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New bites

कविता
दर्द में अगर जिंदगी हो तो क्या



दर्द अगर कभी कम ना हो तो
दर्द में जीना सीख लेना एक मात्र जरिया है
इस दर्द भरी जिवन को सफल बनाने की लिए




दर्द में अगर जिंदगी हो तो क्या
आनें वाली सांसें आखरी हो तो क्या

हम फिर भी चल रहे हैं
जिंदगी की पूरी सफर के लिए
आने वाली आखरी डगर के लिए


दर्द अगर कभी कम ना हो
गम अगर दिल को हरदम हो
तो आंखें भरते रहेगे
हम अंदर से तरफते रहेंगे
तरफ तरफ कर मारते रहेंगे


इस तड़फन में जाने क्या है
हरदम आंखें भर रहा है
चेहरे देख लगता है गम नहीं है
मगर दर्द हुआ कब कम है



सीने के अंदर झांक कर देखो
कुछ है दिल में दवे बरसो पुराने
जिसमें लगा कभी मरहम नहीं है




यह तड़पन यह धड़कन यह सुस्त पड़े निगाहे
बयां बार-बार कर देता है

कुछ है जो बयां हुए नही
दर्द है जिसका दवा मिता नही
ज़ख्म है जिसे देखा गया नहीं
बेचेन धड़कन है जिसे सुना गया नही




फिर भी धड़कन धड़कना छोड़ नहीं रहा
आंखें बहती है पर दर्द बयां कर नहीं रहा


बेजान कदम आगे बढ़ रही है
और एक नई भरम लिए
बस सफर पर चल रही है

दर्द कम नहीं हुआ तो क्या
दर्द भरी साथ आलम लिऐ
ए सांसे चल रही है
बहुत सारे दर्द और पछतावे साथ
विना थके के सिकायत किऐ

abhinisha

सारघा - 4 आ गया है! 🖤💀

बातें जो दिल तक गहरी हो चुकी थीं... पर उस रात दिल की नहीं, मौत की दस्तक थी!

टिप-टिप... टिप-टिप...
बारिश नहीं, किसी के कदमों की आहट थी जो मिट्टी के घर की तरफ बढ़ रही थी।
चूल्हे की आग में दो परछाइयाँ थीं, पर तीसरी परछाई किसकी थी? जो बिना बुलाए अंदर आ चुकी थी!

उस महल में कोई है... जो इन दोनों के प्यार को जिंदा नहीं रहने देगा।

क्या इस बार सारघा अपने प्यार को बचा पाएगी?
या ये रात उनकी आखिरी रात होगी?

पढ़िए - सारघा - 4
एक ऐसी हॉरर लव स्टोरी, जिसे पढ़ने के बाद आप अकेले सो नहीं पाओगे!

इस बार प्यार से ज्यादा खतरनाक है राज़! 👀

#1 पर ट्रेंड हो रहा है - क्या आपने पढ़ा?

फॉलो करो @रक्षिता पाल - वरना अगला एपिसोड मिस हो जाएगा! ❤️

raktkamal

જ્યાં કિંચિત્માત્ર દુઃખ થતું નથી, ત્યાં આત્મા છે. - દાદા ભગવાન

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#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

