Quotes by Nandini Agarwal Apne Kalam Sein in Bitesapp read free

Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

@nandiniagarwal835328
(11k)

घर परिवार की अनुमति के बिना कोई शुभ कार्य नही होता है। और घर परिवार में ही सबसे ज्यादा मनमुटाव होते हैं। जब साथ रहना भी है। साथ छोड़ना भी नहीं है। तो परिवार में एकता बना कर ही चलना जीवन की असली खुशी है ।


- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More

एक पिता का मंदबुध्दि बेटा बाकी बेटो की गृहस्थी खराब कर देता है। हल - मंदबुध्दि बेटे का अगर विवाह करा दिया है। उस की गृहस्थ का भार माता - पिता के कंधो पर होना चाहिए ' न कि बाकी बेटो की ग्रहस्थ खराब नही कर देना चाहिय ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More

1 व्यक्ति सोचता है, मैं कर रहा हूँ ।
मेरे बद ये लोग काम कैसे करेंगे ॥
२ व्यक्ति सोचता है, ये मेरे बिना नही हो सकता है।
पर व्यक्ति उसकी गैरहाजरी मे काम कर लेता है।।
3 व्यक्ति सोचता है, सब को मैंने संभाल रखा है।
पर मेरे बिना भी वो संभल कर चलते है।।
4 व्यक्ति सोचता है, इन को मेरी कमी महसूस होगी ।
पर उनको मेरे होने न होने से कोई फर्क नही पड़ता है। ।
आखिर व्यक्ति भ्रम में रहता है। सब एक है, एकता ही महत्वपूर्ण है। । ।
5 पर सच तो यह है . जब तक इंसान को तुम्हारी जरूरत होती है। जब तक महत्व देता है। तुम्हारी चलती सांस पर क्या ' जब तुम्हारी सांसे रुक जायेगी ' . तब भी व्यक्ति पर कोई फर्क नही पड़ता है बस तुम्हारा इस्तेमाल कर अपना उल्लू सीधा करता है।
अपनी ज़िन्दगी अपने व अपने परिवार के लिए सुरक्षित बनाइये ' ' ।

- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More

इंसान प्यारा . नही होता है।
उस का काम प्यारा होता है।।
  
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

शरीर साथ देना छोड़ देता है।
तो लोग भी साथ देना छोड़ देते है।


- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

जीवन में कोई मुकाबला आसान नहीं है।
जीवन जीना भी कोई मुकाबले से कम नही है ।

- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

लोग कुछ काम . तो आते नही है
मोबाइल को पर्सनल रखने में परेशानी होती है
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

समाज
देखो ' न अपने '  समाज को किस ज्ञान की तरफ जा रहा है। जब कोई दुर्घटना हो जाती है। तो ऐसा लगता है। शायद ऐसा अब नही होगा। अपराधी ' को सजा मिल कर सवक आ जायेगा। पर कुछ समय माहौल शान्त रहता है। फिर कोई काण्ड हो जाता है। तरह -तरह के काण्ड आखिर व्यक्ति सुरक्षित कहाँ पर है। अपराध परिवार से ही जन्म लेता है। अपराधी का लालच उसे कहाँ से कहाँ पहुॅच देता है। सोशल मीडिया . के जमाने में यह भूल जाता है। जन्ता जमी _आसमान सर पर उठा लेगा।
अपराधी का भविष्य मिट्टी बन जाता है। न जीने में न मरने में ' ज्ञान हमारे संस्कार ' संगत ' माहौल ' शिक्षा ' अच्छा होना चाहिए ' ' । हमारे समाज में बॉलीबुड अभिनेता या अभिनेत्री छोटे परदे वाले या ' बड़े परदे वाले या कोई भी अन्य विषय के फूहड़ व्यक्ति को सर आँखो पर बिठा लेते है। रील्स में बेहूदापन उसको भी हम हंस-हंसकर देखते है। क्या कभी किसी ने सोचा है। ये हमे क्या दे रहे है। क्या मिल रहा है। कोई समझदारी मिली क्या ? शायद नहीं। मैंगजीन अखबारों के फ्रेन्ट पेज पर कोई विज्ञापन में बड़ी सी इन लोगो की तस्वीर छपती है। तो देखकर लोगो को लगता है। कोई बड़ा काम करा है। जो छप रहा है। मेरी सोच शायद इन लोगो की जगह किसी शिक्षित ' व्यक्ति काययाब व्यक्ति का तस्वीर छपे तो लोगो को लगेगा ' देखकर ' मुझे पढ़ लिख कर इस के जैसा बनना है। तो समाज में सरस्वती ' शिक्षा फैलेगी जैसे फौजी ' न्यायधीश ' सी. ऐ इंजीनियर . डॉक्टर अफसर ' किसान .उद्योगपति . ' आदि इस से मन मे आयेगा ' मुझे इस के जैसा बनना है। किसी कामयाब बेटी, इससे बेटी पर अत्याचार करने वाला ( बलत्कार जैसा अपराध ) कुछ हद तक बेटी पर अत्याचार बन्द हो सकता है। शिक्षा से वंचित बेटी के मन में शिक्षा को लेकर जगरूकता बढ़ेगी । लिखने को तो बहुत कुछ है। पर व्यक्ति को सच्चाई से डरता है। लिपि पुती ' चापलूस तारीफ ' झूठी बातो पर खुश होता है।
हम सुधरेंगे - तो - समाज सुधरेगाा ' ।










- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More

एक समय था। जब हम अपने परिवार में शांति के माहौल में रहा करते थे। समय-समय के साथ सुविधा मिलती थी।
संयुक्त परिवार हुआ करते थे। रिश्ते निभाने में सभी की क्षमता एक ही थी। सहनशील ' लोक - लाज ' हवा में भी खुशबू महकती थी। चेहरे की मुस्कान वो भरोसा सुकून भरा एहसास हुआ करता था। जिस उम्र पर हम हुआ करते थे। आज उस उम्र पर हमारे बच्चे खड़े है। लेकिन हम  चितिंत है। समाज को देखते हुए। जमाना हमारे वाला जब बेटी गली - गली जा सकती थी। दोस्त सहेली गली बाजार को निकल दिया करती थी। बेधड़क घर भी चितिंत नही रहता था। उस समय मे समाज में अपनापन था। किसी गाँव की बेटी सब की बेटी हुआ करती थी।
रिश्ते नाम देने से बन जाया करते थे। हर चीज में सौंदर्य हुआ करता था। आज के समय में अंधी दौड़ चल रही है।
भरोसा जात विरादरी से क्या इंसानियत से भी उठ गया है। उस समय की तो बात ही कुछ और थी। बस याद बन कर रह गयी है। बेटी बचाओ . बेटी पढ़ाओ अभियान तो चल गया है। बेटी तो बचा ली बेटी पढ़ा भी ली पर मुखौटो वाले चेहरे से  कैसे बचाये ये तो बताओ। बाहर पढ़ाने की बहार आ गयी है। अपने शहर से दूसरे शहर जाना है। पढ़ने ' नही तो उस पढ़ाई की कीमत नही मानी जायेगी। बेटी को आत्मनिर्भर बनाओ घरेलू अत्याचार से बचाओ . बेलन की जगह कलम हो हाथ में ' जब हम कुछ पद को हासिल कर लेते है। तो हमारे लिय रास्ते खुल जाते है। वरना बहू बन कर दलदल में ही फँस कर रह जायेगी ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More

धक -धक दिल धड़कता है ' पल-पल सांसे चलती है।
टप-टप आंसू बहते है ' रो रो कर ये कहते हैं ' ।
सपने सारे चकनाचूर हुए ' मैं पिंजरे में कैंद हुए ' ।
जिंदगी मेरी थम सी गयी ' रुक सी गयी . मांजिल कोई है नहीं ' ।
पढ़ी -लिखी या अनपढ़ कोई नही  है अन्तर आना सभी को पिंजरे के अन्दर ।
रास्ता कोई है नही ' न आंसू पोछने वाला न कहने वाला भूख लगी तो खा लो ' ।
पति हो या सास सब की एक ही बात 'सेवा करते रहना बस ।
राजी नही तो गैर राजी सही ' लात घूसो की या तानो की बौछार।
न कोई इंतजार ' न लगी कोई उम्मीद ' नसीब कहे या  कर्मो की सजा ये तो बस ऊपर वाले को पता ' ।
बार -बार मैं कहती हूं ' सुनलो बेटी मेरी पुकार अपने दम पर जीना है सर उठा कर हम को जीना है।
न बंधक हम को बनना है न बंधन किसी को बनाना है।
जीओ और जीने हो ये मंत्र हमे अपनाना है।
आत्मनिर्भर बनकर खड़े होना किसी ओर के लिए अपने लिय जीना है।



- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Read More