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archana

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@archanalekhikha
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चलो मान लिया… मैं पागल हूँ।
मानसिक रूप से परेशान हूँ, डिस्टर्ब हूँ… जो भी आप कहना चाहते हैं, कह लीजिए।

लेकिन एक बात मेरी समझ से बाहर है—
अगर आपको सच में लगता है कि मैं मानसिक रूप से परेशान हूँ, तो फिर मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हो?

किसी इंसान को बार-बार सबके सामने “पागल” कह देने से वह पागल नहीं हो जाता।
कई बार इंसान पागल नहीं होता…
बस अंदर से इतना टूट चुका होता है कि उसकी परेशानी उसके व्यवहार में दिखाई देने लगती है।

वह चुप हो सकता है, गुस्सा कर सकता है, रो सकता है, किसी से बात नहीं करना चाहता…
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे और अपमानित किया जाए।

अगर कोई इंसान सच में मानसिक रूप से परेशान है, तो उसे ताने नहीं चाहिए।
उसे लोगों की हँसी नहीं चाहिए।
उसे सबके सामने “पागल” कहकर नीचा दिखाने की जरूरत नहीं है।

उसे चाहिए—समझ, सम्मान, थोड़ा सा अपनापन और प्यार।

और सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यह सब वही लोग करते हैं जो खुद को पढ़ा-लिखा और समझदार कहते हैं।

तो मेरा सवाल बस इतना है—
क्या पढ़ाई सिर्फ किताबें पढ़ लेने का नाम है?

अगर किसी परेशान इंसान की तकलीफ समझ नहीं सकते,
अगर उसके सामने ही उसका मज़ाक बना सकते हैं,
अगर उसकी हालत देखकर उसे और चोट पहुँचा सकते हैं,
तो फिर उस पढ़ाई का फायदा क्या है?

किसी इंसान को इतना मत तोड़ो कि उसकी चुप्पी भी तुम्हें पागलपन लगे और उसका दर्द भी तुम्हें ड्रामा।

हो सकता है जिसे तुम “पागल” कह रहे हो,
वह बस बहुत कुछ सहकर थक चुका हो।

और याद रखना—
किसी इंसान की परेशानी उसकी पहचान नहीं होती।

आज लोग चाहे मुझे जिस नाम से बुलाएँ,
मेरी सच्चाई किसी के कह देने से बदल नहीं जाएगी।

मैं टूटी हूँ तो खुद को फिर से जोड़ूँगी।
मैं परेशान हूँ तो इस दौर से भी निकलूँगी।

क्योंकि मुझे किसी के दिए हुए नाम से नहीं,
अपनी सच्चाई से पहचाना जाना है। ❤️

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अच्छाई का फायदा उठाकर क्या कर लेंगे ये लोग?
किसी सीधे-सादे इंसान को दबाकर,
उसकी चुप्पी को उसकी कमजोरी समझकर,
उसे बार-बार गलत साबित करके
आखिर कितना बड़ा बना लेंगे खुद को ये लोग?
ज्यादा से ज्यादा क्या ही कर लेंगे?
बस अपने ही खाते में पाप जमा कर लेंगे ये लोग।
- archana

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आजकल सोशल मीडिया पर एक अजीब सी लड़ाई चल रही है—

पत्नी बनाम प्रेमिका।

कोई पत्नी को गलत बता रहा है,
कोई प्रेमिका को।

लेकिन एक बात सोचिए...

दोनों एक-दूसरे से क्यों लड़ रही हैं?

बीच में तो एक ही आदमी है।

वही आदमी जिसने पत्नी से रिश्ता बनाया,
वही आदमी जिसने प्रेमिका से प्रेम का वादा किया,
और फिर दोनों को एक-दूसरे के सामने खड़ा कर दिया।

पत्नी तो उसकी पत्नी थी,
लेकिन अगर वह प्रेमिका से सच में प्रेम करता था,
तो उसे छुप-छुपकर रिश्ता चलाने के बजाय
साफ-साफ शादी करनी चाहिए थी।

प्रेमिका से शादी करना चाहता था तो पत्नी को धोखा क्यों दिया?

और अगर पत्नी के साथ रहना था,
तो किसी दूसरी औरत को प्रेम के सपने क्यों दिखाए?

सोचिए...

गलती सिर्फ दो औरतों के बीच क्यों बाँटी जा रही है?

जिस आदमी ने दोनों की भावनाओं से खेला,
जिसने एक को पत्नी बनाकर दूसरी को उम्मीद दी,
उससे सवाल क्यों नहीं?

किसी दूसरी औरत को अपना दुश्मन बनाने से पहले
एक बार उस आदमी से पूछिए—

“अगर तुम मुझसे इतना प्रेम करते थे, तो मेरे साथ खड़े क्यों नहीं हुए?”

और प्रेमिका से भी यही कहना चाहूँगी—

जो आदमी अपनी पत्नी के साथ ईमानदार नहीं रहा,
वह आपके साथ ईमानदार रहेगा—
इसकी गारंटी कौन देगा?

