Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

જેમના માટે હું જગત જીતવા નીકળ્યો હતો....

એમણે જ મારી હારનો હવાલો આપી દીધો......

ગયો હું ફરિયાદ કરવા એ ખુદા જોડે, એમને પણ કહ્યું તારા જ વ્યક્તિએ તને ત્યજી દીધો......

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

मिलने आया था आपको के आप बहोत दुःखी हो जानकर l
आकर देखा आपने दोस्त समझकर,आप बहोत सुखी हो देखकर ।।
- वात्सल्य

savdanjimakwana3600

Colourful life VS Minimalist life

How far our choices have changed. Our living standards, and even our lives, shifted from colourful to black and white. We lost colours... Choose to be minimalist in everything.... Modernity is now minimalistic, not detailed. We lost structure, art, and so on. Now, more seems like a mess, and less seems like perfection.

- Vishakha

mothiyavgmail.com3309

Nitish Kumar और Narendra Modi दोनों 100% देशी-विदेशी एलीट लोगों के प्रति वफादार हैं। फिर देशी-विदेशी एलीट लोगों ने नीतीश कुमार से इस्तीफा क्यों दिलवाया?
.
जल्द ही कई मुस्लिम देशों को मजबूर होकर ईरान के साथ मिलकर अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होना पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो सकता है। जो पाकिस्तानी सेना पर दबाव डाले कि वह ईरान की सेना का पूरी तरह समर्थन करे और युद्ध में उसका पूर्ण सहयोगी बन जाए।

जब तीसरा विश्व युद्ध (WW3) शुरू होगा, तब विदेशी एलीट चाहते हैं कि भारत में धर्म के आधार पर एक बड़ा गृहयुद्ध हो।

ताकि हिंदुओं को यह समझाया जा सके कि वे अमेरिका-यूके-पश्चिमी देशों (US-UK-WME) के आक्रमण का सक्रिय रूप से समर्थन करें। क्योंकि अगर भारत में कोई गृहयुद्ध नहीं होगा, तो अधिकांश हिंदू तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का समर्थन करेंगे।
.

यह ओरिजनल पोस्ट Rahul Mehta द्वारा लिखा गया है, जिसे मैने हिंदी में अनुवाद किया है। राहुल मेहता जी ने हीं भारत में पहली बार - EVM BLACK CLASS डेमो मशीन का आविष्कार किया है।।

sonukumai

कोई अपना होता तो करते भी बात उसकी..
गैरों की बात करना भी भला कोई बात हुईं..

momosh99

Goodnight friends.. sweet dreams

kattupayas.101947

“जयपुर की बारिश में खोई यादें”जयपुर ट्रिप के दौरान अचानक अपने एक्स-हस्बैंड से मिलने के बाद, मैं कमज़ोर हो गई और उनके साथ एक मज़ेदार रात बिताई…
जयपुर की वह रात असामान्य रूप से शांत थी, लेकिन आसमान जैसे अपने भीतर दबे हुए किसी दर्द को बरसात की मोटी बूंदों में बाहर निकाल रहा था। मानसून की बारिश होटल की ऊँची खिड़कियों से टकराकर ऐसी आवाज़ कर रही थी मानो किसी पुराने गीत की उदास धुन बज रही हो।

मैं होटल के बार के कोने में अकेली बैठी थी।

मेरे सामने आधी पिघली हुई मार्गरीटा का गिलास था। उसके किनारों पर जमी नमक की परत धीरे-धीरे नमी से घुल रही थी। सॉफ्ट जैज़ म्यूज़िक हल्के-हल्के बज रहा था, और उसके साथ मिलकर बारिश की बूंदें एक अजीब सा सुकून और उदासी पैदा कर रही थीं।

मेरा नाम अनिका है।

चौंतीस साल की, एक सफल महिला, अपनी मेहनत से बनाई हुई जिंदगी के साथ। लोग कहते हैं मैं मजबूत हूं, आत्मनिर्भर हूं। लेकिन सच यह है कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो बाहर से नहीं दिखते।

तीन साल पहले मेरा तलाक हुआ था।

कागज़ पर वह बस एक कानूनी प्रक्रिया थी। लेकिन दिल के अंदर… वह किसी तूफान से कम नहीं था। तीन साल बीत चुके थे, फिर भी कुछ यादें ऐसी थीं जो पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

मैं जयपुर काम के सिलसिले में आई थी — कम से कम यही आधिकारिक वजह थी।

असल में, शायद मैं अपने खाली अपार्टमेंट से भागना चाहती थी। उन दीवारों से, जो अभी भी अतीत की गूंजों से भरी हुई थीं।

घड़ी ने रात के ग्यारह बजाए।

मैंने गिलास को हल्के से घुमाया और खिड़की के बाहर गिरती बारिश को देखने लगी।

तभी अचानक मेरे पीछे से एक आवाज़ आई।

“अनिका? क्या वह तुम हो?”

