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भाव-पुष्प


कुछ लोग प्रेम को परिभाषित करते हैं,
कुछ इस पर तर्क करते हैं।

प्रेम में तर्क नहीं होता,
इसमें कोई सवाल नहीं होता।

कुछ कहने के लिए जवाब नहीं होते,
मैं से हम तक, की राह का पता नहीं होता।

प्रेम जाना है तो करना होगा,
बिना प्रेम किए, क्या प्रेम समझाएंगे?
कहते हैं उसने हमें धोखा दिया,
हमने तो बड़ी शिद्दत से किया।

हमें पहले पता होता तो न करते,
न देते उनको अपना दिल।

आती है याद बाबा बुल्ले शाह,
इश्क शायरी में उन्होंने कहा है—
"ज़हर देख के पीता तो क्या पीता?
और इश्क देख के किया तो क्या किया?"

और इश्क कभी दुःख नहीं होता,
इश्क हार और जीत से फर्क नहीं पड़ता।

किसी शायर ने भी कहा है,

"इश्क में रंग से कोई फर्क नहीं पड़ता,
क्योंकि महफिल में हमने दूध से ज़्यादा चाय के दीवाने देखे हैं।"

कहने को बहुत कुछ,
फिर कहेंगे क्या आपने,
कभी न इश्क किया,
या समझकर या पढ़कर लिखा।

इस पर कहूंगी, हाँ इश्क किया,
उस सांवरे से, उस मुरली वाले से।

ये दिखावा नहीं, बचपन से है,
जब शायद इश्क का मतलब नहीं पता था।

और कृष्ण कभी उनको प्रेम करने वाले,
को सेवक या नौकर नहीं समझते।

वो उन्हें चाहने वाले को सखा, सखी और गोपी कहते हैं।

— काजल

vanshsingh118873

रात की छत, और ये ठंडी हवा का शोर,
बादलों के पीछे छुपा है जैसे मेरा ही कोई और दौर।
मैं खड़ा रहा आसमान को यूँ ताकता हुआ,
जैसे हर बादल मेरे दर्द को साथ ले जाता हुआ।
खामोशी भी आज कुछ ज्यादा बोल रही है,
दिल के अंदर की बेचैनी जैसे मुझसे ही पूछ रही है।
न सितारे पास आए, न चाँद ने कुछ कहा,
बस मैं और मेरा अकेलापन, रात भर रहा।
जो दिल में था, वो बादलों में खो दिया मैंने,
और कुछ इस तरह खुद को थोड़ा रो दिया मैंने।

brokenboy190253

वो प्रेम ही क्या...जो मेरे कान्हा से ना हों ..❤️

parmarsantok136152

“मौत का दूसरा नाम”

मौत का दूसरा नाम क्या है…?
शायद अँधेरा
वो जो रोशनी को निगल जाए
और दिल के भीतर
हर रास्ता बंद कर दे…

कभी कभी,
मौत इंतज़ार भी होती है
लंबा, सर्द, और बेरहम
वो जो जीते जी इंसान को
धीरे धीरे अंदर से खा जाता है…

कुछ लोग कहते हैं
मौत अंत है
पर मेरे लिए,
वो उन तमाम लम्हों का
आख़िरी हिसाब है
जिन्हें हमने जिया नहीं…
सिर्फ़ सहा है।

प्राची तंवर …….

prachitanwar111

“चाँद से मेरा रिश्ता”

मुझे आवारा कहते हैं सब
कि मैं रात भर
चाँद की चौखट पर सिर टिकाए बैठी रहती हूँ
उन्हें क्या पता
कि ख़ामोशी जब सीने से लगती है
तो कैसा मरहम बन जाती है
जब रात अपना सारा शोर समेट लेती है।

सारा आलम ख़्वाब में डूब जाता है,
मगर मेरे अंदर कोई दिया टिमटिमा उठता है
उस सिमटी हुई चाँदनी के साए तले…
जैसे मैं और चाँद
एक ही साँस में सदियों का सन्नाटा जीते हों,
एक ही ज़ख़्म पर उँगली फिराते हों,
एक ही भूल चुकी दुआएँ दोहराते हों।

