Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

​रात के सन्नाटे में जब अकेलापन शोर करता है,
दर्द का घूंट पीकर जब इंसान कुछ याद करता है,
आंखों की कोर से ढुलकते उस ख़ामोश आंसू से पूछो,
कि टूटा हुआ दिल भी जीने का हौसला कैसे रखता है।
​मां की सीने से लिपटकर रोने की वो चाहत,
पिता के थक चुके हाथों की वो अधूरी राहत,
समय की धूप ने सुखा दिए चेहरे के सारे रंग,
पर मन के किसी कोने में बची रही वो मासूम आदत।
​रास्ते अजनबी थे, मंजिलों का कोई ठिकाना न था,
दूसरों की महफ़िल में अपना कोई आशियाना न था।
ज़िंदगी ने जितने भी दिए ज़ख्म, हंसकर सह लिए,
क्योंकि टूटकर बिखर जाना कभी कोई बहाना न था।
​जो छूट गए पीछे, वो साए याद आते हैं,
बीते हुए हसीं लम्हे आंखों को भिगो जाते हैं।
पर सुनो, ये अंधेरा हमेशा के लिए टिक नहीं सकता,
दुखों की काली रात के बाद ही उम्मीद के सूरज मुस्कुराते हैं।

ritukumari509471

दिन की नुमाइश ढल गई, अब उदासी का पहरा है,
ये जो रात का सन्नाटा है, इसमें दर्द ज़रा गहरा है।
​जो मुस्कुराहटें दिन भर चेहरे पर टांग रखी थीं,
रात ने आते ही वो सब चुपचाप उतार दीं।
​तकिए के कोने में सिमट कर रो लेता है दिल,
गैरों की भीड़ में खुद को खो देता है दिल।
​चिराग बुझते ही यादों का कारवां आता है,
जो कह न सके किसी से, वही बात सताता है।
​ऐ रात, तू ही बता कैसे ये सिलसिले खत्म होंगे,
क्या सुबह का सूरज आने पर ये ज़ख्म मद्धम होंगे?

ritukumari509471

muje bola gaya tha Bina hathiyar ke . ye vali dhok tak aaja
You do not change your decision

virdeepsinh

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ronakjoshi2191

"आज शाम जो किताब का एक पन्ना पढ़ लोगे, कल वही तुम्हें भीड़ में आगे खड़ा करेगा।"

Good evening to all of you.
-Dharmendra Kumar

erdharmendra

A man who exists only in my words... for now.✨
who misses this type of gentleman 🫶🏻🤗❤️

itzmeakki

श्राद्ध पक्ष का मानना या न मानना. . . एक प्रश्न !!
(श्राद्ध पक्ष समाप्ति विशेष)

हिन्दू संस्कृति के अनुसार ये एक शाश्वत नियम है कि मृत्यु केवल शरीर को प्राप्त होती है, आत्मा अजर-अमर है और वह समय अनुसार दूसरे शरीर (अर्थात एक नए जन्म) को धारण करती है तो यहाँ एक स्वाभाविक सा प्रश्न उठता है; जब हमारे 'पितरों' ने पुनर्जन्म ले लिया है, तो हम श्राद्ध किसके लिए करते हैं ?

प्रश्न स्वाभाविक है और विचारणीय भी।

यहाँ यदि सनातन धर्म के मूल में इन बातों पर विचार करें, तो हो सकता है कुछ बातें तर्कहीन भी लगें और कई कर्म मान्यताएं केवल झूठ या पाखंड भी लगें। लेकिन वास्तव में सनातन धर्म में इस प्रश्न को केवल शरीर या आत्मा के संदर्भ में नहीं, बल्कि श्रद्धा, कर्तव्य, कर्म और पीढ़ियों के आपसी संबंध से जोड़ा गया है। यदि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के शब्दों को देखें, तो एक शरीर द्वारा पुराने वस्त्रों को त्यागकर नया शरीर धारण करने के मूल में यही भाव सामने आता है कि शरीर भले ही नश्वर है, लेकिन आत्मा अजर-अमर है और उसकी यात्रा निरंतर आगे की ओर चलती रहती है।

अतः यदि थोड़ा गहरे में सोचें, तो सही में श्राद्ध का अर्थ यह नहीं है कि हम अपने पूर्वजों को उसी पुराने शरीर में उपस्थित मानकर उन्हें जल या भोजन पहुँचा रहे हैं। श्राद्ध का मूल भाव है—उनका स्मरण करना, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके कल्याण की कामना करना।

