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शीर्षक: 🌍 क्या आपकी शिक्षा आपको सिर्फ 'डिग्री' दे रही है या 'नज़रिया' भी?
हम अक्सर सोचते हैं कि असली सीख सिर्फ स्कूल-कॉलेज की बंद कक्षाओं या भारी-भरकम किताबों में मिलती है। लेकिन क्या कभी आपने उड़ते हुए हवाई जहाज़ से भूगोल को जी उठते देखा है? या पहाड़ों की स्थिरता में जीवन का धैर्य सीखा है?
लेखक धर्मेंद्र कुमार की वैचारिक और जीवन को एक नया नज़रिया देने वाली पुस्तक "घुमक्कड़ जिज्ञासा" (यात्रा, जिज्ञासा और सीखने की जीवन-शैली) अब सीधे मातृभारती (Matrubharti) ऐप पर लाइव हो चुकी है!
✨ इस पुस्तक में आपको मिलेगा:

* किताबों से अनुभव तक का सफर: केरल के बैकवॉटर, कोरल रीफ्स और राम सेतु के जरिए विज्ञान और भूगोल का व्यावहारिक रूप।
* नॉर्थ-ईस्ट (Sikkim & Meghalaya) का अद्भुत सच: भारत के उन राज्यों की खूबसूरत व्यवस्था, कड़े नियम और लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ता उनका प्रगतिशील माइंडसेट, जिसकी तुलना अक्सर हम विदेशों से करते हैं।
* एक शांत आत्म-मंथन: अपने 'कंफर्ट ज़ोन' को तोड़कर खुद को एक बेहतर, विनम्र और जागरूक इंसान बनाने की कला।

यह कोई ट्रैवल-गाइड नहीं है, बल्कि यह आपके भीतर सोए हुए उस खोजी (Curious) इंसान को दोबारा जगाने की पुकार है।
अभी मातृभारती ऐप खोलें, "घुमक्कड़ जिज्ञासा" सर्च करें और पन्ना पलटकर सोच बदलने वाले इस सफर का हिस्सा बनें!
👉 अपनी राय और समीक्षा कमेंट्स में ज़रूर साझा करें!
"Ghumakad JIGYASA"

erdharmendra

એક નાનકડું છમકલું:

શીર્ષક:- વ્યથા એક તૂટેલા હૃદયની

કંઈક થવાનું હતું ને, કંઈક થઈ ગયું,
એક જ ક્ષણમાં હૃદય ભસ્મીભૂત બની ગયું.

પ્રેમનો સ્વાદ ચાખવા, જે સપનાઓમાં ખોવાતું ગયું,
આંખ બંધ કરી જ્યારે, ત્યારે દીવાસ્વપ્ન ઓલવાઈ ગયું.

એક તારા નામનું ટીપું આંખમાં વસી ગયું,
હૃદયમાં ફાટ પડી જ્યારે,
તો એ પણ ‘માં સીતા’ બની ધરતી મા
વિલિન થઈ ગયું.

પ્રેમના અથાગ સાગરમાં લોકોને ડૂબતા જોવાઈ ગયું,
અમે રહી ગયા તરતા, કારણ કે મન ખારાશથી ભરાઈ ગયું.

શી હતી ભૂલ અમારી, કે અમારું જ દર્પણ ખોવાઈ ગયું,
એક નુ એક હતું આ હૃદય, હવે કેટલાય ભાગમાં વહેંચાઈ ગયું.

— જિગર અશોક પંડ્યા

pandyajigar

https://www.matrubharti.com/book/19999420/krishna-not-just-history-but-managing-today-39-s-life

આજના સાંપ્રત સમયમાં કૃષ્ણની શું મહત્વ હતા... તે અંગે એક લેખ લખવાનો પ્રયાસ કર્યો છે. આપનો અમૂલ્ય પ્રતિભાવ આપશો જી

trivedimarut12gmailc

"ख़ुशियों के लिए बड़े बजट की ज़रुरत नहीं होती है दोस्तों, कभी-कभी मिट्टी का खिलौना और अपनों का साथ ही ज़िंदगी मुक़म्मल कर देता है।"
सुप्रभात

erdharmendra

🍁' दर्द-ए-तन्हाई '🍁

तेरे नहीं होने का मुझे बेहद ग़म है।
महफ़िल में भी आँखें रहती नम है।
खिला इक गुलाब अब मुरझा गया,
वैसे चारों तरफ़ बिखरी शबनम है।

