Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

"कितना मुश्किल है
इस अंदाज में ज़िन्दगी बशर करना"

"तुम्हीं से फासला रखना
और तुम्हीं से इश्क़ करना.!!

narayanmahajan.307843

"જે મન કૃષ્ણમાં સ્થિર થઈ જાય,
એને દુનિયાની કોઈ આંધી ડગમગાવી શકતી નથી."

parmarsantok136152

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🦚

पूर्णिमा की रात, वृन्दावन में कान्हा ने बाँसुरी बजाई।
सारी गोपियाँ मर्यादा की रेखा पार कर दौड़ आईं।
तब राधा रानी ने पूछा - सबसे ज़्यादा प्रेम कौन करता है?

कान्हा का जवाब सुनकर आप भावविभोर हो जाएँगे 🥹
उन्होंने कहा - ये सारी गोपियाँ आपकी ही अंश हैं राधे।
सब में आपकी ही छवि है। इनका प्रेम भी मेरे लिए सम्पूर्ण है।

यही है हमारे जीवन का सार
कृष्ण ही राधा हैं, राधा ही कृष्ण हैं
दो जान, एक शरीर 💛

इस वीडियो में जानिए:
Raas Leela का असली मतलब क्या है
क्या हम भी राधा का अंश हैं
सच्चा प्रेम मर्यादा से बड़ा कैसे है?

अगर वीडियो अच्छी लगे तो "राधे राधे" लिखकर चैनल को सब्सक्राइब करें
आपकी एक राधे राधे से किसी का दिन बन जाएगा।

#ShreeRadheKrishna #DoJaanEkShareer #RaasLeela #DearFever #JaiJagannath

skptech

બુક: સતી સાવિત્રી
લેખક: દેવદાત પટનાયક

એમ તો ખૂબ નવા લેખક છે મારી માટે..
નારી જાતિમાં જ્યાં એક સમય હતો
જ્યાં બાળકોના નામ પાછળ તેની માતાનું નામ લખવામાં આવતું તે સમયથી લઈ ને ઉપનિષ, વેદ,રામાયણ અને મહાભારત સુઘીની નારીઓની નાની કથા અને માન્યતા સાથે ખૂબ સારી રીતે વિચાર રજુ કરેલ છે.. આ બુક વાંચીને ખરેખર ખૂબ મજા આવી.. જો તમને પણ ઈતિહાસમાં મનુષ્યના જીવનમાં ભૂતકાળોમાં સ્ત્રી નું સ્થાન પ્રથા અને સમાજ વિશે જાણવામાં રસ હોય તો આ બુક જરૂરથી વાંચજો..

chiragvora055249

[ मुझे पाना तू चाहती थी,
तुझे पाने में वक्त लगेगा
वो कहते है न हीरा बनाने ओर उस हीरे को सिद्दत से पाने में
वक्त लगेगा
तू अगर छोड कर जा रही है तो याद रखना हीरा हर बार नदी में नहीं मिलता
मुझे पाने है to वो वक्त दुबारा नहीं मिलता
जरा सोच ले मेरा जैसा इंसान हर किसी को नहीं मिलता
तुझे होगा अहसास मुझे खोने का
जब वक्त भी कम होगा और तेरा मुझे न पाने का अफसोस भी होगा।

omparkashverma554460

Evil Nun 1 Game Story Hindi Comming Soon By Speedy Gamer

vihanbakshi008153

Once more, I yield thee to the heavens’ decree,
And turn away; I shall return no more.
Seek me if thou wilt, across the lonely shore—
Henceforth, thy search must find what's left of me

cosmicstar

सब देखा देखी का खेल है
मन को कितना भी कही लेजाए
पर मन कही ओर जाने लगता है

rupex

"अधूरा भी पूरा है"

क्या ज़रूरी है कि जो शुरू किया उसे पूरा करना ही है…
क्या हम कुछ अधूरा नहीं छोड़ सकते?
कोई रास्ता, कोई याद, कोई सपना, कोई किताब…
क्या होगा अगर कुछ बात बीच में ही रह जाए तो?

क्या हर नदी का समंदर तक जाना ज़रूरी है?
क्या हर चाँद का पूरा गोल दिखना ज़रूरी है?
अगर कोई गीत बीच में ही रुक जाए,
तो क्या वो कम सुंदर लगेगा?

