Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

**“कभी-कभी इश्क आसान नहीं होता…
जहाँ टकराव नहीं… वहाँ इश्क नहीं होता।
इश्कबाज़ वही बनते हैं…
जहाँ ये टकराव चलती रहती है।
प्यार तो हर कोई कर लेता है…
पर इश्क में
एक-दूसरे से भिड़ने वाले ही
अक्सर इश्कबाज़ कहलाते हैं…”** 💫

parmarsantok136152

**“जब सब अपने होकर भी अपने नहीं लगते…
जब दिल थक जाता है, और आँखें जवाब देने लगती हैं…
तब मैं खुद को एक ही जगह पाती हूँ—
मेरे Krishna के पास 💙
मैं टूटती हूँ…
पर वो मुझे बिखरने नहीं देते…
मैं रोती हूँ…
पर वो मुझे अकेला नहीं छोड़ते…
क्योंकि…
👉 मैं उनकी हूँ… और वो मेरे हैं ✨”**
📿 श्लोक
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥”
👉 (सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आओ…
मैं तुम्हें हर दुख से मुक्त कर दूँगा, चिंता मत करो)
💫
**“अब डर नहीं लगता…
क्योंकि मुझे पता है—
👉 मेरे कान्हा मेरे साथ हैं” 💙✨**
🌙
“जहाँ दुनिया छोड़ देती है…
वहाँ से कान्हा संभाल लेते हैं 💫”

parmarsantok136152

**“I am that girl…
whom circumstances once tried to break.
Society tried to stop me,
relationships tried to limit me,
and fate tested me again and again…
But I never learned to give up.
Today, I am not just standing…
👉 I stand strong in front of the world on my own.
I turned my pain into power,
and my dreams into reality…
And today…
👉 I am a world number one businesswoman.
Because I decided—
I will not stop…
no matter how hard the world tries to stop me.” 👑✨

parmarsantok136152

तन्हाई का सच।

दिल ना लगाना कभी दिलदार  सारे झूठे हैं,
कसमें वादे किया था मुझे वो सारे  झूठे हैं।

चेहरों की सादगी में छुपे वो इरादों का ज़हर,
मुस्कान ओढ़े हुए सबके सब  नज़ारे झूठे हैं।

जो हमारे अपने ही थे साँसों के करीब कभी,
मुश्किल वक़्त में वो नदी के किनारे झूठे हैं।

रिश्तों के नाम पर जो मिले थे  हमको कभी,
वक़्त ने दिखा ही  दिया सारे  सहारे झूठे हैं।

इश्क़ की राह में जितने  भी  मिले हमसफ़र,
जो साथ चलने के सब के सब इशारे झूठे हैं।

अब तो “प्रसंग” समझा  तन्हाई के शहर  में,
रूह से जो भी करीब  आए वो सारे झूठे हैं।


- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर

advpranayrajranveer8815

बस में होता अगर मेरी
कविता




बस में होता अगर मेरे
तो उतार लाता जमीन पर चांद को
और रोशन तुम्हारे अंधेरी रातों को करता




बस में होता अगर मेरे
तो तेरे होठों की हंसी जो कभी भी फीकी पड़ती
उसके लिए मैं सागर की आखिरी छोर से लाली लाता
और लाली से तेरी होठों की मुस्कान भर देता




बस में होता अगर मेरे
तो तेरी आंखों में यूं कभी आंसू ना आने देता
समुद्र के बीच से वह लहेर उठा लाता
जो लहेर तेरी आंखों को ठंडक देती



बस में होता अगर मेरे
तो कभी तुम्हें विचलित न होने देता
धरती से दूर स्वर्ग से वे फूलों वाली बादीयां लता
जो तुम्हें शगुन देता



बस में होता अगर मेरे
तुम्हें अकेला कभी महसूस न होने देता
तीनों लोको की हर एक प्राणी को
तुम्हारे महरून बनाता
जो तुम्हारी कहानी सुनता


