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सुबह होती है तो दिन भर रात होने का इन्तेजार रहता है, और जब रात आती है तो सुबह का..... कमबख्त ये समझ नही आता कि आखिर इंसान चाहता क्या है ज़िन्दगी से ! -MASHAALLHA
— उजालों का सन्नाटा — "ये तन्हाइयाँ मार ही डालेंगी हमें एक दिन, कम्बख़्त ये रात भी ढलने का नाम नहीं लेती। ज़माने भर को बाँटते रहे जो उजाले कभी, आज उनकी ही तक़दीर में शाम नहीं ढलती।" -MASHAALLHA
— ज़िंदगी का फलसफा — कभी-कभी सच कहने से ज़्यादा, सच को सुनना अच्छा है, तूफ़ान में आगे बढ़ने से बेहतर, खुद को रोकना अच्छा है। हर बाज़ी जीतना ही ज़िंदगी का नाम नहीं होता, भलाई जिसमें छुपी हो, वो हार मान लेना अच्छा है। जहाँ दवा भी असर न करे किसी दर्द-ए-दिल पर, वहाँ होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान रख लेना अच्छा है। -MASHAALLHA
- लफ़्ज़ों की बंदिशों से परे - लफ़्ज़ों की बंदिशों से परे एक राब्ता है तुमसे, जैसे सदियों पुराना कोई वास्ता है तुमसे। धुंधली सी इस दुनिया में जब खुद को खोता हूँ, तेरी यादों के अक्स में ही तसल्ली पाता हूँ। ज़िंदगी की इस मसरूफ़ियत में भी एक ठहराव हो तुम, मेरी हर अनकही दुआ का खूबसूरत जवाब हो तुम। वक्त भले ही रेत की तरह फिसल जाए हाथों से, मगर तुम्हारा अहसास रूह में महकेगा सांसों से। -MASHAALLHA
बदलती नहीं हैं कभी कुछ पुरानी कहानियाँ, और न ही बदलते हैं कभी किरदार उनके, बदल जाते हैं अक्सर वो लोग महफ़िल में, ** जो कभी हिस्सा ही नहीं थे उन कहानियों का..."** -MASHAALLHA
मिट्टी के सीवा मेरी कब्र मे कुछ और ना था, वो जाने किस खजाने की तलाश मे कब्र खोदने आ गये! -MASHAALLHA
दो इलतिदा उसे, वो खाब मे मेरे, दिल की हर धड़कन और सांस मे मेरे,, वो खुशनसीब है, जिसका नसीब वो, वो उम्मीद है मेरी, वो हर आस मे मेरे,, चल पड़े कभी, वो रुकी घड़ी कभी, दुआ है हर घड़ी, वो पास हो मेरे,, हो गर कभी, लफ्ज़ साथ दे मेरे, उसे बता सकू, क्यू दिल में बसी मेरे,, काश उसका भी दिल इतना बेचन हो, वो भी कभी कहे, वो बस इन्तेजार मे मेरे,, -MASHAALLHA
तकदीर से उसकी मै अभी तक मुखातिब नही, फिर क्यू दौड़ पड़ता हूँ मै उसके निशां देखकर,, -MASHAALLHA
जो हमने खो दिया अब उसे पाना है हमे, संमुद्र से दरिया को वापस लाना है हमे,, बड़ी मोहताज होती है जिन्दगी बिना मंजिल, अब इस मंजिल को पटरी पर लाना है हमे,, होगी मुस्किल ये तो मालूम है हमे, बस अब किसी तरह रस्ता तो बनाना है हमे,, -MASHAALLHA
सुना अब बाजारो मे बिकती है मोहब्बत, दिल के खर्चो पर, पैसो से चलती है मोहब्बत,, किसी के छोड़ जाने से उदास होने का नही है वक्त, पलके छपकने से पहले अब बदलती है मोहब्बत,, लैला मजनू, हिर रांझा, रोमियो जूलियट वाला नही, ये दोर यहा एक साथ जाने कितनो से होती है मोहब्बत,, -MASHAALLHA
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