जी रहे हैं बस तुम्हारी यादों के सहारे ,
मयख़ाने में भी शराब बहुत कम है।
खुश था बहुत मैं, जब तुम संग थे मेरे,
कैसे रहूँ मैं खुश, जब दूर मेरा सनम है।

ज़ख्म-ए-दिल छुपाए बैठे महफ़िल में,
बस एक तेरी कमी दिल में हरदम है।
वक्त गुज़रता है पर दर्द नहीं जाता,
तेरी याद के सिवा ना कोई मरहम है।

धड़कनें भी अब रुक-रुक के चलती हैं,
इस सीने में अब तो अटका मेरा दम है।
दर्द-ए-दिल अब सहा नहीं जाता 'व्योम',
जुदाई के अलावा न कोई बड़ा सितम है।

✍...© विनोद. मो. सोलंकी " व्योम "
जेटको (GEB) अंजार. मु. रापर.

omjay818

ટૂંક સમય માં પ્રકાશિત થઈ રહી છે.

sanjay5981

🍁 फीरनी

🍁कमी साहित्यात झटपट तयार होणारा चविष्ट आणि सोपा पदार्थ..
🍁साहित्य
दोन मोठे चमचे तांदुळ
अर्धा लिटर फुलक्रीम दुध
साखर आवडीनुसार
केशर, वेलची पावडर
बदाम काप
चार बदाम भिजवून साले काढून

🍁कृती
प्रथम तांदुळ धुवून घ्यावेत व पसरुन ठेवून कोरडे करून घ्यावेत
नंतर ते कोरडेच खमंग भाजून एक वाटी दुधात भिजत ठेवावेत
चार बदाम भिजवून साले काढून घ्यावेत

🍁 दोन तासांनी मिक्सर मध्ये प्रथम बदाम वाटुन घ्यावेत
त्यावर दूधात भिजवलेले तांदूळ घालून रवाळ पेस्ट करून घ्यावी

🍁अर्धा लिटर दूध उकळायला ठेवावे
दुध उकळले की तांदळाची पेस्ट हळूहळू दूधात घालावी
सतत हलवत रहावे जेणेकरून गाठी होणार नाहीत

🍁पंधरा ते वीस मिनिटात तांदुळ छान शिजतात
आवडीनुसार साखर घालावी
शेवटीं केशर, वेलदोडे पावडर
व बदाम काप घालावे

🍁दोन मिनिटे परत चांगले हलवून गॅस बंद करावा
ही फिरनी बाऊल मध्ये घालून फ्रिज मध्ये थंड करायला ठेवावी
थंडगार खावी फार चविष्ट लागते 😋

jayvrishaligmailcom

"ચા યમલોકમાં"
---------------------
આવ તું મારી કબર પાસે.
આવજે ચાની કીટલી સાથે.
હશે,ચા માત્ર એક કીટલી.
અમને લાગશે સાગર જેટલી.
હું પીઈશ ને.........
પાઈશ યમલોકમાં બધાને.
ચા.... ચા....ચા.....
🖊️જયા.જાની.તળાજા."જીયા"

davejayaben809394

સાચું કહું!
ફોટો પણ જોઈ જોઈ મેલો થઇ ગયો. આ એ જ ચહેરો જે કાલે દરરોજ દેખાતો'તો!
એ આજે,વરસે,દસ વરસે પણ નહીં દેખાતો.
શું થઇ ગયું છે,મારી આંખોને! મારી પાંપણ પર એ દયાવિહીન થઇ ગયો.
ક્યાં જઈ શોધું ઓ દોસ્તો કહો ને !
એ દરરોજ મનમોહતો,દરરોજ સામે મલકતો ચહેરો ક્યાં ગુમ થઇ ગયો??? - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

"क्या आपकी डिग्री सच में आपको काबिल बना रही है, या यह सिर्फ एक महंगा रसीद है जो आपको एक तयशुदा नौकरी की लाइन में खड़ा करती है?"
अब एक सीधा प्रश्न:-"क्या आपको लगता है कि आज के समय में डिग्री से ज़्यादा स्किल्स ज़रूरी हैं?! अपनी राय दें।"
G.N.

erdharmendra

જીવનમાં મેં,ભોગવી ઐયાશી.
ન ફાવે મને,મોતની ઐયાશી.
હું ભર નિંદ્રામાં, ને ઘર આખું મટકું ન મારે.
જયા.જાની.તળાજા."જીયા"

davejayaben809394

વેબ ગુર્જરી પર પ્રકાશિત થયેલ મારો લેખ...

એક એવી છત્રી જે તડકા - વરસાદથી તો બચાવે જ છે, પરંતુ તે ત્યાંની પરંપરા સાથે પણ જોડાયેલી છે. આ ઉપરાંત તે સ્ટાઇલ આઇકોન તરીકે પણ ઓળખાય છે.

વાગાસા - પારંપરિક જાપાની છત્રી

વાંચવા માટે અહીં લિંક પર ક્લિક કરો - https://webgurjari.com/2026/09/08/wagasa-the-traditional-umbrell-of-japan/

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mothiyavgmail.com3309

🍀ग्रीन स्मूदी🍀

🍀ग्रीन स्मूदी प्यायल्याने आरोग्य सुधारते, वजन नियंत्रणात राहते, पचनक्रिया सुधारते, रोगप्रतिकारशक्ती वाढते आणि त्वचेची व केसांची चमक सुधारते. ही स्मूदी फायबर, जीवनसत्त्वे आणि खनिजांनी परिपूर्ण असल्याने शरीराला ऊर्जा मिळते आणि विषारी पदार्थ बाहेर टाकण्यास मदत होते.

🍀ग्रीन स्मूदीचे प्रमुख फायदे
कमी करण्यास मदत:
ग्रीन स्मूदीमध्ये फायबर असते, ज्यामुळे पोट भरल्यासारखे वाटते आणि जास्त खाण्याची इच्छा कमी होते,
असे निष्णात डॉक्टर सांगतात

🍀आमचे अहो स्वतःच डॉक्टर असल्याने त्यांच्या सल्ल्याने आमचा तर रोजचा दिवस या स्मूदीनेच सुरू होतो
दिवसभर ताजे तवाने आणि उत्साही वाटते

🍀साहित्य
सहा सात पाने पालक
एक मूठ कोथिंबीर
एक बचकभर पुदीना
एक कढीलिंब डहाळी (आठ दहा पाने )
खाऊची दोन पाने( विड्याची पाने )
एक बचक शेवगा पाने
दोन तुळस तुरे
एक लिंबाचा रस
एक सफरचंद तुकडे करून
पाव चमचा दालचिनी
पाव चमचा काळी मिरी पावडर
लाल मीठ अर्धा चमचा
एक इंच आल्याचा तुकडा
पाव चमचा हळद
पाव चमचा मेथी पावडर

कृती
एक पेला पाणी घालून प्रथम सर्व जिन्नस मिक्सर वर बारीक करून घेणे
नंतर अर्धा ते पाऊण पेला पाणी घालून परत एकदा एकजीव करणे
याची दोन ग्लास स्मूदी होते

jayvrishaligmailcom

💌दिल का Notification #12 –

शीर्षक : पापा की चप्पल

एक दिन
गलती से पापा की चप्पल पहन ली।
दो कदम चला ही था कि...
समझ आ गया,
वो चप्पल मेरे नाप की नहीं थी।

उसमें सिर्फ़ पैर नहीं समाते थे...
ज़िम्मेदारियाँ भी समाई हुई थीं।
हर घिसा हुआ कोना...
घर के लिए किया गया एक समझौता था।


तब एहसास हुआ...

बचपन में लगता था,
पापा की चप्पल बस पुरानी हो गई है।
आज समझ आया...
घिसी सिर्फ़ चप्पल नहीं थी,
पापा की उम्र थी।

❤️ धड़कते रहिए...
जिगर अशोक पंड्या

pandyajigar

દીકરો તો તેને કહેવાય કે જે બાપની બધી જ ઝંઝટ છોડાવી દે. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/8c7AdJ0V

#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

sandesh newspaper 💫

niraliipatel.127808

"अगर कल सुबह सोशल मीडिया गायब हो जाए, तो जो जिंदगी आप आज जी रहे हैं, क्या आप कल भी वैसी ही जिएंगे?"
VERY GOOD MORNING 🌞

erdharmendra

जीवन के नियम: Do’s vs Don’ts
"किसी की नज़रों से गिरने से अच्छा है,
मैं ऋषिकेश में बंजी जंपिंग कर लूँ।!!
हवा के थपेड़ों में उछलने से अच्छा है,
मैं खुद स्काई डाइविंग कर के हवा में कूद जाऊँ।!!
चुल्लू भर पानी में डूबने से अच्छा है,
मैं समंदर की अथाह गहराइयों में स्कूबा डाइविंग कर लूँ।!!
किसी के सिर चढ़ने से अच्छा है,
मैं माउंट एवरेस्ट या अन्नपूर्णा पर चढ़ जाऊँ।!!
किसी के गिरेबान में झाँकने से अच्छा है,
मैं Vivo 70 Zeiss कैमरे से सीधा चाँद की आँखों में झाँक लूँ।!!" GN

erdharmendra

The Keepsake Pain

What's the meaning of dying when you can't be in pain of love, when you will no longer be able to feel the pain of love that exists, but you can't reach that, when you will no longer be able to look at her and cry..

