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New bites

Acceptance

arun4you

This image contains a mix of extraordinary facts and pseudoscientific claims. While the bottle and its price are real, the health benefits mentioned are highly exaggerated.
Here is the breakdown of what is true and what is misleading:
1. The Water and Price: TRUE
The water is called Acqua di Cristallo Tributo a Modigliani. It holds the Guinness World Record (set in 2010) for the most expensive bottle of water ever sold.
* Price: It was sold at an auction for $60,000, which is approximately ₹50 Lakh (depending on the exchange rate).
* The Bottle: The extreme price is not for the water itself, but for the packaging. The 750ml bottle is made of 24-carat solid gold and was designed by Fernando Altamirano as a tribute to the artist Amedeo Modigliani.
* The Source: The water is a blend of natural springs from Fiji and France, and glacier water from Iceland.
2. The Gold Ash: PARTIALLY TRUE
* The Claim: It is true that this specific luxury water contains 5 grams of 23-carat gold flakes/ash dissolved in it.
* The Purpose: This is done purely for exclusivity and aesthetics to justify the "luxury" tag. Gold is chemically inert, meaning it does not react with the body or get absorbed into the bloodstream.
3. Health Benefits & "Amazing Energy": MISLEADING
* The Claim: The image claims it gives the body "amazing energy" (adbhut oorja).
* The Reality: There is no scientific evidence that drinking gold flakes provides a burst of energy or any significant health benefit. While Swarna Bhasma is used in traditional Ayurveda, its effects in a bottle of luxury water are purely decorative.
* Alkalinity: Some sources claim the gold makes the water more alkaline, but you can achieve the same effect with much cheaper alkaline water or even a pinch of baking soda.
Summary Table
| Feature | Status | Explanation |
|---|---|---|
| Name | ✅ Real | Acqua di Cristallo Tributo a Modigliani. |
| Price (~₹50 Lakh) | ✅ Real | Sold at auction for $60,000 in 2010. |
| Gold in Water | ✅ Real | Contains 5g of gold flakes for luxury. |
| Amazing Energy | ❌ False | Purely marketing; gold is not a fuel for the body. |
The Verdict: You are paying for a gold sculpture, not a miracle drink. Most of the "facts" in the image are technically correct regarding the price and bottle, but the health claims are typical "luxury marketing" fluff.

bkswanandlotustranslators

जाने देना उसे वो बसंत होगा तो फिर एक बार ज़रूर लौटेगा।

anisroshan324329

Aajkal loans milna jitna asan ho gya hai bas google playstore se ek app download karlo aur apko loan mil jata hai Parrrrrrrr yahi to ek aam Aadmi phas jata hai ek Fraud Loan App ke jaal me ab toh bas jabtak aap uss fraud loan app ka paise nhi doge penalty charges plus khudka cibil kharab hota jaega
to kya iska koi solution nhi hai ?
Bilkool hai ek Certified Partner se loan ke liye apply karna hi ek smart move hai jo apse loan process karane ke fees nahi lega na loan milne ke pahle na baad me .
mssg karein abhi

kirankumar435411

Aajkal Khudka Ghar lena Har kisi ka sapna hota hai aise me agar hum banks ke approval ke liye chakkar lagane ki soche to hamara sapne ki niv kamjor hone lagti hai
par aisa bilkool sambhav hai aur bahut asani se sambhav hai bas ek message karna hai aur 7.75%PA ki roi start se apna khudka ghar khareedna aur bhi asan hoga abhi sampark kar sakte hai

kirankumar435411

अच्छा है खूबसूरत होने का बिल नहीं आता..


वरना आप तो कर्ज में डूब जाते..

anisroshan324329

अंदर तबाही मचा देते हैं
वे जज़्बात…
जिन्हें हम किसी के नाम से जोड़ देते हैं।
जब प्रेम अधूरा रह जाता है,
तो वह खत्म नहीं होता…
वह और गहरा हो जाता है।
अकेले कमरे की खामोशी में
वही चेहरा दीवारों पर उभरता है,
वही आवाज़ कानों में गूंजती है,

और दिल पूछता है —
“क्यों नहीं मिला मुझे पूरा?”
लेकिन सुनो…
प्रेम कभी अधूरा नहीं होता,
अधूरी होती है हमारी चाह —
किसी को पाने की,
किसी पर अधिकार की।
जिसे तुम विरह समझती हो,
वह भी प्रेम का ही दूसरा रूप है।
मिलन में प्रेम बाहर बहता है,
विरह में प्रेम भीतर उतरता है।
अकेलापन शत्रु नहीं है,
वह तुम्हें तुम्हारे पास लाने आया है।
तुम जिसे खोने से डरती हो,
वह तो पहले ही तुम्हारे भीतर बस चुका है।
वह तुम्हारी सुगंध बन जाएगा। 🌸

narayanmahajan.307843

कैसी जिंदगी, वो मुझे देखे, मैं उसको देखु..

