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New bites

noval naam ✍️👉The Ruthless Pact

जिसे पूरी दुनिया 25 साल तक एक लाचार पागल समझती रही, वो बंद कमरे में अपने ही दुश्मनों के खून से उनकी मौत की तारीख लिख रही थी... असली खूनी खेल तो अब शुरू हुआ है!"

sknovel

मेरी series, The Ruthless Pact,

एक खूनी रात में, अंडरवर्ल्ड का सबसे खूंखार कातिल 'अजराइल' एक माफिया डॉन को मौत के घाट उतार देता है। लेकिन अजराइल कोई और नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी लड़की है, जिसे सब पागल समझते हैं और जो अपने दादा के गुप्त बैंक की तलाश में है। दूसरी ओर, शहर का सबसे शक्तिशाली टाइकून रुद्र प्रताप सिंह, अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए अजराइल को ढूंढ रहा है। जब वैशाली सिंह, जो रुद्र के भाई की मौत के पीछे का मास्टरमाइंड है, अपने बिजनेस को बचाने के लिए रुद्र को अपनी बेटी मायरा से शादी का प्रस्ताव देती है, तो रुद्र एक चौंकाने वाला फैसला लेता है। वह मायरा को नहीं, बल्कि वैशाली की उस पागल सौतेली बेटी को अपनी 'मास्कड ब्राइड' बनाने की शर्त रखता है, जिसे वह सालों से एक पुराने आउटहाउस में कैद रखती है। क्या रुद्र जानता है कि वह किसे अपने घर ला रहा है? या वह खुद मौत के फरिश्ते को अपने बेडरूम का दरवाजा खोलकर दे रहा है? इस खूनी खेल में, जीत किसकी होगी?

sknovel

एक खूनी रात में, अंडरवर्ल्ड का सबसे खूंखार कातिल 'अजराइल' एक माफिया डॉन को मौत के घाट उतार देता है। लेकिन अजराइल कोई और नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी लड़की है, जिसे सब पागल समझते हैं और जो अपने दादा के गुप्त बैंक की तलाश में है। दूसरी ओर, शहर का सबसे शक्तिशाली टाइकून रुद्र प्रताप सिंह, अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए अजराइल को ढूंढ रहा है। जब वैशाली सिंह, जो रुद्र के भाई की मौत के पीछे का मास्टरमाइंड है, अपने बिजनेस को बचाने के लिए रुद्र को अपनी बेटी मायरा से शादी का प्रस्ताव देती है, तो रुद्र एक चौंकाने वाला फैसला लेता है। वह मायरा को नहीं, बल्कि वैशाली की उस पागल सौतेली बेटी को अपनी 'मास्कड ब्राइड' बनाने की शर्त रखता है, जिसे वह सालों से एक पुराने आउटहाउस में कैद रखती है। क्या रुद्र जानता है कि वह किसे अपने घर ला रहा है? या वह खुद मौत के फरिश्ते को अपने बेडरूम का दरवाजा खोलकर दे रहा है? इस खूनी खेल में, जीत किसकी होगी?

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Do you know that anger is a result. By changing its causes, anger can be stopped?

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dadabhagwan1150

🟡 कॉर्न 🌽टिक्की

🟡 एक मोठी वाटी कॉर्न
एक उकडलेला बटाटा बारीक किसुन
एक वाटी मक्याचा रवा घेतला जो माझ्याकडे उपलब्ध होता
(साधा रवा वापरू शकता)
दोन मिरच्या बारीक चिरुन
बारीक चिरलेली कोथिंबीर
अर्धा चमचा काळी मिरी पावडर
अर्ध्या लिंबाचा रस
मीठ चवीनुसार

🟡 सर्व प्रथम कॉर्न वाफवून मिक्सर मधून थोडेसे भरड वाटून घेतले.
मक्याचा रवा भाजून घेतला
वाटलेल्या कॉर्न मध्ये बटाटा कीस कोथिंबीर मिरची. काळी मिरी पावडर. मीठ,कोथिंबीर व लिंबू रस घालून मिक्स करून घेतले
थोडा वेळ तो गोळा झाकुन ठेवला

🟡 थोड्या वेळाने त्याचे गोळे करून पोळपाटावर थापून गोल साच्याचा वापर करून टिक्की बनवली.

🟡 ही टिक्की मक्याच्या रव्यात दोन्हीं बाजूंनी घोळून
फ्रिज मधे तासभर सेट केली

🟡 तासाभराने तव्यावर तेल लावून दोन्ही बाजूंनी चांगलीं खरपुस फ्राय केली.