What's the meaning of dying when your soul will leave that part of pain that was suffering, yet beautiful... when your heart will stop calling that name for whom you are dying..

What's the meaning of dying when your tears will stop dripping for remembering her, when all the precious memories you will leave behind

What's the meaning of dying when you are already beautifully dead.

-Azoorey

bulab1904gmail.com508096

Raju Kumar Chaudhary — लेखक, कवि और कहानीकार

राजु कुमार चौधरी (Raju Kumar Chaudhary) नेपाल के पर्सा ज़िले से जुड़े एक उभरते हुए लेखक, कवि और कहानीकार हैं। शब्दों और कल्पना की दुनिया के प्रति गहरी रुचि रखने वाले राजु कुमार चौधरी अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों को प्रेम, संघर्ष, रहस्य, रोमांच, प्रेरणा और मानवीय भावनाओं से भरी कहानियों की दुनिया में ले जाने का प्रयास करते हैं।

उनका मानना है कि एक अच्छी कहानी केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि पाठक के मन में भावनाएँ, सवाल और नई सोच भी पैदा करती है। इसी विचार के साथ वे डिजिटल माध्यमों पर हिंदी और नेपाली पाठकों के लिए विभिन्न प्रकार की रचनाएँ तैयार करते हैं।

✍️ लेखन की दुनिया

राजु कुमार चौधरी की लेखन शैली में कल्पना, भावनात्मक कहानी, रहस्य, संघर्ष और प्रेरणा का विशेष मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी रुचि प्रेम कहानियों से लेकर रहस्यमयी घटनाओं, संघर्षपूर्ण जीवन-कथाओं और सफलता की प्रेरक कहानियों तक फैली हुई है।

वे विशेष रूप से ऐसी कहानियाँ लिखना पसंद करते हैं जिनमें पाठक शुरुआत से अंत तक कहानी से जुड़ा रहे और हर अध्याय के बाद आगे पढ़ने की उत्सुकता बनी रहे।

📚 साहित्यिक दृष्टिकोण

राजु कुमार चौधरी के लिए लेखन केवल शब्दों को कागज़ या स्क्रीन पर उतारना नहीं है। उनके लिए लेखन एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा कल्पना को कहानी में और कहानी को पाठक की भावनाओं में बदला जा सकता है।

उनका उद्देश्य ऐसी रचनाएँ प्रस्तुत करना है जो:

- पाठकों का मनोरंजन करें।
- भावनाओं को छू सकें।
- नई कल्पनाओं की दुनिया दिखाएँ।
- संघर्ष करने वाले लोगों को प्रेरित करें।
- युवाओं में पढ़ने और लिखने की रुचि बढ़ाएँ।
- नेपाली और हिंदी डिजिटल साहित्य को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

🌟 लेखक का उद्देश्य

राजु कुमार चौधरी डिजिटल युग में साहित्य को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका सपना है कि उनकी कहानियाँ केवल एक शहर या देश तक सीमित न रहें, बल्कि दुनिया भर के हिंदी और नेपाली भाषी पाठकों तक पहुँचें।

वे भविष्य में कहानी, उपन्यास, कविता और डिजिटल साहित्य के क्षेत्र में और अधिक रचनात्मक कार्य करने के साथ-साथ नए लेखकों और युवा रचनाकारों के लिए भी एक ऐसा मंच बनाने की कल्पना रखते हैं, जहाँ उनकी प्रतिभा को पहचान और अवसर मिल सके।

🖋️ लेखकीय पहचान

नाम: राजु कुमार चौधरी
English Name: Raju Kumar Chaudhary
पहचान: लेखक | कवि | कहानीकार
स्थान: पर्सा, नेपाल
भाषाएँ: हिंदी | नेपाली
रुचि: कहानी, उपन्यास, कविता, रहस्य, प्रेम, प्रेरणा और कल्पना

