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New bites

जीवन में दोस्ती एक अनमोल रिश्ता है, जो खून के रिश्तों से भी अधिक गहराई लिए होता है। दोस्ती में वह अपनापन होता है जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं। यह रिश्ता न किसी औपचारिकता का मोहताज होता है और न किसी शर्त का। पर कभी-कभी जीवन की परिस्थितियाँ इतनी उलझी हुई होती हैं कि सबसे करीबी दोस्त से भी हमें दूर होना पड़ता है, और वह भी बिना किसी गलती के। यह दूरी तब और भी ज्यादा कचोटती है जब वह मजबूरी बन जाती है, एक ऐसा फैसला जिसे दिल नहीं बल्कि हालात लेते हैं।

जब दोस्तों के बीच कोई विवाद या लड़ाई होती है, तो वह केवल दो लोगों तक सीमित नहीं रहती। अगर आप उन दोनों के करीब हैं, तो आप अनजाने में एक ऐसे मोड़ पर खड़े हो जाते हैं जहाँ आपको किसी एक का साथ देना पड़ता है या फिर तटस्थ रहकर खामोशी ओढ़ लेनी पड़ती है। दोनों ही विकल्प तकलीफदेह होते हैं। एक तरफ आप एक दोस्त को खोने का डर झेलते हैं, और दूसरी तरफ अपने भीतर उठते सवालों और अपराधबोध से लड़ते रहते हैं।

ऐसी स्थितियाँ अकसर कॉलेज के दिनों में या कामकाजी जीवन की शुरुआत में सामने आती हैं, जब दोस्ती का दायरा बड़ा होता है और हर रिश्ता अपने-आप में महत्वपूर्ण लगता है। दो दोस्तों की लड़ाई में तीसरे को बीच का रास्ता अपनाना पड़ता है। वह चाहता है कि दोनों पक्षों को समझाए, सबकुछ पहले जैसा हो जाए, पर असल ज़िंदगी में हर बात इतनी आसान नहीं होती। कभी-कभी ऐसा लगता है कि भले ही आपने कोई गलती नहीं की, फिर भी आपको सज़ा मिल रही है।

rohanbeniwal113677

अल्फाज —ए — बयां यूं हो जाए
के तुम्हे पता ही न चले और इश्क हो जाए....

muskan1810

જ્યાં સુધી તમે સાચાં છો ત્યાં સુધી કોઈની સામે નહીં ઝુકવાનું તે પછી આપણાં હોય કે પરાયા..

krupalipatel.810943

પુસ્તકોની હાલત જર્જરિત
બની
મોબાઈલની સ્ક્રીન જ્યારથી
કાર્યરત બની…
-કામિની

kamini6601

*दोहा*

सूरज की दादागिरी, चलती है दिन रात।
हाथ जोड़ मानव करें, वरुणदेव दें मात।।

धूप दीप नैवेद्य से, प्रभु को करें प्रसन्न।
द्वारे में जो माँगते, उनको दें कुछ अन्न।।

दान-पुण्य बैशाख में, होता बड़ा महत्व।
यही पुण्य संचित रहे, सत्य-सनातन-तत्त्व।।

मंदिर चौसठ योगनी, भेड़ाघाट सुनाम।
तेवर में माँ भगवती, त्रिमुख रूप सुख धाम।।

पहलगांव में फिर दिया, आतंकी ने घाव।
भारत को स्वीकार यह, नर्किस्तानी ताव।।

भारत को सुन व्यर्थ ही, दिलवाता है ताव।
फिर से यदि हम ठान लें, गिन न सकेगा घाव।।

मनोजकुमार शुक्ल *मनोज*

manojkumarshukla2029

भूल जा जो हुआ, होता रहोगे।
बोलोगे नहीं तो जनाब, रोते रहोगे

neerajsharma.603011

All are cordially invited to Pujyashree Deepakbhai's Spiritual Discourse and Self-Realization ceremony, organized in Adalaj, India.

Get the detailed schedule here: https://dbf.adalaj.org/GlxkIaI3

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dadabhagwan1150

dr.bhairavsinhraol9051

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કેસરની ક્યારી રક્તથી રંગાઈ, જોવો કાશ્મીર,
ધર્મ પૂછી ગોળીઓ ધરબાઇ, જોવો કાશ્મીર.

કાયરતાના શ્રુંગાર કરી હેવાનિયતનું નૃત્ય થયું,
દેશમાં ગોળીની અવાજ પડધાય, જોવો કાશ્મીર.

દાંમ્પત્ય જીવનના હજુ તો દિવસ થયા હતા ચાર,
કંગન તૂટવાની અવાજ સંભળાય, જોવો કાશ્મીર.

એમ સરહદ પાર કરી આવવું ક્યાં સહેલું રહ્યું હસે!
તપાસ કરો ઘરમાં હેવાન સંઘરાય, જોવો કાશ્મીર.

કહેતી હતી સરકાર કે તોડી નાખી કમર નોટબંધીથી,
એ તૂટેલી કમરે બંદૂક કેમ પકડાય? જોવો કાશ્મીર.

મનોજ મને ગંધ અંદરના ષડયંત્રની આવી રહી છે,
કયો દેશનો નેતા હવે ખૂનથી નાહી, જોવો કાશ્મીર.

