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dadabhagwan1150

Eye-Care Technology: How Technology Is Changing Eye Health
Modern eye care is becoming more precise with the help of advanced imaging, digital tools and artificial intelligence.
Today, technologies such as OCT, OCT-A, retinal imaging, visual-field testing and AI-assisted screening can help eye-care professionals examine the eye in greater detail and monitor changes over time. OCT, for example, can provide detailed cross-sectional images of retinal layers, while OCT-A can visualize retinal and choroidal blood vessels without the need for dye injection.
Artificial intelligence is also becoming an important part of ophthalmology. AI systems can assist with analysing retinal images and supporting screening for conditions such as diabetic retinopathy, while research is expanding toward glaucoma, retinal diseases and other areas. However, AI remains a support tool and does not replace clinical examination and professional judgement.
Dr. Anchal Gupta’s Thought
“Technology can help us see more, measure more and detect changes earlier—but the right technology becomes meaningful only when it is combined with clinical expertise and patient-centred care.”
— Dr. Anchal Gupta
9319909455
The bigger message
Technology is not about replacing the eye-care professional. It is about helping doctors make informed decisions, monitor disease more accurately and extend access to eye care.
Eye Care + Technology + Human Expertise = Better-informed Eye Care
This content is for general public awareness and does not replace an eye examination by a qualified eye-care professional.

bhumikabhati.662947

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

it's Tea time.. Take a break. have some tea

kattupayas.101947

"लोग तुम्हे तब तक नहीं समझेंगे जब तक तुम उनके मतलब के हो, यह दुख नहीं,यह नियम है।"

सुप्रभात
Dharmendra Kumar

erdharmendra

Time for some breakfast

kattupayas.101947

तराशकर बनाई हैं ख़ुदा ने
नायाब सी आपकी इबारत
ख़ुदा मेरी ख़ता को बक्श दें
ग़र करने लगूं मैं आपकी इबादत


गजेंद्र कुडमाते

kudmate.gaju78gmail.com202313

गीत
इस दर्द में



मुझको पता है दर्द तुमे हो रहा है
पर जरा ठहरो
इस दर्द को संभालो
चिखो यह चिला लो

तुम्हारा जहां में कोई भी नहीं
जो तुम्हें समाले वो कोइ पथर भी नही
झुठि है आसे लगाना तु बंन कर
दुनिया जमाना पत्थर से भी है गए गुजरे


इस दर्द में जीना सीख
मरहम की ना तू रख कोई उम्मीद


या तो खुद को संभाल
थोड़ी सी खुद को बचा

दुनिया है जालिम कोई ना सुने गा तेरी चिखे
तु चाहे कितना भी चिख चिला लो



फर्क किसको है पड़ता
तु दर्द मे खुद की ही मरता

दर्द में जिंदगी हो जाए
ऐसा लगे कि सांसे आखरी हो जाए
फिर भी तू आहें भर



चाहे जिंदगी हो जहर
फिर भी तू जग से थोड़ी और लड़

जीना ना सिख सके गी किया
थोड़ी हौसला अपना बड़ा
थोड़ी देर और चिख चिला कर अपनी मौत को टाल
खुद को अपना बना
कुछ देर और खुद को गले से लगा



मुझको पता है दर्द तुमको हो रहा है
सिने में दिल ठहेर नहीं रहा
बस दिन गुजार रहा है
जिंदगी चल नही रहा

बस तरपते हुए लमहा कट रहा है

2


तो क्या
फिर भी तुम्हें आगे देखना होगा
अपने कदमे बढ़ाना होगा


पलकों पर कुछ तो होगा
कोई ख्वाब तो लगा होगा
जरा उट उन्हें सच करने के लिए चल


मुझको पता है दर्द तुमे हो रहा है
पर जरा ठहरो
इस दर्द को संभालो
चिखो यह चिला लो


राहे तुम्हारी है सपना तुम्हारा
सच करना है या ना यह इरादा तुम्हारा
आगे बढ़ाना है या ना यह हौसला भी तुम्हारा


