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New bites

काही शब्द न बोललेले 💔❤️‍🩹

samarthnavale721330

एक गलत चुनाव...

ज़िंदगी तबाह हो गई,
जिसे अपना समझकर चुना था,
उसी के हाथों खुद को
हर दिन थोड़ा-थोड़ा टूटते देखा है।

हमने उसे अपना पूरा जहाँ समझ लिया,
और उसने हमें
अपनी ज़िंदगी का एक हिस्सा भी नहीं समझा।

जिसके साथ उम्र बिताने के सपने देखे थे,
आज उसी की यादें
रातों की नींद छीन लेती हैं।

गलती बस इतनी थी कि
हमने इंसान को नहीं,
अपने प्यार को सच मान लिया।

काश उस दिन दिल की जगह
दिमाग से फैसला लिया होता,
तो शायद आज
हम खुद से इतनी नफरत न करते।

अब किसी से शिकायत भी क्या करें...
फैसला हमारा था,
गलती हमारी थी,
और सज़ा भी हम ही भुगत रहे हैं।

**कुछ गलत फैसले
सिर्फ रिश्ते नहीं छीनते,
वो इंसान से उसकी हँसी,
उसका सुकून
और जीने की वजह तक छीन लेते हैं।**

आज भी खुद से एक सवाल करता हूँ—
आखिर मैंने उसे ही क्यों चुना था?
जिसे पाने के लिए
मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी दाँव पर लगा दी,
उसी को पाकर
मैं अपनी ही ज़िंदगी हार गया...

ganeshkumar6818

"मोक्ष क्या है? तुम्हारे साथ होते हुए भी तुमसे कुछ न चाहना।"

G.N.

Dharmendra Kumar

erdharmendra

शुक्र करो
शुक्र करो, कुछ नहीं मिला,
 ये ग़म की बात नहीं,
 शायद ख़ुदा ने
 तुम्हारी चाहत नहीं,
 तुम्हारी ज़िंदगी देखी है कहीं।
जिसे चाहा, वो नहीं मिला,
 तो इसे हार मत कहना,
 कभी-कभी छूट जाना भी
 बच जाना होता है।
हड़बड़ी में ट्रेन छूट जाए,
 तो स्टेशन पर बैठकर रो मत देना,
 कौन जाने उसी इंतज़ार में
 कोई अनजान रास्ता
 तुम्हें तुम्हारी मंज़िल दे दे।
हर देर सज़ा नहीं होती,
 हर बिछड़ना ग़म नहीं होता,
 कुछ चीज़ें इसलिए छूटती हैं
 क्योंकि उनके बाद
 कुछ बेहतर होना होता है।
बस इतना याद रखना…
जो तुम्हारे लिए था,
 वो तुम्हें ढूँढ़ लेगा।
और जो नहीं मिला,
 शुक्र करो।
शायद ख़ुदा
 तुम्हें उससे भी बेहतर
 देना चाहता था।
प्राची गुर्जर….

prachitanwar111

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

मेहनत से लिखी तकदीर और ईमानदारी से खिंची लकीर को,
खुद भगवान भी तराजू पर तौलता है।
*********राज-मुकुट : वो राजा जिसके पैर में चप्पल नहीं थी*********

1920 में एक अंग्रेज ने कहा - 'अनपढ़'!
वो शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ गया।

मंगलूरु स्टेशन, सिर पर संतरे की टोकरी,
पैरों में चप्पल तक नहीं, पर आँखों में एक सपना।

