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कविता तू रहता कौन से शहर में है क्या तेरे पास जाने की कोई और रास्ता है है तो बताना मुझे सचमुच में तेरे पास जाना है तू रहता कौन से शहर में और तुम्हारा घर का पता क्या है मुझे नहीं मालूम बताना मुझे तुझे ढूंढते हुए तुम्हारे शहर तक जाना है तुम्हें गले लगाने के लिए तुम्हारे घर तक आना है तू है इस दुनिया की या तेरा दुनिया कही और है सच-सच बताना तू किस दुनिया से है मुझे सचमुच में तुमसे मिलना है तेरी एहसासों में जीती रही आज तक मैं तुम्हें सपनों में देखती रही आज तक में पर अब ऊब गई हूं मैं इस नियंत्रर एक जैसे चलते हुए जिंदगी से अब मुझे तुम्हारे पास आकर तुम्हें महसूस करना है क्या-क्या बताऊं तुम्हें तुम्हें गले लगाना है तुम्हें चूमना है तुम्हारे साथ पूरी दुनिया घूमना है मेरी ख्वाहिश तुझसे शुरू होती है और तुम्हें तक जाती है पर मैं निराश हूं इन ख्वाहिशों से जो हकीकत होते हुए मुझे कभी ना देखा तू है कहीं पर इन आंखों के सामने तू कभी ना दिखा क्या यही मुकद्दर है हमारी या बस यह मेरी किस्मत है तुम्हें सोचते रहना और सोचते रहना पागलों की तरह सोचते रहना और सोच सोच कर तुम्हें पाने की झूठी ख्वाब बुनना उफ कितनी पागलपन से भरी हुई मेरी ऐ दिमाग है जिससे तुम कभी जाते ही नहीं पर क्या करूं अगर तुम्हें भुलाना आसान होता तो भुला दिया होता और दिल मै किसी और से कब की लगा लिया होता सच कहूं तो तुम्हें भुलाने सच में बहुत ही मुश्किल है मेरे लिए पर अब सोचती हूं तुम्हें ढूंढती रहूं या तुम्हें ढूंढना छोड़ कर थोड़ी ध्यान खुद पर दे दु ऊफ तुम्हारा नाम लेकर मेरे लिए यह डिसाइड करना भी मुश्किल है क्या करूं तुम्हारा नाम लेना छोड़ दूं पर तुम्हारा नाम से ही तो यह धड़कन धड़कती है यह थम जाएगी तो मैं मर ही जाऊंगा आ कितना मुश्किल है मेरे लिए ऐ जहां मे तुम्हें ढूंढना और खुद को संभालना
एक लड़की अपनी अधूरी यादों के लिए किसी को ढूंढती फिर रहा है शेहरो शेहरो गलियों गलियों उसकी आंखें एक जगह नहीं टिक रही बस भटकती जा रही है बेहती जा रही है वो जिसे ढूंढ रहा है वह उसे मिल नहीं रहा कहीं भी नहीं ना शहरों में ना गलियों में ना गांव में ना चलती फिरती कहीं भी राहों में कहां जाकर छिप है उसे नहीं पता बस वह पागलों की तरह से ढूंढ रही है गीत निर्मोही बलिए बावरी हो गई मैं बीरहा बीरहा मारा फिरती नैना बस तुमको निहारा करती कहा कहा ना मैंने तुमको ढूंढा बलिए तू है की बड़ी निर्मोही कहां जा छुपा बलिए नैना बस तुमको डगर डगर निहार करती डगर डगर मटका कहीं ना तो मुझको मिला बलिए तू है बड़ी निर्मोही बलिए तू है बड़ी निर्मोही बलिए हु हु हु हाआ। हाआ। हाआ नैंन मोही बिरहा बिरहा मारे रोते। नयनं सूख गई पनिया मोहि कुछ नहीं भावे जोगी रे तोहरे सुरतिया बिन जागे नैन कटे रतिया याद करतो रहित तोहरे तिरत्या हु। हु। हु हु। हु। हू 3 मैं तो भूली बीछरी यादों के सहारे हाथों में बिखरे हुए लेकर लकीरों के सहारे फिरता फिरता बंजारों की तरह बिरहा मारे मारे विचारों की तरह फिरता फिरता बंजारों की तरह बिरहा मारे मारे बंजारों की तरह हा। हा। हा। बाबरी में इश्क के जोक ना जानू बीना जाने बिना पहचाने सोची ना समझी में पर गई उलझी सी नयनं हमें अपना नयनं मिला ते रोई मैं बिना आंसू अंखियों से रोई मैं मैं बाबरी बिरहा बिरहा मारे फिरती नैनो से तुमको नहारे फिरती तू है कि बलिए निर्मोही मिलता ही नहीं मुझको कहीं हा। हा। हा। कहां जा छिपा है मेरे निर्मोही बलिए अल्फाज जगह-जगह ढूंढा मैंने तुझे पागलों की तरह ढूंढा और ढूंढता रहा तू निर्मोही मुझे कहीं ना मिला शायद तुम्हें मुझे इस हाल में देखकर अच्छा लगता है अगर मजा आ रहा है तो छिपकली देखा करो और मुझे देखा करो तब तलक देखा करो जब तलक मेरी बहेम टूट नहीं जाती की मोहब्बत में मोहब्बत पागलों की तरह करना मेरे हिस्से में आई और यह हिस्सा तुम्हारे लिए कोई खास नहीं उसे दिन से मेरा घुटना मेरा मरना बस मेरी किस्मत है जब नैंन तुम्हें देखकर और कुछ देखना चाहा ही नहीं अगर गीत आप सबको अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए मैं आपके प्रिया राइटर अभिनिशा 🦋❤️💯
सांसे गहरी गहरी सांसे गीत अल्फाज मेरी दुनिया रंगीन हो गई किसी के आने से मेरी आंखें एक इसी चेहरे पर ठेहर गई जिसे देखकर मेरी सांसे गहरी हुई अब दिल बस कर रहा है उसकी बाहों में समा जाने को उम्र भर उसके हो जाने को हां सांस गहरी गीत मेरी दुनिया दुनिया में रंग भरी सारी दुनिया से दूर जाकर मेरी नजर तुम पर ठेहरी और हुई सांसे गहरी गहरी सांसे सांसे गहरी आ जा मेरी जाने जिगर आके मेरी बाहों में समा गहरी सांसे सांसे गहरी सांसे गहरी सांसे गहरी तेरे संग घूमु मैं घूमु दिन दुपहरी दु। पहरी तुझे मांगा है दुआओं में ऐ मेरे साथिया मेरे साथ चल दिन से रात तक साथिया बनके मेरे साथ चल चल दिन रात तक तक दिन रात तक तेरे साथ भटकु खुले आसमान के नीचे हरी धरती के बीचों-बीच मैं भटकु सारी उम्र तेरे पीछे पीछे ओ ओ ओ ओ ओ ओ 3 साथिया मांग ले मुझसे मेरी उम्र सभी दे दूंगी तुझे अपनी जिंदगी साथ तेरे चलने को हूं मैं बेताब बड़ी मैं हूं कहां। हूं यहां तेरी बाहों में समाऐ तेरी राहों में बंके तेरे साऐ सांसे गहरी गहरी सांसे सांसे गहरी गहरी सांसे हु हू हु हु। मैं दुनिया भूल गई तेरी बाहों में आके मेरी दुनिया में रंगीन हुई तेरे साथ पा के सांसे गहरी गहरी सांसे तेरे संग चल दूं मैं कहीं भी जब भी कहे तु दिन हो या रात ऐ मौसम ऐ हवा ऐ चांदनी सब गवाह है मेरे मेरे इश्क मैंने किया है वादा मेरे ढलते उम्र तक मैं निभाऊंगी ढलती उम्र तक तुम्हें चाहूंगी दूर तेरी बाहों से और कहीं ना जाऊंगी हां कहीं ना जाऊंगी सांसे गहरी गहरी सांसे मैं मुकम्मल हो गई तेरी बाहों में आ के सांसे गहरी गहरी सांसें अब ऐ निगाहें तुम पर ही ठहर ठेहरी उम्र भर आ के सांसे गहरी गहरी सांसे हु। हु हू हू। हु हु सांसे गहरी गहरी सांसे हु। हु। हु। 2 अगर यह गीत आप सबको पसंद आए तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा ❤️🦋💯