મનોજ સંતોકી માનસ

manojsantokigmailcom

भारत में दो ही मौसम चलते हैं – एक गर्मी का, दूसरा चुनाव का।
गर्मी में बिजली जाती है, चुनाव में याद्दाश्त।
नेता आते हैं, वादे करते हैं, चले जाते हैं – जैसे बारिश से पहले के बादल।

कभी कहते हैं – हम भ्रष्टाचार मिटा देंगे!
फिर धीरे से जोड़ देते हैं – "ताकि हम कर सके।"

जनता पूछे – ‘कब मिलेगा रोजगार?’
तो जवाब आता है – ‘जब हमारे पिछले वादे पूरे होंगे।’
जो आज तक तो कभी पूरे हुए नहीं।

चुनाव से पहले नेता गरीब की झोपड़ी में खाना खाते हैं,
और चुनाव के बाद गरीब को।

नेताओं का भाषण शुरू होता है – ‘मेरे प्यारे देशवासियों’
और खत्म होता है – ‘हमें वोट ज़रूर दीजिए।’
बीच में अगर कुछ समझ आया हो, तो आप वाकई काबिल हैं।

rohanbeniwal113677

हर रोज हम दोस्त एक विषय का चयन करते हैं लिखने के लिए। कई बार वो शब्द खुद चलकर मेरे पास आते हैं, और मैं उन्हें पकड़कर एक कहानी में ढाल देता हूँ। जैसे वो पहले से ही मेरे अंदर मौजूद हों, बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहे हों।

आज का विषय था – "जुड़वा"। लगा, कितना आसान होगा। कितनी कहानियाँ देखी, पढ़ी, सुनी हैं इस विषय पर। जुड़वा भाई, बहनें, वो गहरा रिश्ता, वो आपसी समझ… सब कुछ मेरे ज़ेहन में था।

पर जैसे ही लिखने बैठा, कुछ भी शुरू नहीं हो सका। हर बार कुछ सोचता, पर अधूरा रह जाता। एक वाक्य भी पूरी तरह काग़ज़ पर नहीं उतर सका। कुछ था जो रुक रहा था। शायद इस बार शब्दों ने साथ नहीं दिया।

मैंने बहुत कोशिश की। कोई पुरानी याद, कोई देखा-सुना किस्सा, कोई कल्पना—सबको खंगाल डाला। पर जुड़वा शब्द के साथ कोई कहानी नहीं जुड़ सकी। ऐसा नहीं कि कहानियाँ नहीं थीं, बस उन्हें कहने का साहस नहीं था, या शायद उनकी सच्चाई मेरे लिखे से बड़ी थी।

आज मैं असफल रहा। और इसे स्वीकार करना भी ज़रूरी है। क्योंकि हर दिन लिखना आसान नहीं होता। कुछ दिन ऐसे होते हैं जब शब्द हमारे नहीं होते, और हम  बस अकेले बेबस रह जाते हैं। "मन में विचारों का सैलाब होता है, लेकिन शब्दों का साथ नहीं मिलता।

लेकिन यही तो लेखन की खूबसूरती है—हर हार में एक सीख, और हर चुप्पी में एक नई शुरुआत छुपी होती है।

आज की कहानी नहीं लिख सका, पर मैं जानता हूँ, कल फिर कोशिश करूंगा।

"क्योंकि कहानी भले ही आज न बन पाई हो, पर भरोसा है—कल के शब्द, आज की कमी पूरी कर देंगे।

rohanbeniwal113677

mbh8611

*શબ્દે શબ્દે તું લાગણી વેરી જાય છે તારા માટે લખવા બેસું ત્યાંતો શબ્દ ખુટી જાય છે.....*

*તને યાદ કરૂં બે શબ્દો લખવા ને તારા માં જ આંખે આખું સરી જવાય છે....*

*આમ રાહ જોઈ જોઈ ને કલમ પણ અમસ્તી રૂઠી જાય છે...*

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hardik89

आज की पीढ़ी, जिसे हम बड़े प्रेम से Gen Z कहते हैं, वो एक ऐसी अद्भुत प्रजाति है, जो Self-Aware भी है और Self-Obsessed भी। ये वो लोग हैं जिनकी सुबह Instagram के "Good Vibes Only" पोस्ट से होती है और रात Instagram के किसी ट्रेंड पर डांस करते हुए ख़त्म।

इनके हाथ में मोबाइल है, सिर पर हेडफ़ोन, और दिमाग में ट्रेंडिंग रील्स का डेटाबेस। किताबें इन्हें पुरानी लगती हैं, लेकिन 'Pinterest aesthetic' वाली स्टडी टेबल ज़रूर चाहिए। भगत सिंह इनके बायो में होते हैं, पर अंग्रेज़ी में "IDK, LOL, SMH" टाइप जवाब देते हैं।

इन्होंने जीवन को "soft life" और "main character energy" में बाँट रखा है। हकीकत से इनका रिश्ता बस इतना है कि ब्रेकअप होने पर Spotify पे सैड प्लेलिस्ट बना लें और कैप्शन में लिखें — "healing era"।

ये Gen Z अपने mental health के प्रति अत्यंत सजग है। हर दो दिन में social detox पर जाती है, लेकिन उससे पहले 5 स्टोरीज़ डालती है — "Taking a break. If you really care, you know where to find me (i.e., Snapchat)."

पुराने ज़माने के क्रांतिकारी जेल में जाते थे, ये ज़रा Wi-Fi चला जाए तो ही टूट जाते हैं। लोकतंत्र की समझ इन्हें मीम्स से मिलती है, और संविधान इन्हें तभी याद आता है जब उनका पसंदीदा Influencer Shadow Ban हो जाए।


बात-बात पर बोलते हैं, “We don’t vibe with toxic energy,” पर खुद बिना फ़िल्टर के बात करना इन्हें गवारा नहीं। रिश्तों में commitment नहीं चाहिए, लेकिन situationship में रोज़ाना "closure" माँगते हैं।

ये पीढ़ी सच में अनोखी है

rohanbeniwal113677

gautam0218

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