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🙏🙏किसीने कहां 'मोहब्बत' में जुदाई दर्द देती है, हा देती होगी, उसकी 'चुभन' उस मोहब्बत को ओर 'गहरा' करती होगी। जहां प्यार है वहां थोड़ी सी जुदाई का दर्द तो झेलना पड़ेगा। वह तो कान्हा भी अपने जीवन वृतांत में दिखलाकर गये है। मुझे लगता है कि राधा का विरह और विरह में भी एक संयम से ही कान्हा के नाम के आगे राधा का नाम पुकारने पर 'मुक्ति' मिलती होगी। प्यार सही में मुक्ति देता है बंधन तो 'माया' का रुप है। मोहब्बत में आयी जुदाई आंखों से आंसु की 'धारा' बहातीं है, उस धारा में बहना या संभलकर दर्द झेलना वह व्यक्ति पर 'निर्भर' रहता है। बहनें पर भी एक दर्द दिल को याद रखता है और संभलकर भी दो दिलों की धड़कन धड़कतीं रहतीं हैं। मोहब्बत इश्वर की बनायीं हुई एक अलग ही कायनात है।🦚🦚
एक वृक्ष के बीज को दफन किया, उसने अंकुरित होकर जीवन दिया। हवा, पानी और जमीन को शुद्ध किया, प्रकृति के नवसर्जन में सामिल हुआ। वह वृक्ष इतने से नहीं रुका, अपनी शाखाएं पक्षियों के लिए दे दी। तुम घोंसला बनाओं ओर अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाओ। वह इंसानों की तरह ईर्षा भाव कहां रखते हैं? कोई मुसाफ़िर आराम फरमाते हुए उन्हें देखता है तो उन्हें खुशी महसूस होती है, क्योंकी किसी के हृदय को छांव से शांति जो मिलती है। सुख जानें के बाद भी सूखी लकड़ी से किसी गरीब के चूल्हे पर भोजन पकाकर उसको अच्छा खाना मुहैया कराता है। वृक्ष सही में एक एक अच्छा मित्र हैं।
🙏🙏महेनत,मदद और मंत्रोच्चार यह तीनों इंसान की सोई हुई किस्मत भी जगा सकते हैं।🦚🦚 - Parmar Mayur
🙏🙏एक 'पाशविक' जानवर, जो मन भीतर भी पल रहा हो या हो, बस कर दो 'कत्ल उस जानवर' का, फिर देखो, हर दिन "इद की तरह खुशियां" लाता है।🦚🦚 - Parmar Mayur
🙏🙏सच्ची बातें हमेशा कड़वी होती है??? नहीं कभी नहीं। बस वह सोचने-विचारने वाले इंसान के नजरिए पर निर्भर है। सोचने वाला इंसान उसको दवा की तरह समझता है, तब वह ख़ुद को नुक्सान से बचा पायेगा। यदि सच्ची बातों को अपनी 'बेइज्जती या अपमान' समझता है, तो वहीं बातें उसके लिए फिर वह ज़हर बन जाएंगी या लगने लग जाएगी। सच में वह ज़हर नही है। पर सबसे ज्यादा नुक्सान उस नासमझ को ही होगा।🦚🦚
🙏🙏क्रोध के वक्त रखा मौन और मुश्किल समय में भी चहेरे पर हास्य रखने वाला इंसान 'समझदार सामर्थ्यवान' होता है।🦚🦚 - Parmar Mayur
🙏🙏जिंदगी में 'दोस्त' रखना है तो 'कर्ण' जैसा रखना चाहिए, और 'भाई' कुंभकरण जैसा होना चाहिए, विभिषण जैसा नही।🦚🦚
🙏🙏मैंने सुना है कि दो कप चाय से वर्षों पूराने दुश्मन भी दोस्त बन सकते हैं।🦚🦚
🙏🙏हम कोई तकलीफों में है, मन भीतर टेंशन बढ़ रहा है। तब हमें क्या करना चाहिए? वहीं हमें मालूम नहीं पड़ता है। हमारी जिंदगी में कुछ ना कुछ प्रोब्लेम्स रहेती है, इसका मतलब यह नहीं है कि हम उस प्रोब्लेम को दूर करने कि वज़ह उसमें ही उलझकर जिंदगी जिना ही छोड़ दे। उसमें उलझनें से टेंशन दूर नही होगी किन्तु और बढ़ेगी ऐसे वक्त पर हमें शांत चित्त से खुद उसका निराकरण ढूंढना चाहिए। यदि हमें नही मिल रहा है तो हमारे हितेषी मित्रों से राय लें या कोई अच्छी किताबों को पढ़ेंगे। उससे निराकरण अवश्य मिलेगा और हमारी टेंशन में राहत मिलेगी या दूर होगी। जिंदगी में जब मन ना लगे! मूड़ ओफ हो, तब हमें मन को राहत दे ऐसा कुछ करना चाहिए। जैसे कि एक फूल से दुसरे फूल पर उड़ती रंग-बिरंगे तितलियां देखनीं चाहिए, पर्वत से नीचे गिर रहे झरने देखने चाहिए, बह रही नदी की धाराओं को महसूस करना चाहिए, खुले आसमां में उड़ रहे पंखी देखने चाहिए, बस मित्रों की टोली के बीच रहकर "जिंदगी मिलेगी ना दोबारा" यह सोचकर जिंदगी जी लेनी चाहिए। बस ऐसे ही दिमाग़ को मानसिक पीड़ा से सुकून मिलेगा तब हृदय को अपने-आप एक अच्छी ऊर्जा का संचार मिलेगा।🦚🦚
🙏🙏हम खुद के लिए जीते हैं, ज़ीना भी चाहिए पर एक हद तक सही है। हमारे जीवन में आ रही खुशियां, ग़म, दर्द ए सब हमारे समय का एक हिस्सा है। जिसे हमे समझना चाहिए पर उसे समझकर खुद के लिए ही जीने का लगाव अच्छी बात नहीं है। कभी हमें हमारे 'अहम्' को त्याग कर किसी ओर के लिए भी जीना चाहिए, किसी की खुशी में ख़ुद की खुशी बन जानीं चाहिए, किसी के दर्दको दूर करने की वज़ह बन जाना चाहिए। हमें ख़ुद को इस तरह जीना चाहिए कि हमारी हिफाजत की दुआएं सब करे, सही है,,.?🦚🦚
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