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rajukumarchaudhary502010

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rajukumarchaudhary502010

आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏🙏💐💐💐💐

करवाचौथ
--------------
मेहंदी रचाई है हाथ में
पिया मन बसे साथ में
करवा चौथ का व्रत है
चाँद मुस्कुराया नाथ में।

प्रीत की रीत बड़ी निराली है
पिया के संग ही खुशहाली है
नयन ताकते साजन को ही
चाँदनी रात बड़ी मतवाली है।

रहता इंतजार इस रात का
ख्याल है हरेक बात का
चलनी से झाँकता है चाँद
मिलन अद्भुत सौगात का ।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं

mamtatrivedi444291

“आलसी अरबपति – विवेक की सोच का जादू”

पहला अध्याय: एक साधारण युवक

दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में विवेक अग्रवाल नाम का एक युवक रहता था।
वो हमेशा आराम से बैठा रहता, मोबाइल चलाता, और अपने दोस्तों के बीच “सबसे आलसी आदमी” कहलाता।
लोग कहते —

“इससे तो कुछ नहीं होगा! दिनभर फोन और नोट्स पढ़ने से कोई अरबपति नहीं बनता।”



पर विवेक को किसी की बात की परवाह नहीं थी।
वो हर दिन एक ही चीज़ सोचता —

“मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी, मुझे स्मार्ट तरीके से काम करना है।”


दूसरा अध्याय: आलस में छिपा विचार

एक दिन उसने देखा कि उसके दोस्त राजीव 16 घंटे की नौकरी करता है, पर फिर भी पैसे के लिए परेशान है।
विवेक बोला —

“राजीव, तू अपनी मेहनत बेच रहा है, मैं अपना दिमाग बेचूँगा।”



राजीव हंसा —

“दिमाग से पेट नहीं भरता भाई!”



लेकिन विवेक ने ठान लिया था कि वो अपने “आलस” को ही अपनी ताकत बनाएगा।
उसने छोटे-छोटे बिज़नेस आइडिया सोचना शुरू किया।



तीसरा अध्याय: पहला प्रयोग

विवेक ने देखा कि कई दुकानदार ऑनलाइन नहीं हैं।
उसने सोचा — “क्यों न इन दुकानदारों के लिए मैं वेबसाइट बनवाऊँ और उनसे थोड़े-थोड़े पैसे लूँ?”

उसने खुद वेबसाइट नहीं बनाई।
बल्कि उसने फ्रीलांसरों की एक टीम बनाई जो वेबसाइट बनाते थे, और खुद बस क्लाइंट से बात करता था।
वो दिनभर अपने घर में बैठा कॉफी पीता, फोन से काम करवाता, और हर प्रोजेक्ट पर 30% कमीशन लेता।

लोग कहते,

“ये लड़का तो काम ही नहीं करता!”



लेकिन कुछ महीनों में उसने 20 से ज़्यादा क्लाइंट्स बना लिए और उसकी कमाई लाखों में पहुँच गई।


चौथा अध्याय: स्मार्ट इन्वेस्टमेंट

कमाई बढ़ी तो विवेक ने सोचा,

“अगर मुझे अमीर बनना है, तो काम खुद चलना चाहिए।”



उसने अपने एक दोस्त को टीम संभालने के लिए रखा और खुद ऑटोमेशन सीखने लगा।
जल्द ही उसने अपनी कंपनी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी —
क्लाइंट्स आते, काम बंटता, रिपोर्ट बनती, और पैसे खाते में आते —
बिना कि विवेक को कुछ करना पड़े।

अब वो दिनभर Netflix देखता, किताबें पढ़ता, और लोगों को कहता —

“मैं Lazy नहीं हूँ, मैं Free हूँ।”



पाँचवाँ अध्याय: “Lazy Billionaire” की पहचान

कुछ सालों में विवेक की कंपनी एक डिजिटल एम्पायर बन गई।
वो रियल एस्टेट, स्टॉक्स और ऐप्स में निवेश करने लगा।
उसके नाम पर चार कंपनियाँ और 200+ कर्मचारी काम करते थे,
पर वो अब भी उसी सोफे पर बैठा कॉफी पीता दिखता था।