बस में होता। अगर मेरे




आगर ऐ कविता अच्छे लगे तो
आगे तक करें
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

abhinisha

**“इबादत ही मोहब्बत है…
मोहब्बत ही इबादत है… 💫

मुझे तेरी ज़रूरत है…
तुझे मेरी ज़रूरत है…” ❤️

parmarsantok136152

✔️💯

narendraparmar2303

कुछ लम्हों के लिए ही सही, ज़िंदगी ठहर सी जाती है,
जब तेरी यादों की खुशबू
दिल के आंगन में उतर आती है।💗🌹

narayanmahajan.307843

सत्यवीर सिंह जेतुंग

satveersingh.781057

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

સ્વરૂપની માત્ર શ્રદ્ધા જ બેસે, તો જગતમાં કોઈ જગ્યાએ ડર લાગે જ નહીં, ભય જતો રહે. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/IujxbTC5

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dadabhagwan1150

मैं अगर "जय श्री राम" या "भारत माता की जय" बोलता हूँ तो लोग मुझे भाजपा से क्यों जोड़ते हैं?
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यदि किसी राष्ट्रीय-धार्मिक प्रतीक या विषय जिस से देश का एक बहुत बड़ा समुदाय सहमत हो, पर कोई झुंड कब्ज़ा कर ले तो अमुक प्रतीक से सम्बद्ध सभी नागरिको को अमुक विषय का समर्थन करने के लिए उस झुण्ड में शामिल होने के लिए बाध्य होना पड़ता है।
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तब अमुक झुण्ड इस प्रतीक को अपना लेबल बनाकर आपको उनके झंडे के निचे आने के लिए कहेगा। यदि आप उनके झुण्ड में शामिल होने से इंकार करते हो तो वे कहेंगे कि आपमें अमुक राष्ट्रिय-धार्मिक प्रतीक के प्रति निष्ठा नहीं है। अब आपके पास सिर्फ 2 रास्ते बचते है -
या तो आप खुद को अमुक राष्ट्रिय-धार्मिक प्रतीक से अलग कर लो, या
उस झुण्ड में शामिल हो जाओ।
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और इस तरह कोई राष्ट्रीय-धार्मिक प्रतीक किसी झुण्ड के हवाले होकर अपनी आदर्श स्थिति से गिरकर विभाजनकारी एवं विवाद का विषय बन जाता है !! और यदि ये झुण्ड कोई राजनैतिक झुण्ड है तो विभाजन की प्रक्रिया में तेजी आती है, और स्थिति और भी बदतर हो जाती है !!
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संघ=बीजेपी के नेताओं ने अपना आधार बढ़ाने के लिए भारत माता की जय, जय श्री राम, हिन्दू, हिंदुत्व जैसे जोड़ने वाले प्रतीकों का इसी तर्ज पर इस्तेमाल किया है।
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स्पष्टीकरण :
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(1) भारत माता की जय !!
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कुछ 2-3 साल पहले तक भारत के ज्यादातर (लगभग 80%) नागरिक 'भारत माता की जय' बोलने पर सहमत थे, या उन्हें 'भारत माता की जय' बोलने में कोई आपत्ति नहीं थी, तथा शेष (20%) लोगो का भी यह स्टेण्ड नहीं था कि — हम भारत माता की जय नहीं बोलेंगे !!
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लेकिन भारत में लगभग 25 से 30% नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनैतिक समूह के नेता अचानक इस प्रकार के बयान देने लगते है कि -- 'तुम्हें भारत माता की जय बोलना पड़ेगा', 'तुम नहीं बोलोगे तो हम तुम्हें सिखाएंगे', 'जो भारत माता की जय नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए' या 'भारत माता की जय नहीं बोलने वाले गद्दार है' आदि आदि।
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कृपया इस बात पर ध्यान दें कि बीजेपी=संघ के नेता यदि भारत माता की जय के नारे लगाते है तो इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है, और यह विभाजन पैदा नहीं करता। किन्तु वे प्रत्येक भारतीय को बाध्य करने लगते है कि उन्हें भी भारत माता की जय बोलना चाहिए !!