फिर देख जरा खुद को
क्या हाल बना रखा खुद का

उतरा हुआ चेहरा टूटे हुए शिशे मे है दिख रहा
देख लिया है खुद को तो रो ले

चीख और चिल्ला ले
तू खुद को गले लगा ले
तू और खुद को गले लगा ले

तुझको कोई ना प्यार करने वाले तू
खुद को गले लगा ले
इस बात के लिए तू खुद को समझने

खुद से प्यार जाता
तू खुद को अपना बना ले
चिख और चिल्ला ले
खुद को गले लगा ले

abhinisha

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ronakjoshi2191

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

परियों सी अहाते में खिलखिलाके डोलतीं,
कुछ बोलतीं तो खूब तोतला के बोलतीं,
थोड़ी बड़ी होतीं तो बड़ा ख्याल ये करतीं,
पापा की तो हर वक्त देख भाल ये करतीं,
मम्मी की मदद शौक से करतीं हैं बेटियाँ,
माँ - बाप को आनंद से भरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरती हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

पढ़तीं हैं तो ये और मन लगा के हैं पढ़तीं,
धीरे से सफलता की सीढ़ियों पे हैं चढ़तीं,
सेना में ये जातीं हैं एवरेस्ट पे जातीं,
स्पेस यान और वायुयान उड़ातीं,
बेटों सा कीर्तिमान भी गढ़तीं हैं बेटियाँ,
सपनों में रंग बाप के भरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

परिवार की प्यारी सी दुलारी सी ये होतीं,
भईया के लिए राजकुमारी सी ये होतीं,
वैसे तो ये माता - पिता का मान बढ़ातीं,
कुछ बन गईं विजय तो स्वाभिमान बढ़ातीं,
हँसते हुए लड़तीं हैं झगड़तीं हैं बेटियाँ,
आकाश में किरणों सी उभरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

सर्वाधिकार सुरक्षित
✒️✒️---©️--®️ डाॅ. विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

"जो सुबह छूट गया, उसे शाम पकड़ लेती है।"

Dharmendra Kumar

erdharmendra

The first chapter of my novel Specialz is out!!!

Read Now :)

md.ahadsillyhare615444

हवा की तरह कुछ लोग आते हैं…
और राख की तरह ख़ामोशी छोड़कर चले जाते हैं। 🍂
कुछ रुख़सतियाँ आवाज़ नहीं करतीं, बस दिल में एक सन्नाटा छोड़ जाती हैं।

— सुदर्शन पांडेय ‘नमन’

sudarshanpandeynaman443445

"पहरे"

यह कहानी किसी घर या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन अनकही भावनाओं का एक आईना है जो अक्सर हम जाने-अनजाने में अनदेखा कर देते है इसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करना है।"

​शीतल एक ऐसे परिवार में जन्मी थी जहाँ बेटी से ज्यादा बेटे को मान दिया जाता है। परिवार कुछ रूढ़िवादी सोच के दायरे में सिमटा हुआ था।
​
शीतल का आज 12वीं कक्षा का रिजल्ट आया। वह अच्छे अंकों से पास हुई थी। अपनी ऑनलाइन आई मार्कशीट और चेहरे पर एक सुकून व मेहनत की मुस्कान लिए वह भागती हुई आई और चहकते हुए अपने पिता से बोली, "पापा, मैं पास हो गई!" उसने मार्कशीट पापा की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "पापा, अब मुझे भी भाई की तरह बाहर बड़े कॉलेज में पढ़ना है।" पापा उसकी बात पर मुस्कुरा दिए और 'हाँ-हाँ' बोलते हुए उसके अंक देखने लगे।

​आगे पापा कुछ कहते, उससे पहले ही दादी थोड़ा चिढ़कर और तंज भरे रवैये से बीच में ही बोल पड़ीं, "तुम बाहर पढ़कर क्या करोगी? कौन सा तुमको इस घर में रहना है या हमें तुम्हारी कमाई मिलनी है?" जिस कमरे में अभी हँसी गूँज रही थी, वहाँ सन्नाटा पसर गया। शीतल के चेहरे की मुस्कान एक पल में खत्म हो गई। उसकी मासूम आँखें पापा और मम्मी की तरफ देखने लगीं और वह मन ही मन सोचने लगी कि क्या पापा-मम्मी भी वैसे ही उसकी साइड लेंगे जैसे भाई की लेते हैं?

