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Raju kumar Chaudhary

Raju kumar Chaudhary Matrubharti Verified

@rajukumarchaudhary502010
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“Elon Musk Formula: From Zero to System Empire”भाग 1: Collapse (अध्याय 1–5)
भावनात्मक गिरावट + मानसिक पुनर्निर्माण
अध्याय 1: अंतिम शून्य
दुनिया टूटती है।
सब कुछ चला जाता है।
एक कमरा। एक Laptop।
भावनात्मक गहराई:
पहचान संकट।
अंदरूनी डर।
अध्याय 2: पहचान का विघटन
वह खुद से पूछता है —
“मैं कौन हूँ, यदि मेरे पास कुछ नहीं?”
मनोवैज्ञानिक थीम:
Identity vs Capability
अध्याय 3: वास्तविकता की स्वीकृति
कोई शिकायत नहीं।
कोई बहाना नहीं।
सिर्फ विश्लेषण।
रणनीतिक तत्व:
SWOT Analysis of Self
अध्याय 4: अवसर की खोज
Internet पर 200 घंटे का रिसर्च।
Pain Point पहचानना।
अध्याय 5: पहला प्रोटोटाइप
48 घंटे में MVP।
Launch बटन दबाते समय डर।
भाग 2: Resistance (अध्याय 6–10)
संघर्ष, असफलता, सुधार
अध्याय 6: मौन बाज़ार
कोई प्रतिक्रिया नहीं।
सीख: Market is indifferent.
अध्याय 7: डेटा की भाषा
User Behavior Analysis
अध्याय 8: Iteration Machine
Daily 1% Improvement
अध्याय 9: पहला राजस्व
छोटी कमाई का बड़ा अर्थ।
अध्याय 10: थकान की दीवार
Burnout + Self-Doubt
भाग 3: Momentum (अध्याय 11–15)
गति, ब्रांड, विस्तार
अध्याय 11: सार्वजनिक विचार
Social Presence शुरू।
अध्याय 12: विश्वास का निर्माण
Personal Brand Strategy
अध्याय 13: सिस्टम बनाम मेहनत
Automation Framework
अध्याय 14: टीम का गठन
First Hire का डर।
अध्याय 15: 10x Growth
Enterprise Model
भाग 4: Mastery (अध्याय 16–20)
गहराई, दर्शन, स्थायित्व
अध्याय 16: आलोचना का तूफान
अध्याय 17: पुनः शून्य की कल्पना
अध्याय 18: मानसिक अनुशासन
अध्याय 19: असली संपत्ति
अध्याय 20: अंतिम संदेश
Laptop वही है।
लेकिन मन अब सीमित नहीं।Elon musk ki Kahani.

