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gautam0218

gautam0218

वक्त की भी अजीब दुश्मनी है हमसे।
जब हमारे पास हो तो उनको फुर्सत नहीं होती।
जब उनके पास हो तो हमसे नजदीकिया नहीं होती।
कई वक्त के बाद आते है खुशनसीबी के मंजर।
बस तब वक्त निकल जाता है, हो के छूमंतर।

truptirami4589

टूटी हुई कोई भी चीज नही जुड़ती,

जुड़ती भी है तो निशान रह जाते है👍👍

dipika9474

- : फुहार :-

मदमस्त घन, मदमस्त वन
मदमस्त है कुलकामिनी
मोर संग ज्यों मोरनी
मदमस्त द्रृग मैं बलिहारी
सघन केस में गुंथी वारि
आवाज मीठे मोर स्वर सा
मन तो हर ले मोहिनी
वह मोर सी न्रृत्यांगनी.
कोयले प्रतिध्वनि सुनाये
छेंड़ती जब रागिनी
मदमस्त संग मन में उमंग
मदहोश कर मन स्वामिनी
ऐ स्वप्न सी शशि भामिनि
नील नभ की चांदनी...

pawankumarshukla9gma

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luckyvicky2615

Miss you NANNA 💖💕💞

luckyvicky2615

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luckyvicky2615

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luckyvicky2615

In this material world, should we make big goals to create some kind of big businesses that would help the world, or should we just learn the art of surrendering and go with the flow?

Watch here: https://youtu.be/9qSLCtWOFco

#lifelessons #lifethoughts #Trending #viral #status #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

કોણ આવે છે યાદ એ તો પૂછી લીધું!
પણ દિલમાં મારા નામનું રટણ કરી લીધું.

કેવી છે આ કશ્મકશ દિલમાં કેમ કહું!
નજર સામે છો છતાં બંધ આંખે જોવું.

ભીની આંખે સળવળે પડછાયો આછો!
ને હસતાં ચહેરે કહેવાઈ ગયું આવજો.

શાંત કરવા પડયા એ બધાં જ દર્દ હવે!
વરસી રહ્યું વાદળ વગર વરસાદ બધે.

જય શ્રી કૃષ્ણ
- શ્રી

gordimpalmanish8875

ધર્મ પૂછી ને ધરબી ગોળી, વસ્ત્ર પણ ઉતાર્યા,
એ કિલ્લોલ કરતા પરિવારો ને બેરહમી માર્યા.
કહો છો કે જાત ધર્મ હોતો નથી આંતકવાદનો,
પહેલગામની ઘટનાએ નકાબ સેક્યુલર ઉતાર્યા.

અચાનક ફાટી નીકળ્યો દેશમાં હિન્દુત્વનો પ્રેમ,
છેવાડાના ગામડા સુધી પહોંચી રાજનીતિ ગેમ.
કદી દુશ્મનથી નહિ ઘરના ગદ્દારોથી અમે હાર્યા.

માતમ દેશમાં પ્રસર્યો ,નાયક કરે ભાષણબાજી,
ચૂંટણી પ્રચારમાં મુખડા જોવો કેવા છે તે રાજી.
બસ દુશ્મનને નેતાઓ એ લાલ આંખથી તાડ્યા.

મગતરા જેવો દેશ રોજ કાશ્મીર છાતી પર નાચે,
મનોજ ની આંખો રોજ રોજ રક્તના અક્ષર વાંચે.
નેતાઓ ના દીકરા તમે ક્યારે સરહદ પર ભાર્યા?