“हर शब्द में जादू, हर कहानी में रहस्य।”

अगर आपको ऐसी कहानियाँ पढ़ना पसंद है जिनमें भावना, रहस्य, संघर्ष, प्रेम और कल्पना का मेल हो, तो राजु कुमार चौधरी की साहित्यिक यात्रा से जुड़े रहिए।

पढ़िए। महसूस कीजिए। कल्पना कीजिए। और कहानी की दुनिया में खो जाइए।


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rajukumarchaudhary502010

"બા ની બંદગી"
------------------
સૌના જીવનમાં હતાશા છવાઈ.
પડી હતી એ રાત,ને ખૂબ લંબાઈ ગઈ.
બોલતી નહીં,બા બચત એમ કરતી.
નવાં નવાં કપડા બાળકોને,
ને બાની સાડી,થીગડે વીંટાઈ ગઈ.
ધૂવે કપડાં બા,બધાનાં બગલાની પાંખ જેવાં.
કીમિયો એનો,લાગે સાડીને,સાબુનાં સપોતરા દેવાં.
અપનાવ્યું પોતે જીવન સંઘર્ષ વાળુ,
ને બાળકોને દોલત આપી ગઈ..
હયાત હતી,હેત વાળી બા.
એક હતું કુટુંબ,ને મમતા નેક હતી.
ભારુને ભેગા રાખતીને,ભવ એમ ભાંગતી.
બા ગયાં,બારણાં ગયાં,સૌ મૌકળા થયાં.
હતી અકબંધ ભીંત,ને ત્યાં બાની છબી મુકાઈ ગઈ.
ગીતાનાં પાઠ,બા વહેલી સવારે વાંચતી.
અમને સૌને લાગતી,એ પ્રાર્થના કરતી.
બાનાં ગયા પછી,એની દિવ્યતા સમજાઈ ગઈ.
કર જોડી,કરતાં કુટુંબની પ્રાર્થના બા સાથે મળી.
બા ગયા,ને બંદગી બદલાઈ ગઈ.
પ્રભુની સ્તુતિને બદલે,બાની ધૂન ગવાય ગઈ.
બા,માતૃદેવ બની દિલમાં છવાઈ ગઈ.
ને,બાને શ્રાધ્ધામાં ભાવાંજલિ અપાઈ ગઈ.
🖊️ જયા.જાની.તળાજા."જીયા"

davejayaben809394

स्वरचित काव्य :- श्री. दशरथ कृष्णा चव्हाण इगतपुरी, जिल्हा:- नाशिक

dasharath123

अलीबाग की अधूरी शाम
Written By: Vikash Viplao

की होती अगर ये फ़िल्म कोई,
या मेरी किसी कहानी का संसार…
तो इस तरह अधूरी ना होती,
ना होती यूँ बेज़ार।

होती तू हीरोइन उसकी,
और मैं उसका दीवाना हीरो…
सात समुंदर पार करके भी
आ जाता मैं तेरे द्वार।

आँखों में भर लेता तुम्हें,
जैसे सदियों से बस इसी मंज़र का था इंतज़ार…
और धीरे से थाम हाथ तेरा,
करता तेरे चाँद जैसे चेहरे का दीदार।

बिठा के तुझे अपनी बुलेट पे,
निकलता मैं भीड़ से दूर उस पार…
जहाँ सड़कें भी धीरे चलतीं,
और हवा भी चखती बस तेरा ख़ुमार।

कभी तू कंधे पे सर रख देती,
कभी ज़ुल्फ़ें उड़ा देता समुंदरी बयार…
और मैं हर मोड़ पे बस ये सोचता,
काश ठहर जाए कहीं ये सफ़र मेरे यार।

अलीबाग के उस सी फोर्ट पे
बैठ जाते लेकर आँखों में ख़याल हज़ार…
हाथ में गरम चाय की प्याली होती,
और होता लहरों की गुमशुदा ख़ामोशी का संसार।

बालों को सँभालते हुए तू
करती कुछ आधी-अधूरी बातें बार-बार…
हर ख़ामोशी तेरी
जैसे कोई नज़्म हो, वैसे पढ़ता मैं उनका सार।

पर ज़िंदगी को शायद
मुकम्मल कहानियों से नहीं है प्यार…
इसलिए तो कुछ सफ़र बस दिल में रहते हैं,
और यादें बन फिरते रहते हैं बेक़रार।

