Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

અહીં ફક્ત એ માણસના ઓળખની વાત છે,જે તમારી સમીપ છે. જીવનમાં ઘણા લોકો આપણી નજીક હોય છે,પણ તેમાંથી સાચા અને જૂઠા લોકોને ઓળખવા kayi રીતે તેના વિશે કાવ્યમાં જણાવ્યું છે.

maheshpatel.606781

જય શ્રી કૃષ્ણ,સુપ્રભાત

thakorpushpabensorabji9973

*દૂર ના રહો નજીક રહો,ઍટલા નજીક ન રહો કે તદ્રુપ થવું પડે.
અને ઍટલા દૂર ન રહો કે એકલા રહેવું પડે.*

savdanjimakwana3600

The duty of being a doctor earns me both prayers and curses my destiny will be shaped by my own karma.

manishakumari419144

My heart like ocean version 1 is out now.
https://youtu.be/7KjKC2YBPXI?si=39Uq8sWHEOvLRL5V

rj99002893

"यह फोटो मेरी Botany Lab के बाहर बने उस छोटे से तालाब की है। एग्जाम के दिनों में जब भी मैं कॉलेज जाती, यह तालाब मेरा स्वागत एक नए खिले हुए कमल के साथ करता था। रोज़ एक नया फूल, एक नई उम्मीद और एक प्यारी सी मुस्कान। 🌸 बस उसे निहारना, उसकी फोटो क्लिक करना और एक सुकून के साथ घर लौट जाना। क्या आपके कॉलेज में भी ऐसी कोई जगह थी जो आपको सुकून देती थी? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!"

leoleo315756

good night..

nikitavinzuda6548

energy for living

kattupayas.101947

Story behind everyone

kattupayas.101947

Thanks to music.. still iam alive

kattupayas.101947

Music a beautiful concept

kattupayas.101947

Thinking about music

kattupayas.101947

पानी और जीवन
जाने कितने ही
आकार बदलता है
जब ये आसमान
से आता है तो
कई प्यासे मन
को खुशियाँ दे
कर जाता है
कभी ये पिघल
कर बह जाता हे
जब यह फुब्बारे
में सजता है
तो छोटी बूंदों
सा चमकता है
और जब जाता
है तो भाप सा
सूरज की किरणों
जा खोता है
गम गिन माहौल
पे यह तड़प सा
काला बदल बन
मंडराता है पर
जब ये बरसता है
तो खुशहाली की
खुसबूदार लता सी
बन कर फ़ैल जाता
जीवन और पानी
यही कहानी
कितनो को तरसाता
हा कितनो को तडपता
पर दुःख और खुशियाँ
सच ये हमे बरस
के दिखता है

आशीष जैन (श्रीचंद)

jainashish0014

कलम आज फिर हुयी
शांत किसी शब्द के
लिखने पर स्याही हुयी
फिर आज ख़तम के
कुछ शब्दों को हमने
मोड़ना चाहा पर
कलम हुयी आज फिर
शांत के मंजर आज
जुबान पर था वो मंजर
जो तड़पाता था हमको
हरपल जिसकी याद
हमको है रुला जाती
गला है हमारा रुंधा
पड़ा हाथ में कम्पन
भरा पड़ा कुछ और
अगर हम याद करे
दिल शीशे सा बिखर गया
के काश हमे तुम मिल जाते
तो ये रात की बेचेनी न होती
के काश तुम जो मिल जाते तो
यूँ हम शायद करवटे न लेते
हाँ तेरी ही यादो ने हमको
बहुत बहुत तडपाया है
हाँ तेरी ही सूरत ने हमको
कितना हमे रुलाया है
आजा के जीवन है छोटा
है दुनिया तेरी भी छोटी
आजा के याद है आती
याद से आँखों में मोती

