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New bites

सुकूत के उस पार


सभी के हाथ में किरदार की तहरीर नहीं है,
मगर कोई भी अपने वक़्त से बेग़ैर नहीं है।

वो जिनके नाम पर तहज़ीब के क़िस्से हैं बहुत,
उन्हीं के शहर में इंसान की तौक़ीर नहीं है।

अजीब दौर है, सच बोलना इल्ज़ाम हुआ,
ज़ुबाँ तो सबके पास है, मगर ज़मीर नहीं है।

मैं अपने अह्द के अख़बार पर हैरान हूँ बहुत,
यहाँ ख़बर तो बहुत है, मगर तफ़्सीर नहीं है।

किसी के ख़्वाब की क़ीमत लगी है मंडी में,
किसी की आँख में बाक़ी कोई ताबीर नहीं है।

जो लोग भूख को आँकड़ों में बदल देते हैं,
उन्हें ग़रीब के चेहरे की कोई तासीर नहीं है।

कई सदियों से जो दरिया का रुख़ मोड़े हुए हैं,
उन्हीं को लगता है साहिल की कोई पीर नहीं है।

निहाल, अहल-ए-सुख़न होने का मतलब ये भी है,
जहाँ सुकूत हो, कहना कि सब ख़ैर नहीं है।

nihalsinghsingh.134307

Goodnight friends.. sleep well.

kattupayas.101947

bhag lene k liye hamara contact kare..

mrsfaridadesar

बस शगुन है
कविता


ऐसा लग रहा है कि पूरा दुनिया मेरे अंदर है
मैं जी नहीं रही बल्कि लग रहा है कि
मैं खुद ही एक जिंदगी हूं



इस साम में छत पर आकर बैठना
और इस चलती हुई
ठंडी हवाओं को धीरे-धीरे महसूस करना
इसमें शगुन है



इस शगुन को महसूस करके लग रहा है
कि यह दुनिया बस मेरे लिए है
और मैं एकलौता जिंदगी हूं
जो जी रही है


जो इस वक्त को इस पल को इस मौसम को
महसूस कर रही है


इस पल में कोई दुख नहीं है
कोई गम नहीं है
ना ही कोई खुशी है


बस शगुन है
सांसों में समाऐ हुए
जिस्म के कन कन में समाए हुए


और मैं इस वक्त यहां हूं
और इस पल को जी रही हूं
इस चलती हुई हवा को
इस ठंडी मौसम को महसूस कर रही हूं



सारे थकावट से उतर गई है
जिस्म की दर्द खत्म हो गई है
और इस वक्त किसी से शिकायत नहीं है

ना कोई चिंता है ना फिक्र
ना करता दिल भविष्य के जिक्र
ना उलझा है अतीत में जाकर



बस मैं यहां हूं
इस वक्त मैं बुद्ध हूं
बुद्ध की शांति की तरह मेरे मन की शांति है



मैं अभी एक चेतन हूं
इस पल में कुछ भी नहीं पता

बस अपने वजूद इस प्रकृति में मिलते हुए देख रही हूं
और इस प्रकृति को खुद में

और मैं और यह प्रकृति एक दूसरे में समाए हुए
यहां हूं


अभी यही परम सत्य है
इस ब्रह्मांड और मेरी

abhinisha

This is good quote..

kattupayas.101947

पावसाळ्याची सुरुवात..
गुलमोहोराचा फुलोरा आता हळू हळू गळू लागतो आहे
खुप मोठ्या पावसाच्या झडी सुरू झाल्या की तो धरणीला मिळणार आहे
आता गेलो तरी पुढील वर्षी येणार ही आस घेऊन तो निघाला आहे
संपूर्ण उन्हाळ्यात त्याने आपल्या डोळ्यांना थंडावा दिलाय
आपणही आनंदाने त्याला निरोपाचे विडे
द्यायला हवेत
पुन्हा परतून येण्यासाठी...

jayvrishaligmailcom

Have you ever wondered if some of your fears, insecurities, or emotional struggles began long before you realized it?
Hidden within each of us is an "inner child" carrying memories, wounds, dreams, and untapped joy that continue to shape our lives today.
Discover how healing this often-overlooked part of yourself can unlock greater confidence, stronger relationships, and a deeper sense of peace.
Read on—you may be surprised by what your inner child has been trying to tell you all along.