​मम्मी, जो पास में ही रोजमर्रा के काम में लगी थीं, वह अपनी बेटी की सफलता पर खुश तो थीं, लेकिन काम में उलझी हुई ही उन्होंने बिना कुछ बोले दादी की बात का समर्थन कर दिया। शीतल अंदर ही अंदर दुखी हो गई और भागकर अपने कमरे में चली गई और खुद को अंदर बंद कर लिया। वह सोचती रही कि कैसे सब भाई की साइड लेते हैं, उसकी नहीं; कैसे उसकी जीत महज बस उसकी होती है और भाई की जीत पूरे परिवार की! यह वह अनछुआ अहसास होता है जो परिवार वाले समझकर भी इस बात से
पर्दा डाल देते हैं कि 'बेटी हो'।
​
शीतल पूरे दिन कमरे से बाहर नहीं आई और अपने ही ख्यालों से अकेले लड़ती रही। शाम के वक्त जब सब चाय पी रहे थे, तो पापा ने शीतल को बुलाया। शीतल, जो कुछ वक्त पहले खुश थी, अब उसके चेहरे पर एक गहरी उदासी थी और मन में अनगिनत सवाल। पापा ने शीतल की तरफ चाय का कप बढ़ाते हुए कहा, "शीतल, कॉलेज के लिए देखेंगे, तुम उदास मत हो।"

​शीतल कुछ कहती, इससे पहले मम्मी ही बोल पड़ीं, "सुनिए जी, हमारे पास अभी एक और इतना बड़ा खर्चा उठाने की गुंजाइश नहीं है और अगले साल इसकी शादी करनी है। अम्मा ठीक कह रही हैं, हम इसको पढ़ने के लिए मना नहीं कर रहे, बस इसी शहर में ही एडमिशन ले ले। हम कौन सा इसके दुश्मन हैं?" मम्मी ने शीतल के सिर पर प्यार से हाथ रखकर कहा, "बेटी, तुम तो समझदार हो।"

​शीतल का जैसे दिल के साथ भरोसा ही टूट गया। वह अपनी मम्मी की आँखों में देखने लगी और सोचने लगी—क्या मम्मी और दादी को इस बात का अहसास भी है कि वे खुद उस पहरे की पहली सीढ़ी बन रही हैं? जिसे समाज पुरुष-प्रधान कहता है और लोग कहते हैं कि घर के पुरुषों को यह पसंद नहीं है, लेकिन वास्तव में घर की औरतें ही घर की औरतों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सबसे पहले पहरे लगाती हैं।
​
वह सोचने लगी कि कैसे लोग कहते हैं कि घर के मर्द औरतों पर पहरे लगाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि घर की औरतें ही घर की औरतों पर पहरे लगाती हैं—कभी जिम्मेदारी के नाम पर तो कभी रिवायतों के नाम पर।

​एक एहसास
हमें खुद से, अपने घर की औरतों से और समाज से यह पूछना चाहिए कि जाने-अनजाने में कहीं वे किसी और औरत के सपनों पर पहरे तो नहीं लगा रही हैं?

☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

"पहाड़ों में नदियाँ ज़िग-ज़ैग बहती हैं। तब समझ आया कि प्रकृति सबसे छोटा रास्ता नहीं, सबसे सुरक्षित रास्ता चुनती है।"

Very Good afternoon
Dharmendra Kumar

erdharmendra

Time for Sunday lunch. Enjoy with family and friends. just 4 fun

kattupayas.101947

"प्रेम में गिरा नहीं जाता, प्रेम में उठा जाता है, जो गिराता है वह मोह है।"

Good morning
Dharmendra Kumar

erdharmendra

*Title:*
Khule Aasman Ke Neeche Baithi Ek Maa - Ek Sacci Kahani

*Category:*
Jeevan Kahani / Samajik / Maa

*Description (Introduction):*
Ye koi kalpana nahi, meri apni aap-beeti hai.
Jammu ki ek thandi Purnima ki raat, jab mera 6 mahine ka bacha mere aangan me so raha tha, aur main khule aasman ke neeche baith kar ye diary likh rahi thi.
Jiske liye maine apna sab kuch chod diya, aaj wahi shakhs mere aur mere bache ke khilaaf khada hai.
Ye kahani hai ek maa ki himmat ki, jo apne bache ke future ke liye insaaf ki ladai lad rahi hai.
Agar aap bhi ek maa hain, toh ye kahani aapke dil ko chhoo jayegi.

*Tags:*
#maa #jammu #purnima #realstory #struggle #motherhood #insaaf #ekmaakikalamse #momandbaby

pd708672gmail.com358285

નાનપણમાં સ્વજનોના
ખોટા સ્નેહને પણ સાચો સમજતા હતા.

​પણ હવે પોતાના ઓની,
થોડીક ઔપચારિક સંભાળ પણ,
સાવ ખોખલી ને નિરર્થક લાગે છે.

​છતાંય, બધું જ જ્યારે
આટલું સ્પષ્ટ સમજાઈ જાય છે,
ત્યારે એ સત્ય પણ ક્યાં.....
ક્યારેક મન ને ગમે છે?

ઢમક

heenagopiyani.493689

jai jagannath

skptech

प्रकृति और किसान

​टूटी उम्मीद और सूना आँगन

​"हम बारिश का इंतज़ार चाय और सुकून के लिए करते हैं, लेकिन एक किसान के लिए यही बारिश उसके पूरे साल के सपनों की डोर होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब वही उम्मीद टूटती है, तो एक भरा-पूरा आँगन कैसे सूना हो जाता है? आइए, आज उस किसान के संघर्ष को महसूस करते हैं, जिसकी दुनिया मिट्टी और मौसम के बीच कहीं खो गई।”