आशीष जैन (श्रीचंद्रजी)

jainashish0014

खड़े हो यूँ हाथों में गुलदस्ता लिए तुम,
अभी तो रगों में ज़हर उतरना बाकी है,
जलकर ख़ाक होना है अभी, ठहर जाओ तुम,
अभी तो उनका दुल्हन बनते देखना बाकी है।

nileshrajput842gmail.com162713

You're Not Alone
You're Just Disconnected

ziddiceo

Everyone Dreams

ziddiceo

दोस्तो मेरी पहली रचना प्रकाशित हुए हैं l आप सभी मेरी रचना पढ़िए और Comment,rating करे l
उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी l

apki Abantika 🌸✨️🦋

leoleo315756

​थॉमस एडिसन का अंधेरा: हजार असफलताओं की रौशनी

​यह 1870 के दशक की बात है, जब न्यूयॉर्क की सड़कों पर गैस लैंपों की मद्धिम रौशनी ही रात का सहारा थी। इसी शहर की एक छोटी-सी प्रयोगशाला में थॉमस एडिसन नाम का एक व्यक्ति दिन-रात एक धुन में लगा रहता था। उसका सपना था, बिजली से जलने वाला ऐसा बल्ब बनाना जो हर घर को रोशन कर दे।

​एक दिन शाम को, एडिसन अपनी प्रयोगशाला में तार और कांच के बल्बों के ढेर के बीच बैठा था। उसके सहायक, जेम्स, ने झुँझलाहट भरे स्वर में कहा, "थॉमस, हमने फिर कोशिश की, यह फिलामेंट भी टूट गया! यह हजारवीं बार है जब हम फेल हुए हैं।"

​एडिसन ने मुस्कुराते हुए जेम्स की तरफ देखा। उसकी दाढ़ी पर कार्बन के निशान थे और आँखें नींद से लाल थीं, लेकिन चेहरे पर हार का कोई भाव नहीं था। "जेम्स," एडिसन ने कहा, "हम फेल नहीं हुए हैं। हमें बस यह पता चला है कि 999 ऐसे तरीके हैं जिनसे बल्ब नहीं जलता।"

​जेम्स ने गहरी सांस ली, "लेकिन हम कब तक ऐसे ही प्रयोग करते रहेंगे? बाजार में लोग हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। वे कहते हैं, 'यह सनकी आदमी अंधेरे में रौशनी ढूंढ रहा है!'"

​एडिसन उठ खड़ा हुआ। उसने एक पुराना टूटा हुआ फिलामेंट उठाया और उसे अपनी उंगलियों के बीच घुमाया। "जेम्स, इतिहास में कोई भी महान आविष्कार आसानी से नहीं हुआ है। क्या तुम्हें लगता है ग्राहम बेल ने एक बार में टेलीफोन बना दिया होगा? या राइट बंधुओं ने पहली उड़ान में ही सफलता पा ली होगी?"

​"पर हमें आगे क्या करना चाहिए?" जेम्स ने पूछा।

​"हमें सिर्फ एक बार सही तरीका खोजना है," एडिसन ने दृढ़ता से कहा, "एक बार। और जब हम उसे ढूंढ लेंगे, तो पूरी दुनिया रोशनी से जगमगा उठेगी।"

​अगले कुछ हफ्तों तक, एडिसन ने हर संभव सामग्री पर प्रयोग किया। प्लैटिनम, लकड़ी के रेशे, धातु के तार—वह कुछ भी छोड़ने को तैयार नहीं था। उसकी टीम थक चुकी थी, लेकिन एडिसन का जुनून कम नहीं हुआ था।

​एक रात, जब सब सो रहे थे, एडिसन को एक विचार आया। उसने बांस के बारीक रेशों को कार्बन से उपचारित किया। उसने अपनी धड़कनें रोके हुए उस फिलामेंट को बल्ब में लगाया और स्विच ऑन किया।

​एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर, एक हल्की पीली रौशनी पूरे कमरे में फैल गई। वह रौशनी लगातार जलती रही—एक घंटे, दो घंटे, चार घंटे... चालीस घंटे तक!
​जेम्स और बाकी सहायक दौड़ते हुए आए। उनकी आँखों में अविश्वास और खुशी के आँसू थे।
​"हमने कर दिखाया!" जेम्स चिल्लाया।

​एडिसन ने उस जलते हुए बल्ब को देखा, उसकी आँखों में गहरी संतुष्टि थी। "हाँ, जेम्स। हमने कर दिखाया। और इस बार हमें यह भी नहीं पता चला कि कितने और तरीके थे जिनसे यह काम नहीं करता।"
​थॉमस एडिसन की इस जीत ने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। यह सिर्फ एक बल्ब का आविष्कार नहीं था, यह इस बात का प्रमाण था कि 'असफलता' सिर्फ एक कदम है सफलता की सीढ़ी पर, बशर्ते आप हार न मानें। उसका अंधेरा अब दुनिया की रौशनी बन चुका था

a9560

उसने बड़े आसानी से कह दिया –
कल मरो तो आज मर जाओ,
और अच्छा है… जल्दी मर जाओ।
आज मेरी आख़िरी उम्मीद भी टूट गई,
अब मन नहीं करता कुछ लिखने का…
क्योंकि अब भीतर कुछ बचा ही नहीं।
जिसे अपना सब कुछ माना था,
उसी के आख़िरी शब्द ज़हर बन गए।
अब क्या रखूँ उम्मीद…
जब सांसों की कीमत
उसी की नज़रों में शून्य हो गई।

archanalekhikha

स्वामी विवेकानंद : शिकागो की गर्जना

सन् 1893, शिकागो का विशाल कोलंबस हॉल। चारों तरफ विद्वानों, पादरियों और दार्शनिकों की भीड़ थी। गेरुए वस्त्र पहने एक भारतीय युवक कोने में शांत बैठा था। उसके मन में उथल-पुथल थी, पर चेहरा स्थिर।

आयोजक ने आवाज दी, "अब भारत से स्वामी विवेकानंद अपना वक्तव्य रखेंगे।"

विवेकानंद मंच पर आए। हजारों आँखें उन्हें संदेह और कौतूहल से देख रही थीं। उन्होंने गहरी सांस ली और कहा, "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों!"

इतना सुनते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दो मिनट तक तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।

भाषण के बाद, जब विवेकानंद बाहर निकले, तो प्रोफेसर राइट ने उनसे पूछा, "स्वामी जी, आपने संबोधन में 'भाइयों और बहनों' ही क्यों चुना? यहाँ तो सब लेडीज एंड जेंटलमैन कह रहे थे।"

विवेकानंद मुस्कुराए, "प्रोफेसर, बाकी दुनिया के लिए संबंध औपचारिक हो सकते हैं, लेकिन मेरे भारत के लिए पूरा विश्व एक परिवार है। मैंने सिर्फ सत्य को पुकारा था।"

तभी एक अहंकारी विदेशी विद्वान पास आया और व्यंग्य से बोला, "साधु जी, आपके देश में तो इतनी गरीबी है, आप यहाँ धर्म की बात करने आए हैं? क्या धर्म पेट भर सकता है?"

विवेकानंद की आँखों में एक चमक उभरी, "महोदय, भूखे पेट धर्म नहीं किया जाता, यह सच है। लेकिन जिस संस्कृति के पास हजारों वर्षों का आध्यात्मिक धन हो, वह दरिद्र कैसे हो सकती है? हम रोटी मांगने नहीं, दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाने आए हैं।"

उस रात विवेकानंद को एक अमीर परिवार में ठहराया गया। मखमली बिस्तर और ऐशो-आराम देखकर उनकी आँखों में आंसू आ गए। उन्होंने खुद से कहा, "मेरे देश के लोग घास फूस की झोपड़ियों में सो रहे हैं और मैं यहाँ इस विलासिता में? हे माँ, क्या इसीलिए मैं यहाँ आया हूँ?"

अगले दिन, एक पत्रकार ने उनसे पूछा, "स्वामी जी, भारत को बदलने के लिए सबसे जरूरी क्या है?"
विवेकानंद ने दृढ़ता से जवाब दिया, "आत्मविश्वास। भारत को अपनी शक्ति पहचाननी होगी। उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"

शिकागो की उस सभा ने दुनिया को बता दिया कि भारत का गौरव उसकी मिट्टी में नहीं, उसके विचारों में है। स्वामी जी ने न केवल हिंदुत्व का मान बढ़ाया, बल्कि मानवता को एक सूत्र में पिरोने का मंत्र दिया। उनके उस भाषण ने गुलाम भारत के सोए हुए स्वाभिमान को जगा दिया, जिसकी गूँज आज भी इतिहास के पन्नों में जीवंत है।

a9560

अभी के दौर में ऐसा है कि अपने धर्म को माननेवाले लोग 'अपने धर्म को ही श्रेष्ठ' मानते हैं।

यह मानना भी चाहिए
कोई ग़लत बात नहीं है।

किन्तु मेरा 'धर्म ही श्रेष्ठ' है, यह साबित करने में 'अधर्म करना' सबसे बुरी बात है।

अपने धर्म के प्रति प्रेम रखना और मानना चाहिए ।
ऐसे ही अन्य धर्मों के प्रति आदर भाव भी व्यक्त करना चाहिए।

हमारी जो यह सोच है तो एक अच्छे धर्म को माननेवाले अच्छे व्यक्ति में हमारी गणना सत्य के साथ संपादित होगी।

मानवता ही सभी धर्मों का मुख्य सार है।

बस इतना जान लेने वाला इंसान किसी भी धर्म का हो उसका धर्म अपने-आप श्रेष्ठ हो जाता है।

parmarmayur6557

मौनी अमावस्या: मौन, आस्था और आत्मचिंतन का पर्व

भारतीय पंचांग में मौनी अमावस्या का विशेष स्थान है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों में उतरने का अवसर है। माघ मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि मौन—अर्थात् चुप्पी—के महत्व को रेखांकित करती है। जहाँ दुनिया शोर में उलझी रहती है, वहीं मौनी अमावस्या हमें भीतर की आवाज़ सुनने के लिए आमंत्रित करती है।

मौन का अर्थ और महत्व

‘मौनी’ शब्द मौन से बना है। इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है—कुछ लोग पूरे दिन, कुछ निश्चित समय तक। मौन का उद्देश्य केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म—तीनों को संयमित करना है। माना जाता है कि मौन से मानसिक चंचलता शांत होती है, आत्मसंयम बढ़ता है और विचारों की स्पष्टता आती है। यह दिन आत्मचिंतन, प्रायश्चित और संकल्प का होता है।

पवित्र स्नान और दान

मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों—विशेषकर गंगा, यमुना, सरस्वती (त्रिवेणी संगम)—में स्नान का विशेष महत्व है। प्रयागराज में इस दिन विशाल स्नान पर्व होता है, जहाँ श्रद्धालु तड़के से ही संगम की ओर बढ़ते हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
स्नान के बाद दान का विधान भी है—अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल, या सामर्थ्य अनुसार धन। दान का भाव करुणा और सेवा से जुड़ा होता है, जो समाज और आत्मा—दोनों को समृद्ध करता है।

आध्यात्मिक साधना और व्रत

मौनी अमावस्या साधकों के लिए विशेष दिन है। जप, ध्यान, योग और स्वाध्याय से इस दिन की साधना और फलदायी मानी जाती है। कुछ लोग फलाहार या उपवास रखते हैं। व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और मन की शुद्धि है।

आधुनिक जीवन में मौनी अमावस्या

आज के तेज़-रफ़्तार जीवन में मौन दुर्लभ हो गया है। मौनी अमावस्या हमें डिजिटल शोर से विराम लेने, अनावश्यक बातचीत से दूरी बनाने और अपने भीतर झाँकने का अवसर देती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, भीतर मिलती है।

निष्कर्ष

मौनी अमावस्या आस्था, अनुशासन और आत्मचिंतन का पर्व है। यह हमें मौन की शक्ति से परिचित कराता है—जो शब्दों से परे जाकर मन को स्थिर करता है। यदि इस दिन हम थोड़ी देर के लिए ही सही, मौन अपनाएँ, सेवा करें और भीतर की ओर देखें, तो यह पर्व अपने उद्देश्य में सफल हो जाता है।
मौन में ही अक्सर सबसे स्पष्ट उत्तर मिलते हैं।

a9560