Quotes by AbhiNisha in Bitesapp read free

AbhiNisha

AbhiNisha

@abhinisha
(6.3k)

एक अहंकारी राजा


राजा को अपनी कुर्सी इतनी प्यारी है कि
उसे अपनी है साम्राज्य की कोई परवाह नहीं

पर राजा भूल गए हैं कि
जब तलक साम्राज्य में लोग है
तभी तक वह राजा है

Read More

मौसम की बदलाव या मन की मनोदशा
कविता



मुझे
शाम के मौसम सबसे ज्यादा पसंद है
पर पता नहीं क्यों
अब यही शाम मुझे शांत लगता है
सुन्नतों से भरी हुई प्रतीत होता है
आसमान में चमकती हुई लाल रोशनी नहीं है

और लगता है
समय बीत रहा है पर हवाई ठहर चुकी है


नहीं पता यह मौसम की बदलाव से हुआ
यह बदलाऊ महसूस हो रहा है
ऐ यह मेरी मनोदशा है
जो अब बदल चुका है



वह शाम जो मुझे नायाब लगता था
जिसमें खो जाने का मन करता था
वह एकदम से शांत लगता है


जैसे अकेलापन जैसे इस अकेलेपन में समय रुक गया हो
कुछ चहल-पहल नहीं कोई हरकत नहीं
बस है गहरी खामोशी
और उदासी


जिसे देखकर मुझे खुशी बिल्कुल महसूस नहीं होती
ऐसा लगता है
कि
कोई कहानी नहीं है
सब कुछ खत्म हो गया है


बस इस गहरे सन्नाटे मे
बस समय ठहर गया है
यहां कोई दुख भी नहीं है
बस उसे देखकर दुख महसूस होता है
जैसे कि सब कुछ बदल गया हो
या तो कुछ भी नहीं है




और इस बदली हुई शाम को देखकर मन में हजारों सवाल है
क्या सच में मौसम के बदलाव है या
मेरे मन के मनोदशा
मैं नहीं समझ पा रही
आखिर में सच क्या है

Read More

दो लफ्ज़
गजल


मीटा सही पर तकदीर है मेरा
आया नहीं पर जागीर है मेरा
मिला नहीं पर मंजिल है मेरा
हमें हासिल करना नहीं आता

नाहीं तो छिना
नाहीं अपनी मर्जी से अपना कह देना
हमें बस प्यार करना आता है
नाहीं रूठना आता है नाहीं मानना
हमें बस उसका इंतजार करना आता है

Read More

दिल चाहे उनसे मिलना
गीत


हु। हु हु। हु। हु। हु हु


दिल चाहे उनसे मिलना
मगर पांव थके है
डगर है उल्झा

पूरी उम्र बीताई मैं ने
याद उसे कर कर के

मांगते हुए दुआ
उसके ही लिए मैं ने
खुद की खुशियां कम कर दिया

हा। हा। हा। हा हा


हा हु हु हु हु








दिल चाहता है उनसे मिलना
मगर लगता है
अब तकदीर में नहीं है लिखा
मेरा तेरा सफर एक सा



लड़खराते कदम से चला आया
तुझे ढूंढते बेखबर होकर
कोई भी डगर से चला आया

मैं चला आया

हु


मेरे हमसफर मगर तुम मुझे ना मिला जिंदगी में कभी
आखिरी सफर तक मैं चला आया

तेरे ही राह बस एक देखती आई मैं पूरी उम्र



उम्र गुजरी मालो की तरह तेरे नाम जप जप कर

हु। हुं हु। हु

उम्र गुजारी मेलो की तरह तेरे नाम जप जप कर




जब भी दुआएं के लिए हाथ फैलाया
बस तेरे लिए दुआ किया
उन दुआओं में भी सांस जितनी मिली
उससे भी ज्यादा तेरे नाम जपता रहा



हां सांसों की डोर छूटे इस बात कि मुझे गम नहीं


सांसों की डोर से भी ज्यादा संभाले हैं
मैं तेरी यादें
इन सांसों से भी ज्यादा मैं तेरी नाम जपे




