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AbhiNisha

AbhiNisha

@abhinisha
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गीत
अगर आजाद मन तुम्हारा है तो


आजादी के पीछे भागे
दुनिया उसका कुछ ना लगे
वह खो गए खुद में बावड़ी
नादान मन का
रास्ता लंबा कंकरो भरी
उड़ने की मन में चाहा बरी है


उड़ान भर्ती गिरती पड़ती
फिर भी ना ठहेरती ना हीं संभालती



बस जिद्द ऊड़ जाने की
उसे पागल कर रही


कैसे समझाऊं उस नादान लड़की को
उसके बेकरारी बेचैनी वह भी ना जाने

कैसे बताऊं मैं उसे
वह जानती है या नही
जिस रोग की दवाना नही
वह रोग लगाए बैठी है वह


आजादी नींद छीन लेती
आजाद कि रहा शगुन नहीं देती

आजादी मांगती है लहू
और जिद्द से भरी परिश्रम तेरी
जो तू करती रही
दुनिया से पहले खुद से ही लड़ती रही


आजादी को ढूंढते फिरे
नादान मन भागते फिरे


इस उम्मीद में कड़ी परिश्रम करते फिरे
उसके बाजू में कोई पंख आ कर लग जाए कहीं से
और वो उड़ जाए झट से



नादान मन का
आसमा दूर कहीं
आसमा देख देख के
जो उड़ने की ख्वाहिश पनपे मन में
यह ख्वाहिश उसे पागल करती है
उसे और उसके ही जिद्दो जहेद घायल करती है



इस पागलपन में बिखरी हुई मन में भटक रहना कोई
कोई किनारा नहीं
यह दुनिया विशाल समुद्र डूबता हुआ
वह अपनी मन की ही अंदर


जूज जुज कर उठ खड़ी होती है
उसके दिलों के तर्पण होठों से आह भरती है


कोई बचा ले कोई संभाले यह उम्मीद नहीं
उसके बाजू में कोई पंख निकल आए
बस यही दुआ
मैं भी करता उस पागल लड़की के लिए
यही दुआ






पंक्तियां

दुआ भी तभी तो कबूल हो
जब खुद हो

काश दुआ कबूल हो
इस जहां में कोई तेरे लिए भी खुदा हो




और
अगर ना हो तो तू खुद की खुद खुदा हो
मन में उड़ने की चाहत है
आजाद ख्याली मन है
और दर्दे से भरी तुम हो
और कांच और पत्थर कांटों से भरी दुनिया
तुम्हें और चोट लगेगी
तुम्हारी निकलते हुए पंखें
निकलने से पहले ही जख्मी कर दिया जाएगा




पर यही दुनिया कहते हैं
जिस की हर रोम रोम आजादी में रम गया है
तो
दुनिया की कौन से जंजीरें तुम्हें रोक सकता है


निकलते हुए पंख जख्मी होने के बावजूद भी
निकाल आएंगे
और फिर एक दिन हरी भरी होकर
तुम्हारे बाजू को सहारा देंगे
और दौड़ते हुए तुम आसमान की ओर उड़ परोगी




तुम्हें यकीन करना होगा
यह आसमान तुम्हारा है तीनों जहां तुम्हारा है
अगर आजाद मन तुम्हारा है तो

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मैं लिखती हूं या खूबसूरतपंक्तियां
कविता




मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां

पानी के ऊपर टेरती लास
फुली हुई सड़ती लाश


वह भी बला की खूबसूरत होगी क्या
कल परसों से पहले
उसकी भी सिंगार की दीदार कोई करता होगा क्या
कल परसों से पहले



क्या है कोई इसका अपना
जो उसे प्यार करता है

कौन उसकी संग है आज
कौन पराया कौन उसे सही से जानता है


किसके दिल में वो इतनी करीब से थी
जो
कोई कई दिन लगातार उसके लिए रो सके

क्या कोई ऐसा है
जिसके मन में वह अभी भी भाता है
उतना ही सुंदर अभी उसे लगता है




मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां
जिंदगी से दूर की

एक बदबूदार लास की
जिनके करीब जाने से भी लोग तकराते हैं
उसे देखकर दूर भाग जाते हैं


इतना बदबू आखिर किसको बरदाश्त हों
बस कुछ लोग हैं
जो उसके करीब आते हैं

उससे पानी से निकाल बाहर ले जाते हैं
एक लंबी प्रोसीजर के लिए
सरे गले लास्ट मे मोहित होने के लिए कुछ भी नहीं
बस वह सव अपना काम पूरा करते हैं



मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां
पानी में परे एक शरी गली इलाज की


कौन है उसके अपने ढूंढने के लिए
उसकी मौत के दिन और तारीख जाने के लिए
मौत की वजह जाने के लिए
उसके शरीर की फिर से कई टुकड़े करने के लिए
या तो बस यूं ही ले जाकर कहीं और दफा देने के लिए



मैं लिखी हूं खूबसूरत पंक्तियां
खूबसूरती इंसान की जिंदगी ही होती है
और मौत के बाद जो आती है
वह घिन से भरी मन है

वो डर से भारी व्यक्तित्व है
जिंदा मन मोहकीं जा चुकी है
और उस जगह बचा है
वह बदबूदार पानी में तैरती हुई लास
वह खूबसूरती से भरी जिस्म के पंक्तियां बिल्कुल नहीं है




मैं लिखती हूं यह खूबसूरत पंक्तियां


लोग जो जताते हैं
जिस देखकर लुभाते हैं
मरने के बाद कुछ मिनट कुछ घंटे में ही
उस जिस्म की करीब जाने से तकराते से हैं



सांस छूट जाने के बाद कोई मूल्य नहीं
सब की झूठी चेहरा सामने आते हैं
वह रोते हुए चेहरा वह खिल खिलाकर हंसते हुए चेहरा
और एक लास जो दफनाया जाएंगे
या तो जलाए जाएंगे


जिंदगी झूठी शांन की एक शानदार चेहरा है
मौत एक ड्रामा सच की
आखिरी सफर और असलियत की आईना है




और यह शानदार कविता आपके लिए पेश है

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सचमुच में तुम बहुत ही बुरे हो


दर्द मुझे दे रहे हो
और सबको बचा रहे हो
तुम बहुत बुरे हो यार
और साथ में मुझे यह एहसास भी दिला रहे हो
कि मैं
सब कुछ नहीं संभाल शक्ति


भगवान अगर तुम सच में हो
तो
सचमुच में तुम बहुत ही बुरे हो यार
इतने बुरे जितने बुरे दुश्मन होते हैं




सचमुच में अगर तुम हो
तो
तुम मेरे सबसे बड़े दुश्मन हो
मेरे यार




मैं ना सब कुछ सही कर सकती हूं
ना खुद को बचा सकती हूं
ऐसी जिंदगी में
मैं बस खुद को दोस्त दे सकती हूं
तो
मैं तुम्हें क्या कहूं भगवान




सचमुच में मुझे नहीं लगता कि
तुम होते तो
इतना तकलीफ दुनिया में क्यों होता
कोई इस तरह क्यों रोता
किसी को तकलीफ इतनी ज्यादा क्यों होता





अगर तुम होते तो
सचमुच में सब कुछ अच्छा होता है
जिसने
किसी का कुछ नहीं बिगड़ा
उसे भी दर्द दर्द देते हो
तुम सचमुच में बुरे हो



बार-बार यह एहसांस दिलाते हो कि तुम
एक निराधार तिनका हो
जो चाह कर भी
खुद को नहीं बचा सकता
दूसरे को बचाने की तो दूर की बात है


सचमुच में तुम बहुत ही बुरा है
और निर्दय भी



हर जगह मातम है
हर दिल रो रहा है
सभी टूटे हुए हैं
फिर भी आश तेरा है
और तू है कि नजर उठा कर देखा भी नहीं
सचमुच में तुम बहुत ही बुरे हो






लोग झूठी आश लिए बैठे हैं
झूठी उम्मीद लगाए बैठे हैं

कोई सहारा नहीं
कोई किनारा नहीं

बस दूर-दूर तक आग का समुद्र है
धीरे-धीरे सभी उस आग मैं जल रहे हैं

कोई जिंदा तो
कोई चिता पर लेट कर

उम्मीद से हार चुका इंसान टूट कर मर जाता है


और खुद से हार चुका इंसान भगवान तुझे चाहता है
बस एक मौला तू ही सुन ले
और तू भी नहीं सुनता
तो फिर आखरी रास्ता क्या है
सचमुच में तुम बहुत ही बुरे हो यार

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कविता पार्ट 1
औरत के लिए


शायरी किताबों पर ही अच्छी लगती है
औरत के लिए
मर्द यह करते हैं मर्द वह करते हैं औरत के लिए
फिर औरत क्यों रोती है

रियल लाइफ में देखो
हर कविता बेकार लगती है
औरत के लिए

कोई चांद नहीं कोई शान नहीं
ना सुनहरा जहां
ना कोई सितारा ना खुद का कोई सूरज
बस खाली आसमान


