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" એક બાપને પૂછો "

અધૂરાં સપનાંની વેદના, એક બાપને પૂછો,
સંતાનો પ્રત્યેની સંવેદના, એક બાપને પૂછો.

બે જોડી કપડાં ને પગમાં ફાટેલાં પગરખાં,
ઘટતી રોજ નવી ઘટના, એક બાપને પૂછો.

પોતાની ભૂખ છુપાવીને આખું ઘર જે પોષે,
ત્યાગની એ મૂક પ્રાર્થના, એક બાપને પૂછો.

કાળજા કેરો કટકો પણ જે દાનમાં આપી દે,
વિદાય વેળાની એ સાધના, એક બાપને પૂછો.

ઉંમર વટાવીને પણ જે અડીખમ ઊભો રહ્યો,
એ થાકેલા હૃદયની ઝંખના, એક બાપને પૂછો.

ખાલી ખીસ્સે રાખે જગ જીતાડવાની તાકાત,
"વ્યોમ" એ અમીર ભાવના, એક બાપને પૂછો.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

😅😅

premsolanki8638

🍃रव्याचे मेदू वडे

🍃साहित्य
एक वाटी जाड रवा
(इडली रवा सुध्दा वापरू शकता)

मीठ जिरे
मिरचीचे बारीक तुकडे

🍃कृती
प्रथम रवा भाजून घ्यावा
तीन वाट्या पाणी उकळत ठेवावे
पाण्यात चवीप्रमाणे मीठ
जीरे व बारीक मिरच्यांचे तुकडे घालावे
पाणी उकळताच त्यात रवा घालावा
व चांगला हलवुन घ्यावा
गुठळी होऊ देऊ नये

🍃नंतर त्यावर झाकण ठेवावे
पाच मिनिटे शिजून झाल्यावर
त्यातली वाफ मुरू द्यावी.

🍃पाच मिनिटानंतर झाकण काढून
गरम असतानाच हे मिश्रण चांगले मळून घ्यावे
व हातावर थापून त्याला मेदु वड्याचा आकार द्यावा

🍃कढईत तेल घालून
कडकडीत तापल्यावर गॅस मध्यम करावा
हे वडे दोन्हीं बाजूने कुरकुरीत तळुन घ्यावे
🍃
सोबत हिरवी चटणी

ओला नारळ ,हिरवी मिरची, कोथिंबीर, साखर जीरे ,मीठ घालून सरसरीत चटणी वाटावी

हे वडे छान कुरकुरीत होतात
आतून चांगले पदर सुटतात
अगदी चवीला उडीद वड्या प्रमाणे लागत नसले तरी एक वेगळा प्रकार म्हणून
कधीतरी करून पाहायला हरकत नाहीं 🍃

jayvrishaligmailcom

जन्मदिन मुबारक हो मेरी नन्ही सी काव्या... 🎂🤍
आज भी तुम्हारा जन्मदिन आता है, तो दिल तुम्हें उसी प्यार से याद करता है जैसे तुम मेरे पास थीं।
तुम मेरी ज़िंदगी का वो खूबसूरत हिस्सा हो, जिसे समय दूर तो कर सकता है, पर दिल से कभी नहीं निकाल सकता।
दुआ है जहाँ भी हो, खुश रहो, मुस्कुराती रहो...
मेरी बच्ची, तुम हमेशा मेरी दुआओं में और मेरे दिल में रहोगी।

parmarsantok136152

“बेटी “
जिसने जितना चाहा,
उतना मुझसे लिया गया,
और जब पहली बार
अपने लिए कुछ चाहा
तो वही चाह
मेरी सबसे बड़ी गलती बना दी गई।

देना मेरा फ़र्ज़ था,
माँगना मेरा गुनाह।

मैं पूछती हूँ
अपने लिए खड़ा होना
कब से बदतमीज़ी हो गया?
और “ना” कहना
कब से बदचलन होने की पहचान बन गया?

मेरी काबिलियत
चूल्हे की आँच पर परखी गई,
मेरे सपनों को
घर की दीवारों में
धीरे-धीरे गाड़ दिया गया।

हक़ की बात की
तो इज़्ज़त याद दिला दी गई,
जैसे इज़्ज़त
सिर्फ़ मेरी ज़िम्मेदारी हो,
और सहना
मेरी किस्मत।

यह समाज
बेटियों से पहले
उनकी आज़ादी छीन लेता है,
फिर कहता है
“हमने तुम्हें सब कुछ दिया।”

क्यों हर बार
इज़्ज़त के नाम पर
बेटियों को ही
कम समझा जाता है?
क्यों उनका चुप रहना संस्कार
और बोलना अपराध कहलाता है?