शायद कल भी जब समुंदर देखूँगा,
तो महसूस होगा वही पुराना अँधकार…
जैसे अलीबाग की वो हर अधूरी शाम
उम्र भर करती रहेगी हमारा इंतज़ार।

vikashviplao420482

इश्क के सात रंग
Seven Stages of Love
इश्क़ की एक काव्यात्मक यात्रा—पहली नज़र की दिलकशी से उन्स, इश्क़, अक़ीदत, इबादत और जुनून से गुज़रते हुए मौत यानी फ़ना तक।

Written By: Vikash Viplao

Stage 1 — दिलकशी / आकर्षण
ख़ता तो थी गुस्ताख़ नज़र की…
इल्ज़ाम-ए-उल्फ़त में पर
दिल गोया गुनाहगार हुआ।
देख झलक उस नूरानी चेहरे की
हादसा ये दिलकशी का 'विप्लव'
साथ मेरे सरेबाज़ार हुआ।।

Stage 2 — उन्स / लगाव
ख़बर नहीं, इस ख़ुमारी की वजह का 'साक़ी',
मालूम नहीं, थी हक़ीक़त या बस एक ख़्वाब।
वो पलकों का झुकना, उन अँखियों का तकना,
अब्र-ए-सियाह से वो केशु, लब जैसे थे गुलाब।
बयाँ उन्स का अपनी अब कैसे करे 'विप्लव,
ख़ुश-बाश में उनकी, दिल-फ़रेब बेकरार हुआ।।

Stage 3 — इश्क़
अदाएँ कर गईं उसकी असर कुछ इस क़दर
रुख़ लिया हसरतों ने फ़लक तक पंख फैलाए
अंजान था दिल की ख़्वाहिशों से जो बाद-ए-सबा में
दिल्लगी में महबूब की रहता अब अफ़साने सुनाए
पूछते फिरते हवाओं से उनका ठिकाना ऐ 'विप्लव'
इब्तिदा-ए-इश्क़ में गुम, कुछ यूँ तेरा इंतज़ार हुआ।।

Stage 4 — अक़ीदत / श्रद्धा
कुबूल हमें चाँद भी और उसके दाग़ भी, रज़ा
ख़ुदाई लुटाए बैठे हैं अपनी दिलबर की पनाह में
तशरीह उनसे राब्ता का फिर भी कैसे करें हम
रुसवा ना हो जाए मोहब्बत महफ़िल की निगाह में
रूबरू हो तो जाते गुज़रते उनकी गलियों से 'विप्लव'
मजबूरियों से उनकी हर दफ़ा पर जो ना बेज़ार हुआ।।

Stage 5 — इबादत / आराधना
इतराते रूहानी अँखियों का फ़ितूर चढ़ा कुछ ऐसा
ज़िक्र-ए-यार से ही तो अब इस रूह का क़रार है
शिकवा करूँ भी कैसे उस सितमगर की रंजिश का
रिवायतें इश्क़ की हमसे क्या कुछ कम नागवार है
बेगाना कहे वो मुझको अपना दीवाना भी 'विप्लव'
इबादत में वादा-ए-निबाह का कैसा ये इख़्तियार हुआ।।

Stage 6 — जुनून / दीवानगी
पैवस्त हुआ जबसे वो रग-ए-जाँ में यूँ लहू की तरह
चुभती तन्हाइयाँ, ये वीरानियाँ ही हासिल-ए-जूनून हैं
भाने लगी उसे अब ये वहशत बिस्तर की सिलवटें भी
रात की सियाही से लिखी बेचैन साँसें उसका सुकून है
इत्तिफ़ाक़ देखो उसके वहम कि दिवानगी का 'विप्लव'
कतरा-कतरा वो पिघला, फिर भी रक़िब गुलजार हुआ।।

Stage 7 — मौत / मृत्यु
कसूर उसका ताउम्र नज़्र-ए-इश्क़ में बस इतना सा रहा
साँस जाती रही जिसकी ख़ातिर वो कभी उसका ना रहा
क़सीदे मोहब्बत के ज़माना पढ़ेगा जब क़यामत के रोज़
खुलेंगे जहाँ आशिक़ी के पन्ने, आँख रोएँगी, रूह हँसेगी
लड़ता रहा परवाना ख़ुदा से आसमाँ के पार भी 'विप्लव'
ख़ाक था दरिया-ए-इश्क़ में, पर शमा का ना दीदार हुआ।।

vikashviplao420482