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मतलब, आप किसी दुसरे व्यक्ति के बारे में यह बलात रूप से तय करना चाहते हो, कि तुम्हे भारत माता की जय का नारा लगाना पड़ेगा।
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लेकिन आप इसके लिए क़ानून बनाने की हिम्मत नहीं दिखाना चाहते !!
भारत का राष्ट्र गान जन गण मन है, और यह कानूनी रूप से राष्ट्र गान है। और यदि कोई व्यक्ति जन गण मन का अपमान करता है तो उस पर संदेह करने की हमारे पास वाजिब वजह होती है।
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लेकिन यदि किसी राजनैतिक पार्टी का नेता मुझ पर धौंस जमाता है कि, मुझे भारत माता की जय बोलना पड़ेगा, और यदि मैं किसी अन्य राजनैतिक पार्टी का समर्थक हूँ तो मैं उनसे यही कहूंगा कि — तुम क़ानून पास करके इसे राष्ट्रिय नारा बना दो, और सिर्फ तब ही मैं यह नारा लगाउंगा। और जब तक आप ऐसा क़ानून नहीं बनाते मेरा मानना है कि, आपकी मंशा सिर्फ राजनैतिक विभाजन करने की है।
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मामला भारत माता की जय बोलने का नहीं है। मामला यह है कि कोई राजनैतिक समूह 'देश की एकता से सम्बंधित' नारे या कवित्त या सूक्ति को अपनाता है तो बात समझ आती है, लेकिन फिर वह इस पर "एकाधिकार बनाने के लिए नागरिकों को अमुक नारा लगाने के लिए ललकारता है या धमकाता है" तो देश को एकता में पिरोने वाले ऐसे उद्घोष का राजनैतिक करण हो जाता है, और शेष 70% में से कुछ या ज्यादा लोग यह उद्घोष करने से इंकार कर देते है, या इससे दूर छिटक जाते है !!
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यदि किसी राजनैतिक दल की देश के महिमा गान से सम्बंधित और पहले से प्रचलित किसी नारे में आस्था है तो बेशक उन्हें ऐसा नारा लगाना चाहिए। जब आप इसे बार बार दोहराएंगे तो स्वत: ही अमुक दल की पहचान ऐसे नारे से बन जायेगी और अमुक पार्टी के अलावा अन्य दलों के नेता/कार्यकर्ता/नागरिक भी अनायास इसका अनुसरण करेंगे। लेकिन जब आप अन्य राजनैतिक दलों को भी यह नारा लगाने के लिए ललकारने लगते है तो यह साफ़ है कि आप इसका इस्तेमाल अपना झुण्ड बढ़ाने के लिए कर रहे है। और इसीलिए इसे एक बड़े वर्ग द्वारा खारिज कर दिया जायेगा !!
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उदाहरण के लिए हो सकता है कि किन्ही व्यक्तियों को 'जय भीम' कहने से इंकार न हो, लेकिन यदि माया मेडम उन्हें ललकारे कि 'तुम्हे जय भीम कहना पड़ेगा', तो स्वाभाविक रूप से मुलायम या बीजेपी समर्थक जय भीम कहने से इंकार कर देंगे। तब मायावती यह कह सकती है कि तुम जय भीम कहने से इनकार कर रहे हो अत: तुम दलित विरोधी हो। और इस तरह मायावती का वोट बैंक तो बढ़ेगा, लेकिन वो लोग इस नारे से दूरी बना लेंगे जो डॉ भीम राव अम्बेडकर में तो मानते है लेकिन मायावती में नहीं मानते।
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तो बीजेपी के नेता जानते थे कि 'भारत माता की जय' बोलने के लिए ललकारने से इस उद्घोष को करने वाले नागरिकों की संख्या घटेगी, किन्तु हमारे झुण्ड में संख्या बढ़ेगी।
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(2) जय श्री राम !!
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अपने अंतिम वर्षो में अशोक सिंघल ने बयान दिया था — मैंने आडवाणी जी से कहा था कि, राम मंदिर मुद्दे का राजनैतिकरण हो जाने से भारतीय हिन्दू राजनैतिक पार्टियों के अनुसार विभाजित हो जायेंगे, और मंदिर आन्दोलन को नुकसान होगा !!
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(टिप्पणी : हालांकि वे यह बात पहले से जानते थे, लेकिन पूरे 25 वर्षो तक इसमें भागीदार रहकर खामोश बने रहे, और अपने अंतिम वर्षो में खुद को क्लीन चिट देने के लिए उन्होंने यह बयान दिया )
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जय श्री राम हिन्दू धर्म के सभी अनुयायियों का नारा है, और 1990 से पहले तक प्रत्येक धार्मिक जुलुस वगेरह में इसका उदघोष किया जाता था। मतलब कोंग्रेस के मतदाताओ द्वारा भी और अन्य पार्टियों के मतदाताओ द्वारा भी। राम मंदिर आन्दोलन ( 1989 - 1999 ) के दौरान जुलूसो, रैलियों आदि में हिन्दुओ द्वारा यह नारा लगाया जाता था। बाद में राम मंदिर आन्दोलन के अलावा भी बीजेपी=संघ के नेताओं में इस नारे को अपना मुखड़ा बना लिया, और फिर उन्होंने इसका इस्तेमाल कोंग्रेस को चिड़ाने में किया। नतीजतन, अन्य पार्टियों के हिन्दू कार्यकर्ता इस नारे से कतराने लगे और यह नारा एक राजनैतिक हिन्दू* की पहचान बनने लगा।
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*1990 से पहले तक भारत में सिर्फ हिन्दु होते थे। बाद में एक नयी वैचारिक नस्ल का उत्पादन शुरू हुआ - राजनैतिक हिन्दू। जब हिन्दू धर्म एवं अपनी राजनैतिक पार्टी के हितो में से किसी एक को चुनने की बारी आये और ऐसे में यदि कोई हिन्दू हमेशा धर्म की जगह अपनी पार्टी के हितो को तरजीह दे तो उसे राजनैतिक हिन्दू कहा जाता है।
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(3) गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ !!
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जब बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते है कि - "भारत में निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है।" तो यह बयान हिन्दुओ को विभाजित कर देता है। किंतु यही कथन यदि किसी धार्मिक संगठन या आम हिन्दू नागरिक द्वारा कहा जाएगा तो यह हिन्दुओ को विभाजित नहीं करता !!
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कैसे ?
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जब यह बयान कोई राजनैतिक संगठन देता है तो यह बयान हिन्दुओ का धार्मिक नहीं बल्कि राजनैतिक रूपांतरण करने की मंशा बताता है।
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फर्स्ट राउंड में संघ=बीजेपी के नेता बार-बार कहते है कि तुम हिन्दू हो, वो भी हिन्दू है, ये भी हिंदू है, और भारत में रहने वाला हर एक व्यक्ति हिन्दू है।
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सेकेण्ड राउंड में फिर वे बार बार कहते है कि - हिन्दू खतरे में है।
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थर्ड राउंड में फिर वे दावा करते है कि - हम हिन्दूवादी पार्टी है।
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तो चूंकि हिन्दू खतरे में है, और हम हिंदूवादी पार्टी है, और अगर तुम सच्चे हिन्दू हो या तुम्हे हिन्दुओ की फ़िक्र हो तुम हमें वोट देकर हिन्दूओ और हिन्दू धर्म की रक्षा करो !! यदि तुम हमें वोट नहीं दोगे तो हिन्दू नष्ट हो जाएगा, और इसके जिम्मेदार तुम होओगे !!
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और फिर अगले राउंड में वे उन हिन्दुओ को हिन्दू धर्म का दुश्मन बताने लगते है जो उन्हें वोट नहीं कर रहे है !!!
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इस पूरी राउंड ट्रिपिंग का घूम फिर कर सार यही निकलता है कि - यदि तुम खुद को हिन्दू कहलाना चाहते तो हमें वोट कर दो, और यदि तुम हमें वोट नहीं कर रहे हो तो इसका मतलब है कि तुम फर्जी हिन्दू हो, और इसीलिए या तो वामपंथी हो या कोंग्रेसी हो, और चूंकि हम राष्ट्रवादी भी है और तुम हमारी साईड नहीं हो इसीलिए तुम गद्दार भी हो !! और एक बार यदि आप किसी को गद्दार "ठहरा" देते हो तो आपको उसे सड़क पर खींच कर मारने तक का राइट भी मिल जाता है।
