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एक दिन मैं लिख रहा था कि मोहब्बत सबको मिलती है, तभी मेरी कलम की नोक टूट गई। वह मुझसे कहने लगी—'तुम अभी नादान हो। मोहब्बत सुनने में जितनी हसीन है, हकीकत में उतनी ही बेरहम। अगर इसकी सच्चाई देखनी है, तो उन आशिकों की भीड़ देखो जहाँ जनाजे उठते हैं और माँ-बाप के कंधों पर उनके सपनों का बोझ होता है।' आज की दुनिया में लोग अक्सर चेहरे और पैसे से प्रेम करते हैं। यहाँ सादगी और ईमानदारी की कद्र कम ही होती है। सच बोलने से अक्सर रिश्तों में दरार आ जाती है। मेरी अपनी मोहब्बत भी कहती थी कि वह मेरे साथ 'नून-रोटी' खाकर रह लेगी, पर न जाने क्यों मेरी रूह को हमेशा यही डर सताता रहा कि कहीं यह भी एक धोखा न हो। इसीलिए मैंने खुद को दूर कर लिया। जब मैंने दुनिया को टटोला और एक अजनबी लड़की से पूछा कि धोखेबाज कौन होता है—लड़का या लड़की? तो उसने बिना किसी पक्षपात के कहा—'अगर लड़के धोखेबाज होते, तो वे किसी के लिए रोते नहीं और न ही अपने घर पर उस रिश्ते का जिक्र करते। लड़कियां अक्सर मोहब्बत तो करती हैं, पर अपनी सहेली तक को नहीं बतातीं, घर वालों को बताना तो बहुत दूर की बात है।'" लेखक -एसटीडी मौर्य मोबाईल न. 7648959824
शीर्षक "अधूरी बाते" मैं तुम्हारे ख्यालों में खो गया, न जाने सुबह से शाम कब हो गई। जब भी मेरी पलकें झपकती थीं, बस तुम्हारी होठों की मुस्कान दिखती थी। मैं तुम्हारे लिए यही सोचता था, कि तुम करीब आकर मुझे कब सीने से लगाओगी... इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ था मैं, पर जब नींद से मेरी आँखें खुलीं, तो आँखों में सिर्फ आँसू थे, क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर थी। पास थे तो बस तुम्हारे शब्द, जो मेरे दिल के करीब थे। — एसटीडी मौर्य✍️ #stdmaurya #std
मैं क्या लिखूँ? मोहब्बत लिखूँ या नफ़रत... नफ़रत के शहर में मोहब्बत नहीं भाती, मोहब्बत के शहर में नफ़रत नहीं भाती। लिखकर दोनों, मैं सबकी नज़रों में बुरा बन जाता हूँ, फिर तुम ही बताओ, मैं क्या लिखूँ? मोहब्बत का शहर भी अब मोहब्बत से कोरा है, और नफ़रत के शहर में मोहब्बत का शोर है। कोई मोहब्बत को बुरा कहता है, तो कोई नफ़रत को... अब तुम ही बताओ मैं क्या लिखूँ, नफ़रत लिखूँ या मोहब्बत लिखूँ? - Std Maurya
शीर्षक - "जरुरी हैं क्या? बात-बात में मुझसे लड़ती हो, कुछ पल में मुझसे गले लिपट जाती हो। डॉट दूं तो तुम मुंह फुला लेती हो... मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या? तुससे दूर चला जाऊँ, नयनों से आँसुओं की दरिया बहाने लगती हो। मिलने की सिफ़ारिश करने लगती हो, पल भर न मिलूँ तो आँखों से दरिया बहा देती हो। दरिया बहाना ज़रूरी है क्या? फूलों का ताज समझती हो, मुरझा न जाउँ, बड़ा खयाल रखती हो। खयाल रखने से मना कर दूँ तो मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या? कवि-एसटीडी मौर्य✍️ मोबाईल न. 7648959825 #stdmaurya #poem
"तेरे नित्य नयन के रंगों से, हम ख़ुद को सजाते हैं, धूप-छाँव में तेरी हर साँस की तलाश करते हैं। जब तेरे नयन देखूँ, सारी दुनिया रंगीन नज़र आती है, तुम मुझको भले ही गलत कह लेना, मगर मेरी इस रंगीन कलम को कुछ मत कहना।" -एसटीडी मौर्य दूरभाष 7648959825 कटनी मध्य प्रदेश #stdmaurya
#stdmaurya
"मेरी कविता की तुम क्या कीमत जानोगे, मैंने इसमें अपने जीवन की हर बात समाई है। जो सुलूक तुमने मेरे साथ किया है, उसे भी हमने अपनी कलम से फूलों सा सजाया है।" लेखक - एसटीडी मौर्य #एसटीडीमौर्य #एसटीडी
शीर्षक - "गुड़िया" तुम फूलों का ताज हो, मैं खुद को ताज कैसे बना लूँ? तुम फूल बन मेरे करीब आई हो, फिर तुम्हारी महक क्यों चुरा लूँ? मेरे बाग में तुम जैसी कलियां हैं, फिर मैं खुद को काँटा कैसे बना लूँ? फिदा तो ज़रूर हूँ, तुम्हारी फूलों सी पंखुड़ियों पर। उम्र की दूरी है, वरना तुम मेरे भी बाग की शहज़ादी होतीं। जब तुम्हें पहली बार देखा, तुम्हारी आँखों में खो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था, कि तुम मुझे अपना ताज बनाना चाहती हो। जब तुमसे बातें कीं, तो समझा, कि तुम भी मुझे ताज बनाना चाहती हो। फूलों की महक! तुम हर बाग में महकना, बैठ जाना उस फूल के पास, जिसके पास खुद की कोई महक नहीं। मैं बस महक का हिसाब करता हूँ, यूँ ही सबको बिखेर देता हूँ। मैं फूलों के ज़ख्म की कहानी लिखता हूँ, इसीलिए मैं हर किसी की महक बन जाता हूँ। -कवि एसटीडी मौर्य ✍️ #stdmaurya #lekhak
"खूबसूरती तो शब्दों में छिपी होती है; चेहरे का क्या है, वह तो उम्र के साथ बदल जाता है।" - Std Maurya
"मैं क्या लिखूँ? खुद को नवाब लिखूँ या खुद को फ़कीर लिखूँ? नवाब लिखता हूँ, तो फ़कीर छूट जाता है, फ़कीर लिखता हूँ, तो नवाब छूट जाता है। हसीना की सूरत देखूँ, तो अपनी सूरत भूल जाता हूँ, तुम अपने लफ्ज़ों से बयां तो करो— अपनी स्याही से खुद को नवाब लिखूँ या फ़कीर लिखूँ? कदम-कदम चलकर मैं यहाँ तक आया हूँ, मैं सोचता हूँ... तुम अपने लफ्ज़ों से बयां करो, गर तुम बयां नहीं करते, तो मैं खुद को फ़कीर ही लिखता हूँ।" - सत्येंद्र कुमार "एसटीडी" कटनी, मध्य प्रदेश दूरभाष -7648959825
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