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Std Maurya

Std Maurya

@stdmaurya.392853
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शीर्षक "हाँ, मैं आज़ाद हूँ"
​हाँ, मैं आज़ाद हूँ,
मुझे गुलामी पसंद नहीं।
आँखों में क्रांति है,
शब्दों में इंकलाब,
हाँ, मैं भगत सिंह का फैन हूँ।
​अन्याय मुझसे देखा नहीं जाता,
ईश्वर के सामने गिड़गिड़ाना आता नहीं।
आँखों में क्रांति की लौ लिए चलता हूँ,
भीख माँगना मुझे पसंद नहीं।
​अन्याय पर मेरा मुँह बंद नहीं रहता,
खून से इंकलाब लिख देता हूँ।
ईश्वर जब कुछ करता नहीं,
इसलिए खुद को नास्तिक कह देता हूँ।
​मेरे कंधों पर मेरा ही हाथ है,
अन्याय देखता हूँ तो खुल कर बोल देता हूँ।
मुझे मौत का कोई डर नहीं,
डर तो बस इस बात का है—
अन्याय पर न बोलूँ तो मेरा जीवन व्यर्थ है,
इसलिए शायद, मैं कुछ नज़रों में बुरा हूँ।
-एस.टी.डी. मौर्य ✍️
#stdmaurya

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शीर्षक - "अभिलाषा"
​ऐ सुनो,
मुझे इतना नज़रअंदाज़ क्यों करती हो?
तीन बार बुलाता हूँ,
कम से कम एक बार आवाज़ तो दो...
​बोल नहीं सकती,
इशारा तो कर सकती हो।
इशारा नहीं कर सकती,
सिर तो हिला सकती हो।
​मानता हूँ कि तुम नफ़रत करती हो,
नफ़रत ही सही,
पर प्यार भी तो जता सकती हो।
​यह भी नहीं कर सकती,
तो मेरी राह में काँटे ही बिछा सकती हो...
काँटे नहीं,
तो फूल भी बिछा सकती हो...
​दूसरों को आवाज़ देता हूँ,
यूँ ही चिढ़ जाती हो।
तुम्हें आवाज़ देता हूँ,
फिर क्यों मुँह फेर लेती हो?
​मुझे जब हिचकी आती,
यूँ ही नीर ले आती हो।
फिर क्यों नहीं मुझे,
नीर में ज़हर की पुड़िया घोल कर दे देती हो?
-एस.टी.डी.
मोबाईल न. 7648959825
कटनी मध्य प्रदेश
#stdmaurya

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मुझे जहाँ खोजोगे, मैं वहाँ मिलूँगा…
बहती हुई नदी की धार में,
बहती हुई शीतल-सी पवन में मिलूँगा…।
मेरा कोई अपना रूप नहीं,
मगर मैं हर पल तुम्हारे साथ मिलूँगा…।
मुझे जीवन देने वाले
तरु-वृक्ष, बहती हुई नदी की धार,
और वन्य जीव हैं,
मैं इनके बिन कुछ नहीं…।
हरियाली ही जीवन का अलंकार है,
इसके बिन तुम नहीं…
हाँ… हाँ, तुम नहीं…।
मेरे जाने से तुम्हें रेत-मिट्टी मिलेगी,
न मिलेगी जीवन की हरियाली यहाँ…।
दूर-दूर तक देख सकोगे,
मगर देखने के लिए जीवन न मिलेगा यहाँ…।
न कोयल की कूक सुन पाओगे,
न मोर को नृत्य करते देख पाओगे यहाँ…।
मेरी कुछ ऐसी कहानी यहाँ…।
मैं सबको यूँ ही मुक्त में मिल जाता हूँ,
इसका मतलब यह नहीं कि मेरी कोई कीमत नहीं…।
मैं मूल्यवान हूँ, यह हर किसी को मालूम नहीं…।
पृथ्वी पर है मेरा घर,
इसलिए यहाँ चहल-पहल है।
मंगल नाम से बड़ा सुहावना,
मगर वहाँ तो धूल ही धूल है।
मैं इसलिए कहता हूँ — मुझे पहचानो,
मुझे नष्ट मत करो,
वरना जीवन के लिए तरस जाओगे यहाँ…।

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तुम कहाँ — ठंडी, शीतल-सी छाँव हो, प्रिय।
मैं कहाँ — कड़क-सी धूप हूँ, प्रिय।
तुम शीतल-सी छाँव में मन मोह लेती हो,
मैं कहाँ — कैसे छाँव देता हूँ, प्रिय।
तुम चलने वाली पवन-सी हो,
मैं ठहरा-सा सरोवर हूँ, प्रिय।
तुम पहाड़ों के बीच से निकलने वाली धार हो, प्रिय,
मैं कहाँ — समुद्र का ज्वार-भाटा हूँ, प्रिय।
तुम गले की ठंडक हो, प्रिय,
मैं कहाँ — गले की नमकीन प्यास हूँ, प्रिय।
तुम ठंडी रात की चाँदनी हो, प्रिय,
मैं कहाँ — गर्मी की धूप हूँ, प्रिय।
तुम महकों की राजकुमारी हो,
मैं कहाँ — शहरों का मुसाफ़िर हूँ, प्रिय।
-एस.टी.डी मौर्य ✍️
#stdmaurya

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शीर्षक -कहाँ तराशूँ मैं

तुम्हारी नित्य नयन की रंगत मे
ख़ुद को तरास रहा हूँ
तुम्हारी फूलों की खुशबू
मेरे दिल यूँ ही चुम रही
बोलो तुम्हें कहाँ तरासु मैं
कड़क सी धुपो मे,
चाँदनी रातों मे
मेरे नयनो मे बसी तुम रहती हो..
बोलो तुम्हें कहाँ तरासु मैं
-एसटीडी मौर्य
मोबाईल न. 7648959825
कटनी मध्य प्रदेश

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मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए।

शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए।

आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं।

क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं।

आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए।

मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए।

आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है।

जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है।

एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है,

"बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है।

लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️

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“नियम की कीमत नियम होना चाहिए
एक को सजा, दूसरे से लेकर कुछ,
यह भी रिश्वत हैं "
- Std Maurya

​तेरी नित्य नयन की रंगत से,
फूलों सी महक महकती है।
पैरों में चोट लगे फिर भी,
हम हँस कर उसे विषर जाते हैं।
​चली गई तू कहाँ कि मैं,
तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ?
एक ज़ख्म अभी भरता नहीं,
कि दूजा चोट बन जाता है।
अब तू ही बता कि ऐ सनम,
मैं तुझे कहाँ तराशूँ?
​जब थी तू मेरे पास तो,
यूँ ही सब कुछ दिख जाता था।
जब से चली गई तू दूर कहीं,
हर जगह अंधकार ही दिखता है।
अब तू ही बता कि मैं,
तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ?
​आईने में ढूँढा, तराशा बागों में,
कहीं भी न दिखी तू मुझको।
अब तू ही बता कि मैं,
तुझे और कहाँ तराशूँ मैं ?
तेरे शब्दों में लीन होकर,
तेरी बातें सबको सुनाता हूँ।
अब तू ही बता ऐ हमदम,
तेरे रंगीन शब्द कहाँ तराशूँ मैं?

कवि -एसटीडी मौर्य ✍️
दूरभाष 7648959825
#stdmaurya #std

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"आजकल यह सवाल हर किसी के मन में उठता है कि लड़के बेवफा होते हैं या लड़कियां? असल में सच्चाई क्या है, यह कोई नहीं जानता, क्योंकि सब एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं। कोई भी जड़ तक जाकर असलियत जानने की कोशिश नहीं कर रहा।
​मैंने बहुत से लोगों से मुलाकात की और उनकी बातों को समझने का प्रयास किया। समाज में भी यह साफ दिख रहा है कि शादी के कुछ ही सालों बाद विवाद शुरू हो जाते हैं और बात कोर्ट-कचहरी या मुकदमों तक पहुँच जाती है। लेकिन इसके पीछे के असली राज को जानने की कोशिश कोई नहीं करता कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
​आजकल के बच्चे महज 14-15 साल की उम्र में ही रिश्तों (Relationships) में पड़ जाते हैं और शारीरिक संबंध तक बना लेते हैं। इस कच्ची उम्र में वे केवल चेहरे के आकर्षण को ही सच्चा प्यार समझ बैठते हैं। साथ ही, छोटे बच्चे सोशल मीडिया पर अश्लील विज्ञापन और वीडियो देखते हैं, जिससे उनके मन में समय से पहले ही कामुक भावनाएं और प्रेम-प्रसंग के विचार उत्पन्न होने लगते हैं।
​हमें इन गंभीर विषयों पर ध्यान देना चाहिए। जो चेहरा कल तक हमेशा हँसता-मुस्कुराता रहता था, आखिर उस पर इतनी निराशा और उदासी कैसे आ गई? हमें दोष देने के बजाय सुधार की दिशा में सोचना होगा।"

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शीर्षक " सुमित बौद्ध जी "
​मैं आपके लिए क्या लिखूँ, आप तो एक फूल हैं,
जिससे मिलते हैं, उसके जीवन में अपनी महक बिखेर देते हैं।
आप सुमित और सुहावन हैं, यूँ ही सबके दिल छू जाते हैं,
आँखों में अरमान लिए, निरंतर प्रगति के सफर पर चलते जाते हैं।
​प्रकृति से दुआ है मेरी—मिले आपको आपके ख्वाबों का सफर,
आपके नाम की चमक से रोशन हो जाए सारा मैनपुरी नगर।
भाई-बहन के लिए चाँद और माता-पिता के कुल के दीप हैं आप,
अपने माली के आँगन में सदा खुशियों की लौ जलाए रखें आप।
​राह में आए जो अंगारे, उन्हें अपनी शीतलता से बुझा देना,
उम्मीदों का, सद्भावना का, एक नया बीज लगा देना।
जब खिलें फूल, तो उसकी खुशबू हर किसी तक पहुँचा देना,
फूलों की सोहबत में रहकर, अपना चेहरा भी खिला देना।
​मेरी यही कामना है कि संघर्षों के बीच भी आप मुस्कुराते रहें,
और काँटों भरे बागों में भी अपनी महक बिखेरते रहें।
कवि -एसटीडी मौर्य ✍️
कटनी मध्य प्रदेश
मोबाईल न 7648959825

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