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( इसी तरह की राउंड ट्रिपिंग वे वामपंथी एवं सेकुलर शब्द के साथ भी करते है। तब आप किसी भी व्यक्ति को यदि मार देते हो तो आपको बस इतना कहना होता है कि, वह वामपंथी था। और उसके बाद कोई भी आपसे सवाल नहीं कर सकता। क्योंकि वामपंथी का समर्थन करने वाला भी वामपंथी होता है, और इसीलिए अब उसे भी मार देना राष्ट्रिय कर्तव्य बन जाता है !! अब ये बात बिलकुल अप्रासंगिक है, कि जिसे मारा गया है, वह वामपंथी था, या किन्ही अन्य वजहों से उसे मारना जरुरी था, अत: हमले को जस्टिफाई करने के लिए उसे वामपंथी "ठहरा" दिया गया !!)
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बहरहाल, जब राजनैतिक समूह हिन्दू होने के नाम पर मतदाताओं का आवाहन करने लगता है तो विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से दिक्कत शुरू हो जाती है। उन्हें दिक्कत यह है कि जब संघ यह बात बोलता है तो हिन्दू उनकी और दौड़ लगाते है, एवं उनके वोट कम होने लगते है। तो यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में हम ऐसे कई समुदायों एवं व्यक्तियों को जो संघ को वोट नहीं करना चाहते, यह कहते देख सकते है कि -- "हम हिन्दू नहीं है" !!! और यह उनकी बाध्यता होगी, चुनाव नहीं !!
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इसके लिए आप लिंगायतों की नजीर ले सकते है। कर्णाटक में कोंग्रेस ने हिन्दू धर्म से अलग होने की लिंगायतो की मांग को राजनैतिक रूप से सपोर्ट करना शुरू कर दिया है। ऐसा क्यों !! लिंगायतो में एक वर्ग का मानना है कि, हम हिन्दू नहीं है, और हमें हिन्दुओ से अलग धर्म का स्टेटस दिया जाना चाहिए।
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और कोंग्रेस भी चाहती है कि लिंगायतो को हिन्दू धर्म से अलग कर दिया जाए। क्योंकि यदि लिंगायत गैर हिन्दू हो जाते है तो संघ=बीजेपी का लिंगायतो पर क्लेम कमजोर हो जायेगा !! हालांकि इस मांग को कोंग्रेस मिशनरीज के कहने से आगे बढ़ा रही है, क्योंकि अल्टीमेटली जितने भी समुदाय हिन्दू धर्म से अलग होंगे वे सभी के सभी (100%) अल्टीमेटली मिशनरीज की गोद में चले जायेंगे। दुसरे शब्दों, में नारे बाजी का यह ड्रामा कन्वर्जन की एक वजह बनने का काम करता है।
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क्योंकि अब हिन्दू होना सिर्फ धार्मिक हिन्दू होना नहीं है। आपने इसे राजनैतिक पैकेज बना दिया है। और विभिन्न दलित, सेकुलर एवं अन्य सभी ऐसे हिन्दू जो अन्य राजनैतिक पार्टियों के समर्थक है, और हिन्दू होने एवं न होने के बोर्डर पर खड़े है, फर्स्ट राउंड में इस पैकेज को लेने से इनकार करेंगे और बाद में आपका राजनैतिक विरोध करने के लिए हिन्दुनेस का भी विरोध करना शुरू कर देंगे !!
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बहरहाल, यदि यही बात बात कोई गैर राजनैतिक व्यक्ति या संगठन कहेगा तो टकराव टल जाएगा। बीजेपी=संघ के शीर्ष नेता यह बात जानते है। लेकिन वे वोट लेने के लिए एकता के नाम पर हिन्दुओ में विभाजन का जोखिम उठाने के लिए तैयार है। जहाँ तक बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ की बात है वे इस विभाजनकारी निति के दीर्घकालिक असर से भिज्ञ नहीं है। किन्तु इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता। क्योंकि संघ=बीजेपी के कार्यकर्ताओ ऐसे मामलो में संघ=बीजेपी के शीर्ष नेताओ द्वारा ली गयी लाइन का ही पालन करना होता है।
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दरअसल एकता का आव्हान दुनिया में सबसे अधिक विभाजन कारी सिद्धांत है। सभी एकतावादी नेता बुनियादी तौर पर विभाजनकारी होते है। इसीलिए संघ=बीजेपी की गोष्ठियों में बार बार इस बात को दोहराया जाता है कि हिन्दुओ में एकता नहीं है, और यदि हिन्दुओ को बचना है तो उन्हें "एक" हो जाना चाहिए। यहाँ "एक" होने से आशय होता है कि, सभी हिन्दुओ को संघ=बीजेपी के झंडे के निचे एक हो जाना चाहिए। और इसी वजह से संघ=बीजेपी के कार्यकर्ता उन हिन्दुओ को हिन्दु धर्म के लिए दुश्मन के रूप में देखते है जो बीजेपी=संघ को वोट नहीं कर रहे है।
