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kuru vansh ka utpati

skptech

ganpati bappa morya

skptech

मेरे सभी कविओं पर आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, और ज्यादा से ज्यादा शेयर करे जिससे मेरे द्वारा लिखी गई कविताएं सभी भारतवासी के पास पहुँचे.....

आपका प्रेम, आशीर्वाद और साथ ही मेरा सौभाग्य होगा.....

spsingh

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947

*प्रैस विज्ञप्ति-*

*' वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की पावस पर कवि गोष्ठी हुई-*

टीकमगढ़// नगर की सक्रिय साहित्यिक संस्था वनमाली सृजन केन्द्र जिला इकाई टीकमगढ़ की पावस पर केन्द्रित कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में आयोजित की गयी।
कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि रामानंद पाठक ‘नंद’ (नैगुवाँ) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार यदुकुलनंदन खरे (बल्देवगढ़) एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ रहे।
गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कवि प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने सरस्वती वंदना कर ये रचना सुनायी-
मिलो परिचय जो बुंदेली पानी कौ,नाव दुनिया में झाँसी की रानी कौ।
शायर जनाब खालिद बेग (गुरसराय) ने ग़ज़ल कही-
तजकिरा उल्फ़त हो दिनरात हिन्दुस्तान में।
पर न हो नफ़रत की कोई बात हिन्दुस्तान में।।

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष एवं संयोजक
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने पावस दोहे सुनाए-
काले बादल ला रहे, पानी अपने साथ।
धरती स्वागत के लिए बड़ा रही है हाथ।।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने पढ़ा- लगबै बसकारौ बसकारौ, लगन लगो इँदयारौ।परदेसी प्रीतम प्यारे बिन, बेकल जिया हमारौ।।

रामगोपाल रैकवार ने दोहे पढ़े-
फिर आ गए आषाढ़ के दिन आ गए।फिर छा गए आषाड़ के घन छा गए।।रामनंद पाठक ‘नंद’ (नैगुवाँ) ने पढ़ा-
बसकारे के दिन जे प्यारे तपन सिरावन बारे।रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे मोरन पँख पसारे।।स्वप्निल तिवारी ने पढ़ा- पत्ते से पत्ते पर नन्हें कदम, समाहित वह मिट्टी में गतिमान।गिरती बूँदे रंग बदलते आसमान।।

वफा शैदा ने ग़ज़ल कही-
वो मेरी खूब वफ़ाओं का सिला देते हैं।जब भी देते हैं हमें दोस्त दगा देते हैं।कमलेश सेन ने सुनाया- जब-जब पावस आता है। हमको बहुत लुभाता है।।

यदुकुल नंदन खरे ने पढ़ा-
भले आपके आगे कोई षटरस व्यंजन का थाल लिए हो।
सियाराम अहिरवार ने पढ़ा- पावस ऋतु आई है फिर से, झरना झरने लगे हैं गिर से।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही-
काले काले ये बादल घने छा गए।सबके मन को बहुत आज फिर भा गए।।डी.पी.यादव ने पढ़ा- बरसै बदरा करो करो, जानों आ गव है बसकारो।

हाज़ी ज़फ़रउल्ला खां ज़फ़र’ ने ग़ज़ल कही- जईफी आई है जब से नया साथी मिला है।नहीं तंहा हूँ मैं ये दर्द मेरे साथ तौ है।।शायर सलीम खान एवं बसीर फराज़ ने भी अपने कलाम पढ़े।
कविगोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ने किया।
***
*रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’* टीकमगढ़(म.प्र.)मोबाइल-9893520965

rajeevnamdeoranalidhori247627

અધ્યાય - ૧ (ભગવદ્ગીતા)
૧) અતિ-આત્મવિશ્વાસનું નુકસાન (કુગર્વનું બળ)
•યુદ્ધ શરૂ થતાં પહેલાં દુર્યોધન પોતાની સેના જોઈને અતિ-આત્મવિશ્વાસમાં આવી જાય છે. તે ભીષ્મ પિતામહ અને દ્રોણાચાર્ય જેવા મહાન યોદ્ધાઓ પર અતિશય ભરોસો રાખે છે, પણ એ ભૂલી જાય છે કે સામે પક્ષે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ (ધર્મ) છે. આ શીખવે છે કે માત્ર સંસાધનોથી જ ક્યારેય જીત નથી થતી, સત્ય અને નીતિ હોવી જરૂરી છે