उन्हें बावरा कह लेने दो
उन्हें क्या इल्म
कि कायनात कितनी रहमदिल हो जाती है
जब तुम्हारे टूटे हुए दिल की
तन्हा गवाही
सिर्फ़ एक चाँद देता है।

प्राची तंवर …..

prachitanwar111

तुम मेरे वो सितारे हो...
जिसे मैंने अपनी दुनिया के आसमान में कुछ ऐसे सजा रखा है,
कि चाहे दूरियाँ कितनी भी बढ़ जाएँ... तुम्हारी रोशनी और तुम्हारा नूर मेरे दिल तक हमेशा पहुँचता रहेगा।
कुछ लोग पास रहकर भी दूर होते हैं, और कुछ दूर होकर भी दिल की सबसे करीब जगह पर रहते हैं।

parmarsantok136152

एक लड़की अपनी अधूरी यादों के लिए
किसी को ढूंढती फिर रहा है
शेहरो शेहरो गलियों गलियों
उसकी आंखें एक जगह नहीं टिक रही
बस भटकती जा रही है
बेहती जा रही है


वो जिसे ढूंढ रहा है
वह उसे मिल नहीं रहा
कहीं भी नहीं
ना शहरों में ना गलियों में
ना गांव में ना चलती फिरती कहीं भी राहों में
कहां जाकर छिप है
उसे नहीं पता
बस वह पागलों की तरह से ढूंढ रही है





गीत निर्मोही बलिए

बावरी हो गई मैं
बीरहा बीरहा मारा फिरती
नैना बस तुमको निहारा करती



कहा कहा ना मैंने तुमको ढूंढा बलिए

तू है की बड़ी निर्मोही
कहां जा छुपा बलिए


नैना बस तुमको डगर डगर निहार करती
डगर डगर मटका कहीं ना तो मुझको मिला बलिए

तू है बड़ी निर्मोही बलिए
तू है बड़ी निर्मोही बलिए


हु हु हु हाआ। हाआ। हाआ


नैंन मोही बिरहा बिरहा मारे रोते।
नयनं सूख गई पनिया


मोहि कुछ नहीं भावे
जोगी रे तोहरे सुरतिया बिन
जागे नैन कटे रतिया याद करतो रहित तोहरे तिरत्या


हु। हु। हु हु। हु। हू 3




मैं तो भूली बीछरी यादों के सहारे
हाथों में बिखरे हुए लेकर लकीरों के सहारे


फिरता फिरता बंजारों की तरह
बिरहा मारे मारे विचारों की तरह
फिरता फिरता बंजारों की तरह
बिरहा मारे मारे बंजारों की तरह





हा। हा। हा।


बाबरी में इश्क के जोक ना जानू
बीना जाने बिना पहचाने सोची ना समझी में
पर गई उलझी सी नयनं हमें अपना नयनं मिला ते



रोई मैं बिना आंसू अंखियों से रोई मैं

मैं बाबरी
बिरहा बिरहा मारे फिरती
नैनो से तुमको नहारे फिरती

तू है कि बलिए निर्मोही
मिलता ही नहीं मुझको कहीं

हा। हा। हा।

कहां जा छिपा है मेरे निर्मोही बलिए





अल्फाज
जगह-जगह ढूंढा मैंने तुझे
पागलों की तरह ढूंढा
और ढूंढता रहा
तू निर्मोही मुझे कहीं ना मिला
शायद तुम्हें मुझे इस हाल में देखकर अच्छा लगता है




अगर मजा आ रहा है तो छिपकली देखा करो
और मुझे देखा करो तब तलक देखा करो
जब तलक मेरी बहेम टूट नहीं जाती
की मोहब्बत में मोहब्बत पागलों की तरह करना
मेरे हिस्से में आई
और यह हिस्सा तुम्हारे लिए कोई खास नहीं



उसे दिन से
मेरा घुटना मेरा मरना बस मेरी किस्मत है
जब नैंन तुम्हें देखकर
और कुछ देखना चाहा ही नहीं




अगर गीत आप सबको अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिया राइटर अभिनिशा 🦋❤️💯

abhinisha

“मुझसे नहीं होगा “……..
सबसे मज़बूत वो नहीं
जो कभी झुकते नहीं,
सबसे मज़बूत वो हैं
जो टूटते हुए भी
अपने टूटने को पहचान लेते हैं।