दृश्य मुरझाए हुए फूल एक बड़ा सा बगीचा और सूखी धरती पर कुछ छोटे-छोटे फूल खड़े हैं उनकी पंखुड़ियाँ कमजोर हैं और वह पूरी तरह से निराशा में डूब चुकी है उन फूलों की खुशबू लगभग खत्म हो चुकी है वे आसमान की ओर देख रहे हैं बारिश के इंतजार करते हुए और कुछ फूल बगीचे के गेट की तरह देख रहे हैं माली की कदमों की आहट सुनने के लिए उन्हें नहीं पता कि माली लौटेगा भी या नहीं फिर भी वे जड़ों को छोड़े बिना खड़े हैं उन्हें नहीं पता की बारिश होंगे या नहीं फिर भी वह बारिश के इंतजार करते हुए जिंदा रहने की उम्मीद बना रहे हैं पर हैरानी के बात यह है कि उसके साथ-साथ पूरा दुनिया सुख कर रहे हैं ना हवा ना पानी ना कोई देख भाल फिर भी पलके खोल कर आसमान की तरफ देखते हुए एक लंबा इंतजार कविता फूल तो खिले हैं बगीचों से खुशबू उड़ता जा रहा है फूल तो खिल रहे हैं पर वह फूल खिलते ही मुरझा जा रहा है अब पहले की तरह बगिया में सुगंध नहीं अब पहले की तरह बगिया की धरती हरी भरी नहीं अब पहले की तरह फूल खिल रहे नहीं ना अब भवर आता है फूलों की महक से बगिया में ना अब फूल भवरा को रिझाता है खुशबू बिखोर कर हरी भरी धरती सुख गए अब ना माली अपने बगिया निहारने तक आता है अब ना माली उन पौधों में पानी दे दिया आता है अब ना माली उन फूलों के पौधों को पोषण देने आता है अब ना माली दूर खड़े रह कर फूल को खेलते देखा मुस्कुराता है अब ना माली फूलों के सुंग को महसूस करते हुए आनंद से भर जाता है अब कुछ भी नहीं पहले की तरह सब बदल गया है हवा पानी के बिना धरती बंजर हो गई और माली के देखभाल के बिना सारे फूल मुरझा गऐ जो बचा खुचा फूल है उसकी आयु कम हो गया है वह बस किसी तरह अपने जरो से धरती को जकड़ रख कर उगाने की कोशिश करते हैं वह बस किसी तरह थोड़ी सी खेलने की कोशिश करते हैं वह खुशबू बिखोना चाहते हैं किस लिए की फिर से माली का ध्यान उस पर जाए और वह मंत्र मुक्त हो जाए फूलों की सुगंध महसूस करके भबरा भी आ जाऐ और उसके प्यार में पड़ जाए और हरी भरी धरती देखकर और सभी पंछी आए जो उसे थोड़ी और पोषण देने में मदद करें पर ऐसा अब नहीं होता अब बंजर जमीन हो चुकी है अब फुल बस रो रही है खुद को बचाने के लिए बारिशों से उम्मीद कर रही है वह बारिश जिसे अब भरोसा नहीं
दृश्य के साथ गजल बारिश के दिन चांदनी अंधेरी रात और सड़कों के किनारे दौड़ते हुए लाइट कुछ घरों से दूर एक घर एक लड़का जो बैठा है अपनी जिंदगी की खुशनुमा पलों में वो अपने बरांदे मे चेयर पर अपने वाऐ पाऊ पे दाई पाऊ रखते हुए बढ़िया आराम से बैठा है वही बाहर तेज बारिश हो रही है वह चेयर पर बैठते हुए अपने हाथों में रखी हुई पेन से कॉपी की तरह देखते हुए कुछ लिख रहा है और अभी अचानक वह नजर उठा कर बारिश की तरह देखा है और वह बारिश की तरह दिखते ही वो मुस्कुराता है और वह अचानक से उस पेन को उसी कॉपी के बीच में रखते हुए उठ खड़ा होता है वही सामने रखी टेबल पर एक और कॉपी होती है जिस पर उसकी नजर जाता है और हल्के झुकते हुए वह धीरे-धीरे अपने हाथ नीचे करता है और उसकॉपी और पेन को उसी टेबल पर साइड में रखता है और अचानक हल्के हाथ बढ़ाकर उसी टेबल पर रखी हुई एक और कॉपी को उठना है और उठते ही उस कॉपी को पलटते हुए उस कॉपी से एक पन्ना फार कर निकलता है और फिर इस कॉपी को वही रखते हुए वो और खुशी-खुशी उस पाने से एक नाऊ बनता है और नाऊ बनते