Good evening friends... have a nice time

kattupayas.101947

घर का बड़ा बेटा
आज घर में सब दुआओं में बैठे थे और बेसब्री से अमित के रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे थे। इंतज़ार सिर्फ़ रिज़ल्ट का नहीं था—उम्मीदों का था, सपनों का था और अपने बोझ के थोड़ा कम हो जाने का था। पापा को इंतज़ार था कि अमित के रिज़ल्ट से उनके कंधों का थोड़ा बोझ कम हो जाएगा। माँ को इंतज़ार था कि वह सबसे कह सकेगी—उसका बेटा सरकारी अफसर बन गया। वहीं भाई-बहनों को इंतज़ार था कि अब वे बड़े शहर के अच्छे कॉलेज में पढ़ने जा सकेंगे।
​वहीं अमित अपने कमरे में लेटा छत को एकटक देख रहा था। घड़ी की टिक-टिक के साथ उसके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी। बाहर से आती घरवालों की आवाज़ें जैसे उसकी बेचैनी और बढ़ा रही थीं। वह किसी गहरी सोच में डूबता जा रहा था। अगर आज रिज़ल्ट उसके हक़ में नहीं आया तो वह क्या करेगा? सबको क्या जवाब देगा? एक पल को उसकी साँस जैसे गले में ही अटक गई। माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूँदें तैर आईं। बड़ी मुश्किल से उसने खुद को संभाला, लेकिन मन की चाल पर भला किसका बस होता है। करवट बदलते ही एक और ख्याल उसके मन में आ गया।
​वह पापा का बोझ कैसे कम करेगा? माँ से कैसे नज़र मिलाएगा? छोटे भाई को पढ़ने के लिए बाहर भेजना है… और बहन की भी तो शादी की उम्र हो गई है। इन सबके बारे में सोचते हुए उसने एक लंबी साँस ली और आँखें बंद कर लीं। उसे याद आया, जब उसने बारहवीं में टॉप किया था, तब उसके पापा ने शर्मा अंकल से बड़े गर्व से कहा था— "अमित मेरा बोझ कम करेगा।" शर्मा अंकल भी मुस्कुराकर बोले थे— "अमित जैसा होनहार बेटा मिलना बड़ी किस्मत की बात है।" उन्हीं बातों को सोचते-सोचते न जाने कब उसकी आँख लग गई।
​कुछ देर बाद माँ ने कमरे के दरवाज़े पर दस्तक दी। उसके साथ पापा, भाई और बहन भी थे। माँ ने अमित को प्यार से जगाया, उसका माथा चूमा और उसे सीने से लगा लिया। अमित कुछ समझ पाता, उससे पहले पापा अपनी आँखों की नमी छिपाते हुए बोले— "मुझे तो पता था… हमारा बेटा हमारा नाम ज़रूर रोशन करेगा।" अमित का रिज़ल्ट आ चुका था। वह सरकारी अफसर बन गया था। अमित कुछ पल तक अचंभित होकर सबको देखता रहा। जब बहन ने उसे हिलाकर बधाई दी, तब जाकर जैसे उसे होश आया। वह उठकर माँ-पापा के पैर छूने लगा।
​अमित की जॉइनिंग हो गई। उसके दोस्तों ने शहर से काफी दूर पोस्टिंग ली थी, ताकि वे अपनी जिंदगी थोड़ा खुलकर जी सकें। मन तो अमित का भी था। दोस्तों की बातें सुनकर वह कुछ देर सोच में पड़ गया। लेकिन अगले ही पल उसके मन में उन खर्चों की उधेड़बुन शुरू हो गई, जो कभी उसके पापा किया करते थे। कौन देखेगा घर? माँ-पापा का खर्च कैसे चलेगा? भाई की पढ़ाई? बहन की शादी?
​चेहरे पर एक अनजानी-सी मुस्कान लिए अमित ने कहा— "मैं कुछ साल शहर के आसपास ही रहूँगा।" धीरे-धीरे अमित ने घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ अपने ऊपर ले लीं। छोटे भाई का अच्छे कॉलेज में दाखिला करवाया। बहन के लिए अच्छा-सा घर देखकर धूमधाम से उसकी शादी की। इन सबके बीच जब कभी माँ अमित से उसकी शादी की बात करती तो वह हँसकर टाल देता— "अभी उम्र ही क्या है मेरी… कर लूँगा।" लेकिन अमित के मन में कुछ और था। वह पहले अपने छोटे भाई को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहता था।
