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archana

archana

@archanalekhikha
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“पुरानी सोच और नई सोच दोनों ही गलत नहीं होतीं…
गलती बस तब होती है,
जब ये दोनों टकरा जाती हैं
और एक-दूसरे को समझने की कोशिश ही नहीं करतीं…
यहीं से हर रिश्ते में क्लेश शुरू होता है।”

“सोच पुरानी हो या नई…
दोनों अपने-अपने समय की सच्चाई होती हैं।
लेकिन जब समझ कम और अहंकार ज़्यादा हो जाए…
तो वही सोच टकराव बन जाती है,
और रिश्तों में दरार डाल देती है…”

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कुछ शब्द इतने चतुर होते हैं,
कि सच को भी झुठला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने मीठे होते हैं,
कि पत्थर दिल को भी पिघला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने ज़हरीले होते हैं,
कि हँसते चेहरे को रुला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने नखरीले होते हैं,
कि अपनेपन में भी दूरी ला जाते हैं…
कुछ शब्द बड़े छलिया होते हैं,
जो सामने हँसते हैं…
और पीछे वार कर जाते हैं…
कुछ शब्द ऐसे होते हैं—
जो गहरे घाव दे जाते हैं…
और कुछ शब्द…
उन्हीं घावों पर
मरहम बनकर लग जाते हैं…
कुछ शब्द ऐसे भी होते हैं—
जो ज़ख्म पर ज़ख्म दे जाते हैं…
और कुछ शब्द…
प्रेम बनकर टपकते हैं…
दिल को सुकून दे जाते हैं… ❤️
आख़िर…
ये सब शब्दों का ही खेल है…
शब्दों से ही रिश्ते बनते हैं,
और शब्दों से ही टूट जाते हैं…
दुनिया में सबसे बड़ा रिश्ता भी—
शब्दों से ही बना होता है…
इसलिए…
शब्दों को सिर्फ उनकी मिठास से मत परखो…
उनके पीछे छिपी नीयत को समझो।
क्योंकि…
तुम्हारे शब्द ही तय करते हैं—
तुम्हारे रिश्तों की उम्र… 💔

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छोड़ दिया समझाना उन्हें…
जो हमें समझना ही नहीं चाहते थे।
अब खामोशी ही बेहतर है…
क्योंकि हर किसी को
हमारी सच्चाई सुननी नहीं होती।

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“औरत बुरी नहीं होती…
उसे बुरा बना दिया जाता है।”
जब वह चुप रहती है…
तो उसे कमजोर कहा जाता है…
जब वह बोलती है…
तो उसे “घर तोड़ने वाली” कहा जाता है…
वह सिर्फ अपनी बात कहना चाहती है…
अपने दर्द को बाँटना चाहती है…
पर उसका अपना ही आदमी
उसे गलत समझ लेता है…
अगर वह पति से कहे — तो गलत…
अगर बाहर कहे — तो चुगलखोर…
आखिर…
वह अपने दिल की बात किससे कहे…?
🖤 “पतियों से बस इतना सा निवेदन है…”
अपनी पत्नी को जज मत करो…
पहले उसे समझने की कोशिश करो…
क्योंकि…
अगर उसे घर तोड़ना होता…
तो वह कब की जा चुकी होती…
वह आज भी वहीं है…
क्योंकि उसे “घर बचाना” आता है… 💔

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छल करके भी वो मुस्कुरा रहे हैं,
दिल में अपने नए जाल बुनते जा रहे हैं…
हमको ही दोषी ठहराने की आदत है उनकी,
और कहते हैं—“हमसे तुम रिश्ता क्यों निभा रहे हैं…”
- archana

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मेरी किस्मत भी तो देखो…
मैं उम्मीद लगाकर जाती हूँ,
और मेरी उम्मीद पर ही हर बार पानी फिर जाता है।
सच में… मैंने बहुत सपने सजाए थे,
हर ख्वाब मेरा बिखर जाता है,
और आखिर में… मेरा दिल ही टूट जाता है। 💔
- archana

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1. मां वो दुआ है,
जो अपने बच्चों की हर बला खुद पर ले लेती है।
- archana

“कुछ लोग पूछते हैं—
‘अरे, तुम्हारी तो बहुत इज़्ज़त थी…
ये क्या हो गया तुम्हारे साथ…?’
फिर वही लोग,
मेरी कहानी पर हँसते हैं,
मेरे जख्मों पर सवाल नहीं…
मज़ाक करते हैं… 💔
मैं जवाब नहीं देती…
क्योंकि मुझे पता है,
उन्हें सच नहीं—
बस तमाशा चाहिए…
हाँ, मैं अकेली हूँ…
और वो सब एक झुंड हैं…
शायद इसलिए उन्हें लगता है कि मैं हार रही हूँ…
पर सच ये है—
भीड़ हमेशा शोर करती है,
और सच्चाई… खामोशी में भी जीत जाती है… ✨🖤
— मैं हार नहीं रही,
बस सही समय का इंतज़ार कर रही हूँ…
❤️ जो समझते हैं, उन्हें शब्दों की जरूरत नहीं…

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कुछ लड़कियाँ कहती हैं—
“हम पर तो हजार लड़के मरते हैं…”

सच बताऊँ…?
मरते नहीं हैं,
तुम उन्हें जगह देती हो।

कोई भी बिना वजह पीछे नहीं पड़ता,
जब तक तुम खुद उसे इशारा न दो,
जब तक तुम अपनी नज़रों से उसे हक़ न दे दो।

जो लड़की अपनी नज़रें झुका कर,
अपनी हद में रहती है—
उस पर कोई उंगली उठाने की हिम्मत नहीं करता।

ये “हम पर मरते हैं” वाला घमंड नहीं,
ये बस तुम्हारी दी हुई इजाज़त होती है।

इज़्ज़त भी हम खुद बनाते हैं,
और गिराते भी हम खुद ही हैं… 💯

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