ही वो चलकर बरांडे के किनारे आता है और वो वहां बैठते हुए तेज बारिश में अपने हाथ बड़ाते हुए अपने बनाए हुए नाऊ को बारिश की पानी में वहां देता है बिना सोचे कि उसने उसे पन्नों में क्या लिखा था उसने देखा भी नहीं बस वह खुश था उस वक्त नाऊ को पानी में बहते देखा वह मुस्कुराते हुए आपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए अपनी नाऊ को अपने द्वारा से बेहे कर सड़क की तरफ जाते हुए देख रहा है गजल थी कहां तुम्हारे जिंदगी में मैं हमसफर की तरह थी बस एक ग़ज़ल की तरह किसी शाम बैठकर तुमने लिखा था एक डायरी में मुझे एक मदहोशी सी धड़कन ने मुझे छुआ था एक एहसास हूं मैं जो कभी तुम्हें हुआ था आदतें नहीं मैं तुम्हारी जो मैं तुम्हारे संग रह जाऊं किसी दिन भूलकर तुमने डायरी से वही पन्ना फार कर कागज के नाऊ बनाकर बारिश में बहा दिया बस तुम खुश थे छोटे बच्चों की तरह कागज की नाऊ से बारिश में खेलते हुए तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल जो दे तू मुझको गम शौक से ले जाऊं मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं हा मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं ऊपर लिखी गई दृश्य बस एक नाटक्या इस ग़ज़ल की असली कहानी नहीं गजल के अंदर कोई है जिसे दर्द हो रहा है पर वह शिकायत नहीं कर रही वह खुश है उसे खुश देख कर पर वो गजल नहीं है उसकी जिंदगी में ग़ज़ल की तरह ही है
है नहीं यकिन फिर भी मोहब्बत किया जा रहे हैं गीत अल्फाज बातें बरे हैं आपके जनाब ख्वाब दिखाकर कहीं छोड़ तू न जाओगे वादा करो की कभी दिल तोड़ तो ना जाओगे तुम औरों की तरह तो नहीं कहीं औरों की फितरत लेकर तो ना आओगे गीत साऐ से नहीं चलती जिंदगी वादा करो कि साथ निभा ओगे हु हु। हु। हु २ साऐ से नहीं चलती जिंदगी वादा है कि साथ आओ गे हा। हु हा हु हु हु 2 बातों से शायरी जानी हो तुम बातें करते हो फरेबी हो तुम तेरी बातों पे कैसे करूं मैं यकी बातों से नहीं मिलती खुशी वादा करो कि साथ निभाओ गे सा। थि ।या मेरे साथ आओ गे हु। हु। हु। हु। हु। 2 अखियां तेरी देख ऐ अखियां मेरी जानती है अंखियों को तेरी हा यकीन नहीं फिर भी मोहब्बत किया जा रहे हैं मन नहीं जिंदगी फिर भी मारे जा रहें हैं हां यकीन नहीं तुम पे फिर भी तुमसे मोहब्बत किया जा रहे हैं मन नहीं जिंदगी फिर भी तुम मर जा रहे हैं हुं हु। हु हु हु 2 तुम्हारे लिए अपनी कीमती वक्त जाया किया जा रहे हमने तो तुमको दुनिया जन्नत बनाया अब इरादे पे तेरे सारे फैसले हाला की इरादों से मैं वाकिफ हूं तेरे हां फिर भी मैं खुद को थाम कर बैठी ख्वाहिशों को लेकर बैठी बैठी में राहों पर तेरी इंतजार करते हु। हु। हु। हु। हु 2 है तू चालबाज बरे फिर भी मैं तुम पर यकीन करती हूं करती हूं हा करती हूं करती हूं। हा मैं तुमसे प्यार करती हूं हु हु। हू। हू। हू2 नसीहत देती दुनिया झूठे वादा तेरा पर एक तेरे संग ही दिल लगी करने का करने का दिल करता है मेरा हा। हा। हा। हा। हु। हु। हु। हु। 