Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

"ઉજાસ તરફનું પગથિયું"

જીર્ણ ભીંતો, પીળો રંગ,
કમાન વચ્ચે એક દ્વાર,
સમયે કોતર્યો છે અહીં,
સ્મૃતિનો સઘળો ભાર.

પગથિયાં ચઢે ઊંચે જ્યાં,
પ્રકાશનો છે પડછાયો,
અંધારા ઓરડા વચ્ચે,
આશનો પ્રકાશ રેલાયો.

કેટલા પગલાં પડ્યાં હશે,
આ પથ્થરની ધાર પર,
સુખ-દુઃખના ઓળા સાથે,
સૌ ચાલ્યા અજાણ ઘર.

આ કમાન એક સાક્ષી છે,
આવતા-જતા કાળની,
ખાલી ભાસતી ભીતરથી,
વાર્તા કહે છે વ્હાલની.

નીચે પડછાયા ઘેરા છે,
ભૂતકાળની માયા છે,
ઊંચે અજવાળું ખેંચે છે,
ભવિષ્યની છાયા છે.

એક ડગલું ભરવું પડે,
ભય ત્યજીને ચાલવું,
આ દ્વાર તો બોલાવે છે,
અજાણ્યું છે પામવું.

જૂનું તૂટે છે એટલે જ,
નવું કંઈક જન્મે છે,
અંધારું આખું ખરે ત્યારે,
પરોઢિયું પ્રગટે છે.

માટે હિંમત કર હૈયા,
આ પગથિયું ચઢી જા,
જે પ્રકાશ સામે દીસે,
તારું નવું સરનામું થા.

shwetalpatel001gmail.com122020

કવિ અને પાળિયા વચ્ચેનો સંવાદ ✨😊✍️રાજવીરની કલમે 🙏

galcharraychandgmail.com7157

ગામડાની યાદો ✨✨

galcharraychandgmail.com7157

આ તે કેવો સમાજ?

ચહેરા ઉપર મહોરાં લગાવે છે અહીં લોકો.
ઘાવ પર કાયમ મીઠું ભભરાવે છે અહીં લોકો.

રંકના આંસુ લૂછવા નથી સમય કોઈની પાસે,
ને અમીર માટે જાજમ પથરાવે છે અહીં લોકો.

મોબાઈલની સ્ક્રીન પર સંબંધ બન્યા ખૂબ ગાઢ,
ને ખરા સંબંધોને કાયમ ભૂલાવે છે અહીં લોકો.

દીકરીને દેવી કહીને પૂજતા આ સમાજમાં જ,
ગર્ભમાં શિશુપરીક્ષણ કેમ કરાવે છે અહીં લોકો?

સદા સત્ય બોલનારને અહીં, ગણાય છે પાગલ ,
અને જૂઠાઓને પાઘડી પહેરાવે છે અહીં લોકો.

પૈસા પાછળ આખી જિંદગી દોડતા રહે છે બધાં,
અંતે બધું સ્મશાનની રાખમાં ખપાવે છે અહીં લોકો.

જોઈને સમાજનો આ બદલાતો રંગ ઓ 'વ્યોમ',
જીવતા માણસને જીવતેજીવ રડાવે છે અહીં લોકો.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

Good Night 🌉

harshparmar8722

श्रीकृष्ण ने सबसे बड़ा ज्ञान युद्धभूमि में ही क्यों दिया?
श्रीकृष्ण ने सबसे बड़ा ज्ञान युद्धभूमि में इसलिए दिया क्योंकि जीवन स्वयं एक संघर्ष है। जब अर्जुन मोह, डर और भ्रम में फँस गए, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्म, धर्म और आत्मा का सत्य समझाया। गीता का संदेश यही है कि कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग और कर्तव्य का पालन करना ही सच्चा धर्म है। 🙏✨
अर्थ:
ज्ञान की आवश्यकता शांति के समय से अधिक कठिन समय में होती है। जब मन भ्रमित हो, भावनाएँ कमजोर कर रही हों और निर्णय लेना कठिन लगे, तब सही ज्ञान ही व्यक्ति को उसके कर्तव्य और जीवन के उद्देश्य का बोध कराता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश युद्धभूमि में दिया, ताकि संसार समझ सके कि संघर्षों के बीच भी धैर्य, विवेक और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

parmarsantok136152

ऐ जुगनू
कविता


उस अंधेरी रात
जब मैं छत पर अकेली बैठी थी,
एक जुगनू आया और मेरे पैरों पर बैठ गया

तब मैंने कैसे देखे हुए उससे कहा

ऐ जुगनू, मेरे पास आक
मेरी कंधों प बैठ
मेरे पैरों को चूमना छोड़कर
आ मेरी हथेली पर बैठ