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मेरा बिंदु यह है कि, यदि किसी राष्ट्रिय-धार्मिक विषय को इस तरह से उठाया जाए कि उससे समुदाय में टूटन हो, खेमे बन जाए तो यह अलगाववाद है। राजनीति में अपना वोट बैंक बनाने के लिए इस निति का अनिवार्य रूप से पालन किया जाता है, और सभी पार्टिया वोट बटोरने के लिए ऐसा करती है।
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समाधान ?
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सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि इससे समस्या क्या है ?
(1) मेरे हिसाब से इस पूरी कवायद से बीजेपी=संघ के वोट बढ़ते है, और इससे कम से कम मुझे कोई समस्या नहीं है। यदि इससे कोंग्रेस या आम आदमी को समस्या है तो यह उनकी समस्या है। मैं राजनैतिक पार्टियों पर नैतिकता, ईमानदारी आदि का पालन करने का भार डालने में नहीं मानता हूँ। एक राजनैतिक पार्टी हर वो काम करती है, जिससे उसे वोट मिलते है। राजनैतिक पार्टी इसी के लिए बनायी जाती है। अत: इस मामले में मुझे बीजेपी=संघ के शीर्ष नेताओं से कुछ नहीं कहना है।
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(2) हिन्दू इसीलिए सिकुड़ रहा है, क्योंकि हिन्दू धर्म की संस्थाओ एवं मंदिरों का प्रशासन कमजोर है। अत: मेरा मानना है कि, जिन कार्यकर्ताओ को हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने में रुचि है उन्हें उन कानूनों को गेजेट में छापने की मांग करनी चाहिए जिससे हिन्दू धर्म की संस्थाओ के प्रशासन में सुधार आये।
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अब समस्या यह है कि, इस तरह के ड्रामे के चक्कर में हिन्दू कार्यकर्ताओ का बड़े पैमाने पर समय इस पर बहस करने में बर्बाद हो जाता है, और वे समझते है कि इस तरह की नारेबाजी करके वे हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे है !! और कार्यकर्ताओ के इस तरह की फालतू बहस में उलझ जाने के कारण वे उन कानूनों की मांग आगे बढ़ाने के लिए काम नहीं कर पाते जिससे वास्तव में हिन्दू धर्म मबजूत होगा।
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मेरा प्रस्ताव है कि, हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए हमें "हिन्दू बोर्ड" के प्रस्तावित क़ानून को गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। यदि हिन्दू बोर्ड गेजेट में छाप दिया जाता है तो हिन्दू धर्म का क्षरण रुक जाएगा, और जल्दी हिन्दू इतनी ताकत जुटा लेंगे कि वे विस्तार करना शुरू कर देंगे।
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यह एक तथ्य है कि, हिन्दू धर्म लगातार सिकुड़ रहा है, और पिछले 600 साल से इसके सिकुड़ने में और भी तेजी आयी है। हिन्दू धर्म इतने लम्बे अरसे से इसीलिए सिकुड़ रहा है क्योंकि इसका प्रशासन प्रतिद्वंदी धर्मो ( इस्लाम एवं ईसाई ) की तुलना में बेहद कमजोर है। प्रशासन को सुधारने के लिए हमें क़ानून प्रक्रियाएं चाहिए, लेकिन धार्मिक व्यवस्था सुधारने के क़ानून लाने की जगह पर हिन्दूवादी कार्यकर्ताओ ने राजनैतिक दलों की और दौड़ लगानी शुरू कर दी। यदि आप धर्म को बचाने के लिए राजनेताओ की शरण में जाओगे तो वे आपका इस्तेमाल सिर्फ वोट बटोरने के लिए ही करेंगे।
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हिन्दू बोर्ड क्या है और कैसे यह हिन्दू धर्म को विस्तार करने की शक्ति प्रदान करेगा, इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है -- Pawan Jury का जवाब - हिन्दूओं को अपने धर्म के विस्तार के लिए इस समय क्या कदम उठाना चाहिए?

sonukumai

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं 🌹https://www.instagram.com/reel/DWwfCzENbIZ/?igsh=YWM3aXJnZW1jaGx4

mamtatrivedi444291

नजरे मेरी आज तुझसे मिलाने दे,
दिल मे मेरे है क्या मुझको बताने दे,,

ख्वाबों में तुझसे रोज होती है मुलाकात,
कुछ वक्त तेरे साथ मुझको बिताने दे,,

मैने सुना है मोहब्बत एक इबादत है,
मुझको भी चल आज, आजमाने दे,,

मै इश्क मे भटकती राह का फकीर,
मुझको तेरे दिल मे बस एक ठिकाना दे,,

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

" લાગણી થઈ ઠંડી"

આજકાલ સબંધોમાં મંદી લાગી ગઈ છે.
એમ કહો કે લાગણીમાં ઠંડી લાગી ગઈ છે.

નથી રહ્યું કોઈ-કોઈનું પણ આજકાલ તો,
બે ભાઈઓ વચ્ચે જુવો વંડી લાગી ગઈ છે.

પાશ્ચાત્ય સંસ્કૃતિ પાછળ ઘેલા યુવાનોને,
પણ, આદતોય કેવી ગંદી લાગી ગઈ છે?

વેચાય છે ખુલ્લે આમ એ જ જગ્યાએ,
જ્યાં કહેવાય કે દારૂબંધી લાગી ગઈ છે.

મોક્ષનો માર્ગ બસ એમને મળશે "વ્યોમ "
હાથમાં જેના ઈશ્વરની કંઠી લાગી ગઈ છે

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

" વલોપાત "


જીવનભર કરતાં જ રહ્યાં વલોપાત એ.
છતાં સુધારી ના શક્યાં ખુદની જાત એ.

પાશ્ચાત્ય સંસ્કૃતિ પાછળ મૂકી એવી દોટ,
કે, સમજી ના શક્યાં એના પ્રત્યાઘાત એ.

મોહ માયા ને લોભ લાલચમાં ફસાતાં,
નોતરતાં રહ્યાં રોજેરોજ નવી ઘાત એ.

દેખા દેખીમાં જ અપનાવી ખોટી પરંપરા,
ને, ગુમાવી બેઠાં ખુદની જ રીતભાત એ.

છોડ્યાં ધરમ ને સંસ્કૃતિ જેમણે "વ્યોમ"
ઈતિહાસ છે સાક્ષી કે ખોવાઈ નાત એ.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

radhe shyam guys

sonambrijwasi549078

गर मसला ये है कि
तुम सिर्फ़ ख़्वाबों में मिलोगे,
तो मैं आँखें मूँद कर
यूँ ही सारी उम्र गुज़ार दूँ

narayanmahajan.307843

**“कभी किसी के लिए इतना भी मत रुकना…
कि वो तुम्हें ही हल्के में लेने लगे।
अपनी जगह खुद तय करो…
क्योंकि जो तुम्हें समझेगा, वो खुद तुम्हारे पास आएगा।”**

parmarsantok136152

kdrama name -crash landing on you

priyankawrites

उम्मीद रखना मना है
कविता




जिंदगी बेमानी लगता है
हमें तेरी कहानी अनजाने लगता है


आज सुबह उठे हम
पर
होस में हम थे ही नहीं



खो दिया खुद को कई
उन कहानियों में जो सुनी सुनाई लगी




बहुत शोर शोराबा सुन के उठा था
पर जागी सुबह तो
अपना कोई नहीं लगा


एक डरावनी सपने का अंत हुआ
पर जो सामने था वह दर्दनाक सच्चाई था




जिसे देखकर अपना होस संभालना मुश्किल लगा
जिंदा दिली बन कर रहना मुश्किल लगा


और हमने खुद को खुद ही दफना दिया वही
जहां जिंदा होकर मुर्दा चल रहे थे


वो कब्रगाह लाशों की नहीं थी
वह कब्रगाह रहा उम्मीदो की थी


जहां बड़ी बड़ी अक्षर में लिखा गया था
उम्मीद रखना मना है
यहां आप जिंदा तो हो
पर जिन मना है
🥀🫀🖤






यह कविता आप सबको अच्छे लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

abhinisha

ऐसा भी क्या तुम्हारा नजदीक आना हुआ ..
तुम तो कवरेज एरिया के ही बाहर हो गए..

momosh99

“प्यार सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं होता,
यह वो एहसास है जो दूर रहकर भी दिलों को जोड़कर रखता है।
जहाँ सच्चा प्यार होता है, वहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और खामोशी भी सब कुछ कह जाती है।”

parmarsantok136152