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“जब अरबपति CEO ने डिलीवरी बॉय बनकर गर्लफ्रेंड का टेस्ट लिया… और उसने उसके मुंह पर पैसे फेंक दिए!”

केनज़ो… अब अर्जुन बन चुका था।
सिर्फ 27 साल की उम्र में वह अग्रवाल एम्पायर का CEO था — एशिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक का मालिक।

युवा। आकर्षक। और इतना अमीर कि उसके पास जितना पैसा था, उतना कई देशों के बजट से ज्यादा था।

लेकिन एक चीज़ थी जो उसके पास नहीं थी…

सच्चा प्यार।

उसकी जिंदगी में जितनी भी महिलाएं आईं, सभी का एक ही मकसद था — उसका पैसा।
किसी को उसकी मुस्कान से मतलब नहीं था… किसी को उसकी मेहनत से नहीं… किसी को उसके अकेलेपन से नहीं।

सबको चाहिए था बस उसका बैंक बैलेंस।

इसीलिए जब अर्जुन की मुलाकात वैशाली से हुई… उसने एक फैसला लिया।

उसने अपनी असली पहचान छिपा ली।

उसने खुद को एक साधारण कर्मचारी के रूप में पेश किया।

न कोई लग्जरी कार…
न कोई बॉडीगार्ड…
न कोई करोड़ों की घड़ी।

बस एक सामान्य लड़का… जो नौकरी करता है।

छह महीनों में अर्जुन और वैशाली की नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं।
वे डेट पर जाते, बातें करते, हँसते।

वैशाली को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उसका “साधारण” बॉयफ्रेंड असल में शहर के आधे हिस्से का मालिक है।

लेकिन समय के साथ अर्जुन ने एक बदलाव नोटिस किया।

वैशाली धीरे-धीरे बदल रही थी।

वह अक्सर महंगे ब्रांड्स की बातें करने लगी…
लक्ज़री बैग… महंगे रेस्टोरेंट… करोड़पति लाइफस्टाइल।

और सबसे अजीब बात…

कभी-कभी वह अर्जुन को देखकर कहती—

“तुम्हें और मेहनत करनी चाहिए… मुझे बड़ा लाइफ चाहिए।”

अर्जुन मुस्कुराता… लेकिन अंदर से सोचता रहता।

एक रात उसने खुद से कहा—

“अगर मैं इसे पूरी दुनिया देने वाला हूँ… तो पहले मुझे ये जानना होगा कि क्या ये मुझे तब भी स्वीकार करेगी… जब मेरे पास कुछ भी नहीं होगा।”

और फिर उसने एक योजना बनाई।

एक आखिरी टेस्ट।

उस शाम वैशाली का जन्मदिन था।

वह अपने सोशल फ्रेंड्स के साथ शहर के एक हाई-एंड कैफे में पार्टी कर रही थी।

उसी समय अर्जुन ने एक अजीब फैसला लिया।

उसने एक फूड डिलीवरी राइडर की यूनिफॉर्म पहन ली।

पुराने जूते…
थोड़े गंदे कपड़े…
और जानबूझकर वह दौड़कर आया ताकि वह पसीने से तर दिखे।

उसके हाथ में था…

एक छोटा सा सस्ता केक
और फूलों का एक साधारण गुलदस्ता।

जब वह कैफे के अंदर गया…

सबकी नज़रें उस पर टिक गईं।

और फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा—

“हैप्पी बर्थडे, बेब!”

अचानक पूरे टेबल पर सन्नाटा छा गया।

वैशाली के दोस्त अर्जुन को ऊपर से नीचे तक घूरने लगे।

फिर एक लड़की धीरे से बोली—

“ओह माय गॉड… वैशाली… ये तेरा बॉयफ्रेंड है?
एक डिलीवरी बॉय?”

और अगले ही पल…

जो हुआ, उसने अर्जुन की जिंदगी बदल दी।

👇👇**पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।**👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

गरीब चाय वाले ने भरी लड़की की फीस… सालों बाद डॉक्टर बनकर उसने जो किया, इंसानियत रो पड़ी
बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास एक तंग सी गली थी। उस गली के मुहाने पर हर सुबह एक छोटी सी लकड़ी की ठेली लगती थी। उस ठेली से उठती उबलती चाय की भाप पूरे माहौल में खुशबू फैला देती थी।

उस ठेली को चलाने वाला लड़का था राहुल।

राहुल की उम्र मुश्किल से 22–23 साल होगी। दुबला-पतला शरीर, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, साधारण कपड़े और आंखों में एक अजीब सी शांति। उसकी मुस्कान इतनी सच्ची थी कि जो भी उससे चाय लेने आता, बिना मुस्कुराए वापस नहीं जाता।

लेकिन राहुल की जिंदगी आसान नहीं थी।

जब राहुल सिर्फ 15 साल का था, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। उसके पिता स्टेशन पर कुली का काम करते थे। घर में कमाने वाला वही एक इंसान था। पिता के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी राहुल के कंधों पर आ गई।