🙂गरमागरम कॉर्न टिक्की सोबत
तळलेली स्माईली..🙂
कांदा रिंग व 🍅.टोमॅटो सॉस .

jayvrishaligmailcom

एक संवाद, एक सबक

(काजल): "किस चाँद का नूर हो तुम, यह बताओ कौन हो तुम?"

(मेरी बहन): "चाँद तो बस एक का होता है, हज़ारों का नहीं। वह तो आसमान में रहता है, धरती पर नहीं। ज़रा बच के रहना दुनिया से, यह बड़ा बेखौफ माहौल है।"

(काजल): "मैं चाँद नहीं, मैं तो तारा हूँ।"

(मेरी बहन - टोंट मारते हुए): "रोशनी तो चाँद से होती है, तारों से नहीं; और मोहब्बत एक से होती है, हज़ारों से नहीं।"

(काजल): "अगर ऐसा है, तो फिर मैं खुला आसमान हूँ और उस आसमान का बादल हूँ।"

(मेरी बहन): "तो फिर उन बादलों के पीछे छुप मत जाना!"

(काजल): "छुपेंगे नहीं, हम तो बारिश बनकर आएंगे।"

(मेरी बहन): "देखना, कहीं नाली में मत बह जाना।"

(काजल): "अगर नाली में बही, तब भी हम समुद्र में मिल जाएंगे। और फिर भाप बनकर, बादल बनकर आसमान में जलकाएंगे।
(मेरी बहन - चेतावनी देते हुए): "आसमान के नीले रंग में खो मत जाना! जिस लाइन में तू है न, उसकी टीचर मैं हूँ, तो ज़रा संभल कर!"

(काजल - मुस्कुराते हुए): "हम खोएंगे नहीं, बस तुम्हें अपना दीदार कराएंगे।"

(मेरी बहन - फिक्र जताते हुए): "ठीक है, पर एक बात याद रखना... मौसम के बदलाव में तुम भी मत बदल जाना।"

(काजल - शांत भाव से): "...और फिर मेरे पास कहने को कुछ न बचा, बस खामोश होकर मैं उनकी बात मान गई।"

vanshsingh118873

फटी ज़ेब को देखकर
मैं परेशान हो गया था
चंद रुपयों की बात न थी
मेरा ईमान खो गया था

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

तूने ही अपने कदम पीछे कर लिए,
मुझमें कहाँ थी हिम्मत तुझे गवाने की

तेरे लिए तो मैं हर शख्स को ठुकरा देता,
तू ज़िद तो करती मुझे पाने की...!!!

narayanmahajan.307843

किसी रोज़ तुमसे मिलकर
यूँ बिछड़ जायेंगे
जैसे घाटों को छूकर लहरें गुज़र जाती हैं
कुछ अधूरी-सी बातें
आँखों में रह जायेंगी
जैसे कुछ दास्तानें ख़ामोशियों में उतर जाती हैं
न तुम रोक पाओगे,
न हम ठहर पाएंगे
वक़्त के हाथों दोनों ही बिखर जाएंगे
मगर एक शाम
जब तन्हाई दस्तक देगी।
तुम किनारा बने रहना
हम लहरों की तरह तुम तक उमड़ आयेंगे
मिलना भी मुकद्दर होगा और बिछड़ना भी
तुम्हारे ख्वाबों में इस तरह बिखर जाएंगे
बस एक ख़ामोश सा एहसास दिल में ठहर जाएगा
तुम देखते रह जाओगे किनारे की तरह वहीं
और मेरा नाम लहरों संग
बहता चला जाएगा✍️

narayanmahajan.307843

" Bheed se alag'

arnagvanshi051673

“जलता दीप “
क्या जलता दीप
घोर अँधेरा मिटा सकता है क्या…?
क्या बढ़ते कदम
किसी ग़लत राह से मुड़कर
किसी जाने-पहचाने पथ पर
चल सकते हैं क्या…?
क्या जलता दीप
घोर अँधेरा मिटा सकता है क्या…?
जो रोशनी की किरणें
चमकने से पहले ही
अँधेरे की पीड़ा में दब गई हों,
क्या उन्हें फिर से
सूरज से मिलाया जा सकता है क्या…?
क्या जलता दीप
घोर अँधेरा मिटा सकता है क्या…?
जो हाथ थक गए हों
जीवन का बोझ उठाते-उठाते,
क्या उन हाथों को
कभी सुकून का स्पर्श
मिल सकता है क्या…?
या फिर कुछ अँधेरे
बस साथ चलने के लिए होते हैं…
और दी
सिर्फ़ इतना करता है,
कि हम गिरें नहीं।
प्राची गुर्जर ……