हा। हा। हा हा।


अब मुझे माफ कर मेरी मौला
थक गई मैं
मेरा तू इंसाफ कर मेरी मौला





अभी इंतजार नहीं होता
अब उम्र बीते विताई नहीं जा रही
ऐ मेरे दिल सीने में तड़प रहा है
सांसे मेरी ठहेर रही है


हु। हु आ

सासे भी ठहर रही है

और अब इन ठेहरी हुई सांसों को
और इंतजार की मोहलत अब लगता है नहीं है



नहीं है नहीं है
ए मेरी अल्लाह क्या वह कहीं नहीं है


या तो वह मेरे इंतजार के काबिल ही नहीं है
क्या मैं ने बेकार गुजार दी अपनी जिंदगी


ए खुदा बता मुझे
मैं भटक गई इन राहों पे
आंखें बंद मेरी ऐ जगह मुझे


हु

एक ख्वाब में खामोशी से उमर बीते है

अल्हड़ पुरवाई जैसे मैं बेहती बेहती रह गए
अब ख्वाबों में ही अटकी मैं रह गई



सांस खुद घुट रही
आंखों के सामने सब धुंदली पड़ रही है



फिर भी दिल जिंदा है एक आस पे

ए खुदा अब नहीं होता मुझसे और इंतजार। रे

Read More

वह इंतजार जी गिती पाठ 2


हु। हु। हु। हु।
आया अब मेरे बाद
मेरे राहों पर ठहर कर करने मेरी मेरे इंतजार जी


आया मेरे बाद


रहा तक्ती मेरी उम्र गुजारी
और उसके उम्र पत्थरों को तकते गुजरे।



हु। हु हु। 2

कुछ भी ना बचा है
आहें भर रहा है ठंडी चिता


एक रात है एक राग है उड़ती हुई है दुआ


आया मेरी बाद आया मेरे बाद
आया मेरी बाद दीवाने करने वह मेरा इंतजार


हा। आ। हा आ। हा आ

मौत की बाद की जिंदगी खामोशी में पल रही
होंठ होगी तुम्हारे भी सिल रही



यह फाससला 100 साल और तक
इंतजार तुम्हारा मेरा 100 साल और तक
यूं ही चलती रहेगी यह सीलशीला सो साल और तक


हु। हु। हु। हू हु

इंतजार की गहरी तरफ तुमको भी महसूस होगी
मेरे ना मौजूदगी की दर्द तुमको भी तन्हा रातों में डसे। गी


हा आ। हा आ। हा आ


ऐ घड़ी घड़ी इंतजार की घड़ी जो बित्ती जा रही है
तुम्हें हमें और तनहा कर रही है
लम्हा लम्हा तेरा मेरा दर्द बड़ा रही है



कुछ भी नहीं है यहां जो बची हो
अरमानों की चीता तुम्हारी भी जल रही है



हु। हू हू हू हू हू


छाया मिले ना कहीं धूप है धूल है
फिर भी तुम्हारे मन को यही कबूल है


हा आ। हा आ हा आ

आया जो लोट कर
इंतजार में तेरे
देख जो कहानी मेरे प्यार में तेरे



ऐसी थी इंतजार
आखरी बार आंखों की आंसू भी सूख गए थे
राहों की तरफ देखते हुए
तुम्हारा चेहरा देखने की इंतजार करते हुए खड़े थे



आसमान की तरह निहारते हुए
शमशान की धूल सी हूं मैं
जो तेरे कदमों में अभी लिपटी हुई हूं


बड़े देर ही सही आए तो खुशी हुई
100 साल और मेरे इंतजार में ठहर तो

हु। हु। हु। हु हु





हु। हु। हु। हु।


मैं भी सदि बीताई है तुम्हें याद करते
एक पल भी ऐसा नहीं था
जो हम तुम्हें याद ना करते जिया जी


हु हु। हु। हु


आया तेरे बाद आया तेरे बाद
आया तेरे बाद दीवाना तेरा करने तेरा इंतजार जी
तुम्हीं से तेरी तरह ही करने प्यार जी