मनोज नावडीया

manojnavadiya7402

“the habit of the cocktail hybrid”

arun4you

रक़ीब जो फेंकेगा तुझपर, वो रंगों की धार मुबारक, मुझको मेरा हाल मुबारक, तुझको ये त्योहार मुबारक।

anisroshan324329

आना किसी रोज ख्वाबों से निकल कर
हकीकत में बैठना मेरे पास
मैं सुनाऊँगा तमाम नज्में
जिनको मैं लिखता हूँ
सिर्फ तुम्हारे लिए,
सुनना
हर अहसास को ताकी देख सकूँ
उस वक्त तेरे चेहरे को सुन सकूँ तेरी धड़कनों को
महसूस कर सकूँ
उस प्रेम को संग तेरे..!!

narayanmahajan.307843

तुम्हारा स्पर्श साधारण नहीं था।
वह जैसे आत्मा तक उतर जाने वाली कोई
मौन स्वीकृति थी ।
महसूस करते हुए उसी क्षण जान लिया कि यह मात्र स्पर्श नहीं, प्रेम का उच्चार है
कुछ स्पर्श क्षण भर में विलीन नहीं होते,
वे हृदय के उस कोने में अपना स्थायी घर बना लेते हैं,
जहाँ उदासी के समय
सबसे अधिक सहारे की आवयश्कता होती है..!!

narayanmahajan.307843

एक स्त्री चाहिए
जिसके समक्ष
मैं सिर्फ तन से नहीं
मन से भी नग्न हो सकूँ
उतार फेंकूँ सारे मुखौटे
भूला सकूँ पुरुष होने का दम्भ
रो सकूँ जार जार
जिसे कह सकूँ
पुरुष हूँ मगर
पीड़ा अनुभव करता हूँ
चाहता हूँ बिल्कुल माँ की तरह
तुम फेर दो हांथ बालों पर गालों पर
पुरूष होते हुए भी
कांधा चाहिए कभी कभी मुझे भी,

सिर्फ चमकता
दमकता बदन ही नहीं
एक स्त्री चाहिए
जिसे प्रेम करते हुए
पूजा भी कर सकूं
वासना से नहीं श्रद्धा से
जिसके चरणों को चूम सकूँ
जिसके स्पर्श मात्र से
पुलकित हो उठे रोम रोम मेरा
कर दूं पूर्ण समर्पण
विगलित हो अस्तित्व मेरा
मैं नारी बन जाऊं
वो पुरुष बन जाएं
उसमें मैं नजर आऊँ
वो मुझमें नजर आएं
हम शंकर का अद्वैत हो जाएं,

एक स्त्री चाहिए
जिसे मैं उस तरह प्रेम कर सकूँ
जिस तरह एक स्त्री प्रेम करती है..!!

narayanmahajan.307843

प्यार का चक्कर मतलब मोत से टक्कर

anisroshan324329

અહિંસા જેવું કોઈ બળ નથી અને હિંસા જેવી કોઈ નિર્બળતા નથી. આ દુનિયામાં નિર્બળ કોણ? અહંકારી. આ દુનિયામાં સબળ કોણ? નિર્‌અહંકારી. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

બન્યું જીવન સરળ,
વધી ભૌતિક સુખ સગવડો.
આભારી છે વિશ્વ આખુંય,
વિજ્ઞાનની શોધોને!
નુકસાન છે અને ફાયદા પણ છે,
વિજ્ઞાનની આ શોધોનાં!
કરીએ જો ઉપયોગ વિવેકપૂર્વક,
વિજ્ઞાન સદાય ફાયદાકારક!
મહાન વૈજ્ઞાનિક શ્રી
સી. વી. રામને કરી શોધ
રામન ઈફેક્ટની આજનાં દિવસે.
માનમાં એનાં ઉજવાય
28 ફેબ્રુઆરીનો દિવસ,
'રાષ્ટ્રીય વિજ્ઞાન દિવસ' તરીકે.

s13jyahoo.co.uk3258

જો ગઝલ ગમે સાંભળવી તો Instagram માં આવી શકો છો...m_saheb_18 I'd છે મારી.....

bhattbhavin830216

દરેક જનેતા પોતાના બાળકને કાનુડો સમજે છે.એજ "કાનુડાને" પરણાવ્યા બાદ પરણી લાવેલી કન્યાનો "કહ્યાગરો કંથ" બની જાય તેનો વાંધો નથી.અને તે કાનુડાને પરણાવ્યા ત્યાં સુધી તેનું મેલું ગંદુ ધોઈ સાજે-માંદે સંભાળ સાથે ઉજાગરા કરી,કક્કા ના 'ક' થી 'કોલેજ' સુધી બારાખડી ઘૂટાવી ઉછેર કીધા બાદ એ કપૂત કેમ થતો હશે !!!

(આ એવા પુત્ર/પુત્રીઓ માટે છે,જે માઁ-બાપને કહેછે છે કે "તમે મારા માટે શું કર્યું?")
. - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

આ વખતે એ મજાની હોળી મારી સાથે રમી ગયા.....

એકલતાનો રંગ એ મને ખુબ મજાનો લગાવી ગયા.....

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

ૐ હનુમતેય નમઃ

bhavnabhatt154654

સબંધએ જીવનભરનો દસ્તાવેજ છે.

urmivala940395

हार का पहला स्वाद
अर्जुन को हमेशा लगता था कि उसके अंदर कुछ खास है।
लेकिन “लगना” और “साबित करना” दो अलग चीजें होती हैं और वह यह बात उस दिन समझ पाया, जब पूरी कक्षा के सामने उसका नाम असफल छात्रों की सूची में पुकारा गया।
“अर्जुन चौधरी फेल।”
शब्द छोटे थे, लेकिन असर भारी।
कुछ लड़के मुस्कुराए।
कुछ ने पीछे मुड़कर उसे देखा।
कुछ ने धीरे से फुसफुसाया “फिर से…”
अर्जुन की उंगलियाँ कांप रही थीं। वह अपनी कॉपी पर नजरें गड़ाए बैठा रहा, जैसे अगर वह ऊपर देखेगा तो दुनिया टूट जाएगी। उसकी छाती में अजीब सा दबाव था। उसे लग रहा था जैसे पूरा कमरा सिकुड़कर उसके ऊपर गिरने वाला है।
यह पहली बार नहीं था जब वह असफल हुआ था।
लेकिन पहली बार उसे लगा शायद समस्या पढ़ाई नहीं, वह खुद है।
स्कूल से घर तक का रास्ता उस दिन बहुत लंबा लग रहा था। सड़क पर गाड़ियाँ सामान्य गति से चल रही थीं, लोग अपने काम में व्यस्त थे, लेकिन अर्जुन को लग रहा था कि सबको पता है वह हार गया है।
घर पहुंचते ही माँ ने पूछा, “कैसा रहा रिज़ल्ट?”
वह कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला “ठीक नहीं।”
माँ ने गहरी साँस ली, लेकिन कुछ कहा नहीं। वह जानती थीं कि उनके बेटे के भीतर कुछ चल रहा है कुछ ऐसा जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं।
रात को अर्जुन छत पर लेटा था। आसमान में तारे थे, लेकिन उसका मन अंधेरे से भरा हुआ था। उसने खुद से पूछा
“क्या मैं सच में इतना कमजोर हूँ?”
उसे याद आया बचपन में वह दौड़ में सबसे आगे रहता था। खेल में उसका आत्मविश्वास अलग ही होता था। लेकिन जैसे-जैसे कक्षाएँ बढ़ीं, प्रतियोगिता बढ़ी, तुलना बढ़ी… उसका आत्मविश्वास घटता गया।
उसे असफलता से ज्यादा डर “लोग क्या कहेंगे” से लगता था।
उस रात पहली बार उसने महसूस किया
उसकी असली लड़ाई किताबों से नहीं, अपने दिमाग से है।
अगले दिन स्कूल में उसका दोस्त राघव मिला।
“यार, छोड़ ना। सबके बस की बात नहीं होती। मैं तो अगले साल प्राइवेट फॉर्म भर दूँगा। ज्यादा टेंशन लेने का फायदा नहीं।”
राघव की आवाज में हार की आदत थी। जैसे वह असफलता को स्वीकार कर चुका हो।
अर्जुन ने सिर हिलाया, लेकिन उसके भीतर कुछ और चल रहा था।
उसे राघव की बातों में सुकून नहीं, डर महसूस हुआ।
“क्या मैं भी ऐसा ही बन जाऊँगा?”
यह सवाल उसे चुभ गया।
कुछ दिनों बाद स्कूल में एक नया कार्यक्रम घोषित हुआ “व्यक्तित्व विकास शिविर।”
कहा गया कि एक पूर्व सैनिक आने वाले हैं, जो छात्रों को अनुशासन और मानसिक शक्ति पर प्रशिक्षण देंगे।
अर्जुन ने नाम तो सुना “भीष्म सर।”
लोग कह रहे थे कि वह बहुत कठोर हैं।
कुछ छात्र पहले से ही डर गए थे।
शिविर के पहले दिन मैदान में सभी छात्र पंक्ति में खड़े थे। सुबह के पाँच बजे थे। ठंडी हवा चल रही थी। अधिकतर छात्रों की आँखें नींद से भरी थीं।
तभी एक तेज आवाज गूँजी
“सीधे खड़े हो जाओ!”
सबकी रीढ़ सीधी हो गई।
भीष्म सर लंबे, सख्त चेहरे वाले व्यक्ति थे। उनकी आँखों में अजीब सी स्थिरता थी जैसे वह सामने वाले के मन को पढ़ सकते हों।
उन्होंने बिना मुस्कुराए कहा
“तुममें से कितने लोग सफल होना चाहते हैं?”
सभी ने हाथ उठा दिए।
उन्होंने फिर पूछा
“कितने लोग सुबह पाँच बजे रोज़ उठ सकते हैं?”
आधे हाथ नीचे हो गए।
“कितने लोग रोज़ तीन घंटे अतिरिक्त मेहनत कर सकते हैं?”
और हाथ नीचे हो गए।
भीष्म सर हल्का सा मुस्कुराए।
“तुम सफलता नहीं चाहते। तुम उसका परिणाम चाहते हो। प्रक्रिया नहीं।”
अर्जुन के दिल में जैसे कोई बात सीधी उतर गई।
शिविर का पहला अभ्यास था दौड़।
पाँच किलोमीटर।
अर्जुन ने सोचा “मैं कर लूंगा।”
लेकिन दूसरे ही किलोमीटर में उसकी सांस फूलने लगी। पैरों में दर्द होने लगा।
राघव पीछे रह गया।
कई छात्र बीच में ही रुक गए।
अर्जुन भी रुकना चाहता था।
उसके मन ने कहा “बस कर। कोई ज़रूरी नहीं है।”
तभी भीष्म सर की आवाज आई
“जब शरीर थकता है, तो असली लड़ाई शुरू होती है। हार शरीर नहीं मानता, मन मानता है।”
अर्जुन ने दाँत भींच लिए।
वह दौड़ता रहा।
वह सबसे आगे नहीं था।
लेकिन वह रुका नहीं।
दौड़ खत्म हुई तो वह जमीन पर बैठ गया।
उसकी सांस तेज थी। शरीर कांप रहा था।
लेकिन उसके अंदर पहली बार एक हल्की सी चमक थी