23 साल बाद, उसी 'अनपढ़' को लेने
राष्ट्रपति भवन से गाड़ी आई।

संतरे बेचकर जिसने स्कूल खरीद लिया,
वो नंगे पैर वाला राजा था - हरेकला हजाब्बा।

ये कहानी पढ़ो, और बताऔ कैसा लगा सच्चा सफर🔥✨
#rajmukut

raktkamal

Empowering the Next Generation of Healthcare Professionals
Netram Empower Institute is working towards creating accessible, skill-based learning opportunities for students who want to build careers in the healthcare sector.
According to Dr. Anchal Gupta, healthcare education should go beyond textbooks and focus on developing the practical knowledge, professional skills and confidence required in a real healthcare environment.
Through its healthcare-focused programmes, Netram Empower Institute offers training in:
VT — Vision Technician
GDA — General Duty Assistant
HA&M — Hospital Administration & Management
The learning approach combines skill development, practical exposure, professional training and career guidance, helping students understand the responsibilities and working environment associated with different healthcare roles.
“Our focus is to help students develop skills that they can carry from the classroom into the real world of healthcare.”
— Dr. Anchal Gupta
Learn. Develop Skills. Build Your Healthcare Career.
Netram Empower Institute
Skill-Based Healthcare Education | Practical Training | Career Support

bhumikabhati.662947

નિષ્ફળતાના ભયમાંથી બહાર કઈ રીતે નીકળી શકીએ?

પરમ પૂજ્ય દાદા ભગવાન કહે છે...

- પરીક્ષા પછી પરિણામનો ભય ના રાખવો
- નિષ્ફળતામાં નિર્ભય અને નીતિમય રહેવું
- પાછલા અનુભવનું તારણ કાઢવું
- નિષ્ફળતાના ભયથી પ્રયત્નો ન છોડવા
- નિષ્ફળતા માટે તૈયાર રહેવું

વધુ સમજવા માટે અહીં વાંચો: https://dbf.adalaj.org/JGb2rTRe

#Success #selfhelp #selfimprovement #successmindset #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