मैं बग़ावत नहीं लिख रही,
मैं बस वो सच लिख रही हूँ
जो हर बेटी
अपनी साँसों में दबा कर
ज़िंदगी जीती है।
प्राची तंवर

prachitanwar111

"Hum Yahi Hai"

arnagvanshi051673

આ જીવનને જેમ સમજવુ મુશ્કેલ છે
એવી તુ પણ છો તને હું ના સમજી શક્યો.
દેખાડો હતો તારી મુહબ્બતમાં અને ઝેર હતુ તારા દાંતમાં
તુ માશૂક નહી નાગણ હતી તને હું ના સમજી શક્યો.

amirali3796

ખુશીઓ સૌ સાથે વહેંચવાનો આનંદ અનુભવું છું.

મારું ત્રીજું પુસ્તક શોપિઝનની મદદથી આજરોજ પબ્લિશ થયું છે.

પુસ્તક મેળવવા માટેની લીંક આ રહી.

https://shopizen.app.link/ialuaoLE73b

આભાર 😊

kansaranamrata8gmail.com

मेरे लिटिल किड्स...
मेरे लड्डू...
मेरे कान्हा...
मेरे लिटिल हार्ट...
मेरे बच्चे...
मेरे क्यूटी पाई...
तुम सिर्फ़ मेरा प्रेम नहीं हो...
तुम वो सुकून हो जहाँ मेरा दिल ठहर जाता है।
तुम वो भरोसा हो जिसे मैं हर दुआ में संभालकर रखती हूँ।
प्रेम का सातवां वचन शायद यही है कि— हालात बदल जाएँ, रास्ते मुश्किल हो जाएँ, फिर भी दिल में एक-दूसरे के लिए जगह वही रहे।
मेरे हार्ट बीट...
तुम मेरी आदत नहीं, मेरी मुस्कान की वजह हो।

parmarsantok136152

Good night my little heart ❤️

parmarsantok136152

अगर प्रेम सिर्फ़ चाहत होता, तो शायद शब्दों में खत्म हो जाता...
पर तुम मेरे लिए सिर्फ़ प्रेम नहीं हो।
तुम मेरी दुआ, मेरा सुकून, मेरा विश्वास और मेरी मुस्कान की वजह हो।
कुछ रिश्ते साबित नहीं किए जाते... बस दिल से निभाए जाते हैं।

parmarsantok136152

आसमान
मुझे पसंद है
खुले आसमान को देखना,
उसके बदलते रंगों को महसूस करना।
सुबह
पानी-सा साफ़,
निश्छल, ठहरा हुआ।
आधा गुज़रा दिन
चमकता नीला,
उम्मीदों की तरह उजला।
ढलती शाम
कभी केसरिया,
कभी सुनहरी उदासी में लिपटी।
और रात
जब चाँद उतरता है,
तो अँधेरी चाँदनी में
ख़ामोश रौशनी बिखर जाती है।
पर इन सब से ज़्यादा
मुझे पसंद है ये जानना
कि इतने रंग बदलने के बाद भी
आसमान
सदियों से
एक ही जगह ठहरा है।
न भागता है,
न थकता है,
बस रहता है…
सब कुछ सहते हुए।
प्राची तंवर…..

prachitanwar111

बड़ा होने की जल्दी थी...

बड़ा होने की बहुत जल्दी थी बचपन में,

लगता था...

बस एक बार बड़े हो जाएँ,

फिर ज़िंदगी अपनी होगी।

न कोई डाँटेगा,

न पढ़ाई का डर होगा,

न सुबह-सुबह स्कूल जाने की जल्दी होगी।

सोचते थे...

जेब में पैसे होंगे,

दोस्त होंगे,

घूमेंगे,

जो मन करेगा वो करेंगे।

लेकिन...

किसे पता था,

बड़ा होने का मतलब

सिर्फ़ उम्र का बढ़ना नहीं होता।


---

जब स्कूल में था,

तो लगता था कॉलेज की ज़िंदगी सबसे खूबसूरत होगी।

नई दुनिया होगी,

नए दोस्त होंगे,

और मेरे पास भी एक Ranger साइकिल होगी।

जिसे चलाकर मैं पूरे शहर में घूमूँगा।

लेकिन कॉलेज आया...

और साइकिल नहीं आई।

कुछ सपने रास्ते में ही रह गए।


---

फिर सोचा...

कॉलेज खत्म होगा,

तो नौकरी मिलेगी।

अपनी कमाई होगी।

माँ-बाप को खुश रखूँगा।

घर की हालत बदल दूँगा।

लेकिन...