ઉદાહરણ:કોઈ પણ માનવ ધનવાન થઈ ગયા પછી અહંકારમાં આવીને કોઈ પણ લડાઈ કે બાબતને નાની સમજવાની ભૂલ કરી બેસે છે અને આખરે અહંકારી બની જાય છે.વિદ્યાર્થીઓમાં પણ આ નુકસાન જોવા મળે છે. જો કોઈ વિદ્યાર્થી એમ વિચારે કે "મને બધું જ આવડે છે", તો તે આત્મવિશ્વાસ નથી પણ અહંકાર છે. સાચો આત્મવિશ્વાસ એટલે પોતાની મહેનત પર ભરોસો રાખવો, નહીં કે બીજાને નીચો દેખાડવો

janvi2332

माझी प्रेरणादायी मराठी डायरी "आत्ममग्न मी" आधीच प्रकाशित झाली आहे. जर तुम्ही अजून ती वाचली नसेल, तर एकदा नक्की वाचा.

ही फक्त शब्दांची मांडणी नाही, तर स्वतःला शोधण्याचा, स्वतःशी संवाद साधण्याचा आणि आयुष्याकडे नव्या नजरेने पाहण्याचा एक छोटासा प्रयत्न आहे.

जर तुम्ही ती आधी वाचली असेल, तर तुमचा अभिप्राय नक्की कळवा. आणि अजून वाचली नसेल, तर आजच "आत्ममग्न मी" सोबत हा प्रवास सुरू करा.

–शिवराज भोकरे...🙏

shivrajbhokare342239

वेदांत 2.0 LIFE: अस्तित्व-आधारित जीवन सिद्धांत एक ऐसा दार्शनिक ग्रंथ है जो विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है। यह पुस्तक किसी नए धर्म, संप्रदाय या मत की स्थापना नहीं करती, बल्कि अस्तित्व को समझने के लिए एक संरचनात्मक और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य पाठक को किसी विश्वास को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि स्वयं जीवन, प्रकृति और चेतना का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के लिए आमंत्रित करना है।
इस पुस्तक का केंद्रीय आधार 0 से 9 तक का अस्तित्व-चक्र है। लेखक के अनुसार 0 शून्यता नहीं, बल्कि समस्त संभावनाओं का मौन आधार है। 1 एकत्व का उदय है, 2 अनुभव का द्वैत है, 3 संतुलन और त्रिगुण का सिद्धांत है, 4 संरचना का निर्माण है, 5 पंचतत्व के रूप में प्रकृति का प्रकट होना है, 6 विस्तार है, 7 जीवित व्यवस्था है, 8 समग्र दिशा और सह-अस्तित्व का क्षेत्र है, तथा 9 पूर्ण प्रकृति का प्रतीक है। इसके बाद पुनः 0 की ओर लौटना जीवन के चक्रीय स्वरूप और निरंतर नवीकरण का संकेत देता है।
पुस्तक में 99% + 0.000...1% के सिद्धांत को जीवन और परिवर्तन के एक दार्शनिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस दृष्टि में पूर्णता कभी स्थिर नहीं होती; अपूर्णता ही सृजन, परिवर्तन, विकास और चेतना की प्रेरक शक्ति बनती है। लेखक इसे अस्तित्व के एक सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में व्याख्यायित करते हैं, जो जीवन की गतिशीलता को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।
ग्रंथ में सत्, रज और तम को अस्तित्व के तीन मूल गुणों के रूप में समझाया गया है तथा पंचतत्व को प्रकृति की पाँच मौलिक प्रवृत्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन अवधारणाओं को आधुनिक पाठकों के लिए सरल बनाने हेतु परमाणु संरचना, क्वांटम यांत्रिकी, बिग बैंग सिद्धांत, सूर्य–धरती संबंध और जीवित प्रणालियों जैसे विषयों के साथ प्रेरणादायक एवं प्रतीकात्मक समानांतरताएँ भी दी गई हैं। पुस्तक स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करती है कि ये तुलनाएँ वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, बल्कि समझ को सरल बनाने वाले रूपक हैं।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, दार्शनिकों, आध्यात्मिक साधकों तथा उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है जो जीवन को केवल धार्मिक आस्था या वैज्ञानिक तथ्यों तक सीमित न रखकर एक व्यापक और समन्वित दृष्टि से समझना चाहते हैं। इसमें प्रस्तुत विचार प्रश्न पूछने, आत्मचिंतन करने और अनुभव के आधार पर सत्य की खोज करने के लिए प्रेरित करते हैं।
वेदांत 2.0 LIFE का मूल संदेश सरल है—जीवन को बदलने से पहले उसे समझना आवश्यक है। जब मनुष्य अस्तित्व के नियमों, प्रकृति के संतुलन और अपने भीतर उपस्थित चेतना को देखना प्रारम्भ करता है, तभी वास्तविक बोध का उदय होता है। यह पुस्तक उसी बोध-यात्रा का आमंत्रण है—जहाँ विज्ञान जिज्ञासा देता है, दर्शन अर्थ देता है और अध्यात्म अनुभव देता है।