कमरा छोटा था
इतना छोटा कि दो कदम में दीवार छू जाए।
खिड़की से आती रोशनी धूल के कणों को उजागर कर रही थी जैसे समय हवा में तैर रहा हो।
एक मेज। एक कुर्सी। एक पुराना Laptop।
और वह।
Elon Musk।
लेकिन इस कहानी में वह अरबपति नहीं है।
न कोई कंपनी।
न कोई निवेशक।
न कोई हेडलाइन।
सिर्फ एक मनुष्य।
और शून्य।
1. पहचान का टूटना
कभी दुनिया उसे दूरदर्शी कहती थी।
कभी पागल।
कभी जीनियस।
आज कोई नाम नहीं था।
उसने Laptop खोला। स्क्रीन पर सिर्फ खाली डेस्कटॉप था।
उसने खुद से पूछा:
“अगर मेरी सारी कंपनियाँ, सारे शेयर, सारे संसाधन चले जाएँ…
तो क्या बचता है?”
कमरे में सन्नाटा था।
लेकिन भीतर जवाब स्पष्ट था:
“सोच।”
2. भय का वास्तविक स्वरूप
डर पैसे खोने का नहीं था।
डर था पहचान खोने का।
जब दुनिया आपको आपके परिणामों से पहचानती है,
तो परिणाम जाते ही आप कौन रह जाते हैं?
उसने कुर्सी पर पीछे झुककर छत को देखा।
“अगर मैं शून्य हूँ…
तो क्या मैं फिर से बन सकता हूँ?”
यह सवाल डर से नहीं, जिज्ञासा से निकला था।
3. रणनीतिक विश्लेषण
भावनाओं को किनारे रखकर उसने कागज़ उठाया।
ऊपर लिखा:
SWOT Myself
Strengths:
Engineering Mind
Systems Thinking
High Pain Tolerance
Long-term Vision
Weakness:
Impatience
Extreme Risk Appetite
Opportunity:
AI Revolution
Small Business Automation Gap
Threat:
Competition
Time
Fatigue
उसने कागज़ को देखा और हल्की मुस्कान आई।
“मेरे पास पूँजी नहीं है।
लेकिन मेरे पास गणना है।”
4. शून्य का उपहार
अधिकांश लोग शून्य को अभिशाप मानते हैं।
लेकिन शून्य का एक अनोखा लाभ होता है
कोई विचलन नहीं।
न कोई मीटिंग।
न कोई मीडिया इंटरव्यू।
न कोई बोर्ड मीटिंग।
सिर्फ ध्यान।
उसने खुद से कहा:
“अब मुझे साबित नहीं करना।
बस बनाना है।”
5. समस्या की खोज
उसने इंटरनेट खोला।
सोशल मीडिया नहीं।
मनोरंजन नहीं।
Reddit।
StackOverflow।
AI Forums।
Startup Communities।
वह पैटर्न खोज रहा था।
3 दिन बीत गए।
एक बात स्पष्ट थी
छोटे व्यवसाय AI टूल्स से भ्रमित थे।
वे जानते थे कि AI भविष्य है।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि कैसे उपयोग करें।
यहीं अवसर था।
6. निर्माण की पहली चिंगारी
“Simple AI Automation for Small Business.”
वह बुदबुदाया।
ना फंडिंग।
ना टीम।
सिर्फ Laptop।
उसने कोड लिखना शुरू किया।
पहले दिन 14 घंटे।
दूसरे दिन 16 घंटे।
थकान थी।
लेकिन स्पष्टता भी थी।
7. भीतर का संवाद
रात के 3 बजे।
स्क्रीन की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
एक क्षण के लिए संदेह आया।
“क्या यह काम करेगा?”
लेकिन तुरंत दूसरा विचार आया
“काम करना लक्ष्य नहीं है।
सीखना लक्ष्य है।”
और वह फिर कोड लिखने लगा।
8. पहला संस्करण
48 घंटे बाद
एक साधारण लेकिन कार्यशील टूल तैयार था।
कोई सुंदर डिज़ाइन नहीं।
कोई मार्केटिंग नहीं।
सिर्फ कार्यक्षमता।
Launch बटन स्क्रीन पर चमक रहा था।
उसने गहरी साँस ली।
क्लिक।
9. मौन
पहला दिन कोई प्रतिक्रिया नहीं।
दूसरा दिन शून्य।
तीसरा दिन एक साइनअप।
Revenue: $9
उसने स्क्रीन को देखा।
मुस्कुराया।
“यह पैसे नहीं हैं।
यह प्रमाण है।”
10. अंतिम विचार
रात को वह फिर उसी कुर्सी पर बैठा था।
कमरा अभी भी छोटा था।
Laptop अभी भी पुराना था।
लेकिन कुछ बदल चुका था।
अब वह शून्य नहीं था।
अब उसके पास एक दिशा थी।
उसने डायरी में लिखा:
“Wealth is not stored in bank accounts.
It is stored in skills.”
अध्याय 1 की सीख
शून्य एक अवसर है
पहचान से अधिक महत्वपूर्ण है क्षमता
स्पष्टता सीमाओं से आती है
निर्माण भय को नष्ट करता है
यह तो सिर्फ शुरुआत है।
यदि आप तैयार हैं,
तो अगले अध्याय में हम देखेंगे
👉 वह बाजार को गहराई से कैसे पढ़ता है
👉 और कैसे एक विचार रणनीति में बदलता है

