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बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -288

विषय-पुरखा (पितर)
दिनांक 03-10-2026

संयोजक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

प्रविष्ठियां-

1
पुरखा आऐ डेवड़ें,उनें न समजौ काग।
दूद भात कौ भोग दो,खुलजें सबके भाग।।
-अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
2
अपनइं पुरखा पूजवे ,कउअन पानी देत।
नइं जियत दईं गांकरें, मरें लगा रय हेत।।
-सियाराम अहिरवार ,टीकमगढ़
3
को कत है पानी दएँ, पुरखा मुक्ती पात।
जो लरकन के राज में,कलप-कलप मर जात।।
-अमर सिंह राय नौगांव
4
पुरखा जिउँ से यादकर,देवँ उनै सम्मान।
मान उनै आदर्श भी,करो अरघ जलदान।।
-सुभाष सिंघई,जतारा
5
जिंदा भूकन मार कें,जिनखों रोज सतात।
उनखों पुरखा जान कें,पूड़ी खीर ख्वात।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
6
सबके पुरखा खुश रहें,खुशी रहे परिवार।
परमपिता परमातमा,बिनती बारमबार।।
-वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
7
पुरखा कुल की नींव हैं,संतानन की आस।
उनकी पावन याद से,भरत हिय में प्रकाश॥
-महावीर पूर्णिया
8
सौप वसीयत हैं गये, पुरखा सुत के नाम।
पितृ मिलन कर श्राद्ध से,विधिवत करें प्रणाम।।
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया,महाराजपुर
9
मंदिर बन ग‌व राम कौ,पुरखा सुन हरसांय।
मंगल गायन कर रहे,और सुमन बरसांय।।
-भगवान सिंह लोधी 'अनुरागी',हटा
10
पुरखा आये दूर से,दैबे ऐन अशीष।
इनकी सेवा से मिलत,किरपा श्री जगदीश।।
-विशाल कड़ा'मांझी',बडोराघाट
11
पुरखन खोँ पानी दियौ,जीकेँ जैसे होयँ ।
जियत करौ तुम जानियौ, मरें न प्यासें रोयँ ।।
-प्रमोद मिश्रा,बल्देवगढ़
12
कुल के पालनहार हैं,करौ सदां सम्मान।
पुरखा दें आशीष तौ, हो जैहै कल्यान।।
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
13
अपनें पुरखों की करौ,रीत नीत कौ ध्यान।
उनके पुन्न प्रताप सें,हम सबकौ कल्यान।।
-देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
14
जबसें जे पुरखा लगे,रोज कड़त कागौर।
माल सूंट रय हूंक कें,हतो न जिनकौ ठौर।।
-प्रभुदयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
15
पितरन पानूँ देत हैं, और कराबें भोज।
देत दुआ परिवार खों,खूब उजरबै जोत।।
-रामानन्द पाठक नन्द,नैगुवां
16
जीते जी तरसात है,पानी खों औलाद।
छप्पन बिंजन देत हैं,पुरखा बनबे बाद।।
-तरुणा खरे'तनु',जबलपुर
17
भूल-बिसर नैं भूलियौ,पुरखन कौ यैसान।
पुरखन सें हम-आप हैं,पुरखा हैं भगवान।।
-गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी
18
भौतइ पावन दिन करय,क्वांर मास के खास।
इनमें पुरखा आत हैं,ले पानी की आस॥
-सुदेश सोनी,ललितपुर
19
पुरखा पूजें पक्ष में, कागोरा नित देत।
पुरखन के आशीष सें,साधें सबको हेत।।
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
20
पुरखा अपनें देवता, हम हैं उनके अंश।
उनके पुन्न प्रताप सै, हरौ भरौ सब बंश।।
-एस आर सरल,टीकमगढ़
21
अपनै अनुभौ ज्ञान सें,पुरखा कै गय बात।
ब्याद बिबूचन आँय तौ,हिम्मत सैं द्यो मात।।
-विद्या चौहान,फरीदाबाद
© संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

rajeevnamdeoranalidhori247627

क्यों बैठते हो मेरी शायरी की छाँव मे________
क्या तुम भी मोहब्बत की धूप में जले हो मेरी तरह______!!

narayanmahajan.307843

होते हैं और भी खूबसूरत #नजारे बहुत …..मगर
#तुम सामने बैठे रहो उससे हसीन कुछ भी नहीं...!!!💞

narayanmahajan.307843

"दिन का शोर रात में नहीं, दिल में उतरता है, इसीलिए रात भारी लगती है।"
Dharmendra Kumar

erdharmendra

प्रेम का चक्रव्युह तोड़ना संभव नहीं है..!