2 मैं जानती हूं हर पल दर्द सहना होगा नहीं चाह कर भी नैनो को रोना होगा फिर भी ए नैना एनैना तेरे रहा तेरे रहा नीहरता जा रहा हु। हु। हु। हु। हु 2 तुम कसम खाते हो कभी रुलाओगे नहीं वादा है कि इंतजार कभी कराओगे नहीं हु हु हु। हु। हु। हु हु। हु। हु हु। 2 तुम कसम खाते हो कभी रुलाओगे नहीं वादा है कि इंतजार कभी कराओगे नहीं हां इंतजार कभी कराओगे नहीं है नहीं यकीन फिर भी हा भरे जा रहे हैं है नहीं जिंदगी फिर भी तुम पर मारे जा रहे हैं हा बस करो जा रहे हैं बस कर जा रहे हैं तुमसे मोहब्बत कर जा रहे हैं तुमसे मोहब्बत कर जा रहे हैं हा तुम पर हम मर जा रहे हैं
इस वक्त के उल्लेख में कविता अगर अभी मौत की फरिश्ता आए तो मैं डर के भागने की वजह बिना डरे वही खड़ी रह जाऊंगी अभी मौत से मुझे डर नहीं और ना ही जिंदगी से कोई उम्मीद हंसते मुस्कुराते हुए चलते रहे सफर पर जिंदगी के गीत गुनगुनाते हुए वह गीत जिसमें थोड़ी खुशी है थोड़ा गम थोड़ी तन्हाई है थोड़ा प्यार थोड़ा अकेलापन और अपनापन उतार चढ़ाव से भरी जिंदगी नहीं पता कैसी है पर लोग कहते हैं दिल में प्यार हो तो जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है पर नहीं पता इस वक्त मेरे दिल में क्या है बस लग रहा है कि अगर यही जिंदगी है तो मर जाना बुरा नहीं खाना पीना और बेवजह के काम करना और फिर थक कर सो जाना यही जिंदगी है तो मर जाना अच्छा है मैं आज सोच रही थी क्या मैं अभी इसी वक्त मर जाऊं तो क्या मुझे तकलीफ होगी शायद नहीं मुझे बिल्कुल तकलीफ नहीं होगी अपनी मौत पर अगर मैं भी मर भी जाऊं तो मुझे बिल्कुल पछतावा नहीं होगा ना ही मैं डरूंगी मौत को अपने सामने देखकर बेवजह की जीते रहने और सोते रहने से अच्छा है मर जाना इस वक्त मेरे दिल में जो भावनाएं बह रही है यही है और इस वक्त की जिंदगी मेरी यही है खुशी और गम महसूस नहीं हो रही बस नींद आ रहा है और ऐसा लग रहा है कि सदियों तक सोई रहना चाहती हूं और सदियों से सोती ही आई हूं इसीलिए अभी मौत से भी मुझे डर नहीं नहीं जिंदगी का अभिलाषा है इस वक्त के उल्लेख में मेरे पास जीने के लिए कोई खुशी नहीं है नहीं प्यार करने के लिए कोई इंसान नहीं तो कोई अपने हैं जो कहे सके बस थोड़ी देर आराम कर लो और फिर तुम कर सकती हो जो तुम करना चाहती हो इस वक्त बस तुम्हारी बॉडी की थोरी एनर्जी काम हो गई है इस वक्त मेरे अंदर बस तन्हाई है मैं ना हीं खुद में उलझा हूं ना ही कहीं और बस यही जिंदगी है तो क्यों जिंदगी है मेरी सवाल इस वक्त मुझे और इस दुनिया से यही है
आज मैंने एक सपना देखा आज मेने एक सपना देखा और देखा किसी को मेरे लिए रोते हुए वो चेहरा बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी हकीकत में मैंने उसे कभी कहीं नहीं देखा और उसे देखकर मुझे ऐसा लगा कि उसे में सदियों से जानता हूं उसे रोते देखा मेरे दिल भारी आई और मैं उसे फिर दुबारा रोते हुए नही देखना चाहती थी नहीं पता क्यों पर वह चेहरा अब तलाक मुझे याद है उसकी आंखों की आंसू अब तक मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है क्यों कोई मेरे लिए रो रहा था क्यों वो रोते हुए चेहरे मेरी दिल और दिमाग से नहीं जा रहा है अब तलाक कहते हैं सपना मन की कलपना होता है पर वह अंजनी चेहरा मेरे लिए कल्पना से बर कर था वो रोते हुए आंखों ने मेरे इन आंखों को रोने के लिए मजबुर कर दिया उसके जज्बात से भरी बातों ने मेरे दिल को गहराई से छू लिया और मेरे रोम रोम मुझसे सवाल करने लगी क्या यह बस सपना है यह सच्चाई किसी के दिल की गहरा दर्द के अब तलाक उनके आंखों उनके चेहरे से मेरी नजर हठ नही रही मैं पल दो पल जाकर उसके चेहरे पर ठहेर जाती हूं उनके बातें सुनने पर मजबूर हो जाती हूं क्या है यह और क्यों है मुझे नहीं पता बस मुझे पता है जो मैंने देखा उसमें किसी के दिल में गहरा दर्द था वह रो तो मेरे लिए रहा था पर उसकी आंखें चिक चिक कर कह रही थी की यह मुझसे बर्दाश्त नहीं होता वह थक चुका है मुझे ढूंढते हुए अब और इंतजार करना तुम्हारी मेरी जान ले रही है मैं वापस लौट जाऊं उसके साथ जीने के लिए उसके साथ हमेशा रहने के लिए मैं आज तय नहीं कर पाई वह सपना था यह हकीकत थी यह मेरी ही लिखी हुई कोई कहानी पर इतना जानती हूँ उसके आँसू नकली नहीं थे क्योंकि उन्हें देखकर मेरी आँखें भी भर आई थी
ऐ जुगनू कविता उस अंधेरी रात जब मैं छत पर अकेली बैठी थी, एक जुगनू आया और मेरे पैरों पर बैठ गया तब मैंने कैसे देखे हुए उससे कहा ऐ जुगनू, मेरे पास आक मेरी कंधों प बैठ मेरे पैरों को चूमना छोड़कर आ मेरी हथेली पर बैठ ऐ जुगनू मेरे पास आके मेरे कंधों पे बैठ मेरे पैरों को चूमना छोड़कर आके मेरे हथेली पर बैठ और मेरे हाथों की लकीरों को रोशनी से भर दे तेरी रोशनी काफी है मेरी किस्मत को जगमगाने के लिए ऐ जुगनू मेरे पास आ और आ को मेरी लेहराते हुए बालों मैं लिपट जा इन काले बाल में टिमटिमाते तारे की तरह चमक आकाश बन जाएंगे तेरे होने से जिंदगी रोशन हो जाएंगे और तेरी रोशनी काफी है मेरी जिंदगी भर को रोशन करने के लिए ऐ जुगनु मेरे पैरों को चूमना छोड़कर आ मेरी हथेली पर बैठा
बस शगुन है कविता ऐसा लग रहा है कि पूरा दुनिया मेरे अंदर है मैं जी नहीं रही बल्कि लग रहा है कि मैं खुद ही एक जिंदगी हूं इस साम में छत पर आकर बैठना और इस चलती हुई ठंडी हवाओं को धीरे-धीरे महसूस करना इसमें शगुन है इस शगुन को महसूस करके लग रहा है कि यह दुनिया बस मेरे लिए है और मैं एकलौता जिंदगी हूं जो जी रही है जो इस वक्त को इस पल को इस मौसम को महसूस कर रही है इस पल में कोई दुख नहीं है कोई गम नहीं है ना ही कोई खुशी है बस शगुन है सांसों में समाऐ हुए जिस्म के कन कन में समाए हुए और मैं इस वक्त यहां हूं और इस पल को जी रही हूं इस चलती हुई हवा को इस ठंडी मौसम को महसूस कर रही हूं सारे थकावट से उतर गई है जिस्म की दर्द खत्म हो गई है और इस वक्त किसी से शिकायत नहीं है ना कोई चिंता है ना फिक्र ना करता दिल भविष्य के जिक्र ना उलझा है अतीत में जाकर बस मैं यहां हूं इस वक्त मैं बुद्ध हूं बुद्ध की शांति की तरह मेरे मन की शांति है मैं अभी एक चेतन हूं इस पल में कुछ भी नहीं पता बस अपने वजूद इस प्रकृति में मिलते हुए देख रही हूं और इस प्रकृति को खुद में और मैं और यह प्रकृति एक दूसरे में समाए हुए यहां हूं अभी यही परम सत्य है इस ब्रह्मांड और मेरी
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