हां, मैं ही झूठी हूं
नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं।
हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया
नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं।
हां, आप तो वो हो
नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं।
हां, मैं जिद पर अड़ी हूं
नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं।
हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर
नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं।
हां, मुझमें हजार कमियां होंगी
नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं।
हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं
नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।