The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
मैं जीती हुं हमेशा कल्पनाओं की दुनिया में जब भी मैं वहां से बाहर आता हूं तो चीखना चाहती हूं चिल्लाना चाहती हूं जोर-जोर चीख चिख कर रो ना चाहती हूं यह का करके आखिर जिंदगी इतना बुरी क्यों है कल्पना में होती हुं तो शगुन होता है हकीकत से दूर जीने की वजह होती है और जब कल्पनाओं से बाहर आ जाती हूं तो घुटन महसूस होती है एक पल भी घंटे के बराबर लगते हैं जैसे समय बीती नहीं रहा समय यहीं अटक सा गया और अटकी हुई समय में मैं बस सांसे ले रही हूं घुट रही हूं अंदर ही अंदर मैं मर रही और मैं चाहती हूं कि सब खत्म हो जाए मैं कल्पनाओं को देखकर लिख सकती हूं कि किसी से मिला तो जिंदगी इतनी बुरी नहीं लगती और हकीकत यह है कि जिंदगी में कोई ऐसा नहीं जिसे देखकर लगें की जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं मैं क्या कर रही हुं मुझे भी नहीं पता बस लगता है वक्त कट रही हूं जिंदगी में कोई रुचि नहीं मर भी जाऊं यह भी इच्छा नहीं बस इस समय बेवजह की हेल्पलेस इंसान की तरह कहानी अच्छी है और हर वक्त कहानियों में भी रहकर थक गया सच कहूं तो मैं हकीकत में जीना चाहती हूं पर इस दुनिया में लगता है मेरे लिए जीने के लिए कुछ भी नहीं है मैं अभी बस रोना चाहती हूं चेक चेक कर चिल्ला चिल्ला कर और अपने बेबसी पर अपनी बेकार गुजर रही लाइफ पर सच कहूं तो मैं अपनी जिंदगी को अलविदा कहना चाहती और चाहती हूं अगर कोई दूसरी लाइफ हो तो इतनी बेकार ना
उम्मीद की दूसरा और और इंतजार लिखा कविता तुम्हारे और मेरे बीच हजारों मिलो की है फासला और गहरी तुम्हारी यादों से जुराऊ और इंतजार रहा तुम्हारा और हजार सारो से शाम की तरह मैं ढल गई रेत की तरह समय के हाथ से फिसल गई और मैं मिट्टी गहरी समुद्र में जा मिल गई और मे ऐ सोचने पर मजबूर हो गई कि यह किस्मत हमारी पर उम्मीद है कि हम मिलेंगे और सो साल बाद सी हजारों साल बाद भी उमिद की दूसरी और और इंतजार लिखा है हजारों साल तक जब तलक हवाई अपनी रुखत नहीं मोड़ती जब तलक समुद्र सुख नहीं जाती जब तलक धरती बंजर नहीं हो जाती जब तलक तुम हजारों मिलो से इस सूखी धरती पे अपनी कदम नहीं रखते तव तलक इंतजार है समुद्र की नीचे सांस लेते मैं मिट्ट रेत सी
तुमसे मिला तो गीत जिंदगी की एक झलक ऊठ के आई आ कर वो मुझ मे समाइ कहती रही और जियो सासो को अपनी वेवजा ना गिनु जिद्दे महबुब के तरह उनके हो जाओ हा। हा। हा। हा। हा।। ले। ले ।।।ले।।। ले। ले। ले तुम से मिला तो एसा लगा जिना इतना भी बुरा नही किसी कि महबुब। बन कर किसी को चाहते रहना इतना भी बूरा नही हा। हा । हा। । हा हा हा। हा। हा। हा। हा। हा। हा हा। हा। हा। जिंदगी की एक झलक ऊड़ कर आई आ कर वो मुझ मे समाइ कहती रही और जियो सासो को अपनी वेवजा ना गिनु पलकें तले जो ख्बावें बुने हैं उने सच करू आंखों में लाऊ दुनया को दिखाऊ तुमे मैं और चाहा करू हा। हा ।। हा। ।। हा। ।।