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New bites

It's Tea time.. enjoy yourself with Tea

kattupayas.101947

सिक्का उछालकर तक़दीर का
फैंसला किया नहीं जाता
मेहनत कर तक़दीर के भरोसे
पगले जिया नहीं जाता

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Very Good morning friends..

kattupayas.101947

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
https://www.instagram.com/reel/DZFw7Oeq4ks/?igsh=eW4xdG95NzJ0d2to

mamtagirishtrivedi740648

Goodnight friends..sleep well

kattupayas.101947

शीर्षक "हाँ, मैं आज़ाद हूँ"
​हाँ, मैं आज़ाद हूँ,
मुझे गुलामी पसंद नहीं।
आँखों में क्रांति है,
शब्दों में इंकलाब,
हाँ, मैं भगत सिंह का फैन हूँ।
​अन्याय मुझसे देखा नहीं जाता,
ईश्वर के सामने गिड़गिड़ाना आता नहीं।
आँखों में क्रांति की लौ लिए चलता हूँ,
भीख माँगना मुझे पसंद नहीं।
​अन्याय पर मेरा मुँह बंद नहीं रहता,
खून से इंकलाब लिख देता हूँ।
ईश्वर जब कुछ करता नहीं,
इसलिए खुद को नास्तिक कह देता हूँ।
​मेरे कंधों पर मेरा ही हाथ है,
अन्याय देखता हूँ तो खुल कर बोल देता हूँ।
मुझे मौत का कोई डर नहीं,
डर तो बस इस बात का है—
अन्याय पर न बोलूँ तो मेरा जीवन व्यर्थ है,
इसलिए शायद, मैं कुछ नज़रों में बुरा हूँ।
-एस.टी.डी. मौर्य ✍️
#stdmaurya

stdmaurya.392853

ओलविदा मेरे दोस्त



मैं एक कैंडल अपने हाथों से बनाना चाहती हूं
और उसे गिफ्ट के तौर पर
अपने दोस्त को देना चाहती हूं

जो बस इतना जानती है
कि बस दोस्ती हक जमाना है

और एक इंसान के अलावा
इसमें दूसरे इंसान की भावनाएं मायने नहीं रखती


मैं उसे बताना चाहती हूं कि जब चाहे आना
और जब चाहे चली जाना
उसकी आदतें हैं
पर अब मैं थक चुकी हूं
और मैं हमेशा के लिए
उसे अपनी लाइफ से दूरी रखना चाहती हूं


कभी ना वापस आने के लिए
हालांकि मुझे उसकी परवाह है
हद से ज्यादा


पर मैं खुद को और दर्द पहुंचने से बचना चाहती हूं
इसलिए ओलवेदा मेरे दोस्त

और शुक्रिया जितनी पल हम साथ जीऐ
हंसे गाऐ मुस्कुराए उन सबके लिए


पर अब वाहे छोड़ना जरूरी हो गई है
पर अब दूर जाना जरूरी हो गई


साइद हम हमेशा दूर रहकर ही एक दूसरे के प्रवाह करें
तो अच्छा है
शिकायत से भी दूर रहेंगे
और दर्द से भी

और यही जिंदगी है दूर रहकर भी
उनसे प्यार करते रहना
जो तुम्हारे थोड़ा कम परवाह करता है


आई लव यू
तुमसे प्यार है मुझे
पर मैं तुम्हें पसंद नहीं करती
तुम्हारे लिए रोज दुआ मांगती हूं

पर अब मैं तुम्हारी इंतजार नहीं करती
ओलविदा
मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए जाने के लिए
और ऑल द बेस्ट
तुम्हारे आने वाली जिंदगी के लिए

हजारों शिकायते है तुमसे
पर
अब मैं सब कुछ भूल जाना चाहती हूं
यहां तक के तुम्हें भी

abhinisha

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है 🌹 कचूमर
देखिए यूट्यूब पर
https://youtube.com/shorts/xsnIatdADUI?si=3bInURqXlGam2KYd

mamtatrivedi444291

“पुरानी सोच और नई सोच दोनों ही गलत नहीं होतीं…
गलती बस तब होती है,
जब ये दोनों टकरा जाती हैं
और एक-दूसरे को समझने की कोशिश ही नहीं करतीं…
यहीं से हर रिश्ते में क्लेश शुरू होता है।”