prachitanwar111

प्रीये....
तुम मेरे जीवन में सर्वदा के लिए रहोगी
चाहे प्रेम बनकर
या फिर ना समाप्त होने वाली पीड़ा बनकर...
श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🌹

narayanmahajan.307843

कविता
तू रहता कौन से शहर में है




क्या तेरे पास जाने की कोई और रास्ता है
है तो बताना
मुझे सचमुच में तेरे पास जाना है

तू रहता कौन से शहर में
और तुम्हारा घर का पता क्या है

मुझे नहीं मालूम बताना
मुझे तुझे ढूंढते हुए तुम्हारे शहर तक जाना है
तुम्हें गले लगाने के लिए तुम्हारे घर तक आना है




तू है इस दुनिया की या तेरा दुनिया कही और है
सच-सच बताना तू किस दुनिया से है


मुझे सचमुच में तुमसे मिलना है
तेरी एहसासों में जीती रही आज तक मैं
तुम्हें सपनों में देखती रही आज तक में


पर अब ऊब गई हूं मैं
इस नियंत्रर एक जैसे चलते हुए जिंदगी से



अब मुझे तुम्हारे पास आकर
तुम्हें महसूस करना है


क्या-क्या बताऊं तुम्हें
तुम्हें गले लगाना है तुम्हें चूमना है
तुम्हारे साथ पूरी दुनिया घूमना है



मेरी ख्वाहिश तुझसे शुरू होती है
और तुम्हें तक जाती है

पर मैं निराश हूं
इन ख्वाहिशों से
जो हकीकत होते हुए मुझे कभी ना देखा


तू है कहीं पर इन आंखों के सामने तू कभी ना दिखा
क्या यही मुकद्दर है हमारी



या बस यह मेरी किस्मत है
तुम्हें सोचते रहना
और सोचते रहना पागलों की तरह
सोचते रहना
और सोच सोच कर तुम्हें पाने की झूठी ख्वाब बुनना


उफ
कितनी पागलपन से भरी हुई मेरी ऐ दिमाग है
जिससे तुम कभी जाते ही नहीं



पर क्या करूं अगर तुम्हें भुलाना आसान होता तो
भुला दिया होता
और दिल मै किसी और से कब की लगा लिया होता


सच कहूं तो तुम्हें भुलाने सच में बहुत ही मुश्किल है
मेरे लिए





पर अब सोचती हूं तुम्हें ढूंढती रहूं
या तुम्हें ढूंढना छोड़ कर
थोड़ी ध्यान खुद पर दे दु


ऊफ तुम्हारा नाम लेकर
मेरे लिए यह डिसाइड करना भी मुश्किल है

क्या करूं तुम्हारा नाम लेना छोड़ दूं
पर तुम्हारा नाम से ही तो यह धड़कन धड़कती है
यह थम जाएगी तो मैं मर ही जाऊंगा

आ कितना मुश्किल है
मेरे लिए ऐ जहां मे
तुम्हें ढूंढना और खुद को संभालना

abhinisha

ऋषभ परिचय

जाहि कृपा पिपीलिका पार जाई ।
महान समुन्द्र का थाह लगाई ॥
जाहि कृपा नापा धरती आकाशा ।
होवे पूरा सब मन अभिलाषा ॥१॥

जाहि कृपा जन्म जन्म तक ज्ञान ।
देई दर्शन सदैव भगवान ॥
मुरझाया सुमन खिल जाता है ।
गरल महाअमृत हो जाता है ॥२॥

जाहि कृपा भक्त सब ब्रह्माण्ड की ।
थाह लगा पातें धाम ईश्वर की ॥
दुःख कष्ट पीड़ा पाप दूर जाई ।
तीनऊँ ताप कबहूँ न सताई ॥३॥

जाहि कृपा मोह माया दूर जाई ।
भक्तन्ह पर बनी राम कृपाई ॥
ऐश्वर्य समृद्धि सुख शान्ति पाई ।
मुक्ति पाई रघुपति धाम जाई ॥४॥