उसकी मां पहले से ही बीमार रहती थी और उसकी छोटी बहन स्कूल में पढ़ती थी।

मजबूरी में राहुल को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

उसने स्टेशन के बाहर चाय की छोटी सी ठेली लगा ली। हर सुबह 4 बजे उठना, दूध लाना, चाय पत्ती खरीदना, ठेली लगाना और देर रात तक काम करना — यही उसकी जिंदगी बन गई।

लेकिन इन सबके बावजूद राहुल ने कभी शिकायत नहीं की।

वह हर ग्राहक से आदर से बात करता। कई बार गरीब मजदूरों को उधार में भी चाय दे देता। स्टेशन के आसपास काम करने वाले लोग उसे बहुत पसंद करते थे।
और देखें 👉👉 https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

सुप्रभात 🙏🙏

sonishakya18273gmail.com308865

All the game plan depends on this man #jaspritbumrah

kattupayas.101947

छिन लिया सब कुछ मेरा, और मुझसे दुआए मगवाने लगे,
गरदीश मे है सितारे और मुझे अब नजर आने लगे,
बेचेन है मन और उलझा हुआ है मेरा जहां
ये किस तरह मुझको सताने लगे,
मै क्या करु ऐ खुदा कि तू मान जाये, अब तो आंखो मे भी आंसू आने लगे .

-MASHAALLHA...

mashaallhakhan600196

ग़लत कहते हैँ लोग मोहन कि दूर रहने से प्यार होता नहीं कम..
मगर जो दूर हो जाए उस प्यार में बताओे कहीं होता है दम..

momosh99

आखिरी चिठ्ठी जो कभी भेजी हीं नहीं गई..?
एक लड़का आरव हर रात किसी अजनबी लड़की को चिट्ठियाँ लिखता है…
लेकिन वो चिट्ठियाँ कभी भेजता नहीं।
शहर में एक लड़की आयरा है जिसे हर महीने एक रहस्यमयी चिट्ठी मिलती है…
जिसमें उसकी ज़िंदगी की वो बातें लिखी होती हैं जो उसने किसी को नहीं बताई।
दोनों कभी मिले नहीं…
लेकिन दोनों की ज़िंदगी एक-दूसरे से जुड़ी है।
और असली रहस्य यह है —
जिस लड़के की चिट्ठियाँ हैं… वो 3 साल पहले मर चुका है।
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thank you...

jassuofficial

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lordkokishinuchiha1437

સ્ત્રી...
અઢી અક્ષરનો આ શબ્દ દુનિયાનું સર્જન અને સંરક્ષણ બંને કરવાની ગજબની શક્તિ ધરાવે છે...
બેડીમાં બંધાયેલી સ્ત્રીથી શરૂ કરીને માથા ઉપર તાજ પહેરતી સ્ત્રી સુધીની સફરનો સાક્ષી આપણો આ સમાજ  રહ્યો છે.
અત્યારના સમયમાં આ તાજ માત્ર સ્ત્રીઓના માથામાં જ નહીં પરંતુ...
તેની નિર્ણય શક્તિમાં,
તેની વિચાર શક્તિમાં,
તેના અવાજમાં,
તેના આત્મવિશ્વાસમાં નિખરતો જોવા મળે છે.
એક શિક્ષિત અને સશક્ત મહિલા માત્ર તેના પરિવારને જ નહીં પરંતુ સમાજને પણ આગળ વધારવામાં મહત્વની ભૂમિકા ભજવે છે.
સમય બદલાયો છે,, પાંજરામાં પુરાયેલી સ્ત્રી હવે આકાશમાં ઉડીને પોતાની પ્રતિભા સાબિત કરી રહી છે.
તો આવો સ્ત્રીમાં રહેલી આવી પ્રતિભાઓ ને સલામ કરીએ...
8 માર્ચ એટલે કે વિશ્વ મહિલા દિવસના દિવસે સમાજમાં રહેલી તમામ સ્ત્રીઓને અને તેના દરેક સ્વરૂપને વંદન કરીએ..
અને સાથે તેમને આદર, સન્માન અને સમાનતાનો હક  આપીએ...
સ્ત્રી હોવાનો ગર્વ રાખો કારણ કે..
તમે દુનિયાથી નથી,, દુનિયા તમારાથી છે..!!
Happy Women's Day..
                                           --Nandani

nandiv

Goodnight friends sweet dreams

kattupayas.101947

it's a bitter experience

kattupayas.101947

it's quite different

kattupayas.101947

believe in love.. This quote deals the reality

kattupayas.101947

fear of losing you...

kattupayas.101947

iam too possesive

kattupayas.101947

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સુંદર વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.

ronakjoshi2191

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨

rajukumarchaudhary502010

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સુંદર મજાની બોધ વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.

ronakjoshi2191

Good evening friends.. have a great evening

kattupayas.101947

20 साल की एक युवती को 40 से अधिक उम्र के एक पुरुष से प्रेम हो गया — लेकिन जब वह उसे अपनी माँ से मिलवाने ले गई, तो माँ उसे गले लगाकर रोने लगी… क्योंकि वह उसके लिए कोई बहुत ही ख़ास व्यक्ति था…