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hyltoncraigupshon.185547

આ ભાઈ matrubharti gujarati પરં લેખક છે...

mrsfaridadesar

Lion doesn't know about silent quotes

kattupayas.101947

Silence quotes

kattupayas.101947

Good evening friends.. have a nice tea time

kattupayas.101947

"धर्मवीर भारती की किताब 'गुनाहों का देवता' चन्दर और सुधा की एक ऐसी ही अधूरी और बेबस मोहब्बत की दास्तान है, जहाँ समाज, आदर्शों और कायरता के बीच एक पवित्र रिश्ता दम तोड़ देता है। यह लाइन उस दर्द की पराकाष्ठा है। जब दो लोग मोहब्बत करते हैं, तो दोनों का समर्पण बराबर होना चाहिए। लेकिन जब वक़्त की कसौटी आती है, समाज की दीवारें सामने खड़ी होती हैं, और उनमें से कोई एक कायर निकल जाता है—लड़ने के बजाय घुटने टेक देता है या पीछे हट जाता है—तो नुकसान सिर्फ उस रिश्ते का नहीं होता। दूसरा इंसान, जिसने अपनी पूरी कायनात उस प्यार को मान लिया था, वो अंदर से पूरी तरह टूट जाता है। वो जीता तो है, लेकिन उसकी रूह हर रोज़ बे-मौत मरती है।
"मोहब्बत निभाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। वादे करना आसान है, लेकिन जब उन वादों को निभाने के लिए दुनिया से, हालात से या खुद से लड़ना पड़े, तब इंसान की असलियत सामने आती है। प्रेम में कायरता सबसे बड़ा गुनाह है। जो लोग मुश्किल वक़्त में हाथ छोड़ देते हैं, वे कभी सच्चे प्रेमी नहीं हो सकते। हाँ, किसी एक के पीछे हट जाने से दूसरा इंसान पूरी तरह बिखर जाता है, लेकिन यही बिखराव कभी-कभी उसे अंदर से बेहद मज़बूत भी बना देता है।

hindbharat

My Tamil novel "ஒரு தேவதை பார்க்கும் நேரம் இது "reached 200K downloads. Thanks for your continuous love and support.

kattupayas.101947

सुंदरस......
दाट धुकं..
आसपास वेढुन राहिलेले..
रस्ता..अगदी सुनसान..
फक्त आपण दोघेच...
रोमांचित करणारा प्रवास ..होता तो आपल्या आयुष्यातला...!! ❤
असे वाटत होते रस्ता सापडुच नये.....
आणी आता.......
दाट धुकं पसरलय....
गैरसमजाच़..
आपल्या दोघांच्यात...
कधी सापडेल का ग वाट त्यातुन...
............................... वृषाली

jayvrishaligmailcom

'વિજ્ઞાન' એટલે જગતમાં જાતજાતનું ભેગું થવું ને ફેરફાર થવું. સમયે સમયે ફેરફાર થયા જ કરે છે. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/FGCrOeaM

