The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
बस एक और गहरी बात......💔
मुसलसल ग़ज़ल: चश्म-ए-तर और सावन की शब शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि' १. बरसती रात है, तन्हाई है, ख़याल-ए-यार है दिल में, तसव्वुर का वही सावन, वही बौछार है दिल में। ख़याल-ए-यार:-प्रियतम का विचार / याद तसव्वुर:-कल्पना २. ज़मीं पर बूँद गिरती है तो सीना काँप जाता है, कि जैसे हिज्र की जलती हुई तलवार है दिल में। हिज्र:- विरह / जुदाई ३. सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ को लोग नग़्मा समझते हैं, मग़र इस अब्र के पीछे कोई बेज़ार है दिल में। सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ:-बारिश की रिमझिम आवाज़ अब्र:-बादल बेज़ार:-दुःखी / उदास ४. वो एक लम्हा जो गुज़रा था कभी सावन की रातों में, उसी इक लम्हे की ख़ातिर अभि सदक़ार है दिल में। सदक़ार:-न्योच्छावर होने वाले जज़्बात ५. तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में जो मौसम गुज़ारे थे, उन्हीं ज़ुल्फ़ों की महकती हुई सी कार है दिल में। कार:-असर / यादों का ताना-बाने की हलचल ६. हवा जो सर्द चलती है तो रूह सिहर-सी जाती है, कि दस्त-ए-यार का जैसे कोई इक़रार है दिल में। दस्त-ए-यार:-महबूब का हाथ ७. कहाँ वो वस्ल की रातें, कहाँ ये हिज्र का आलम, नसीब-ए-आशिक़-ए-मुज़्तर बहुत लाचार है दिल में। वस्ल:-मिलन आशिक़-ए-मुज़्तर:-व्याकुल प्रेमी ८. क़फ़स-सा बन गया है अभि ये भीगा-भीगा-सा मौसम, कि पंछी की तरह ज़ख़्मी कोई ग़मख़्वार है दिल में। क़फ़स:- पिंजरा ग़मख़्वार:- दुःख बांटने वाला / दर्द से भरा हुआ ९. नयन मूँदूँ तो बहती है लहू की एक नदी-सी कहीं पर, ये चश्म-ए-तर नहीं, अश्कों का इक बाज़ार है दिल में। चश्म-ए-तर:- नम आँखें १०. कड़कती है जो बिजली नभ के सीने पर तड़प कर के, लगा जैसे अभिषेक ही अरमान की झंकार है दिल में। ११. दुआ को हाथ उठते हैं तो बस यादें ही आती हैं, तुम्हारी बंदगी का ही तो बस इफ़्तार है दिल में। इफ़्तार:- यहाँ समापन या पूजा के फल के अर्थ में १२. शराब-ए-नाब की सूरत जो लगती थी कभी बूँदें, वही बूँदें अभिषेक ज़हर का अम्बार है दिल में। शराब-ए-नाब:- शुद्ध अमृत समान जल १३. तुम्हारी याद का मस्कन हुआ है ये बदन मेरा, कि जिसके हर एक कोने में फ़क़त आज़ार है दिल में। मस्कन:- निवास / घर आज़ार:- रोग / दुःख / कष्ट शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
अब कोई आवश्यकता नहीं है.....
मैं तेरा मुखड़ा पढ़ना हूॅं...(मेरी वृहद कविता 180 पंक्तियों की उसमें से 6 पंक्तियॉं आपके सामने प्रस्तुत की...)
ग़ज़ल: एक आत्मा की अधूरी आवाज़ कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि' भटकती फिर रही है रूह, अभि कोई तो सदा दे दे, जो इस तन्हाई से रोके, मुझे ऐसी कोई दवा दे दे।-१ ये कैसा हश्र है मेरा, न ज़िंदा हूँ न मुर्दा हूँ, कोई आए क़रीब मुझको जीने की दुआ दे दे।-२ हवाएँ सनसनाती हैं तो दिल धड़कता है मेरा, कोई इस थरथराहट को ज़रा-सा आसरा दे दे।-३ चले थे जिस तरफ़, उस राह का कोई सिरा ही नहीं, मुसाफ़िर थक गया है, अब तो कोई रास्ता दे दे। -४ सुलगती आग है भीतर, धुआँ बाहर नहीं आता, ये कैसा दर्द है जिसका कोई भी वास्ता दे दे। -५ मैं सदियों से अकेलेपन के इस साए में ज़िंदा हूँ, मुझे इस क़ैद से कोई मसीहा अब तो रिहा दे दे। -६ ज़माने भर के मेले में अकेले ही रहे हम तो, जो मेरा दर्द समझ सके, मुझे वो आश्ना दे दे। -७ पुकारा था जिसे मैंने, वो मुड़कर देख भी न पाया, मेरी आवाज़ खोई है, अभि कोई तो इब्तिदा दे दे। -८ ये सन्नाटा मुझे अंदर ही अंदर खाए जाता है, कोई आकर मेरे घर का दीया फ़िर से जला दे दे। -९ मैं उस चौखट पे बैठा हूँ जहाँ कोई नहीं आता, जो मेरे नाम की तख्ती वहाँ आकर लगा दे दे। -१० बिछड़कर आपसे हम इस तरह बर्बाद बैठे हैं अभि, कि जैसे कोई लहर कश्ती को साहिल पे डुबा दे दे। -११ अधूरी आस है मेरी, अधूरी हर कहानी है, जो इस अधूरेपन को एक मुकम्मल दास्ताँ दे दे। -१२ लिखा था नाम जिसका दिल पे, वो भी मिट गया आख़िर, कोई इस कोरे कागज़ को नया एक आशिया दे दे। -१३ गले में घुट रही है चीख़, पर आवाज़ मद्धम है, मेरी इस बेबसी को कोई चीख़ने की वफ़ा दे दे। -१४ कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
त्यागना सीखो...
कुछ सुना है.....
जब किसी का पतन नज़दीक होता है तो, प्रकृति और समय उसे भरपूर मौका देतें हैं अत्याचार करने का...... और वह भी जी भरकर अत्याचार करता है, फिर प्रकृति उस समय की प्रतीक्षा करती है और वही प्रकृति समय के साथ मिलकर उसका सर्वनाश कर देती है। - Abhishek Chaturvedi
लड़खड़ाते कम और दिल की जुबां.....
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser