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मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए। शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए। आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं। क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं। आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए। मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए। आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है। जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है। एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है, "बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है। लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️
“नियम की कीमत नियम होना चाहिए एक को सजा, दूसरे से लेकर कुछ, यह भी रिश्वत हैं " - Std Maurya
तेरी नित्य नयन की रंगत से, फूलों सी महक महकती है। पैरों में चोट लगे फिर भी, हम हँस कर उसे विषर जाते हैं। चली गई तू कहाँ कि मैं, तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ? एक ज़ख्म अभी भरता नहीं, कि दूजा चोट बन जाता है। अब तू ही बता कि ऐ सनम, मैं तुझे कहाँ तराशूँ? जब थी तू मेरे पास तो, यूँ ही सब कुछ दिख जाता था। जब से चली गई तू दूर कहीं, हर जगह अंधकार ही दिखता है। अब तू ही बता कि मैं, तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ? आईने में ढूँढा, तराशा बागों में, कहीं भी न दिखी तू मुझको। अब तू ही बता कि मैं, तुझे और कहाँ तराशूँ मैं ? तेरे शब्दों में लीन होकर, तेरी बातें सबको सुनाता हूँ। अब तू ही बता ऐ हमदम, तेरे रंगीन शब्द कहाँ तराशूँ मैं? कवि -एसटीडी मौर्य ✍️ दूरभाष 7648959825 #stdmaurya #std
"आजकल यह सवाल हर किसी के मन में उठता है कि लड़के बेवफा होते हैं या लड़कियां? असल में सच्चाई क्या है, यह कोई नहीं जानता, क्योंकि सब एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं। कोई भी जड़ तक जाकर असलियत जानने की कोशिश नहीं कर रहा। मैंने बहुत से लोगों से मुलाकात की और उनकी बातों को समझने का प्रयास किया। समाज में भी यह साफ दिख रहा है कि शादी के कुछ ही सालों बाद विवाद शुरू हो जाते हैं और बात कोर्ट-कचहरी या मुकदमों तक पहुँच जाती है। लेकिन इसके पीछे के असली राज को जानने की कोशिश कोई नहीं करता कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? आजकल के बच्चे महज 14-15 साल की उम्र में ही रिश्तों (Relationships) में पड़ जाते हैं और शारीरिक संबंध तक बना लेते हैं। इस कच्ची उम्र में वे केवल चेहरे के आकर्षण को ही सच्चा प्यार समझ बैठते हैं। साथ ही, छोटे बच्चे सोशल मीडिया पर अश्लील विज्ञापन और वीडियो देखते हैं, जिससे उनके मन में समय से पहले ही कामुक भावनाएं और प्रेम-प्रसंग के विचार उत्पन्न होने लगते हैं। हमें इन गंभीर विषयों पर ध्यान देना चाहिए। जो चेहरा कल तक हमेशा हँसता-मुस्कुराता रहता था, आखिर उस पर इतनी निराशा और उदासी कैसे आ गई? हमें दोष देने के बजाय सुधार की दिशा में सोचना होगा।"
शीर्षक " सुमित बौद्ध जी " मैं आपके लिए क्या लिखूँ, आप तो एक फूल हैं, जिससे मिलते हैं, उसके जीवन में अपनी महक बिखेर देते हैं। आप सुमित और सुहावन हैं, यूँ ही सबके दिल छू जाते हैं, आँखों में अरमान लिए, निरंतर प्रगति के सफर पर चलते जाते हैं। प्रकृति से दुआ है मेरी—मिले आपको आपके ख्वाबों का सफर, आपके नाम की चमक से रोशन हो जाए सारा मैनपुरी नगर। भाई-बहन के लिए चाँद और माता-पिता के कुल के दीप हैं आप, अपने माली के आँगन में सदा खुशियों की लौ जलाए रखें आप। राह में आए जो अंगारे, उन्हें अपनी शीतलता से बुझा देना, उम्मीदों का, सद्भावना का, एक नया बीज लगा देना। जब खिलें फूल, तो उसकी खुशबू हर किसी तक पहुँचा देना, फूलों की सोहबत में रहकर, अपना चेहरा भी खिला देना। मेरी यही कामना है कि संघर्षों के बीच भी आप मुस्कुराते रहें, और काँटों भरे बागों में भी अपनी महक बिखेरते रहें। कवि -एसटीडी मौर्य ✍️ कटनी मध्य प्रदेश मोबाईल न 7648959825