ऐ जुगनू मेरे पास आके मेरे कंधों पे बैठ
मेरे पैरों को चूमना छोड़कर

आके मेरे हथेली पर बैठ
और मेरे हाथों की लकीरों को रोशनी से भर दे

तेरी रोशनी काफी है
मेरी किस्मत को जगमगाने के लिए


ऐ जुगनू मेरे पास आ
और आ को मेरी लेहराते हुए बालों मैं लिपट जा

इन काले बाल में
टिमटिमाते तारे की तरह चमक
आकाश बन जाएंगे

तेरे होने से जिंदगी रोशन हो जाएंगे
और तेरी रोशनी काफी है
मेरी जिंदगी भर को रोशन करने के लिए



ऐ जुगनु मेरे पैरों को चूमना छोड़कर
आ मेरी हथेली पर बैठा

abhinisha

हां, मैं एक स्त्री हूं।
लेखक- कौशिक दवे

kaushikdave4631

नकारात्मक विचारों से मुक्ति

क्या आप हर समय बहुत अधिक सोचते हैं? क्या अनचाहे और नकारात्मक विचार आपके मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं? “नकारात्मक विचारों से मुक्ति के उपाय” एक ऐसी व्यावहारिक मार्गदर्शिका है जो आपके मन को अशांत करने वाली कड़ियों को तोड़ने में मदद करती है। यह पुस्तक केवल समस्याओं पर बात नहीं करती, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले आसान और वैज्ञानिक उपाय प्रदान करती है।
https://www.matrubharti.com/book/19994194/nakaratmak-vicharo-se-mukti-1

nityaoswal430745

upcoming love bites 🤍

bjsurya.sb100435

خیالِ یار

ہر ایک منظر میں بس ایک چہرہ دکھائی دیتا ہے،
میں خاموش رہوں تب بھی وہ سنائی دیتا ہے۔

وہ دور ہیں مجھ سے، پر میرے ہر خواب کے پاس ہیں،
ان کی ہی یادوں سے یہ دل اب دہائی دیتا ہے۔

پہاڑوں کی ٹھنڈ میں، برف کے ان نظاروں میں،
ان کا ہی عکس مجھے ہر طرف دکھائی دیتا ہے۔

میں نے اتاری ہے پنوں پر جو چاہت اپنی،
میری ہر ایک سطح میں وہ شخص دکھائی دیتا ہے۔

محبت کی اس راہ میں ہم اس قدر کھو گئے ہیں،
کہ اب خود میں بھی اِسی کا عکس دکھائی دیتا ہے۔

سنا ہے لوگ کہتے ہیں کہ وہ دور ہیں مجھ سے بہت،
مگر آنکھیں بند کروں، تو وہ پاس دکھائی دیتا ہے۔

کتنے موسم آئے اور فضائیں بدل گئیں مگر،
میرے ہر ایک موسم میں ان کا ہی رنگ دکھائی دیتا ہے۔

یہ میری دیوانگی ہے یا ان کی چاہت کا اثر،
کہ پنوں پر اب لفظ کم، ان کا چہرہ زیادہ دکھائی دیتا ہے۔
قلم اٹھاتی ہوں جب بھی کچھ نیا لکھنے کے لیے،
میری داستانِ دل کا وہ ہی ایک عنوان دکھائی دیتا ہے۔

بچھڑ کر بھی وہ مجھ سے کبھی جدا نہ ہو سکا،
میری تنہائی میں بھی مجھے اس کا ساتھ دکھائی دیتا ہے۔

ہزاروں چہرے ہیں اس دنیا کے میلے میں مگر،
جانے کیوں مجھے صرف وہی ایک نایاب دکھائی دیتا ہے۔

وہ مری قسمت میں ہے یا نہیں، یہ خدا جانے،
پر سجدوں میں ہاتھ اٹھاؤں تو وہی مانگا دکھائی دیتا ہے۔

وہ میرے پاس نہیں ہے، یہ جانتا ہے دل میرا،
پھر بھی نہ جانے کیوں ہر آہٹ پہ وہ آتا دکھائی دیتا ہے۔