​एक रोज़ अमित अपने कमरे में कुछ कागज़ ढूँढ़ रहा था। किताबों के बीच से एक पुरानी बाइक की तस्वीर निकलकर नीचे गिर गई। वही बाइक, जिसे वह कभी खरीदना चाहता था। दोस्तों के साथ उसी बाइक पर घूमने और लंबी यात्राओं पर जाने के कितने सपने देखे थे उसने। तस्वीर को देखकर अमित के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई। उसने एक लंबी, ठंडी साँस ली। तभी पीछे से माँ की आवाज़ आई— "अमित…" माँ की आवाज़ सुनते ही अमित ने तस्वीर को वापस किताब के बीच रख दिया और कमरे से बाहर चला गया।
​अमित अपनी ज़िम्मेदारियों से खुश था। उसे सुकून मिलता था कि उसके कारण घर की कोई चिंता थोड़ी कम हो जाती है। उसने कभी किसी से शिकायत नहीं की। बस अपनी मुस्कान के पीछे अपनी थकान छिपाना सीख लिया था।
​एक शाम अमित ऑफिस से घर आया तो उसने अपनी बहन को देखा। मुस्कुराकर बोला— "गुड़िया, तुम कब आई?" बहन ने भाई के चेहरे की तरफ देखा। आज उसे पहली बार महसूस हुआ कि उसका भाई कितना थक गया है। रात को खाना खाते समय अमित अपनी बहन के ससुराल का हाल-चाल पूछ रहा था। वह उसकी खुशियों और परेशानियों के बारे में जान लेना चाहता था। लेकिन बहन की नज़र बार-बार अपने भाई के चेहरे पर जा रही थी। उसे याद आने लगा— उसकी शादी में भाई ने कितनी मेहनत की थी। उसकी पसंद की हर चीज़ का ध्यान रखा था। माँ-पापा का कितना ख्याल रखता था। छोटे भाई का इतने बड़े शहर के अच्छे कॉलेज में दाखिला भी उसी ने करवाया था, जबकि पापा इतने खर्चे को लेकर परेशान थे। तब अमित ने ही पापा को समझाया था— "पापा, आप परेशान मत होइए… सब हो जाएगा।"
​बहन की आँखों में नमी उतर आई। उसने बहुत धीरे से पूछा— "भैया… आप शादी कब करेंगे?" अमित ने एक पल उसकी तरफ देखा। फिर खाने की प्लेट में नज़र झुकाकर बोला— "कर लेंगे गुढ़िया… बस कुछ काम और पूरे कर लूँ।" फिर मुस्कुराते हुए बोला— "तुम इतना मत सोचो… तुम खुश रहो।" अमित की बात सुनकर जैसे उसकी बहन की साँस कुछ पल के लिए रुक गई। खाने की मेज़ पर अचानक एक ख़ामोशी उतर आई। वह चुपचाप अपने भाई को देखती रही। उसकी निगाहें अमित के थके हुए चेहरे और आँखों के नीचे उभरी हल्की-सी कालिख पर टिक गईं।
​अमित ने उसकी तरफ देखा और हमेशा की तरह मुस्कुराकर पूछा— "क्या हुआ गुढ़िया?" वह कुछ नहीं बोली। बस उठी, उसके पास गई और हल्के से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। अमित उसकी तरफ देखता रहा। वह कुछ कहे बिना वहाँ से चली गई। अमित ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसके लिए शायद यह भी रोज़ की तरह ही एक शाम थी। लेकिन बहन के लिए वह शाम पहले जैसी नहीं थी। उसे पहली बार महसूस हुआ कि जिस भाई से उसने हमेशा अपनी हर परेशानी बाँटी थी, उसने अपनी कोई परेशानी कभी किसी से बाँटी ही नहीं। वह सबके लिए खड़ा रहा और शायद इसी वजह से सबको लगा कि उसे किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं।
​उस रात घर में सब सो गए। लेकिन बहन की आँखों में नींद नहीं थी। उसे बार-बार अमित का वही जवाब याद आ रहा था "कर लेंगे… बस कुछ काम और पूरे कर लूँ।" वह सोचती रही पता नहीं अमित की ज़िंदगी में अपने लिए जीने की बारी कब आएगी। और शायद पहली बार उसे यह समझ आया कि ज़िम्मेदारियाँ निभाते-निभाते इंसान हमेशा नहीं थकता, कभी-कभी वह बस थकने का हक़ खो देता है।
​☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

