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शुभ संध्या💐

arunvdeshpande

जब कुरान में ऐसी आयतें लिखी हुई हैं, जिनमें लिखा है कि गाय का मांस नहीं खाना चाहिए, फिर मुस्लिम लोग गाय को काटकर क्यों खाते हैं?
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भारत में शरिया नाफ़िज़ नहीं है, इसीलिए इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि कुरान में क्या लिखा है। किसी भी राज्य का शासन गेजेट में लिखी गयी इबारतो पर चलता है, कुरान, बाइबिल या मनु स्मृति में लिखे गए दर्शन पर नहीं।
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(A) मध्य काल :
भारत में गायों पर सबसे पहला हमला अलाउद्दीन खिलजी ने किया था। उसके शासन काल में काफी गायें काटी गयी।
बाबर के शुरुआती दौर में गाय काटने की अनुमति थी लेकिन बाद में बाबर ने गौ कशी पर प्रतिबन्ध लगा दिए थे। बाबर जब मरा तो हुमायूं को वसीयत कर गया था कि, हिन्दुस्तान में गाय न कटने देना।
अकबर, जहांगीर एवं शाहजहाँ के काल में भी गाय काटने पर प्रतिबन्ध रहे।
औरंगजेब ने अपने शुरूआती दौर में गाय काटने की इजाजत दी, लेकिन कुछ वर्षो के बाद उसने भी गेजेट में गाय न काटने के आदेश निकाल दिए थे
उसके बाद से बहादुर शाह जफ़र तक लगातार गाय काटने पर प्रतिबन्ध जारी रहे।
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(B) ब्रिटिश काल :
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जब गोरे भारत आये तो हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाने के लिए कई सारे क़ानून छापें। पेड इतिहासकार इन कानूनों के बारे में कभी नहीं लिखते बल्कि उनकी इस नीति को सिर्फ “फूट डालो राज करो” टाइप का अस्पष्ट वाक्य लिखकर निपटा देते है। यदि पेड इतिहासकार कानूनों की डिटेल लिखेंगे तो पाठक यह जान जायेंगे कि मौजूदा सरकार कौनसे क़ानून छापकर और कौनसे कानूनों की अवहेलना करके गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढाने में कर रही है।
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बहरहाल, गोरो ने भारत में गाय काटने की अनुमति देना शुरू किया। नीति यह थी कि गाय काटने की इजाजत देने से मुस्लिम तबका गाय खाने लगेगा, और इससे हिन्दूओ में रोष पैदा होगा। तो क़ानून आने के बाद कत्लखानो में गायें कटने लगी और हिन्दू-मुस्लिमो में तनाव बढ़ने लगा। 1870 के आस पास भारत में पहला गौ बचाओ आन्दोलन शुरू हुआ। यह आन्दोलन देश व्यापी था और लगभग 25 वर्षो तक निरंतर बढ़ता रहा। लेकिन गोरे टस से मस नहीं हुए। बल्कि उन्होंने अदालत से यह रूलिंग निकाली कि गाय हिन्दुओ के लिए पवित्र नहीं है, अत: इसे काटना जायज है !! इसी दौरान गाय काटने को लेकर हिन्दू-मुस्लिम दंगे भी होने लगे।
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(C) आजादी के बाद :
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जवाहर लाल के शासन काल में गौ कशी जारी रही। बाद में साधु-संतो इस मांग को लेकर संसद का घेराव किया गया और इंदिरा जी ने भारत के उन सभी राज्यों में गौ कशी निषिद्ध क़ानून बनवाये जहाँ पर कोंग्रेस सरकार थी।
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तो भारत के ज्यादातर राज्यों में गौ हत्या प्रतिबन्ध के क़ानून तो है। लेकिन जिन राज्यों में गौ हत्या गैर कानूनी है, उन राज्यों में भी गाय काटी जाती है। वजह ?
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असल में सभी क़ानून ठीक से तभी काम करते है, जब क़ानून तोड़ने वालो को पकड़ने वाली पुलिस एवं दंड देने वाली अदालतें ठीक से काम करती है।
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भारत में कोई भी क़ानून ठीक से काम नहीं करते, और वे ठीक से इसीलिए काम नहीं करते क्योंकि भारत की पुलिस एवं अदालतें ठीक से काम नहीं करती। असल में, भारत की पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा भ्रष्ट है, और इसीलिए भारत के सभी प्रकार के विभागों में भ्रष्टाचार है। जब तक हम पुलिस एवं अदालतें नहीं सुधारते तब तक गौ कशी को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सकता।
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(D) समाधान ?
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मैंने इस समस्या के समाधान के लिए 2 क़ानून प्रस्तावित किये है
गौ हत्या रोकने के लिए गौ-नीति नामक क़ानून ड्राफ्ट
पुलिस एवं अदालतें सुधारने के लिए जूरी कोर्ट नामक क़ानून ड्राफ्ट
यदि प्रस्तावित गौ नीति को गेजेट में छाप दिया जाता है तो भारत में गाय काटना लगभग बंद हो जायेगी, और देशी गाय की प्रजाति का सरंक्षण शुरू होगा। गौ नीति नामक क़ानून ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य देशी गाय की प्रजाति को बचाना है।
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट मेरा मुख्य प्रस्ताव है, और यह भारत की पुलिस एवं अदालतों को सुधारने के लिए लिखा गया है। जूरी कोर्ट एक अलग क़ानून है, इसका ड्राफ्ट आप जूरी कोर्ट मंच में देख सकते है।
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(E) पेड मीडिया काल : असली बाधा
सबसे पहले आपको एक बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए कि आज के दौर में भारत की ऐसी कोई भी राजनैतिक पार्टी या नेता पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं दिखा सकता, जिसका फोटो आप पेड मीडिया यानी कि मुख्य धारा के टीवी चैनल्स एवं अख़बारो में देखते हो।
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गाय बचाने में रुचि रखने वाले लगभग सभी कार्यकर्ता इस बात की अवहेलना कर रहे है कि गाय को लेकर पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है।
ऐसे क़ानून जारी रखना जिससे गाय का इस्तेमाल करके हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाना।
देशी गाय की प्रजाति को लुप्त करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
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दुसरे शब्दों में, पेड मीडिया में नजर आने वाली भारत की मुख्य धारा की किसी पार्टी के नेता गाय बचाने के भावुक या उकसाऊ बयान तो दे सकते है, किन्तु गाय बचाने का क़ानून गेजेट में नहीं छाप सकते। मतलब यदि आप पेड मीडिया पार्टियों से गाय बचाने का क़ानून छापने की उम्मीद कर रहे है, तो सालों साल इन्तजार करने के बाद भी अंत में आपको निराशा ही हाथ लगेगी।
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मेरे विचार में यदि आपको देशी गाय की नस्ल बचाने में रुचि है तो निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए :
प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून का ड्राफ्ट पढ़ें
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने राज्य के मुख्यमंत्री को ट्विट भेजे कि वे गौ-नीति के ड्राफ्ट को गेजेट में छापे। आप चाहे तो यह ट्विट पीएम को भी भेज सकते है।
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यदि आपको लगता है कि प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून ठीक नहीं है, तो जिस भी पार्टी से आपको उम्मीद है, उसके नेताओं को ट्विट करें कि वे गौ हत्या रोकने के लिए जिस क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन करते है, उसका ड्राफ्ट आपको भेजे। यदि अमुक पार्टी के नेता आपको कोई जवाब नहीं देते है तो अमुक पार्टी के कार्यकर्ताओ से ड्राफ्ट मांगे। सोशल मीडिया पर आपको अमुक पार्टी के कार्यकर्ता आसानी से मिल जायेंगे।
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यदि अमुक पार्टी के नेता या कार्यकर्ता आपको गौ हत्या रोकने का कोई ड्राफ्ट नहीं देते है, तो मेरे विचार में यह बात साबित है कि उन्हें गाय बचाने की बातें करने में तो रुचि है, किन्तु गाय बचाने के लिए आवश्यक क़ानून लागू करने में उनकी रुचि बिलकुल नहीं है। और जैसा कि मैंने ऊपर बताया पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित पार्टियाँ गाय बचाने के एलान तो दे सकती है किन्तु वे इसके लिए आवश्यक क़ानून गेजेट में छापने का समर्थन नहीं कर सकती है।
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अगले चरण में सोशल मीडिया पर अपनी मित्र सूची तलाश करें। वहां पर आपको काफी कार्यकर्ता मिलेंगे जो गाय बचाने को लेकर मुखर रूप से लिखते है, और इसमें रुचि लेते है। उनसे पूछे कि वे गौ हत्या रोकने के लिए कौनसा क़ानून गेजेट में छपवाना चाहते है ? उनसे भी ड्राफ्ट मांगे।
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इस तरह गाय में रुचि रखने वाली सभी पार्टियों, नेताओं, कार्यकर्ताओ आदि से गाय बचाने का ड्राफ्ट माँगना शुरू करें। यदि इनमे से कोई व्यक्ति आपको कोई ड्राफ्ट देता है तो उसके ड्राफ्ट की तुलना गौ-नीति ड्राफ्ट से करें। यदि उनका ड्राफ्ट बेहतर है तो उस ड्राफ्ट की मांग करें और मुझे भी वह ड्राफ्ट भेजे, ताकि मैं भी अमुक ड्राफ्ट को गेजेट में छापने के लिए पीएम को कह सकूं।
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यदि कोई भी व्यक्ति आपको इसका ड्राफ्ट नहीं देता है तो उन्हें प्रस्तावित गौ-नीति का ड्राफ्ट दें, और उनसे कहें कि यदि वे प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो पीएम को ट्विट भेजकर इस मांग को आगे बढ़ा सकते है।
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सार : कुरान या ऐसे धर्मग्रंथो आदि में जो भी लिखा हो उसका पालन लोग अपनी सुविधानुसार एवं चयनात्मक रूप से करते है, किन्तु गेजेट में लिखी हुई इबारत का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होता है। सार यह है कि जिन नागरिको को गाय बचाने में रुचि है उन्हें गेजेट में लिखी हुई इबारतो पर ध्यान देना चाहिए, कुरान में लिखी आयतों पर नहीं !!
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कैसे पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में देशी गाय की नस्ल पर एकाधिकार बनाने की नीति पर काम कर रहे है, कैसे वे गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने में करते है, और कैसे इसे रोका जा सकता है, इसका विवरण मैंने इस जवाब में विस्तार से दिया है। इस जवाब में ही मैंने प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून के विवरण भी दिए है।
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भारत में देसी गाय की क्या स्थिति है? देसी गाय को कैसे बचाया जा सकता है --https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/862195567486855/
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और एक बात – भारत में गाय को लेकर हिन्दू-मुस्लिम तनाव घटता बढ़ता रहेगा। किन्तु यदि ईरान एवं अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो भारत में यह तनाव निर्णायक स्तर पर बढ़ जाएगा। गाय का इस्तेमाल करके पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में ऐसे सिविल वॉर को ट्रिगर कर सकते है जो दशको लम्बा खिंच सकता है।
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और जब अमेरिका ईरान पर हमला करेगा तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि वे इसे ट्रिगर कर देंगे। लेकिन यदि भारत के कार्यकर्ता प्रस्तावित गौ-नीति गेजेट में छपवाने में सफल हो जाते है, तो पेड मीडिया के प्रायोजको के हाथ से तंदूर दहकाने का एक अस्त्र निकल जाएगा।
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sonukumai

