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Abhishek Chaturvedi

Abhishek Chaturvedi Matrubharti Verified

@abhi006
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तुम्हारा नाम से....

- Abhishek Chaturvedi

तुम्हारे कर्म तुम्हारे पास आएंगे ही....

कविता: - नाम किसका ?
रचनाकार:-अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

आलीशान एक कुर्सी पर बैठा,
धूप-सा आलस्य ओढ़े बिल्लीराज,
काला चश्मा, हाथ में शीतल पेय,
चेहरे पर संतोष का ताज।

मन ही मन मुस्काता कहता,
"वाह! ज़िन्दगी हो तो ऐसी,
आराम ही आराम मिले,
हर घड़ी लगे जैसे वैसी।"

सामने छोटा-सा चूहा लेकिन,
झाड़ू, पोछा, धूल, पसीना,
आँखों में थकान की नदियाँ,
हाथों में जीवन का नगीना।

वह भी सोच रहा है चुपके,
"काश! मेरा भी एक दिन होता,
जिस दिन साँसें छुट्टी पातीं,
और मन बोझ से मुक्त होता।"

दीवार पर टँगा हुआ वाक्य,
जैसे सच का उद्घोष करे,
"काम वो करें... नाम हम लें!"
कैसा विचित्र समाज धरे!

कितनी सदियों से यह क्रम है,
श्रम का चेहरा धूल सहे,
फल की थाली कोई और ले,
अभि मेहनत कोई और गहे।

कुर्सी केवल लकड़ी नहीं है,
ये अवसर की ऊँचाई है,
और झाड़ू केवल झाड़ू नहीं,
ये श्रम की सच्ची कमाई है।

जीवन की यह मौन कहानी,
चित्र नहीं, दर्पण बन जाती,
जहाँ पसीने की हर बूँद-बूँद,
किसी और की मुस्कान कहलाती।

आओ ऐसा समय रचें अभि,
जहाँ श्रम का सम्मान मिले,
जिसने खेतों में बीज उगाए,
उसको भी वरदान मिले।

नाम उसी का गूँजे जग में,
जिसने श्रम की लौ जलाई,
क्योंकि दुनिया चलती केवल,
मेहनतकश की सच्ची कमाई।
रचनाकार:-अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

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ये पैसा है मेरे दोस्त....
इस चाहे जितना तोड़ो-मरोड़ो चलाओ वो चल जाएगा....
ये है पैसे की ताक़त...
और सच्चाई देखनी है तो किसी से पैसे मॉंग कर देखो...
उसके मना करने से पहले उसकी ऑंखें ही मना कर देती हैं....
आज की सच्चाई मात्रा पैसा कमाना है...
मैंने रिश्तो को बचाने में आधी ज़िंदगी लगा दी,
तब समझ में आया पैसा है तो रिश्ते बन जाते हैं
और नहीं है तो वही रिश्ते बिगड़ जाते हैं...।
अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
- Abhishek Chaturvedi

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ये पैसा है मेरे दोस्त....
इस चाहे जितना तोड़ो-मरोड़ो चलाओ वो चल जाएगा....
ये है पैसे की ताक़त...
और सच्चाई देखनी है तो किसी से पैसे मॉंग कर देखो...
उसके मना करने से पहले उसकी ऑंखें ही मना कर देती हैं....
आज की सच्चाई मात्रा पैसा कमाना है...
मैंने रिश्तो को बचाने में आधी ज़िंदगी लगा दी,
तब समझ में आया पैसा है तो रिश्ते बन जाते हैं
और नहीं है तो वही रिश्ते बिगड़ जाते हैं...।
अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

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सबकी अपनी-अपनी बारिश....

आपकी पीड़ा की प्रतिध्वनि

वास्तविक सच्चाई यही है कि कोई सुनना नहीं चाहता....💔

बस एक और गहरी बात......💔