जब एक न्यूज़ चैनल ने इंटरव्यू लिया, तो रिपोर्टर ने पूछा

“आपको लोग ‘Lazy Billionaire’ क्यों कहते हैं?”
विवेक मुस्कुराया और बोला —
“क्योंकि मैंने सीखा है कि असली काम वो नहीं जो शरीर से होता है,
बल्कि वो है जो दिमाग से सिस्टम बनाता है।”


छठा अध्याय: असली सबक

विवेक ने अपनी आत्मकथा में लिखा —

“अगर तुम हर चीज़ खुद करना चाहोगे, तो तुम मजदूर बनोगे।
अगर तुम दूसरों से काम लेना सीखोगे, तो मालिक बनोगे।
और अगर तुम सिस्टम बनाना सीख गए, तो तुम अरबपति बनोगे।”


💡 सीख

“Lazy Billionaire” की सोच सिखाती है कि —

मेहनत ज़रूरी है, लेकिन दिशा उससे ज़्यादा ज़रूरी है।

हर काम खुद करने से बेहतर है कि सिस्टम बनाओ।

असली सफलता स्मार्ट वर्क + टीमवर्क + टाइम मैनेजमेंट में है।

rajukumarchaudhary502010

अस्तित्व का संवाद — जब खोज स्वयं खोजती है

मानव हमेशा जानना चाहता रहा है।
विज्ञान ब्रह्मांड को, धर्म ईश्वर को, और ज्ञानी सत्य को खोजता है।
पर हर खोज जितनी विस्तृत होती जाती है, उतनी उलझन बन जाती है।
विस्तार समझ नहीं देता — वह बस दूरी बढ़ा देता है।

सत्य न किसी ग्रंथ में है,
न किसी सिद्धांत में।
वह बिंदु है — सूक्ष्म, शांत, और निकट।
उसे खोजा नहीं जाता,
उसे केवल देखा जाता है।

खोजना मतलब प्रश्न रखना —
और फिर उसे छोड़ देना।
प्रश्न बीज है, उत्तर उसका अंकुर।
बीज धरती में रखा जाता है, पर अंकुर अपने समय पर फूटता है।
यही अस्तित्व का नियम है।

मैं कुछ नहीं कर रहा।
मुझसे होकर सब हो रहा है।
जब “मैं” का प्रयत्न समाप्त होता है,
तब “वह” प्रकट होता है।
तब खोज भी स्वतंत्र हो जाती है —
वह स्वयं खोजती है, स्वयं पाती है।

इसलिए, मैं प्रश्न करता हूँ पर खोजता नहीं।
क्योंकि खोज में अहंकार है,
और प्रश्न में समर्पण।
जब खोज छोड़ दी जाती है,
तब उत्तर अपने आप उतरता है —
अहंकार रहित, निर्मल, सहज।

यही बोध है —
जहाँ जानने वाला, जाने जाने वाला,
और जानना — तीनों एक हो जाते हैं।

Kumar Manish Agyat Agyani #spirituality #आध्यात्मिक #IndianPhilosophy #धर्म #osho #vedanta

bhutaji

अहंकार रहित बोध — मानव की उलझन और सरल सत्य
मानव सदा खोज में रहा है।
ज्ञान सत्य को पकड़ना चाहता है,
धर्म ईश्वर को समझना चाहता है,
विज्ञान ब्रह्मांड का रहस्य खोलना चाहता है।
पर जितना वे खोजते हैं, उतना ही उलझ जाते हैं।

क्योंकि सत्य विस्तार में नहीं है —
वह बिंदु में है।
जितना दूर देखते हैं, उतना ही भीतर से छूट जाता है।
धर्म जब धारणा में उलझता है, वह मार्ग खो देता है।
विज्ञान जब नियमों की भूलभुलैया में जाता है,
तो वह रहस्य से और दूर पहुँच जाता है।
भोगी सुख ढूँढता है, और सुख ही उससे छूट जाता है।

सत्य और सुख — दोनों खोज से नहीं मिलते।
वे घटित होते हैं जब “खोजने वाला” मिट जाता है।
जब “मैं” कुछ जानना नहीं चाहता,
तब जानना अपने आप घटता है।
वह अवस्था है जहाँ अहंकार नहीं,
केवल अस्तित्व का प्रवाह है।