ભગવાન ન્યાયસ્વરૂપ નથી ને ભગવાન અન્યાયસ્વરૂપેય નથી. કોઈને દુઃખ ના હો એ જ ભગવાનની ભાષા છે. ન્યાય-અન્યાય એ તો લોકભાષા છે. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

બેરહેમ થયા છો કે કસોટી લઈ રહ્યા છો પ્રભુ.....?

એક જ વ્યક્તિ હતું મનગમતું એ પણ લઈ લીધું.....!

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

WHY AREN'T YOU FOLLOWING ME GUYZ❗❗❗❗

kingmaboy35gmail.com255193

what do you guys think? is it necessary for part 2 or its good as it is?
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lordkokishinuchiha1437

એક તરફ વિશ્વાસ આપો છો ને પારેવાની પાંખો કાપો છો તમે....

સ્નેહ રૂપી ભ્રમમાં નાખીને અડધી રાતે કેમ રડાવો છો તમે......

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

Mahadev har 🙏🏻😊🙏🏻

falgunidostgmailcom

જોઈલે સંધ્યા પણ કેવી છે ચમકતી,
ચાલ ને પીયે એક કપ ચાય છલકતી.
- મૃગજળ

#TeaLover
#EmptyHeart

johanjohan3745

https://www.youtube.com/@Sonam_Singh536
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sonambrijwasi549078

સ્મિતનો ઉમળકો ચહેરા પર રાખતો ફરે,
જવબદારીનો ભાર મનમા ફરતો રહે,
કેવો એ પિતાનો અદ્રશ્ય ભાવ ફરે,
ઘરને સુખી રાખવાં પરસેવો પાડતો રહે..

મનોજ નાવડીયા

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manojnavadiya7402

मुझे बसंत से डर लगता है…🍃🪾

पेड़ों से टूटे सूखे पत्ते
टूटे दिल से लगते हैं,
पतझड़ अपना-सा लगता है,
मुझे बसंत से डर लगता है…

सूखे चरमराते हुए पत्ते
विरह-वेदना से तड़पते ..
शजर को पुकारते हैं,
वो ठूँठ नई बहार के इंतज़ार में है…
मुझे बसंत से डर लगता है…

डालियों की नंगी उँगलियाँ
आसमान को टटोलती हैं,
जैसे मेरी तरह कोई बिछड़ा नाम
हवा में ढूँढ़ती है
मुझे बसंत.....

