आध्यात्मिक - क्षणिका
अस्त-व्यस्त संसार में ,
मोह-माया की जंजाल में
भीड़भाड़ की अंधी दौड़ में,
यहां-वहां, कहा मिलेगी ?
स्नेह, करुणा, अहिंसा की औषधि
जहां क्षण-क्षण पर, पग-पग पर
धृणा, तृष्णा, हिंसा के घाव मिलें,
वहां कैसे तलाशूं ?
महावीर, बुद्ध जैसी शख्सियत
जो मेरे ज़र्रे ज़र्रे को भी ,
गहन ध्यान, समाधि से
आध्यात्मिक बना दें !
©®- शेखर खराड़ी
तिथि-५-१०-२०२५