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कविता वह इंसान कहीं गया ही नहीं इंसान की मौजूदगी घर से आंगन से जिंदगी से दिल से धीरे-धीरे खत्म होती है अभी तक यकीन नहीं कि घर की एक सदस्य चला गया है कभी ना वापस आने के लिए पर लगता है आंखों से ओझल है पर है घर में ही कही अपना काम करता हुआ वह इंसान वह चला गया है उसके होने का एहसास अब भी है वह नहीं रहा यह बात हर किसी की जुबान पर भी है पर किसी को लग नहीं रहा कि वह नहीं रहा कोई चला गया है अचानक एक लंबी यात्रा के लिए ऐसी यात्रा पर जहां से कोई लोड कर नहीं आता और घर वालों को एहसास भी नहीं की कोई कभी लौट के नहीं आने वाला बस यह अभी धीरे-धीरे एहसास होने वाला है एक लंबे समय के लिए वह सबके जहेन में रहने वाला है घर के सदस्य बनकर अभी लगेंगे की घर में ही वह कहीं बोल रहा है अपनों से बातें कर रहा है जिंदगी अभी चल रही है क्योंकि अभी यकीन नहीं की वह नहीं रहा या नहीं है कि यकीन करना मुश्किल है यह हो रहा है कि लगता ही नहीं कि वह चला गया कभी ना वापस आने के लिए बिल्कुल सामान्य दिनों की तरह कुछ भी हुआ नहीं वह इंसान कहीं गया ही नही
कविता बिल्कुल शगुन नहीं है चारों तरफ बस खामोशी है और इस खामोशी में अजीब सी शांति है पर इस अजीब से शांति में कहीं भी बिल्कुल सगुन नहीं है अजीब है शांति जिंदगी है पर जीने का एहसास नहीं है सांसे चल रही है पर क्यों दिल में कोई जज्बात नहीं है दर्द हो रहा है पर कहां यह भी नहीं पता आंखें नाम नहीं है बस खाली है खामोश ठंडी पड़ी हुई जिसमें किसी से शिकायत भी नहीं है ऐसा लग रहा है कि सब कुछ जानकार उठने के बाद एक नया सवेरा है जहां कोई नया सूरज नहीं जहां कोई उम्मीद नहीं जहां से कोई और रास्ता शुरू ही नहीं होती जिसका कोई मंजिल ही नहीं बस एक ठेहराऊ है अनंत समय के लिए अपने अंदर की खालीपन को समेटे हुए एक इंसान सुबह के उस अंनत अंधेरों में बस खड़ा है बिना कहीं देखे बिना किसी पर भरोसा किऐ बस सारे उपेक्षा को खत्म करके बैठा है अभी कोई पिक्चर नहीं है बस में हूं और मेरे अंदर शांति है अजीब सी जिसमें सगुन बिल्कुल नहीं है जेसै की कुछ नहीं बदलने वाला चाहे में कितनी भी कोशिश कर लूं कोई उम्मीद नहीं है बस ठेहराऊ है मेरे अंदर अनंत काल के लिए
एक मरा हुआ इंसान या तो मैं सोच रही हु मैं खुद के बारे में किसी से कहूं किसी और के नजरिया से तो मैं खुद के बारे में या कहूंगी उसे देखकर लगता है कुछ भी नहीं है उसके लिए जहां में मैंने उसे उतना करीब से नहीं जाना कभी उसकी हंसी नायाब होती है तो कभी उसके खामोशी जिंदगी की आंत को दर्शाता है कोई ईच्छा नहीं कोई ओप्कीच्छा नहीं ना कोई जीने की ख्वाहिश बस जिंदा है जिंदगी को बोझ समझ कर ढोते हुए एक मारता हुआ इंसान जो उधार पर जिंदगी जी रही हो जिंदगी से कोई उम्मीद नहीं जीने का कोई ईच्छा नहीं फिर भी सासें चल रही है न जाने क्यों किस आश पर अब तलाक धड़कन धड़क रही है मुझे कभी-कभी बिल्कुल समझ नहीं