और पत्नियों से भी—

हर दूसरी औरत आपकी दुश्मन नहीं होती।
कई बार वह भी उसी झूठ का शिकार होती है,
जिस झूठ से आप अनजान थीं।

इसलिए औरत बनाम औरत की लड़ाई बंद कीजिए।

गलत आदमी को गलत कहिए।

क्योंकि दो औरतों को लड़ाकर
एक गलत इंसान को सही साबित नहीं किया जा सकता।

प्रेम अगर सच्चा है तो सम्मान देगा,
जिम्मेदारी देगा,
सच के साथ खड़ा होगा।

सिर्फ छुपकर इस्तेमाल करेगा और वादे करता रहेगा—
तो वह प्रेम नहीं, स्वार्थ है।

और याद रखिए—

किसी औरत को गिराकर अपनी जगह ऊँची नहीं होती।
गलत इंसान को पहचानकर ही अपनी जिंदगी बचाई जाती है। ❤️
- archana

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https://youtu.be/KZSUGmh5Wzc?si=WPntX6vwEVmoz_fO
काला कफ़न 🖤
जिस औरत को पूरा गाँव पापिन समझ रहा था…
आखिर उसकी अर्थी पर काला कफ़न क्यों डाला गया? 😢
पूरी कहानी में छिपा है एक ऐसा सच, जिसने पूरे गाँव की सोच बदल दी…
पूरी कहानी YouTube पर सुनें।
👉 YouTube पर “काला कफ़न” सर्च करें।

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हर बार समझौता करने वाला इंसान कमज़ोर नहीं होता,
वह बस अपने रिश्तों को बचाने की आख़िरी कोशिश कर रहा होता है।

जब अपने ही कह दें—
"रहना है तो रहो, नहीं तो मत रहो।"
और बार-बार यह एहसास दिलाया जाए कि
"तुम्हारा इस घर पर कोई हक़ नहीं।"

तब दर्द शब्दों से नहीं, ख़ामोशी से बहता है।

सबके लिए सोचने वाले अगर अपने ही बीवी-बच्चों की ज़रूरतें भूल जाएँ,
तो सबसे ज़्यादा टूटता वही परिवार है,
जो उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करता है।

मैं किसी से शिकायत नहीं करूँगी,
न किसी का हक़ माँगूँगी।

बस हे ईश्वर, इतना सामर्थ्य देना कि
मैं अपनी मेहनत से एक-एक पैसा जोड़ सकूँ,
अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत बना सकूँ।

ताकि कल उन्हें कभी यह न सुनना पड़े कि
"तुम्हारा कोई घर नहीं।"

मेरी सबसे बड़ी जीत किसी से कुछ छीनना नहीं होगी,
बल्कि अपने दम पर इतना बना लेना होगा कि
मेरे बच्चों को कभी अपना सम्मान साबित न करना पड़े।

क्योंकि घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बनता,
घर वहाँ बनता है जहाँ सम्मान, अपनापन और सुरक्षा साथ रहते हैं। ❤️🏡
आज मेरी जेब खाली है...
लेकिन मेरे हौसले खाली नहीं हैं।
हाँ, अभी शुरुआत है, इसलिए मुझे दुआओँ और साथ की ज़रूरत है।
हे ईश्वर, बस इतना सामर्थ्य देना कि अपनी मेहनत से इतना कमा सकूँ
कि अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत खड़ी कर सकूँ।
मैं किसी से कुछ छीनना नहीं चाहती,
न किसी का हक़ माँगना चाहती हूँ।
बस इतना चाहती हूँ कि कल मेरे बच्चों को कभी यह न सुनना पड़े—
"तुम्हारा अपना कोई घर नहीं।"
मेरी मेहनत ही मेरी पहचान बने,
और मेरा आत्मसम्मान ही मेरी सबसे बड़ी दौलत। 🤍🏡

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साइको बीवी 😭 | एक सच्ची कहानी | क्या सच में पत्नी साइको थी? | Emotional Hindi Story
https://youtu.be/nUF15zZEdzM?si=OTVP2WWMYJ9Oevl-

😂 कुछ लोग तो मेरे फुल-टाइम रिसर्चर बन गए हैं!
कभी मेरी कुंडली सर्च... 📖
कभी मेरी राशि चेक... ♈
कभी Date of Birth डालकर पूरा हिसाब... 🤓
फिर Google से पूछते हैं... 🤣
"ये लड़की काबू में क्यों नहीं आ रही?"
"इतनी तेज़ कैसे हो गई?"
"इसका कोई कंट्रोल बटन है क्या?"
"रीसेट कैसे करें?" 😂

हर बार नया प्लान...
हर बार नई चाल...
और हर बार वही सवाल...
"अरे यार! ये हर बार बच कैसे जाती है?" 🤯
फिर Google खोलकर...
"इसे काबू में कैसे करें?" 🔍
Google भी बोल पड़ा...
"भाई! पहले खुद का सिस्टम अपडेट कर लो!" 🤣
और ऊपर वाला मुस्कुराकर कह रहा है...
"जिसकी रखवाली मैं कर रहा हूँ, उसे तुम्हारी चालें क्या रोकेंगी?" 😄✨
बेचारे... हर बार नया जाल बुनते हैं...
और हर बार 'Try Again' लिखकर वापस चले जाते हैं! 😂🔥

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