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mohansharma

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@momosh99


काँटों से तो हम बच गए जैसे तैसे..
पर गुलों के वार हम बचाते कैसे..

ऐसा भी क्या तुम्हारा नजदीक आना हुआ ..
तुम तो कवरेज एरिया के ही बाहर हो गए..

जुल्म होते रहें तो ये तसल्ली तो होती है मोहन..
कि कोई हमें किसी बहाने से याद तो करता है..

किस किस को ठहराएंगे आप नज़र लगाने का कुसूरवार मोहन..
ये हसीं मंजर तो जिसकी नज़र में आया तो फ़िर ठहर जाना है ..

ग़म ये नहीं मोहन कि हम नहीं शामिल तेरे अपनों में..
दर्द बस ये है कि हम अब तेरे बेगानों में शुमार होने लगे हैँ..

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जानते तो तुम खूब हो मोहन रिश्ते बनाना..
बस नहीं जानते हो तुम उनको निभाना..

मोहन इससे बड़ी और क्या नादानी होगी मोहब्बत में..
जो हम फर्क ही ना कर पाए उसकी अदा और अदावत में..

यूँ तो नजरों से गुजरते हैँ नज़ारे कई कई..
मगर हर नजारा तो दिल में उतरता नहीं है..

हममें तो खूब हौसला था तेरे हर सितम सहने का मोहन..
मगर शायद तुम ही थक गए होंगे हम पर यूँ सितम ढाते ढाते..

तू निशाना तो लगा हम कहाँ जा पाएंगे ..
हम तो आशिक हैँ ख़ुद निशाने पे आ जाएंगे..