Quotes by archana in Bitesapp read free

archana

archana

@archanalekhikha
(11.3k)

मैंने कई जगह देखा है—चाहे कुछ घरेलू महिलाएँ हों या कम पढ़ी-लिखी महिलाएँ—
वे अक्सर उन महिलाओं को गलत समझ लेती हैं जो साफ-साफ और तर्क के साथ अपनी बात रखती हैं।
अगर कोई महिला समझदारी से, स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह दे,
तो उसे जल्दी ही “बहुत बोलने वाली” या “बदतमीज़” कह दिया जाता है।
जबकि सच्चाई यह है कि साफ और तर्क के साथ बात करना बदतमीज़ी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है।
कई बार लोग उस बात को समझ नहीं पाते जो उनकी सोच से अलग होती है,
इसलिए वे उसे गलत नाम दे देते हैं।
लेकिन सच यही है कि
ज्ञान और समझ रखने वाला व्यक्ति अपनी बात स्पष्ट कहता है,
और जो सुनने की आदत नहीं रखते, उन्हें वही बात बुरी लगती है।
- archana

Read More

कौन कहता है चरित्र कॉपी नहीं होता,
यहां लोग चेहरों के साथ किरदार भी बदल लेते हैं…
बातों और व्यवहार की नकल करके,
अच्छाई का दिखावा कर लेते हैं…
इंस्टाग्राम की रीलों से सीखकर,
संस्कारों का नकाब पहन लेते हैं…
पर सच तो ये है —
चेहरा बदल जाता है,
पर दिल कभी कॉपी नहीं होता… 💔

Read More

इतिहास उठाकर देख लो—
जितने भी महान लेखक, ज्ञानी, साधु-संत, ऋषि-मुनि,
वीर योद्धा और राजा-महाराजा हुए हैं,
सबने अपने जीवन में संघर्ष सहा है।
उन्होंने समाज के लिए काम किया,
आजादी के लिए लड़े,
शिक्षा और ज्ञान के लिए अपना जीवन लगा दिया।
लेकिन जब वे यह सब कर रहे थे,
तब समाज ने उनका साथ कम दिया…
उन पर आरोप लगाए,
उनका मज़ाक उड़ाया,
यहाँ तक कि कई बार पत्थर भी मारे।
पर उन्होंने लोगों की बातों की चिंता नहीं की,
वे अपने रास्ते पर चलते रहे।
समय बीता…
और वही लोग बाद में महान कहलाए,
उनका नाम इतिहास में अमर हो गया।
सच यही है—
समाज अक्सर किसी को आगे बढ़ते देख
पहले उसे गिराने की कोशिश करता है।
आप चाहे कितने भी सकारात्मक क्यों न हों,
कुछ लोग आपको गलत ही समझेंगे।
संघर्ष में साथ देने के बजाय
वे आलोचना और पत्थर ही बरसाएंगे।
लेकिन यही दुनिया का नियम है—
जो पत्थरों से डर गया,
वह रास्ता नहीं बना पाया।
और जिसने पत्थरों को सह लिया,
वही इतिहास बना गया।

Read More

अगर इंसान कमाने लायक न रहे,
किसी के काम का न रहे,
और शरीर भी साथ छोड़ दे…
तो दुनिया ही नहीं,
कई बार अपने भी ठुकरा देते हैं।
यह किसी किताब की बात नहीं,
यह मेरे जीवन का अनुभव है।

Read More

हम बुरे नहीं थे, बुरे बनाए गए थे।
बस पारदर्शी जाल बिछाकर फँसाए गए थे।

घर में भंडारा हुआ था।
सबने प्रसाद खा लिया, लेकिन सास के लिए प्रसाद खत्म हो गया।

छोटी बहू बोली —
“माँजी, मेरा तो झूठा हो गया है, मैं नहीं दे सकती…
नहीं तो मुझे नरक मिलेगा।”

सास बोली —
“मुझे तो बहुत भूख लगी है, झूठा ही दे दो।”

तभी बड़ी बहू ने अपनी थाली देखी।
उसने तो बस एक कौर ही खाया था।

एक पल को उसने सोचा —
“अगर मैं झूठा दूंगी तो शायद नरक मिलेगा…”

लेकिन अगले ही पल उसके मन ने कहा —
“मैं खुद खा लूं और मेरी सास भूखी रह जाए,
इससे बड़ा पाप क्या होगा?”

और उसने चुपचाप पूरी थाली
सास के आगे रख दी।

✨ सीख:
भगवान नियमों से नहीं,
दिल की सच्चाई से खुश होते हैं।

Read More

पति बोला —
“घर टूटने की वजह पत्नी ही होती है!”

पत्नी मुस्कुराकर बोली —
“क्या तुमने मधुमक्खी का छत्ता देखा है?”

“मधुमक्खी तब तक नहीं काटती
जब तक कोई उसके छत्ते को छेड़े नहीं।

लेकिन जैसे ही कोई
उसका
छत्ता गिराने की कोशिश करता है,
वह अपने घर को बचाने के लिए
काटने के लिए पीछे पड़ जाती है

“ठीक वैसे ही पत्नी भी होती है…
वह झगड़ा घर तोड़ने के लिए नहीं करती,
बल्कि अपने घर बसाने के लिए लड़ती है।”

✨ इसलिए पत्नी को दोष देने से पहले
यह समझो कि वह लड़ क्यों रही है।

Read More

हे जगत जननी जगदंबा माता रानी,🙏
हमारे रिश्ते को तोड़ने वाले टूट जाए, लेकिन हमारा रिश्ता ना टूटे🙏🙏

मेरी चूड़ियों में जितना रंग सजा है ना…
उतना ही रंग आज तुम पर चढ़ाऊँगी।
इतना गहरा रंग होगा कि
न पानी छुड़ा पाएगा,
न वक्त मिटा पाएगा…
और याद रखना —
ये किसी और का नहीं,
सिर्फ मेरे सुहाग का रंग है।” 💫

Read More

✨ “आख़िर बहू ही बुरी क्यों?” ✨
बहू बुरी नहीं होती…
बस वो सबकी उम्मीदों का जोड़ नहीं बन पाती।
ससुराल में हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है,
अपना नजरिया, अपनी कल्पना—
किसी को संस्कारी बहू चाहिए,
किसी को कम बोलने वाली,
किसी को कमाने वाली,
किसी को सेवा करने वाली,
और किसी को बस चुप रहने वाली…
पर एक इंसान
सबके दिमाग की बनाई तस्वीर कैसे बन सकता है?
जब बहू उन सब “अलग-अलग दिमागों” से मेल नहीं खाती,
तो उसे नाम दे दिया जाता है—
“बुरी बहू”।
सच तो ये है—
बहू सिर्फ ससुराल में बुरी कहलाती है।
मायके में वही बेटी अच्छी होती है।
दोस्तों में वही सच्ची होती है।
मोहल्ले में वही मुस्कुराती हुई दिखती है।
लेकिन घर के अंदर…
छोटी सी बात को बड़ा बना दिया जाता है,
आधी बात को पूरा कर दिया जाता है,
और फिर मोहल्ले में कहानी सुनाई जाती है—
“बहू बहुत बुरी है…”
इतना झूठ,
इतनी सजावट,
इतना बढ़ा-चढ़ा कर बयान—
कि सच कहीं कोने में चुप बैठ जाता है।
क्योंकि सच बोलने के लिए हिम्मत चाहिए…
और कहानी बनाने के लिए बस ज़ुबान
“बहू बुरी नहीं होती,
वो बस सबकी अलग-अलग उम्मीदों में फिट नहीं बैठ पाती।”
- archana

Read More