इसमें फसने वाला हर शख्स अभिमन्यु होता है..!!

narayanmahajan.307843

तुमसे करीब और कौन है मेरे
तुम छू दो तो रूह तक को दवा मिल जाती है💞

narayanmahajan.307843

KL Rahul"s129 makes India to reach 351 against West Indies

kattupayas.101947

📚 “समय का साम्राज्य” — SEO Package

🔥 SEO Title

समय का साम्राज्य | The Empire of Time | Sci-Fi Mystery Thriller Novel | राजु कुमार चौधरी

📝 SEO Description

समय का साम्राज्य एक मौलिक Sci-Fi Mystery Thriller Novel है, जहाँ समय ही सबसे बड़ी मुद्रा है और इंसान की जिंदगी उसके Life-Code से तय होती है।

22 वर्षीय आरव के जीवन-कोड में अचानक दिखाई देता है—

9,999,999 YEARS

लेकिन यह सिर्फ एक असंभव संख्या नहीं है। इसके पीछे छिपा है Chronos Corporation, आरव के रहस्यमयी पिता का अतीत, एक गुप्त प्रयोग और ऐसी शक्ति जो पूरी मानव सभ्यता का भविष्य बदल सकती है।

आरव और रहस्यमयी यशिका इस रहस्य की तलाश में एक ऐसी दुनिया में प्रवेश करते हैं जहाँ जीवन खरीदा जा सकता है, समय चुराया जा सकता है और भविष्य को बदला जा सकता है।

⏳ क्या आरव अपने Life-Code का रहस्य जान पाएगा?
💫 यशिका वास्तव में कौन है?
🏢 Chronos Corporation क्या छिपा रही है?
🌌 और क्या इंसान अपने समय का खुद मालिक बन सकता है?

लेखक: राजु कुमार चौधरी
Genre: Sci-Fi • Mystery • Thriller • Romance • Drama

🔑 Primary Keywords

समय का साम्राज्य
The Empire of Time
Hindi Sci Fi Novel
Hindi Science Fiction Story
Hindi Mystery Novel
Hindi Thriller Novel
Sci Fi Mystery Story
Time Travel Hindi Novel
Future World Hindi Story
Raj Kumar Chaudhary Novel

🏷️ Hashtags

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📌 Short Promo

> “समय ही जीवन है… और अब समय आरव के हाथ में है।”

एक रहस्य।
एक लड़की।
एक साम्राज्य।
और 9,999,999 वर्षों का जीवन।

समय का साम्राज्य — कहानी शुरू होती है अब।

rajukumarchaudhary502010

🎬 In Time (2011) — पूरी कहानी का विवरण

स्पॉइलर अलर्ट: नीचे फिल्म की शुरुआत से अंत तक कहानी बताई गई है।

1. ⏳ ऐसी दुनिया जहाँ समय ही पैसा है

फिल्म की दुनिया में इंसानों की उम्र 25 साल तक बढ़ती है। उसके बाद शरीर बूढ़ा होना बंद हो जाता है। लेकिन 25 के बाद व्यक्ति के शरीर में एक डिजिटल टाइम-काउंटर चलता रहता है।

लोगों को काम करके समय कमाना पड़ता है।

खाना = कुछ मिनट/घंटे

यात्रा = समय

घर का किराया = समय

सामान = समय


समय खत्म हुआ तो व्यक्ति की जिंदगी भी खत्म हो जाती है।

समाज दो हिस्सों में बंटा है—बहुत अमीर लोगों के पास सैकड़ों-हजारों साल, जबकि गरीब इलाकों में लोग रोज कुछ घंटे या दिन बचाने के लिए संघर्ष करते हैं।

2. Will Salas की जिंदगी

Will Salas गरीब इलाके में अपनी माँ के साथ रहता है। उसके पास हमेशा बहुत कम समय होता है।

एक दिन Will की मुलाकात एक अमीर आदमी Henry Hamilton से होती है। Hamilton के पास लगभग एक सदी से भी ज्यादा समय है, लेकिन वह इस व्यवस्था से परेशान है।

वह Will को बताता है कि असल समस्या समय की कमी नहीं है—दुनिया में पर्याप्त समय मौजूद है, लेकिन उसे अमीर लोगों ने अपने पास जमा कर रखा है।

Hamilton अपने टाइम-काउंटर का लगभग एक सदी का समय Will को दे देता है और खुद अपनी जिंदगी समाप्त होने देता है।

Will को समझ नहीं आता कि Hamilton ने ऐसा क्यों किया।

3. Will पर हत्या का आरोप

Hamilton की मौत के बाद पुलिस को शक होता है कि Will ने उसका समय चुराया और उसे मार दिया।

टाइमकीपर पुलिस का अधिकारी Raymond Leon Will का पीछा शुरू करता है।

Will अपनी माँ से मिलने जाता है, लेकिन उसके पास समय की एक समस्या होती है। वह अपनी माँ को बचाने की कोशिश करता है, मगर उसकी माँ के पास समय समाप्त हो जाता है।

यह घटना Will को अंदर से बदल देती है।

4. Will अमीर इलाके में पहुँचता है

Will Hamilton से मिले समय की मदद से अमीर लोगों के क्षेत्र New Greenwich में पहुँचता है।

यहाँ लोगों के पास सैकड़ों साल हैं। वे आराम से रहते हैं और समय की चिंता नहीं करते।

Will एक कैसीनो में जाता है और वहाँ बहुत समय जीतता है। यहीं उसकी मुलाकात Sylvia Weis से होती है।

Sylvia बेहद अमीर परिवार से है और उसके पिता Philippe Weis के पास बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति है।

5. Will और Sylvia

Will और Sylvia करीब आते हैं। लेकिन Will देखता है कि अमीर समाज के लोग गरीबों की वास्तविक स्थिति से लगभग पूरी तरह कटे हुए हैं।

Will अंततः Sylvia को समझाता है कि बाहर के लोग रोज समय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इसी दौरान पुलिस Will को पकड़ने की कोशिश करती है।

6. 🚨 Will और Sylvia का अपहरण

एक घटना के बाद Will और Sylvia अपराधियों के हाथ लग जाते हैं। लेकिन Will स्थिति को अपने पक्ष में बदल देता है।

वह Sylvia को लेकर New Greenwich से बाहर निकलता है।

अब दोनों के पास बहुत ज्यादा समय है—और वे फैसला करते हैं कि इस समय को सिर्फ अपने लिए नहीं रखेंगे।

7. 💰 व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई

Will और Sylvia बैंकों और समय के भंडारों को निशाना बनाते हैं।

वे अमीरों से समय लेकर गरीब लोगों में बाँटने लगते हैं।

इससे व्यवस्था में बड़ी समस्या पैदा होती है।

लेकिन फिल्म एक महत्वपूर्ण बात दिखाती है: केवल समय बाँट देना पर्याप्त नहीं है। अगर पूरी आर्थिक व्यवस्था और कीमतें उसी तरह बनी रहें, तो समय का वितरण बदलने से भी नए असंतुलन पैदा हो सकते हैं।

8. Sylvia का बदलाव

Sylvia शुरुआत में अमीर परिवार की बेटी है, लेकिन Will के साथ रहने के बाद उसका नजरिया बदल जाता है।

वह अपने परिवार की संपत्ति और व्यवस्था पर सवाल उठाती है।

आखिरकार Sylvia भी Will के साथ मिलकर समय की असमानता को चुनौती देती है।

9. Raymond Leon और Will

Raymond Leon लगातार Will का पीछा करता है।

लेकिन धीरे-धीरे वह भी समझने लगता है कि समस्या केवल Will नहीं है। जिस व्यवस्था की वह रक्षा कर रहा है, उसमें गरीब लोग लगातार समय की कमी से जूझ रहे हैं।

Will और Leon के बीच अंतिम टकराव में दोनों के पास बहुत कम समय बचता है।

10. 🏦 अंतिम योजना

Will और Sylvia एक बड़े समय-भंडार/बैंक से भारी मात्रा में समय हासिल करने की योजना बनाते हैं।

वे समय को गरीब लोगों तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

इससे अमीरों के पास जमा विशाल समय धीरे-धीरे समाज के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है।

11. 🎬 अंत

फिल्म के अंत में Will और Sylvia अपनी लड़ाई जारी रखते हैं।

समाज की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह उसी क्षण समाप्त नहीं होती, लेकिन समय के केंद्रीकरण की व्यवस्था को बड़ा झटका लगता है।

फिल्म का अंतिम विचार यही है:

> जब समय ही जिंदगी है, तो किसी व्यक्ति के पास हजारों साल और दूसरे के पास केवल कुछ घंटे क्यों होने चाहिए?



