The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
एक हसरत थी कि कभी वो भी मनाएँ हमें, मगर ये दिल कमबख़्त...कभी उनसे रूठा ही नहीं!! 🩷😊
ज़िंदगी कुछ ऐसे दर्द भी देती हैं... जो किसी के साथ साझा नहीं हो पाते, उन्हें केवल अकेले ही सहना पड़ता है। ✍️❣️
छुपा कर भी नहीं छुपती ये मोहब्बत हमसे, तुम्हारा ज़िक्र आते ही चेहरा खिल ज़रूर जाता है.💞
शिकायतों की पाई-पाई जोड़ रखी थी मैंने, उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया।। ❤️
ये नजरें और ये अदा अब क्या ही कहिये , दिल कहता है खामोशी से निहारते रहिये ।।
इश्क़ अगर चेहरों से पढ़ा जाता, तो तेरी मुस्कान ही पूरी किताब कहलाती। ❤️
फिर तुम्हें शब्दों में उतारा है हमने बिन लिखे तेरा नाम पुकारा है हमने...✍️ ♥️
तुम्हें पा लेते तो क़िस्सा ख़त्म हो जाता, तुम्हें खोया है तो यक़ीनन कहानी लंबी चलेगी ....😘
किसी एक शाम तुम्हारे पहलू में बैठेंगे, ऐसे कि जैसे उठने की कोई जल्दबाज़ी न हो।।❤️
जिसका इंतज़ार है उसको फ़िक्र तक नहीं, उसकी ज़ुबाँ पे मेरा ज़िक्र तक नहीं...! मोहब्बत में एक ही कमी है, एक तड़पता है तो दूसरे को क़दर तक नहीं...! वो पूछते हैं हाल भी तो रस्म निभाने को, उनकी निगाह में अब कोई असर तक नहीं। हमने तो सौंप दी थी उसे ज़िंदगी अपनी, और उसे हमारे दर्द की ख़बर तक नहीं। कितना अजीब है ये इश्क़ का दस्तूर भी, जिसे चाहो टूटकर, उसे सब्र तक नहीं। वो मेरे नाम से भी अब अनजान बन गया, जिसके लिए कभी कोई और मंज़र देखा तक नहीं । हमने हर एक दर्द हँसकर छुपा लिया मगर, उसे मेरी आँखों में समंदर तक दिखा नहीं ! जिसे समझा था मुकद्दर अपनी मोहब्बत का, उसे मेरे जाने का भी असर हुआ तक नहीं किससे करें अब शिकवा-ए-बेवफ़ाई, जिसे चाहा टूटकर उसने मुड़कर देखा तक नहीं।
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser