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New bites

સફળતામાં થોડો હિસ્સો મારો પણ હશે,
ભલેને તારો એ સફળ કિસ્સો સારો હશે.

johanjohan3745

उसने कहा तुम्हारी आँखे बड़ी प्यारी है… 👀
मैंने कहा अक्सर तेज़ बारिश के बाद मौसम सुहाना लगता है..!! 🙃

shivamdhuriya291955

My new novel cover page

kattupayas.101947

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947

Good afternoon to all of you....

erdharmendra

વાંચો સુંદર વાર્તા મારા ફેસબુક પેજ પર 🎊

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ronakjoshi2191

I don't know about haldiram's products
but their ads are too good. so pleasant

kattupayas.101947

This is another item I love.

kattupayas.101947

Try Thunder coconut . I feel good about it.

kattupayas.101947

Time for some lemenoid. lime juice is good for this hot temperature.

kattupayas.101947

कौन लिखता है यार इतनी गहरी बाते?
पढ़कर आंखे नम हो गई ...
चार चार कंधे एक साथ देखकर,
मुर्दे को खयाल आया,
एक ही कंधा काफ़ी था अगर जीते जी
मिला होता ......

kalpanasatav823113

"जो खुद को समझ लेता है, उसे दुनिया की भीड़ में भी रास्ता मिल जाता है।"