bhutaji

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है काला रंग

mamtagirishtrivedi740648

में अपने बर्थडे तक नहीं मनाता
तुम्हे क्या लगता हैं

में तुम्हे मनाऊंगा

anisroshan324329

मरते दम तक… एक अधूरी मोहब्बत की कहानी

बारिश की उस शाम में शहर की सड़कें खाली थीं। आसमान में बादल थे और हवा में एक अजीब सी उदासी थी। उसी शाम आरव और मीरा पहली बार मिले थे।

मीरा एक साधारण लड़की थी, जिसकी आँखों में बड़े सपने थे। आरव एक जिम्मेदार लड़का था, जो अपने परिवार के लिए हर खुशी कुर्बान कर सकता था। दोनों की दुनिया अलग थी, लेकिन दिलों का रिश्ता धीरे-धीरे जुड़ने लगा।

हर दिन की छोटी-छोटी बातें उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी बन गईं। सुबह का पहला संदेश, शाम की लंबी बातें और भविष्य के सपने… सब कुछ एक खूबसूरत कहानी जैसा लगने लगा।

मीरा ने एक दिन पूछा,
"आरव, अगर जिंदगी में कभी मुश्किल समय आया तो क्या तुम मेरा साथ छोड़ दोगे?"

आरव मुस्कुराया और बोला,
"साथ छोड़ना तो दूर की बात है मीरा… मैं तुम्हारा साथ आखिरी सांस तक निभाऊंगा।"

लेकिन जिंदगी हमेशा सपनों के हिसाब से नहीं चलती।

कुछ समय बाद आरव के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी। परिवार की जिम्मेदारियों और समाज के डर के बीच आरव टूटने लगा। वह मीरा से दूर होने लगा।

मीरा ने पूछा,
"क्या हमारा प्यार इतना कमजोर था कि हालात के सामने हार गया?"

आरव की आँखों में आँसू थे।
"नहीं मीरा… मेरा प्यार कभी कमजोर नहीं था। मैं बस अपनी जिम्मेदारियों में फंस गया।"

मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा,
"प्यार पाने का नाम नहीं होता आरव… कभी-कभी किसी की खुशी के लिए खुद को खो देना भी प्यार होता है।"

समय बीत गया। दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन दिल के एक कोने में वह प्यार हमेशा जिंदा रहा।

कई सालों बाद आरव को पता चला कि मीरा ने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की मदद करने में लगा दी। उसने शादी नहीं की, क्योंकि उसके दिल में एक वादा आज भी जिंदा था।

आरव मीरा से मिलने पहुंचा। दोनों ने एक-दूसरे को देखा तो आंखों में हजारों बातें थीं।

आरव ने धीरे से कहा,
"मैं तुम्हारा साथ जिंदगी भर नहीं दे पाया… लेकिन मेरे दिल में तुम्हारा स्थान कभी कोई नहीं ले सका।"