आता उसके अन्दर बस गहरी खामोशी है या उसके दिल के गहराई में कहीं कोई हलचल जो उसे अब भी सांस लेने पर मजबूर कर रहा है धीरे-धीरे ही ऐसे ही कदम बढ़ाने पर मजबूर कर रहा है इस बेकार जिंदगी को जीते रहने पर मजबूर कर रहा है मैं उससे ज्यादा तो नहीं जानता पर वह मुझे समझ में भी नहीं आती कभी-कभी लगता है कि उसके खामोशी के पीछे तूफान है कभी-कभी लगता है कि वह एक मर चुका इंसान है जिसकी बस सांसे चल रही है I don't know सच में उसकी आंखें और उसकी ख़ामोशी मुझे उलझा देता है मुझे समझ में नहीं आता कि वह किस तरह का इंसान है उसका खुद का कोई एनर्जी नहीं है जिसे देखकर मैं यह सोच सकूं कि वह क्या है वह एक ऐसा इंसान है या तो वह टूट चुकी है फिर भी खुद को संभाले बैठी है या तो वह मर चुकी है वह मान चुकी है और मुर्दे का कोई ख्वाहिश नहीं होता
कुरुक्षेत्र उस कुरुक्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही हुआ अन्याय सीमा पार कर चुका था तभी अर्जुन ने धनुष उठाया है पर यह अर्जुन कोई और नहीं है नहीं तो अर्जुन का कोई और काहना है जब जब दुनिया और रिश्ते कुरुक्षेत्र के मैदान बन गया तो तब तब खुद से सवाल किया क्या यहां तुम्हारे लिए कोई है कोई नहीं मिला तो खुद की भीतर देखा और तब देखा और जान गया की खुद के लिए खुद ही अर्जुन बनना होगा और खुद ही कृष्णा जो राह दिखाएं खुद को मेरे अंदर की कृष्ण को हमेशा बांसुरी बजाना ही पसंद है नहीं की युद्ध करना पर कभी-कभी युद्ध करना आवश्यक हो जाता है
कुछ लोग दूसरों पर भी उधर हो जाते हैं कुछ लोग अपनो पर भी कठोर कभी-कभी यह दुनिया मुझे समझ में नहीं आती यहां बाकी में अच्छे लोग भी मौजूद है या बस बुरे यह दुनिया बहुत ही ज्यादा अजीब गरीब है कुछ लोग यहां ऐसे हैं जो दूसरों पे उदार हें और वही लोग अपने ही खून पर अपने दुश्मन की तरह टुट पड़ते हैं तो कुछ लोग दूसरों के लिए शैतान होते हैं और अपनों के लिए जान लूटने वाला इंसान कभी-कभी लगता है कि यह अकल्पनिक है ऐसी कोई सोच भी कैसे सकता है पर हकीकत है कुछ रिश्तो में कुछ लोगों के और बहुत सारे मासूम जिंदगियों के जैसे यह तक नहीं समझ में आता की आखिर उसने गलती क्या-क्या है और हरानी की बात है कि उसे उसकी गलती बताने वाला कोई नहीं बस सजा देने वाला है हर बात पर तन मारना हर गलती पर पिटाई करना कभी-कभी लगता है कि यह अजीब है पर सच्चाई यही है वह ना समझ लोग जो और जिंदगियों को इस दुनिया में लाते हैं और वह जिंदगी को जिंदगी समझने के अलावा बस अपना जागीर समझते हैं जिसके साथ वह जेसे भी चाहे सलुक करसके बस वो उनके लिए एक जमीन का टुकड़ा जीती जाती इंसान नहीं और कुछ ऐसे भी लोग जो अपने बच्चों से इतने प्यार करते हैं कि उनके लिए अपनी सब कुछ दाऊ पे लगा देते हैं तो कुछ लोग अपने ही बच्चों से इतनी नफरत करते हैं कि वह हर वक्त यह चाहते हैं कि वह उसके नजरों से जब चाहे दूर हो जाए मुझे नफरत है उन लोगों से जो अपने ही बच्चों से नफरत करते हैं हर बात