जाहि कृपा दुष्ट सन्त मुक्ति पाई ।
कर्म रूपी जीवन से तर जाई ॥
जाहि सेवक करत सेवकाई ।
उत्तम पुण्य उत्तम फल पाई ॥५॥

धर्म कर्म काम मोक्ष राम दास ।
मैं ऋषभ विश्वकर्मा ताहि दास ॥
राम भजन कीर्तन गुण गान ।
कीन्ह मोहि जग नामी भगवान ॥६॥

राम की सेवा कर दास कहाई ।
सेवा से ऋषभदास नाम पाई ॥
उत्तम दीक्षा शिक्षा पिता नें दिया ।
भा गुरु मोर सर्व सम्पन्न किया ॥७॥

माता पिता प्रथम भगवान हैं ।
वही मोरे हेतु उत्तम गुरु हैं ॥
जनक का नाम राधेश्याम मोरे ।
जननी का नाम बाला देवी मोरे ॥८॥

कुल विश्वकर्मा ब्राह्मण वर्ण है ।
शाण्डिल्य गोत्र लौहकार कर्म है ॥
आराध्य देव प्रभु विश्वकर्मा हैं ।
विश्वकर्मा पुत्र मनु से जन्मे हैं ॥९॥

भक्ति रस का मैं कवि कहलाता ।
परमेश्वर की महिमा को गाता ॥
शारदा कृपा से रचना करता ।
महिमा गाकर पाप उतारता ॥१०॥

ब्रह्माण्ड वसुधालोक जम्बूद्वीपं ।
भरतखण्ड आर्यावर्त भारतं ॥
प्रसिद्ध आर्यमगढ़ नगरी है ।
अद्भुत सुन्दर ग्राम लहुआँ है ॥११॥

शङ्करपुर का गृहसमूह है ।
लौहकार वंश का लोहरान है ॥
जयराम नामक एक गृह है ।
राम कृपा से वही मेरा धाम है ॥१२॥

लहुआँ माटी से तिलक लगाता ।
लहुआँ की माटी का पुत्र कहाता ॥
लहुआँ की माटी में जन्म लिया हूँ ।
ता में राम गुण गाता मैं पला हूँ ॥१३॥

कवि - ऋषभ विश्वकर्मा (ऋषभदास)

rishabhvishwakarma

હું કેમ આટલું બધું વારંવાર યાદ કરું છું,તને!
હું નથી યાદ કરતો,આ હ્રદય મારું યાદ કરે છે,તને!
કેવી આ દૂરી છે,આપણાં બેઉ વચ્ચે સબંધની!
તારી પાસે કઈંજ જોઈતું નથી છતાં,કેમ તારી જરુર પડે છે,મને? - વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

तेरी यादों में जीना सीख लिया है ,
खुद को मेरे हाल पर जीना सीख लिया है,
क्यों तुम मुझे इतना ना पसंद करते हो,
मुझे कभी कभी लगता है, मैने खुद से ही दूर जाना सीख लिया है,
बड़ी दुनिया का सपना नहीं बस तुझे पाना था,
अब लगता है तेरे साथ साथ सब से दूर जाना सीख लिया है 💔😞🫤😧🥺

omparkashverma554460

POV: You meet someone who feels like a memory. ✨🖤

Maybe that's why some people feel familiar the very first time we meet them.

Like somewhere, in some other version of my life, they were already a part of my story. ✨🖤

#BookQuotes #SoulConnection #FictionLover

shivi27

ભગવાનને પ્રાપ્ત કરવાના બે માર્ગ: એક પરોક્ષ ભક્તિ ને બીજી પ્રત્યક્ષ ભક્તિ. પરોક્ષ ભક્તિમાં વૃત્તિઓ ભગવાનમાં તન્મયાકાર ના રહે. પ્રત્યક્ષ ભક્તિમાં વૃત્તિઓ ભગવાનમાં નિરંતર તન્મયાકાર રહે. પ્રત્યક્ષ ભક્તિ, પ્રત્યક્ષ ભગવાનની ઓળખાણ થયા વગર ના થાય. - દાદા ભગવાન

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#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

भज्याची आमटी

हा एक अत्यंत चविष्ट आणि खमंग प्रकार जो भात भाकरी किंवा पोळी कशा सोबतही चांगला लागतो

भज्याची आमटी म्हंटले की कॉलेज चे दिवस आठवतात
या आमटीची ही चवीष्ट आठवण सांगितल्या खेरीज ही कृती पुरी होत नाहीं 🙂

माझ्या मैत्रिणीची आई ही आमटी अतिशय चवदार करीत असे

ज्या दिवशी मैत्रीणीकडे या आमटीचा बेत असे
त्या दिवशी सकाळी ती आमच्या खास ग्रूप मधील आम्हा दोघी
मैत्रीणीना सांगत असे ..
आज दुपारी आपण तिघी एकत्र माझ्याकडे जेवायचे आहे बर का..
आज आई भज्याची आमटी करणार आहे🙂🙂

साधारण महिन्यातून दोन वेळ तरी तिच्याकडे हा बेत असेच..
कारण तिच्या घरच्या सर्वानाच ही आमटी अवडत असे..