रोना तो पीड़ा का प्राथमिक चरण है,
असहनीय पीड़ा का अंतिम चरण तो "मौन" है।

narayanmahajan.307843

*Diabetes & Eye Health: What You Should Know*
Diabetes is not only about blood sugar. Over time, uncontrolled high blood glucose can affect different organs of the body — including the eyes.
One important complication is diabetic retinopathy, in which diabetes-related damage affects the blood vessels of the retina. Vision may remain normal in the early stages, which is why regular eye examinations are important for people living with diabetes.
*What should people watch for?*
Blurred vision, difficulty seeing clearly, or changes in vision should not be ignored. Diabetes can also develop gradually, and some people may have few or no noticeable symptoms, particularly with Type 2 diabetes.
Managing blood sugar, following medical advice and getting regular eye check-ups can help detect complications early.
*Dr. Anchal Gupta*

*“If you have diabetes, don't wait for a vision problem to get your eyes checked.”*
This is a general health-awareness message and does not replace consultation with a qualified doctor.
-Dr. Anchal Gupta

bhumikabhati.662947

पडवळ पुराण
खरे तर पडवळ ही फार कमी लोकांची आवडती भाजी
माझ्या बाबतीत बोलायचे झाले तर ही भाजी मी लग्ना आधी कधीच खाल्ली नव्हती

🫒माझ्या माहेरी वडलांना आवडत नसल्याने पडवळ कधीच आणले गेले नाही .
सासरी मात्र पडवळ आणि इतर वेली फळभाज्या ,जसे की दोडका ,कारली ,दुधी भोपळा ,तोंडली या अहोंच्या अतिशय आवडत्या भाज्या ..😊

🫒माझ्या सासूबाई अतिशय सुगरण होत्या
त्यांच्या हातचे पडवळा चे अनेक पदार्थ खाऊन मला ही हळू हळू पडवळ आवडू लागले .आणि मीही त्यांच्या कडून वेगवेगळे पदार्थ शिकुन घेतले
पडवळाची भाजी मनापासून आवडते असं म्हणणारा खवय्या मिळणे कठीण आहे
असे बरेच जण म्हणतात
पण आमच्या अहोंच्या रुपात मी तो अनुभव घेतला आहे ..अगदी रोज पडवळ असले तरी चालेल असे ते म्हणतात .

🫒 पडवळाचे औषधी उपयोग बरेच आहेत.
चवीला गोड व थंड असल्याने पडवळ आपल्या शरीरातील तिन्ही दोष कमी करण्यास मदत करतो.
शरीरातली विषारी द्रव्यं बाहेर टाकण्यास मदत करणारं एक नैसर्गिक अ‍ॅन्टिबायोटिक म्हणून पडवळ ओळखलं जातं.
पडवळात पुरेशी पोषक द्रव्यं असून ते शरीराची उष्णता कमी करतं, वजन कमी करायला मदत करतं आणि हृदयाचं टॉनिक म्हणून काम करतं.
उन्हाळ्यात तर पडवळ भरपूर खाण्यात असावे

🫒पडवळ आवडणारे लोक तसे कदाचित कमी आढळतील
पण ज्यांना आवडते त्यांना अतिशय आवडते.
आमच्याकडे अशीच कथा आहे
पडवळ आणले की एकाच दिवशी सगळे प्रकार केले जातात

🫒असेच काही खास प्रकार
पडवळ प्रेमी लोका साठी देत आहे

🫒पडवळ साधी भाजी

पडवळ चिरून त्याचे लहान तुकडे करून घ्यावे
पॅन मधे फोडणीत
मोहरी
हिंग घालून हे पडवळ तूकडे घालून
झाकण ठेवावे
पाच मिनिटानंतर परत थोड हलवून
फोडी बुडतील इतके पाणी घालावे
व परत झाकणं ठेवावे
पाच मिनिटात पडवळ शिजते व त्यातले पाणि थोडे कमी होते
यानंतर तिखट, मीठ, हळद , दाण्याचे कूट काळा मसाला, गूळ घालून चांगले मिसळून घ्यावे
वरती कोथींबीर, ओले खोबरे घालावे

🫒पडवळ भरीत

पडवळ चिरून थोडे लहानलहान तुकडे करून घ्यावेत
तुकडे बुडतील इतके पाणी पातेल्यात घालून
झाकणं ठेवून शिजवून घ्यावे
पाच ते सात मिनिटात पडवळ शिजते
बोटाने चेपून पडवळ शिजले का पहावे
लागलें तर थोडे पाणी घालावे
हे शिजलेले पडवळ गार झाल्यावर
थोडे कुस्करुन घ्यावे
त्यात मीठ ,साखर, दाणे कुट ,कोथिंबीर ,खोवलेले खोबरे दही घालून मिसळावे
छोट्या कढईत तेल घालून
मोहरी,हिंग, हळद, मिरच्या तूकडे याची फोडणी करून पडवळ फोडी वर ओतावी
भरीत चांगले कालवून घ्यावे


🫒पडवळ रिंग भजी

बटाट्याच्या भज्या सारखे पीठ भिजवून पडवळ गोल आकारात रिंग प्रमाणे कापून घेणे व भजी करणे ,सदर भजी मेदू वड्याप्रमाणे दिसतात

🫒पडवळ पीठ पेरून भाजी
पडवळ बारीक तुकडे करून फोडणीत वाफवणे लागल्यास शिजण्या साठी थोडे पाणी वापरणे .शिजले की हळद तिखट मीठ घालून त्यास थोडे भरड डाळीचे पीठ अथवा भाजणी पीठ लावणे व एक वाफ आणून कोथिंबीर खोबर यांनी सजवावे .