पर अपना एहसान के गिनाते हैं हर बात पर ताना मारते हैं और मुझे जलन होता है उन लोगों से जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार होता है बिना अपने एहसान गिनाए उसे इस दुनिया की तोड़ तरीका समझाते हैं उसे दुनिया में ढालना और जीना सिखाते हैं और उसे एक इंसान की तरह ट्रीट करते हैं ना कि अपनी जागीर समझते हैं और कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो दूसरों पर उधर रहने के साथ-साथ अपना और अपने बच्चों से भी उतना ही चाहते हैं जितना उदारता वह दूसरों पर दिखाते हैं हालांकि ऐसे कम ही लोग होते हैं जो इस दुनिया और अपने बच्चों और फैमिली के लिए भी उतना ही रिस्पांसिबिल और रियल हो सके
यह दुनिया एक युद्ध का मैदान है और इंसान को हमेशा तैयार रहना चाहिए युद्ध लड़ने के लिए
लगता नहीं की तब तलक सबर रख सकेंगे कविता ढोते हुए उम्मीद की बोझ कही सांसे थम ना जाऐ सीने के अंदर जो भी हरकत हो रहा है वो दर्द बड़ी गेहरा है केसे गुजारे सारी उमर इस दर्द मे हम जीना पाएंगे उम्मीद के गम में हम लगता है हमारी राहा अभी सुरु हुई है मंजिल दुर बड़ी है लगता नही की तब तक सबड़ रख सके गे ज़िन्दगी की और खबड़ रख सके खामुस होंठ हैं अब निगाहें रहो की तरफ देख के ठहरा ऐ गम इतना भारी हैं कदम थक गऐ काधे झुक गए हैं आराम नही है सांसे लेने की उम्मीद की बोझ तलें इतना दब गऐं है ढलते साम सुबह होने दुआं भी ना करते आज रात ना गुज़रे यही हम रोज सोचते आगर मंजिल नही है तो सांसें यही थम जाऐ बेबजा की दर्द क्यों हमे है सहना हम दर्द में थक गऐ हैं हमे अब चुप है रहना चाहत नही जिने कोई ना कोइ खुआईस बचा है अंदर तो अब तलक धड़कन क्यों धड़क रहा सांसें क्यो ना थम रहा है डर है जिस बातो की वो अभी क्यों ना हो रहा है हा। हा। हा। मुझे मेरी मोत कियो ना आ रहा है
कविता कुछ देर और ठहेर जाओ कुछ देर और ठहर जाओ रुक जाओ मेरे जुल्फों की छांव में तेरे बिना चैन नहीं आती यह ठहरी हुई निगाहे तुम्हें ही आंखों में भरना चाह तुम्हें जी भर चाहना तुम्हें देखे रहना तुम्हारे आगोश में जीना अगर यह सपना है तो मैं चाहूं नींद कभी ना टूटे सुबह कभी ना हो पलके कभी ना उठे रुक जाओ मेरी बाहों में आकर तुम कहीं भी ना जाओ ना जाओ कहीं दूर यह भरम मेरा है तुम पास मेरे हो तो रह जाओ कई सदी के लिए धड़कन में मेरे समाकर मेरी जिंदगी के लिए प्यार में मुझे अपनी कैद करो जज्बातों में फना होकर हो जाऊं बस मैं तेरा पेऊ में वेरिया लगाओ तेरे प्यार के नाम से हो तो शौक से पहन लु मैं अगर शौक तेरे चाहत है तो यह शौक मैंने रखा है और मैं चाहूं यह शौक कभी खत्म ना हो दिन गुजरे सदी गुजरे गुजरे हजारों साल मुझे शौक तुम्हारा हर पल हो हर लम्हा है हर दिन हो एक दिन भी ना हो सदी तक में जो मेरे दिल में तुम्हारे लिए चाहत थोड़ी सी भी काम हुआ हो मैं बस तुम्हें चाहूं मैं चाहूं तुम रुक जाओ मेरे साथ यहीं मेरे गोद में सर रखकर जुल्फों के छांव में सो जाओ तेरी मैं बावरी रहना चाहूं वही जहां तेरे नाम जहां मैं तेरे नाम पर ही जीना चाहता हूं तू जहां तेरी चाहत जहां है वहां शगुन है अगर यह शगुन झूठ है तो मैं झूठी शगुन पर ही सदी सर्वसर करना चाहूं और ना चाहूं मैं कुछ सदी बितने के बाद भी तुम्हारा नाम लेकर मैं शगुन से जी ललु गी चाहूं मैं तुम रहो मेरे साथ ख्वाबों में ही सही अगर यह ख्वाब है तो मैं ख्वाबों में ही हूं हकीकत में तुम बिन कुछ भी नहीं