“सोच पुरानी हो या नई…
दोनों अपने-अपने समय की सच्चाई होती हैं।
लेकिन जब समझ कम और अहंकार ज़्यादा हो जाए…
तो वही सोच टकराव बन जाती है,
और रिश्तों में दरार डाल देती है…”

archanalekhikha

*मेघों के बाद*

मैं से ‘मेरा’जाता,
हम से ‘हमारा’ भी बचा
अहं तो था धरती को भी,
सुगंध भरी रंगीनी का ।
झीने मेघों की ओट में,
सांझ का प्रौढ़ सूर्यास्त
फीका आसमाँ भी हो गया रंगीन ।
अहंकार था इस धरती को
इन मेघो ने मुख क्या मोड़ा ,
हो गई धरती रंगीन से रंगहीन ।

✍️ श्रवण कुमार

mr.ski

આ સંસાર આપણને પોષાતો હોય તો કશું સમજવાની આગળ જરૂર નથી અને સંસાર આપણને કંઈ હરકતકર્તા થતો હોય તો આપણે અધ્યાત્મ જાણવાની જરૂર છે. અધ્યાત્મમાં 'સ્વરૂપ'ને જાણવાની જરૂર છે. 'હું કોણ છું' એ જાણ્યું કે બધાં 'પઝલ' સોલ્વ થઈ જાય છે. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/4f7dwX1E

#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

"Success is sweeter with the right people beside you."

parmarsantok136152

"The work you do now will make space for future blessings."

parmarsantok136152

🟦 दही वडा स्टाईल मखाणे

🟦 मखाणे योग्य प्रकारे आणि योग्य वेळी खाल्ले तर वजन कमी करण्यासाठी त्याचा चांगला फायदा होतो.
मखाण्यामध्ये मॅग्नीशियम असतें
उपयोगी अँटी-ऑक्सिडंट असतात.
हे अँटी-ऑक्सिडंट्स हृदयाचे आरोग्य चांगले ठेवण्याचे काम करतात.
मखाणेचा ग्लाईसेमिक इंडेक्स कमी असतो
असे गुगल सांगते ..

🟦 मखाणे प्रथम कोरडेच भाजून
कुरकुरीत करून घ्यावे
ते ताटात काढून ठेवावे
आता कढईत एक मोठा चमचा साजुक तूप घालावे
तूप वितळले की त्यात हे भाजलेले मखाणे एक मिनिट परतून काढून ठेवावे

🟦 दही गोड असावे ते चमच्याने चांगले फेटून घ्यावें
त्यात
चवीनुसार साखर
मीठ
बारीक आले घालावे

🟦 कढईत तूप घालून
जिरे व हिंगाची फोडणी करावी
ही फोडणी दह्यावर घालून
चांगले मिसळून घ्यावे

🟦 या दह्यात तुपात परतलेले मखाणे घालून
वरती बारीक कोथिंबीर घालावी
आवडतं असल्यास याच वेळेस बारीक पुदीना घालू शकता
वरती तिखट पुड भुरभुरावी
हे थंड करण्यासाठी फ्रिज मध्ये ठेवावे
खायला घेण्यापूर्वी दहा मिनीटे बाहेर काढावे

🟦 खुप चवदार डिश तयार होतें 😋
एक वेगळा आणि सोपा प्रकार म्हणुन जरुर करून बघा

jayvrishaligmailcom

https://www.facebook.com/share/p/1EXcJT5w2w/
આજના સમયમાં સમજવા લાયક સુંદર વાર્તા 👌👌

ronakjoshi2191

...बहता हुआ दरिया ...

मेरी कमी क्या होगी किसी को,
मैं ठहरा एक बहता हुआ दरिया,
जो बहाव की जद में बस बहता गया।

कुछ लौटते हैं मुसाफिर शहर में,
पर मैं तो बस राहों का होकर रह गया।

कौन ढूंढेगा मुझको उस गुज़रे हुए वक्त में,
मैं यादों के दरमियां बस सिमट सा गया।

ना कोई साहिल मिला, ना कोई मंज़िल मिली,
मैं तो बस दो किनारों के बीच बंट कर रह गया।


-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

changes are needed in modern woman's life. even though this film is drama. I like it.

kattupayas.101947

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है कचूमर

https://youtube.com/shorts/xsnIatdADUI?si=d7Y98b8hJGIuiGtZ

mamtagirishtrivedi740648

3.. रावल जैत्रसिंह (शासनकाल: 1213–1253 ईस्वी)।
इल्तुतमिश के अहंकार का मर्दन और भूताला का युद्ध