देखो तो सही…
भगवान ने भी दुनिया पूरी नहीं बनाई।
कहीं पहाड़ आधे, कहीं नदियाँ प्यासी,
कहीं धूप कम, कहीं छाँव उदास।
उसने चाँद पर भी दाग छोड़ दिया,
शायद इसलिए कि कमी में भी खूबसूरती होती है।

हम क्यों डरते हैं अधूरेपन से?
अधूरी बात में ही तो फिर मिलने की आस होती है।
अधूरी किताब में ही तो नया सपना पलता है।
अधूरे रास्ते में ही तो लौट कर आने का मन करता है।

जो पूरा हो गया, वो कहानी बनकर खत्म हो जाता है,
पर जो अधूरा रह गया, वो साँस बनकर चलता रहता है।
पूरा होना मतलब रुक जाना है,
अधूरा होना मतलब चलते रहना है।

तो रहने दो कुछ बातें अनकही,
कुछ रास्ते बिना मंज़िल, कुछ सपने बिना रंग के।
शायद भगवान ने भी हमें अधूरा बनाया है…
ताकि हम एक-दूसरे से जुड़ कर
उसकी दुनिया को पूरा कर सकें।

प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

"मैं और मेरे अक्षर”…….

आईने से डरती हूँ मैं, वो सच दिखा देता है,  
मैं तो वो हूँ जो लफ़्ज़ों में ख़ुद को छुपा लेता है।


मैंने कभी देखना नहीं चाहा ख़ुद को दर्पण में…  
मेरी आँखों के कोर पर काजल टिकता नहीं,  
माथे पर बिंदी का बोझ उठता नहीं,  
नहीं चाहिए मुझे खन-खनाती चूड़ियों का श्रृंगार…  
मेरा शोर तो मेरे अक्षरों के पार है।

मैं अक्सर बह जाती हूँ स्याही की नदी में,  
अक्षर से भाषा, भाषा से वेदना की गहराई में।  
मेरा जी अटका है एक अजीब तड़पन में…  
जिसे न गहने चाहिए, न डोली का क़रार,  
बस चाहिए एक कोना किताब के हाशिये का उधार।

लोग कहते हैं “औरत हो, सँवर जाओ”,  
मैं कहती हूँ “शब्द हूँ, बिखर जाओ”।  
मेरी माँग का सिंदूर कविता की सुर्ख़ लकीर है,  
मेरा गजरा ग़ज़लों की महकती तहरीर है।

रात जब दुनिया सोती है, मेरी क़लम रोशन होती है,  
मेरे ख़्वाब पाँव में पायल नहीं,  
नज़्मों की पाज़ेब पहन कर जागते हैं।  
मेरा आँचल शब्दों से सिला है,  
मेरी मेहंदी अख़बार की सुर्ख़ियों से रची है।

मुझे दुनिया से नहीं, ख़ुद की परछाईं से पर्दा है,  
क्योंकि दर्पण में सिर्फ़ जिस्म उतरता है 
और मैं तो रूह की इबारत हूँ।  
मैं प्रेमचंद के पन्नों की कोई थकी हुई औरत हूँ,  
महादेवी के आँसू से भीगी कोई प्रार्थना हूँ,  
अमृता के ख़त की आख़िरी अधूरी सतर हूँ।

मेरी तड़प न मायके की देहरी की है, न ससुराल की दीवार की,  
मेरी तड़प उस सुबह की है 
जहाँ औरत को पढ़ने से पहले नापा न जाए,  
जहाँ उसके क़लम की नोक को उसके गहनों से पहले सराहा जाए।

तो रहने दो मुझे यूँ ही बे-रंग, बे-साज़…  
बिना काजल, बिना बिंदी, बिना चूड़ियों के अल्फ़ाज़।  
मैं ख़ामोश सही, मगर मेरे हर लफ़्ज़ में इनक़लाब है,  
मैं तन्हा सही, मगर मेरी किताबों में पूरा हिसाब है।

प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

मेरी हिंदी में लीखी पुस्तक। 12 अच्छी से अच्छी कहानियों का संग्रह जिसमें से ज्यादातर कहानियां इस प्लेटफॉर्म पर है।
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sunilanjaria081256

बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर – जहाँ आस्था आज भी साँस लेती है
लेखिका: SKP Devine Creation
भारत की आध्यात्मिक भूमि पर ऐसे अनेक तीर्थ हैं, जहाँ केवल पत्थर की प्रतिमा नहीं, बल्कि श्रद्धा की जीवंत अनुभूति मिलती है। ओडिशा के गंजाम जिले का बेलागुंठा श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर भी उन्हीं दुर्लभ स्थलों में से एक है। यहाँ आने वाला हर भक्त अपने साथ केवल दर्शन नहीं, बल्कि मन की शांति और विश्वास लेकर लौटता है।
मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान श्री लक्ष्मी नृसिंह का स्वरूप भक्तों के हृदय में अद्भुत श्रद्धा जगाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान आज भी अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि जब वे भगवान के सम्मुख खड़े होते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे भगवान की दृष्टि सीधे उनके हृदय तक पहुँच रही हो। यह अनुभव व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन यही विश्वास इस मंदिर को विशेष बनाता है।
भगवान नृसिंह, भगवान विष्णु के उस दिव्य अवतार का प्रतीक हैं जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अधर्म का अंत किया। यही संदेश आज भी इस मंदिर में जीवित है—सत्य और भक्ति की रक्षा अवश्य होती है।
बेलागुंठा केवल आध्यात्मिकता का केंद्र नहीं, बल्कि कला और संस्कृति की भूमि भी है। यहाँ की प्रसिद्ध पित्तल मछ (Flexible Brass Fish) और आसपास के कारीगरों की कला इस क्षेत्र की पहचान हैं। इसलिए यहाँ आने वाला यात्री भक्ति के साथ-साथ ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होता है।
मंदिर का शांत वातावरण, घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों की रोशनी और श्रद्धालुओं की प्रार्थनाएँ मन को भीतर तक छू जाती हैं। ऐसा लगता है मानो समय कुछ क्षणों के लिए ठहर गया हो और केवल ईश्वर और भक्त का संबंध ही शेष रह गया हो।
आज जब जीवन भागदौड़ से भरा हुआ है, तब बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और भक्ति में होती है।
"जहाँ विश्वास अडिग होता है, वहीं ईश्वर का अनुभव सबसे गहरा होता है। बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर इसी सत्य का जीवंत प्रतीक है।"

skptech

माँगना जो रब से तुझको, मेरी तो दुआ हो गई, उसने हीरे की जो दी अंगूठी, तो तेरी रज़ा हो गई।

anisroshan324329

ज़माना कहता है कि दिखाओ तो ही मानेंगे हम,
तो अब हो कर बेशर्म अपने दर्दों को सजाऊँ क्या?

anisroshan324329

बट गया था दिल मेरा, तेरे और मेरे दो हिस्सों में,
वही जो हिस्सा था तेरा, वकालत सिखाने आए हैं।

anisroshan324329

पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है

पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है। दर्द तो पुरुष को भी होता है। दिल तो उसका भी रोता है पर कहाँ कह पाता है अपना दुःख किसी से। हमारा समाज सदियों से पुरुष प्रधान रहा है। एक हाथ की सभी उंगलियां बराबर नहीं होती, उसी प्रकार सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते। कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, उसकी परवरिश और परिस्थितियां उसे अपराधी बना देती हैं। परवरिश का कितना महत्व है कि राक्षस कुल में भी प्रहलाद जैसे भक्त पैदा होते हैं।

समाज का ताना-बाना ही कुछ ऐसा है कि लड़कों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि तुम पुरुष हो तुम्हें रोना नहीं है। सारे कठिन कार्य पुरुषों के हिस्से आते हैं। परिवार के सभी दायित्वों का निर्वाह करना भी पुरुष की जिम्मेदारी होती है। एक औरत घर का काम करके सिर्फ घर में रहकर खुद को बेचारी नौकरानी समझती है क्योंकि सिर्फ अपने बारे में सोचती है। अरे उस आदमी का दर्द भी तो समझो जो चौबीस घंटे अपने बीवी बच्चों की खुशी के लिए, उनके सपने पूरे करने के लिए खुद को घिसता है। घर से बाहर निकलना पैसे कमाना इतना आसान कहाँ है। सुबह-सुबह जल्दबाजी में उल्टा-सीधा जो मिला खाकर घर से निकलता है ऑफिस पहुँचने की जल्दी, काम की चिंता। बास की डांट। कितना मानसिक दबाव रहता है दिमाग पर। घर से निकलो, दौड़ते-भागते मेट्रो पकड़ो, मेट्रो में भीड़ इतनी, खड़े-खड़े ऑफिस जाओ, पहुँचते ही बॉस की डांट खाओ।