विलन कभी-कभी विरोध करना छोड़ देने का मन करता है और देखने का मन करता है कि अंजाम क्या होता है इस समाज के विलन क्या मुझे जीने देगा मेरी अपनी खुद की जिंदगी या मेरा शगुन चेन सब छीन कर मुझे अपने जैसा बना ले गा समाज में हर कोई विलन है पर सबसे बड़ी और बुरी विलन वही होता है जो खुलकर समाज के खिलाफ विरोध करता है कभी-कभी मुझे विलन के लिए सिंपैथी और समाज के लिए दया महसूस होती है क्योंकि उसने ऐसे विलन को पैदा किया है जो उसे दर्द देने वाला है समाज एक ऐसे साइलेंट विलन है जिसे कोई विलन कहीं नहीं सकता और विरोध करने वाले ऐसे खूंखार विलेन जैसे आते जाते हर कोई विलन कहे कर चला जाता है विलन ऐसे इंसान है जिससे हर कोई नफरत करता है और हर कोई उसे अपने हिसाब से विलन बनता है पर विलन की नजरिया के हिसाब से तो यह दुनिया ही उसके लिए विलन है हर आते जाते लोग अपने पराए हर कोई किसी को विलन कहना आसान है पर कोई समझना नहीं चाहते कि उसे विलन भी तो उन्हीं लोगों ने बनाया है जो उन्हें विलन कहते हैं विलन कोई एक दिन में नहीं बनता नाहीं तो कोई फायदासी विलन होता है अगर यह समाज और यह सिस्टम यह परिवार हर किसी को एक जैसे टिट करने लगे तो यकीन मानो इस दुनिया में कोई विलन होगा ही नहीं मेरे नजर से एक विलन को पैदा करने वाले सिस्टम परिवार समाज सब से बड़ी और बुरी विलन है
पर कब तलक उम्मीद रखें कविता उम्मीद उम्मीद कखते हुए लोग जींदा तो है पर उम्मीदें एक झूठा सपना है लोगों को तसल्लि दें कर जिंदा तो रकता है पर कभी दर्द कम नहीं करता बल्कि दर्द उम्मीद सो और वड़ जाती है क्यों इंसान को पता होता है कि उम्मीद है सब कुछ ठीक हो जाएगा पर कव तक उम्मीद रखे यह नहीं पता होता और यह सबसे बड़ी बिड़मनां है एक आसफल होने वाली वाखया।।। उम्मीद कभी ना खत्म होने वाली दर्द की उम्मीद झूठा सपना कल्पना लालच से भरी हुई बातें सब कुछ ठीक हो जाएंगे अच्छी दिन आएंगे सारे कहने की बातें हैं एक लंबा इंतजार बस दर्द को सेहत हुई उम्मीद उम्मीद पर हर दुख दर्द झेलते हुए इंसान बस कल्पना करता है अपनी खयाली दुनिया में सब कुछ ठीक हो जाएंगे और यह उम्मीद सदियों तक चलता है कभी ना खत्म होने वाली चीज की तरह उम्मीद है उम्मीद रखते हुए इंसान जिंदा रहने के साथ समझे की उम्मीद रखना हमेशा सही नहीं है उम्मीद है कि मुझे अब कोई उम्मीद नही है किसी से भी नहीं ना इस दुनिया से ना अपने से बस है थोरी सी उम्मीद खुद से कि मैं थोरी और जियो गी
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