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मुझे नींद की तलाश नही , मगर खाब है जो खुद से पूरे नही होते | हकीकत वो नही है जो दिखाई नही जाती, हकीकत वो है जिससे लोग मुखातिब नही होते | जमी पर ही रहे गया वो शख्स, जिसके मुककदर मे पर नही होते | लोटाऊ कैसे उस शख्स का कर्ज, जिसके कांधे पर अब सफर नही होते | आवाजे आती है मिटा दे मुझे, हम है कि बेवजह बेसब्र नही होते | -MASHAALLHA
तमन्ना बहुत थी एक बार उनसे मिलने की, वह मिले भी तो तब जब आखरी सफर था हमारा,, -MASHAALLHA
दर्द से भरी ये जिन्दगानी हमारी | खाली पन्नो से भरी एक कहानी हमारी || छू ले आसमानो को ये उम्र है | पर मुस्किलो से जुझती जवानी हमारी || ना जाने समुद्र क्यू खफा है रहता हमसे | जो लहरो मे डूबा दे कश्तियां हमारी || सब की नजर और मुक्कमल है हम | कोई क्या जाने ये बदहाली हमारी || अब दिनो की परवाह छोड़ी दी है हमने | थोड़ा जो सुकु दे बस वो राते हमारी || -MASHAALLHA
रही होगी तेरी भी कोई कहानी, मगर मुझे तो वो किस्सा याद है, जब तूने बेवाफाई की थी,, -MASHAALLHA
किस तरह उसे चाहे अब, दिल मे क्या है उसे बताये अब,, नुसका कोई बताये हमे, किस तरह उसे समझाये अब,, मसर्रत मे थे तो थे दिलबर, अब है क्या ये तो जाने रब,, हर मुराद उनकी हमसे है पूरी, इतना तो वह जानते है सब,, आखिर मे उनको सब समझ आयेगा, उसके लिए हम सब कुछ है अब,, -MASHAALLHA
कुछ कहे दिया किसी ने और वो सवाल करने लगे, सब कुछ तो है उनके पास फिर भी मलाल करने लगे, जो हक था उनका चुकाया हमे, फिर बेवजह क्यू वो बवाल करने लगे, एक अरसा लगता है जिसको कमाने मे,,, पैसा, दोलत, इज्जत अब वो हर तरह से हमे कंगाल करने लगे, रिश्ते निभाना जरूरी है मगर,, अब लोग हद से हदपार करने लगे... -MASHAALLHA
इंसान कुछ नही चाहता बस किसी से नीचे रहना नही चाहता, पर असल मे वह ता उम्र हमेशा किसी ना किसी से नीचे ही रहता है, यही हकिकत है जिन्दगी की,,, "बेशक आप कितना ही ऊपर हो जाओ,अपनी सफलता मे, अपने ओदे मे, अपनी दोलत मे, अपने ज्ञान मे, अपनी उदारता मे, अपनी खुशियो मे, अपने गमो मे, अपनी परेशानियो मे, अपनी मुश्किलो मे अपनी नाकामियो मे, आप हमेशा किसी न किसी से कम ही रहेगे" . -MASHAALLHA
नजरे मेरी आज तुझसे मिलाने दे, दिल मे मेरे है क्या मुझको बताने दे,, ख्वाबों में तुझसे रोज होती है मुलाकात, कुछ वक्त तेरे साथ मुझको बिताने दे,, मैने सुना है मोहब्बत एक इबादत है, मुझको भी चल आज, आजमाने दे,, मै इश्क मे भटकती राह का फकीर, मुझको तेरे दिल मे बस एक ठिकाना दे,, -MASHAALLHA
जरूरी नही है हर इश्क मुकम्मल हो कभी कभी रकीब के हाथो की लकीरो मे भी आप के महबूब का मुकद्दर लिखा होता है . -MASHAALLHA
झूठी मुस्कान दिखाने से अच्छा सच्चा गुस्सा दिखाना बेहतर है यू झूठ को बार बार नकाब पहनाने से आपका किरदार नही बदलता . -MASHAALLHA
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