मेरे हाथ वहीं रुक गए।

वह आवाज़…

मेरी रीढ़ में जैसे ठंडी लहर दौड़ गई।

यह आवाज़ इतनी परिचित थी कि एक पल के लिए मुझे लगा मैं सपना देख रही हूँ। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैं तुरंत मुड़ी नहीं।

क्योंकि अगर मैं मुड़ती… और वह वही होता… तो?

धीरे-धीरे मैंने अपनी कुर्सी घुमाई।

और अगले ही पल मेरी सांसें रुक गईं।

मेरे सामने खड़ा था—

अर्जुन।

मेरा पूर्व पति।

तीन साल पहले अदालत के उस ठंडे कमरे में जिस आदमी ने मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने का फैसला सुनाया था… वही आदमी आज मेरे सामने खड़ा था।

वह पहले से भी ज्यादा परिपक्व और आकर्षक लग रहा था। नेवी ब्लू सूट, हाथ में रेड वाइन का गिलास, और चेहरे पर वही आधी मुस्कान… जो कभी मेरे दिल की धड़कन बढ़ा देती थी।

“अर्जुन…?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकल पाया।

वह मुस्कुराया और मेरे पास वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया।

“कितना अजीब संयोग है,” उसने कहा। “तीन साल बाद… और तुम यहाँ।”

उसकी खुशबू हवा में घुल रही थी — वही चंदन की हल्की खुशबू जिसे मैं कभी पहचान सकती थी, चाहे भीड़ कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

पहले कुछ मिनट अजीब चुप्पी में बीते।

फिर बातचीत शुरू हुई।

पहले औपचारिक सवाल — काम कैसा चल रहा है, जिंदगी कैसी है, स्वास्थ्य कैसा है। लेकिन जैसे-जैसे शराब के घूंट बढ़ते गए, बातचीत भी गहराई में उतरने लगी।

अर्जुन ने बताया कि वह अब दिल्ली में रहता है। उसका रियल एस्टेट बिज़नेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स, विदेश यात्राएं, नए अवसर।

मैं बस सुनती रही।

कभी-कभी उसकी आँखें मेरी आँखों में टिक जातीं, जैसे वह मेरे चेहरे पर कोई पुरानी याद ढूंढ रहा हो।

फिर उसने अचानक पूछा—

“और तुम? तुम्हारी जिंदगी में कोई नया है?”

मैं हँस पड़ी।

“नहीं,” मैंने कहा। “शायद काम ही काफी है।”

अर्जुन ने गहरी सांस ली।

फिर उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया… और मेरे हाथ को हल्के से छू लिया।

उस स्पर्श में कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर दबी हुई यादों को जगा दिया।

“अनिका…” उसने धीमी आवाज़ में कहा।

“मुझे माफ कर दो।”

मैं ठिठक गई।

क्योंकि तीन साल में पहली बार… अर्जुन ने अपनी गलती स्वीकार की थी।

उसकी आँखों में पछतावा था।

या शायद… मुझे ऐसा लगा।

उस रात बारिश बाहर गिरती रही, संगीत बजता रहा… और हमारी बातचीत धीरे-धीरे हमें उस अतीत के करीब ले जाने लगी जिसे हमने कभी पीछे छोड़ दिया था।

लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह मुलाकात सिर्फ एक संयोग नहीं थी…