യാത്ര : അവസാനിക്കാത്ത പ്രയാണം

യാത്രകളെനിക്കെന്നും പ്രണയമായിരുന്നു,
ലക്ഷ്യങ്ങളേക്കാളേറെ അവ—
എനിക്ക് കഥകൾ തന്നിരുന്നു.
ഒരു പ്രഭാതപ്പനിമഞ്ഞിൻ തുള്ളി മുതൽ,
സന്ധ്യ ചോപ്പ ചാർത്തിയ വാനം വരെ,
ഞാൻ നടന്ന വഴികൾക്കെല്ലാം
എന്റെ പേരുമറിയാമായിരുന്നു.
ഓരോ ചുവടും കവിതയായ് പെയ്തു,
ഓരോ ശ്വാസവും പാട്ടായ് ഉണർന്നു.
വഴിയോരമരങ്ങൾ പുഞ്ചിരിയേകി,
കാറ്റെൻ മുടിയിഴകളെ തലോടി,
മഴയെൻ സ്വപ്നങ്ങളെ ഈറനണിയിച്ചു.
പിന്നിട്ട വഴികളെന്നെ മറന്നിരിക്കാം,
പക്ഷേ, ആ ഓർമ്മകളെൻ നെഞ്ചിലുണ്ട്.
ചില മുഖങ്ങൾ വന്നു, ചില ഹൃദയങ്ങൾ ചേർന്നു,
ചില ബന്ധങ്ങൾ പൂത്തുലഞ്ഞു,
ചിലതാകട്ടെ... കാലപ്പകർച്ചയിൽ കൊഴിഞ്ഞുപോയി.
ഒരു യാത്രയും മറ്റൊന്നുപോലായിരുന്നില്ല,
ഓരോ പകലുമൊരു പുതിയ അദ്ധ്യായം!
സന്തോഷം ചിലപ്പോൾ വഴിയോരത്തെ ചായക്കടയായി,
സങ്കടം കാത്തുനിൽപ്പുകാരില്ലാത്ത തീവണ്ടിപ്പാതയായി...
എന്നാലും ഞാൻ നിന്നില്ല,
കാരണം, നിശ്ചലതയെന്നെ ഭയപ്പെടുത്തിയിരുന്നു;
മുന്നോട്ടുള്ള ഓരോ ചുവടിലും
ഞാൻ എന്നെത്തന്നെ തിരയുകയായിരുന്നു.
പർവ്വതങ്ങളെന്നെ ക്ഷമ പഠിപ്പിച്ചു,
നദികളൊഴുകാനും, കടലാഴങ്ങളെ പ്രണയിക്കാനും,
ആകാശം അതിരുകളില്ലാതെ സ്വപ്നം കാണാനും!
ഇടറിവീണ പകലുകളും കരഞ്ഞുതീർത്ത രാവുകളുമുണ്ടായി,
എങ്കിലും തളരാത്ത മനസ്സിന്
പ്രതീക്ഷ വീണ്ടും ചിറകുകൾ നൽകി.
ചിലപ്പോൾ ഞാൻ ഏകാകിയായിരുന്നു,
പക്ഷേ, ആ ഏകാന്തതപോലുമെനിക്കൊരു
കൂട്ടുകാരിയായ് മാറി.
താരകങ്ങളോടു കഥ പറഞ്ഞ രാവുകളും,
വെയിലിലുണങ്ങിയ കണ്ണീർത്തുള്ളികളും,
ഇനിയെന്റെ യാത്രയുടെ അനശ്വരമുദ്രകൾ.
ഇന്ന് തിരിഞ്ഞുനോക്കുമ്പോൾ,
ഞാൻ നടന്ന വഴികൾ വെറുമൊരു ഭൂപടമല്ല;
അതെന്റെ ജീവിതം തന്നെയായിരുന്നു!
എവിടെയെങ്കിലും എത്തിച്ചേരൽ മാത്രമല്ലല്ലോ യാത്ര,
അത് സ്വയം തിരിച്ചറിയലിന്റെ തീർത്ഥാടനമല്ലേ?
അവസാന സ്റ്റേഷനിലേക്ക്
കാലമെന്ന തീവണ്ടി പാഞ്ഞുപോകുമ്പോഴും,
എന്റെ മനസ്സ് പുതിയ വഴികളെ ധ്യാനിക്കുകയാണ്.
ജീവിതം അവസാനിക്കാത്തൊരു തീർത്ഥാടനം...
ഓരോ പുലരിയും ഒരു പുറപ്പാട്,
ഓരോ സന്ധ്യയും ഒരു ഓർമ്മപ്പുസ്തകം.
ഞാൻ യാത്ര തുടരുകയാണ്...
ഹൃദയത്തിൽ പ്രതീക്ഷയുടെ വെളിച്ചവും,
കണ്ണുകളിൽ ആകാശത്തിന്റെ അനന്തതയും,
ചുവടുകളിൽ അചഞ്ചലമായ ധൈര്യവും നിറച്ച്—
അവസാനമില്ലാത്ത ആ മനോഹര പ്രയാണത്തിലൂടെ...! 

ആൻസൺ വർഗീസ്

ansonvarghese.874600

har har Mahadev 🙏

nikitavinzuda6548

🩸आजचा रंग लाल.
🩸लाल गाजराचा हलवा

🩸दिल्ली साईड कडून येणाऱ्या या गाजराचा रंग लालभडक असतो
आणि चवीला खुप गोड असतात ही गाजरे

🩸साहित्य
अर्धा किलो गाजरे
दोन वाट्या मिल्क पावडर
दोन मोठे चमचे तूप
दोन वाट्या दुध
साखर अर्धी वाटी
ड्राय फ्रुट ऐच्छिक
काजु बदाम काळे मनुके वगैरे आवडीनुसार

🩸कृती
प्रथम मोठ्या किसणीने गाजरे किसून घ्यावीत
पॅन मधे तूप घालुन कीस टाकावा
मंद आचेवर हलक्या हाताने हलवत रहावे
नावातच "हलवा "असल्यानं मंद आचेवर जितके हलवाल तितका रंग चांगला येईल😊