GM
Dharmendra Kumar

erdharmendra

Mathurbharti par hindi chapter available hai
youtube par

demonlord812740

दर्द का अहसास, अपनों का प्यार
​बच्चों के शोर-शराबे और शादी में गाए जाने वाले गीतों की गूँज के बीच, हर तरफ सिर्फ एक ही नाम गूँज रहा था—रिम्शा! अपने भाई की शादी में रिम्शा कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती थी। बिना रुके, बिना थके, वह हर काम के लिए यहाँ से वहाँ दौड़ रही थी।
​तभी अचानक, भागदौड़ के बीच रिम्शा का पैर सीढ़ियों से फिसला और जैसे वक्त वहीं थम गया। वह चार-पाच सीढ़ियाँ खिसकते हुए नीचे जा गिरी। उसे उठाने के लिए उसकी अम्मी और भाई फौरन दौड़े, लेकिन तब तक रिम्शा हँसते हुए सीढ़ी पर ही उठ कर बैठ गई और सहारा लेकर उठते हुए बोली, "कुछ नहीं, बस फिसल गई," और खुद भी हँस पड़ी। बिना आराम किए, वह फिर से अपने काम में लग गई।
​शादी निबटने के बाद जब दौड़-भाग खत्म हुई, तब रिम्शा को असली दर्द का अहसास हुआ—वह दर्द जो उसके घुटने में बैठ चुका था। जब अंदर के सारे टेस्ट करवाए गए, तो मालूम हुआ कि एसीएल (ACL) के साथ-साथ उसका घुटना पूरी तरह से डैमेज हो चुका है। डॉक्टर ने फौरन सर्जरी की डेट दे दी। रिम्शा, जो मन से बहुत कोमल और इमोशनल थी, सर्जरी के नाम से थोड़ा डर गई। लेकिन दर्द इतना ज्यादा था कि उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचा था।
​रिम्शा की एक अलग दुनिया: रिम्शा थोड़ी चुप-चाप और अपने कमरे में रहने वाली लड़की थी। वह बहुत जल्दी किसी से घुल-मिल नहीं पाती थी, जिस वजह से अक्सर अपने ही परिवार में खुद को थोड़ा अलग-थलग महसूस करती थी। उसके मन में अक्सर एक छिपा हुआ दर्द रहता था कि शायद कोई उससे उतना प्यार नहीं करता जितना वह सबसे करती है, या कोई उसकी उतनी फिक्र नहीं करता।
​सर्जरी की एक रात पहले, रिम्शा अपने कमरे में लेट कर छत को घूर रही थी और सोच रही थी कि कैसे सब होगा, वह कैसे चल पाएगी? डर, उलझन और अनगिनत इमोशंस उसके मन में चल रहे थे। सोचते-सोचते ही उसे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला।
​अगली सुबह रिम्शा भाई, बहन और अम्मी के साथ अस्पताल पहुँच गई। धीरे-धीरे सर्जरी का वक्त आ गया। जब वह ऑपरेशन थिएटर के अंदर जा रही थी, तो सबकी आँखों में उसके लिए बेपनाह दर्द और प्यार साफ़ नज़र आ रहा था।
​साढ़े-तीन घंटे की लंबी सर्जरी के बाद जब उसे रूम में शिफ्ट किया गया, तो रिम्शा एनेस्थीसिया के असर में थी। उसके सिर पर अम्मी का हाथ आते ही उसे पहली बार यह अहसास हुआ कि वह अकेली नहीं है। परिवार के सभी सदस्य जैसे बस उसकी एक आवाज़ सुनना चाहते थे, लेकिन उस वक्त रिम्शा कुछ बोलने की हालत में नहीं थी।
​रात के सन्नाटे में जब अस्पताल खामोश हो गया और एनेस्थीसिया का असर कम होने लगा, तब रिम्शा को हर दर्द पाँच गुना ज्यादा महसूस हुआ और दर्द से उसकी तड़प निकल गई। तब उसकी बहन उसका सबसे बड़ा सहारा बनी। रिम्शा की एक हल्की सी आह पर भी वह उसका हाथ थामे उसके पास ही खड़ी रही।
​अस्पताल के 3 दिन जितने दर्दनाक थे, उतने ही उस परिवार को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए जरूरी भी थे। अम्मी को देख कर रिम्शा की आँखें भर आना, भाई का फिक्रमंद होकर पास बैठना, और छोटे भाई-बहन का अपनी अप्पी की एक आवाज़ पर बिना थके, बिना चिढ़े दिन-रात सेवा करना—यह सब देख कर रिम्शा का दिल पिघल गया।
​कभी-कभी हम अपने सबसे बुरे वक्त में ही अपने उन अपनों को पाते हैं, जिनके लिए हम अक्सर सोचते हैं कि हम उनके लिए जरूरी नहीं हैं या वह हमारे बिना भी खुश रह सकते हैं। सबसे ज्यादा रिम्शा अपनी बहन और छोटे भाई के करीब आई। उसकी बहन ने जिस तरह से दिन-रात उसकी सेवा की, उसके प्यार और समर्पण के सामने रिम्शा मन ही मन हमेशा के लिए उसकी कर्जदार हो गई।
​एक एहसास:
कभी-कभी अपनों के असली प्यार को समझने और महसूस करने के लिए हमें जिंदगी के किसी बड़े दर्द से गुजरना पड़ता है।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