میں روتی ہوں اکیلے میں کہ کوئی دیکھ نہ لے،
میری آنکھوں کے ہر ایک آنسو میں وہ روتا دکھائی دیتا ہے۔

تھک گئی ہیں میری آنکھیں اس کا راستہ تکتے تکتے،
اب تو ہر گزرتا ہوا سایہ بھی وہی دکھائی دیتا ہے۔

بڑی حسرت سے دیکھا تھا میں نے اس کے ہاتھ کی لکیروں کو،
سب کچھ تھا وہاں، بس میرا نام نہ دکھائی دیتا ہے۔

وہ جی رہا ہے اپنی دنیا میں مجھ سے بے خبر ہو کر،
اور یہاں میری زندگی کا آخری چراغ بھی بجھتا دکھائی دیتا ہے۔


میں اس کی یاد سے نکلوں تو موت آ جائے،
مجھے تو اب کفن میں بھی اسی کا دامن دکھائی دیتا ہے۔
اسے پانے کی تمنا میں خود کو کھو دیا میں نے،
آئینہ دیکھوں تو اپنا نہیں، اس کا چہرہ دکھائی دیتا ہے۔

وہ انجان ہے میری اس تڑپ سے اس قدر،
کہ میرا اجڑنا بھی اسے ایک تماشہ دکھائی دیتا ہے۔

خدا سے مانگوں بھی تو اب کیا مانگوں مری جاں،
دعا کو ہاتھ اٹھاؤں تو بس تیرا چہرہ دکھائی دیتا ہے۔

تم سلامت رہو اپنی دنیا میں مری جانِ غزل،
میرا کیا ہے، مجھے تو اب اپنا جنازہ دکھائی دیتا ہے۔

ggghbfjit443941

रिश्तों की सबसे सुंदर मरम्मत क्षमा के धागों से होती है।

anisroshan324329

नदी के किनारे

नदी के किनारे बैठी,
शीतल जल के दर्पण में
खुद को निहारा करती थी।

आते-जाते लोगों से,
दुनिया की सारी चकाचौंध से,
वह अक्सर किनारा करती थी।

दर्पण में झाँकते हुए
वह उन जुल्फ़ों को देखा करती,
जिन्हें कभी किसी ने
अपने हाथों से संवारा नहीं था।

उन नम, थकी आँखों को,
जिन्हें कभी काजल ने भी
अपना घर नहीं माना था।

पास पड़े एक सूखे पत्ते को
उसने धीरे से उठाया,
और नदी की नमी से मिलाया।

अब वह पत्ता वैसा कठोर न था,
उसमें कुछ कोमलता लौट आई थी
थोड़ा-सा टूटा,
थोड़ा-सा नम,
मगर पहले जैसा नहीं।

धीरे-धीरे सूरज ढल रहा था,
मानो रोशनी और अँधेरा
एक-दूसरे से गले मिल रहे हों।

और वह सोचने लगी

क्या वह सचमुच
सिर्फ़ एक दर्पण था?

या फिर कोई दिल,
जो बरसों की वीरानी के बाद
एक नई रोशनी की प्रतीक्षा में
चुपचाप जल रहा था।

क्योंकि कभी-कभी,
दर्पण चेहरा नहीं दिखाते
वे हमारी अधूरी कहानियाँ दिखाते हैं।

prachitanwar111

यह कविता उन लोगों को समर्पित है जिन्हें अक्सर “लोनर” या अंतर्मुखी कहा जाता है।

वे लोग जो बहुत कुछ महसूस करते हैं, पर अपनी भावनाओं को सहजता से शब्द नहीं दे पाते। जिनके भीतर विचारों, स्मृतियों और जज़्बातों का एक गहरा संसार होता है, जो अक्सर उनके अपने हृदय तक ही सीमित रह जाता है।

मेरे जज़्बात

मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।
सफ़र हो दिल से दिल तक का
वो एक आवाज़ कैसे दूँ ।
घोंसला छोड़ जाने का
हौंसला ले भी आयें तो
बिखर कर टूट जाने को
मैं झूठी आस कैसे दूँ।
बोझ इनका उठा लें जो
सही अल्फ़ाज़ कैसे दूँ।
मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।

सियाह हैं, कुछ ये मैले से,
सुरख, उजले, सुनहरे से।
सभी रंगों में गहराकर,
वक्त की मार खा-खा कर,
इन्होंने गर्भ में अपने
कई तूफ़ान पाले हैं,
कई मोती उकेरे हैं।
गुज़रता वक्त जाता है
ये चुप सागर से ठहरे हैं।
हदों को तोड़ जाने को,
बहाकर सब ले जाने को,
बवंडर आज कैसे दूँ।
मेरे जज़्बात भारी हैं ,
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।


तराने बन के होठों पर,
ये मुस्कानें बिछाते हैं।
कभी नैनों से झर-झर कर,
तपिश दिल की मिटाते हैं।
महफिलों में, वीरानों में
यही तो साँसें थामे हैं।
इन्हें खुद से जुदा करके
तेरी सोहबत में लाने की
मेरे दिल के शहज़ादों को
तेरे दिल में इतराने की
जगह एक खास कैसे दूँ ।
मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ !

#कविता #भावनाएँ #अंतर्मुखी #जज़्बात #आत्मचिंतम #Poetry #loners #self reflection

shilpy

दुनिया मुझे किसी भी नाम से बुला ले, मगर जिस नाम में उसका प्यार बसता है... मुझे वही नाम सबसे प्यारा लगता है — राधे।

parmarsantok136152

मेरे अल्फ़ाज़...!


एक एक हर्फ़, किसी की कहानी कहती है,
कई इबारते जिसमें छुप कर रहती है।।
मिलते कितने लोग इसके हर मोड़ पर,
लहर दर लहर जो हवा में बहती रहती है।।

पेड़ से झंडे पत्तों के मानिंद,
बिखरे रहते ये मेरी कॉपी के ओर-छोर पर।।
या फिर मैं खुद ही टाक देती इन्हें,
करीने से पन्नों के पोर पोर पर।।

By. Santoshi "Katha"

कविता पसंद आए तो कमेंट और लाइक करना ना भूले दोस्तों!

santoshikatha858769

Lunch time.. my favorite time

kattupayas.101947

Good afternoon friends.. have a good day

kattupayas.101947

🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
दिलजलो से मुलाकात हो गई,
कमबख्त रात भी तूफानी हो गई।
हम तो जला देते दुनिया सारी,
अच्छा हुआ जो बरसात गई।
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂

jighnasasolanki210025

तुम क्या चाहती हो?

मुझसे कभी पूछा ही नहीं गया,
"बोल, तू क्या चाहती है?"
क्यों मेरी ज़िंदगी के फैसले,
हमेशा दूसरे ही बनाते हैं?

सपने तो मेरे हैं,
फिर भी किसी और के हाथों बुनते हैं।
मैं बस देखती रहती हूँ
खुद से पूछती हूँ,
"आखिर तू क्या चाहती है?"

हाँ, अगर सच में चाहने दिया जाए...
तो सुनो, मुझे क्या पसंद है

मुझे पानी की लहरों सा बहना पसंद है,
हर तालाब, हर नदी, हर समंदर की
गहराई को छूना पसंद है।

मुझे सूरज की किरणों सा चमकना पसंद है,
हर गली, हर गाँव, हर शहर के
अंधेरों से गुज़रना पसंद है।

मुझे टूटे सपनों को सीना पसंद है,
हर दर्द, हर दीवार, हर "ना-मुमकिन" को
जीत में बदलना पसंद है।

बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी,
कोई बड़ी बात नहीं
मुझे बस... मैं रहना पसंद है।
वोही जो मैं हूँ, वही बने रहना पसंद है।

प्राची तंवर

prachitanwar111

દિવસની શરૂઆત પૂજા-પાઠથી કરીએ જેથી મનમાં સારા વિચારો આવે, છતાં મન નેગેટિવિટી તરફ જતું રહે ત્યારે શું કરવું? કાયમ પોઝિટિવ રહેવા શું મનને કંટ્રોલ કરવું જોઈએ? ચાલો ઓળખીએ મનના વિચારો અને તેની અસરોને આ વિડીયોમાં.

Watch here: https://youtu.be/ApIcUtqxQfk

#selfhelp #selfimprovement #positivity #positivemind #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

मैंने ज़िंदगी को करीब से देखा है...
मोहब्बत भी, बिछड़ना भी, ज़िम्मेदारियाँ भी, और अकेले लड़ना भी।
फिर भी आज खड़ी हूँ उसी मुस्कान के साथ...
क्योंकि मुझे गिरना नहीं, हर बार पहले से मज़बूत होकर लौटना आता है।

parmarsantok136152

दिल देना आसान है...
मगर किसी एक नाम पर पूरी ज़िंदगी ठहर जाना, हर किसी के बस की बात नहीं।

parmarsantok136152