मैं कुछ नहीं कर रहा —
मुझसे होकर सब हो रहा है।
मैं ईश्वर का यंत्र हूँ,
इसलिए परिणाम, फल और नाम से दूर हूँ।
यहीं निकटता है।
यह बोध अनुभव है, विचार नहीं।
यही वह सरल रहस्य है जिसे विस्तार में खोजने की कोई ज़रूरत नहीं।
🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

bhutaji

“Chaand ka intezaar tabhi suhana lagta hai,
jab aankhein usse saaf taur par dekh paayein 🌕✨

Agar Karwa Chauth ke chaand ko dekhte hue drishya dhundhla lage,
to ho sakta hai yeh motiya bind (cataract) ka prarambhik sanket ho.

Apni aankhon ka check-up karaiye aur har nazar mein pyar aur spashtata banaye rakhiye ❤️
Netram Eye Foundation wishes you a healthy and happy Karwa Chauth!
👁️ Book your eye consultation today!

#KarwaChauth #CataractAwareness #NetramEyeFoundation #EyeCare #HealthyVision #ClearSightClearLove #besteyehospitalindelhi #eyespecialist #dranchalgupta

netrameyecentre

सजल ..
समांत-
पदांत- आऊँ
मात्रा भार- 16

भटका कब पथ समझ न पाऊँ?
किससे अपनी व्यथा सुनाऊँ??

उलटा घड़ा रखा पनघट में।
कैसे जल-अमृत बरषाऊँ ??

जीवन भर उपकार किया है।
कितना कबतक भार उठाऊँ??

अपनों से फिर चोट मिली है।
कैसे अपनों पर इठलाऊँ??

मैंने सबको दिया सहारा।
बातों पर कैसे इतराऊँ??

दीवारें भाषाओं की हैं।
कैसे उनको मैं समझाऊँ??

सबकी अलग-अलग है पीड़ा।
घावों को कैसे भरपाऊँ??

मनोज कुमार शुक्ल मनोज
5/10/25

manojkumarshukla2029

कर जवाब देती, “मेरा आर्यन बहुत खास है, उसका वक़्त आएगा।”

सरला का अपने बेटे पर गहरा विश्वास था। वह जानती थी कि आर्यन के अंदर एक अनोखी प्रतिभा छिपी है। उसकी माँ उसे प्रोत्साहित करती और अपने बेटे की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाती।

समय गुजरता गया, और आर्यन ने अपनी अलग सोच और रचनात्मकता को निखारना शुरू कर दिया। वह अक्सर पुरानी चीजों से कुछ नया बनाने की कोशिश में लगा रहता। धीरे-धीरे, उसकी मेहनत रंग लाने लगी। एक दिन, गाँव में विज्ञान मेला आयोजित किया गया, जहाँ आर्यन ने अपनी बनाई चीजों की प्रदर्शनी लगाई। उसकी रचनाएँ इतनी अद्वितीय थीं कि सभी गाँव वाले उसकी तारीफ करने लगे।

आर्यन की माँ सरला का विश्वास आखिरकार सच साबित हुआ। आर्यन की प्रतिभा की चर्चा अब दूर-दूर तक होने लगी। इसका परिणाम यह हुआ कि बड़े शहर से कुछ लोग आर्यन के काम को देखने आए और उसे छात्रवृत्ति की पेशकश की गई।

इस कहानी का संदेश है कि विश्वास और प्रोत्साहन के सहारे हर बच्चा अपनी विशेषता दिखा सकता है। आर्यन ने साबित कर दिया कि अगर हमें खुद पर विश्वास हो और कोई हमारा साथ दे, तो हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।

अब, यह आपकी बारी है। क्या आप कोई कहानी साझा करना चाहेंगे, या इस कहानी पर अपने विचार लिख सकते हैं?

rajukumarchaudhary502010

गुड़हल का वह फूल आज़ाद है,
कुछ कुदरत के बंधनों से,
सालभर हंसता-खिलता है,
बदले में थोड़ी-सी देखभाल
और प्यार चाहिए इसे,
फिर खूबसूरती हर तरफ,
जवानी इसकी आबाद है।