कठोर चेहरों के पीछे
अक्सर थके हुए कंधे छुपे होते हैं,
और जो थककर बैठना सीख ले,
वही सच में आगे चल पाता है।

अपनी पीड़ा को कहना कमज़ोरी नहीं,
अपने दर्द को बाँटना
ख़ुद से ईमानदारी है।
“अब मुझसे नहीं होगा”
यह हार नहीं,
यह इंसान होने की सबसे सच्ची आवाज़ है।

मेहनत ज़रूरी है,
पर याद रखना
मेहनत का बोझ
अगर साँस छीन ले,
तो वह कर्तव्य नहीं
सज़ा बन जाता है।

याद रखो,
तुम पुरुष हो,
पर उससे पहले इंसान हो।
तुम्हें रुकने की इजाज़त है,
रोने की इजाज़त है,
और हर बार सब कर पाने की
कोई शर्त नहीं है।
प्राची तंवर…….

prachitanwar111

આજે પણ હારેલી બાજી રમવાનું પસંદ કરું છું
કારણ કે
મને ખબર છે… ક્યારેક હારેલી બાજી જ જીતની સૌથી સુંદર કહાની લખે છે. ♡

mahinikalam

कुछ रिश्ते किस्मत से नहीं...दुआओं से मिलते हैं।

जिसे दिल ने अपना माना,उसके लिए लड़ना भी आता हैऔर उसके लिए दुआ करना भी।

मैंने प्रेम को कभी बंधन नहीं माना...क्योंकि सच्चा प्रेम वही हैजो अपनी मर्ज़ी से साथ रहे।

वो मेरी खुशी है,मेरा सुकून है,मेरी दुआओं का वो हिस्सा हैजिसे मैंने दिल से माँगा है।

और हाँ...मेरे प्यार की गहराई,मेरी खामोशी,मेरे तेवर और मेरी वफ़ा...हर कोई समझ नहीं सकता।

parmarsantok136152

चाहे कितनी भी कोशिश कर लो मुझसे दूर जाने की...
दिल का रिश्ता सिर्फ़ दूरी से खत्म नहीं होता।
मैं वो नहीं जो हालात देखकर पीछे हट जाए, मैं वो हूँ जो अपने प्रेम, अपने विश्वास और अपने सम्मान के साथ खड़ी रहती हूँ।
क्योंकि मैं सिर्फ़ किसी को चाहती नहीं... मैं अपने रिश्तों को निभाना जानती हूँ।

parmarsantok136152

गोरी सूरत पर घमंड करने वाली पापा की परियों देख लो, विश्व की सबसे महंगी मॉडल सबसे महंगी मॉडल !

anisroshan324329

https://tinyurl.com/4zm5ucbk

જોરદાર ક્વોલિટી 👌

ronakjoshi2191

क्या जीवन की भागदौड़, तनाव, असफलता, रिश्तों की उलझन और मन की बेचैनी ने आपको कभी यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर सच्चा समाधान कहाँ है? यह पुस्तक केवल गीता की व्याख्या नहीं, बल्कि आज के इंसान के जीवन का दर्पण है। इसमें हर अध्याय आपको स्वयं से मिलाने, सही दृष्टि देने और जीवन को नई दिशा में देखने का निमंत्रण देता है। यदि आप केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।

गीता: आज के इंसान के लिए

✍️ Shivraj Bhokare

shivrajbhokare342239

"ख़ुद को लिखूँगी" ✨

अगर लिख पाऊँ कुछ, तो मैं ख़ुद को लिखूँगी,
ख़ुद के सपने, अरमान, ख़्वाहिशें लिखूँगी…

थक गई हूँ औरों के ख़ातिर जीते-जीते,
अब सुकून भरी एक साँस ख़ुद को लिखूँगी…

लिखूँगी वो अँधेरी रातें, जिनमें रोई थी मैं,
और अब ख़ुद के लिए एक सुबह सूरज सी लिखूँगी…

अगर लिख पाऊँ कुछ, तो मैं ख़ुद को लिखूँगी।

लिखूँगी वो बंधन की बेड़ियाँ जो ज़माने ने लगाईं,
और ख़ुद के उड़ने को एक आसमान खुला सा लिखूँगी…