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dadabhagwan1150

Good Morning 🌅

harshparmar8722

રાજકોટ ની ચર્ચિત કથાની ઘણી પોસ્ટ્સ વાંચી. છેલ્લે હમણાં જ જે વસાવડાની કે હનુમાનજી તો ભૂત નસાડે, એની કથામાં ભૂતો ધૂણ્યા?
આમ તો વિષય સાઇકિઆટ્રિસ્ટી ને સ્પર્શતો છે પણ આવું મેં જોયેલું છે. એક જ રિધમમાં અમુક ધૂન ગવડાવે , એક જ મ્યુઝિક. સાવ પ્રાથમિક ટોન માં તો મા બાળકને હીંચકો નાખતી હાલરડાં ગાય એવું, એક જ રિધમ, હીંચકાની એક sooyhing પેટર્ન બાળકને ઊંઘાડી દે છે. એમ જ અહીં કોઈ ધૂન, પાછી ડોલતાં ડોલતાં બોલવાની, પહેલાં ધીમે, પછી ખબર ન પડે એમ વધુ ધીમે, પછી ફાસ્ટ. એટલે મગજ કન્ફ્યુઝ થઈ એમાં ઓતપ્રોત થઈ જાય અને પેલુ મ્યુઝિક સાથે ડોલવાનું જોર પકડે, હજી વધુ, હજી ઝડપથી ધૂન અને મ્યુઝિક. પછી તે ઓચિંતું બંધ થાય .
ચાલતી ટ્રેન ઉભી રહે તો એકદમ આગળ ઝૂકીએ એમ મગજનું બેલેન્સ અને એમ આખું શરીર એ ડોલન શૈલીમાં હોય જે એકદમ ધૂન, મ્યુઝિક બંધ પડતાં થોડી વાર ધૂણ્યા કરે. મગજ પર કાબુ ન હોય એટલે માણસ ગોળ ફરે, હાથ પગ પછાડે.
થોડું માસ હિપ્નોટિઝમ જેવું પણ. મગજના વેવ્ઝ ને એ આલ્ફા કે થીટા કહે છે એવું.
વર્ષો પહેલાં અમરેલી નોકરી કરતો ત્યારે કોઈ પ્રોગ્રામ માં હરિ ઓમ તત્સત્.. જય ગુરુદત્ત.. એ રીતે બોલાવતા હતા. એક નાગર, સ્માર્ટ બહેન મંદાકિની પુંડરિકરાય અંજારિયા તરત ઊભાં થઈ બહાર જઇ આવ્યાં અને એક મીનળ ઓઝા નામની યોગ એક્સપર્ટ છોકરી ભાન ગુમાવવા માં જ હતી તેને થપ્પડ કે ચોટીઓ ભરી કહે જાગૃત રહે, ધૂન બંધ કરી દે.
આ વાત એ બહેને કરી હતી. એ ધૂન સાથે સાવ ધ્યાનમાં હોય કે ટ્રાન્સ માં હોય તેમ લોકોને ધુણતા જોયા છે.
અહીં પણ આવું જ હોવું જોઈએ. માસ હિપ્નોટિઝમ દ્વારા કોઈ ખેલ.

sunilanjaria081256

सफ़र के लिए....

​लोग दौड़ते हैं मंज़िल के लिए,
और हमें दौड़ना है बस सफर के लिए।
माना कि बहुत कुछ पाने की चाह है हमें,
पर गिरना नहीं है कभी अपनी ही नज़रों मे हमे ।


-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

Good Night 🌉

harshparmar8722

मुसलसल ग़ज़ल: चश्म-ए-तर और सावन की शब
शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

१.
बरसती रात है, तन्हाई है, ख़याल-ए-यार है दिल में,
तसव्वुर का वही सावन, वही बौछार है दिल में।

ख़याल-ए-यार:-प्रियतम का विचार / याद
तसव्वुर:-कल्पना

२.
ज़मीं पर बूँद गिरती है तो सीना काँप जाता है,
कि जैसे हिज्र की जलती हुई तलवार है दिल में।

हिज्र:- विरह / जुदाई

३.
सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ को लोग नग़्मा समझते हैं,
मग़र इस अब्र के पीछे कोई बेज़ार है दिल में।

सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ:-बारिश की रिमझिम आवाज़
अब्र:-बादल
बेज़ार:-दुःखी / उदास

४.
वो एक लम्हा जो गुज़रा था कभी सावन की रातों में,
उसी इक लम्हे की ख़ातिर अभि सदक़ार है दिल में।

सदक़ार:-न्योच्छावर होने वाले जज़्बात

५.
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में जो मौसम गुज़ारे थे,
उन्हीं ज़ुल्फ़ों की महकती हुई सी कार है दिल में।

कार:-असर / यादों का ताना-बाने की हलचल

६.
हवा जो सर्द चलती है तो रूह सिहर-सी जाती है,
कि दस्त-ए-यार का जैसे कोई इक़रार है दिल में।

दस्त-ए-यार:-महबूब का हाथ

७.
कहाँ वो वस्ल की रातें, कहाँ ये हिज्र का आलम,
नसीब-ए-आशिक़-ए-मुज़्तर बहुत लाचार है दिल में।

वस्ल:-मिलन
आशिक़-ए-मुज़्तर:-व्याकुल प्रेमी

८.
क़फ़स-सा बन गया है अभि ये भीगा-भीगा-सा मौसम,
कि पंछी की तरह ज़ख़्मी कोई ग़मख़्वार है दिल में।

