Quotes by Aarushi Singh Rajput in Bitesapp read free

Aarushi Singh Rajput

Aarushi Singh Rajput

@aarushisinghrajpute
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Hey guys, how are you all doing?

I hope you all are doing well. So today I want to discuss one of my stories with you friends. I've written a new story called "RAJPUTANA - The War of Love and Revenge", and almost 14-15 chapters have already been published.

Basically, this story is set in the 10th century it's not completely real, but I've added a lot of historical culture into it.

I've shown two religions in this story, so if anyone has any issue with that, I want to clarify beforehand that this is just a normal story, and there's no intention of hurting anyone's feelings. So please take it just as a novel, don't take it too seriously.

I hope you friends will enjoy reading "RAJPUTANA - The War of Love and Revenge". And if anyone likes the story, please please do comment, and also let me know where you're from that way we'll know from where all my story is being read.

Well, you friends probably already know me, but still let me tell you I am your dear friend, writer Aarushi Singh Rajput. I've published this story on several platforms, and I have other stories too on different platforms, so please read those as well.

My dear friends, I just want to say that if you friends are enjoying "RAJPUTANA - The War of Love and Revenge", then please please do comment and leave a review. I hope you friends will like the story.

Alright, I talk too much, bye bye!

Yours, writer Aarushi Singh Rajput ❤️

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चेहरा साफ़, मन में दाग,
सामने ताली, पीछे गाली।
मुँह पर आप, पीठ पीछे साँप,
बस यही है आजकल लोगों का रिवाज़।

सामने प्यार की बातें, पीछे जलन का हिसाब,
मतलब निकल जाए तो बदल जाता है जनाब।
चेहरे पर मुस्कान और दिल में हज़ार राज़,

कौन अपना है और कौन नकली—समझना नहीं आसान आज।

इसलिए अब हम भी थोड़ा संभलकर रहते हैं,

हर मीठी बात करने वाले को अपना नहीं कहते हैं।

क्योंकि इस दुनिया में चेहरे नहीं, नीयत पहचाननी पड़ती है,
और हर मुस्कुराते इंसान की कहानी थोड़ी पढ़नी पड़ती है।
बाकी हम तो जैसे हैं वैसे ही हैं, जनाब...

साफ़ दिल वाले हैं, इसलिए शायद आजकल के रिवाज़ों से थोड़े अलग हैं!! 😌🖤

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ज़िंदगी इतनी सस्ती नहीं कि हर वक़्त यही सोचते रहें
कौन बात कर रहा है और कौन नहीं।
ध्यान अपने सपनों पर रखो, लोग खुद जुड़ते चले जाएँगे।😈

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Hey Friends! ❤️

कैसे हैं आप सब?

वैसे तो मैंने इस कहानी के कई chapters पहले से लिख रखे हैं, लेकिन उन्हें public करने में थोड़ा time लगता है। इसलिए अगर कभी chapters के बीच थोड़ा gap हो जाए, तो उम्मीद है आप समझेंगे। 😊

वैसे आपको "OBJECTION, MS. SINGHANIA!" कैसी लग रही है? अगर कहानी पसंद आ रही है, तो please मुझे comment करके ज़रूर बताइए। आपकी ratings और reviews मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि उन्हीं से मुझे पता चलता है कि मुझे कहाँ सुधार करना चाहिए और आगे आपको क्या पढ़ना पसंद आएगा।

आज मैंने एक साथ दो chapters upload किए हैं। साथ ही मैं इस कहानी को दूसरे platform पर भी publish कर रही हूँ, ताकि आप जहाँ comfortable हों, वहीं इसे पढ़ सकें।

और हाँ... मैं एक नई कहानी पर भी काम कर रही हूँ, जिसका नाम है "Raaz"। यह थोड़ी mystery/horror based story है। मैंने पहले कभी इस genre में ज़्यादा नहीं लिखा, इसलिए यह मेरे लिए भी एक नया experience है। अगर कहीं कोई कमी रह जाए, तो उम्मीद है आप मुझे माफ़ करेंगे... और अगर पसंद आए, तो अपना प्यार ज़रूर देंगे। ❤️

बस इतना ही...

Take care, my dear readers! 💖

Milte hain next chapter mein...

Bye Bye! 👋✨

Aarushi Singh Rajput ✍️

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आज वीरता, स्वाभिमान और राजपूती आन-बान-शान के प्रतीक Maharana Pratap जी की जयंती है।
उनका जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था।
आज उनकी जयंती को पूरे 486 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनका साहस, त्याग और स्वाभिमान आज भी हर राजपूत के दिल में जिंदा है। ❤️‍🔥
उन्होंने हमें सिखाया कि
“हालात कितने भी कठिन क्यों न हों,
लेकिन अपने सम्मान और मातृभूमि के आगे कभी झुकना नहीं चाहिए।” ⚔️
महाराणा प्रताप ने जंगलों में रहना स्वीकार किया, घास की रोटी खाई, कठिन जीवन जिया…
लेकिन कभी भी मुगल सम्राट Akbar की अधीनता स्वीकार नहीं की।
हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक युद्ध नहीं था,
वो राजपूती स्वाभिमान की पहचान था। 🚩🦁
एक राजपूत होने के नाते आज दिल गर्व से भर जाता है कि
हम उस वीर भूमि और उस इतिहास से जुड़े हैं
जहाँ सम्मान के लिए लोग अपना सब कुछ कुर्बान कर देते थे। ❤️
“हम उस वंश से हैं
जहाँ तलवारें सिर्फ युद्ध नहीं,
सम्मान की रक्षा के लिए उठती थीं। ⚔️”
“राजपूत होना सिर्फ एक जाति नहीं,
यह साहस, स्वाभिमान और वफादारी की पहचान है। 👑”
“आज भी हमारे खून में वही जुनून बहता है,
जो कभी महाराणा प्रताप की तलवार में बहता था। 🔥”
“ना झुके थे, ना झुकेंगे…
क्योंकि हमारे इतिहास में महाराणा प्रताप जैसे वीर बसते हैं। 🚩”
“जिस मिट्टी ने महाराणा प्रताप जैसे शेर को जन्म दिया,
उस मिट्टी को मेरा बार-बार प्रणाम। 🙏”
आज के दिन हर राजपूत को अपने इतिहास, अपने संस्कार और अपने स्वाभिमान पर गर्व होना चाहिए। ❤️‍🔥⚔️
जय महाराणा प्रताप 🚩
जय मेवाड़ 🦁
जय राजपूताना ⚔️

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नमस्ते दोस्तों,

मैं आपके लिए एक नई कहानी लेकर आई हूँ—और इस बार पूरी तरह हिंदी में। सच कहूँ तो मैं ज़्यादातर हिंदी में नहीं लिखती, लेकिन इस कहानी के लिए दिल ने कहा कि इसे उसी भाषा में कहा जाए, जिसमें इसकी भावना सबसे सच्ची लगे।

ये कहानी एक वास्तविक ऐतिहासिक लोककथा से प्रेरित है, जिसे मैंने अपने अंदाज़ में, अपनी समझ के साथ लिखने की कोशिश की है। हो सकता है इसमें कुछ कमियाँ रह जाएँ, कुछ बातें पूरी तरह सटीक न हों—क्योंकि मैं अभी सीख रही हूँ, समझ रही हूँ… और हर शब्द के साथ बेहतर बनने की कोशिश कर रही हूँ।

इसलिए आप सबसे एक छोटी सी गुज़ारिश है—
अगर आपको कहानी में कहीं भी कोई कमी लगे, कोई गलती दिखे, या कुछ ऐसा लगे जिसे और बेहतर किया जा सकता है… तो मुझे ज़रूर बताइएगा। आपका हर सुझाव मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

और हाँ,
आपको कहानी कैसी लग रही है—ये भी बताइएगा।
आप कहाँ से ये कहानी पढ़ रहे हैं, ये जानकर भी सच में बहुत अच्छा लगता है… जैसे हम सब कहीं न कहीं जुड़ जाते हैं, एक ही कहानी के ज़रिए।

तो बस…
दिल से पढ़िए, महसूस कीजिए…
और अपने शब्दों से मुझे भी इस सफर का हिस्सा बनाइए।

मिलते हैं अगले अध्याय में…

https://www.matrubharti.com/book/19992483/sassi-punnun-part-1

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खानदानी रक्त है लाला, उबाल तो मारेगा ही ॥
कायर भोग दुःख सदा, वीर भोग्य वसुंधरा ।।
रण में जो अडिग रहे, वही कुल का मान बढ़ाए,
धार तलवार की बोले, जब वीर इतिहास रचाए।।
🚩🙏🏻🖤😈

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“वयं क्षत्रियाः स्मः।
अस्माकं कृते श्रीरामः केवलं भगवान् न,
अपितु परमः आदर्शः अस्ति।
यः क्षत्रियधर्मस्य रक्षकः,
यः धर्माय खड्गं उद्यमितुं जानाति,
मर्यादायै च शिरः नमयितुं अपि।
सः एव अस्माकं मार्गदर्शकः, प्रेरणास्त्रोतः च।
जय श्रीरामः॥”🚩🙏🏻

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Of course 😮‍💨🤨 Apne Apne thoughts comment Jarur karna aap log

तुम अक्सर कोशिश करती हो
कठोर बनने की।
लोगों की नज़र में सख़्त,
थोड़ी रूखी,
थोड़ी दूर-दूर सी।
शायद इसलिए कि
दुनिया को नरमी समझ नहीं आती,
और हर बार नरम दिल
सबसे पहले चोट खाता है।
क्या ख़ूब कहा है
“कठोर दिखना
अक्सर बचाव की भाषा होती है।”
लोग सोचते हैं
तुम्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कि तुम मज़बूत हो,
अडिग हो,
बिलकुल पत्थर जैसी।
पर तुम ही जानती हो
तुम्हारा दिल पत्थर का नहीं है।
वो अब भी काँपता है
किसी अपने की आवाज़ पर,
अब भी भर आता है
बिना वजह किसी याद पर।
क्या ख़ूब कहा है
“दिल अगर पत्थर का होता,
तो दर्द चुपचाप सह लेता,
ये जो चुप रहकर टूटता है,
ये ज़िंदा दिल की निशानी है।”
तुम कठोर इसलिए नहीं हो
कि तुम्हें महसूस नहीं होता,
तुम कठोर इसलिए दिखती हो
क्योंकि तुम्हें
बहुत ज़्यादा महसूस होता है।

Dear Me,
ख़ुद को दोष मत दो
अगर तुम अब पहले जैसी नहीं रहीं।
तुम बदली नहीं हो,
तुमने बस सीख लिया है
कहाँ नरम रहना है
और कहाँ कठोर दिखना ज़रूरी है।

और हाँ
जो तुम्हें पत्थर समझते हैं न,
उन्हें क्या पता
पत्थर बनने से पहले
तुम कितनी बार
काँच की तरह टूटी हो।
आख़िर में बस इतना
“कठोर चेहरा
और नरम दिल
ये वही लोग रखते हैं
जिन्होंने ज़िंदगी को
बहुत क़रीब से देखा होता है।”

☹️🙁

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