लोग कहते हैं बंजर है
धरती यहां की
जहां औरत रहती है
बस खुद की



तुमने कहा
औरत के लिए मर्द क्या-क्या नहीं करते
पर हर औरत इतनी खुश नसीब नही होती
की कविता से बाहर
उस औरत की जिंदगी कोई मर्द आ कर
उसकी जिंदगी सवार दे


सच यह है कि औरत को मर्द नहीं चाहिए
बस चाहिए एक साथी जो उसके साथ चलते रहे
सच यह है कि
औरत को मर्दों से कुछ नहीं चाहिए
ना धन दौलत ना ना चांद सितारे
ना हीरा मोती
बस औरत को चाहिए उसे समझने वाला एक इंसान

उसे एक ऐसा इंसान चाहिए
जो औरत को कहे
तु औरत नहीं एक इंसान है
और आजादी पर जितना मेरा हक है
उतना ही तुम्हारा भी



औरत इसलिए नहीं खुश होती की
दुनिया की हर कविता
उसे पर लिखी जा रही है


औरत इसलिए रोती है
क्योंकि उस कविता में
औरत पूरी तरह से खुद की नहीं है
कभी कोई कविता औरत को पूरी तरह से शामिल किया ही नहीं है


औरत को कविता से बाहर वह मर्द चाहिए
जो औरत को उसे अपना कर दे
और कहे जी ले
अपनी जिंदगी मैं हूं ना
तेरे साथ

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मैं भी बच्चा बन जाना चाहती हूं
कविता



थक गई हूं बचपन से ही बड़ी होते होते
मैं भी बच्चा बनना चाहती हूं
किसी की बाहों में आकर जी भर रोना चाहती हूं


बचपन से ही समझदार होते होते खो दी है
मैंने अपनी बचपन को
अब उस बचपन को मैं मिस कर रही हूं
कोई आए और लौटा दे मेरे बचपन को


मैं फिर से बच्ची बन जाना चाहती हूं
बिना सोचे बिना परवाह जीना चाहती हूं

मैं बच्चों की तरह बिना सोचे कुछ भी करना चाहती हूं
क्यूरोसिटी में बचपन की हर चीज को छुना चाहती हुं
मैं फिर से बच्ची बन जाना चाहती हूं


थक गई हूं बड़ी बहन होते-होते
थक गई हूं सब कुछ संभालते संभालते
अब छोटी बहन बन जाना चाहती हूं
मैं प्यारी सी बच्ची बन जाना चाहती हूं


जिसके पिता उसे प्यार करें
जिसको मां उसे दुलार करें
मैं वही बच्ची बन जाना चाहती हूं
मुझे गले लगा लो कोई
मैं किसी के बाहों में सो जाना चाहते हैं





हमेशा यह कहकर मुझको ना रुको कि
मैं बड़ी हूं
और मुझे समझदार होना चाहिए
अपनी छोटे भाई बहन के ख्याल रखना चाहिए
और साथ में घर को भी संभालना चाहिए
छोटो की प्रेरणा और बड़ों के सामने आदर्शवादी

मत डालो मुझ पर बहुत सारे बोझ जवाने भर के
मेरे कंधे कमजोर है
इतने सारे भार उठा ना पाएंगे



कभी यह भी कह दो छोड़ दो प्रवाह
छोड़ दो किसी दिन तुम्हारे वजह से बिगड़े हुए कामों को
और बस तुम छोटी सी बच्ची बन जाओ
और वही करो जो एक छोटे बच्चे करती है


मैं सचमुच में थक गई हूं
सबको संभालते हुए
बड़ी और समझदार होने की पहचान लिए
मुझे गले लगाओ मैं सोना चाहती
जी भर के अब रोना चाहती हुं

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अब कोई फर्क नहीं पड़ता
कविता




अब अमीर बनने की ख्वाहिश नहीं
अब मुझे कुछ चाहिए ही नहीं
चाहे कोई कुछ भी कहे
मैं खुद से नहीं कहती
बहुत ज्यादा मेहनत करेंगे
और
बहुत सारे पैसा कमाएंगे
और उन्हें दिखा दूंगी कि मैं क्या हूं


अब कोई फर्क नहीं पड़ता
किसी की बातों से भी
मैं क्या हूं नहीं हूं
बस खुद में खत्म हो गई


समझने वाले कहते हैं
जिंदगी बहुत ही प्यारी है
मत मरने की चाह रखो
ऐसा तो होता ही रहता है
तुम्हें जीना चाहिए


और खुद को बेहतर बनाना चाहिए
इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता


लिखना गीते गाना अल्फाज कहानी कल्पना मेरी मेरी सांस है
और मुझे अब मेरे सांसों पर भी काम करने का मन नहीं करता



बस लगता है सारी ज़रूरतें खत्म हो चुकी है
अंदर के खालीपन के साथ मैं
अब सारी उम्मीद छोड़ चुकी हूं



अब जिंदगी बोझ लगती है
और हर दिन सांस लेना एक सजा

अब दुनिया देखने की ख्वाहिश नहीं है
अब दिल लगाने से चाहत नहीं है
अब कुछ भी नहीं है
ऐसा जिसे जरूरी समझ कर मैं जीते रहछ
और जिंदगी की बोझ ढोते रहु


I like you life
पर
I don't love you

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और कभी ना लोटु
कविता



रोते हुए को
रोने के लिए अपना कंधा दिया नहीं
और मरने के बाद बात पर
मेरे अपने कहते हैं
तुम्हारा कौन है
हमारे अलावा
हम ही हैं जो तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद कंधा देंगे

कभी-कभी हंसी आती है
मुझे इसबात पर

क्या सीरियसली
जब मैं साथ चाहती हूं
अपनों की तो वह मेरे साथ नहीं होतें
जब मैं चाहती हूं कि मैं रो रही हूं
और मुझे कंधा मिले अपनों की तो
वो अहंकार और नफरत में
अपने सर ऊंचा रखता है



जब मैं चाहती हूं मुझे प्यार मिले अपनों की तो
वो ऐ कहे कर दुतकार देता है
कि मैं इस लायकनहीं हूं



मरने के बाद मैं उसके आंसू को क्या करूं
मरने के बाद मैं उसके पछतावे की क्या करूं
मरने के बाद मैं उसे कंधे का क्या करूं
जो मुझे दिया जाएगा
मरने के बाद मेरे लिए रखी गई 13वीं का क्या करूं



मैं चाहूंगी जब मैं यहां मारूं तो
मेरे लिए कोई रोए ना
मुझे कोई कंधा नहीं दे
बस ले जाकर ऐसे ही दफना दे
कोई अंतिम संस्कार की विधि ना हो
कोई अंतिम विदाई नहीं
मेरे लिए कोई तेरहवीं भोज ना करें



जीते जी मैं उनके लिए कोई मान्य नहीं राखी
तो
मरने के बाद कोई दिखावा न करें



और सच तो यह है
मैं चाहूंगी मेरी आखिरी सांस में मैं यहां बिल्कुल ना रहु

एक ऐसे शांत जगह चली जाओ
जहां से मेरे शव तो क्या
चिखे भी वापस न लौटे

मैं चाहूंगी मैं आनंद सागर में समा जाऊं
और कभी ना लौटु
मरने के बाद
मेरे जिस्म की एक टुकड़ा भी नहीं
किसी को कभी मिले


और मैं नहीं चाहूंगी मेरे लिए कोई पूजा पाठ कर
मेरी आत्मा की शांति के लिए
कोई तेरीहवीं रखी जाए


अगर अंतिम संस्कार की पूजा रखना जरूरी है
आत्मा की शांति के लिए
तो
मैं चाहूंगी मैं उसे हाल में रहूं
की जीते जी मैं
अपनी अंतिम संस्कार की विधि खुद कर लु




किसी और पर अपनी मौत की अपनी शव की
भाड़ डालने से अच्छा है
मैं खुद की पिंडदान खुद कर लूं



मैं नहीं चाहती कि ऐसे लोग मेरे शव को भी छुए
जिसके पास रहकर
मुझे जीते जी प्यार और अपनापन महसूस ना है


सच यह है
मैं आंखों में सितारा भर के मरना चाहती हूं
बिना पछतावे की
गमों को गले लगा कर मारना चाहती हूं
मैं नहीं चाहती कि मरने के वक्त मुझे कोई दुख हो



इसलिए मैं चाहती हूं
ऐसे लोगों से जिससे मेरी कोई परवाह ही नहीं
मैं मौत के वक्त दूर ही रहना

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कविता
तुम मिलो मुझसे



दिल के दर्द संभाल नहीं पा रही हूं
मिलो तुम आकर मुझसे
अभी की अभी

मैं जिंदगी से दूर मौत की बहुत ही करीब हूं
अगर तुम मुझे अभी मिलते हो तो
शायद मैं सोचूं फिर से जी उठने की




जिंदगी से कोई उम्मीद नहीं
मैं रुकी हुई घड़ी की सुई की तरह
कब तलक रुकूंगी पता नहीं
मिलो तुम मुझसे अभी की अभी


