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luckyvicky2615

In this material world, should we make big goals to create some kind of big businesses that would help the world, or should we just learn the art of surrendering and go with the flow?

Watch here: https://youtu.be/9qSLCtWOFco

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dadabhagwan1150

કોણ આવે છે યાદ એ તો પૂછી લીધું!
પણ દિલમાં મારા નામનું રટણ કરી લીધું.

કેવી છે આ કશ્મકશ દિલમાં કેમ કહું!
નજર સામે છો છતાં બંધ આંખે જોવું.

ભીની આંખે સળવળે પડછાયો આછો!
ને હસતાં ચહેરે કહેવાઈ ગયું આવજો.

શાંત કરવા પડયા એ બધાં જ દર્દ હવે!
વરસી રહ્યું વાદળ વગર વરસાદ બધે.

જય શ્રી કૃષ્ણ
- શ્રી

gordimpalmanish8875

ધર્મ પૂછી ને ધરબી ગોળી, વસ્ત્ર પણ ઉતાર્યા,
એ કિલ્લોલ કરતા પરિવારો ને બેરહમી માર્યા.
કહો છો કે જાત ધર્મ હોતો નથી આંતકવાદનો,
પહેલગામની ઘટનાએ નકાબ સેક્યુલર ઉતાર્યા.

અચાનક ફાટી નીકળ્યો દેશમાં હિન્દુત્વનો પ્રેમ,
છેવાડાના ગામડા સુધી પહોંચી રાજનીતિ ગેમ.
કદી દુશ્મનથી નહિ ઘરના ગદ્દારોથી અમે હાર્યા.

માતમ દેશમાં પ્રસર્યો ,નાયક કરે ભાષણબાજી,
ચૂંટણી પ્રચારમાં મુખડા જોવો કેવા છે તે રાજી.
બસ દુશ્મનને નેતાઓ એ લાલ આંખથી તાડ્યા.

મગતરા જેવો દેશ રોજ કાશ્મીર છાતી પર નાચે,
મનોજ ની આંખો રોજ રોજ રક્તના અક્ષર વાંચે.
નેતાઓ ના દીકરા તમે ક્યારે સરહદ પર ભાર્યા?

મનોજ સંતોકી માનસ

manojsantokigmailcom

"छोटे कंधों पर बड़े प्रवचन"

आजकल कुछ फूल इतने जल्दी खिलते हैं कि इत्र से पहले उनके दाम तय हो जाते हैं। उम्र जहाँ खिलौनों से खेलनी चाहिए थी, वहाँ अब कैमरों के सामने श्लोकों की बारिश होती है — जैसे बचपन अब भावनाओं की मार्केटिंग का नया चेहरा बन गया हो।

ज्ञान का वजन तब भारी लगता है जब वो किसी और की उँगलियों से स्क्रिप्ट बनकर निकलता है, और मासूम आँखों में चमक से ज़्यादा मैनेजमेंट झलकता है। भक्तों की भीड़ अब ज्ञान में नहीं, “क्यूटनेस” में मोक्ष ढूंढती है।

जिस दौर में अनुशासन सिखाया जाना चाहिए, वहाँ अब चाटुकारिता पर ताली बजती है। और सबसे मज़ेदार बात? मंच बड़ा हो तो प्रश्न पूछना गुनाह बन जाता है — भले ही मंच पर खड़ा आदमी अभी तक गणित की दूसरी कक्षा भी पास न कर पाया हो।

बचपन अब संस्कारों की नहीं, संगठन की संपत्ति बन गया है। और भक्ति? वो अब शॉर्ट्स, स्टोरीज़ और सब्सक्राइबर काउंट में सिमट कर रह गई है।

rohanbeniwal113677

dr.bhairavsinhraol9051

♥️ imran ♥️

imaranagariya1797

"अंधकार में एक लौ"

गाँव बसतंपुर की एक पुरानी परंपरा थी—जब भी कोई बच्चा बीमार पड़ता, लोग डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय "भूत-बाबा" के पास जाते। कहते थे, बाबा मन्त्र पढ़ते ही बीमारी भाग जाती है।

कहानी की शुरुआत होती है 13 साल की एक होशियार लड़की से—नाम था माया। माया शहर से आई थी, अपनी नानी के पास गर्मी की छुट्टियों में। गाँव उसे बहुत अच्छा लगा, पर एक बात उसे बिल्कुल नहीं भाई—लोग हर बीमारी का इलाज झाड़-फूँक से करने लगते।

एक दिन उसके पड़ोस की छोटी सी बच्ची—बुलबुल—तेज़ बुखार में तप रही थी। माया ने बुलबुल की माँ को सलाह दी, “आप इसे अस्पताल क्यों नहीं ले जातीं?”
बुलबुल की माँ बोली, “अरे बच्ची, ये सब शहर में होता होगा। यहाँ तो भूत-बाबा ही सब ठीक करते हैं।”

माया चुप हो गई, लेकिन चैन से बैठ नहीं सकी। उस रात चुपचाप अपने मोबाइल से डॉक्टर अंकल को बुलाया, जो पास के कस्बे में क्लिनिक चलाते थे। डॉक्टर ने बुलबुल का इलाज किया और अगले ही दिन उसका बुखार उतर गया।

गाँव वालों को जब पता चला, तो पहले तो बहुत गुस्सा हुए। “बाबा की जगह किसी और से इलाज? अपशगुन होगा!” लेकिन फिर धीरे-धीरे समझ आने लगा—इलाज मन्त्रों से नहीं, विज्ञान से होता है।