हा। ले।।। ले ।।ले। ले ।।ले।। ले। ले ।।ले ले। । ले।। ले तुम से मिला तो एसा लगा जिना इतना भी बुरा नही किसी के हो जाना किसी के बाहो मे सो जाना इतना भी बुरा नही हा।।। हा।।। हा।।। हा।।।। हा ले ।।ले।।। ले।।। ले ।।ले।।। ले ।।।ले जिंदगी की एक झलक ऊड़ कर आई आ कर वो मुझ मे समाइ कहती रही मैं चलती रहु वो वजह इतनी फिक्र ना करु कोइ है जो आहे भर रहा चलते हुए मेरे कदमों के पिछे वो साम सवेरे मेरे आहो मे ढल रहा हा। हा। हा। हा। हा तुम से मिला तो एसा लगा जिना इतना भी बुरा नही किसी को पाना हमदम कहना किसी के साथ उम्र भर चलते रहना इतना बुरा भी नहीं हा। हा। हा। हा ले ले ले। ले। ले जिंदगी की झ ।ल ।क हा। हा। हा। हा। हा तुम से मिला तो ए।सा ल।गा
जहां से बस लौट कर आती हो यादें कविता ऐ हमसफर मेरे एसी जगह कभी मत जाना जहां से बस लोट कर आती हो यादे रासते कितनी भी कठिन क्यों ना हो मंजिल कितने भी दूर क्यों ना हो चाहे तो मुझसे दूर जाना अपने मंजिल को पाने के लिए और फिर लोट कर आ जाना क्यों कि मैं इंतिजार करती रहूंगी तुम्हारी जब तलक तुम लौट कर ना आ जाते तब तलक ऐ हमसफर मेरे जाना मगर कभी इतना दूर मत जाना टपक जहा से बस लौटकर आती हो यादें तुम बिना मेरे हाल देख विदाई के बाद कही ऐ अंतिम विदाई ना है ऐ सोचकर मेरी होठों पर सवाल देख ऐ हमसफ़र में डर लग रहा है चूड़ियां तोड़ने से डर लग रहा है तुम बिन अकेली छोड़ जाने से सिंगार उतरते ही होंठ खामुस है अंदर से मैं भी जल रही हूं चिताओं की तरह बस जिंदा खड़ी हूं तुम्हें जाते देखते हुए ऐ मेरे हमसफ़र मेरे लौट आना सफल के बाद फिर से पहले की तरह कभी इतना दुर मत जा जहा से बस लोट कर आती हो यादे तुम कभी लौट कर आओगे पहले की तरह मेरे साथ समय बिता होगे इस वेकरारी मे मुझे तुमारा इतिजार रहे गा ऐ मेरे हमसफ़र कुछ भी हो फिर भी फिर लौटकर आना ऑलविदा मुझे कभी मत कहना
अंदर जो है गीत हा। हा। हा।।।। हा।। हु ।।।। अंदर जो है वह टूटे दिलों की शोर है और चलेंगे हम केसे केसे आगे बढ़ेंगे हम कोई उम्मीद नहीं इन आंखों में जिंदगी की हां कोई उम्मीद नहीं इन आंखों में जिंद गी की हा। हा। हा। ।।हा।।। हु। ।।।। आंख खाली है दर्द से भरी है बेचैन मनको राहत नहीं है कुछ भी अब ऐसा नहीं है सांस है बस मुझे जीने के लिए कहे कुछ भी ऐसा नहीं है सांस है बस जो चल रहा रुक रुक कर हु।।।।।। हा।।।। अंदर जो है दिल की शोर है जख्मी दिलों में ना जीने की कोई जोर है हु हु ।।।।हु ।। हा हा हा ।।।।