Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

"राष्ट्र प्रेम की गूंज"

जो राष्ट्र हमारा भू स्थल,
वो राष्ट्र हमारी शान हैं।
उस राष्ट्र से ही आन है,
वो राष्ट्र ही पहचान है।

जो राष्ट्र के अपने हो न सका,
वो राष्ट्र द्रोही कहलाएगा।
जिस भूमि पर जन्म लिया,
क्या घात उसी से कर जायेगा।

राष्ट्र प्रेमी ही यारों,
जग में सम्मान पाते हैं।
स्वराष्ट्र से घृणा करने वाले,
देश द्रोही कहलाते है।

राष्ट्र प्रेमी है हम यारों,
देश भक्त कहलाते हैं।
स्वराष्ट्र की रक्षा के खातिर,
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।।

~ Poet :- Sp Singh

spsingh

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

हां मैं हमारे अमर्यादित स्त्री
कविता


हां मैं समाज में बड़ी अमर्यादित स्त्री हूं

उन मर्यादित स्त्रियों की तरह मैं बिल्कुल भी नहीं हूं


क्योंकि मैं दिखावा नहीं करती
मैं बिल्कुल वैसी हूं
जैसी मैं हूं
मैं झूठ नहीं बोलता
मैं जी हजूरी नहीं करती

मैं नहीं करती और स्त्रियों की तरह बड़ों बुड़ो की सम्मान
बस इसलिए कि वह बड़े और बूढ़े हैं

मैं नहीं करती घर की वह सभी काम
जो बरसों से स्त्री के नाम मर्यादित होने के तौर पर
स्त्री पर एक बोझ सी लादी गई है




उन सभी की
अपने बड़ों की छोटो की ख्याल रखने की
जिम्मेदारियां उठाने की
तीन समय उनके लिए रोटियां पकाने की
24 घंटे उनके लिए ही जीने की


मैं नहीं कर सकती
क्योंकि मुझ में धैर्य नहीं है


मैं नहीं करती
मैं बेवाक सी स्त्री
वही करती हूं जो मेरा मन भाता है


मैं किसी के हिसाब से अपने समय नहीं देती
मेरा समय स्वयं बस मेरा है


उसे मैं अपनी जरूरत
और अपने हिसाब से ही खर्च करती हूं



हां मैं समाज में बहुत ही अमर्यादीत स्त्री हुं


क्योंकि मुझे मुखौटे पहनने का शौक नहीं
मैं वही शक्ल लेकर चलती हूं
जो मेरा है

मैं दूसरों की तरह नियंत्रण चेहरा नहीं बदलती
दिखाबा के लिए
मैं हद से ज्यादा अच्छी नहीं होती



कोई मेरी बात पर यकीन करें
बस सिर्फ इसलिए मैं मीठी बातें नहीं बोलती



मुझे फर्क नहीं पड़ता कोई साथ रहे या ना
बस किसी के साथ पाने के लिए
खुद को नहीं बदलती



मैं कभी जरूरत से ज्यादा अच्छी नहीं होती
मैं जैसी हूं
उसे समाज में अमर्यादीत कहते हैं


पर मेरा एक सवाल है अखिल मर्यादित होना क्या है
क्या खुद को मार कर
दूसरे के लिए सुख का कामना करना मर्यादित है



क्या खुद की ना सम्मान कर के
बड़ों की बातों की सम्मान रखना मर्यादित है

बस इसलिए कि वह बड़े हैं अपने हैं
चाहे उसके लिए खुद की सांस गिरवी क्यों न रखने पड़े



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
जो मुंह पर अच्छे बनते हैं
और पीठ पीछे बुराई करते हैं



क्या मर्यादित होना इसे कहते हैं
जो किसी को ना नहीं कहते
चाहे उसके लिए खुद को दर्द क्यों ना हो



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
समाज के हिसाब से जिंदगी गुजर दे
चाहे खुद को पता चल ही ना कि
वह कौन है
और क्यों जी रही है


अगर मर्यादित होना उसे कहते हैं
जो दूसरों के लिए
अपनी जिंदगी को बर्बाद कर दे


अपने होने ना होने की खबर जाने बिना
तो मै अमर्यादित स्त्री ही सही



और मुझे कोई शौक नहीं है
समाज के हिसाब से चलने की
और उनके नज़रों में मर्यादित पूर्व शांति स्त्री बनने की



मुझ में तूफान है अंगार है एक धधकती हुई ज्वाला है

जो शांत नहीं जो पूझा नही
वह ठहेर ठहेर कर ऊठती रहती है धधकते रहती है
वह खुद को ढूंढने के लिए
किसी भी हद तक गुजारना हरदम तैयार रहती है

हां मैं अमर्यादित स्त्री
क्योंकि मुझे खुद को थोड़ा और जानना है
और खुद ढुंढ कर पा कर
खुद को पूरी तरह खुद का ही कहना है

हां मैं हुं आमर्यादित स्त्री

abhinisha

मुक्तक:-

ॠतुओं ने अब अपना अपना लक्षन खोया,
जीवन ने अपने भीतर का जीवन खोया,
नये दौर की नई हवाओं की संगत से,
प्रेरित होकर आँगन ने अपनापन खोया ।।

स्वरचित
@सर्वाधिकार सुरक्षित - डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर

rajukumarchaudhary502010

"करते होंगे लोग नशा सिगरेट और शराब का…
हमें तो नशा है कागज़, कलम और दवात का।"


"लोग ग़म भुलाने के लिए
शराब का सहारा लेते हैं…
हम ग़म को कागज़ पर उतार देते हैं।
उनका नशा बोतल में होता है,
हमारा नशा कलम और अल्फ़ाज़ में। ✍️🥀"

archanalekhikha

केशर आंब्याची वडी

घरचे आंबे संपले तरी आंबे खायची हौस कुठे संपते 😀 घरी केशर आंबा आणलाय
त्याची ही वडी केली
हा आंबा रंगाला नावाप्रमाणेच केशरी होता 🙂
व रसही पातळ होता
पण चवीला मात्र गोड होता

साहित्य
एक वाटी आंब्याचा रस
दोन वाटया ओले खोबरे
पाऊण वाटी साखर
दोन मोठे चमचे बारीक केलेली साखर
वेलदोडे पावडर
एक कप साई सकट दुध
दोन मोठे चमचे तूप

कृती
प्रथम एका थाळीला तूप लावून ठेवा
दूध साय व ओले खोबरे
मिक्सर मधून काढा
कढईत एक चमचा तूप व आंब्याचा रस घालुन थोडे परतून घ्या
रसाचा कच्चेपणा कमी होऊन त्यातील पाण्याचा अंश पण कमी होईल
आता त्यात मिक्सर मधून काढलेले खोबरे व पाऊण वाटी साखर घालून आटवत ठेवा
सतत हलवत रहा
नाहीतर मिश्रण करपू शकते
परत एक चमचा तूप घाला
वीस पंचवीस मिनिटांत मिश्रण आळून येईल
मिश्रण कढईच्या कडा सोडू लागले की
खाली काढून त्यात बारीक साखर घालून चांगले घोटून घ्या
वेलदोडे पावडर मिसळून तूप लावलेल्या थाळीत थापा
थोडे कोमट झाल्यावर चाकूने वडी पाडून
काजु तूकडे ,अथवा पिस्ता, काळी मनुका लावुन घ्या
दोन तासानंतर मिश्रण थंड झाल्यावर वड्या काढून घ्या
आकर्षक रंगाच्या या वड्या चवीष्ट लागतात

jayvrishaligmailcom

साया-ए-वफ़ा (तेरी ख़ामोश मोहब्बत)
​तेरी नाराज़गी की इस उदास रात में,
मैं बनकर बहूँगा तेरे अश्कों के साथ में।
जो कह भी दिया तूने कि "चले जाओ यहाँ से",
फिर भी कभी कट्टी (रंजिश) न करूँगा इस जहाँ से।
​इन तन्हा हाथों से ही मैं संवार दूँगा,
तेरा आशियाना, तेरी हर इक गली।
सजा दूँगा तेरी महफ़िल को कुछ इस तरह,
कि खिल उठेगी तेरे आँगन की हर इक कली।