🫒पडवळ डाळ भाजी
यासाठी मुग अथवा हरबरा याची भिजवलेली डाळ घ्यावी .
प्रथम फोडणीत हिरवी मिरची घालून ही डाळ परतून थोडी वाफवणे
नंतर चिरलेले पडवळ घालून थोडे पाणी घालून शिजवणे व गोडा मसाला ,गुळ आमसूल मीठ हळद घालून एका वाफे नंतर खाली काढणे व कोथिंबीर खोबरे घालणे .

🫒वाल पडवळ भाजी
यासाठी मोड आलेले वाल घ्यावे
हे खुप चविष्ट असतात
प्रथम फोडणीत वाल थोडे वाफवून मग पडवळ तुकडे घालणे व शिजवणे
खोवलेला नारळ अथवा नारळाचे दूध घालावे
काळा गोडा अथवा आपल्या आवडीचा मसाला शेवटी घालावा व गुळ,तिखट ,आमसूल ,हळद ,मीठ , कढीलिंब घालून
झाकण ठेवून वाफवणे .

🫒 भरली पडवळ भाजी
पडवळ एक इंच तुकडे करणे
मधल्या बिया काढून त्यात खोबरे कोथिंबीर ,गरम मसाला तिखट मीठ असे सारण अथवा उकडलेला बटाटा मसाला मीठ असे सारण करून या डमरू सारख्या भरून घेणे ,यानंतर त्याच्या दोन्ही बाजू कोर्न फ्लोवेर अथवा ओल्या मैदा पीठाने बंद करणे
व या खालच्या बाजू एका तव्यात फ्राय करणे म्हणजे सारण बाहेर येत नाही
यानंतर याच तव्यात फोडणी करून हे पडवळ रोल ठेवणे आणि कमी पाण्यात वाफेवर कोरडे शिजवणे
अथवा पाणी घालून खोबर्याचे वाटणलावून रस्सा भाजी करणे

🫒पडवळ कढी
साजूक तुपाच्या फोडणीत जिरे हिग मिरची कढीपत्ता घालून पडवळ चे छोटे तुकडे वाफवून घ्यावे व त्यावर ताक फोडणीला टाकून नेहेमी प्रमाणे कढी करावी

🫒पडवळ बियांची चटणी
पडवळ बिया काढून थोड्या तेलात हिरवी मिरची सोबत वाफवाव्या
बियांचा रंग बदलला की खाली काढावे
प्रकार एक
या बिया ,दाणे कुट,चिंच ,गुळ,कोथिंबीर जिरे घालून चटणी करावी
प्रकार दोन
या बिया, खोबरे ,कोथिंबीर, साखर ,मीठ, घालून चटणी करावी वरून लिंबू पिळावे
व हिंग मोहरी हलकी हळद कढीपत्ता तुकडे घालून फोडणी द्यावी
मस्त होते ही चटणी
परोठा पोळी सँडविच साठी अती उत्तम

🫒इति पडवळ पुराण सुफळ संपन्न 😋�

jayvrishaligmailcom

થાય અહિંસાનું પાલન સઘળે
જળવાઈ રહે શાંતિ સઘળે....
ના થાય ક્લેશ ક્યાંય
અહિંસા થકી જળવાઈ રહે શાંતિ બધેય....
આંતરરાષ્ટ્રીય શાંતિ દિવસની શુભકામના
જય શ્રી કૃષ્ણ: પુષ્પા એસ ઠાકોર

thakorpushpabensorabji9973

"तुम मेरी कहानी नहीं हो, तुम वह मौन हो जिसके बाद
सारी कहानियाँ खत्म हो जाती हैं।"

Dharmendra Kumar
--सुप्रभात

erdharmendra

Good morning friends.. My Tamil novel "இரவை சுடும் வெளிச்சம்"episode 1 published in matrubharti. Hope you all enjoy
.

kattupayas.101947

जिंदगी और रिश्तों के मायने..... उनके ख़त्म होने के बाद ही पता चलता है!

chitrakshianant734586

જય શ્રી કૃષ્ણ

આજે ખૂબ જ ગર્વ, આનંદ અને ભાવુકતા સાથે હું મારા એક એવા ડ્રીમ પ્રોજેક્ટની સત્તાવાર જાહેરાત કરવા જઈ રહી છું, જે મારા હૃદયની ખૂબ નજીક છે.ગુજરાતી સંગીતના ઈતિહાસમાં કદાચ પ્રથમવાર, એક એવા વિષય પર સંગીતમય સંવાદ કરવાનો નમ્ર પ્રયાસ કર્યો છે, જેને સમાજે વર્ષોથી સંકોચ અને રૂઢિઓના પડદા પાછળ રાખ્યો છે
."લાલી" માસિક ધર્મ (Periods), સ્વાસ્થ્ય અને સ્ત્રીત્વના ગૌરવને વંદન કરતી ગુજરાતની સર્વપ્રથમ ૫ ગીતોની કન્સેપ્ટ આલ્બમ સીરિઝ ટૂંક સમયમાં તમારી સમક્ષ આવી રહી છે.

એક માતા પોતાની દીકરીને વ્હાલ, સંસ્કાર અને વિજ્ઞાન સાથે આ શારીરિક બદલાવ સમજાવે છે, ત્યાંથી શરૂ કરીને સ્ત્રી અસ્તિત્વના ઉત્સવ સુધીની આ એક અનોખી સંગીતમય સફર છે.આ સાહસિક અને ક્રાંતિકારી પ્રયાસને આપ સૌના આશીર્વાદ, પ્રેમ અને સાથ-સહકારની અપેક્ષા છે.

કોન્સેપ્ટ અને ગીતકાર (Concept & Lyrics): માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી 'કૃષ્ણસખી'

આલ્બમ સ્ટેટસ: ટૂંક સમયમાં આવી રહ્યું છે (Coming Soon)

#Laali #Period #BreakingTaboos #MenstrualAwareness #Womanhood

desaimansi547624

छुपा के सारे दर्द अपने

मुस्कान की चादर ओढ़ी है



बेरहम निकला इश्क मेरा

उसने मेरी रूह तड़पती छोड़ी हैं

anisroshan324329

મા, શું હું તને પાછી બોલાવી શકું?
મારા ઘરના પાછળના દરવાજેથી,
તું આવીને મને પૂછજે,
“મારી દીકરી, તું કેમ છે?”

“બાળકોને સ્કૂલે મોકલી દીધા?
કંઈ ખાધું કે નહીં?
તારી તબિયત બરાબર છે ને?”
મા, તારા આ નાના-નાના સવાલો
આજે પણ મને બહુ યાદ આવે છે.

મા, તું મને બહુ યાદ આવે છે,
મને તારી સંભાળની જરૂર છે,
આ દુનિયાથી જ્યારે થાકી જાઉં,
મને બસ તારી જ જરૂર છે.

શું મા, હું તને પાછી બોલાવી શકું?
એક વાર ફરી મને “મારી દીકરી” કહીશ?
એક વાર મારા માથે હાથ મૂકીને,
મને તારા પાલવમાં લઈશ?

heenagopiyani.493689

મહાન પિતા
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જીવ આપીને જીવન ઘડનાર.
કેમ કરી ભૂલાય ?
જાત ખર્ચીને મકાન આપે.
આરામદાયી જિંદગી બનાવે.
એને કેમ કરી ભુલાય ?
ભૂખ્યા નહીં કદી સુવાડે,
જેના શ્રમથી ઘરમાં, અવનવા પકવાન રંધાય.
એ કેમ કરી ભુલાય ?
ટાઢ તડકો સહી મૌન થઈ જાય.
આપે સંતાનને હર ઋતુનું રક્ષણ.
એ રક્ષક કેમ કરી ભુલાય ?
માં'જેનાં પગલે હરદમ ચાલે.
એ પરિવારનો પરમેશ્વર. કેમ કરી ભુલાય ?
'માં'ચાલતાં શીખવે ઘૂંટણિયેથી પગભર.
પણ પિતા પગભર ઉભો રહેતાં શીખવે જીવનભર.
એ પિતા કેમ કરી ભુલાય?
પરિવારનું છત્ર છાયા કહેવાય. એ
"મહાન પિતા" કેમ કરી ભુલાય ?
🖊️જયા.જાની.તળાજા."જીયા"

davejayaben809394

લીલાંછમ પાંદડાંઓની ઓથે,
પવનનો મીઠો સથવારો છે,
કુદરતી દીવાલોની વચ્ચે,
જીવંત એક સંસાર છે.

માટીના કુંડામાં છલકે,
અમૃતરૂપી શીતળ નીર છે,
તરસ છીપાવવા દોડી આવે,
ખિસકોલી ને ચકલી ધીર છે.

ડાળીએ ઝૂલે ચણપાત્ર,
બધાં પંખીને હરખભેર છે,
મીઠો કલરવ ગૂંજી ઊઠે,
આંગણે કુદરતનો મેળ છે.

મનોજ નાવડીયા

#nature #green #kudarat #manojnavadiya #manojnavadiyabooks

manojnavadiya7402

कोई कैसे समझेगा नाता तेरा-मेरा
रूह का ये बंधन आँखों से नहीं दिखेगा 💞

narayanmahajan.307843

ગણપતિના આગમનની હાર્દિક શુભકામના એક ગણપતિના આગમનનું AI થી બનાવેલુ ગીત પ્રસ્તુત છે.
https://youtu.be/jqzm4o9yjnc?si=sgvlanPK8P_weYF4

amiralidaredia175421

https://www.facebook.com/share/p/19bDRPiAcj/

વાંચો સુંદર વાર્તા મારા ફેસબુક પેજ પર 🎊

ronakjoshi2191

हमारा समाज कैसा होना चाहिए?

indianartistmahi

❤️🌹 " ભીંજાયેલી યાદો " 🌹 ❤️

કરશો જો યાદ તો હરેક વાત યાદ આવશે,
કરેલી કોઈ અનોખી મુલાકાત યાદ આવશે.

પહેલા વરસાદની સતત ટપકતી બૂંદો વચ્ચે,
હથેળી ઉપર મૂકેલો કોઈ હાથ યાદ આવશે.

વર્ષાના શોરમાં એકાકાર પાયલનો ઝણકાર,
ને કદમથી કદમ મિલાવેલ સાથ યાદ આવશે.

મંદ મંદ લહેરાતા એ ઠંડા પવનમાં મહાલતાં,
ગુજારેલી હસીન એ એક રાત યાદ આવશે.

ઘનઘોર ઘેરાયેલા વાદળ વચ્ચે સેરડો પાડીને,
ધરતી પર ઊતરી આવેલ ચાંદ યાદ આવશે.

અતિશય યાદમાં છલકાઈ જશે આ આંખો,
ભીંજાયેલી એ પ્રણયની જાત યાદ આવશે.

હવે તો જિંદગી વીતી જશે એ જ યાદોમાં,
"વ્યોમ" દિલના એ જઝબાત યાદ આવશે.


✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અંજાર. મુ. રાપર.

omjay818

बहुत गुरूर था सड़कों को अपनी लंबाई पे...
मैंने इसे कदमों से पैदल ही नाप दिया था।
​मैं कभी भूख से व्याकुल, तो कभी पानी की तलाश में था,
कहीं बच्चों के पैरों में दर्द, तो कहीं माताओं की आँख में पानी था॥

कभी पैरों में चप्पल थी, नहीं तो नंगे पैरों से दौड़ लगाया था
अपनों के लिए ही दूर गया था,
आज अपनों के लिए ही भागा था॥

कभी कुछ मिला तो खाया नहीं तो भूख को गले लगाया था,
एक 'काल' से बचने की चिंता में मग्न...
'मति' का मारा मैं वहाँ क्यों सोने को जा रहा था?
​अब मुझे क्या पता, कि दूसरे 'काल' को वहीं से गुज़र के जाना था,
शायद भूल गया था कि 'काल को हराना' मुश्किल ही नहीं,
नामुमकिन के बराबर था॥

और कोई नहीं... मैं देश का एक गरीब और अब तो मरा हुआ आदमी था,
जो 'शिवम्' के हाथ से लिखकर आपको कुछ याद दिलाने वापस आया था!!

दिनांक-08/05/2020
(औरंगाबाद रेल्वेट्रैक हादसा)

shivamdhuriya291955