Quotes by MASHAALLHA KHAN in Bitesapp read free

MASHAALLHA KHAN

MASHAALLHA KHAN

@mashaallhakhan600196
(64.3k)

मुझे मेरे हिस्से की खुशियाँ तो दे दो,
जो मेरी जरूरत है, उससे बढ़कर दे दो।

कहाँ रखे हो वह खोया मुकद्दर मेरा,
चलो चलकर मुझे उसका पता दे दो।

यह गमज़दा ज़िंदगी कब तक जीते रहेंगे?
अब इस ज़िंदगी से मुझे रिहाई दे दो।

- MASHAALLHA

Read More

***********************************************
≈≈≈≈≈≈≈≈≈
भीगी यादे
≈≈≈≈≈≈≈≈≈

क्यूं बारिश यूं बहकने लगी,
क्यूं हवाएं अब महकने लगीं?
वो भीगी सी यादें दिल में कहीं,
आज फिर से दस्तक देने लगीं।

​ दिल में बसी जो उसकी तस्वीरें,
आज फिर से मुझे वो घेरने लगीं।
सोचा था इस सावन का लुफ़्त उठाऊँ,
पर ये आँखें फिर उसी को ही ढूँढने लगीं।

​ये बूंदें जो छतों से टपकने लगीं,
धड़कनें मेरे सीने में फिर मचलने लगीं।
बिन उसके ये अधूरा है हर नज़ारा,
ये तन्हाइयाँ और भी अब मुझे खलने लगीं।

​ अब तो इन हवाओं से पूछूँ मैं यही,
वो रूठकर मुझसे कहाँ जा बसी?
इस रिमझिम फुहार के इस शोर में भी,
उसकी खामोशियाँ मुझको सुनाई देने लगीं।


-MASHAALLHA

***********************************************

Read More

**********************************************

≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
खुद को आजमाने का सफर
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈

​ खयाल बहुत अच्छा है खुद को आजमाने का,
चलकर सूरज की तपिश में खुद को तपाने का।

​ जो छिपी थी अब तक भीतर, उस आग को जगाना है,
हर एक कोने से अब उन सब अंधेरों को हटाना है।

​ मिले मंजिल चाहे देर से ही, हमें इस सफर में,
इरादा साफ है अब अपनी हर मुश्किल को हराने का।

​ अब हवाओं के रुख बदल लेने से रुकना नहीं,
इन तूफानों के कहर से डर कर पीछे मुड़ना नहीं,

वो दौर बीत गया जब हमने कदम पीछे हटाए थे,
अब मंजिल मिलने से पहले हमें कहीं ठहरना नहीं।


-MASHAALLHA


***********************************************

Read More

***********************************************
==================
अधूरी मोहब्बत का धागा
==================

उस गली में वो फिर इस तरह नज़र आए हमको,
जैसे उस गली को कभी उन्होंने छोड़ा ही नहीं था।

​वो हँसी, वो मुस्कुराहट, वो सुकून भरा चेहरा,
लगता था बिन हमारे उन्होंने जीना नहीं छोड़ा था।

​गली में ये रौनक़ें क्यों हैं, क्यों सज रहा है घर उनका,
क्या किसी और से उन्होंने कोई नया रिश्ता जोड़ा था?

​ और अगर जा रहे हैं वो छोड़ हमें किसी और का होने,
फिर क्यों हमारी मोहब्बत का धागा नहीं तोड़ा था?

​ हम ग़फ़लत में थे पा लेंगे उनको, उम्मीदें पाले हुए,
हमारी उम्मीदों को जिसने तोड़ा, वो शादी का जोड़ा था।

​ रुख़्सती थी उनकी, चले थे वो किसी और का घर आबाद
करने,
वो अलग बात है कि हमको अँधेरों में उन्होंने छोड़ा था।

​अब आख़िर क्या होगा उस मोहब्बत के आशियाने का,
जिसे अपने हाथों से सजाकर आज ख़ुद ही तोड़ा था।

-MASHAALLHA


***********************************************

Read More

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
तू और मेरी मोहब्बत
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈

​ इन फूलों ने महकना तुझी से सीखा है,
इन हवाओं ने मचलना तुझी से सीखा है।

चाँद भी रात भर जगमगाता रहा,
इन सितारों ने चमकना तुझी से सीखा है।

​ तेरी आवाज़ को खूब सुनता हूँ मैं,
तेरे ही ख़्वाब को रोज़ बुनता हूँ मैं।

तू जो मिल जाए तो मुकम्मल हो जाए ज़िंदगी,
मेरी हर दुआ में बस तुझी को चुनता हूँ मैं।

​ मेरा हर दिन और मेरी हर शाम तू,
मेरी मोहब्बत का एक इनाम तू।

तुझसे ही मैंने इस जहाँ को जाना,
मेरी हर पहचान, मेरा हर नाम तू।

​ दिल को मिला बस तेरा ही सहारा,
भटकता रहा यह कब से बेचारा।

छुआ तूने जब इन धड़कनों को,
मानो कश्तियों को मिल गया किनारा।

​ तेरी बाहों में ही अब सुकूँ पाऊँगा,
इस दिल को खुशियों से सजाऊँगा।

लिख दिया है कागज पर इस रिश्ते का नाम,
अब यह रिश्ता मैं मरते दम तक निभाऊँगा।


-MASHAALLHA


🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

Read More

***********************************************

≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
मोहब्बत का गुलाब कांटे भी लाया
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈

“​ख़्वाबों के शहर में एक घर बसाया था,
दिल ने हर मोड़ पर बस तुम्हें ही पाया था।

एक आस जागी थी, एक नूर छाया था,
तेरी उल्फ़त का जब वो हसीं पल आया था।

​ गुलाब तो बहुत ख़ूबसूरत था मोहब्बत का,
पर कंबख़्त अपने साथ काँटे भी लाया था।

​हम न डरे कभी रास्तों की बंदिशों से,
न ही शिकवे किए ज़माने की गर्दिशों से।

हर ख़ुशी, हर दर्द में भी मुस्कुराया था,
मोहब्बत के हर अहसास को अपनाया था।

​ सोचा न था कभी ऐसा भी दिन आएगा,
जो कल तक अपना था, वही अजनबी हो जाएगा।

जिसके लिए इस पूरे ज़माने को भुलाया था,
चाहा था जिसे बेइंतहा, उसने ही आखिर मे इस दिल को
रुलाया था।”


-MASHAALLHA


***********************************************

Read More

—मोहब्बत का गुलाब—

​खिल जाता अगर मोहब्बत का वह गुलाब,
तो उसकी चाहत में हम जी लेते बेहिसाब।

मगर नसीब में लिखी थी खामोशियों की सरहदें,
और मुक्कमल न हो सका कभी हमारा ये हसीन ख्वाब ।

- MASHAALLHA

Read More

क्या हुआ अगर तुम दिल दुखाते हो?
अपने हर किए को तुम भूल जाते हो।

बेवफा, धोखेबाज,चाहे जो भी कहूँ तुम्हें,
पर चेहरे से तुम बहुत शरीफ नजर आते हो

- MASHAALLHA

Read More

दिल को ठोकर लगी, तो लगा कि इसी की ज़रूरत थी हमें,
तब जाकर जाना कि हर आशिक़ इश्क़ में अंधा ही होता है।

​बदनाम हो गए थे कई रिश्ते इश्क़ की दुहाई में,
तब समझ आया कि छोड़ जाने का ये तरीक़ा बहुत पुराना है।

​घर भी जल जाते हैं कभी मोहब्बत के चराग़ों से,
फिर लिखा जाता है कि ये मोहब्बत का महज़ एक फ़साना है।

- MASHAALLHA

Read More

—तन्हाइयों का अंत—
​रहे लिए हो तन्हा तो अब लौट आओ,
ये शिकवे-शिकायत तुम्हारे अब भूल जाओ।

तरसाओ ना इस दिल को यूँ इंतज़ार में,
आओ मिलकर हमसे ये दूरियाँ मिटाओ।

​अधूरा है तुम्हारे बिना हमारा ये जहाँ,
आकर तुम इसे फिर से मुकम्मल बनाओ।

तन्हाइयों के इन अंधेरों को कर दो खत्म,
और हमारी मोहब्बत को रोशन बनाओ।

- MASHAALLHA

Read More