cosmicstar

मौत का छोटा रूप
— विजय शर्मा Erry
मैं एक दिन शोक-सभा को जा रहा था,
मन बोझिल था, कदम धीमे-धीमे बढ़ रहे थे।
रास्ते में देखा एक टेम्पो वाला,
अपने ही वाहन में गहरी नींद सो रहा था।
साँसें उसकी बहुत हौले-हौले चल रही थीं,
चेहरे पर अद्भुत शांति का डेरा था।
क्षण भर को लगा जैसे समय ठहर गया हो,
जैसे संसार से उसका कोई नाता न रहा हो।
आगे बढ़ा, जहाँ मृत्यु ने दस्तक दी थी,
वहाँ भी एक देह बिल्कुल वैसी ही पड़ी थी।
वही शांत चेहरा, वही बंद पलकें,
बस एक अंतर था—साँसों की डोर टूट चुकी थी।
तभी मन ने मुझसे धीरे से पूछा,
"क्या सचमुच मृत्यु इतनी अलग होती है?"
फिर भीतर से उत्तर आया—
"नहीं, यह तो नींद की अंतिम सीमा है।"
हर रात जब हम सो जाते हैं,
अपने अहंकार को कहीं खो जाते हैं।
न धन याद रहता, न पद का अभिमान,
न कोई अपना, न कोई पराया इंसान।
हर दिन एक छोटी मौत हम मरते हैं,
फिर सुबह नया जीवन लेकर उठते हैं।
कल की थकान, कल के सपने,
सब रात की चादर में कहीं छिप जाते हैं।
यदि हर सुबह नया जन्म है,
तो हर शाम मृत्यु का एक अभ्यास है।
फिर क्यों इतना अभिमान करें,
जब जीवन स्वयं एक प्रवास है?
जिस दिन अंतिम नींद आ जाएगी,
कोई अलार्म हमें जगा न पाएगा।
सिर्फ कर्मों की सुगंध साथ चलेगी,
बाकी सब यहीं रह जाएगा।
इसलिए जीना है तो ऐसा जीओ,
कि हर रात निश्चिंत होकर सो सको।
और जब अंतिम निद्रा आए,
तो मुस्कुराकर उसे भी गले लगा सको।
क्योंकि मृत्यु कोई दुश्मन नहीं,
वह जीवन का अंतिम विश्राम है।
जो हर रोज़ छोटी मौत को समझ गया,
उसी ने जीवन का सच्चा अर्थ जाना है।

vijayerry.232206

सुभाषितम्,,, 🌹🌹🙏🌹🌹🙂

drbhattdamayntih1903

Hey Friends! ❤️

कैसे हैं आप सब?

वैसे तो मैंने इस कहानी के कई chapters पहले से लिख रखे हैं, लेकिन उन्हें public करने में थोड़ा time लगता है। इसलिए अगर कभी chapters के बीच थोड़ा gap हो जाए, तो उम्मीद है आप समझेंगे। 😊

वैसे आपको "OBJECTION, MS. SINGHANIA!" कैसी लग रही है? अगर कहानी पसंद आ रही है, तो please मुझे comment करके ज़रूर बताइए। आपकी ratings और reviews मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि उन्हीं से मुझे पता चलता है कि मुझे कहाँ सुधार करना चाहिए और आगे आपको क्या पढ़ना पसंद आएगा।

आज मैंने एक साथ दो chapters upload किए हैं। साथ ही मैं इस कहानी को दूसरे platform पर भी publish कर रही हूँ, ताकि आप जहाँ comfortable हों, वहीं इसे पढ़ सकें।

और हाँ... मैं एक नई कहानी पर भी काम कर रही हूँ, जिसका नाम है "Raaz"। यह थोड़ी mystery/horror based story है। मैंने पहले कभी इस genre में ज़्यादा नहीं लिखा, इसलिए यह मेरे लिए भी एक नया experience है। अगर कहीं कोई कमी रह जाए, तो उम्मीद है आप मुझे माफ़ करेंगे... और अगर पसंद आए, तो अपना प्यार ज़रूर देंगे। ❤️

बस इतना ही...

Take care, my dear readers! 💖

Milte hain next chapter mein...

Bye Bye! 👋✨

Aarushi Singh Rajput ✍️

aarushisinghrajpute

kuchh nahin Kavita aur nahin udan ke sath

शीर्षक: दूषित मिट्टी
​हम कहते हैं माँ से है माटी, माटी से तिरंगा,
पर ये शब्द कहीं खो जाते हैं, सच्चाई कहाँ पाते हैं?
​बाते करते आज की, कोई नहीं देखना चाहता,
क्या है सच्चाई, हर कोई झूठ दिखाता है, हम मानते जाते हैं।
जानो हमारी आँखों पर, झूठ ने डेरा घेरा है।
​कहते हैं कानून अंधा है, पर आज दिखता है—कानून अंधा है।
कहते हैं हम देश नहीं मिटने देंगे, हम देश नहीं बिकने देंगे,
कहते हैं स्पष्ट बस इस बात की, पर काम हमारा अपनी जेब भरना है।
​कोई कदम उठाए अच्छा, ये नहीं लगता है अच्छा,
मरवा देते हैं लोगों को, ये कानून वाले।
आवाज़ दबा दी जाती है, इंसान का निशान मिटा दिया जाता है।
आज के अख़बारों में कौन कह पाता है?
​करते मानवता की बात हैं, क्या मानवता का 'म' पता है?
चलो ये तो छोड़ो, गंगा जमुनी अभियान चलाए जाते हैं,
अबोरो टन सफाई कराई जाती है, क्या ये सच्चाई?
बड़ी जहाजों से गंगा दूषित की जाती है, कोई भी गंदा पानी यूँ ही बहाया जाता है।
एक दिखावा देते हैं, सफाई कराई जाती है।
​बराबर की बातें करते हैं, बढ़तों की उन्नति खटकती है।
शिक्षा की तो बात छोड़ो, इसका तो कोई तोड़ नहीं,
हर साल बच्चे मरते हैं, उनका तो कोई मोल नहीं,
हर साल स्कूल बंद कराए जाते हैं,
हर साल सरकारी सेंटर बनाए जाते हैं।
​और गर्व से कहते हैं—हमारा भारत महान,
या ये मिट्टी दूषित है, है ये ही सच्चाई।