कुछ फ्री में नहीं मिलता इस दुनिया में। हर चीज की कीमत अदा करनी होती है। प्राइवेट नौकरी वाले का तो बुरा हाल है। उन्हें तो मजदूर समझा जाता है। पूरा दिन गधे की तरह काम लो फिर गाली दो, जब चाहे नौकरी से निकाल दो। औरतें घर में रहकर शिकायत करती हैं कि ये लाकर नहीं दिया, ये नहीं किया घर को समय नहीं दिया। अरे घर से निकलकर देखो एक पुरुष की जिंदगी। अपने पास चाहे फटे जूते हों बीवी-बच्चों को नए जूते दिलवाता है। खुद सस्ते कपड़े पहनकर बीवी-बच्चों को महंगे कपड़े पहनाता है। खुद भूखे रहकर भी बच्चों का पेट पालने के लिए रात-दिन मेहनत करता है। जिस घर को बनाने में पूरी जिंदगी लगाता है, अपनी जवानी खर्च कर देता है, अपने शौक मारकर पाई-पाई बचाता है, उस घर में वो बेचारा कितनी देर, कहाँ रह पाता है। उस पुरुष के हिस्से में घर का अहाता ही आता है। घर के बाहर चारपाई पर पड़े सोचता होगा इस घर को बनाने में पूरी जवानी खत्म हो गई और बुढ़ापे में उसी घर से बाहर कर दिया जाता है। सच में पुरुष होना भी कितना कठिन होता है।

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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

माता और पिता_जीवन के दो अमूल्य स्तंभ
सहनशीलता, सुरक्षा और सृष्टि का दिव्य संगम
प्रस्तावना

skptech

“बूंद से मिट्टी तक “……


आज सुबह उठी तो देखा बारिश पड़ रही थी…  
हर बूँद पातों से होके ज़मीं पे गिर रही थी…  
क्या ज़रूरी था बूँद का पत्तों से होके गुज़रना…  
और इतनी मुश्किलों के बाद मिट्टी में मिल कर ख़ुद का वजूद ख़त्म करना?

हाँ, ज़रूरी था।  
क्योंकि पत्ते की हथेली पर रुक कर बूँद ने जाना,  
छुअन बिना भी कोई अपना होता है  यही तो प्यार है।  
पल भर का ठहराव, पूरी उम्र का करार है।

ज़मीन पर गिरना टूटना नहीं था…  
वो तो मिट्टी की कोख में उतरना था।  
बूँद मिट्टी न बने, तो अंकुर फूटेगा कैसे?  
और अंकुर न फूटे, तो किसी थके हुए को छाँव मिलेगी कैसे?

हम भी तो बूँद ही हैं।  
कभी किसी की बातों से टकरा कर ठिठक जाते हैं….. ये जैसे अपनेपन का मरहम है।  
कभी हालातों के पत्थर पर गिर कर छिल जाते हैं ….ये ज़िंदगी का संघर्ष है।  
कभी लगता है अब सब शून्य है, मन के भीतर घना अवसाद है…  
कि साँसें चलती हैं पर जीने की आस नहीं है।

पर देखो न…  
हर बार मिट्टी में खो जाने के बाद,  
उसी जगह से एक नन्ही उम्मीद सर उठाती है।  
वजूद मिटता नहीं,  
वो बीज बन जाता है।

तो अगली बार जब बारिश देखो,  
तो बूँद का गिरना मत गिनना…  
उसका मिट्टी होना देखना।  
क्योंकि जो खो गया लगता है,  
वही किसी और के लिए उग आता है।

प्राची गुर्जर……

prachitanwar111

પગાર આવ્યો 💸💸💰💰
અને તરત જ જતો રહ્યો. 😟
કેમ છે દોસ્ત..? 😏😏
એવુ પુછવાય ઊભો ના રહ્યો... 😒
આવતા મહિને ફરી આવીશ એવુ કહીને
ઉતાવળમા નીકળી ગયો .
મારો બેટો...,
એક ચોકલેટ ખવડાવવાય ના રોકાયો....!
😜😜😜😜😜 🤣🤣🤣🤣

jighnasasolanki210025

ઉત્તમ પુસ્તકો ઉત્તમ તમ મિત્રની ગરજ સાર છે. 🌹🌹🙏🌹🌹🙂

drbhattdamayntih1903

ધણી થવામાં વાંધો નથી, પણ ધણીપણું બજાવવામાં વાંધો છે. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

ક્રોધ મનુષ્ય નો મોટો શત્રુ છે.🌹🌹🙏🌹🌹🙂

drbhattdamayntih1903

पावसाळ्यात काहीतरी खमंग
आणि मस्त

पनीर सँडविच भजी

भज्याचे तिखट मीठ ओवा व थोडेसे मोहन घालुन पातळसर पीठ भिजवणे
पनीरचे लांबट पातळ तुकडे करुन
मध्ये नारळाची घट्टसर हिरवी चटणी
भरणे
सँडविच प्रमाणे तयार करून
गरम तेलात तळून घेणे
बाहेरून कुरकुरीत
आणि आतून मऊसर
खमंग आणि खुसखुशीत 💗

jayvrishaligmailcom