🩸एकीकडे मिल्क पावडर थोड्या दूधात मिसळून घ्यावी

🩸हा कीस शिजताना झाकण अजिबात ठेवायचे नाही
म्हणजेच रंग चांगला येईल
पाच दहा मिनिटात कीस मऊ होऊ लागेल

🩸आता यात एक वाटी दूध टाकून हलवत ते दुध गाजरात मुरू द्यावें
परत एक कप दूध घालून अशीच कृती करावी

🩸यानंतर अर्धा वाटी साखर घालावी
ही गाजरे मुळात गोड असल्यानं फार साखरेची गरज नसते
साखर घातल्यावर थोडे पाणी सुटेल
थोडा वेळ हलवून
दुधात मिक्स केलेले मिल्क पावडरचे मिश्रण घालावे

🩸यानंतर आपल्या आवडीचे ड्राय फ्रुट घालून एकसारखे करून घ्यावे
मिश्रण हळूहळू घट्ट होईल

🩸पाचच मिनिटात हलवा तयार होईल
सजावट करून खायला घ्यावा

टीप...संपुर्ण कृतीत कधीही पॅन वर झाकणं ठेवू नये😊😊

jayvrishaligmailcom

आ...... गया है......👻🖤
काल गढ़ की तारा - 3 : दर्पण में तीसरी औरत👻🖤

चेतावनी: कमजोर दिल वाले इस कहानी से दूर रहें! ये कहानी रात में अकेले न पढ़ें।

शादी की पहली रस्म... और महल के शाही कक्ष में लगा 100 साल पुराना विशाल, श्रापित दर्पण... एक डरावनी चीख के साथ 100 टुकड़ों में बिखर गया!

भूषण सिंह का माथा ठनका, उन्होंने तुरंत बात दबा दी। दासियों से कहलवा दिया - "कह दो, बिल्ली ने तोड़ दिया।"

पर तारा जानती थी... उसने अपनी आँखों से देखा था... टूटने से ठीक एक पल पहले उस दर्पण में दो नहीं, तीन औरतें थीं!

तीसरी औरत... जिसके लंबे काले बाल चेहरे को ढके थे, जिसकी सफेद साड़ी खून से सनी थी, और जो मुस्कुरा कर सीधा तारा को ही देख रही थी!

अब वो हर रात लौटती है। हर टूटे हुए कांच के टुकड़े में। हर परछाई में।
वो दर्पण से बाहर आना चाहती है... और उसे चाहिए... तारा का शरीर!

आ गया है काल गढ़ की तारा का सबसे डरावना EPISODE 3 - क्या आपमें है इसे अंत तक पढ़ने की हिम्मत?

क्या है इस दर्पण का 100 साल पुराना काला राज...
आगे के लिए 🔥 follow💗🖤

#horror #love #badla #mystery #thriller #kalgadhkitara #daravanikahani

raktkamal

आज पता चला
अगरबत्ती की माँ का नाम
मोमबत्ती है

anisroshan324329

કોઈ ડિસ્કાઉન્ટ નથી,
બસ મનથકી બીજાને છેતરે છે,

ઊંચો ભાવ રાખે છે,
પણ સત્યને તો છુપાવે છે,

હવે ડિસ્કાઉન્ટ આપે છે,
બસ ઓછો દેખાડી ભરમાવે છે,

જાતને તો ખબર છે,
પણ બીજાને સતત છળે છે,

દેખાવમાં ઘણું સરળ છે,
પણ પછી તો કર્મો નડે છે.