यह वह दौर था जब दिल्ली सल्तनत का सुल्तान इल्तुतमिश अपनी अजेय सेना के घमंड में चूर था। वह संपूर्ण भारत पर अपनी सत्ता स्थापित करना चाहता था। इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़े थे मेवाड़ के शासक रावल जैत्रसिंह। जब इल्तुतमिश ने मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा पर हमला कर उसे तहस-नहस किया, तब रावल जैत्रसिंह ने पीछे हटने के बजाय धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए तलवार उठाई।
गोगुंदा के पास ऐतिहासिक 'भूताला के युद्ध' में रावल जैत्रसिंह ने अपनी कुशल युद्धनीति और अदम्य साहस का परिचय देते हुए इल्तुतमिश की विशाल तुर्क सेना को इस कदर काटा कि दिल्ली के सुल्तान को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। इस युद्ध में मेवाड़ के वीरों ने न केवल तुर्कों के अहंकार को कुचला, बल्कि सदियों तक के लिए दिल्ली सल्तनत को हिलाकर रख दिया।

तुर्कों द्वारा नागदा को नष्ट किए जाने के बाद, रावल जैत्रसिंह ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया। उन्होंने सामरिक दृष्टि से बेहद सुरक्षित और अभेद्य चित्तौड़गढ़ दुर्ग को मेवाड़ की नई राजधानी बनाया। उनके इस एक फैसले ने आने वाली सदियों के लिए मेवाड़ को प्रतिरोध का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। उन्हीं की तैयार की हुई इस मजबूत नींव पर आगे चलकर रावल रतन सिंह, महाराणा कुंभा, महाराणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ धर्मयुद्ध जारी रखा।
पढ़े - https://www.matrubharti.com/book/19993612/part-01-maharana-thousand-years-of-crusade-3

hindgaurav710743

Do you know that by getting angry, the work does not get done faster? On the contrary, the work gets disturbed even more, obstacles get created, and as the ego of the person is hurt, he revolts.

To know more, visit here: https://dbf.adalaj.org/CPbeUAqN

#angermanagement #angerissue #selfhelp #selfimprovement #dadabhagwanfoundation

dadabhagwan1150

ग़ज़ल: एक आत्मा की अधूरी आवाज़
कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

भटकती फिर रही है रूह, अभि कोई तो सदा दे दे,
जो इस तन्हाई से रोके, मुझे ऐसी कोई दवा दे दे।-१

ये कैसा हश्र है मेरा, न ज़िंदा हूँ न मुर्दा हूँ,
कोई आए क़रीब मुझको जीने की दुआ दे दे।-२

हवाएँ सनसनाती हैं तो दिल धड़कता है मेरा,
कोई इस थरथराहट को ज़रा-सा आसरा दे दे।-३

चले थे जिस तरफ़, उस राह का कोई सिरा ही नहीं,
मुसाफ़िर थक गया है, अब तो कोई रास्ता दे दे। -४

सुलगती आग है भीतर, धुआँ बाहर नहीं आता,
ये कैसा दर्द है जिसका कोई भी वास्ता दे दे। -५

मैं सदियों से अकेलेपन के इस साए में ज़िंदा हूँ,
मुझे इस क़ैद से कोई मसीहा अब तो रिहा दे दे। -६

ज़माने भर के मेले में अकेले ही रहे हम तो,
जो मेरा दर्द समझ सके, मुझे वो आश्‍ना दे दे। -७

पुकारा था जिसे मैंने, वो मुड़कर देख भी न पाया,
मेरी आवाज़ खोई है, अभि कोई तो इब्तिदा दे दे। -८

ये सन्नाटा मुझे अंदर ही अंदर खाए जाता है,
कोई आकर मेरे घर का दीया फ़िर से जला दे दे। -९

मैं उस चौखट पे बैठा हूँ जहाँ कोई नहीं आता,
जो मेरे नाम की तख्ती वहाँ आकर लगा दे दे। -१०

बिछड़कर आपसे हम इस तरह बर्बाद बैठे हैं अभि,
कि जैसे कोई लहर कश्ती को साहिल पे डुबा दे दे। -११

अधूरी आस है मेरी, अधूरी हर कहानी है,
जो इस अधूरेपन को एक मुकम्मल दास्ताँ दे दे। -१२

लिखा था नाम जिसका दिल पे, वो भी मिट गया आख़िर,
कोई इस कोरे कागज़ को नया एक आशिया दे दे। -१३

गले में घुट रही है चीख़, पर आवाज़ मद्धम है,
मेरी इस बेबसी को कोई चीख़ने की वफ़ा दे दे। -१४
कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

abhi006