मैत्रिणीने असे सांगितल्या क्षणा पासून कॉलेजमधले आमच चित्त उडून जात असे 😀😀

पोटात एकदम भुकेने खड्डा पडत असे😀
कधी एकदा हे कॉलेज चे पिरियड संपतील असे होत असे..😀

यथावकाश कॉलेज सुटल्यावर लगबगीने आम्ही तिच्या घरी जायचो
तिच्या घराच्या गल्लीत शिरले की आमच्या नाकात कांदा भज्यांचा आणि खमंग आमटीचा वास शिरत असे 😋

एव्हाना साडे अकरा बारा वाजलेले असत
आमची जेवायची वेळ झालेली असे.,.

त्यात हा खमंग भज्याची आमटी चा बेत😋😋

ताबडतोब आम्ही हात पाय घुवून तिच्या स्वयंपाक घरात शिरत असु
चुलीपाशी (तसा घरी गॅस होता पण भाकरी नेहेमीच चुलीवर होत) तीची आई भाकरी थापत बसलेली असे
आम्हाला बघताच सुहास्य मुद्रेने, प्रेमाने ती म्हणायची ,
"या ग पोरीनो भुकेजला असाल ना..
(आम्ही तर कायम भुकेले असायचो च 😀)
चला पटपट पाट पाणी घेउन बसा बर जेवायला "

लगेच आम्ही पाट, पाणी ताटे ,वाट्या ,लोणच्याची बरणी ,तूप वगैरे सरंजाम गोळा करून चुलीच्या समोर गोलाकार बसायचो

त्यांच्या स्वयंपाकघरात थोडा अंधार असायचा
दुपारच्या वेळी खिडकीतुन येणाऱ्या मंद प्रकाशात आणि चुलीच्या उजेडात
दोन्ही हातानी परातीत भाकरी थापत असलेल्या तिच्या आईचा सावळा सोज्वळ चेहरा चमकत असायचा❤️
जोरात भाकरी थापत असताना त्या आवाजाच्या तालावर त्यांच्या केसांचा भरगच्च अंबाडा हलका झोके घेत असायचा ....

जवळच एका वेताच्या टोपलीत चार पाच तयार भाकरीची चळत असे
शेजारच्या चुलीवर मोठया पातेल्यात आकर्षक रंगाची चाविष्ट आमटी उकळत असायची ..
वासाने भूक आणखी खवळायची 😋

एका मोठ्या परातीत कांद्याची छोटी छोटी भजी तयार असत
शेजारीच मोठे गरम भाताचे तपेले असे
(तिच्या घरात बरीच माणसे होती त्यामुळे तिच्या आईला नेहेमीच भरपुर स्वयंपाक करायला लागे)

आमच्या वाटीत गरम आमटी वाढून ती चार चार भजी आमच्या ताटात वाढत असे
"ही घ्या गरम भाकरी ...
असे म्हणत ती आम्हाला भाकरी वाढत असे
गरम टमटमीत फुगलेली भाकरी तव्यावरून काढताच ती उलथन्याने त्याचे चार चतकोर करीत असे
आणि पानात वाढत असे
( भाकरीचे कोर हाताने न करता उलथन्याने करायची तिची ही सवय बघून बघून मला पण लागलीय 🙂)

सोबत एक एक पापड पण भाजुन देत असे

भाकरीचा कोर उघडुन आम्ही त्यात तूप घालून घेत असू
वाढलेल्या आमटीत दोन भजी टाकून
जेवणावर तुटून पडत असू..
ती भाकरी पातळ पण आकाराने खुप मोठी असे
आम्ही तशा अठरा एकोणीस वयाच्या मुली ....
आमच्यासाठी एक भाकरी, चार भजी पापड ,लोणचे इतके भरपुर होत असे..

पोट गच्च भरत असे.