મનોજ સંતોકી માનસ

manojsantokigmailcom

"छोटे कंधों पर बड़े प्रवचन"

आजकल कुछ फूल इतने जल्दी खिलते हैं कि इत्र से पहले उनके दाम तय हो जाते हैं। उम्र जहाँ खिलौनों से खेलनी चाहिए थी, वहाँ अब कैमरों के सामने श्लोकों की बारिश होती है — जैसे बचपन अब भावनाओं की मार्केटिंग का नया चेहरा बन गया हो।

ज्ञान का वजन तब भारी लगता है जब वो किसी और की उँगलियों से स्क्रिप्ट बनकर निकलता है, और मासूम आँखों में चमक से ज़्यादा मैनेजमेंट झलकता है। भक्तों की भीड़ अब ज्ञान में नहीं, “क्यूटनेस” में मोक्ष ढूंढती है।

जिस दौर में अनुशासन सिखाया जाना चाहिए, वहाँ अब चाटुकारिता पर ताली बजती है। और सबसे मज़ेदार बात? मंच बड़ा हो तो प्रश्न पूछना गुनाह बन जाता है — भले ही मंच पर खड़ा आदमी अभी तक गणित की दूसरी कक्षा भी पास न कर पाया हो।

बचपन अब संस्कारों की नहीं, संगठन की संपत्ति बन गया है। और भक्ति? वो अब शॉर्ट्स, स्टोरीज़ और सब्सक्राइबर काउंट में सिमट कर रह गई है।

rohanbeniwal113677

dr.bhairavsinhraol9051

♥️ imran ♥️

imaranagariya1797

"अंधकार में एक लौ"

गाँव बसतंपुर की एक पुरानी परंपरा थी—जब भी कोई बच्चा बीमार पड़ता, लोग डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय "भूत-बाबा" के पास जाते। कहते थे, बाबा मन्त्र पढ़ते ही बीमारी भाग जाती है।

कहानी की शुरुआत होती है 13 साल की एक होशियार लड़की से—नाम था माया। माया शहर से आई थी, अपनी नानी के पास गर्मी की छुट्टियों में। गाँव उसे बहुत अच्छा लगा, पर एक बात उसे बिल्कुल नहीं भाई—लोग हर बीमारी का इलाज झाड़-फूँक से करने लगते।

एक दिन उसके पड़ोस की छोटी सी बच्ची—बुलबुल—तेज़ बुखार में तप रही थी। माया ने बुलबुल की माँ को सलाह दी, “आप इसे अस्पताल क्यों नहीं ले जातीं?”
बुलबुल की माँ बोली, “अरे बच्ची, ये सब शहर में होता होगा। यहाँ तो भूत-बाबा ही सब ठीक करते हैं।”

माया चुप हो गई, लेकिन चैन से बैठ नहीं सकी। उस रात चुपचाप अपने मोबाइल से डॉक्टर अंकल को बुलाया, जो पास के कस्बे में क्लिनिक चलाते थे। डॉक्टर ने बुलबुल का इलाज किया और अगले ही दिन उसका बुखार उतर गया।

गाँव वालों को जब पता चला, तो पहले तो बहुत गुस्सा हुए। “बाबा की जगह किसी और से इलाज? अपशगुन होगा!” लेकिन फिर धीरे-धीरे समझ आने लगा—इलाज मन्त्रों से नहीं, विज्ञान से होता है।

माया की एक छोटी सी कोशिश ने अंधविश्वास के अंधेरे में एक रोशनी की लौ जला दी थी। अब गाँव के लोग जब बीमार पड़ते हैं, तो पहले अस्पताल जाते हैं—भूत-बाबा अब सिर्फ़ एक कहानी बनकर रह गए हैं।

सीख: अंधविश्वास से अंधकार फैलता है, और ज्ञान से उजाला होता है।

rohanbeniwal113677

"लोग मोहब्बत में फूल देते हैं, मैं तुझे तेरी धड़कनों की कीमत पर खरीद सकता हूँ, आर्या। लेकिन सच ये है — तुझमें मेरी जान बसती है, और तुझे खोया तो मैं पूरी दुनिया को मिटा दूँगा, बस तुझे फिर से पाने के लिए
सम्राट और आर्य जुनून भरी प्रेम कहानी

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gautam0218

gautam0218

gautam0218

gautam0218

घर से थोड़ी दूर एक मंदिर है
एक पगडंडी है
झाड़ में पंछी हैं
हवा की सरसराहट है
शुकून है
शीतल छांव है
जी हां मेरा गांव है.

pawankumarshukla9gma