बल्कि एक ऐसी रात की शुरुआत थी जो मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक सच्चाई को सामने लाने वाली थी।
👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

rajukumarchaudhary502010

https://youtube.com/shorts/2bUHfy6-GgQ?si=kdtmYrP8fbq4GJbf

Go Through The Link
and watch the video

jaiprakash413885

વાર્તા ૩૫: ૧૦ હેડફોન (The Loop)
​તેણે ધીમેથી પોતાના હેડફોન કાન પર ચઢાવ્યા અને બહારના ઘોંઘાટને જાણે એક જ સેકન્ડમાં સ્વીચ ઓફ કરી દીધો. બસ ટર્મિનલની ભીડ, રિક્ષાના હોર્ન અને લોકોની નકામી વાતો—બધું જ એકાએક શાંત થઈ ગયું. હવે તેની પાસે પોતાની એક ખાનગી દુનિયા હતી, જેમાં માત્ર તે અને તેનું ગમતું સંગીત હતું.
​પ્લેલિસ્ટમાં સેંકડો ગીતો હોવા છતાં, તેની આંગળીએ એ એક જ ગીત પસંદ કર્યું. એ ગીત જે તેના હૃદયના કોઈ ખૂણે ધરબાયેલી યાદને ફરી જીવતી કરતું હતું. તેણે 'રીપીટ' બટન દબાવ્યું. ગીત લૂપ પર શરૂ થયું.
​આખી દુનિયાથી કપાઈ જવું કેટલું સહેલું છે ને? બસ, બે ઈયરબડ્સ કાનમાં નાખો અને તમે તમારા ભૂતકાળમાં, તમારા સપનામાં કે તમારી કોઈ અધૂરી ઈચ્છામાં ખોવાઈ શકો છો. લૂપ પર વાગતું એ ગીત એના માટે માત્ર સંગીત નહોતું, પણ એક સુરક્ષિત કવચ હતું. એ ગીતની દરેક લાઇન તેને કોઈના અવાજની, કોઈના સાથની કે કોઈ જૂની સાંજની યાદ અપાવતી હતી.
​જ્યારે આપણે એક જ ગીત વારંવાર સાંભળીએ છીએ, ત્યારે એનો અર્થ એ છે કે આપણે એ ગીતની લાગણીમાંથી બહાર નીકળવા નથી માંગતા. આપણે એ હૂંફને પકડી રાખવા માંગીએ છીએ. હેડફોન પહેરીને ભીડમાં ચાલતી એ વ્યક્તિ ભલે એકલી દેખાતી હોય, પણ એની અંદર યાદોનું એક આખું સરઘસ ચાલતું હોય છે.
​આધુનિક યુગમાં હેડફોન એ 'ડિસ્ટર્બ ન કરો' (Do Not Disturb) નું જીવતું જાગતું બોર્ડ છે. એ આપણને પરવાનગી આપે છે કે આપણે આપણી પોતાની મરજીથી, આપણી પોતાની લયમાં જીવી શકીએ. ભલે દુનિયા ગમે તેટલી ઝડપથી દોડતી હોય, પણ એ ગીતના લૂપમાં સમય જાણે થંભી જાય છે.
​ક્યારેક આખી દુનિયાનો અવાજ સાંભળવા કરતાં, હેડફોન લગાવીને પોતાના મનનો અવાજ સાંભળવો વધુ જરૂરી હોય છે.
​અનકહી કોફી

desaimansi547624

“अरबपति पिता ने सोचा—मेरी पत्नी और बेटी मुझे सिर्फ एटीएम समझती हैं… लेकिन जिस रात उनकी फ्लाइट कैंसल हुई और वे बिना बताए घर लौटे, दरवाज़े की दरार से जो देखा… उसने उनका दिल हमेशा के लिए बदल दिया।”

राजेश अग्रवाल एक अरबपति थे। देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी उनके नाम पर थी। दुनिया भर में उनके ऑफिस थे, उनके जहाज़ समुद्रों पर राज करते थे।

लेकिन अपने ही घर में…

वे लगभग मेहमान बन चुके थे।

राजेश को लगता था कि प्यार दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है—पैसा। इसलिए उन्होंने अपने परिवार को हर चीज़ दी।

उनकी पत्नी प्रिया को लग्ज़री लाइफ मिली।

उनकी बेटी आराध्या को सबसे महंगा स्कूल, सबसे सुंदर कमरे और ढेर सारे खिलौने मिले।

लेकिन राजेश ने कभी यह नहीं सोचा कि शायद उनके परिवार को इन सब चीज़ों से ज्यादा…

उनकी मौजूदगी की जरूरत है।

राजेश का मन धीरे-धीरे कठोर होता गया।

उन्हें लगता था कि उनके परिवार को उनसे नहीं, बल्कि उनके पैसों से प्यार है।

जब भी फोन आता, उन्हें लगता —
फिर कोई खर्चा होगा।

जब भी बेटी पास आती —
उन्हें लगता, फिर कोई नया खिलौना मांगा जाएगा।

इसलिए उन्होंने खुद को काम में और ज्यादा डुबो दिया।

एक दिन उनका सिंगापुर का ट्रिप तय था। लेकिन आखिरी पल में फ्लाइट कैंसल हो गई।

राजेश ने अचानक फैसला किया—

आज घर चलते हैं… बिना बताए।

उनके मन में एक अजीब सा विचार चल रहा था।

“देखता हूं… मेरे बिना घर में क्या हो रहा है।”

रात को जब वे घर पहुंचे…

तो उन्हें कुछ बहुत अजीब लगा।

पूरा महल शांत था।

कोई पार्टी नहीं।

कोई मेहमान नहीं।

बस… सन्नाटा।

तभी घर की पुरानी आयाह लक्ष्मी सामने आईं।

लेकिन राजेश को देखकर उन्होंने जोर से स्वागत नहीं किया।

उन्होंने तुरंत उंगली होंठों पर रखी।

“साहब… प्लीज़… आवाज मत कीजिए।”

राजेश चौंक गए।

“क्यों? क्या चल रहा है यहां?”

आयाह लक्ष्मी ने कुछ नहीं कहा।

बस उनका हाथ पकड़कर उन्हें धीरे-धीरे फैमिली रूम के दरवाजे तक ले गईं।

फिर फुसफुसाकर बोलीं—

“साहब… अंदर मत जाइए। पहले बस देख लीजिए…”

राजेश ने दरवाजे की छोटी सी दरार से अंदर झांका।

उन्होंने सोचा था—

शायद वहां पार्टी होगी।

शायद उनके पैसों से जश्न चल रहा होगा।

लेकिन कमरे के अंदर जो था…

उसने उनके दिल को एक पल में हिला दिया।

👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे..
तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..

momosh99

हेलो दोस्तो,

मेरी फर्स्ट किताब कल 10 मार्च को आ रही है । किताब का नाम "अधूरी धुन" है
कृपया करके आप यह किताब पढ़े और आपके विचार प्रस्तुत करे।

धन्यवाद 💫❤️

avinashgondukupe96025gmail.com5127

"धरती कहे पुकार के", को मातृभारती पर पढ़ें :,

https://www.matrubharti.com

भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!

kaushikdave4631

માતૃભારતી પર વાંચો - ""બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :"

"બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :,

https://www.matrubharti.com

વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!

kaushikdave4631

​हां, मैं ही झूठी हूं
नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं।

​हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया
नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं।

​हां, आप तो वो हो
नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं।

​हां, मैं जिद पर अड़ी हूं
नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं।

​हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर
नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं।

​हां, मुझमें हजार कमियां होंगी
नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं।

​हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं
नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।

kaushikdave4631

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

તારી નજર પડે તો વસંત ખીલી ઉઠે છે,
નહિતર દરેક ઋતુમાં અજબ શીત થાય છે.

તારા શબ્દોથી દિલને અજબ શાંતિ મળે છે
નહિતર મનમાં કેટલી અનકહી પ્રીત થાય છે.

તું નજીક હોય ત્યારે સમય પણ થંભી જાય છે
પળ પળ જાણે પ્રેમની નવી જીત થાય છે.

તું દૂર હોવા છતાં મારાં અહેસાસમા સાથે છે.
એટલે જ આ દિલને થોડી રાહત મળી જાય છે.

તારી યાદ આવે તો રાત ચાંદની બની જાય છે
નહિતર આ આંખોમાં અંધકારનો વસવાટ થાય છે.

તું મળ્યો ત્યારથી મને જીવનનો અર્થ મળ્યો છે,
નહિતર આ સફર બસ એક અજાણી રીત થાય છે.

તારા સાથમાં પીડા પણ સંગીત બની જાય છે,
તારાં વિના ખુશી પણ ક્યારેક હાર બની જાય છે.