लिखूँगी वो खोया हुआ वजूद मेरा,
और अब ख़ुद की एक नई पहचान लिखूँगी…

अगर लिख पाऊँ कुछ, तो मैं ख़ुद को लिखूँगी…
प्राची तंवर …….

prachitanwar111

"नफ़रत बाँटने वाले इसलिए नहीं जीतते कि वे बहुत ताक़तवर हैं, बल्कि इसलिए जीतते हैं कि अच्छे लोग समय आने पर चुप रह जाते हैं।"

lukmankhan626159

Do you know that the prime reasons behind husband and wife causing hurt to each other through anger are expectations from each other, opinions and lack of understanding.

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dadabhagwan1150

भीड़ का हिस्सा बनने का कोई चाव नहीं,
सबको खुश कर पाऊँ, ऐसा मेरा स्वभाव नहीं।
दुनिया के तराजू में खुद को तौलने नहीं आए,
हम यहाँ किसी और की बोली बोलने नहीं आए।

ज़िंदगी जीने आए हैं, कोई जंग जीतने नहीं,
सपनों के रंगों से भरने आए हैं, यूँ ही बीतने नहीं।
साँसों की इस रवानी को खुद से सँवारना है,
हर एक लम्हे को जी भरकर निहारना है।

दूसरों की उम्मीदों की गठरी क्यों कंधों पर उठाएँ?
खुदा ने पंख दिए हैं, तो क्यों न खुलकर उड़ जाएँ?

सपनों के कुछ अधूरे पन्ने पूरे करने आए हैं,
हौसलों की स्याही से अपनी तकदीर लिखने आए हैं।
शिकायतें लाख करे ये ज़माना तो करने दो,
हवा का रुख चाहे जो हो, हमें बस उड़ने दो!

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काकडी ची तंबळी

🥬काकडीची तंबळी आणि भात

🥬तंबळी" हा एक पारंपरिक मराठी खाद्यपदार्थ आहे. विशेषतः, ती एक प्रकारची चटणी किंवा रस्सा आहे, जी नारळ, दही किंवा ताक आणि मसाल्यांपासून बनवतात. ती भातासोबत खाल्ली जाते. असे गुगल सांगते
कांदा, ओव्याची पाने, टोमॅटो असे अनेक पदार्थ वापरून करता येते
उन्हाळ्यात थंड आणि पचनास हलके असल्यामुळे तंबळी खूप खाल्ली जाते.
कर्नाटक आणि महाराष्ट्रात ती खूप लोकप्रिय आहे.
'तंबळी' भातासोबत एक उत्कृष्ट साइड डिश आहे.

🥬साहित्य
एक काकडी साले काढून फोडी करून
अर्धी वाटी ओले खोबरे
कोथिंबीर
एक मिरची
अर्धा इंच आले
मीठ चवीनुसार
लाल सुकी मिरची
कढीलिंब
जिरे हिंग
वाटीभर ताक
फोडणी साठी दोन मोठे चमचे तूप

🥬कृती
प्रथम काकडीच्या फोडी, खोवलेले खोबरे, आले, मिरची, मीठ व भरपूर कोथिंबीर घालून सरसरीत वाटण करून घेणे
वाटण एका भांड्यात काढून घेऊन
जेवढी घट्टसर तंबळी हवी असेल तितके ताक घालून मिसळून घेणे
एका कढल्यात तूप घालून
जिरे हिंग व कढीलिंब आणि लाल सुकी मिरची घालून फोडणी करून घेणे
ही फोडणी तंबळी वर ओतून परत एकदा तंबळी हलवून घेणे

🥬ही तंबळी भाता सोबत चांगली लागते
उन्हाळ्याच्या दिवसात फ्रीज मध्ये थंडगार करून खायला घेतल्यास आणखीन चविष्ट लागते😋

jayvrishaligmailcom

कौन सागम था जो ताजा ना था..

इतना गम मिलेगा अंदाजा न था.

आपकी झील सी आंखों का क्या कसूर..

डूबने वाले को ही गहराई का अंदाजा न था...

anisroshan324329

*Aakarshan hi Vinash"

arnagvanshi051673