​वैसे तो आज कल लगभग सभी गाँव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे बुंदेलखंड का हाल एक अलग ही दर्द भरी कहानी कहता है। आषाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में जो पहली बारिश होती है, वह तपती धूप और पिघला देने वाली गर्मी से न सिर्फ राहत देती है, बल्कि यहाँ के किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण बन कर आती है।
​बड़े-बड़े शहरों में बारिश बस गर्मी से आजादी, कहीं अच्छी जगह घूमने या चाय के साथ गरमा-गरम भजिये की वजह बनती है, तो दूसरी तरफ किसानों के लिए उनके जीवन-यापन और सभी छोटे-बड़े सपने सच करने की उम्मीद।
​कैलाश काका बैठक में बैठे बाहर से आती बारिश की मन को छू लेने वाली आवाज़, साथ ही तेज़ सर-सर की करती हवा जो बैठक की खिड़की से कैलाश काका को छू कर जा रही थी और साथ ही काका के सपनों को उम्मीद दे रही थी। काका के चेहरे की झुर्रियां जैसे खुशमन के आगे कम हो गई थीं और आँखों में पोती की ब्याह और पोते को पढ़ाई के लिए बड़े शहर भेजने के सपने चमक रहे थे। वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में खनन (mining) के लिए बड़ी-बड़ी क्रशर मशीनें लगाई जा रही थीं।
​बारिश के थमते ही काका ने खेत में बुवाई शुरू कर दी। कैलाश काका ने बुवाई ही नहीं, खेत की ज़मीन में अपने सपने, मेहनत और एक-एक कर जमा की गई पूंजी भी बीज के साथ खेत में बो दी थी (शायद सभी किसान यही करते हैं)। इस उम्मीद में कि जब फसल कट कर घर के आँगन में आएगी तो न सिर्फ आँगन, बल्कि उनका जीवन भी खुशियों से भर जाएगा। साथ ही कैलाश काका को धीरे-धीरे चिंता सताने लगी थी क्रशर मशीन की खड़-खड़ करती आवाज़ के साथ सफ़ेद उड़ती हुई धूल, जो फसल, पेड़-पौधे, ज़मीन, पानी और साथ में लोगों के स्वास्थ्य पर भी सफ़ेद चादर बन कर बिछ रही थी, जो धीरे-धीरे सब को अपने आगोश में लेकर सब कुछ खत्म करने का काम कर रही थी।
​देखते ही देखते, क्वार (सितंबर-अक्टूबर) का महीना आ गया। बुंदेलखंड के किसानों और उनकी खरीफ की फसलों के लिए यह महीना किसी सांस रोक देने वाले इम्तिहान जैसा होता है। हर कोई बस यही दुआ करता है कि आसमान साफ़ रहे। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। क्वार की एक काली, भयानक रात अपने साथ बेहिसाब और तेज़ बेमौसम बारिश लेकर आई।
​उस बारिश के साथ कैलाश काका की फसल ही बर्बाद नहीं हुई, उनका सब कुछ बर्बाद हो गया—उनके सपने, मेहनत और जमा पूंजी भी (अक्सर किसानों के साथ ऐसा ही होता है)। पीछे छोड़ गया तो गिरता हुआ स्वास्थ्य, टूटे सपने और बैंक का कर्ज़ा, जो किसानों के लिए किसी बड़ी समस्या से कम नहीं होता, जिसको चुकाने के लिए किसान जाने क्या-क्या करते हैं।
​ऐसे ही बैंक के कर्ज़ को चुकाने और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए कैलाश काका के परिवार को बड़े शहर जाकर मज़दूरी करने के लिए जाना पड़ा। जिस आँगन में कैलाश काका हरी-भरी फसल रखने, पोती की बारात लाने के सपने देख रहे थे, अब वह आँगन हमेशा के लिए सूना हो गया था।
​एक एहसास
​खनन (mining), ये शब्द पढ़ने में बहुत छोटा है लेकिन असल में इसका मतलब बहुत बड़ा है—जो हरे-भरे पेड़-पौधों, जीवन और ज़मीन को बंजर बना देता है। ऐसे ही बेमौसम बारिश, जो किसानों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होती।
​कभी-कभी सोचती हूँ, हमने प्रकृति और किसानों के साथ कितना अन्याय किया है।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

सितारों से भरी हुई रातें पसंद है…
बेवजह की हुई उसकी बातें पसंद है…
तारीफ़ के क़ाबिल है उसके बाल भी पर,
मुझे ज़्यादा उसकी आँखें पसंद है।। 👀❣️

shivamdhuriya291955

एक ख़ूबसूरत अनकही दास्तान एक लड़की को जो गुज़र रही है शक से, अपनों के रूखेपन से, नई राहों से, धोखेबाज़ी से, दुनिया की सच्चाई से, अनकही मुहब्बत से, और ज़िंदगी से जुड़े मामूल कर्ब से।
और रास्तों में मिले नए रिश्ते।
कई सवाल हैं -
कई राहें हैं -
कई जुस्तुजू है -
जिसे उसे ख़ुद हल करना है।
लेकिन वो कई मोड पर अपने आप में उलझती जा रही है।

वो अपनी राह कैसे चुनेगी?
ख़ुद को कैसे सुलझाएगी?
और जुस्तुजू को कैसे हल करेगी?

https://www.matrubharti.com/novels/67955/dastan-e-karb-by-n-a
A novel by Azoorey.
DASTAN-E-KARB भ्रम से परे क्या है?

Aaplog novel padhie aur achi लगे तो apne reviews दीजिए।...

na achi लगे तो bad reveiws bhi chalenge ✌️😁

"जीत के लिए हार ज़रूरी है"

bulab1904gmail.com508096

तुमसे करीब और कौन है मेरे
तुम छू दो तो रूह तक को दवा मिल जाती है💞

narayanmahajan.307843