मीरा मुस्कुराई और बोली,
"कुछ रिश्ते साथ रहने के लिए नहीं, हमेशा याद रहने के लिए बनते हैं।"

उस दिन दोनों ने कोई शिकायत नहीं की। बस पुराने प्यार को सम्मान दिया।

क्योंकि सच्चा प्यार हमेशा साथ रहने से साबित नहीं होता…
कभी-कभी वह मरते दम तक दिल में जिंदा रहकर भी अपनी कहानी लिख देता है।

समाप्त।

skptech

आजकल सब उल्टा हो रहा है शादीशुदा औरतों के बॉयफ्रेंड कुंवारे हैं

और कुंवारी लड़कियों के बॉयफ्रेंड शादीशुदा हैं।

anisroshan324329

हमारे बाबा ने बगिया बनाई,
चार बरगदों की छाँव सजाई।
हर रिश्ते को प्यार से सींचा,
ममता की खुशबू घर-घर आई।

अभी तो माली साथ हमारे,
खाद-पानी दिल से डाला।
प्यार की जड़ इतनी गहरी,
हर मौसम ने फूल संभाला।

न आए कभी पतझड़ इसमें,
रिश्तों का ये प्यार बना रहे।
बाबा की दी इस बगिया में,
हर आँगन यूँ ही हरा रहे।
DHAMAK

heenagopiyani.493689

जादूगर का रहस्य

एपिसोड 1: रहस्यमयी पुस्तक

घने जंगल के बीचों-बीच एक प्राचीन खंडहर था। गाँव के लोग उसे "मृत जादूगर का मंदिर" कहते थे। उनका विश्वास था कि जो भी उस मंदिर में गया, वह कभी वापस नहीं लौटा।

लेकिन 20 वर्षीय आरव इन कहानियों पर विश्वास नहीं करता था।

आरव एक गरीब अनाथ युवक था। वह अपनी बूढ़ी दादी के साथ एक छोटे से गाँव में रहता था। लकड़ियाँ काटकर और जड़ी-बूटियाँ बेचकर किसी तरह उनका गुज़ारा चलता था।

एक दिन दादी की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई।

वैद्य ने कहा, "अगर तीन दिनों के भीतर चंद्रमणि जड़ी नहीं मिली, तो इन्हें बचाना मुश्किल होगा।"

वह दुर्लभ जड़ी केवल उसी रहस्यमयी जंगल में मिलती थी।

अगली सुबह आरव कुल्हाड़ी और एक मशाल लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा।

जंगल में अजीब सन्नाटा था। पक्षियों की आवाज़ भी नहीं थी। अचानक तेज़ हवा चली और उसे लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो।

वह डरते हुए आगे बढ़ता रहा।

तभी उसकी नज़र एक विशाल टूटे हुए पत्थर के मंदिर पर पड़ी। मंदिर के द्वार पर प्राचीन भाषा में कुछ लिखा था—

"जो ज्ञान चाहता है, उसे पहले अपने भय पर विजय पानी होगी।"

आरव ने गहरी साँस ली और अंदर चला गया।

मंदिर के भीतर अंधेरा था। दीवारों पर जादूगरों, ड्रैगन और रहस्यमयी प्राणियों की विशाल मूर्तियाँ बनी थीं।

अचानक पूरा मंदिर काँप उठा।

फर्श के बीचों-बीच एक गोल पत्थर धीरे-धीरे खुलने लगा।

उसके भीतर से सुनहरी रोशनी निकल रही थी।

आरव ने झुककर देखा।

वहाँ एक प्राचीन पुस्तक रखी थी, जिसके ऊपर सुनहरे अक्षरों में लिखा था—

"सर्वोच्च जादू का ग्रंथ"

जैसे ही उसने पुस्तक को छुआ, पूरा मंदिर नीली रोशनी से भर गया।

उसके हाथों के चारों ओर चमकते हुए जादुई चिन्ह घूमने लगे।

तभी एक गूँजती हुई आवाज़ पूरे मंदिर में सुनाई दी—

"एक हज़ार वर्षों बाद... मेरा उत्तराधिकारी आ चुका है।"