टूटे दिल के टुकड़ों जैसे
पत्तों को कहाँ जगह मिलती है,
न आसमाँ उन्हें रखता है,
न ज़मीं गले लगाती है —
बिल्कुल मेरी-सी हालत लगती है…
मुझे बसंत…



फिर पतझड़ आएगा,
फिर मेरा आईना बन जाएगा,
एक मंजर फिर से आँखों से गुज़र जाएगा।
पेड़ से कभी शिकवा न किया मैंने,
वो फिर नई मोहब्बत पा जाएगा…
और मैं?
मैं फिर वही सूखा पत्ता बन
किसी कोने में चरमराऊँगी,
हवा के साथ उड़ जाऊँगी…
मुझे बसंत से डर लगता है —

डर लगता है मुझे बसंत से..
क्योंकि वो हर बार सिखा जाता है
कि जो नया है वही अपना है,
और जो टूट गया…
वो बस कहानी है।
नई पत्तियों से भर जाता है,
पुरानी कहाँ याद आती हैं,
फूल, फल, पंछी — सब उसके हो जाते हैं,
जिसे त्यागा उसने,
उसे कोई नहीं पुकारता है…
बसंत…

फिर से बसंत आएगा
असमान सज जायेगा रंग बिरंगे फूलों से
फिजाएं सजेगी होली के रंगों से
हवाएं सताएगी बेरंग पत्तो को
कोई उनका करुण रुदन सुन ना पाएगा
दर्द में तड़पते फना हो जायेंगे या
जला दिए जायेगे...
मुझे बसंत से डर लगता है ।

कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️

kalpitakaur1gmail.com445619

English Translation of Shree Maa Sharada Baavanee - A Gujarati Hymn on Shree Maa Sharada Devi and Her Divine Life …. On vanitathakkar.blogspot.com ….

https:// vanitathakkar.blogspot.com /2026/02/english-translation-of-shree-maa.html

vanitathakkar

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947

समय एक सौदागर

बेचने आया है समय एक सौदागर बन कर
अपनी टोकरी में ढेरों से पल रखकर...

चलो समय से एक सौदा कर लें,
ग्राहक बन कुछ लम्हे खरीद लें।

कुछ बचपन की नटखट शरारतें,
कुछ जवानी की मीठी अटखेलियाँ।

पहली मोहब्बत की धुंधली यादें 
थोड़ी सी अपनी मासूमियत भी।

वक्त से अपनी गुस्ताखियां भी खरीद लेंगे
उन्हें दुबारा ठीक करके वापिस रख देंगे

कुछ रिश्ते होंगे उलझे-उलझे,
कुछ अधूरे, कुछ टूटे से—

लेकर उनको परिपक्वता की गिरहों से
हम उन्हें फिर सुलझा लेंगे।

पर सौदागर से मोल-भाव कैसे करें?
हम तो नासमझ ठहरे—
घाटे का सौदा ही करेंगे। 😔

और अगर हमारी हैसियत से
महँगा हुआ यह सौदा,
तो उसकी टोकरी से
चुपके से हम....
बचपन ही चुरा लाएँगे। 😍

कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️

kalpitakaur1gmail.com445619

वो साथ में रहता है सबकुछ ठीक लगता है मुझे
मुश्किलें बढ़ती हैं मेरी दूर जब जाता है वो...

narayanmahajan.307843

कुछ प्रेम
पाए जाने के लिए नहीं होते,
वे सिर्फ़ निभाए जाते हैं…
और मैंने,
तुम्हें पाने से ज़्यादा
तुम्हें निभाना चुना।

narayanmahajan.307843

અહીંયા કોણ મારું ને કોણ તારું, ફરે છે વંટોળની જેમ કહું છું જાણ સારુ..

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

Do You Know that all forms of yoga, including yoga of the mind (mano-yoga) are merely 'relief roads'? Nothing can be achieved without attaining the union with the Soul (Atma-yoga - union with the Self).

Read more on: https://dbf.adalaj.org/CvSS6Mt0

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dadabhagwan1150

हम बुरे नहीं थे, बुरे बनाए गए थे।
बस पारदर्शी जाल बिछाकर फँसाए गए थे।

archanalekhikha

That's the final quote I want to share.. have a busy day

kattupayas.101947