क़फ़स:- पिंजरा
ग़मख़्वार:- दुःख बांटने वाला / दर्द से भरा हुआ

९.
नयन मूँदूँ तो बहती है लहू की एक नदी-सी कहीं पर,
ये चश्म-ए-तर नहीं, अश्कों का इक बाज़ार है दिल में।

चश्म-ए-तर:- नम आँखें

१०.
कड़कती है जो बिजली नभ के सीने पर तड़प कर के,
लगा जैसे अभिषेक ही अरमान की झंकार है दिल में।

११.
दुआ को हाथ उठते हैं तो बस यादें ही आती हैं,
तुम्हारी बंदगी का ही तो बस इफ़्तार है दिल में।

इफ़्तार:- यहाँ समापन या पूजा के फल के अर्थ में

१२.
शराब-ए-नाब की सूरत जो लगती थी कभी बूँदें,
वही बूँदें अभिषेक ज़हर का अम्बार है दिल में।

शराब-ए-नाब:- शुद्ध अमृत समान जल

१३.
तुम्हारी याद का मस्कन हुआ है ये बदन मेरा,
कि जिसके हर एक कोने में फ़क़त आज़ार है दिल में।

मस्कन:- निवास / घर
आज़ार:- रोग / दुःख / कष्ट
शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

abhi006

Divya Bhashkar...

niraliipatel.127808

Sandesh newspaper
Naari Purti

niraliipatel.127808

कितने गिले हैं इन आंखों में
गीत



कितने गिले हैं इन आंखों में जरा पूछो
ऐ आंखें जो बेहती जा रही है
इन्हें जाकर रोको


ऐ आंखें जो बिन बातों की
बेहती जा रही है
अनकहे कुछ कहानी कहती जा रही है



इन्हें जरा सुनो
होंठ हैं खुले
मुस्कुरा नहीं रहे
इंतजार में तेरे
तेरे गम की नगमा गा रहे



आओ जरा पास आकर बैठो
घनी रात है
पर मौसम में साफ है
हवा चल रही चांद आसमान मैं दिख रही

बैठो पास मेरे
पलके उठा के
साथ में मेरे पूनम की चांदनी देखा


देखो यह चांद कितनी प्यारा है
इंतजार करते रहते हैं हम उनके
और यह आसमान में आकर दीदार अपने करा जाता है


शिकायत की मौका नहीं देती
हर बार यह वफा है निभाती है

एक तुम ही हो जो वादों से अपने मुकर है जाते
हां एक तुम ही हो जो वादों से अपने मुकर है जाते



पूछो जब वक्त कहां काटी तो बहाना बनाते


चांद को गौर से देखो
अगर यह कभी ना भी दिखे तो

इससे जरा तुम सवाल करके
देखो यह बता देते हैं


मौसम खराब था
या मेरा दीदार कोई और भी
तुम्हारे अलावा कर रहा था



कितने गिले इन आंखों में जरा पूछो
इस सांसों की दरमियां तुम भी जरा सुनो

सुनो ऐ बोहकती बेहकती सांसे क्या कहा रही
सुनो ऐ ठहरती ठहरती सांसे क्या कहा रही
सुनो ये मेहकती मेहकती है सांसे क्या कह रही



ऐ बस चाहती है तुम्हारी खुशबू जिसमें भर लूं
तुमने समा जाऊ
तुमको मैं अपना कर लूं



बस पास बैठो मेरे साथ बैठो
चांद को देखो
साथ मेरे हवाओं में सांस लो
बेहते आंखें आंखें तुम्हें देखें मुस्कुरा जाएंगे



तुम अगर इन धड़कनों को सुन लो तो
मेरी जान
शिकायत सारी ऐ धड़कन मिटा जायेंगे


खुल गई मैं
खुली किताब तेरे साथ जीना चाहती हूं मैं आज
तू अगर पास रहे दिल नाचे
दिल नाचे गाऐ तेरे प्यार में सो सो नगमे



कितने गिले इन आंखों में जरा पूछो
ऐ आंखें बेहती जा रही तेरे इंतजार में


हां करता तेरे इंतजार मैं



यह गीत आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहेंगे
मैं आपकी प्रिया लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

abhinisha