🧠 फिल्म का मुख्य संदेश

In Time वास्तव में सिर्फ टाइम-ट्रavel या sci-fi फिल्म नहीं है। यह एक काल्पनिक दुनिया के जरिए धन की असमानता, गरीबी, वर्ग-विभाजन और संसाधनों के केंद्रीकरण पर सवाल उठाती है।

समय = जीवन
समय = पैसा
इसलिए फिल्म में किसी से समय छीनना या देना लगभग उसकी जिंदगी छीनने या देने के बराबर है

rajukumarchaudhary502010

तेरा दर हो,, मेरा सर हो,,
ये सिलसिला हररोज हो,।।
🙏

nandiv

Good afternoon

erdharmendra

❤️ प्रेम एक तपस्या ❤️

प्रेम सिर्फ़ एक शब्द नहीं,
प्रेम एक एहसास है,
जो आँखों से नहीं,
दिल से महसूस होता है।

प्रेम सिर्फ़ पास रहने का नाम नहीं,
प्रेम तो दूर रहकर भी
किसी की खुशी की दुआ करने का नाम है।

प्रेम सिर्फ़ हाथ पकड़ना नहीं,
कभी-कभी हाथ छोड़कर भी
किसी को उसकी मंज़िल तक पहुँचाना है।

मैंने प्रेम से पूछा—
“तुम इतने शांत क्यों हो?”

प्रेम मुस्कुराकर बोला—
“क्योंकि सच्चे प्रेम को
हर बात कहने की जरूरत नहीं होती।”

मैंने फिर पूछा—
“तुम्हें बदले में क्या चाहिए?”

प्रेम ने कहा—
“कुछ भी नहीं।”

मैंने कहा—
“फिर तुम देते क्यों हो?”

प्रेम बोला—
“क्योंकि देना ही मेरी प्रकृति है।”

यही तो प्रेम है…

जहाँ उम्मीद कम,
विश्वास ज्यादा होता है।

जहाँ अधिकार कम,
सम्मान ज्यादा होता है।

जहाँ शिकायत कम,
समझ ज्यादा होती है।

जहाँ शब्द कम,
भावनाएँ ज्यादा होती हैं।

प्रेम वह नहीं
जो कहे—

“तुम सिर्फ़ मेरे हो।”

प्रेम तो वह है
जो कहे—

“तुम अपने सपनों के हो,
अपने जीवन के हो,
और मैं तुम्हारी खुशी का सम्मान करता हूँ।”

अगर तुम्हारे सपनों की उड़ान
मुझसे दूर जाती है,
तो भी मैं तुम्हारे पंख नहीं काटूँगा।

मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं,
मैं तुम्हें डराऊँगा नहीं,
मैं तुम्हारे रास्ते में दीवार नहीं बनूँगा।

मैं बस इतना कहूँगा—

जाओ…
अपने सपनों को पूरा करो।
मैं तुम्हारी सफलता की
दूर से भी प्रार्थना करूँगा।

कभी-कभी प्रेम
पास रहकर भी अधूरा होता है,

और कभी-कभी प्रेम
दूर रहकर भी पूरा हो जाता है।

क्योंकि दूरी
दिलों को अलग कर सकती है,
लेकिन सच्ची भावना को नहीं।

समय बदल सकता है,
पर सच्ची यादों को नहीं।

रास्ते बदल सकते हैं,
पर सच्ची दुआओं को नहीं।

लोग बदल सकते हैं,
पर सच्चा प्रेम
अपने भीतर एक निशान छोड़ जाता है।

प्रेम में त्याग होता है,
लेकिन त्याग का प्रदर्शन नहीं होता।

प्रेम में दर्द होता है,
लेकिन दर्द की शिकायत नहीं होती।

प्रेम में इंतज़ार होता है,
लेकिन इंतज़ार का हिसाब नहीं होता।

प्रेम में आँसू होते हैं,
लेकिन आँसुओं का सौदा नहीं होता।

कभी किसी के लिए
अपने सपनों को पीछे करना पड़ता है,

कभी किसी के सपनों के लिए
अपने कदम पीछे हटाने पड़ते हैं।

और कभी-कभी
सबसे बड़ा प्रेम यही होता है—

किसी को आज़ाद कर देना।

उसके बाद भी
उसके लिए अच्छा सोचना।

उसके बाद भी
उसकी खुशी की कामना करना।

उसके बाद भी
उसकी सफलता पर मुस्कुराना।

यही प्रेम की ऊँचाई है।

क्योंकि प्रेम कहता है—

“अगर तुम मेरे साथ रहकर खुश हो,
तो मैं तुम्हारा साथ दूँगा।

और अगर मेरे बिना रहकर
तुम ज्यादा खुश हो,
तो मैं तुम्हारी खुशी को
अपनी खुशी मान लूँगा।”

यह आसान नहीं होता।

इसके लिए बहुत धैर्य चाहिए।

बहुत विश्वास चाहिए।

बहुत बड़ा दिल चाहिए।

और शायद इसी कारण
प्रेम को तपस्या कहा जाता है।

तपस्या में इंसान
अपने भीतर के स्वार्थ को जलाता है।

प्रेम में भी
इंसान अपने अहंकार को छोड़ना सीखता है।

तपस्या में धैर्य चाहिए।

प्रेम में भी धैर्य चाहिए।

तपस्या में विश्वास चाहिए।

प्रेम में भी विश्वास चाहिए।

तपस्या में समर्पण चाहिए।

प्रेम में भी समर्पण चाहिए।

इसलिए…

प्रेम केवल पाने की इच्छा नहीं,
प्रेम स्वयं को देने की साधना है।

अगर कोई तुम्हारे जीवन में आया
और तुम्हें बेहतर इंसान बना गया,

तो उस रिश्ते को
सिर्फ़ इसलिए छोटा मत समझना
कि वह हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहा।

कुछ लोग जीवन में
हमेशा साथ चलने के लिए नहीं आते।

कुछ लोग
हमें रास्ता दिखाने आते हैं।

कुछ लोग
हमारे भीतर छिपी ताकत जगाने आते हैं।

कुछ लोग
हमें सिखाने आते हैं कि
सच्चा प्रेम क्या होता है।

और कुछ लोग
हमारी कहानी का हिस्सा बनकर
हमारे दिल में हमेशा के लिए रह जाते हैं।

उनका साथ भले ही खत्म हो जाए,
लेकिन उनकी दी हुई सीख
कभी खत्म नहीं होती।

उनकी याद
कभी-कभी आँखों में आँसू लाती है,

तो कभी चेहरे पर मुस्कान।

और मन चुपचाप कहता है—

“तुम जहाँ भी हो,
खुश रहो।”

यही तो प्रेम है।

न कोई शिकायत।

न कोई मांग।

न कोई हिसाब।

बस एक दुआ…

एक विश्वास…

एक पवित्र एहसास…

और एक ऐसी भावना
जो समय के साथ और गहरी होती जाती है।

कभी प्रेम मंदिर की घंटी जैसा होता है,
जिसकी आवाज़ दूर तक जाती है।

कभी प्रेम दीपक की लौ जैसा होता है,
जो खुद जलकर
दूसरों को रोशनी देता है।

कभी प्रेम नदी जैसा होता है,
जो बिना किसी भेदभाव के
सबको जीवन देता है।

और कभी प्रेम उस प्रार्थना जैसा होता है
जो होंठों पर नहीं आती,
लेकिन दिल के भीतर
हर पल चलती रहती है।

