोई सवाल उठता है—
क्यों हमारी बातें अधूरी रह जाती हैं?

हवा में तेरी खुशबू आती है,
और मैं खुद को रोकता हूँ,
ना छू लूँ, ना बोल दूँ,
पर दिल की ख्वाहिश, हर पल बढ़ती है।

तेरी आँखों में जो झलक है,
वो कहती है—“आओ।”
और आवाज़ मेरी,
सिर्फ़ खामोशी में फँस जाती है।

हर रात यही सोचता हूँ,
क्या मैं सही समय पर पहुँचूँगा?
या हमेशा इस खामोशी में,
तेरे करीब रहकर दूर ही रह जाऊँगा?

a9560

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✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

तुम क्यों हर किसी को दिखाते हो अपना जख़्म खोलकर..
मोहन यहाँ कौन हर किसी के जख्मों पर मरहम लगाता है..

momosh99

​"मैं क्या लिखूँ?
खुद को नवाब लिखूँ या खुद को फ़कीर लिखूँ?
​नवाब लिखता हूँ, तो फ़कीर छूट जाता है,
फ़कीर लिखता हूँ, तो नवाब छूट जाता है।
​हसीना की सूरत देखूँ, तो अपनी सूरत भूल जाता हूँ,
तुम अपने लफ्ज़ों से बयां तो करो—
अपनी स्याही से खुद को नवाब लिखूँ या फ़कीर लिखूँ?
​कदम-कदम चलकर मैं यहाँ तक आया हूँ,
मैं सोचता हूँ... तुम अपने लफ्ज़ों से बयां करो,
गर तुम बयां नहीं करते, तो मैं खुद को फ़कीर ही लिखता हूँ।"
​- सत्येंद्र कुमार "एसटीडी"
कटनी, मध्य प्रदेश
दूरभाष -7648959825

stdmaurya.392853

नेपाल मेरो जान, नेपाल मेरो शानगीत का शीर्षक: नेपाल मेरो जान, नेपाल मेरो शान
अंतरा 1:
नेपाल मेरो मातृभूमि, प्यारको देश मेरो,
पहाड, तराई र हिमाल, गर्व छ यहाँ मेरो।
शहीदको रगतले रंगिएको, धर्ती सुनौलो छ,
एकता, भाइकता र माया, यो देशको आधार हो।
कोरस:
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
अंतरा 2:
जनताको स्वाभिमान, हाम्रो पहिचान हो,
संघर्षको बाटोमा, हाम्रो विश्वास प्रबल छ।
हर कठिनाइ, हर बाधा, सामना गरौं सँगै,
नेपालको चमक सधैं, आकाशमा चम्किरहोस्।
कोरस:
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
अंतरा 3 (संस्कार र भविष्य):
बच्चाहरुको हाँसो, बगैंचामा फूल जस्तै,
शिक्षा र संस्कारले, बनाउँ हामी उज्यालो।
राष्ट्र निर्माणमा हामी, हातेमालो गरौं सधैं,
नेपाल हाम्रो घर हो, यसलाई माया गरौं।
कोरस (दोहरो):
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।

rajukumarchaudhary502010

अब एकांत ही मेरा सुफर है......

abhi006

સમય દરેક સમયને બદલી નાખે છે,
ફક્ત સમયને પણ થોડો સમય આપો.

ફુરસદ મિલે તો ફરમાઈશ હૈ ચાય કી.......

#Mrugzal
#TeaLover

johanjohan3745

दूरियां तुम्हारी हमें बहुत खलतीं मोहन,,
तुम अगर कभी हमारे करीब से रहे होते,,

momosh99

Do you know that the One whose knowledge and vision have become pure (shuddha), that is the Self and that verily is the shuddha chidroop?

