जीवन को जिये एक एक पल बड़ा कीमती है ।
मैं तुम्हारे धर्म, नियम, कर्मकांड या अंधी आस्था का प्रचारक नहीं हूँ।
मैं नास्तिक भी नहीं — पर किसी विश्वास की गुलामी में भी नहीं।
मैं गुरु बनने नहीं आया,
न भगवान बनने का दावा करता हूँ।
मैं तुम्हें झूठे आश्वासन, भविष्य के सपने या डर की कहानियाँ नहीं देता।
मैं केवल इतना कहता हूँ —
जीवन को स्वयं अनुभव करो।
बच्चे की तरह जियो —
कोरे, सरल, खुले हुए।
नियमों के बोझ से नहीं, अनुभव की जागरूकता से।
मैं तुम्हें ब्रह्ममुहूर्त में उठने को नहीं कहता —
तुम उठकर देखो, आनंद है तो अपनाओ, नहीं तो छोड़ दो।
मंदिर जाओ तो निष्काम जाओ —
यदि भय, चिंता और वासना हल्की होती है तो अच्छा है;
कारण मंदिर नहीं, तुम्हारा भीतर है।
न कोई पूजा करवानी है,
न कोई आदेश देना है।
जहाँ आनंद मिले और दूसरों को भी आनंद मिले — वहीं ठहरो।
सभ्य के साथ सभ्य,
पागल के साथ पागल —
जीवन के रंग के अनुसार बहो।
कल जा चुका है, भविष्य आया नहीं —
इस क्षण में प्रवेश करो।
यही ईश्वर है।
आनंद एक दिन में नहीं आता —
बूंद-बूंद से सरोवर भरता है।
हर दिन का छोटा आनंद मिलकर समाधि बनता है।
मैं नहीं कहता तुम बुरे हो या अच्छे —
तुम्हारा स्वभाव ही तुम हो।
कोई गुरु तुम्हारा स्वभाव नहीं बदल सकता।
भावनाएँ नशा हो सकती हैं,
पर सत्य मौन है — बिना योजना, बिना प्रदर्शन।
भीतर ठहरो।
भीतर ही विज्ञान है, भीतर ही प्रेम है।
सिर्फ जियो — अभी, आज से।
✍🏻 — 🙏🌸 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