एक दिन मैं लिख रहा था कि मोहब्बत सबको मिलती है, तभी मेरी कलम की नोक टूट गई। वह मुझसे कहने लगी—'तुम अभी नादान हो। मोहब्बत सुनने में जितनी हसीन है, हकीकत में उतनी ही बेरहम। अगर इसकी सच्चाई देखनी है, तो उन आशिकों की भीड़ देखो जहाँ जनाजे उठते हैं और माँ-बाप के कंधों पर उनके सपनों का बोझ होता है।' आज की दुनिया में लोग अक्सर चेहरे और पैसे से प्रेम करते हैं। यहाँ सादगी और ईमानदारी की कद्र कम ही होती है। सच बोलने से अक्सर रिश्तों में दरार आ जाती है। मेरी अपनी मोहब्बत भी कहती थी कि वह मेरे साथ 'नून-रोटी' खाकर रह लेगी, पर न जाने क्यों मेरी रूह को हमेशा यही डर सताता रहा कि कहीं यह भी एक धोखा न हो। इसीलिए मैंने खुद को दूर कर लिया। जब मैंने दुनिया को टटोला और एक अजनबी लड़की से पूछा कि धोखेबाज कौन होता है—लड़का या लड़की? तो उसने बिना किसी पक्षपात के कहा—'अगर लड़के धोखेबाज होते, तो वे किसी के लिए रोते नहीं और न ही अपने घर पर उस रिश्ते का जिक्र करते। लड़कियां अक्सर मोहब्बत तो करती हैं, पर अपनी सहेली तक को नहीं बतातीं, घर वालों को बताना तो बहुत दूर की बात है।'" लेखक -एसटीडी मौर्य मोबाईल न. 7648959824
शीर्षक "अधूरी बाते" मैं तुम्हारे ख्यालों में खो गया, न जाने सुबह से शाम कब हो गई। जब भी मेरी पलकें झपकती थीं, बस तुम्हारी होठों की मुस्कान दिखती थी। मैं तुम्हारे लिए यही सोचता था, कि तुम करीब आकर मुझे कब सीने से लगाओगी... इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ था मैं, पर जब नींद से मेरी आँखें खुलीं, तो आँखों में सिर्फ आँसू थे, क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर थी। पास थे तो बस तुम्हारे शब्द, जो मेरे दिल के करीब थे। — एसटीडी मौर्य✍️ #stdmaurya #std
मैं क्या लिखूँ? मोहब्बत लिखूँ या नफ़रत... नफ़रत के शहर में मोहब्बत नहीं भाती, मोहब्बत के शहर में नफ़रत नहीं भाती। लिखकर दोनों, मैं सबकी नज़रों में बुरा बन जाता हूँ, फिर तुम ही बताओ, मैं क्या लिखूँ? मोहब्बत का शहर भी अब मोहब्बत से कोरा है, और नफ़रत के शहर में मोहब्बत का शोर है। कोई मोहब्बत को बुरा कहता है, तो कोई नफ़रत को... अब तुम ही बताओ मैं क्या लिखूँ, नफ़रत लिखूँ या मोहब्बत लिखूँ? - Std Maurya
शीर्षक - "जरुरी हैं क्या? बात-बात में मुझसे लड़ती हो, कुछ पल में मुझसे गले लिपट जाती हो। डॉट दूं तो तुम मुंह फुला लेती हो... मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या? तुससे दूर चला जाऊँ, नयनों से आँसुओं की दरिया बहाने लगती हो। मिलने की सिफ़ारिश करने लगती हो, पल भर न मिलूँ तो आँखों से दरिया बहा देती हो। दरिया बहाना ज़रूरी है क्या? फूलों का ताज समझती हो, मुरझा न जाउँ, बड़ा खयाल रखती हो। खयाल रखने से मना कर दूँ तो मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या? कवि-एसटीडी मौर्य✍️ मोबाईल न. 7648959825 #stdmaurya #poem
"तेरे नित्य नयन के रंगों से, हम ख़ुद को सजाते हैं, धूप-छाँव में तेरी हर साँस की तलाश करते हैं। जब तेरे नयन देखूँ, सारी दुनिया रंगीन नज़र आती है, तुम मुझको भले ही गलत कह लेना, मगर मेरी इस रंगीन कलम को कुछ मत कहना।" -एसटीडी मौर्य दूरभाष 7648959825 कटनी मध्य प्रदेश #stdmaurya
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