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dadabhagwan1150

क्या कोई बुक लिखी जाये..? 📚🌻🤍
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desaipragati1108gmail.com102305

सपने बड़े रखो📖 सपने बड़े रखो
भाग – 1 : बारिश में भीगता सपना
बारिश ज़ोरों से हो रही थी।
आसमान मानो फट पड़ा हो। काली घटाएँ, तेज़ हवा और सड़क पर बहता पानी—सब कुछ किसी गरीब की ज़िंदगी जैसा ही उथल-पुथल से भरा हुआ।
उसी बारिश में एक लड़का तेज़ कदमों से चला जा रहा था।
फटे हुए चप्पल, भीगे कपड़े और आँखों में थकान।
उसका नाम राहुल था।
राहुल कोई आम लड़का नहीं था, लेकिन उसकी ज़िंदगी बिल्कुल आम से भी बदतर थी।
वह गरीब था—इतना गरीब कि सपने देखना भी उसे कई बार गुनाह लगता था।
बारिश की बूँदें उसके चेहरे पर गिर रही थीं, लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ रहा था।
उसे बस घर पहुँचना था।
तभी अचानक—
सड़ाक… सड़ाक…
एक चमचमाती काली कार उसके बगल से गुज़री।
इतनी तेज़ कि सड़क का गंदा पानी उछलकर राहुल के कपड़ों पर गिर पड़ा।
राहुल रुक गया।
उसने कार को जाते हुए देखा।
कार के अंदर ए.सी. चल रहा होगा…
सूखे कपड़े, मुलायम सीट, मोबाइल पर बात करता कोई अमीर आदमी…
राहुल ने गहरी साँस ली।
“काश… मेरी ज़िंदगी भी ऐसी होती,”
उसने मन ही मन कहा।
उसकी आँखों में एक सपना चमका—
बड़ा घर, अच्छी कार, माँ के चेहरे पर मुस्कान।
लेकिन अगले ही पल हकीकत ने उसे वापस ज़मीन पर ला पटका।
वह फिर चल पड़ा।
टूटा हुआ घर, टूटा हुआ दिल
जब राहुल अपने घर पहुँचा, तो नज़ारा और भी दर्दनाक था।
छोटी-सी झोपड़ी।
टपकती छत।
अंदर जगह-जगह पानी भरा हुआ।
उसकी माँ एक कोने में बैठी थी, पुराने बर्तन के नीचे पानी टपकने से रोकने की कोशिश कर रही थी।
“आ गया बेटा?”
माँ ने थकी हुई आवाज़ में कहा।
राहुल कुछ नहीं बोला।
उसने अपनी माँ के हाथ देखे—
झुर्रियों से भरे, मेहनत से कठोर हो चुके।
“आज भी काम नहीं मिला?”
माँ ने पूछा।
राहुल ने सिर झुका लिया।
“नहीं माँ…”
माँ ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखें बहुत कुछ कह रही थीं।
बेबस माँ, बेबस बेटा।
छत से टप-टप पानी गिर रहा था,
मानो हर बूँद राहुल के दिल पर गिर रही हो।
उसी पल राहुल ने मन ही मन एक कसम खाई—
“मैं ऐसा दिन ज़रूर लाऊँगा
जब मेरी माँ को इस बारिश में डरना नहीं पड़ेगा।”
सपने देखने की हिम्मत
रात को राहुल सो नहीं सका।
बारिश की आवाज़, माँ की चिंता और उस चमचमाती कार की तस्वीर—सब दिमाग में घूम रहा था।
“क्या मैं भी अमीर बन सकता हूँ?”
उसने खुद से पूछा।
दुनिया ने उसे हमेशा यही सिखाया था— गरीब पैदा हुए हो, गरीब ही मरोगे।
लेकिन राहुल का दिल मानने को तैयार नहीं था।
उसने आँखें बंद कीं और खुद को एक बड़े ऑफिस में देखा।
सूट पहने, आत्मविश्वास से भरा हुआ।
लोग उसे “सर” कहकर बुला रहे थे।
उस रात, पहली बार राहुल ने बड़ा सपना देखा।
अगली सुबह
सुबह बारिश रुक चुकी थी।
लेकिन राहुल के अंदर कुछ जाग चुका था।
वह जानता था— रास्ता आसान नहीं होगा।
भूख, ताने, असफलता—सब झेलनी पड़ेगी।
फिर भी वह मुस्कराया।
क्योंकि उसने तय कर लिया था—
“मैं हालात का शिकार नहीं बनूँगा,
मैं अपनी किस्मत खुद लिखूँगा।🌟 प्रेरणा की चमक:
“जब परिस्थितियाँ कठिन हों, सपने बड़े रखो। अगर आज तुम्हारा कदम धीमा है, तो भी याद रखो—हर छोटी कोशिश तुम्हें उस बड़े सपने के करीब ले जाती है। राहुल की तरह, तुम्हें भी अपनी किस्मत खुद लिखनी है। अगली बार देखो कैसे राहुल की मेहनत और हिम्मत उसे उसकी मंज़िल तक ले जाएगी।