मेरा नाम सिया है। मैं 20 साल की हूँ और दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में डिज़ाइन की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हूँ।
लोग अक्सर कहते हैं कि मैं अपनी उम्र से बड़ी लगती हूँ — शायद इसलिए क्योंकि मेरा पालन-पोषण सिर्फ मेरी माँ श्रीमती राधा मेहता ने किया।

मेरे पिता का देहांत तब हो गया था जब मैं बहुत छोटी थी।
उसके बाद माँ ने कभी दोबारा शादी नहीं की।

उन्होंने अकेले ही मुझे बड़ा किया — बिना थके, बिना शिकायत किए।
वह एक मज़बूत, मेहनती महिला हैं और हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं।

मेरी ज़िंदगी उस दिन बदल गई, जब मैं एक स्वयंसेवी प्रोजेक्ट में शामिल हुई।

वहीं मेरी मुलाक़ात अमित मल्होत्रा से हुई — जो तकनीकी टीम के समन्वयक थे।
उनकी उम्र 40 से कुछ ज़्यादा थी।

वह शांत स्वभाव के थे, सभ्य थे, और उनकी बात करने के अंदाज़ में एक हल्की-सी उदासी थी —
जो मेरे भीतर जिज्ञासा और सहानुभूति जगा गई।

शुरुआत में मैं बस उनका सम्मान करती थी।
लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि जब भी वह पास होते हैं, मेरा दिल तेज़ धड़कने लगता है।

अमित की नौकरी अच्छी थी।
वह अकेले रहते थे और कई साल पहले उनका तलाक़ हो चुका था — कोई संतान नहीं थी।

वह अपने अतीत के बारे में ज़्यादा बात नहीं करते थे।
बस एक बार उन्होंने कहा था:

“मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ बहुत कीमती खो चुका हूँ…
अब बस शांति से जीना चाहता हूँ।”

हमारे बीच सब कुछ स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ा —
ना कोई जल्दबाज़ी, ना बड़े वादे —
बस सम्मान और सच्चा अपनापन।

लोग बातें करते थे:

“वह इतनी छोटी है…
उसे इस उम्र के आदमी में क्या दिखता है?”

लेकिन मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।

उनके साथ मुझे सुकून मिलता था —
ऐसा सुकून जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।

एक दिन अमित ने मुझसे कहा:

“सिया, मैं तुम्हारी माँ से मिलना चाहता हूँ।
अब मैं हमारे रिश्ते को छुपाना नहीं चाहता।”

मैं घबरा गई।

मेरी माँ हमेशा से सतर्क और बहुत ज़्यादा संरक्षण करने वाली रही हैं।
लेकिन अगर हमारा रिश्ता सच्चा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी।

अगले रविवार, अमित हमारे घर आए —
हाथ में गुलदाउदी के फूलों का गुलदस्ता था,
जो मेरी माँ के पसंदीदा फूल थे —
मैंने कभी यूँ ही ज़िक्र किया था, और उन्हें याद रह गया।

हम हाथों में हाथ डाले घर के अंदर गए।
अमित शांत दिख रहे थे…
लेकिन जैसे ही घर का दरवाज़ा खुला, सब कुछ बदल गया।

माँ आँगन में पौधों को पानी दे रही थीं।

जैसे ही उन्होंने मुड़कर हमें देखा —
वह एकदम से ठिठक गईं।

उनके हाथ से पानी का कैन गिर गया।
उन्होंने मुँह पर हाथ रखा…
और फिर अचानक अमित की ओर दौड़ीं।

उन्होंने उन्हें ज़ोर से गले लगा लिया —
और ऐसे रोने लगीं जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।

“हे भगवान… अमित?!
क्या तुम सच में हो?!”

मैं सन्न रह गई।

अमित भी हिल नहीं पाए।
उनकी आवाज़ काँप रही थी:

“राधा?…
यह कैसे हो सकता है…”

मैं दोनों को देखती रह गई —
कुछ भी समझ नहीं पा रही थी।

मेरी माँ सिसकते हुए बोलीं,
उनके हाथ काँप रहे थे:

“बीस साल, अमित…
पूरे बीस साल मैंने यही समझा कि तुम मर चुके हो…”

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।

उनके आँसू…
उनके चेहरे का दर्द…
और वह भारी, बोझिल ख़ामोशी…

और उसी पल मुझे समझ आ गया—

जिस आदमी से मैं प्रेम करती थी,
वह मेरी माँ के अतीत का ऐसा हिस्सा था
जिसकी गहराई की मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी।

👉 पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट में दिए गए लिंक पर क्लिक करें! 👇�

rajukumarchaudhary502010

तुम मेरा सबसे महंगा शौक हो
तुम पर वक्त नहीं
एहसास खर्च होते हैं।।
❤️

nandiv

રહેમત છે ખુદાની.....🦋🌻🌸🏵️🍁🌹🌼

monaghelani79gmailco