तिची आई भाकरी करता करता... "अजुन वाढू का ग अर्धी.."
असे हसून म्हणत असे..
तेंव्हा आम्ही
"नको नको काकू पोट गच्च भरले आहे" असे म्हणत असू
तरीही ती आम्हाला भात वाढत असे

"पोरीनो थोडा थोडा भात खाऊनच उठायचे बर का.."
असा आग्रह करीत असे..🙂🙂

"काकू आमटी नेहेमी प्रमाणेच फर्मास झाली होती बर का..."फार आवडली...
असे आम्ही म्हणताच
"काय ग तुम्ही पोरी एवढ एवढस जेवता...
आमटी आवडली ना..पुन्हा केली की यायचं बर का.."
असे ती आमच्याकडे बघत
कौतुकाने म्हणत असे❤️

अशा वेळीं तिच्या हसऱ्या समाधानी चेहऱ्याकडे बघताना आम्हाला साक्षात अन्नपुर्णा देवीच आमच्याशी बोलत असल्याचा भास होत असे🙏

चवदार स्वयंपाकामुळे मन आणि पोट तृप्त असे 😋

आता पोट भरल्याने डोळ्यावर एक झापड यायला लागलेली असे ...
पटापट ताटे,भांडी,खरकटे उचलून आम्ही वरच्या खोलीचा रस्ता धरत असू

एकमेकींशी बोलता बोलता वरच्या खोलीत सतरंजीवर लोळताना आमचा कधी डोळा लागला कळत नसे

तीन चार वाजल्या नंतर आमचे डोळे उघडल्यावर..
आमची मैत्रीण आमच्यासाठी चहा टाकत असे

या वेळी घरच्या सगळ्यांचा जेवणाचा राम रगाडा आवरून चार घास खाऊन नुकताच तिच्या आईचा डोळा लागलेला असे
त्या माऊलीचा बाहेरून निरोप घेऊन
चहा घेउन मग आमचे आमच्या घराकडे प्रस्थान होत असे

अशी ही भज्याची आमटी किती वेळा केली तरी तिच्या आईची आठवण होतेच❤️

अत्यंत साध्या पद्धतीने केलेली ती आमटी किती चवदार लागत असे..
आणि आपण किती निगुतीने केली तरी ती अवीट चव मात्र आणू शकत नाही
हे सुध्दा जाणवते ..🙂

नेहेमी मैत्रीणीकडे खाऊन आणि बघुन ही आमटी मी अगदी तीची आई जशी करीत असे त्याच साध्या सोप्या पद्धतीने करते

साहित्य

भज्या साठी
चार कांदे
डाळीचे पीठ
तिखट हळद मीठ
भरड कुटलेले धने
कोथिंबीर

आमटी साठी
एक वाटी शिजवलेली तुर डाळ
तिखट
मिठ
काळा मसाला
कढीलिंब
गुळ
चींच
ओले खोबरे कोथिंबीर
प्रथम मध्यम आकाराचा कांदा (फोटोत दाखवला आहे) चिरुन घेणे
कांद्याला मीठ हळद तिखट चोळून दहा मिनिटे ठेवणे
कांद्याला पाणी सुटते
मग त्यात धने पुड कोथिंबीर घालून
डाळीचे पीठ घालावे
फार घट्ट अथवा फार पातळ पीठ नको
याची छोटी भजी तळून घ्यावी

आता नेहेमीप्रमाणे शिजवलेली तूर डाळ घोटून
मोहरी हिंग कढीलिंब फोडणी करून त्यात घालावी
काळा मसाला,तिखट, मीठ, गुळ चींच घालून
आमटी करावी
उकळू लागली की
थोडे खोबरे कोथींबीर घालावी
खाताना वाटीत ही दोन भजी घालून
वर गरम आमटी घालावी व खावी

भजी आमटीत सोडायची असली तर आमटी थोडी पातळ असावी ..
आमटी गॅस वरून खाली उतरवून मग त्यात भजी सोडावी व लगेच खायला घ्यावी

ही आमटी आपापल्या आवडीप्रमाणे वाटण लावून किंवा आपल्या आवडीच्या प्रकाराने सुध्दा करता येते

पण जेवढी आमटी साधी तेवढी त्यात या कांदा भजीची चव उतरेल�

jayvrishaligmailcom

जुबाँ से हर कोई कह देता हैं।
लेकिन अमल नहीं करता
साफ़ सुथरे पानी में यारों
कभी कमल नहीं खिलता

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313