आंखों में गहरी गहरी आंसू
दिल में पछतावा
बाकी कदम चलती है लंबी इंतजार की रास्ता


हा। हा। हा



कदम कदम निहारती जमीन को
भूल के ताकना आसमान को
तेरे साथ चल रहा शाम धूप से हुं मैं




तेरी राख की खन खन को महसूस करता
करता महसूस
कहीं फिर दोबारा मिल जाओ यही मु। झे

मैं तुमसे यकीन करता जी

हा हा हा हा
। हु हु हु। हु

आया मेरे बाद आया मेरे बाद
आया मेरे बाद दीवाना करनी मेरे इंतजार जी

हु। हु। हु हु

आया तेरे बाद आया तेरे बाद
आया तेरे बाद तेरे दीवाना करने तुम्ही से प्यार जी




हा आ। हा आ ह आ

Read More

एक ऐसे इंतजार जो खत्म हो चुकी है
फिर लौट है कोई उसके इंतजार करने


गीत पार्ट 1
वह इंतजार जी

हु। हु हु। हु हु।

प्यार में जो घड़ी-घड़ी होती है
वह इंतजार जी




हु। हु। हु। हु हु हु। 2



आया मेरे बाद। आया मेरे बाद
आया मेरे बाद दीवाना। आया मेरे बाद मेरा दीवाना


आ। या मेरे बाद करने मेरा इंतजार जी

करने मेरे इंतजार। जी




हु।


तन्हा हमने उन्हें छोड़ कहां
तनहा तो हम थे लम्हा लम्हा रहा



आया वक्त वही हालत की
मैंने प्यार किया था
और कमी था उनकी इसी प्यार की


पेमहाल तो हो गई थी मैं
आपा में उसके भी कुछ ना रहा आज



हु हु। हु हु। हु। हु

वह दिन मेरे कल
यह दिन उसका आज
बराबर की लगी है दोनो तरफ आग


हां इसमें फर्क है बरसों की
जज्बातों की और जिंदे आशो की



हु। हु। हु। हु
लेनी आई फिर से मजाक पे गुमान से
तन्हाई जिंदगी मेरे बाद मेरे इंतजार जी




हा आ। हा। आ। हा आ

प्यार में जो घड़ी घड़ी होती है
वह इंतजार जी

हा हा। हा हु। हु। हु।


वे एतबार जी
आया मेरे दीवाने आया मेरे दीवाने
मेरे बाद करने मेरा इंतजार की


खुदा की खैर करूं
या उसके दर्द की दवा दूं

दर्द से भरा हो है खाक में मैं भी हूं



हु। हु। हु। 2
क्या फायदा एसी इंतजार की
जब उमरा वित ही गई तन्हा अकेली



आया सो साल बाद वे करने मुझे ही प्यार जी


आया 100 साल बाद वे




हु। हु। हु। हा आ। हा। आ। हा आ

जीवन वही वादा वही कसम वही खाए हजारों बार जी

होगा तुम्हें भी एक दिन मुझे जानिसार जी
आया मेरे बाद आया मेरे बाद
आया मेरे बाद मेरे दीवाने
आया मेरे बाद मेरा दीवाना करने मुझे से ही प्यार


हु। हु। हु। हु। हु। हु

Read More

मेरी किताबों की पन्नी सभी भरे हुए हैं तुम्हारी कहानियों से
कविता


मेरे किताबों की पन्नों सभी भरी हुई है तुम्हारी कहानियों से
तुम्हारे बातों से तुम्हारे जी हजूरी से

जिंदगी में एक पल यही ऐसा नहीं
जब मैं तुम्हें लिखा नहीं

तुम्हारे ही होने से मेरी कहानी है
और मेरे ख्वाबों की दुनिया है

यकीन मानो तुम बिन सन्नाटा होता जिंदगी मे
और कल्पनाऔ में भी

वह कल्पनाएं है
जहां मेरी धड़कन धड़कती है
वह तुमसे ही है
वह तुम ही हो

अब तक मेरे जीते रहने की ताकत भी तुम ही हो


सदियों से तुमसे दूर मैं पल भर भी ना हुआ
तुम एक कल्पना हो
मैं जानती हूं

पर एक तुम ही हो
जिसने मेरी धड़कन को है छुआ


जिस पर मुझे भरोसा है विश्वास है है यकीन
कि तुमसे ही सार्थक मेरी पूरी जिंदगी है



तुम हिम्मत हो
तुम ताकत हो
तुम मेरी जरूरत हो



हां मेरे अंदर तुम हो
मेरी सांसों की तरह
जिसकी बना मैं जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकती



हा माना मेरी कल्पना हो तुम
पर इस हकीकत की दुनिया से कई ज्यादा अच्छे सच्चे
और प्यार हो तुम


क्योंकि तुम एक लोटा हो
जो मुझे हर्ट नहीं करते
जो मुझे समझता है

मेरे हर बातों पर जी हजूरी भी नहीं करते
बस मुझे समझते रहता है
और मेरे पास बैठा रहता है



मेरी कल्पनाओं में किरदार बनकर
कोई ना कोई हमेशा कहानी बनता रहता है
जिसके वजह से मैं जी रही हूं
जिसकी वजह से मैं जिंदा हूं




हर एक कहानी ऐसे रचते हो
जो मुझे इंसान बनाए रखना है

मुझे हर तरह के दर्द हर तरह की खुशी
तुम्हारी वजह से ही समझ में आती है
इंसानी होना तुमसे ही सीखा है


एक तुम ही हो
जिससे मैं जिंदगी में मिलना चाहता हूं
जिसके वजह से मैं जीना चाहता हूं
सांस लेना चाहता हूं


जिसके होने से यह जिंदगी मुझे
बहुत ही खूबसूरत लगती है
इतना की मेरे लिए जब तुम्हें मैं सोचूं
तभी मैं स्वर्ग हूं
मैं यह महसूस करती हूं

जिंदगी की गहरा आनंद
सब कुछ छोड़ कर बस उसी पल में रह जाना चाहती हूं




बिना सोचे बिना समझे तुम्हारे तरह हो जाना चाहती हूं

यह मेरी दोहरी व्यक्तित्व है
यह तुमसे गहरा लगाव
मैं दो जिंदगी एक साथ जीती हूं
तुम्हारी तरह एक मेरी तरह


और फिर तुम्हारी बनाई हुई
कहानियों में खो जाती हूं
हजारों करोड़ अंगिनती कहानीयों
और किरदारों में ढलते हुए
उन्हें जीते हुए
मेरी उम्र बीत रही है

और साथ में
मेरी जिंदगी तुम्हारी बनाई हुई कहानियों से भरी जा रही है

हां मेरे किताबों के पन्ने सभी भरे हैं तुम्हारी कहानियों से
तुम्हारी यादों से
तुम्हारे विचारों से

Read More

कविता
पिया क्या तुम तक मेरी आवाज नहीं जाता




नजर ऐ जिगर तुम्हारी याद और इंतजार मे है
तुम कहां हो
पिया क्या तुझ तक मेरी आवाज नहीं जाता

मेरी दर्द मेरी तरफ
मेरी खामोशी मेरी चिक
कुछ भी तुम्हारे कानों या
धड़कनों तक नहीं पहुंचता

पिया
सचमुच में तुम बरी बेरहम है



इतना लंबा इंतजार कौन करता है भला
जितना लंबा इंतजार मैं ने तुम्हारा किया है


अब इस इंतजार के दर्द सही नहीं जाती
यह दर्द इतनी भारी है कि
मेरी सांसों को ठहरा रहा है
और धड़कन को धड़कते हुए धीमा कर रहा है