vanshsingh118873

पिता का होना जैसे

पिता का होना जैसे
सर पे एक छत का होना
धूप-बारिश आँधी से बचाए
सारा श्रेय दीवारे ले जाए
खुद हमेशा उपेक्षित रह जाए

पिता का होना जैसे
जादुई छड़ी का होना
जो मांगो वो मिल जाए
हर जिद पूरी हो जाए
इच्छा पूरी होते ही
छड़ी एक कोने में
खड़ी नजर आए

पिता का होना जैसे
ईश्वर हो जाना
वक्त पड़ने पर ही
सबको पिता की याद आए
जरा सा मन का ना होने पर
इंसान तो ईश्वर को भी
खूब बुरा सुनाए
की जिसके लिए पूरी जिंदगी हवन
वो परिवार ही आँखे चुराए
ना चाहा कभी किसी से कुछ
दिया हमेशा अपनी हैसियत से ज्यादा
वो पिता अपने बुढ़ापे में
संग ना किसी को पाए
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

आईना भी अब मुझसे
बेवफ़ाई करने लगा हैं।
झूठ भी इंसानों की तरह
सफ़ाई से कहने लगा हैं।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

भर जू आयी जल तो
सखी,काहे गरजे है बदरी सारी?
जाह्न तो है कि थोड़े चल कर
हो जायेगी ठारी

zalakbhatt

❣️ मुझे इश्क़ तेरे होने से है ❣️

मुझे इश्क़…
तेरे होने से है।

तू पास हो या दूर…मेरे दिल ने,
तेरे बीच कभी फ़ासले रखे ही नहीं।

मुझे इश्क़…तेरी हँसी से है…
तेरी ख़ामोशी से भी,
तेरे ज़िक्र से भी…और तेरी कमी से भी।

तुझे शायद कभी एहसास न हो…
मगर मेरी हर सुबह तेरी याद से शुरू होती है,
और हर रात…
तेरे ख़याल पर ही गुज़र जाती है।

बस एक अरमान है…
जहाँ भी रहना…दिल से मुस्कुराते रहना।

क्योंकि…तेरा खुश होना ही…
मेरे हिस्से का सुकून है…💕🌙✨

narayanmahajan.307843

तुम आना एक रोज़
मुझसे मिलने...
मैंने बहुत संभाल
कर रखा है,
तुम्हारे हिस्से का
वक़्त
❣️❣️❣️

narayanmahajan.307843

पहिले प्रेम
मन माझं आजही तिच्यात अडकले आहे...
वहीच्या शेवटच्या पानावर आजही तिचंच नाव आहे..
ती चे हसन तीच रुसण आज ही आठवणीत आहे..
तिच्या त्या गालावरच्या खळी वर आज जीव झुरत आहे..
ती तर गेली विसरून मला पण माझं मन मात्र.
त्या वहीच्या शेवटच्या पानावर आज ही अडकून आहे.
रोज तीच वही काढून बसतो आणि
तीच नाव पाहून डोळ्यातील अश्रू ना वाट काढून देतो..
सोडून जाणारी जाते पण दुसऱ्याच आयुष्य नरक करून जाते...
शेवटच्या पानावर ती आज ही आठवणीत आहे...
आज ही विसरण होत नाही..
कारण प्रेम खरं होत माझं हे तिलाच समजल नाही...
काय खर प्रेम केलं हेच माझं चुकले हे मला समजले नाही..
ती कधी येणार नाही परत माहिती आहे ..
तरीही मन माझं तिचीच वाट पाहत आहे...
आज ही शेवटच्या पानावर तिचंच नाव आहे...
तिचंच नाव आहे....

kavitaparabkar817467

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse