Quotes by Sp Singh in Bitesapp read free

Sp Singh

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@spsingh


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माँ का प्रेम शब्दों में समेटना संभव नहीं, फिर भी यह एक छोटा-सा प्रयास है।

"आँचल के उस पार"
माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और संस्कारों को समर्पित मेरी नई कविता।

आपका स्नेह और सुझाव हमेशा प्रेरणा देता है।

✍️ Poet ~ Sp Singh

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संघर्षों का यह जीवन है, साहस से लड़ना होगा।
कठिन मार्ग है इस जीवन का, दृढ़ता से बढ़ना होगा।

मेरे सभी कविओं पर आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, और ज्यादा से ज्यादा शेयर करे जिससे मेरे द्वारा लिखी गई कविताएं सभी भारतवासी के पास पहुँचे.....

आपका प्रेम, आशीर्वाद और साथ ही मेरा सौभाग्य होगा.....

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धर्म ही प्रेम है और प्रेम ही आदर है।
आदर ही व्यवहार हैं और व्यवहार ही परिचय है।
और परिचय ही यथार्थ हैं...........

~Poet:- Sp Singh

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"राष्ट्र प्रेम की गूंज"

जो राष्ट्र हमारा भू स्थल,
वो राष्ट्र हमारी शान हैं।
उस राष्ट्र से ही आन है,
वो राष्ट्र ही पहचान है।

जो राष्ट्र के अपने हो न सका,
वो राष्ट्र द्रोही कहलाएगा।
जिस भूमि पर जन्म लिया,
क्या घात उसी से कर जायेगा।

राष्ट्र प्रेमी ही यारों,
जग में सम्मान पाते हैं।
स्वराष्ट्र से घृणा करने वाले,
देश द्रोही कहलाते है।

राष्ट्र प्रेमी है हम यारों,
देश भक्त कहलाते हैं।
स्वराष्ट्र की रक्षा के खातिर,
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।।

~ Poet :- Sp Singh

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"सपनों की लौ"

आंखों में एक स्वप्न लिए,
रोज प्रखर निखरता हु।
सूरज सा चमक पाने के खातिर,
सूरज सा रोज मै जलता हु।

सूरज जैसा ना सही पर,
रौशनी मैं लाऊँगा।
सूरज सा चमक नहीं होगी  पर,
अंधियारा को मिलाऊंगा।

सूरज जैसा गुण हो मेरा,
सूरज सा ही धर्म हो।
सूरज सा दानी बनू और,
सूरज जैसा कर्म हो।

सूरज सा प्रखर निखरकर मैं,
सूरज का मान बढ़ाऊंगा।
सूरज का अंश मात्र भी हो तो,
जग को रौशन कर जाऊंगा।
जग को रौशन कर जाऊंगा।।

                     ~ Poet :- Sp Singh

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