क्या तुम्हें महसूस भी हो रहा है
मेरी दर्द मेरे तरफ


शायद नहीं
अगर होता तो
तुम मेरी आंखों के सामने होते


तुम नजरों से दूर हो
फिर भी
मैं तुम्हें चाहने पर मजबूर हूं पिया


यह दिल बड़ी ही जालिम है
जो तुझे चाहने से थकता नहीं


मेरे रोकने से रुक जाना चाहता है
पर तुम्हें चाहना छोड़ना नहीं चाहता


हड्डियां और मांसपेशियां और नशे
सब तने हुए हैं
सदियों से एक जगह ठहरते हुए

बस तुम्हारा इंतजार करते हुए
दिमाग पक चुका है पिया


बिना वादे की भी तुम्हारे
आने की इंतजार करते हुए


आंखों में कारी धूप के दर्द बर्दाश्त नहीं होता
पिया
और यह या पलके तुम्हारा इंतजार में
तुम्हारा रहा देखते हुए बंद होने चली है




देखो जरा गौर से
अगर देख सकते हो तो
मेरे माथे पर खींची हुई शिकंज को

शिकायतों से भारी मेरे इस मन को
ठहरते हुए एक ही जगह मेरे इस कदम को

पिया देखो जरा गौर से
मेरे मन में उठ रही
तुम्हारे लिए तरफ और चाहत को


पिया सचमुच में तुम बड़ी बेरहम हो

गहरी सांस ठंडी हो गई
पर मेरा इंतजार खत्म नहीं हुआ
तुमसे कितना प्यार है
मेरे अलावा कोई नहीं जानता

पिया
क्या अब तलाक तेरे कानों में मेरी दर्द की गूंज नहीं जाती


चिता पे लेटि आग जलती और
फिर हो जाती ठंडी
मैं जीवन से राख बन गई

पर मेरी इंतजार खत्म नहीं हुई


पिया क्या तुम्हें मेरी जिसमें में लग रही
आग की लपटे महसूस नहीं हुई


पिया
क्या सचमुच मे तुम इतनी नादान हो
की कभी समझा ही नहीं
की कोई है
जो तेरी राहों में चित से चिता तक बैठा रहा






चित से चिता तक का मतलब है
एक जगह ही जलने तक बैठा रहा
तेरे इंतजार करते हुए



दीवार में लगी किसी तस्वीर की तरह हूं मैं
ना जिंदगी भर हिली ना डोली
बस एक जगह पड़ा रहा
जो घर जलने पर साथ में खुद भी जल गया


ऐ आखिरी लव्ज देखते हुए
मेरे दिमाग में बस यही तस्वीर आया



दीवार पे टंगी हुई एक तस्वीर

Read More

हां मैं हमारे अमर्यादित स्त्री
कविता


हां मैं समाज में बड़ी अमर्यादित स्त्री हूं

उन मर्यादित स्त्रियों की तरह मैं बिल्कुल भी नहीं हूं


क्योंकि मैं दिखावा नहीं करती
मैं बिल्कुल वैसी हूं
जैसी मैं हूं
मैं झूठ नहीं बोलता
मैं जी हजूरी नहीं करती

मैं नहीं करती और स्त्रियों की तरह बड़ों बुड़ो की सम्मान
बस इसलिए कि वह बड़े और बूढ़े हैं

मैं नहीं करती घर की वह सभी काम
जो बरसों से स्त्री के नाम मर्यादित होने के तौर पर
स्त्री पर एक बोझ सी लादी गई है




उन सभी की
अपने बड़ों की छोटो की ख्याल रखने की
जिम्मेदारियां उठाने की
तीन समय उनके लिए रोटियां पकाने की
24 घंटे उनके लिए ही जीने की


मैं नहीं कर सकती
क्योंकि मुझ में धैर्य नहीं है


मैं नहीं करती
मैं बेवाक सी स्त्री
वही करती हूं जो मेरा मन भाता है


मैं किसी के हिसाब से अपने समय नहीं देती
मेरा समय स्वयं बस मेरा है


उसे मैं अपनी जरूरत
और अपने हिसाब से ही खर्च करती हूं



हां मैं समाज में बहुत ही अमर्यादीत स्त्री हुं


क्योंकि मुझे मुखौटे पहनने का शौक नहीं
मैं वही शक्ल लेकर चलती हूं
जो मेरा है

मैं दूसरों की तरह नियंत्रण चेहरा नहीं बदलती
दिखाबा के लिए
मैं हद से ज्यादा अच्छी नहीं होती