यदि हम मान लेते हैं कि हमारे पूर्वज पुनर्जन्म ले चुके हैं, तो अवश्य ही वे कहीं किसी नए परिवार में एक नया जीवन जी रहे होंगे; लेकिन जरा विचार कीजिए, जिन पूर्वजोँ ने हमारे परिवार में कभी पिता, माता-पिता, दादा-दादी के रूप में हमारा पालन-पोषण किया था, क्या उनका महत्व और भावनात्मक स्थान इस लिए समाप्त हो जाता है कि वह हमारे जीवन से जा चुके हैं। हम जिस वंश, परिवार, संस्कार और जीवन-परंपरा से जुड़े हैं, उसका इतिहास हमारे पूर्वजों से ही बनता है। उनका स्मरण किसी एक शरीर तक तो सीमित हो ही नहीं सकता। क्या हम उनके नाम (या अपने वंश) पर वर्ष में एक दिन स्मरण, सम्मान और धार्मिक अर्पण की परंपरा नहीं निभा सकते जो अप्रत्यक्ष में सहज ही श्रद्धा और प्रकृति से भी जुड़ी हुई है।

वस्तुतः श्राद्ध अपने पितरों तक जल या भोजन अर्पित करने का आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह उनके संबंधों के प्रति हमारी श्रद्धा का परिचायक है। श्राद्ध उनके प्रति एक कृतज्ञता है, एक परंपरा है, जिसे हम निभाते हैं, निभाना ही चाहिए।

और यही श्राद्ध के नाम में भी निहित है. . .

श्रद्धया क्रियते इति श्राद्धम्।
अर्थात श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म।

सादर।।
. . . वीर।। 💝

veermehta

અંબા માતા, દુર્ગા માતા, પાર્વતી માતા અને ભદ્રકાળી માતા - આ બધાં માતાજી આદ્યશક્તિનું જ સ્વરૂપ છે અને એમની ભક્તિ કરવાથી આપણી પ્રકૃતિ સહજ થાય છે.

નવરાત્રિના શુભ અવસરે, મોબાઈલ અને ડેસ્કટોપ વોલપેપર ડાઉનલોડ કરવા અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/1sfkdkbM

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dadabhagwan1150

"इश्क़ का कोई अंत नहीं, तुम जहां ख़त्म होते हो, मैं वहीं से शुरू होता हूं।"

सुप्रभात

-Dharmendra Kumar

erdharmendra

क़दर ना करने वालों को खो देना
नुकसान नहीं समझदारी है।

kalpanasatav823113

हम इस पीढ़ी की लड़कियां
अपने मां जैसे नहीं बनना चाहती।
देखा है मां को घुट घुट के जीते हुए
अपने अरमानों को दिल में गाड़कर
किसी कोने में रोते हुए..
दिल में दर्द दबाकर लबों पे मुस्कान
सजाकर संस्कार तले दबे हुए..
हम आज की पीढ़ी की लड़कियां हैं
साहब.......
अपने दम पर उड़ान भरना जानती है
स्वतंत्रता मतलब व्यभिचार नहीं हम
अपनी हदे पहचानती है,
अगर पढ़ी जरूरत तो मर्द जात का ईगो
घसीटकर जमीन में गाड़ देती हैं।
हम आज की पीढ़ी की लड़कियां हैं ....

kalpanasatav823113

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ronakjoshi2191

"शाम ढले तो खुद से मिल लेना, दिन भर से मिले हो।"

-Dharmendra Kumar

erdharmendra

कलयुग की नारी...

हे...! नारी
तू क्यूं सहमी है ?
तू क्यूं डरी है ?
अन्याय के विरुद्ध
दुष्टों के विपरित ,
यह तेरा युद्ध है ।
यह तेरा रणक्षेत्र ,
इसमें तू ही योद्धा है ।
तू ही तीर, कमान
तू ही अशस्त्र-शस्त्र ,
तू ही विजय रथ ,
लड़ भयरहित, अविरत ।
निर्भिक, साहसी बनकर ,
शब्दों की टंकार से
हिंसा के प्रहार से ,
प्रतिस्पर्धा की ललकार से
संघर्ष के अग्निपथ पर ,
ना..तुम रामायण, महाभारत की
सीता, अहल्या, द्रौपदी हो ,
हाँ..तुम सनातन कलयुग की
सशक्त, कुशल भारतीय नारी हो ,
जो ड़रकर नहीं डटकर
सहस्र बार मुकाबला करे
जो हारकर नहीं जीतकर ,
परिणाम को बदल डाले
जो अशक्य को शक्य बना दें !
वहीं तूं सर्व शक्तिमान ,
लिख इतिहास के पन्नों पर
यही तेरी पहचान है।
यह तेरी शौर्य गाथा है।।

©®- शेखर खराड़ी
तिथि -९-१०-२०२६

shekharkharadi6923

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

it's Tea time ..

kattupayas.101947

​मैं अपने चरित्र पर इसलिए गर्व करता हूं क्योंकि मैंने जिन्दगी में बहुत कुछ सह कर भी खुद को गलत रास्ते पर नहीं जाने दिया।
​समय ने मुझे बार-बार तोड़ा लोगों ने मुझे कमजोर समझा, लेकिन हर बार मैंने खुद को और मजबूत बनाया। आज मैं अकेला जरूर हूं...
​लेकिन अपने फैसले और अपने आत्मसम्मान के साथ खड़ा हूं क्योंकि मुझे किसी को अपनी कीमत साबित नहीं करना मेरा संघर्ष ही मेरी पहचान है।

ankitkhatri900231

Do you know that by reciting the Tri Mantra, our obstacles will go away?

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#spirituality #spiritualfacts #facts #doyouknow #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

"जो दिल के सबसे करीब होते हैं, अक्सर वही दूर हो जाते हैं।"

Good morning
-Dharmendra Kumar

erdharmendra

विश्व डाक दिवस।।
अक्तूबर 09 ...!

एक दौर था, जब पोस्ट ऑफिस का अर्थ ही पोस्ट कार्ड और मनी ऑर्डर था जिसे देखकर लोगों के चेहरे पर ख़ुशी की झलक आ जाती थी।
समय बदला और इनके मायने बदल गए, आज के समय में पोस्ट ऑफिस की कई सुविधाएँ आधुनिक तकनीक की भेंट चढ़ गई।
भले ही हम आज आधुनिक हो गए हैं, आपसी रिश्तों में, संपर्क में पहले से कहीं ज़्यादा क़रीब हो गए हैं, बहुत सी बातों में सुविधजनक हो गए हैं।

लेकिन क्या. . . .

हम उन अहसासों को कभी जी पाते हैं, जो कभी एक पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र या एक मनीऑर्डर के आने से मन में पनप जाते थे। एक गाँव या क़स्बे का डाकिया भले ही हमारा अपना नहीं होता था, लेकिन फिर भी सबका सांझा होता था; जिसके आने से भर से उम्मीदें जाग जाती थी।

आज के डिजिटल दौर में भले ही वह सब नहीं है, लेकिन 'पोस्ट ऑफिस' की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। आज 'भारतीय डाक' सिर्फ़ पत्र का जरिया न रहकर बैंकिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं जैसी अन्य नागरिक सेवाओं की पहचान बन चुका है।
आज, विश्व डाक दिवस के अवसर पर अपनों को करीब लाने और रिश्तों को मजबूती देने वाले डाक विभाग में कार्यरत भाई-बहनों सहित सभी को विश्व डाक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।।

. . . वीर।।

veermehta

Time for breakfast..

kattupayas.101947

🍂रताळ्याचे काप
उपवास स्पेशल

🍂साहित्य
चार रताळी
दोन चमचे तूप
अर्धी वाटी गूळ
वेलदोडे पावडर

🍂कृती
रताळी स्वच्छ धुवून त्याचे थोडे जाडसर काप करून घ्यावे
हे काप पाण्यात टाकून ठेवावे
पॅन मधे दोन चमचे तूप घालुन
तूप गरम होताच हे काप पाण्यातून काढून स्वच्छ पुसून
तुपात टाकावे

🍂थोडे परतून झाकणं ठेवावे
अधून मधू हलवत रहावे
थोडा सोनेरी रंग येईपर्यंत परतावे
थोड्याच वेळात रताळी शिजतात व खमंग वास सुटतो..😋
काट्याने टोचून रताळे शिजले का बघावे
रताळी शिजताच आर्धी वाटी गूळ घालून एकत्र परतावे

🍂गूळ विरघळून थोडा घट्ट होत आला की वेलदोडे पावडर घालावी
दोन मिनीटे गॅस बंद करून झाकण ठेवावे
व नंतर खायला घ्यावे

jayvrishaligmailcom

good morning

virdeepsinh

"शांति का मतलब भीड़ का खत्म होना नहीं, भीड़ में भी खुद को सुन पाना है।"
-Dharmendra Kumar

erdharmendra