“मैंने हार नहीं मानी।”
शाम को भीष्म सर ने सभी छात्रों को इकट्ठा किया।
“आज किसने खुद को हराया?”
कोई जवाब नहीं आया।
उन्होंने कहा
“सफलता दूसरों को हराने से नहीं मिलती। पहले खुद के बहानों को हराना पड़ता है।”
अर्जुन के मन में जैसे कोई दरवाज़ा खुल रहा था।
उसे समझ आने लगा
वह पढ़ाई में इसलिए नहीं हार रहा था क्योंकि वह कमजोर था।
वह इसलिए हार रहा था क्योंकि वह कोशिश से पहले ही डर जाता था।
वह असफलता से नहीं, अपमान से डरता था।
वह मेहनत से नहीं, तुलना से डरता था।
उस रात अर्जुन ने एक कागज निकाला।
उसने लिखा:
मैं रोज़ सुबह पाँच बजे उठूँगा।
मैं रोज़ कम से कम दो घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करूँगा।
मैं शिकायत नहीं करूँगा।
मैं अपने डर को लिखूँगा, छुपाऊँगा नहीं।
वह जानता था यह आसान नहीं होगा।
लेकिन पहली बार उसे लगा वह भाग नहीं रहा।
कुछ दिनों में फर्क दिखने लगा।
उसकी दिनचर्या बदल रही थी।
उसकी चाल बदल रही थी।
उसकी आँखों में थोड़ी दृढ़ता आ रही थी।
राघव ने एक दिन कहा
“तू बदल गया है यार।”
अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया
“शायद मैं पहले असली नहीं था।”
लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी।
अंदर का डर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
अभी भी रात में कभी-कभी उसे वही आवाज सुनाई देती

“अगर फिर से असफल हुआ तो?”
फर्क बस इतना था
अब वह उस आवाज से भागता नहीं था।
वह उसे सुनता था…
और फिर काम में लग जाता था।
उसे अभी नहीं पता था कि आगे और बड़ी परीक्षा आने वाली है।
अभी उसे गिरना भी था।
टूटना भी था।
लेकिन उस दिन, उस पाँच किलोमीटर की दौड़ के बाद,
एक चीज़ निश्चित हो चुकी थी
अर्जुन अब हार से डरने वाला लड़का नहीं रहा।
वह धीरे-धीरे अपने अंदर के योद्धा को जगा रहा था।
और हर योद्धा की कहानी एक हार से ही शुरू होती है

rajukumarchaudhary502010

WARRIOR MINDSET (अंदर के डर से लड़कर खुद की जीत तक)

rajukumarchaudhary502010