डिग्री हाथ में आई,

और नौकरी नहीं आई।

सपने फिर थोड़े छोटे करने पड़े।


---

फिर घर से दूर जाना पड़ा।

उन लोगों से दूर,

जिनके साथ बैठकर खाना खाता था।

जिनके साथ हँसता था।

जिनसे लड़ता था।

जिन्हें छोड़ने का कभी सोचा भी नहीं था।


---

अब कमरा है,

चार दीवारें हैं,

और एक मोबाइल है।

जिसमें घर की तस्वीरें हैं।

और उन्हीं तस्वीरों को देखकर

कभी-कभी आँखें भर जाती हैं।


---

बचपन में लगता था

पैसे होंगे तो खुश रहेंगे।

आज पैसे कमाने निकल पड़े हैं,

पर खुशी कहीं पीछे छूट गई है।


---

अब समझ आता है,

पापा इतने चुप क्यों रहते थे।

माँ रात को देर तक जागती क्यों थी।

घर चलाना कितना मुश्किल होता है।

और ज़िम्मेदारियाँ

कितनी भारी होती हैं।


---

बचपन में

बीस रुपये खो जाएँ,

तो पूरी दुनिया खत्म लगती थी।

आज हजारों खर्च हो जाते हैं,

फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है।


---

पहले दोस्त बिछड़ते थे,

तो रो लेते थे।

आज अपने बिछड़ जाते हैं,

और रोने का भी वक़्त नहीं मिलता।


---

बचपन में

जल्दी बड़ा होना चाहते थे।

आज दिल करता है

कोई वापस उस स्कूल की घंटी बजा दे।

कोई फिर से होमवर्क दे दे।

कोई फिर से कह दे—

"बेटा, अभी तुम छोटे हो..."


---

क्योंकि अब समझ आया है,

बड़ा होना कोई उपलब्धि नहीं थी।

बड़ा होना तो

धीरे-धीरे अपने सपनों का छोटा होते जाना था।


---

कुछ सपने पूरे नहीं हुए।

कुछ लोग साथ नहीं रहे।

कुछ रिश्ते छूट गए।

कुछ इच्छाएँ अधूरी रह गईं।


---

लेकिन फिर भी...

हर सुबह उठकर

हम मुस्कुरा देते हैं।

क्योंकि हम लड़के हैं।

हमें बचपन से सिखाया गया है—

दर्द छुपाना,

ज़िम्मेदारियाँ उठाना,

और चलते रहना।


---

और शायद...

हर लड़के की कहानी कहीं न कहीं

यही होती है।

बचपन में बड़ा होने का सपना,

और बड़े होकर...

बस थोड़ा सा बचपन ढूँढते रह जाना। 🖤🥀

— आकाश गुप्ता ✍️
Insta || witha_kash

brokenboy190253

IN GUJARATMITRA NEWSPAPER..

niraliipatel.127808

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी
ख्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल
किताबों में मिले...!! 🍁🍂

narayanmahajan.307843

"एक तस्वीर का सहारा है
वही ग़म है, वही गुजारा है
ये ग़लतफ़हमी खा गई हमको
हमको लगता था, वो हमारा है ..!!

anisroshan324329

ડોક્ટરની ડાયરી..
ડૉ. શરદ ઠાકર..

ઘણા બધા પોતાના અને બીજા ડૉક્ટરના...
જીવનમાં બનેલા ઘટનાના અનુભવો
રજૂ કરતી ખૂબ જ સુંદર બુક છે...
જો કે ઘણી બુકો મે આ લેખકની વાચી છે.
એમ મને માણસો કરતા બુકો સાથે વધુ લગાવ છે...
સારા માણસો મને મળ્યા નહીં...
તો સારી બુકો સાથે મારી દોસ્તી છે..
મારે ધણી બધી વાર કોઈની જરૂર હોય ..ને...
ત્યારે કોઈ વ્યક્તિ કરતા બુક મારી નજીક હોય છે..
તે પણ ઘણા વર્ષોથી..
મને બુક સમજાવે છે..
ધણી બધી વાતો..☺️

chiragvora055249

🫵

shivrajbhokare342239

"Sirf tum aapne"

arnagvanshi051673

📚 Vedanta Life – Agyat Agyani (@bhutaji)
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मात्र 1 वर्ष (12 मास) की यात्रा में —
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यह उपलब्धि किसी बड़े प्रकाशन, विज्ञापन या प्रचार अभियान का परिणाम नहीं, बल्कि निरंतर चिंतन, लेखन और पाठकों के प्रेम का प्रतिफल है।
"ऋग्वेद, उपनिषद और गीता ज्ञान के ग्रंथ नहीं, चेतना के दर्पण हैं; उनमें व्यक्ति शास्त्र को नहीं, स्वयं को पढ़ता है।"
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— अज्ञात अज्ञानी (Agyat Agyani)
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Happy Father's Day!

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dadabhagwan1150

तमाशा ख़त्म हुआ,
तो जेबें टटोलीं मैंने

किताब-ए-उम्र बड़े चाव से
खोलीं मैंने

दुकान-ए-वक़्त पे
इक सख़्त सौदा कर आया

जो असल था, वो बहा आया,
जो नक़ल था, ले आया

anisroshan324329

तुम्हारा ज़िक्र हो और मौसम ख़ामोश रहे,
इतनी बेवफ़ाई तो बादल भी नहीं करते।

anisroshan324329

अब तुम से मिलना नहीं है
तुम्हे भूलना है

anisroshan324329