आरव घबरा गया।

उसी क्षण मंदिर के बाहर आकाश काले बादलों से ढक गया। बिजली चमकने लगी।

दूर, अंधकार के राज्य में बैठा एक भयानक काला जादूगर अचानक अपनी आँखें खोलता है।

वह मुस्कुराता है और कहता है—

"आख़िरकार... वह पुस्तक जाग चुकी है। अब समय आ गया है कि मैं उसकी शक्ति अपने अधिकार में कर लूँ।"

उधर, आरव को अभी तक यह पता भी नहीं था कि उसने केवल एक पुस्तक नहीं उठाई, बल्कि ऐसी शक्ति को जगा दिया है जिसके लिए पूरी दुनिया में युद्ध छिड़ सकता है...

एपिसोड 1 समाप्त।
अगले एपिसोड में: पुस्तक का पहला रहस्य और आरव की पहली जादुई शक्ति प्रकट होगी।


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કદાચ ખોવાઈ જાઉં ભરસભામાં હું તારા વિચારમાં તો ઢંઢોળજે મને.
ભરીસભા છે એટલે,બાકી તારી યાદ તનમાં સદાય તરફડે છે.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

अधूरी मोहब्बत !

क्यों कहा तुमने
हमारी मोहब्बत अधूरी है?
क्या जीवन भर साथ रहने को ही,
पूर्ण होने की निशानी माना जाएगा?

अधूरा प्रेम नहीं,
हमारा उसके प्रति विश्वास हो जाता है
यदि मोहब्बत सच्ची और गहरी है
वो दूर रहकर भी बनी रहती है।

By. Santoshi " katha"

( लाइन पसंद आए तो लाइक जरुर करे और अपने विचार कमेंट में बताए। यदि आपने हमें फॉलो नहीं किया है तो कर लिजिए। धन्यवाद!! )

santoshikatha858769

Global Forgiveness Day

Forgiveness brings inner freedom.

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#forgiveness #forgivenessday #spirituality #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

स्वर्ग की अप्सरा तुम, दिव्य रूप धारी
नृत्य करतीं स्वर्ग में, अप्सरा तुम्हारी
गंधर्वों के साथ में, सुरों की ताल पर
नाचतीं तुम स्वर्ग में, अद्भुत सौंदर्य धार

तुम्हारे बालों में, फूलों की माला
तुम्हारे चेहरे पर, मुस्कान की लहर
तुम्हारे नृत्य में, स्वर्ग की झलक
तुम्हारी सुंदरता, हृदय को छू ले

स्वर्ग की अप्सरा, तुम्हारी कहानी
एक अद्भुत कथा, जो हृदय को छू जाए
तुम्हारी सुंदरता, स्वर्ग की शोभा
तुम्हारा नृत्य, हृदय को मोह ले।



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बादलों से मेरी आस मर गई
अब बरसो या ना बरसो
.... मेरी प्यास मर गई......@@@

anisroshan324329

"आख़िरी आहट"  

तेरे जाने से मेरी दुनिया उजड़ी नहीं,  
बस अब किसी दस्तक पर ये दरवाज़ा खुलता नहीं।  
साँसें चलती हैं, रस्में निभती हैं,  
मगर दिल ने किसी मौसम से दोबारा दोस्ती नहीं की।  

तेरे बाद हर चेहरे को देखा, परखा,  
शिकवा किसी से नहीं रहा…  
और भरोसा भी अब किसी पर ठहरता नहीं।  

तू गया और दर्द ने चुपके से मेरे सीने में बसेरा कर लिया।  
अब ख़ुशी आती भी है तो दरवाज़े पर ही लौट जाती है।  
कहती है, "यहाँ जगह नहीं है।"  

लोग कहते हैं भूल जाओ।  
मैं हँस देती हूँ।  
कुछ रिश्ते दफ़्न होते हैं, साहब…  
वो लाशें नहीं होतीं जो मिट्टी के साथ गल जाएँ।  

अब कोई कहे "उम्र भर साथ निभाऊँगा"  
तो लब पर हँसी आ जाती है।  
क्योंकि मैंने एक बार उम्र भर का वादा  
आँखों के सामने टूटते देखा है।  

सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तेरे जाने की नहीं थी,  
सबसे ज़्यादा तकलीफ़ उस "वहम" की थी  
जो हर आहट में तुझे लौटता हुआ सुनता रहा।  

तू गया तो मैं कुछ रोज़ रोई…  
और मेरा यक़ीन बरसों तक भीगता रहा।  

शायद तुझे नया आसमान मिल गया होगा,  
नए लोग, नई बातें।  
और मेरे हिस्से…  
तेरी वो आख़िरी आहट रह गई,  
जो आज भी मेरे कमरे में गूंजती है।  

तू छोड़कर गया तो रास्ते वही रहे,  
शहर वही रहा, लोग वही रहे।  
बस मेरी रूह ने  
किसी का इंतज़ार करना छोड़ दिया। 
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

🙏🙏यह महंगी 'भेंट सौगातों की,
दुनिया भले रहे एक तरफ,

मुझे एक 'चोकलेट' से,
खुश हो जाता 'बचपन' ज़ीना है।🦚🦚

parmarmayur6557

हर पति एक जैसा नहीं होता। पत्नी के प्रति उसका व्यवहार अक्सर तीन तरह का देखने को मिलता है—

पहला पति वह होता है जो समझदारी से पत्नी का साथ देता है। अगर घर वाले पत्नी से नाराज़ हों, तो वह बिना किसी का अपमान किए, बड़े धैर्य और बुद्धिमानी से पत्नी का पक्ष रखता है। वह ऐसा संतुलन बनाता है कि न पत्नी का सम्मान कम हो और न ही परिवार को बेवजह ठेस पहुँचे। ऐसे पति घर को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।

दूसरा पति वह होता है जिसे हमेशा यही डर रहता है कि कहीं परिवार वाले नाराज़ न हो जाएँ। इसलिए वह पत्नी की भावनाओं की परवाह कम करता है। चाहे पत्नी का दिल टूट जाए, उसकी आँखों में आँसू आ जाएँ, लेकिन वह परिवार वालों के सामने कभी पत्नी के लिए नहीं बोलता। ऐसे रिश्तों में पत्नी धीरे-धीरे अकेली महसूस करने लगती है।

तीसरा पति सबसे उलझा हुआ होता है। पत्नी के सामने तो उसकी हाँ में हाँ मिलाता है और परिवार वालों के सामने परिवार की तरफ हो जाता है। इतना ही नहीं, जब बात रिश्तेदारों, पड़ोसियों या समाज तक पहुँचती है, तो अपनी पत्नी को ही गलत साबित कर देता है ताकि उसकी अपनी छवि अच्छी बनी रहे। ऐसे पति किसी के भी सच्चे नहीं होते, क्योंकि वे हर जगह सिर्फ अपना फायदा देखते हैं।

रिश्ता तभी मजबूत बनता है जब पति सच का साथ दे, चाहे गलती पत्नी की हो या परिवार की। न्याय और सम्मान ही हर रिश्ते की सबसे मजबूत नींव होते हैं।

चौथा पति
चाहे पत्नी अपनी जगह पूरी तरह सही हो, फिर भी वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने उसी की गलतियाँ गिनाते रहते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनका किसी और से संबंध हो, तो उस रिश्ते को छिपाने के लिए भी पत्नी को ही दोषी ठहराते हैं।
वे कहते हैं, "तुम्हारे साथ मुझे कभी सुकून नहीं मिला... घर में हमेशा क्लेश रहता था... इसलिए मैं किसी और के पास चला गया।"
लेकिन सच यह है कि किसी रिश्ते में समस्या होना और किसी का विश्वास तोड़कर अफेयर करना, दोनों अलग बातें हैं। अपने फैसले की जिम्मेदारी लेने के बजाय जब कोई अपनी बेवफाई का ठीकरा हमेशा पत्नी के सिर फोड़ देता है, तो यह जिम्मेदारी से बचने और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश होती है।
एक अच्छा जीवनसाथी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है। हर गलती का दोष केवल पत्नी पर डाल देना न तो न्याय है और न ही एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी।

archanalekhikha