माया की एक छोटी सी कोशिश ने अंधविश्वास के अंधेरे में एक रोशनी की लौ जला दी थी। अब गाँव के लोग जब बीमार पड़ते हैं, तो पहले अस्पताल जाते हैं—भूत-बाबा अब सिर्फ़ एक कहानी बनकर रह गए हैं।

सीख: अंधविश्वास से अंधकार फैलता है, और ज्ञान से उजाला होता है।

rohanbeniwal113677

"लोग मोहब्बत में फूल देते हैं, मैं तुझे तेरी धड़कनों की कीमत पर खरीद सकता हूँ, आर्या। लेकिन सच ये है — तुझमें मेरी जान बसती है, और तुझे खोया तो मैं पूरी दुनिया को मिटा दूँगा, बस तुझे फिर से पाने के लिए
सम्राट और आर्य जुनून भरी प्रेम कहानी

horrorstorieshindi945782

gautam0218

gautam0218

gautam0218

gautam0218

घर से थोड़ी दूर एक मंदिर है
एक पगडंडी है
झाड़ में पंछी हैं
हवा की सरसराहट है
शुकून है
शीतल छांव है
जी हां मेरा गांव है.

pawankumarshukla9gma

🙏🙏🙏

mehul770

जीवन में दोस्ती एक अनमोल रिश्ता है, जो खून के रिश्तों से भी अधिक गहराई लिए होता है। दोस्ती में वह अपनापन होता है जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं। यह रिश्ता न किसी औपचारिकता का मोहताज होता है और न किसी शर्त का। पर कभी-कभी जीवन की परिस्थितियाँ इतनी उलझी हुई होती हैं कि सबसे करीबी दोस्त से भी हमें दूर होना पड़ता है, और वह भी बिना किसी गलती के। यह दूरी तब और भी ज्यादा कचोटती है जब वह मजबूरी बन जाती है, एक ऐसा फैसला जिसे दिल नहीं बल्कि हालात लेते हैं।

जब दोस्तों के बीच कोई विवाद या लड़ाई होती है, तो वह केवल दो लोगों तक सीमित नहीं रहती। अगर आप उन दोनों के करीब हैं, तो आप अनजाने में एक ऐसे मोड़ पर खड़े हो जाते हैं जहाँ आपको किसी एक का साथ देना पड़ता है या फिर तटस्थ रहकर खामोशी ओढ़ लेनी पड़ती है। दोनों ही विकल्प तकलीफदेह होते हैं। एक तरफ आप एक दोस्त को खोने का डर झेलते हैं, और दूसरी तरफ अपने भीतर उठते सवालों और अपराधबोध से लड़ते रहते हैं।

ऐसी स्थितियाँ अकसर कॉलेज के दिनों में या कामकाजी जीवन की शुरुआत में सामने आती हैं, जब दोस्ती का दायरा बड़ा होता है और हर रिश्ता अपने-आप में महत्वपूर्ण लगता है। दो दोस्तों की लड़ाई में तीसरे को बीच का रास्ता अपनाना पड़ता है। वह चाहता है कि दोनों पक्षों को समझाए, सबकुछ पहले जैसा हो जाए, पर असल ज़िंदगी में हर बात इतनी आसान नहीं होती। कभी-कभी ऐसा लगता है कि भले ही आपने कोई गलती नहीं की, फिर भी आपको सज़ा मिल रही है।

rohanbeniwal113677

अल्फाज —ए — बयां यूं हो जाए
के तुम्हे पता ही न चले और इश्क हो जाए....

muskan1810

જ્યાં સુધી તમે સાચાં છો ત્યાં સુધી કોઈની સામે નહીં ઝુકવાનું તે પછી આપણાં હોય કે પરાયા..

krupalipatel.810943

પુસ્તકોની હાલત જર્જરિત
બની
મોબાઈલની સ્ક્રીન જ્યારથી
કાર્યરત બની…
-કામિની

kamini6601

*दोहा*

सूरज की दादागिरी, चलती है दिन रात।
हाथ जोड़ मानव करें, वरुणदेव दें मात।।

धूप दीप नैवेद्य से, प्रभु को करें प्रसन्न।
द्वारे में जो माँगते, उनको दें कुछ अन्न।।

दान-पुण्य बैशाख में, होता बड़ा महत्व।
यही पुण्य संचित रहे, सत्य-सनातन-तत्त्व।।

मंदिर चौसठ योगनी, भेड़ाघाट सुनाम।
तेवर में माँ भगवती, त्रिमुख रूप सुख धाम।।

पहलगांव में फिर दिया, आतंकी ने घाव।
भारत को स्वीकार यह, नर्किस्तानी ताव।।

भारत को सुन व्यर्थ ही, दिलवाता है ताव।
फिर से यदि हम ठान लें, गिन न सकेगा घाव।।

मनोजकुमार शुक्ल *मनोज*

manojkumarshukla2029

भूल जा जो हुआ, होता रहोगे।
बोलोगे नहीं तो जनाब, रोते रहोगे

neerajsharma.603011

All are cordially invited to Pujyashree Deepakbhai's Spiritual Discourse and Self-Realization ceremony, organized in Adalaj, India.

Get the detailed schedule here: https://dbf.adalaj.org/GlxkIaI3

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dadabhagwan1150

dr.bhairavsinhraol9051