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kuchh nahin Kavita aur nahin udan ke sath शीर्षक: दूषित मिट्टी हम कहते हैं माँ से है माटी, माटी से तिरंगा, पर ये शब्द कहीं खो जाते हैं, सच्चाई कहाँ पाते हैं? बाते करते आज की, कोई नहीं देखना चाहता, क्या है सच्चाई, हर कोई झूठ दिखाता है, हम मानते जाते हैं। जानो हमारी आँखों पर, झूठ ने डेरा घेरा है। कहते हैं कानून अंधा है, पर आज दिखता है—कानून अंधा है। कहते हैं हम देश नहीं मिटने देंगे, हम देश नहीं बिकने देंगे, कहते हैं स्पष्ट बस इस बात की, पर काम हमारा अपनी जेब भरना है। कोई कदम उठाए अच्छा, ये नहीं लगता है अच्छा, मरवा देते हैं लोगों को, ये कानून वाले। आवाज़ दबा दी जाती है, इंसान का निशान मिटा दिया जाता है। आज के अख़बारों में कौन कह पाता है? करते मानवता की बात हैं, क्या मानवता का 'म' पता है? चलो ये तो छोड़ो, गंगा जमुनी अभियान चलाए जाते हैं, अबोरो टन सफाई कराई जाती है, क्या ये सच्चाई? बड़ी जहाजों से गंगा दूषित की जाती है, कोई भी गंदा पानी यूँ ही बहाया जाता है। एक दिखावा देते हैं, सफाई कराई जाती है। बराबर की बातें करते हैं, बढ़तों की उन्नति खटकती है। शिक्षा की तो बात छोड़ो, इसका तो कोई तोड़ नहीं, हर साल बच्चे मरते हैं, उनका तो कोई मोल नहीं, हर साल स्कूल बंद कराए जाते हैं, हर साल सरकारी सेंटर बनाए जाते हैं। और गर्व से कहते हैं—हमारा भारत महान, या ये मिट्टी दूषित है, है ये ही सच्चाई।
खुश दिखना बहुत आसान है, लेकिन सरल दिखना मुश्किल है। - Kajal Soam
हम गलतियाँ करने से बहुत डरते हैं । लेकिन गलतियाँ भी वही करते हैं, जो कुछ करते हैं । - Kajal Soam
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे - Kajal Soam
पता है, कभी-कभी मुझे लगता है कि हम आस्था और अंधविश्वास के बीच का जो बारीक सा धागा है, उसे अक्सर भूल जाते हैं। सोचो अगर हमारे सामने कोई छोटा बच्चा हो और वह मासूमियत से हमसे पूछे कि इन दोनों में क्या फर्क है, तो हम उसे कैसे समझाएंगे? हम उसे बस यही कहेंगे कि देखो बेटा, आस्था वह है जो तुम्हारे मन में एक सुंदर सा दीया जलाती है, जो तुम्हें किसी मुश्किल घड़ी में चुपके से आकर हिम्मत दे जाती है कि सब ठीक हो जाएगा। यह एक भरोसा है जो तुम्हें बेहतर इंसान बनाता है, तुम्हें अंदर से मजबूत करता है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ, अंधविश्वास किसी अंधेरे कमरे जैसा है, जहाँ हम बस डर के मारे कांपते रहते हैं, बिना ये जाने कि वहां है क्या। आस्था तुम्हें उड़ना सिखाती है, जबकि अंधविश्वास तुम्हें डराकर एक जगह थम जाने को कहता है। तो बस इतना याद रखना, अगर कोई बात तुम्हारे मन को शांति दे और तुम्हें निडर बनाए, तो समझ लेना वो तुम्हारी आस्था है, लेकिन अगर वही बात तुम्हारे दिल में डर भर दे और तुम्हें अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए भी सोचने पर मजबूर कर दे, तो समझ लेना कि वो बस एक अंधविश्वास है, जिससे दूर रहना ही बेहतर है। जीवन में उस रोशनी को चुनना जो तुम्हें रास्ता दिखाए, न कि उस साये को जो तुम्हारे कदमों को रोक दे।
नहीं पता कितना आते होंगे , सवाल और सबसे पहला सवाल शायद कौन हो ? तुम क्या हो? तुम बहुत उलझते हो ।
सौ बार पढ़ी, सौ बार समझी, वो गुत्थी न सुलझा पाई, पर आज सुकून की एक लहर, कुछ गहरे राज़ ले आई। - Kajal Soam
"जलाल तो बस एक बार रस्सी खींचकर जान ले लेता है, लेकिन, तुम तो वह ज़ुल्म हो, जिसे सौ बार भी रस्सी खींचने पर सुकून नहीं मिलता।" - Kajal Soam
like people with out colour - Kajal Soam
एक संवाद, एक सबक (काजल): "किस चाँद का नूर हो तुम, यह बताओ कौन हो तुम?" (मेरी बहन): "चाँद तो बस एक का होता है, हज़ारों का नहीं। वह तो आसमान में रहता है, धरती पर नहीं। ज़रा बच के रहना दुनिया से, यह बड़ा बेखौफ माहौल है।" (काजल): "मैं चाँद नहीं, मैं तो तारा हूँ।" (मेरी बहन - टोंट मारते हुए): "रोशनी तो चाँद से होती है, तारों से नहीं; और मोहब्बत एक से होती है, हज़ारों से नहीं।" (काजल): "अगर ऐसा है, तो फिर मैं खुला आसमान हूँ और उस आसमान का बादल हूँ।" (मेरी बहन): "तो फिर उन बादलों के पीछे छुप मत जाना!" (काजल): "छुपेंगे नहीं, हम तो बारिश बनकर आएंगे।" (मेरी बहन): "देखना, कहीं नाली में मत बह जाना।" (काजल): "अगर नाली में बही, तब भी हम समुद्र में मिल जाएंगे। और फिर भाप बनकर, बादल बनकर आसमान में जलकाएंगे। (मेरी बहन - चेतावनी देते हुए): "आसमान के नीले रंग में खो मत जाना! जिस लाइन में तू है न, उसकी टीचर मैं हूँ, तो ज़रा संभल कर!" (काजल - मुस्कुराते हुए): "हम खोएंगे नहीं, बस तुम्हें अपना दीदार कराएंगे।" (मेरी बहन - फिक्र जताते हुए): "ठीक है, पर एक बात याद रखना... मौसम के बदलाव में तुम भी मत बदल जाना।" (काजल - शांत भाव से): "...और फिर मेरे पास कहने को कुछ न बचा, बस खामोश होकर मैं उनकी बात मान गई।"
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