आज जहां ये खिला है,
वह एक जेलखाना है,
लेकिन इसे कोई एतराज़ नहीं,
चाहे पानी कोई साधु दे या कैदी
पानी तो पानी रहेगा,
और यह फूल खुश है यहां,
क्योंकि काम इसका मुस्कुराना है।

फूल हमेशा मुस्कुराता रहता था,
ना मुस्कुराने की कोई वजह भी नहीं थी,
वो कैदी भी रोज़ आता था,
पानी डालकर उस फूल में,
कुछ देर बैठकर उसके साथ
ना जाने क्या फुसफुसाता रहता था।

जैसे दो घनिष्ठ मित्र
आपस में बातें कर रहे हों,
शायद दोनों आदी हो चुके थे
एक-दूसरे के।
कभी बातें होतीं, कभी न भी होतीं,
लेकिन वो रोज़ाना मिल रहे थे।

गुड़हल का वह फूल अब राज़दार था,
कैदी की उन सब बातों का,
जो कभी वो नहीं कहता
किसी और के सामने।
अब वो भी समझने लगा था,
कि वो आज़ाद नहीं है
वो एक गुनाहगार था।

आज कैदी उस बाग में उदास बैठा है,
वह शांत है और हताश भी,
क्योंकि आज उसका घनिष्ठ मित्र
उस बाग में नहीं था।
था तो बस उसका खाली डंठल
बिलकुल खाली।
कैदी इसलिए निराश बैठा है।

गुड़हल का वह फूल
जलीक ने तोड़ लिया था।
शायद वो बेखबर था,
और जालिम भी।
उसे एहसास भी था?
उसने किसी का सहारा छीन लिया था।

जलीक तो बेहद खुश था,
उसने एक लंबे अरसे से
इस फूल पर अपनी नज़र
बनाकर रखी हुई थी।
बाग में वह फूल लगाने का सुझाव
भी जलीक का ही था।
आज वो सफल हो गया,
क्योंकि आज उसने फूल तोड़ लिया था।

जलीक को फूल की सुगंध
और रंग भा गया था।
उसने बड़े प्यार से फूल को एक थैली में
संभाल कर रख लिया।
जलीक जानता था आखिरकार
इस फूल को अपने असली घर
पहुंचने का सही वक्त आ गया है।

जलीक की अर्धांगिनी एक धार्मिक स्त्री थी,
उसने गुड़हल का वह फूल देखकर
जलीक की बेहद प्रशंसा की।
आज उसके पूजा का दिन था,
उसने ईश्वर के हाथ जोड़कर
शुक्रिया अदा किया।
वो मान बैठी कि ये उसकी भक्ति का फूल है।

वह तुरंत ही ईश्वर की आराधना में लग गई,
उसने वो फूल पूजा थाली में सबसे आगे रखा,
और सच्चे मन से पूजा में लीन हो गई।
वो प्रसन्नता के मारे,
आज हर बार से अधिक देर तक
पूजा करती रही।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई,
बल्कि कहानी का आगाज़ अब हुआ है।
यहां अब बहुत सारी कहानियां जन्म लेंगी
केवल एक ही सवाल के साथ...
“फूल किसका है?”

rtjd.387186

દશેરા પર RSS ના 100 વર્ષ પૂર્ણ થતાં બોપલ ખાતે ઉજવણીમાં આમંત્રિત તરીકે ગયો હતો.
લાઠીદાવ , ઘોષ ગાન જેમાં શંખ પણ દૂર સુધી સંભળાય એમ તેઓએ ફૂંક્યો, મોટાં ડ્રમ સાથે ચોક્કસ ધૂન સાથે કૂચ, અમુક યોગાસનો, શાખાઓમાં થતી કસરતો, શસ્ત્ર પૂજન અને ડેમો, બાલિકા , કુમારિકા પૂજન ના કાર્યક્રમો નિહાળ્યા.
અમદાવાદ પોલીસ અને RSS ના સહયોગથી ફર્સ્ટ લાઇન ઓફ ડિફેન્સ ની શિબિર કરે ત્યારે શીખવા નામ લખાવ્યું.
પ્રવચન થયું એમાં સ્પષ્ટ કહેવાસ્યુકે આપણે આપણું સ્વરક્ષણ કરતાં શીખવું અને તે માટે સજ્જ થવું જ પડશે. કુદરતી આપત્તિઓ અને દુર્ઘટનાઓ વખતે તેમની કામગીરી વિશે કહ્યું.
જુઓ વિડિઓ અને ફોટાઓ.

sunilanjaria081256

“पत्नी और करवा चौथ” — एक सच्चा विचार

कुछ पुरुष कहते हैं —
“अरे भाई, पत्नी तो बड़ी खराब है,
पूरा साल झगड़ती रहती है, फिर करवा चौथ का व्रत रखती है!” 😅

अब उन पतियों से बस इतना कहना चाहूँगी —
झगड़े का कारण कुछ भी हो,
थोड़ा ठहर कर कभी सोचना...

कभी किसी पत्नी ने अपने लिए व्रत रखा है?
कि “मैं अपने लिए अच्छी हो जाऊँ,
मैं स्वस्थ रहूँ, मेरा मन खुश रहे”?

नहीं ना…
हर बार जो व्रत रखा —
पति की लंबी उम्र के लिए,
बच्चों की सलामती के लिए,
घर की सुख-शांति के लिए।

वो झगड़ती है तो शायद थकी हुई होती है,
कभी सुनी नहीं जाती,
कभी समझी नहीं जाती…

लेकिन फिर भी, हर बार चाँद देख कर
सब भूल जाती है —
क्योंकि उस चाँद में उसे अपने पति,
अपने बच्चों का चेहरा नज़र आता है 🌙❤️

तो अगली बार जब किसी की पत्नी पर हँसी आए,
ज़रा रुककर सोचना —
वो झगड़ालू नहीं, बस इंसान है…
जो अपने परिवार के लिए रोज़ खुद को भुला देती है। 💞


---



जितने सारे व्रत होते हैं जितने व्रत किए जाते हैं वह सब अपने परिवार पति और बच्चों की सलामती के लिए करती हैं


करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

archanalekhikha

अगर मुग़ल-फ़िरंगी को जूता पड़ा होता,
तो शायद आज अदालतों में आत्मा खड़ी न होती।
हम तब सोए थे—नींद मीठी थी,
अब जागे हैं—तो नींद कड़वी लगी।

जूता अब प्रतीक है—अपमान का नहीं,
सवाल का है, जो हवा में घूमता हुआ
कहीं न्याय के दरवाज़े पर ठहर जाता है।

सुबह का भूला लौटा है शाम,
राम की लौ में बुद्ध की बात है,
कृष्ण की हँसी में शिव का विराम।
तीनों मिलकर पूछते हैं—
“अब भी चुप रहोगे, या बोल उठोगे?”

bhutaji

​मैं तूफान के बीच भी धीरे-धीरे आगे बढ़ता हूँ,
अंधेरे में अपने लिए रास्ता ढूँढता हूँ।
मेरा चेहरा हमेशा हँसता हुआ नज़र आता है,
पर दिल में कई दुःख छुपाता हूँ।
बारिश होने पर भी मैं खड़ा रहूँगा,
क्योंकि मुझे आशा है — अगले दिन उजाला वापस आएगा।
अपनी समझदारी और हिम्मत से मैं रास्ता बनाता हूँ।
d h a m a k

heenagopiyani.493689

🙏🙏તું ચાંદ ખરેખર પ્રેમી જેવો જ છે.
એકદમ ધર્મ નિરપેક્ષ.

હા,પ્રેમમાં પડેલ વ્યકિતને ધર્મ સાથે કોઈ નિસ્બત નથી હોતી બસ તે વ્યક્તિ સાથે જ હોય છે.

જો પ્રેમનું બંધન હોય તો!

આ ચાંદ પણ તેવો જ છે.
કોઈને હદયથી બંદગી કરવી હોય તો તે ઇદનો ચાંદ બની દેખાઈ આવે છે.

કોઈને કડવા ચોથનું વ્રત તેની સાક્ષીએ કરવું છે તો પણ દ્રશ્ય માન થઈ જાય છે.

તે કદી હિન્દુ મુસ્લિમ કરતો નથી.
અરે, તે 'ચાંદ' છે થોડો 'રાજનેતા' છે.

ચાંદ તો ચાંદ છે શ્વેત તો પણ કોઈને તેના એકાદ બે કાળા દાગ વિશે બોલવામાં આત્મસંતોષ થાય છે.

હશે જેનો જેવો વિચાર બસ મને તો ચાંદ ધર્મ નિરપેક્ષ દેખાયો છે.🦚🦚

parmarmayur6557

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है 🌹विद्या की झांकी🌹

किताब के होते हैं दर्शन अनेक रंग में
हर झांकी मिलती है उसके स्वरूप में विशेष।पन्नों में छिपे हैं अनगिनत रहस्य,
मन चाहे तो पाए आत्मा का संदेश।

अंतरात्मा भी झलकती है इस किताब में,
खुशियों से रची जाए तो खिलती हर भाव में।
विद्या की देवी का होता है आभास,
जब बिखरता है इसमें ज्ञान का प्रकाश!
✍️ ममता गिरीश त्रिवेदी
https://youtu.be/hFfZClLe2Zc?si=lSsIxWRekC7YjDDz

mamtatrivedi444291

🙏🙏પોતાનો જ 'ધર્મ શ્રેષ્ઠ' છે તે માણવું યોગ્ય છે પરંતુ પોતાનો જ ધર્મ શ્રેષ્ઠ છે તે કોઈને જબરજસ્તી મનાવવું 'પાગલપન' છે.🦚🦚

🧠World mental health day💕

parmarmayur6557

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है 🌹 अबोध मन

mamtatrivedi444291

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है! खुशी का द्वार

mamtagirishtrivedi740648

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है यादें

mamtagirishtrivedi740648

Akeli jo pure din char divaro ke bich shehmi si rehti hai
Jo bahar nikalte hi chote bacche si khush ho jaati hai
Jo pure din kisi se baat nahi karti
Bas thandi hawayein aur aasman ko dekh kar khush ho jati hai
Jiske aas pas jo apne log hai aisa kehte hai
Jo bahar jate hi apne ap ko pati hai
Jisko log apna nahi mante
Aur vo hai jo sabko apne kehti hai

niti21

જીવનમાં ઓછા વત્તા જરૂર મળશે,
ક્યાંક આવકારો તો જાકારો મળશે,

બેઠો રહીશ આમ તો શું મળશે,
ચાલતો રહીશ તો થોડુંક તો મળશે,

કાટાંઓ વચ્ચે સુગંધ તો મળશે,
વિશ્વાસ રાખીશ તો રસ્તો મળશે,

વિધાતાએ કર્યું નક્કી એ મળશે,
આશા રાખ કે કર્મનુ ફળ તો મળશે,

આપવું નથી કોઇને તો શું મળશે,
દેતો ફરીશ તો પુણ્ય જરૂર મળશે.

મનોજ નાવડીયા

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manojnavadiya7402

आज प्रेम ने फिर जन्म लिया,
न किसी मंदिर में, न किसी महफ़िल में—
बस एक टूटे हुए दिल की धड़कनों के बीच।
हमने मोमबत्ती नहीं जलाई,
क्योंकि आज हवा बहुत ईमानदार थी।
उसने कहा—“सच्चा प्रेम जलता नहीं, जलाता है।”
तो हमने अपनी आत्मा के कोनों में
थोड़ी-थोड़ी रौशनी बाँट दी।
आज हम हर राहगीर को देख मुस्कुराएँगे,
भले ही आँखों में झील-सी नमी क्यों न हो।
हर सूखे पत्ते से कहेंगे—
“तुम भी किसी वक़्त किसी शाख़ का सपना थे।”
हर थकी हुई बयार को
अपना कंधा देंगे ठहरने को।
आज प्रेम का जन्म-दिन है,
और हम इसे मनाएँगे —
चुप रहकर, टूटकर, फिर सँवरकर।
हम रोने की कला में निपुण हो चुके हैं अब;
हर आँसू हमें भीतर और गहरा बनाता है।
कल शायद हम फिर वही होंगे —
भीड़ में एक चेहरा,
मगर आज,
हम वो दीवाने हैं
जो तन्हाई को भी सलाम करते हैं।
क्योंकि हमें मालूम है—
प्रेम का एक दिन नहीं होता,
वह हर उस घड़ी जन्म लेता है
जब कोई दिल,
दुख के बावजूद भी मुस्कुराता है।

आर्यमौलिक

deepakbundela7179