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अमीर बनने का विज्ञान (The Science of Getting Rich )अमीर बनने का विज्ञान एक कहानी से समझिए
एक छोटे से कस्बे में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके सपने बड़े थे, लेकिन जेब हमेशा खाली रहती थी। वह अक्सर सोचता “क्या अमीर बनना सिर्फ किस्मत वालों के लिए होता है?”
एक दिन शहर की पुरानी किताबों की दुकान में उसे एक किताब मिली
The Science of Getting Rich
लेखक थे Wallace D. Wattles।
किताब का नाम पढ़कर अर्जुन हँस पड़ा “अमीर बनने का भी कोई विज्ञान होता है क्या?”
लेकिन जिज्ञासा ने उसे किताब खरीदने पर मजबूर कर दिया।
🌱 पहला अध्याय सोच की शक्ति
किताब ने अर्जुन को पहला सबक दिया
“धन पहले मन में बनता है, फिर हाथों में आता है।”
अर्जुन ने पहली बार महसूस किया कि वह हमेशा गरीबी के बारे में सोचता था
“मेरे पास पैसा नहीं है…”
“मेरे पास संसाधन नहीं हैं…”
किताब कहती थी “जिस बात पर तुम लगातार सोचते हो, वही बढ़ती है।”
उसने अपनी सोच बदली। अब वह रोज़ सुबह उठकर कहता
“मैं रचनात्मक हूँ। मैं मूल्य पैदा कर सकता हूँ। मैं अमीर बन सकता हूँ।”
🔥 दूसरा अध्याय प्रतिस्पर्धा नहीं, सृजन
अर्जुन पहले दूसरों को देखकर जलता था।
“वह क्यों सफल है? मैं क्यों नहीं?”
लेकिन किताब ने सिखाया
“प्रतिस्पर्धा की मानसिकता से नहीं, सृजन की मानसिकता से काम करो।”
उसने सोचना शुरू किया
“मैं लोगों के लिए क्या नया कर सकता हूँ?”
धीरे-धीरे उसने अपने हुनर को पहचाना। वह कहानियाँ लिख सकता था। उसने छोटे-छोटे लेख लिखना शुरू किया। लोगों ने पढ़ा, सराहा, और उसका आत्मविश्वास बढ़ा।
🌟 तीसरा अध्याय विश्वास और कृतज्ञता
किताब में लिखा था
“कृतज्ञता वह पुल है, जो तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य तक पहुँचाता है।”
अर्जुन ने हर छोटी उपलब्धि के लिए धन्यवाद देना शुरू किया
पहली कमाई, पहली तारीफ़, पहला पाठक।
उसका मन सकारात्मक होने लगा। और जब मन बदलता है, तो अवसर भी बदलते हैं।
🚀 चौथा अध्याय निरंतर कर्म
किताब सिर्फ सपने देखने की नहीं थी।
वह कहती थी “हर दिन एक प्रभावी कदम उठाओ।”
अर्जुन ने रोज़ लिखना शुरू किया
चाहे मन हो या न हो।
धीरे-धीरे उसकी पहचान बनने लगी।
एक दिन उसे पहली बार अपनी किताब छपवाने का मौका मिला।
🏆 अंतिम संदेश
कुछ साल बाद, वही अर्जुन जो कभी पैसों के लिए परेशान रहता था, आज आत्मनिर्भर था।
वह समझ चुका था
अमीर बनने का विज्ञान कोई जादू नहीं,
यह सोच + विश्वास + रचनात्मकता + निरंतर कर्म का समीकरण है।
और उस दिन उसने अपनी डायरी में लिखा
“अमीर बनना किस्मत नहीं, एक निर्णय है।”

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अमीर बनने का विज्ञान
The Science of Getting Rich लेखक: Wallace D. Wattles
🔎 परिचय
“अमीर बनने का विज्ञान” एक क्लासिक आत्म विकास (Self-Help) पुस्तक है, जिसमें लेखक ने धन कमाने को भाग्य या संयोग नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया बताया है। यह पुस्तक 1910 में प्रकाशित हुई थी, लेकिन आज भी इसकी विचारधारा उतनी ही प्रभावशाली मानी जाती है।
📖 पुस्तक का मुख्य संदेश
लेखक का दावा है कि धन कमाना एक कला नहीं, बल्कि एक सटीक विज्ञान है। यदि कोई व्यक्ति कुछ निश्चित सिद्धांतों का पालन करता है, तो वह आर्थिक रूप से सफल हो सकता है।
मुख्य सिद्धांत:
स्पष्ट सोच (Definite Thinking) मन में स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए।
रचनात्मक सोच (Creative Thought) प्रतिस्पर्धा की जगह सृजनात्मक दृष्टिकोण अपनाना।
विश्वास और कृतज्ञता (Faith & Gratitude) ब्रह्मांड की शक्तियों पर विश्वास और आभार की भावना।
निरंतर कर्म (Efficient Action) रोज़ाना अपने लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाना।
💡 पुस्तक की विशेषताएँ
सरल और सीधे शब्दों में गहरे सिद्धांत।
“आकर्षण के सिद्धांत” (Law of Attraction) की प्रारंभिक अवधारणा।
मानसिकता (Mindset) को धन-सृजन का मूल आधार बताया गया है।
आध्यात्मिकता और व्यावहारिकता का संतुलन।
⚖️ सकारात्मक पक्ष
✔ प्रेरणादायक और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली।
✔ छोटे उद्यमियों और युवाओं के लिए उपयोगी।
✔ लक्ष्य निर्धारण और अनुशासन पर जोर।
❗ सीमाएँ
कुछ विचार अत्यधिक आदर्शवादी लग सकते हैं।
आधुनिक आर्थिक जटिलताओं (बाजार, तकनीक, वैश्विक प्रतिस्पर्धा) पर चर्चा नहीं।
वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग है, पर यह शुद्ध वैज्ञानिक शोध-आधारित पुस्तक नहीं है।
🎯 किसके लिए उपयोगी?
जो लोग आर्थिक स्वतंत्रता का सपना देखते हैं।
युवा लेखक, उद्यमी और विद्यार्थी (जैसे आप, जो लेखन और प्रकाशन की दुनिया में आगे बढ़ना चाहते हैं)।
जो सकारात्मक सोच और आत्म-विकास में रुचि रखते हैं।
🏆 निष्कर्ष
“अमीर बनने का विज्ञान” केवल पैसे कमाने की किताब नहीं है, बल्कि यह सोच बदलने की किताब है।
यह सिखाती है कि धन पहले मन में बनता है, फिर वास्तविक जीवन में।
⭐ रेटिंग: 4/5
(क्लासिक प्रेरणादायक पुस्तक, पर आधुनिक संदर्भ में पढ़ते समय व्यावहारिक दृष्टिकोण भी रखें

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✍️ मेरी आत्मकथा
“मिट्टी से शब्दों तक”आत्मजीवनी
✍️ राजु कुमार चौधरी
मेरा नाम राजु कुमार चौधरी है। मेरा जन्म 17 अप्रैल 2005 को नेपाल के मधेश प्रदेश, पर्सा ज़िले के जगरनाथपुर गाउँपालिका, वार्ड नं. 6, प्रसौनी में हुआ। मेरी माता का नाम प्रतिभा देवी और पिता का नाम बिजेश चौधरी है। मैं अपने माता-पिता के संस्कार, संघर्ष और आशीर्वाद के साये में पला-बढ़ा हूँ।
बचपन और परिवार
मेरा बचपन गाँव की मिट्टी, खेतों की हरियाली और सरल जीवनशैली के बीच बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने मुझे बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी।
माता ने मुझे धैर्य, संवेदनशीलता और प्रेम का महत्व सिखाया, जबकि पिता ने अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया।
शिक्षा
मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ही क्षेत्र के विद्यालय से प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति मेरी रुचि शुरू से ही अच्छी रही।
मैंने कक्षा 12 (इंटरमीडिएट) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। वर्तमान में मैं B.A.D. (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की पढ़ाई कर रहा हूँ।
शिक्षा मेरे लिए केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्म-विकास और समाज सेवा का मार्ग है। मैं मानता हूँ कि एक शिक्षित व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
लेखन की शुरुआत
किताबों और कहानियों से मेरा लगाव किशोरावस्था में और गहरा हो गया। मैंने महसूस किया कि शब्दों में शक्ति होती है — वे दिलों को छू सकते हैं, सोच बदल सकते हैं और प्रेरणा दे सकते हैं।
धीरे-धीरे मैंने स्वयं कहानियाँ और कविताएँ लिखना शुरू किया। मेरे लेखन में प्रेम, संघर्ष, सामाजिक सच्चाई और रहस्य का समावेश रहता है।
संघर्ष और संकल्प
जीवन में कई चुनौतियाँ आईं, लेकिन मैंने हर कठिनाई को सीख में बदला। मेरा विश्वास है कि संघर्ष ही सफलता की नींव है।
मैं लगातार सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत हूँ।
मेरा लक्ष्य
मेरा सपना है कि मैं एक सफल लेखक और शिक्षित समाज निर्माता बनूँ।
मैं चाहता हूँ कि मेरे शब्द लोगों के जीवन में आशा, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संचार करें।
समापन
मैं राजु कुमार चौधरी, एक छोटे से गाँव से निकलकर बड़े सपनों की ओर बढ़ता हुआ एक साधारण युवक हूँ।
मेरी यात्रा अभी जारी है — और हर दिन मैं अपने सपनों के एक कदम और करीब पहुँच रहा हूँ।
"हर शब्द में जादू, हर कहानी में रहस्य — यही मेरी पहचान है।"

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https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

हमारी इए कहानी बहुत लोकप्रिय हुई है आप हमारे ID पर जाकर पढ सकते है विल्कूल फ्रि में

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My Contract Wife 2.0
In the heart of a bustling city, where skyscrapers pierced the clouds and neon lights flickered like distant stars, Aarav found himself trapped in a marriage that was never meant to be.
A year ago, he had signed a contract—a simple piece of paper with a few clauses that promised mutual benefits but little emotional connection. His "wife," Ayesha, was a woman he barely knew. She was beautiful, poised, and graceful, but their relationship was nothing more than a carefully structured agreement.
Aarav, a successful tech entrepreneur, had been under immense pressure from his parents to marry someone from their prestigious social circle. But Aarav had no interest in the social games of elite families. Ayesha, on the other hand, was from a family struggling to maintain their legacy. The contract was her escape, her ticket to a life of comfort, but it was never supposed to be about love.
But things changed.
Aarav had hired Ayesha as his “wife” for the sake of family and appearances. They lived together, shared the same space, but never really lived together. Conversations were sparse, emotions were muted, and everything between them felt like a business deal.
Until one fateful night.
It was his birthday. Aarav had invited a few colleagues and old friends for a small gathering at his penthouse. The guests were a mix of old-school businessmen and young entrepreneurs, and the atmosphere was filled with laughter, wine, and music.
Ayesha had spent the evening in the corner of the room, sipping her drink and talking to no one. She wasn't part of the crowd, and they were always careful to avoid her. After all, what did a woman like her have in common with a room full of ambitious go-getters?
But then, Aarav saw something in her—something he had never noticed before. She was beautiful, yes, but it was more than that. There was an intelligence in her eyes, a quiet confidence that made her stand out from the rest. In a brief moment, as their eyes met, he felt a strange pull, as if he were seeing her for the first time.
The party continued, but the distance between them began to shrink.https://youtube.com/@prbgroupprivatelimited?si=rfexF5LftoypLfkS

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My Contract Wife 2.0
In the heart of a bustling city, where skyscrapers pierced the clouds and neon lights flickered like distant stars, Aarav found himself trapped in a marriage that was never meant to be.
A year ago, he had signed a contract—a simple piece of paper with a few clauses that promised mutual benefits but little emotional connection. His "wife," Ayesha, was a woman he barely knew. She was beautiful, poised, and graceful, but their relationship was nothing more than a carefully structured agreement.
Aarav, a successful tech entrepreneur, had been under immense pressure from his parents to marry someone from their prestigious social circle. But Aarav had no interest in the social games of elite families. Ayesha, on the other hand, was from a family struggling to maintain their legacy. The contract was her escape, her ticket to a life of comfort, but it was never supposed to be about love.
But things changed.
Aarav had hired Ayesha as his “wife” for the sake of family and appearances. They lived together, shared the same space, but never really lived together. Conversations were sparse, emotions were muted, and everything between them felt like a business deal.
Until one fateful night.
It was his birthday. Aarav had invited a few colleagues and old friends for a small gathering at his penthouse. The guests were a mix of old-school businessmen and young entrepreneurs, and the atmosphere was filled with laughter, wine, and music.
Ayesha had spent the evening in the corner of the room, sipping her drink and talking to no one. She wasn't part of the crowd, and they were always careful to avoid her. After all, what did a woman like her have in common with a room full of ambitious go-getters?
But then, Aarav saw something in her—something he had never noticed before. She was beautiful, yes, but it was more than that. There was an intelligence in her eyes, a quiet confidence that made her stand out from the rest. In a brief moment, as their eyes met, he felt a strange pull, as if he were seeing her for the first time.
The party continued, but the distance between them began to shrink.

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