समय एक सौदागर
बेचने आया है समय एक सौदागर बन कर
अपनी टोकरी में ढेरों से पल रखकर...
चलो समय से एक सौदा कर लें,
ग्राहक बन कुछ लम्हे खरीद लें।
कुछ बचपन की नटखट शरारतें,
कुछ जवानी की मीठी अटखेलियाँ।
पहली मोहब्बत की धुंधली यादें
थोड़ी सी अपनी मासूमियत भी।
वक्त से अपनी गुस्ताखियां भी खरीद लेंगे
उन्हें दुबारा ठीक करके वापिस रख देंगे
कुछ रिश्ते होंगे उलझे-उलझे,
कुछ अधूरे, कुछ टूटे से—
लेकर उनको परिपक्वता की गिरहों से
हम उन्हें फिर सुलझा लेंगे।
पर सौदागर से मोल-भाव कैसे करें?
हम तो नासमझ ठहरे—
घाटे का सौदा ही करेंगे। 😔
और अगर हमारी हैसियत से
महँगा हुआ यह सौदा,
तो उसकी टोकरी से
चुपके से हम....
बचपन ही चुरा लाएँगे। 😍
कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️