हा ।।।। रूह तड़पती है आंखें बरसती है धड़कन गरजती है कोई तो सुन सोर दिलों की अं। दर सगुन नहीं है हा ।।।।।। हु।।।।। हालांकि कोई सुनेगा हमको यह उम्मीद भी नहीं है ठहरे हुए सांस ठटकती हुई बदन लड़खराती हुई कदम चला जहां में डोलता जहां में हवा की तरह यह मन हु ।।हु। हु।। हु।।।। हा।।।।। खामोशी बांधे हुए होंठ बैठे होठों से सिसकियां भी ना निकले टुटे दिल शोर मचाए जुबान से आ भी ना निकले हु हु। हु।।। हु।।। हु।।।। हु।।। हु।।। आगे की जिंदगी आगे तुम देखो हम ठहर गए हैं ठेहरी सांसों की तरह मिलने से रही आज में बरसे पुराने किताबों की पन्ने खंगालो देखो लिखे होंगे हम दर्दन से लिपटे हुए उन में हा।।।।। दर्द जो हमारे पलके बंद करे गम जो हमारे सांस छीन ले यह तरफ़ जो हमें जिंदा चिता पर जला दे हा। ।।हा।।। हा। ।।। वह सब सहे हैं हमने फिर भी उंगलियों पर दिन गिन हैं हमने उमर बीताई है अकेलेपन में हु। हु। हु।। हा। हा। हा। ।।। हा।।। फिर उम्मीद कैसे होगी जिंदगी से और हमने ख्वाब को अधूरे रहते देखा उम्मीद के मेहल को ढलते देखा हमने देखा जिंदगी किकिऐ खुद पर हजारों सितम हु। हु। हु। ।। हु।। अब नहीं ताकत बची नहीं सहे सकते और गम को हम जिंदगी अंधेरी कमरों में गुजारा है रोशनी से नहीं है रुबरुह हम हु। हु। हु।।।हु।।।। हा।।।। अंदर जो है खालीपन हूं अधूरी इच्छाओं टूट के बिखरे हुए मन अब थक गई अब कहूं मैं बस कर तू भगवान अंदर जो है वो टूटे दिलों की सोर है थकी हुई पलके बुझी हुई जिंदगी की मार है
कविता धड़कन उम्मीद मांगती है धड़कनें के लिए धड़कन उम्मीद मांगती है धड़कने के लिए पर मुझे पता है मेरे पास धड़कन से कहने के लिए कुछ भी ऐसा नहीं है कि मैं कहूं तू धड़क तेरा भी कोई अपना है तू धड़क तुझे भी कोई प्यार करता है तू धड़क तेरे साथ कोई चलना चाहता है हु। ॽ तू धड़क मेरे सपने हैं तू धड़क मुझे उम्मीद है तू धड़क में जीना चाहती हूं मेरे पास कोई ऐसी लव्जी नहीं है धड़कन को कहने के लिए कि तू धड़क रोने पर तुम्हें गले लगाने वाला लोग भी है हां झूठी उम्मीद देना अपने धड़कन को अपने धड़कन के लिए ना इंसाफी है काश मैं और जीने के लिए धड़कन से कहती तू धड़क तेरी दुनिया में बहुत लोग हैं बहुत सारे सपने हैं बहुत सी चीज तुम्हें करनी है पर मैं कहती हूं तू रुक जा मेरे पास झूठी उम्मीद देने के लिए कुछ भी नहीं मैं लिख पाती झूठी लब्ज भी नहीं तू रुक जा और ठहर ठहर के चलने की वजह तू रुक जा बेवजह मुझे जिंदा रखने के लिए परेशान होने की वजह तू रुक जा मेरी बेकार की भावनाएं तुझे और थका दे इससे पहले तूरुक जा तू रुक जा मुझे जिंदा रखने की जिद्दो जोहद मत कर तू रुक जा यह दुनिया बहुत बड़ी है और हसीन भी पर तुम्हारे लिए यहां कुछ भी नहीं है सच यही है बेकार की मुझसे उम्मीद मत रख कि मैं फिर से उठो और जीना चाहूं गी तू रुक जा और इतना संघर्ष करना बंद कर तुझे