Time for breakfast

kattupayas.101947

बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -288

विषय-पुरखा (पितर)
दिनांक 03-10-2026

संयोजक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

प्रविष्ठियां-

1
पुरखा आऐ डेवड़ें,उनें न समजौ काग।
दूद भात कौ भोग दो,खुलजें सबके भाग।।
-अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
2
अपनइं पुरखा पूजवे ,कउअन पानी देत।
नइं जियत दईं गांकरें, मरें लगा रय हेत।।
-सियाराम अहिरवार ,टीकमगढ़
3
को कत है पानी दएँ, पुरखा मुक्ती पात।
जो लरकन के राज में,कलप-कलप मर जात।।
-अमर सिंह राय नौगांव
4
पुरखा जिउँ से यादकर,देवँ उनै सम्मान।
मान उनै आदर्श भी,करो अरघ जलदान।।
-सुभाष सिंघई,जतारा
5
जिंदा भूकन मार कें,जिनखों रोज सतात।
उनखों पुरखा जान कें,पूड़ी खीर ख्वात।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
6
सबके पुरखा खुश रहें,खुशी रहे परिवार।
परमपिता परमातमा,बिनती बारमबार।।
-वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
7
पुरखा कुल की नींव हैं,संतानन की आस।
उनकी पावन याद से,भरत हिय में प्रकाश॥
-महावीर पूर्णिया
8
सौप वसीयत हैं गये, पुरखा सुत के नाम।
पितृ मिलन कर श्राद्ध से,विधिवत करें प्रणाम।।
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया,महाराजपुर
9
मंदिर बन ग‌व राम कौ,पुरखा सुन हरसांय।
मंगल गायन कर रहे,और सुमन बरसांय।।
-भगवान सिंह लोधी 'अनुरागी',हटा
10
पुरखा आये दूर से,दैबे ऐन अशीष।
इनकी सेवा से मिलत,किरपा श्री जगदीश।।
-विशाल कड़ा'मांझी',बडोराघाट
11
पुरखन खोँ पानी दियौ,जीकेँ जैसे होयँ ।
जियत करौ तुम जानियौ, मरें न प्यासें रोयँ ।।
-प्रमोद मिश्रा,बल्देवगढ़
12
कुल के पालनहार हैं,करौ सदां सम्मान।
पुरखा दें आशीष तौ, हो जैहै कल्यान।।
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
13
अपनें पुरखों की करौ,रीत नीत कौ ध्यान।
उनके पुन्न प्रताप सें,हम सबकौ कल्यान।।
-देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
14
जबसें जे पुरखा लगे,रोज कड़त कागौर।
माल सूंट रय हूंक कें,हतो न जिनकौ ठौर।।
-प्रभुदयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
15
पितरन पानूँ देत हैं, और कराबें भोज।
देत दुआ परिवार खों,खूब उजरबै जोत।।
-रामानन्द पाठक नन्द,नैगुवां
16
जीते जी तरसात है,पानी खों औलाद।
छप्पन बिंजन देत हैं,पुरखा बनबे बाद।।
-तरुणा खरे'तनु',जबलपुर
17
भूल-बिसर नैं भूलियौ,पुरखन कौ यैसान।
पुरखन सें हम-आप हैं,पुरखा हैं भगवान।।
-गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी
18
भौतइ पावन दिन करय,क्वांर मास के खास।
इनमें पुरखा आत हैं,ले पानी की आस॥
-सुदेश सोनी,ललितपुर
19
पुरखा पूजें पक्ष में, कागोरा नित देत।
पुरखन के आशीष सें,साधें सबको हेत।।
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
20
पुरखा अपनें देवता, हम हैं उनके अंश।
उनके पुन्न प्रताप सै, हरौ भरौ सब बंश।।
-एस आर सरल,टीकमगढ़
21
अपनै अनुभौ ज्ञान सें,पुरखा कै गय बात।
ब्याद बिबूचन आँय तौ,हिम्मत सैं द्यो मात।।
-विद्या चौहान,फरीदाबाद
© संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

rajeevnamdeoranalidhori247627

क्यों बैठते हो मेरी शायरी की छाँव मे________
क्या तुम भी मोहब्बत की धूप में जले हो मेरी तरह______!!

narayanmahajan.307843

होते हैं और भी खूबसूरत #नजारे बहुत …..मगर
#तुम सामने बैठे रहो उससे हसीन कुछ भी नहीं...!!!💞

narayanmahajan.307843

"दिन का शोर रात में नहीं, दिल में उतरता है, इसीलिए रात भारी लगती है।"
Dharmendra Kumar

erdharmendra

प्रेम का चक्रव्युह तोड़ना संभव नहीं है..!

इसमें फसने वाला हर शख्स अभिमन्यु होता है..!!

narayanmahajan.307843

तुमसे करीब और कौन है मेरे
तुम छू दो तो रूह तक को दवा मिल जाती है💞

narayanmahajan.307843