“पुरानी सोच और नई सोच दोनों ही गलत नहीं होतीं…
गलती बस तब होती है,
जब ये दोनों टकरा जाती हैं
और एक-दूसरे को समझने की कोशिश ही नहीं करतीं…
यहीं से हर रिश्ते में क्लेश शुरू होता है।”
“सोच पुरानी हो या नई…
दोनों अपने-अपने समय की सच्चाई होती हैं।
लेकिन जब समझ कम और अहंकार ज़्यादा हो जाए…
तो वही सोच टकराव बन जाती है,
और रिश्तों में दरार डाल देती है…”