कोई मेरी बात पर यकीन करें
बस सिर्फ इसलिए मैं मीठी बातें नहीं बोलती



मुझे फर्क नहीं पड़ता कोई साथ रहे या ना
बस किसी के साथ पाने के लिए
खुद को नहीं बदलती



मैं कभी जरूरत से ज्यादा अच्छी नहीं होती
मैं जैसी हूं
उसे समाज में अमर्यादीत कहते हैं


पर मेरा एक सवाल है अखिल मर्यादित होना क्या है
क्या खुद को मार कर
दूसरे के लिए सुख का कामना करना मर्यादित है



क्या खुद की ना सम्मान कर के
बड़ों की बातों की सम्मान रखना मर्यादित है

बस इसलिए कि वह बड़े हैं अपने हैं
चाहे उसके लिए खुद की सांस गिरवी क्यों न रखने पड़े



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
जो मुंह पर अच्छे बनते हैं
और पीठ पीछे बुराई करते हैं



क्या मर्यादित होना इसे कहते हैं
जो किसी को ना नहीं कहते
चाहे उसके लिए खुद को दर्द क्यों ना हो



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
समाज के हिसाब से जिंदगी गुजर दे
चाहे खुद को पता चल ही ना कि
वह कौन है
और क्यों जी रही है


अगर मर्यादित होना उसे कहते हैं
जो दूसरों के लिए
अपनी जिंदगी को बर्बाद कर दे


अपने होने ना होने की खबर जाने बिना
तो मै अमर्यादित स्त्री ही सही



और मुझे कोई शौक नहीं है
समाज के हिसाब से चलने की
और उनके नज़रों में मर्यादित पूर्व शांति स्त्री बनने की



मुझ में तूफान है अंगार है एक धधकती हुई ज्वाला है

जो शांत नहीं जो पूझा नही
वह ठहेर ठहेर कर ऊठती रहती है धधकते रहती है
वह खुद को ढूंढने के लिए
किसी भी हद तक गुजारना हरदम तैयार रहती है

हां मैं अमर्यादित स्त्री
क्योंकि मुझे खुद को थोड़ा और जानना है
और खुद ढुंढ कर पा कर
खुद को पूरी तरह खुद का ही कहना है

हां मैं हुं आमर्यादित स्त्री

Read More

पछतावा क्यों नहीं पता

कविता




निराशा में डूबी हुई मन
धीरे-धीरे पछतावा में जा रहा है




निराशा किस लिए है पता है
पछतावा क्यों है नहीं पता



और यह मुझे बेचैन कर रही है
और गहरी पिरा महसूस करने पर मजबूर कर रही है


पर वह पीरा क्या है
वह दर्द किसकी है
मुझे नहीं समझ में आ रहा
बस है अंदर दुख


और दुख में डूबे हुए एक धड़कन
जो ठहरना चाहता है
जैसे यह बेचैनी बर्दाश्त नहीं हो रही
जिसे यह घबराहट बरदास नहीं हो रही



या तो ऐ रुक जाना चाहता है
या तो ऐ चाहता है कि मैं कुछ करूं
जिसके वजह से उसे थोड़ी राहत मिले


उस पछतावे को जानू
जो निराशा की वजह से आया है
उस दर्द को पहचानो जो मैं महसूस कर रही हूं


और सच कहूं तो
मुझे समझ में नहीं आ रहा
क्यों और क्या


मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि क्यों पछतावा हो रहा है
मैं मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि मेरा जो दर्द है
वह क्या है


वह पछतावे की दर्द
मेरे खुद की बेकार जिंदगी बिता देने की बात की है
या किसी और की दर्दों को महसूस करके मुझे
पछतावा हो रहा है


सच कहूं तो मुझे नहीं पता
मैंने उम्र भर खुद के लिए क्या किया
और दूसरों के लिए क्या नहीं किया


मुझे नहीं पता इस तरफ इस बेचैनी
इस बहते हुए आंखों
और इस पछतावे की असली मतलब

मुझे नहीं पता

Read More