મનોજ નાવડીયા

manojnavadiya7402

अपनी चाय शांति से पीजिए, अपने पसंदीदा कपड़े पहनिए।

अगर कोई कहे कि कौआ सफेद है, तो उसका कौआ सफेद ही रहने दीजिए।"

anisroshan324329

माँ, पत्नी, बहू... और एक 'औरत'
​ठंडी हवा के झोंके सुबह की नींद को और गहरा कर देते हैं, जब हम थोड़ी और चादर ऊपर खींच कर बेफिक्र होकर सोते हैं और सपनों में खोते हैं। ठीक उसी वक्त हमारी माँ अपनी मीठी नींद छोड़कर अपने पति और बच्चों के लिए शगुन, एक बेहतर लाइफ और एक बेहतरीन दिन बनाने के लिए जतन करती हैं। घर के बाहर पहली औरन (घर के फ्रंट रास्ते पर शगुन के लिए रंगोली या चौकपूर्णा, जिससे उनके बच्चे, पति और घर में खुशहाली बनी रहे)—और ऐसे ना जाने कितने काम वह बस घर और बच्चों की खुशहाली के लिए करती हैं। शायद ये सभी माताएँ करती हैं, और धीरे-धीरे यह उस घर की बहू और बेटी भी सीख जाती हैं। कुछ चीजें हमें सिखाई नहीं जातीं, लड़कियों में यह माँ को देखकर खुद-ब-खुद आ जाती हैं।
​सुबह के 4:30 बज रहे थे। उस वक्त घर के सभी सदस्य एक सुकून और गहरी नींद में सो रहे थे। सुमन घर की औरन और रंगोली बनाने में व्यस्त थीं और मन ही मन घर की खुशहाली और बच्चों, पति के लिए दुआ कर रही थीं। लगभग मोहल्ले की सारी औरतों का यह एक तय काम था और उस वक्त सभी यही करती थीं। सुमन अपने बाहर के काम निपटा कर मुस्कुराते हुए रसोई के कामों में लग गईं। धीरे-धीरे घर में सभी की नाश्ते की फरमाइशें और काम के लिए माँ को आवाज गूंज की तरह आने लगीं। सुमन कभी रसोई में भागतीं, तो कभी बच्चों के पास, तो कभी पति के पास... (माँ के बिना जिंदगी वैसे ही बहुत अधूरी होती है; वह बस घर में हो तो लगता है कि घर सच में घर है, और वह ना हो तो लगता ही नहीं कि घर सच में घर है)। ठीक ऐसे ही सुमन सभी के लिए थीं, और वह इसमें खुश थीं। रात के 10 बजे तक बस वह सभी की फरमाइशों पर ही काम करती रहती थीं।
​सुमन रसोई में काम करने में व्यस्त थीं, और उनकी बेटी उनकी मदद कर रही थी। जब सुमन पराठे बनाने में पूरी तरह मग्न थीं, तभी रूही ने कप में चाय डालते हुए नरमी से पूछा, "मम्मी, क्या आप सच में इस तरह से खुश हैं?"
​यह सवाल सुनकर सुमन का दिल एक पल के लिए थम गया, और उनके चेहरे की हंसी थोड़ी फीकी पड़ गई। रूही की ओर देखते हुए उन्होंने जवाब दिया, "हाँ, मैं बहुत खुश हूँ। मैं क्यों नहीं होऊँगी? यह मेरा घर है, और मेरे पति और बच्चे मेरे साथ यहीं पर हैं।"
​रूही अपनी माँ के चेहरे को लगातार घूरती रहीं—शायद उस जवाब के पीछे छिपे असली सच की तलाश कर रही थीं, वह सच जो सिर्फ एक 'माँ, पत्नी और बहू' के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति 'सुमन' के लिए था।
​तभी रसोई के बाहर से रूही के पिता ने कड़े स्वर में डाँटते हुए कहा, "क्या कर रही हो? क्या अभी तक नाश्ता तैयार नहीं हुआ? मुझे देर हो रही है!" डाइनिंग टेबल पर अखबार के ऊपर से देखते हुए उन्होंने आगे कहा, "मेरे पास तुम्हारी तरह नाश्ते का इंतजार करने के लिए पूरा दिन नहीं है। अगर मैं बाहर जाकर न कमाऊँ, तो यह घर नहीं चलेगा!"
​यह एक ऐसा ताना था जिसे सुमन लगभग रोज सुनती थीं, फिर भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और हमेशा मुस्कुराती रहीं। पर कौन जानता है कि वह अंदर से कितनी टूटी हुई महसूस करती थीं, और कितनी बार अकेले में रोई थीं! रूही ने भी यह सब सुना, लेकिन सुबह का माहौल खराब न हो, इसलिए इससे पहले कि रूही कुछ कहती, सुमन ने आँखों के इशारे से उसे चुप रहने को कहा। रूही ने अपने पिता को नाश्ता परोसा और बिना एक शब्द कहे चुपचाप कॉलेज चली गई।