इसलिए अगर तुम प्रेम करो,
तो सिर्फ़ पाने के लिए मत करना।

किसी की आत्मा को समझने के लिए करना।

किसी के सपनों को सम्मान देने के लिए करना।

किसी के कठिन समय में
उसका हाथ थामने के लिए करना।

और जब समय आए
तो उसे उड़ने देने के लिए करना।

क्योंकि…

जिस प्रेम में स्वतंत्रता है,
वही सच्चा प्रेम है।

जिस प्रेम में सम्मान है,
वही सुंदर प्रेम है।

जिस प्रेम में विश्वास है,
वही मजबूत प्रेम है।

जिस प्रेम में त्याग है,
वही पवित्र प्रेम है।

और जिस प्रेम में
बिना किसी स्वार्थ के
किसी की खुशी की दुआ हो—

वही प्रेम एक तपस्या है।

❤️
प्रेम मिला तो आभार,
प्रेम छूटा तो स्वीकार,
प्रेम रहा तो विश्वास,
और प्रेम दूर हुआ तो भी
दिल से निकले बस यही शब्द—

“तुम खुश रहो…
यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है।”

क्योंकि सच्चा प्रेम
कभी समाप्त नहीं होता।

वह रूप बदल सकता है,
रास्ता बदल सकता है,
दूरी बदल सकती है,

लेकिन दिल में
उसकी पवित्रता बनी रहती है।

और अंत में…

प्रेम कहानी नहीं,
प्रेम एक साधना है।

प्रेम भावना नहीं,
प्रेम एक समर्पण है।

प्रेम अधिकार नहीं,
प्रेम सम्मान है।

प्रेम स्वार्थ नहीं,
प्रेम त्याग है।

और सबसे बढ़कर—

❤️ प्रेम एक तपस्या है। ❤

skptech

Nithinkumar J
Munthirivalliyude Koottukar

nithinkumarj640200

Kajal & Your Eyes: Beauty Should Not Come at the Cost of Eye Health
Kajal has been a part of everyday beauty routines for generations. But when it comes to our eyes, what we apply and how we apply it matters.
Kajal applied very close to the inner eyelid or waterline can come into contact with the tear film and the delicate surface of the eye. Sharing kajal, using old or contaminated products, or applying it with unclean hands can also increase the risk of irritation or infection.
Dr. Anchal Gupta’s Message
“Our eyes are delicate, and even everyday cosmetic habits deserve attention. Kajal can be part of your beauty routine, but eye hygiene should always come first. Choose safe products, avoid sharing eye cosmetics and never compromise on cleanliness.”
A few simple habits can help protect your eyes:
• Keep your hands clean before applying eye makeup.
• Avoid sharing kajal or other eye cosmetics.
• Do not use products that are old, contaminated or causing irritation.
• Avoid applying cosmetics directly onto the eye surface.
• Remove eye makeup gently before going to bed.
• If you experience persistent redness, pain, discharge or blurred vision, consult an eye-care professional.
Beautiful eyes deserve healthy eyes too.
— Dr. Anchal Gupta

bhumikabhati.662947

Do You Know that give what you would want to receive. That is the principle of karma. Karma means action. What is reaction? That is the echo. All reactions are like 'echoes' of your previous actions; the fruits will be inevitable.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/XREr1wij

#karma #spirituality #karma #spirituality #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताए ✍️
https://youtube.com/shorts/fAidNQhoTYM?si=VMa9aVsxdPdmagHO

mamtagirishtrivedi740648

வண்ணங்களை நெய்த நெசவாளி

பொன்னிறக் குருவியே…
நெசவுக்காரக் குருவியே…
சின்னச் சிட்டுக் குருவியே!

உன் உடலெங்கும்
மஞ்சளும் பொன்னும் கலந்து,
உன் சிறகுகளிலே
கருப்பும் மரூனும் கலந்து,
எந்தத் தறியில் நெய்தான்
உன்னை இந்த இயற்கை நெசவாளி?

மஞ்சளையும் தங்கத்தையும்
கலந்து உன் உடலில் பூசியவன் யார்?

கருப்பு நிறத்தை
உன் சிறகுகளில் அள்ளித் தெளித்து,
அதற்கிடையே
மரூன் நிறத்தை
மெல்லப் பதித்தவன் யார்?

உன் கருமை நிறத் தலையும்,
அதன் பின்னால் தெரியும்
பழுப்பு நிறத் தழலும்,
உன் சிறகுகளில் ஓடும்
அந்த அழகிய கோடுகளும்…

அதற்கெல்லாம் மேலாக,
கருமை நிற முகத்திற்குள்
ஆரஞ்சு வளையம் சூழ்ந்த
அந்தக் கருப்பு மணிக் கண்கள்!