पता है ना एक दिन में खुद को मार डालूंगी और तुझे भी दर्द पहुंचाऊंगी तुम्हें मेरी आखिरी घड़ी तो पता है ना इसी लिए तू रुक जा हां मैं चाहती हूं कि मेरे मौत मेरे ही हाथों है पर इस बीच कितनी दर्द कितनी संघर्ष कितनी घुटन कितनी तरफ कितनी बेचैनी और कितनी दर्द बर्दाश्त करनी होगी तुम्हें पता है ना इसलिए बस कर तू रुक जा गजल ना उम्मीद किनारा है ना कोई सहारा है ठेहर ठेहर कर तू चलता है ना कभी बिगड़ता है इतना बड़ा दिल मत रख बस मेरे लिए तू रुक जा बस तेरे लिए
गीत अगर आजाद मन तुम्हारा है तो आजादी के पीछे भागे दुनिया उसका कुछ ना लगे वह खो गए खुद में बावड़ी नादान मन का रास्ता लंबा कंकरो भरी उड़ने की मन में चाहा बरी है उड़ान भर्ती गिरती पड़ती फिर भी ना ठहेरती ना हीं संभालती बस जिद्द ऊड़ जाने की उसे पागल कर रही कैसे समझाऊं उस नादान लड़की को उसके बेकरारी बेचैनी वह भी ना जाने कैसे बताऊं मैं उसे वह जानती है या नही जिस रोग की दवाना नही वह रोग लगाए बैठी है वह आजादी नींद छीन लेती आजाद कि रहा शगुन नहीं देती आजादी मांगती है लहू और जिद्द से भरी परिश्रम तेरी जो तू करती रही दुनिया से पहले खुद से ही लड़ती रही आजादी को ढूंढते फिरे नादान मन भागते फिरे इस उम्मीद में कड़ी परिश्रम करते फिरे उसके बाजू में कोई पंख आ कर लग जाए कहीं से और वो उड़ जाए झट से नादान मन का आसमा दूर कहीं आसमा देख देख के जो उड़ने की ख्वाहिश पनपे मन में यह ख्वाहिश उसे पागल करती है उसे और उसके ही जिद्दो जहेद घायल करती है इस पागलपन में बिखरी हुई मन में भटक रहना कोई कोई किनारा नहीं यह दुनिया विशाल समुद्र डूबता हुआ वह अपनी मन की ही अंदर जूज जुज कर उठ खड़ी होती है उसके दिलों के तर्पण होठों से आह भरती है कोई बचा ले कोई संभाले यह उम्मीद नहीं उसके बाजू में कोई पंख निकल आए बस यही दुआ मैं भी करता उस पागल लड़की के लिए यही दुआ पंक्तियां दुआ भी तभी तो कबूल हो जब खुद हो काश दुआ कबूल हो इस जहां में कोई तेरे लिए भी खुदा हो और अगर ना हो तो तू खुद की खुद खुदा हो मन में उड़ने की चाहत है आजाद ख्याली मन है और दर्दे से भरी तुम हो और कांच और पत्थर कांटों से भरी दुनिया तुम्हें और चोट लगेगी तुम्हारी निकलते हुए पंखें निकलने से पहले ही जख्मी कर दिया जाएगा पर यही दुनिया कहते हैं जिस की हर रोम रोम आजादी में रम गया है तो दुनिया की कौन से जंजीरें तुम्हें रोक सकता है निकलते हुए पंख जख्मी होने के बावजूद भी निकाल आएंगे और फिर एक दिन हरी भरी होकर तुम्हारे बाजू को सहारा देंगे और दौड़ते हुए तुम आसमान की ओर उड़ परोगी तुम्हें यकीन करना होगा यह आसमान तुम्हारा है तीनों जहां तुम्हारा है अगर आजाद मन तुम्हारा है तो
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser