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Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

@nandiniagarwal835328
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समाज
देखो ' न अपने '  समाज को किस ज्ञान की तरफ जा रहा है। जब कोई दुर्घटना हो जाती है। तो ऐसा लगता है। शायद ऐसा अब नही होगा। अपराधी ' को सजा मिल कर सवक आ जायेगा। पर कुछ समय माहौल शान्त रहता है। फिर कोई काण्ड हो जाता है। तरह -तरह के काण्ड आखिर व्यक्ति सुरक्षित कहाँ पर है। अपराध परिवार से ही जन्म लेता है। अपराधी का लालच उसे कहाँ से कहाँ पहुॅच देता है। सोशल मीडिया . के जमाने में यह भूल जाता है। जन्ता जमी _आसमान सर पर उठा लेगा।
अपराधी का भविष्य मिट्टी बन जाता है। न जीने में न मरने में ' ज्ञान हमारे संस्कार ' संगत ' माहौल ' शिक्षा ' अच्छा होना चाहिए ' ' । हमारे समाज में बॉलीबुड अभिनेता या अभिनेत्री छोटे परदे वाले या ' बड़े परदे वाले या कोई भी अन्य विषय के फूहड़ व्यक्ति को सर आँखो पर बिठा लेते है। रील्स में बेहूदापन उसको भी हम हंस-हंसकर देखते है। क्या कभी किसी ने सोचा है। ये हमे क्या दे रहे है। क्या मिल रहा है। कोई समझदारी मिली क्या ? शायद नहीं। मैंगजीन अखबारों के फ्रेन्ट पेज पर कोई विज्ञापन में बड़ी सी इन लोगो की तस्वीर छपती है। तो देखकर लोगो को लगता है। कोई बड़ा काम करा है। जो छप रहा है। मेरी सोच शायद इन लोगो की जगह किसी शिक्षित ' व्यक्ति काययाब व्यक्ति का तस्वीर छपे तो लोगो को लगेगा ' देखकर ' मुझे पढ़ लिख कर इस के जैसा बनना है। तो समाज में सरस्वती ' शिक्षा फैलेगी जैसे फौजी ' न्यायधीश ' सी. ऐ इंजीनियर . डॉक्टर अफसर ' किसान .उद्योगपति . ' आदि इस से मन मे आयेगा ' मुझे इस के जैसा बनना है। किसी कामयाब बेटी, इससे बेटी पर अत्याचार करने वाला ( बलत्कार जैसा अपराध ) कुछ हद तक बेटी पर अत्याचार बन्द हो सकता है। शिक्षा से वंचित बेटी के मन में शिक्षा को लेकर जगरूकता बढ़ेगी । लिखने को तो बहुत कुछ है। पर व्यक्ति को सच्चाई से डरता है। लिपि पुती ' चापलूस तारीफ ' झूठी बातो पर खुश होता है।
हम सुधरेंगे - तो - समाज सुधरेगाा ' ।










- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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एक समय था। जब हम अपने परिवार में शांति के माहौल में रहा करते थे। समय-समय के साथ सुविधा मिलती थी।
संयुक्त परिवार हुआ करते थे। रिश्ते निभाने में सभी की क्षमता एक ही थी। सहनशील ' लोक - लाज ' हवा में भी खुशबू महकती थी। चेहरे की मुस्कान वो भरोसा सुकून भरा एहसास हुआ करता था। जिस उम्र पर हम हुआ करते थे। आज उस उम्र पर हमारे बच्चे खड़े है। लेकिन हम  चितिंत है। समाज को देखते हुए। जमाना हमारे वाला जब बेटी गली - गली जा सकती थी। दोस्त सहेली गली बाजार को निकल दिया करती थी। बेधड़क घर भी चितिंत नही रहता था। उस समय मे समाज में अपनापन था। किसी गाँव की बेटी सब की बेटी हुआ करती थी।
रिश्ते नाम देने से बन जाया करते थे। हर चीज में सौंदर्य हुआ करता था। आज के समय में अंधी दौड़ चल रही है।
भरोसा जात विरादरी से क्या इंसानियत से भी उठ गया है। उस समय की तो बात ही कुछ और थी। बस याद बन कर रह गयी है। बेटी बचाओ . बेटी पढ़ाओ अभियान तो चल गया है। बेटी तो बचा ली बेटी पढ़ा भी ली पर मुखौटो वाले चेहरे से  कैसे बचाये ये तो बताओ। बाहर पढ़ाने की बहार आ गयी है। अपने शहर से दूसरे शहर जाना है। पढ़ने ' नही तो उस पढ़ाई की कीमत नही मानी जायेगी। बेटी को आत्मनिर्भर बनाओ घरेलू अत्याचार से बचाओ . बेलन की जगह कलम हो हाथ में ' जब हम कुछ पद को हासिल कर लेते है। तो हमारे लिय रास्ते खुल जाते है। वरना बहू बन कर दलदल में ही फँस कर रह जायेगी ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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धक -धक दिल धड़कता है ' पल-पल सांसे चलती है।
टप-टप आंसू बहते है ' रो रो कर ये कहते हैं ' ।
सपने सारे चकनाचूर हुए ' मैं पिंजरे में कैंद हुए ' ।
जिंदगी मेरी थम सी गयी ' रुक सी गयी . मांजिल कोई है नहीं ' ।
पढ़ी -लिखी या अनपढ़ कोई नही  है अन्तर आना सभी को पिंजरे के अन्दर ।
रास्ता कोई है नही ' न आंसू पोछने वाला न कहने वाला भूख लगी तो खा लो ' ।
पति हो या सास सब की एक ही बात 'सेवा करते रहना बस ।
राजी नही तो गैर राजी सही ' लात घूसो की या तानो की बौछार।
न कोई इंतजार ' न लगी कोई उम्मीद ' नसीब कहे या  कर्मो की सजा ये तो बस ऊपर वाले को पता ' ।
बार -बार मैं कहती हूं ' सुनलो बेटी मेरी पुकार अपने दम पर जीना है सर उठा कर हम को जीना है।
न बंधक हम को बनना है न बंधन किसी को बनाना है।
जीओ और जीने हो ये मंत्र हमे अपनाना है।
आत्मनिर्भर बनकर खड़े होना किसी ओर के लिए अपने लिय जीना है।



- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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किसी ने हमारे साथ छल कपट धोखा किया
इस का पारिणाम उसको मिलेगा उसको तो मिला
नही . ये सोच सोच कर हमारा समय सोच और
खराब हो जाती है।

- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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एक माँ की पाँच बेटी सभी बेटी के संस्कार एक जैसे मिलते है। यहाँ एकता
एक सास की पाँच बहू सभी बहू के संस्कार अलग मिलते है। यहाँ ताण्डव
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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जहाँ तक मेरी सोच विचार है। या फिर कहे जो मैंन देखा है। तकनीकी दुनिया मे सब से पहले मैने देखा टेलीफोन दूरभाष भाषा सुनना जबाब देना । चिट्टी का इंतजार खत्म
फिर मैने हिसाब जोड़ने वाला बॉर्ड क्वकुलेटर ' जो दबाने पर जोड़ गुणा भाग घटाओ का हल देता था। दुकान दार उस का प्रयोग करता था । फिर मैने देखा टाइफ मशीन खटखट का पर्चा टाइफ करता था। स्टेनो पढाई का नाम दिया था। जज के नीचे वो बटन दबा कर ब्यां छापता रहता था। फिर मैने देखा कम्प्यूटर ' नौकरी पेशा व्यापार की लिखावट करता था। साथ मे पिन्टर । फिर आया बटन वाला मोबाइल किपेड़ वाला फिर आया स्क्रीन टच मोबाइल बड़े लोग बड़े शहरो मे कुछ ही लोगो के हाथो में देखने को मिलता था। जनाब फिर ऐसी हवा चली स्क्रीन
ट्च मोबाइल हर व्यक्ति की जरूरत बन गयी ' ।
खास कर जब कोरोना टाइम आया था। इस मे एक साल फिर बन्द कोरोना फिर आया कोरोन वायरस जिस समय मे हर घर स्कूल पढ़ाई-लिखाई चालू कर दी। कम्प्यूटर बदल गया लेपटॉप मे एक डायरी की तरह फिर न दिन न रात डाटा : _डाटा ही डाटा इस मे ऐप अनगिनत जो कि सच  जानती भी नही हूं । दुनिया बाहर कम मोबाइल मे ज्यादा नजर आने लगी। बस क्या था एक दूसरे की जिन्दगी मे झांकना व अपने बार मे झांसा करना ये शौक की तरत जॉक की तरह चिपक गया ।
अब मैने सुना है। Al (एआई ) का जमाना इसे जमाना कहेंगे तो हम किस जमाने मे जीये यह भी एक कम्प्युटर की तरह है। शायद मुझे लगता है। जो हमने फिट कर दिया वही लौट फिर कर सभी इंसानो को जबब देगा।
दिमाग इस का नही अपना काम आयेगा ' ।
परमात्मा ने जो जीव बनाया है। मानव नाम का ये बैठने को नर बनाया कर्म योगी बनाया है। कर्ता  क्रिया कर्म मिल कर कार्य पूरा होता है। जिसे करने वाला ह्म खुद है। न कि मशीन जरा सी तो शर्म करो प्रकृति को पहचानो इंसान इंसान से बोलने को तैयार नही है।
कागज - पेन्सिल की जगह जहाँ जाओ कम्प्यूटर मे ही फीड करते हैं । लिखा -पढ़ी एक वो जमाना था पीढ़ी दर पीढ़ी यादे व जरूरी कागज रखे जाते थे। संभाल कर डबल -  डबल कॉपी के साथ इसे देश की तरक्की कहते है। जो बच्चा ज्यादा समय पढ़ने सीखने प्रटिकली ज्ञान मे लगाता था । अब बैठ कर उठने को राजी नही है।
गेम बन गये है। दूसरे लोगो को लगा और फिर वीडियो बना कर मजाक बनाना ये मनोरंजन है। देख लो दुनिया हाथों मे मोबाइल होता कुछ लिमिटिड उपयोग के लिए लोग कितने बेवकूफ है। इसे ही मनोरंजन बना लिया पैसे चले गये लाइक करने पर सौ बात की स्क बात जरूरत के एय व उज्वल भविष्य की ही जानकारी सम्बन्धित चीजे हो तो ज्यादा बेहतर है आने वाली पीढ़ी के लिय चार दिन की चांदनी फिर अंधेरे मे भविष्य है।



- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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घर तोड़ने वाले हजार मिलेंगे
घर बनाने वाले हजारो मे सिर्फ़ अपने ही होते है।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

गलतियों पर परदा डालना ।
गलतियों को बढ़ावा देना ॥
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

सुख आये तो ज्यादा खुश होने की जरूरत नही है।
दुःख पीछे -पीछे आ जाता है ' कोई न कोई परेशानी ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

एक जमाना हुआ करता था। सभी को एडरस ' फोन नम्बर ' गली चौराह सब याद रहता था ' अब इंसान को खुदका नम्बर भी देर सोच कर याद आता है। इतना दिमाग़ कमजोर बना दिया है। जो भी देखना समझना है। मोबाइल सब से पहले खुलेगा जब मुंहू खुलेगा ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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