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New bites

💔imran 💔

imaranagariya1797

कुछ लम्हों को जी लेना चाहिए।
वक्त कहां वापस लौटता है?

तुम पर्वतों के बीच से निकल रहे
सूर्य को देख रहे हो,

यदि कोई मिल जाए साथ में चाय पीनेवाला तो?

फिर क्या???
यार साथ में चाय पी लेनी चाहिए।

सागर का शांत किनारा हो,
और उछलती लहरों का ही शोर हो।

फिर क्या???
कोई रेत पर बैठे बैठे बातें करता मिल जाए तो?

दोस्त दो बातें कर लेनी चाहिए,

अरे, सूर्यास्त को भी हंसते हुए देखा जा सकता है।

सही में कोई अपना मिल जाएं तो
पानी, पर्वत में छुप रहे भानु को देखा जा सकता है।

सही में कुछ लम्हों को महसूस करके ही जिंदगी क्या है?

सही मायने में समझा जा सकता है।

parmarmayur6557

Everything happens for a reason.its another special day.. Good morning

kattupayas.101947

કાવ્ય શિર્ષક: કંઈક

શોધ તું કંઈક,
જાણ તું કંઈક,

વિચાર તુ કંઈક,
કર તુ કંઈક,

છોડ તુ કંઈક,
આપ તુ કંઈક,

ઓળખ તું કંઈક,
પરખ તું કંઈક,

મૌન તુ કંઈક,
સમજ તું કંઈક,

જીવન તું કંઈક,
સત્ય તું કંઈક.

મનોજ નાવડીયા

manojnavadiya7402

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
तमाशा देख कर मेरा वो अब
             रोया होगा,

ज़हर आँखों में रखकर मुँह
            धोया होगा,

बड़ी फ़िकर है उसे मेरी इन
          वीरानियों की,

काँटा  राह  में  उसी  ने  तो
           पिरोया होगा,

हौसला देने आए हैं वो मय्यत
               पर मेरी,

क़त्ल का मशविरा जहाँ कल
             सोया होगा,

बड़े सलीके से पूछते हैं हाल-
            ए-दिल मेरा,

नश्तर बातों में अपनी फिर
           डुबोया होगा,

मशहूर है बहुत वो हमदर्दी के
                वास्ते,

मज़ाक मेरा भी महफ़िल में
          संजोया होगा,

दुआओं का लबादा ओढ़ कर
           ज़ख़्मी देखो,

आज फिर किसी ने अपना
   क़द बोया होगा..🥀🖤
━❥
वीरानियों= अकेलापन या बर्बादी,
पिरोया= बिछाना या सजाना,
मय्यत= शव या जनाज़ा,
मशविरा= सलाह,
नश्तर= चुभने वाली बातें,
लबादा= मुखौटा,
╭─❀💔༻ 
╨─────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh
╨─────────━❥

loveguruaashiq.661810

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
नजदीकियों का वहम कुछ इस तरह
           से पाला है हमने, कि

वो पास तो है मेरे” पर मेरा होकर
                  नहीं रहता,
━❥
उसे हक है मेरी हर सांस पर, हर
            धड़कन पर मगर,

मैं  उसकी  यादों  में  तो हूँ, पर
उसकी दुआओं में नहीं रहता...🔥
╭─❀💔༻ 
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
╨──────────━❥

loveguruaashiq.661810

Exam Time pe bhi ye shayri likhna nhi bhool raha 😂😂

akshaytiwari128491

सोने के कंगन की नहीं हैं
मेरी फरमाइश जनाब,

बस अपनी पसंद की कांच की
चूड़ियां ही दिला दिया करो कभी कभार।

- Bitu....

bita

"लिबास बदलकर तो लोग रोज मिलते हैं,
काश कोई मिलता जो रूह से बात करता।"..

🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
​"अब फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कहता है,
हमने शोर से ज्यादा तन्हाई से रिश्ता जोड़ लिया है

manoj" rajput ✍️✍️✍️✍️

manoj13

शीर्षक: मैं तुलसी, तेरे आँगन की।

अपने स्नेह की आगर से
स्वयं सींचोगी रोज तुम मुझे,
क्योंकि इसके बाद
जब-जब भी जन्म लूँगी मैं—

पनपती रहूँगी
उसके हृदय में सदा,
जैसे पनप जाती है तुलसी
बिना खाद, बिना पानी के।

और बना देती है
सर्वस्व मिट्टी से भरी
धरती के हृदय को पावन—
ठीक वैसे ही लौट कर आऊंगी,
मैं तुलसी, तेरे आँगन की।
@softrebel

#matrubharti
#love #tulsi #writer #writting

softrebel

"भीड़ बहुत है इस शहर में, बस कोई अपना नहीं मिलता,
चेहरे तो सब ऑनलाइन हैं, पर दिल का पता नहीं मिलता।" manoj rajput.... ✍️✍️

manoj13

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
https://www.instagram.com/reel/DTIc5KvCq4u/?igsh=bnNpcHRpc2E4d2xr

mamtatrivedi444291

💔🌸

टूटे दिल में भी मोहब्बत की रौशनी बाकी है,
दरारों से झरती हुई वो नमी बाकी है।
पंखुड़ियों-सी बिखरी यादों के दरमियाँ,
दर्द के साथ-साथ उम्मीद कहीं बाकी है…

a9560

“सत्य ही शेष रहता है”💯
https://whatsapp.com/channel/0029VbBgJYA1SWt3jmeneP2I

jiwatma

अपने दिल में

jaiprakash413885

जिनके हाथों में कलम है वो जब सत्ता की चापलूसी करने लगे तब इंसाफ की आशा कम रखनी चाहिए।

एक लेखक, पत्रकार या फ़िर कवि कभी सत्ता से डरता नहीं है।

वह अपनी कलम से समाज की सच्चाई को उजागर करता है।

जो सही है उसकी सराहना भी करता है।

सत्ता की जनता के प्रति जो नाकामियों है वह बतलाता है, उनकी टीका करता है।

एक बलात्कारी को आसानी से बेल मिल जाती है
निर्दोषों को इंसाफ दिलाने में मां-बाप की जान निकल जाती है।

किसीने सही में कहां है कि कानून वो अमीरों द्वारा बनायीं गई ऐसी जाल है।

जिसमें गरीब लोग फंसकर तड़पते रहे और अमीर लोग पैसों के बल पर उन पर राज करे।

parmarmayur6557

आख़िरी ग़ुलाब
- कौशिक दवे
चारों तरफ युद्ध के कारण विनाश फैला हुआ था। अधिकांश मकान जमींदोज हो चुके थे। चिराग गहरी निराशा में डूबा था। उसके कई अपने ईश्वर के धाम जा चुके थे।
​उस समय उसे लगा કે काश मैं भी मर गया होता तो अच्छा होता। अब मेरा जीना व्यर्थ है। लेकिन मरूँ कहाँ? नदी, तालाब या सागर?
​सागर दूर है। नदी और तालाब में पानी नहीं है। ओह! इस विनाशकारी युद्ध ने मानव जाति का ही अंत कर दिया। वह चलते-चलते एक बगीचे के पास आया, लेकिन वह भी उजड़ा हुआ था।
​चिराग अपना सिर पकड़कर बैठ गया। अब क्या करना चाहिए?
​तभी उसे एक मधुर आवाज़ सुनाई दी।
​"ओह.. तो कोई है जो..."
​चिराग ने नज़र उठाई तो देखा कि एक सांवली युवती हाथ में एक गुलाब लिए आ रही थी। वह चिराग के पास आई। वह दिखने में बिल्कुल साधारण थी और उसने पुराने वस्त्र पहने हुए थे।
​वह बोली, "ओह.. तो तुम भी मेरी तरह जीवित हो? इस शहर में सिर्फ हम दो ही बचे हैं!"
​चिराग बोला, "लगता तो ऐसा ही है। पर तुम्हारा नाम क्या है?"
​युवती बोली, "आज तक मुझे देखकर लोग मुँह फेर कर चले जाते थे। पर तुमने पहली बार मेरा नाम पूछा है।"
​इतना बोलकर युवती ने गुलाब का फूल चिराग को दे दिया। "यह आखिरी फूल था। मेरा नाम रोशनी है, और तुम्हारा नाम?"
​चिराग ने वह गुलाब हाथ में लिया जिसकी कुछ पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं। वह बोला, "चिराग..."
​रोशनी बोली, "ओह.. चिराग और रोशनी, बस हम दो ही जीवित हैं!"
​इतने में एक बच्चे के रोने की आवाज़ आई। रोशनी की नज़र पड़ी तो एक तीन-चार साल का बच्चा रोते-रोते 'मम्मी-मम्मी' पुकार रहा था। रोशनी भावुक हो गई। उसने तुरंत उस बच्चे को गोद में उठा लिया और उसे शांत कराया।
​चिराग ने अपने हाथ का वह गुलाब का फूल उस बच्चे के हाथ में दे दिया। बच्चा खिलखिलाकर हँस पड़ा और बोला:
"पापा... मम्मी..."
​लेखक: कौशिक दवे

kaushikdave4631

ब्यूटी पार्लर वाले
किया इस पर कुछ काम हो सकता हैं क्या

anisroshan324329

दुनिया जहाँ फायदे और नुकसान का हिसाब करती है, वहीं माता-पिता बिना किसी स्वार्थ के हमें अपनाते हैं। माँ की दुआओं में वो ताक़त होती है जो हर मुश्किल को हल्का कर देती है, और पापा का भरोसा वो हिम्मत देता है जो हमें दोबारा खड़ा कर देता है। उनका प्यार शब्दों में नहीं, बल्कि हर त्याग और हर चुप सहन में झलकता है

saurya314114

एक प्रेरणादायक कहानी

एक दिन की बात है। बादशाह अकबर अपने दरबार में कुछ उदास बैठे थे। दरबारियों ने कारण पूछा तो अकबर ने गहरी सांस लेकर कहा,
“बीरबल, आज मुझे लगता है कि इंसान कितना भी प्रयास कर ले, सफलता हमेशा उसके साथ नहीं रहती।”

बीरबल मुस्कुराए और बोले,
“जहाँपनाह, क्या आप सच में ऐसा मानते हैं?”

अकबर ने कहा,
“हाँ। कई बार मेहनत करने के बाद भी परिणाम नहीं मिलता। तब मन टूट जाता है।”

बीरबल ने विनम्रता से कहा,
“यदि अनुमति हो, तो मैं इस प्रश्न का उत्तर एक छोटे प्रयोग से देना चाहता हूँ।”

अकबर ने सहमति में सिर हिलाया।

अगले दिन बीरबल दरबार में एक साधारण सा लकड़ी का डंडा लेकर आए। उन्होंने उसे दरबार के बीचोंबीच ज़मीन में गाड़ दिया। फिर बोले,
“जहाँपनाह, कृपया इस डंडे को उखाड़ने का प्रयास करें।”

अकबर ने बल लगाया, लेकिन डंडा नहीं हिला। उन्होंने दरबारियों से कहा,
“देखा, पूरी ताकत लगाने पर भी कुछ नहीं हुआ।”

बीरबल ने मुस्कराकर कहा,
“जहाँपनाह, क्या मैं प्रयास कर सकता हूँ?”

अकबर ने हँसते हुए कहा,
“ज़रूर, लेकिन यह आसान नहीं है।”

बीरबल ने डंडे को दोनों हाथों से पकड़कर जोर लगाने के बजाय, चारों ओर की मिट्टी को धीरे-धीरे हटाना शुरू किया। कुछ ही देर में डंडा आसानी से बाहर आ गया।

दरबार में सन्नाटा छा गया।

अकबर आश्चर्य से बोले,
“यह कैसे संभव हुआ, बीरबल? मैंने तो पूरी ताकत लगा दी थी।”

बीरबल ने शांति से उत्तर दिया,
“जहाँपनाह, आपने शक्ति का प्रयोग किया, लेकिन रणनीति का नहीं। हर समस्या बल से नहीं, समझ से सुलझती है।”

अकबर ने गंभीर होकर पूछा,
“तो क्या यही सफलता का रहस्य है?”

बीरबल बोले,
“सफलता उन लोगों को मिलती है जो असफलता से हार नहीं मानते, बल्कि तरीका बदलते हैं। अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो दूसरा रास्ता खोजते हैं।”

अकबर कुछ क्षण सोचते रहे। फिर उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान आ गई।
“बीरबल, आज तुमने मेरी आँखें खोल दीं। मेहनत के साथ बुद्धि और धैर्य भी ज़रूरी है।”

बीरबल ने सिर झुकाकर कहा,
“जहाँपनाह, जीवन में गिरना नहीं, बल्कि उठकर फिर प्रयास करना ही सच्ची जीत है।”

उस दिन के बाद अकबर ने न केवल अपने निर्णयों में, बल्कि अपने जीवन में भी यह सीख उतार ली—
सफलता ताकत से नहीं, समझदारी और निरंतर प्रयास से मिलती है।

a9560

અથડામણ થાય છે એ આપણી જ નબળાઈ છે. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150