அடடா…
இத்தனை வண்ணங்களை
ஒரே உடலில் வைத்துக்கொண்டு
எப்படி இப்படி
அழகாக நின்றுகொண்டிருக்கிறாய்?

உன் சாம்பல் நிற அலகையும்
மறந்துவிட முடியுமா?

உன்னைப் பார்த்தபோது
எனக்குள் ஒரு சிறிய பொறாமை…

“இந்த வண்ணக் கலவையின்
ரகசிய முகவரி மட்டும்
எனக்குச் சொல்லிவிடு!”

என்ன வண்ணத் தறியில்
என்ன நூல்களைக் கொண்டு
உன்னை இப்படி நெய்தாய் என்று
அந்த இயற்கை நெசவாளியிடம்
கேட்டுச் சொல்லிவிடு செல்லமே!

மஞ்சளையும் பொன்னையும்,
கருப்பையும் மரூனையும்
இவ்வளவு அழகாகக் கலந்துவைத்த
அந்தக் கலைஞனின்
ரகசியம் மட்டும்
எனக்கும் கொஞ்சம் கற்றுக்கொடு!

உன்னைப் போலப் பறக்க முடியாவிட்டாலும்,
உன்னைப் போல
வண்ணங்களைச் சுமந்துகொண்டு
அழகாக வாழக் கற்றுக்கொள்கிறேன்,
என் பொன்னிறச் செல்லக் குருவியே!

ramakrishnananantha614311

வண்ணச் சிட்டு — Red Fody.

வர்ணம் தீட்டிய கலைஞன்.

சின்னக் குருவியே…
செல்லக் குருவியே…
சிங்காரச் சிட்டுக்குருவியே!
உன் உடலிலே
ஆரஞ்சு வண்ணம் தீட்டி,
உன் சிறகுகளிலே
மரூன் நிறத் தோகை விரித்து,
உன்னை இப்படியொரு
வண்ண ஓவியமாக்கிய
அந்தக் கலைஞன் யார்?
உன் செம்மை உடலுக்கு
மரூன் நிறச் சிறகுகளைச் சேர்த்து,
வானத்தின் வண்ணங்களையே
உன்னிடம் கடன் வாங்கி
ஓவியம் தீட்டினானோ?
உன் கருமை நிறக் கண்களில்
கருமணியைப் பதித்து,
அதன் நடுவே
ஒரு துளி ஒளியை வைத்தவன் யார்?
உன் சாம்பல் நிறச் சிறிய அலகும்,
அதன் ஓரங்களில் தெரியும்
அந்தக் கம்பீரமும் கூட
அவனுடைய தூரிகைத் தீட்டல்தானோ?
உன்னைப் பார்க்கப் பார்க்க
எனக்கே கொஞ்சம் பொறாமைதான்…
மேக்கப் என்று மனிதர்கள் சொல்லும்
அழகுக் கலையைவிட,
இயற்கையின் அழகுக் கலஞ்சியத்தில்
உனக்குக் கிடைத்திருப்பது
எவ்வளவு பெரிது!
என்னிடமும் கொஞ்சம்
அந்த வண்ணங்களைத் தந்து விடு செல்லமே…
உன்னைப் போலப் பறக்க முடியாவிட்டாலும்,
உன்னைப் போல
வண்ணமாய் வாழவாவது
நானும் ஆசைப்படுகிறேன்!

ramakrishnananantha614311

સરળતા મૌનમાં છલકે છે,
શબ્દોની એને શું જરૂર?

હોય છે કશુંક ખાસ તો,
દેખાવની એને શું જરૂર?

સત્ય આંખોમાં ઝલકે છે,
વચનની એને શું જરૂર?

જે અંદર, એ જ બહાર હોય,
બનાવટની એને શું જરૂર?

મનોજ નાવડીયા

manojnavadiya7402

ज़ख्म हमारे कुरेदकर
अब तो नासूर बन गएँ है
ज़ख्मी हमको करनेवाले
आज बेकुसूर बन गएँ है

गजेंद्र कुडमाते

kudmate.gaju78gmail.com202313

"सूरज रोज़ नया नहीं होता, नज़रिया नया होता है।"

शुभप्रभात
Dharmendra Kumar

erdharmendra