rajukumarchaudhary502010

TREE MINDSET गाछी से सीख

जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणादायक किताब


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भूमिका

प्रकृति हमारी सबसे बड़ी गुरु है। अगर हम ध्यान से देखें, तो हर पेड़ (गाछी) हमें जीवन जीने का सलीका सिखाता है। वह बिना बोले बहुत कुछ कह देता है—धैर्य, साहस, संघर्ष, सेवा और शांति। यह किताब उन्हीं सीखों का संग्रह है, जो एक गाछी हमें रोज़ देती है, लेकिन हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।


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अध्याय 1: गाछी क्या है

गाछी सिर्फ लकड़ी और पत्तों का ढांचा नहीं है। वह जीवन का प्रतीक है। वह जन्म लेता है, बढ़ता है, संघर्ष करता है और अंत में दूसरों के काम आता है। गाछी हमें सिखाता है कि जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी होता है।


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अध्याय 2: गाछी निडर है

आंधी हो, तूफ़ान हो या तेज़ धूप—गाछी डटा रहता है। वह डरता नहीं, झुकता नहीं। जीवन में भी जब कठिनाइयाँ आएँ, तो गाछी की तरह निडर बनना चाहिए। डर सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन है।


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अध्याय 3: डरना मना है

जो डर गया, वह हार गया। गाछी हमें सिखाता है कि डर के आगे झुकना नहीं है। हालात चाहे जैसे भी हों, आगे बढ़ते रहना ही जीवन का नियम है।


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अध्याय 4: धैर्य रखो

एक पेड़ एक दिन में बड़ा नहीं होता। उसे फल देने में सालों लग जाते हैं। उसी तरह जीवन में भी धैर्य बहुत ज़रूरी है। जो धैर्य रखता है, वही लंबे समय तक टिकता है।


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अध्याय 5: खामोश रहो

गाछी शोर नहीं मचाता। वह चुपचाप अपना काम करता है—छाया देता है, फल देता है, हवा को शुद्ध करता है। जीवन में भी ज़्यादा बोलने से अच्छा है ज़्यादा काम करना। खामोशी में ही असली ताकत होती है।


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अध्याय 6: सपने बड़े रखो

गाछी हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है। वह कभी ज़मीन से चिपक कर नहीं रहता। यह हमें सिखाता है कि सपने हमेशा बड़े रखने चाहिए। छोटे सपने इंसान

rajukumarchaudhary502010

When the axe came into the forest, the trees said, "The handle is one of us." They didn't fear the blade, because the danger felt familiar. That's how destruction often begins,not from enemies, but from those who look like us, speak like us, and gain our trust. By the time the truth is clear, the damage is already done.

noname414487

Die with memories, not dreams. Dreams are meant to be chased, not stored for "someday." A life well lived is not measured by what you wished for, but by what you experienced, felt deeply, and turned into memories.

noname414487

Nothing kills you quite like your mind. Not people, not situations, not fate, but the thoughts you carry in silence. It's the constant replaying of memories, the fear of what might happen, and the regret over what already has. The mind has a way of turning small wounds into deep scars, whispering doubts until they sound like truth. And because that voice feels like your own, you rarely question it. Slowly, without noise or warning, it drains you, not by destroying your body, but by exhausting your peace.

noname414487

I am a common man. Life is going on normally. But something unknown thing within me not allowing me to sleep. A voice from somewhere always wakes me up from sleep in every midnight.. it says to me comon wakeup it's high time.. sir and meditate for those who are suffering. I'm blessing you with healing powers. Tell the people you can heal then. In starting they will not trust you. They crack jokes on you. They will propagate you as an insane person. But don't become angry on them.. they don't know who is behind you... And why I'm behind you.. because they cannot face my force... Only you.. so you ready yourself for the service. My child.. get up... Stand up... Go out.. walk along the streets.. sit near beaches... On the top of the hills... Be connected with me all the time... Help me my boy to help those helpless souls who were already disconnected with and never trying to contact me... You are the power you are the tower to send my signals to them... Now I'm ready... To help my fellow mankind... I'm here to hear you to pray for you... Eat well do well think well sleep well... But, don't forget one thing every moment every thing within you and around you will be very well until I am here and the almighty God is with us... Thankyou omshanthi

bkswanandlotustranslators

મારા દાદાના પપ્પાએ રોપેલી "ખાટી આંમલી" સને ૨૦૦ વર્ષ બાદ સને.૨૦૧૭ ના બનાસ નદીના પૂરમાં આ વૃક્ષ પડી ગયું.દાદાના પપ્પાની આ આણમોલ યાદ માત્ર ફૉટોમાં હું સાચવી રહ્યો છુંગુજરાત રાજ્યના રાધનપુર તાલુકાનાં "ગોતરકા" ગામે તળાવના કિનારે આ વૃક્ષ હતું જે જગ્યા દાદા "નથુદાદા"નીઃ વાડી તરીકે ખ્યાત હતી.
આ વૃક્ષ ઉપર આશરે ૧૨૫ જેટલા મોટી ભમરીવાળાં મધ હતાં.નીચે બતાવેલો પીક ઝાંખો છે કેમકે મારા બ્લેક વ્હાઇટ સદા કેમેરાથી ક્લિક કરેલો છે.આશરે ૩૫ વર્ષ પહેલાં મોબાઈલનો મારાં હાથમાં જમાનો ન્હોતો.
. - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

मेरी समझ में यह नहीं आता..किसी समय में प्यार मेरे लिए पूजा हुआ करता था.. मैं जमाने से लड़ने को तैयार था इसके लिए..इसके सामने मैं कुछ भी नहीं समझता था किसी को..अब समय बदला बच्चे बड़े हो गए तो यह पूजा में अपने बच्चों को क्यों नहीं करने देता? क्यों मुझे इस प्यार के नाम से नफरत हो गई है..मेरे लिए किसी समय में जो पूजा हुआ करता था यह प्यार अब कैसे मेरे दिल में इसे पूजा नहीं मानता.. अपने बच्चों को मैं पूजा नहीं करने देना चाहता..
ऐसा क्यों? क्या किसी के पास इसका जवाब है?

momosh99

My Lovely Wife
भाग 3 : दोस्ती की शुरुआत
राधा के जाने के बाद भी राहुल काफी देर तक वहीं खड़ा रहा।
उसके कानों में बस एक ही आवाज़ गूंज रही थी —
“अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।”
उस दिन के बाद राहुल को कॉलेज हर दिन नया लगने लगा।
अब वो क्लास से ज़्यादा
लाइब्रेरी और कैंटीन में समय बिताने लगा,
शायद फिर से राधा दिख जाए।
कुछ दिनों बाद लाइब्रेरी में फिर मुलाक़ात हुई।
राधा एक किताब ढूँढ रही थी,
लेकिन ऊँची शेल्फ़ तक उसका हाथ नहीं पहुँच रहा था।
राहुल ने हिम्मत करके कहा,
“मैं मदद कर दूँ?”
राधा ने मुस्कराकर सिर हिला दिया।
“हाँ, प्लीज़।”
राहुल ने किताब निकालकर उसे दे दी।
उस पल दोनों के हाथ हल्के से टकरा गए।
वो छोटा-सा स्पर्श,
लेकिन दिल में बड़ी हलचल।
“थैंक यू, राहुल,”
राधा ने कहा।
“आप कौन-सी किताबें पढ़ती हैं?”
राहुल ने पहली बार खुलकर सवाल किया।
“कहानियाँ…
जिनमें सच्चे रिश्ते होते हैं,”
राधा ने जवाब दिया।
राहुल मुस्कराया,
“मुझे भी कहानियाँ पसंद हैं।”
उस दिन दोनों देर तक बात करते रहे —
क्लास, किताबें, ज़िंदगी और सपने।
अब जब भी कॉलेज में मुलाक़ात होती,
एक मुस्कान ज़रूर होती।
धीरे-धीरे
लाइब्रेरी उनकी पसंदीदा जगह बन गई।
और दोस्ती,
जो अनजाने में शुरू हुई थी,
अब गहरी होने लगी थी।
राहुल समझ रहा था —
ये दोस्ती अब साधारण नहीं रही।
लेकिन राधा के दिल में क्या चल रहा था?
ये वो नहीं जानता था।

rajukumarchaudhary502010

My Lovely Wife
भाग 2 : पहली बातचीत
अगले दिन कॉलेज का माहौल हमेशा की तरह ही था,
लेकिन राहुल के लिए सब कुछ बदला हुआ लग रहा था।
उसकी आँखें बार-बार उसी दिशा में जा रही थीं
जहाँ कल उसने राधा को देखा था।
दिल में एक अजीब-सी बेचैनी थी —
आज फिर दिखेगी या नहीं?
और तभी…
कॉलेज के गेट से राधा अंदर आई।
हल्के गुलाबी रंग का सूट,
बालों में सादगी,
और चेहरे पर वही शांत मुस्कान।
राहुल का दिल तेज़ धड़कने लगा।
क्लास के बाद राहुल अपने दोस्त अमन के साथ कैंटीन में बैठा था।
अमन ने राहुल की हालत देख ली।
“ओए राहुल, आज बड़ा खोया-खोया लग रहा है।
किसी पर दिल आ गया क्या?”
अमन ने हँसते हुए कहा।
राहुल हल्का सा मुस्कराया,
लेकिन कुछ बोला नहीं।
थोड़ी देर बाद राधा अपनी सहेली के साथ कैंटीन में आई।
राहुल की नज़रें खुद-ब-खुद उसी पर टिक गईं।
अमन ने मौका देखकर कहा,
“अब नहीं गया तो कभी नहीं जाएगा।
जा, बात कर।”
राहुल हिम्मत जुटाकर उठा।
हर कदम भारी लग रहा था,
जैसे दिल पैरों में आ गया हो।
राधा पानी लेने उठी।
और उसी पल राहुल उसके पास पहुँच गया।
“Excuse me…”
राहुल की आवाज़ हल्की काँप रही थी।
राधा ने उसकी ओर देखा,
“हाँ?”
“वो… कल लाइब्रेरी में…
आपकी किताब गिर गई थी,”
राहुल ने झूठा बहाना बना लिया।
राधा मुस्कराई,
“ओह… मुझे याद नहीं,
पर शुक्रिया।”
राहुल थोड़ा सहज हुआ।
“आप… आप राधा हैं न?”
“हाँ, और आप?”
उसने सहजता से पूछा।
“राहुल।”
बस इतना ही था।
छोटा-सा परिचय,
लेकिन दिल के लिए बहुत बड़ा।
राधा ने जाते-जाते कहा,
“अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।”
और राहुल वहीं खड़ा रह गया।
दिल ने ज़ोर से कहा —
ये तो बस शुरुआत है।

rajukumarchaudhary502010

My Lovely Wife
(एक खूबसूरत प्रेम कहानी)
भाग 1 : पहली नज़र
कहानी शुरू होती है एक कॉलेज से।
वो कॉलेज जहाँ हर छात्र अपने-अपने सपनों को पंख देना चाहता था।
उसी कॉलेज में पढ़ता था राहुल —
स्मार्ट, समझदार और थोड़ा सा शांत रहने वाला लड़का।
वो पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन दिल से बहुत सादा।
उसी कॉलेज में थी राधा —
खूबसूरत, संस्कारी और हर किसी से अलग।
उसकी मुस्कान किसी भी उदास दिन को खास बना सकती थी।
एक दिन राहुल लाइब्रेरी में बैठा पढ़ रहा था,
तभी अचानक उसकी नज़र सामने बैठी लड़की पर पड़ी।
वो राधा थी…
सफेद सूट, खुले बाल और हाथ में किताब।
राहुल की किताब खुली थी,
लेकिन उसकी नज़रें किताब के अक्षरों पर नहीं,
राधा की मुस्कान पर टिक गई थीं।
राधा ने अचानक नज़र उठाई,
और राहुल से आँखें मिल गईं।
कुछ सेकंड की ख़ामोशी…
दिल की धड़कन तेज़…
और फिर राधा की हल्की सी मुस्कान।
वो पल छोटा था,
लेकिन राहुल की ज़िंदगी बदलने के लिए काफी था।
राहुल नहीं जानता था कि
आज जो मुस्कान उसने देखी है,
एक दिन वही उसकी हर सुबह की वजह बनेगी…

rajukumarchaudhary502010