🌹 'अधूरी उल्फ़त ' 🌹
क़िस्से मेरी मोहब्बत के बड़े मशहूर हो गए।
देखो, उल्फ़त में तुम्हारी हम मजबूर हो गए।
आँखों में तुम बसे हो कुछ इस तरह हमारे,
नज़रों से मेरी दुनिया के सब बे-नूर हो गए।
चाहा था सिर्फ़ तुमको और तुमको ही पाना,
इस मोड़ पर हम अपनों से भी दूर हो गए।
तन्हाइयों से हमको अब डर नहीं है लगता,
तेरी यादों के साए ही अब दस्तूर हो गए।
पलकों पे जो सजाए थे ख़्वाब 'व्योम' हमने,
वो काँच के थे खिलौने, चकनाचूर हो गए।
✍...© विनोद. मो. सोलंकी " व्योम "
जेटको (GEB) अंजार. मु. रापर.