દિલમાં હવે તો એક જ દુનિયા બનાવી છે,
જ્યાં તારાં જ અહેસાસનો દરબાર ભરાય છે.

મારા દિલની વાત કલમથી લખી દઉં છું,
એક તારાં જ નામથી દરેક પ્રીત થાય છે.

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

palewaleawantikagmail.com200557

જે માણસ પારકાંને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી, તે પોતાની જાતને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી! - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: www.dadabhagwan.in

#quoteoftheday #quote #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए।

शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए।

आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं।

क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं।

आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए।

मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए।

आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है।

जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है।

एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है,

"बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है।

लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️

stdmaurya.392853

सुप्रभात 🙏
ओम् नमः शिवाय 🙏🌹🙏

sonishakya18273gmail.com308865

गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई,
ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी,
लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की,
फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई .

-MASHAALLHA....

mashaallhakhan600196

https://www.facebook.com/share/p/1DM3zVESY5/

સંપૂર્ણ રચના વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.

જય ખોડિયાર 🙏

ronakjoshi2191

“मेरी कीमत 10 लाख क्यों थी?”एक रात की तीव्र इच्छा और भावनाओं के बाद, एक उद्योगपति ने एक गरीब छात्रा को एक मिलियन रुपये देकर छोड़ दिया और बिना कोई निशान छोड़े गायब हो गया। सात साल बाद उसे पता चला कि आखिर उसकी “कीमत” इतनी क्यों थी।

उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनी के बाद, वह एक होटल के कमरे में जागी जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ मार्ग का दृश्य दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें इमारतों को हल्का सुनहरा रंग दे रही थीं, और उसी क्षण उसे हकीकत का भार महसूस हुआ।

उसका नाम काव्या शर्मा था, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र संकाय में तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह राजस्थान के एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों पर मिट्टी और मेहनत के निशान थे। वे जो भी रुपये उसे भेजते थे, वह एक मौन बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया विश्वास।

बिस्तर के पास की मेज पर एक मोटा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे। अंदर एक मिलियन रुपये थे। और एक छोटा सा नोट:

“इसे किस्मत समझ लो। मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।”

वह आदमी गायब हो चुका था।

कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी गरिमा की कीमत तय कर दी हो। लेकिन किराया बकाया था। विश्वविद्यालय की फीस दो हफ्तों में जमा करनी थी। उसके छोटे भाई को स्कूल के लिए किताबों की जरूरत थी। हकीकत किसी का इंतजार नहीं करती।

बहुत आँसू बहाने के बाद उसने एक फैसला किया: वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह इसे एक पुल बनाएगी, बेड़ी नहीं।

उसने विश्वविद्यालय के अपने सारे कर्ज चुका दिए। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि वे घर की छत ठीक कर सकें और खेती बेहतर कर सकें। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में रख दिए। धीरे-धीरे वह भावना कि यह एक अपमान था, मिटने लगी—और उसकी जगह एक अवसर ने ले ली।

साल बीत गए।

काव्या ने सम्मान के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसकी प्रतिभा और अनुशासन ने एक प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनी के दरवाजे खोल दिए। उसने नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट लिखना—लेकिन जल्द ही उसके वरिष्ठों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह पद दर पद ऊपर बढ़ती गई। उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। उसने अपने माता-पिता को पहली बार राजधानी देखने के लिए बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया।

बाहर से उसका जीवन सफलता की कहानी लग रहा था। लेकिन भीतर अब भी एक सवाल अनुत्तरित था।

वह आदमी कौन था? उसने ऐसा क्यों किया?

सात साल बाद, किस्मत ने उन्हें फिर से आमने-सामने ला खड़ा किया।

अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक वित्तीय सम्मेलन में भेजा—एक शानदार होटल में, ठीक उसी राजपथ क्षेत्र के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में एक सिहरन दौड़ गई। यादें कभी खत्म नहीं होतीं; वे बस सो जाती हैं।

जब वह अपना पहचान पत्र देख रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई:

—काव्या शर्मा?

वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय थम गया हो। सामने खड़े आदमी के बालों में अब हल्की सफेदी थी, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं।

वही आदमी था।

काव्या ने गहरी सांस ली। अब वह उस सुबह की डरी हुई लड़की नहीं थी। अब वह एक आत्मविश्वासी महिला थी।

—मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा।

वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। कार्यक्रम का शोर दूर-सा लग रहा था।

आदमी ने कहना शुरू किया:

—उस रात… तुम बहुत थकी हुई थीं और तुमने अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा पी ली थी। तुमने मुझे अपने माता-पिता के बारे में बताया, अपने भाई के बारे में, और इस डर के बारे में कि कहीं तुम्हें विश्वविद्यालय छोड़ना न पड़ जाए। तुमने मुझे कई दशक पहले का अपना ही अतीत याद दिला दिया।

काव्या ने भौंहें सिकोड़ लीं

rajukumarchaudhary502010

गरीब माँ को देखकर लोग हँसे… लेकिन बेटे ने स्टेज पर ऐसा सच बताया कि सबकी आँखें भर आईं“जिस माँ की बदबू से पूरी क्लास नाक ढकती थी… उसी माँ ने ग्रेजुएशन के दिन ऐसा सच दिखाया कि पूरा हॉल रो पड़ा!”

उस दिन सुबह अर्जुन की माँ सरिता ने अपनी सबसे अच्छी साड़ी निकाली।

वह साड़ी नई नहीं थी।
असल में बहुत पुरानी थी।

उसका रंग कई जगहों से फीका पड़ चुका था, और किनारों पर छोटे-छोटे टांके लगे हुए थे जहाँ वह फट गई थी।
लेकिन सरिता के लिए वही उनकी सबसे कीमती साड़ी थी।

उन्होंने सावधानी से अपने हाथ धोए।
नाखून साफ किए।
बालों में तेल लगाया और उन्हें ठीक से बाँधा।

फिर धीरे से अर्जुन के पास आकर बोलीं—

“बेटा… आज तुम्हारा ग्रेजुएशन है न?”

अर्जुन ने सिर हिलाया।

माँ कुछ पल चुप रहीं, जैसे हिम्मत जुटा रही हों।

फिर धीमी आवाज़ में बोलीं—

“क्या… क्या मैं तुम्हारे साथ स्टेज पर आ सकती हूँ? बस तुम्हें मेडल पहनाना चाहती हूँ। यह मौका सिर्फ एक बार आता है।”

अर्जुन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई।

उसे तुरंत याद आ गया—

वही बच्चे…
वही हँसी…
वही ताने…

अगर माँ स्टेज पर जाएँगी… तो क्या होगा?

लेकिन जब उसने माँ के चेहरे की तरफ देखा, तो उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो अर्जुन ने पहले कभी नहीं देखी थी।

वह गर्व था।

वह उम्मीद थी।

और शायद… एक सपना भी।

अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

“हाँ माँ, बिल्कुल। तुम ही कारण हो कि मैं आज यहाँ हूँ।”

कुछ देर बाद वे दोनों ग्रेजुएशन समारोह के लिए स्कूल पहुँचे।

जैसे ही वे जिम के अंदर दाखिल हुए, अर्जुन को तुरंत महसूस हुआ कि कुछ बदल गया है।

लोगों की नज़रें उनकी तरफ उठने लगीं।

सभी माता-पिता महंगे सूट और चमकदार साड़ियों में थे।
उनके शरीर से महंगे परफ्यूम की खुशबू आ रही थी।

और उनके बीच…

सरिता अपनी फीकी साड़ी में खड़ी थीं।

जैसे ही वह आगे बढ़ीं, अर्जुन ने देखा—

कुछ लोगों ने धीरे से अपनी नाक ढक ली।

किसी ने फुसफुसाकर कहा—

“वह यहाँ क्यों आई है?”

“पूरा माहौल खराब कर दिया।”

सरिता का चेहरा तुरंत झुक गया।

उन्होंने अर्जुन से धीमी आवाज़ में कहा—

“बेटा… मैं पीछे खड़ी रहती हूँ। मुझे शर्म आ रही है… कहीं लोग तुम्हारा मज़ाक न उड़ाएँ।”

अर्जुन ने उनका खुरदुरा हाथ कसकर पकड़ लिया।

लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि आज मंच पर वह कुछ ऐसा कहने वाला है…
जो पूरे हॉल की सोच बदल देगा।

👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010