शायद तुम्हारे साथ चल परू टूट कर वही विखरने की जगह





यह दुनिया दुनिया मेरे किसी काम की नहीं
मेरा यहां कोई भी अपना नहीं है

बस उम्मीद है मोत मिले
और उम्मीद है मौत से पहले तुम मिलो मुझसे



कहानी हमारी कभी शुरू हुई ही नहीं
पर मैं चाहती हूं
तुम मिलो मुझसे
और इस कहानी को अंत दो


यह अजीब बात है
जो कहानी कभी शुरू हुई ही नहीं
उस कहानी को अंत देना




पर मेरी कल्पनाओं की दुनिया एक कहानी है
जिसमें तुम हो हकीकत की तरह
और मैं चाहती हूं
हकीकत बन तुम कर लौट
आओ तुम मेरे पास मेरे अंतिम समय में ही


मुझे डर नहीं कि मेरे साथ क्या होगा
पर अफसोस है कि कहीं मैं सारी कहानियां
अधूरा छोड़कर ना मर जाऊं




कौन कैसा है
किस लिए हर दिन मैं मर से जाती हूं
जीते जी शायद इस बात का पछतावा
मुझे अंतिम दिन ना हो
पर इस बात का पछतावा होगा
तुम और मेरी कहानी दोनों अधूरी रह गई

इस पल में
मैं सचमुच में मर जाना चाहती हूं
बिना कोई अफसोस के खुद की जान लेना चाहती हूं
पर उससे पहले मैं चाहती हूं
तुम आकर मिलो मुझसे

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कविता
बस देख रही हूं



मुझे किसी से शिकायत नहीं
बस मुझे रोना आ रहा है
मैं जानती हूं कि मेरी जुबान कर्वी है


मैं किसी की कोई काम की नहीं
मैं डायरेक्ट सुनती नहीं
मैं सुनने के साथ सवाल भी करती हूं

यही बात किसी को पसंद नहीं

लोगों को और पेरेंट्स को
वह लोग वह बच्चे पसंद आते हैं
जो बिना सवाल कि उनकी बातें बस सुनता रहें
जो वो कहे वही करता रहे


पर मैं वह नहीं हूं
इसलिए अनदेखा की जा रही हूं
इसीलिए प्यार से दूर हूं


यहां हर चीज में सौदावाजी है
आप अगर उनकी सुनते हैं
तभी आप प्यार की हकदार हैं
तभी आप स्नेह और देखभाल की हकदार हैं



मैं लोगों के लिए किसी काम की नहीं रही
इसीलिए मैं लोगों के दिलों में अपनेपन की हकदार नहीं रखती



क्योंकि मैं एक गुड़िया बिल्कुल नहीं


बड़ी दिलचस्प बात है
खुद को इंसान कहना ही भूल गई
लोगों की बदलती हुई व्यवहार को देखकर




मुझे शिकायत नहीं है
ना ही अफसोस है
लोगों के बदलने पर
या खुद को बचाने की कोशिश करने पर


बस तकलीफ हो रही है
सब कुछ जानकार भी
लगता है काश अनजान राहते


मैं औरों की तरह ही
एक कठपुतली बनी रहती

जो चाहे जैसे ना चाहता
थोड़ा स्नेह तो दिखता





बस मैं देख पा रही हूं
अपनों के बीच में बेगैरत खुद को
कुछ नहीं कहे रही
नहीं सवाल कर रही हूं
नहीं जवाब मांग रही हूं

मैं जानती हूं कोई फायदा नहीं
मेरे चिकने और चिल्लाने से

सब अपने कानों में रूई लगा ली है
मेरी आवाज सुनने से डरे हुए हैं


सब अपने-अपने काम में लगा हुआ है
उनके लिए उनके काम के लोग हैं
उनके अपने हैं
मैं भला बेगैरत मेरी बात कौन सुनता है
अच्छा है की इग्नोर करता फिरें
मेरे दर्द कौन समझता है


सच्चाई मेरी जुबान से भी ज्यादा कर्वी है
और इस सच्चाई को स्वीकार करना दर्दनाक है

और सच्चाई के साथ जीना
घायल दिल पर पत्थर रख देना जैसा है

और अंजान बनने की कोशिश करना
इस पत्थर नुमाऐ भार को और भी बढ़ा देना है






सच्चाई सचमुच में बहुत ही कड़वी होती है
जिसे हम कभी-कभी स्वीकार तो कर लेते हैं
पर
उसके साथ जीना बहुत ही भारी है

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