​रूही का कॉलेज में बिल्कुल मन नहीं लगा, और वह पूरे समय बस अपनी माँ के बारे में सोचती रही। वह बार-बार याद करती रही कि कैसे वह खुद भी कभी-कभी अपनी माँ को केवल एक 'माँ' के रूप में देखती है—यह उम्मीद करती है कि वह कभी कोई गलती न करें, हर काम आसानी से पूरा करें—और वह यह पूरी तरह भूल जाती है कि माँ बनने से पहले वह 'सुमन' नाम की एक स्वतंत्र औरत हैं!
​वह यह भी सोचने लगी कि जब भी कुछ गलत होता है, तो उसके भाई भी अपने आप अपनी माँ को ही दोषी क्यों ठहराते हैं। रूही थोड़ी देर के लिए रुकी और विचार किया: क्या यह आदत उनके पिता को देखकर आई है, जो हमेशा हर छोटी-छोटी बात के लिए माँ को जिम्मेदार ठहराते थे जबकि हर सफलता का सारा श्रेय खुद लेते थे?
​जब रूही कॉलेज से घर आईं, तो सुमन की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। वह अपने कमरे में खांसते हुए पापा के कपड़ों पर आयरन कर रही थीं। रूही ने पास जाकर सुमन के सर पर हाथ रखा, तो सुमन बुखार से तप रही थीं। रूही ने झट से कपड़े लेकर रख दिए और माँ को बिस्तर पर लिटा दिया। कुछ दवा देकर माँ के पास बैठ गईं और हिदायत देते हुए बोलीं, "मम्मी, अब आप काम मत कीजिए, सब बड़े हो गए हैं, अपना काम खुद कर सकते हैं; आप बीमार नहीं पड़ेंगी।"
​सुमन ने रूही की चिंता पर मुस्कुराते हुए कहा, "मेरी फिक्र मत करो, मैंने दवा ले ली है और एक-दो घंटे में बेहतर महसूस करने लगूँगी। तुम्हें भी आराम करना चाहिए।"
​लेकिन जब दो-तीन घंटे में बुखार नहीं उतरा और सुमन की तबीयत और बिगड़ने लगी, तब सुमन को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जाँच और रिपोर्ट के आने के बाद मालूम हुआ कि सुमन को टाइफाइड हो गया है, और डॉक्टर ने सुमन को कुछ दिन अस्पताल में ही भर्ती रखने की सलाह दी।
​जब सुमन के बिना सब घर आए, तो पहली बार सबको अहसास हुआ कि सुमन के बिना घर, सच में घर है ही नहीं!
​बेटे को अपने किसी काम के लिए अचानक माँ की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी।
​पति को किसी भी गलती या गुस्से को ताने के रूप में सुनाने के लिए जिनकी पत्नी सुमन थीं, वह घर में नहीं थीं।
​और बेटी रूही—जैसे ना चाहते हुए भी सारी जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई थी।
​सब अपने-अपने काम में तो लगे थे और जिम्मेदारी भी पूरी कर रहे थे, लेकिन कोई भी घर के उस खालीपन को नहीं भर पा रहा था जो सुमन के ना होने से था। एक ऐसी खामोशी घर में छा गई थी कि सबके मन में यह सवाल उठने लगे—क्या कहीं वे खुद ही तो आज सुमन की इस हालत के जिम्मेदार नहीं हैं?
​जब सुमन आठ दिन के बाद अस्पताल से घर आईं, तो घर की चौखट पर बनी रंगोली को देखकर हल्का सा मुस्कुरा दीं और रूही की तरफ देखकर आँखों में ममता के आँसू छलक पड़े। रूही भी मुस्कुराते हुए और थोड़ा नाज से बोलीं, "मम्मी, रंगोली अच्छी बनी ना? मैंने बनाई है!"
​सुमन ने भी प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, "हाँ, बहुत अच्छी है।"
​बेटा भी सुमन के लिए झट से फल लेकर आ गया और उनके पास बैठ गया। यह पहली बार था जब सुमन का बेटा खुद अपनी मर्जी से सुमन के पास बैठा हो।
​सुबह जब सब सो रहे थे, सुमन उठकर फिर अपने रोजमर्रा के काम में लग गईं। सुमन जब पति के लिए चाय लेकर आईं, तो सुमन के पति ने चाय का कप उठाते हुए थोड़ा झिझक कर पहली बार कहा, "तुम भी अपनी चाय ले आओ।"
​सुमन जैसे यह सुनकर वहीं थम गईं—जैसे इतने दिनों की तपस्या पूरी हो गई हो, और उनकी आँखें भर आईं!
​एक एहसास
​हम जाने-अनजाने में यह भूल जाते हैं कि माँ सिर्फ 'माँ' नहीं है; इससे पहले वह सिर्फ एक 'औरत' है जिसका अपना एक वजूद है, जो हमारी तरह गलती कर सकती है। लेकिन हम जाने-अनजाने में माँ, बीवी और बहू से यह उम्मीद करते हैं कि वह एक परफेक्ट इंसान बनें जो कभी कोई गलती ना करें, जिनका अपना कोई वजूद ना हो, और जो बस हमारे लिए ही जिएँ।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

"तुम्हें खोने का डर नहीं है, डर है कि तुम्हें महसूस करना कहीं भूल न जाऊँ।"
good morning
Dharmendra Kumar

erdharmendra

Visual: Warm, earthy festive frame with a soft glowing Ganesha silhouette or traditional setup.
Text Overlay: "May Bappa bless your journey with clarity, courage, and grace."
Rooted in tradition, looking forward with hope. Wishing everyone a peaceful and luminous Ganesh Chaturthi.
Bappa’s grace on all new paths ahead. 🌿🪔
#GaneshChatturthi2026 #FestiveVibes #SasiKrishnasamy

sasikrishnasamy

17 years down, a lifetime to go.
From milestone moments to the quiet grace of everyday routines, watching the way you both anchor each other is a reminder of what real partnership looks like. Thank you for showing us that love isn't just a grand gesture-it's showing up, year after year, with patience, warmth, and deep respect.
Wishing you both a milestone celebration filled with laughter, favorite meals, and the peace of being home together. Happy 17th Anniversary, Sasi and Gokila!
#HappyAnniversary #17YearsStrong
#LoveAndPartnership #SasiAndGokila

sasikrishnasamy

जितना देख सकते हो, उतना बडा सपना देखो जितना सोच सकते हो, उतना अच्छा सोचो जितनी अच्छी आदतों को अपना सकते हो, अपनाओ जितना डट कर मेहनत कर सकते हो, उतनी मेहनत किया करो...

फिर एक दिन उतनी ही बड़ी कामयाबी मिलेगी, जितनी आपने सोच रखी है...✍️

kanoparjapati8861

न जाने किस मोड़ पर हमारी राहें कम पड़ गईं... तुम सामने थे, मगर सफ़र ख़त्म हो चुका था।

anisroshan324329

★ 🏆 THE ALFHA MASTER-PEN COMPETITION 2026 🏆
Presented by ALFHA PRODUCTION HOUSE
Are you ready to unleash your creativity and share your stories with the world? " ALFHA PRODUCTION HOUSE" is thrilled to announce our biggest creative writing competition of the season!
Whether you are one of our dedicated consultant helpers, someone who already knows and loves ALFHA, or a completely new talent looking for a platform—this competition is for "YOU" . Everyone is welcome to participate!
• 📅 Competition Timeline
° Registrations Timeline
● Registration deadline is till 10th October.
● Story submission form will be shared on 10th December, open till 20th December.
● On 21st the forms will be shared respectively.
• 🚀 How to Participate
Joining the competition is incredibly simple! To register your name or submit your entry, just drop us a message or give us a call:
◇ 📞 WhatsApp / Call: 8448185223
◇📱 snapchat: Send a direct message to ALFHA PRODUCTION HOUSE
• 📚 Choose Your Genre
We are accepting entries across a massive variety of categories. Pick the style that best suits your voice from our 30 Official Competition Genres:
1. Thrills & Chills
2. Psychological Thriller
• Detective / Noir Mystery
4. Cozy Mystery
5. Supernatural Horror
6. Slasher / Survival Horror
• Sci-Fi & Fantasy
7. High / Epic Fantasy
8. Urban Fantasy
• Science Fiction
9. Cyberpunk
10. Dystopian / Utopian
11. Space Opera
12.Steampunk
13. Romance & Drama
• Contemporary Romance
14. Historical Romance
15. Romantic Comedy (Rom-Com)
16. Young Adult (YA) Drama
17. Family Saga / Domestic Drama
History & Adventure
18. Historical Fiction
19. Action / Adventure
20. Epic Quests
21. Mythology & Folklore Retellings
• Comedy & Lighter Fare
22. Satire
23. Dark Comedy
24. Parody
25. Slice of Life
• Specialty & Niche
26. Paranormal
27. Magical Realism
28. Gothic Fiction
29. True Crime
• (Fictionalized)
30.Poetry & Spoken Word •Narratives
- Don't miss your chance to be a part of the next big story. Dust off your keyboards, grab your notebooks, and reach out to us today to secure your spot in the competition. We can't wait to read what you create!


"ALFHA's vision turns every project into a blueprint for success."



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### ✨ **OFFICIAL NOTICE** ✨
**Subject:** Announcement of Competition Rewards – May 2026 🏆
This is to officially announce the reward structure for the upcoming writing and publishing competition hosted by **Alfha**. In line with our philosophy—*"Learn until learning (L) silents"*—we are offering prizes designed to provide both financial appreciation and professional publishing opportunities! 🚀
### **🏆 The Rewards 🏆**
🥇 **1st Prize:** **₹1,000 Cash Reward** 💵 + **Official Excellence Certificate** 📜 + **Full Paperback Publishing** 📚 *(Print on Demand)*.
🥈 **2nd Prize:** **₹500 Cash Reward** 💸 + **Official Merit Certificate** 📄 + **Digital Ebook Publishing** 📱 *(Global Distribution)*.
🥉 **3rd Prize:** **Official Participation Certificate** ✅ + **Direct Induction into the Alfha Consultant Program** 🤝 *(Professional Networking)*.
🌟 All winners will be evaluated based on the quality of their submission and creativity. We encourage all participants to strive for excellence as we move toward the final submission deadline of **May 20, 2026**. ⏳
Get ready to turn your vision into a published reality! ✨🔥
**Rohan Mathur** ✒️
*CEO, Alfha Production House

alfha202141

जब कंप्यूटर इंसान ने बनाया है तो
कोर्स किस लिए करता है

लॉजिक तो है बात में

anisroshan324329