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વ્યવહારમાં મતભેદ પડતા કેવી રીતે અટકાવી શકાય?

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dadabhagwan1150

ક્યાંક તો કશી કમી
વર્તાય છે
ખૂબીની જગ્યાએ ખામી
દેખાય છે…
-કામિની

kamini6601

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

मुझे सोशल मीडिया की मॉडल नहीं
अपने गांव की
चौथी गली वाली ही पसंद आती हैं
दिखाया नहीं करती

anisroshan324329

सादगी का दिखावा करने वाली के लिए

चैन है सादगी की राहों में,

घर बिक जाते है झूठे दिखावे में !

...

माना मैं खूबसूरत हूं .. पर लोग यहां, बेहतरीन के तलबगार हैं।।

anisroshan324329

'ચા' ની ચૂસકીનો અંદાજ,
'ઉર'ની ઊર્મિઓનો સંવાદ.

urmivala940395

ગુંજતું ભાષાનું ભાથું
આજ ગુણગાન ગાતું
આવકાલથી ફરી પાછું
ગુડમોર્નિંગ લખાતું…
-કામિની

kamini6601

Do you know that even a single negative thought towards a living being is detrimental?

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dadabhagwan1150

जो अंजाम की परवाह करता है
वो कुछ नहीं करता है..
बस डरता है..

momosh99

!! खुद के सपने पूरे करने के 🎯लिये किसी राजकुमारी 👸 की जरूरत नही है, असली राजकुमार 👑 तो वो होता है जो खुद की कहाँनी ✍️ खुद लिखे। !! 📚 📜

krick

शीर्षक - "जरुरी हैं क्या?

बात-बात में मुझसे लड़ती हो, कुछ पल में मुझसे गले लिपट जाती हो।

डॉट दूं तो तुम मुंह फुला लेती हो... मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या?

तुससे दूर चला जाऊँ, नयनों से आँसुओं की दरिया बहाने लगती हो।

मिलने की सिफ़ारिश करने लगती हो,

पल भर न मिलूँ तो आँखों से दरिया बहा देती हो।

दरिया बहाना ज़रूरी है क्या?

फूलों का ताज समझती हो, मुरझा न जाउँ, बड़ा खयाल रखती हो।

खयाल रखने से मना कर दूँ तो मुँह फुलाना ज़रूरी है क्या?

कवि-एसटीडी मौर्य✍️
मोबाईल न. 7648959825
#stdmaurya #poem

stdmaurya.392853

राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड के प्रस्तावित क़ानून की कुंजी
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(1) यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है।
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(2) यह कानून सभी हिन्दूओ के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) नामक ट्रस्ट का गठन करेगा, जिसका प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान कहलायेगा। हिन्दू संघ प्रधान वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा, और यदि आप उसके काम-काज से संतुष्ट नहीं है, तो वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर उसे निकालने और किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकते है। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
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(3) भारत के निम्नलिखित नागरिक हिन्दू बोर्ड के सदस्य हो सकेंगे :
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उन सभी समुदायों, पन्थो, सम्प्रदायों के अनुयायी जो स्वयं को हिन्दू या सनातनी या सनातनी हिन्दू कहते है।
सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि पन्थो के अनुयायी भी यदि इस बोर्ड में जुड़ना चाहते है तो इसकी सदस्यता ले सकेंगे।
यह क़ानून इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, पर कोई दायित्व या प्रतिबन्ध नहीं लगाता। इन धर्मो के अनुयायी स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे
[ टिप्पणी : यह क़ानून किसी भी प्रकार से उन नागरिको पर हिन्दू होने का लेबल नही लगाता जो स्वयं को हिन्दू नहीं कहते या हिन्दू नहीं कहलाना चाहते। उदाहरण के लिए यदि कोई जैन या सिक्ख पंथ का अनुयायी इसमें नामांकित होता है तो भी उसकी कानूनी-धार्मिक-सामाजिक पहचान प्रवृत कानूनों के अनुसार जैन / सिक्ख धर्म के अनुयायी के रूप में बनी रहेगी ]
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(4) प्रधानमंत्री एक अधिसूचना जारी करके राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड को सौंपेंगे। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयों का भी प्रबंधन करेगा जिन्हें किसी मंदिर के मालिको ने इसे स्वेच्छा से सौंप दिया है।
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(5) यदि एवं जब भारत के सभी मतदाताओ में से 45 करोड़ मतदाता इसी कानून में दी गयी जनमत संग्रह प्रक्रिया का प्रयोग करते हुए निचे दिए 3 मंदिरो के भूखंड बोर्ड को सौंप देते है तो हिन्दू बोर्ड इन मंदिरों की देख रेख करेगा :
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कृष्ण जन्म भूमि देवालय, मथुरा
काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी
अमरनाथ देवालय, कश्मीर
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(6) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय सनातन संप्रदाय रजिस्ट्रार नामक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जो उन सम्प्रदायों को लोकतांत्रिक रूप से प्रबंधित करने में व्यवस्थागत सहयोग करेगा जिनका उद्भव भारतीय उपमहाद्वीप की सनातन संस्कृति है, तथा वे एक पंथ या सम्प्रदाय के रूप में मान्यता प्राप्त धार्मिक ट्रस्ट है। ऐसे धार्मिक सम्प्रदायों में जैन, बौद्ध, शैव, वैष्णव, आर्य समाज आदि सभी भारतीय संप्रदाय शामिल है। रजिस्ट्रार का ट्रस्ट की धार्मिक मान्यताओ में कोई दखल नहीं होगा। सिख पंथ भी एक भारतीय संप्रदाय है किन्तु यह पहले से SGPC द्वारा शासित है, अत: सिक्ख पंथ रजिस्ट्रार के दायरे से बाहर रहेगा।
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(7) यदि संघ प्रधान, राष्ट्रिय सनातन रजिस्ट्रार, उनके स्टाफ एवं नागरिको के मध्य कोई आपसी विवाद होता है, या किसी मंदिर धारण करने वाले ट्रस्ट आदि के बीच स्वामित्व का कोई मामला आता है तो मामले का निपटान हिन्दू बोर्ड की सदस्य सूची में दर्ज नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम बोर्ड की मेम्बर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको मामला सुनकर फैसला देना होगा। जूरी का गठन बोर्ड की मेम्बर लिस्ट से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। मामले की प्रकृति अनुसार जूरी में 12 से 1500 तक नागरिक हो सकेंगे।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक पोस्टकार्ड / ट्विट भेजे – प्रधानमंत्री जी, कृपया हिन्दू बोर्ड गेजेट में छापे , #HinduBoard
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हिन्दु बोर्ड का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक में देखें -- https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2241776019273955
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sonukumai

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
वो लौट आया है अश्क लेकर मगर
           हम तो मर चुके थे,

उसे खबर ही नहीं हुई कि हम कब
             के गुज़र चुके थे,

तलाशता है वो अब पुराने, निशान
              मेरे मकान पर,

वो  छत  कहाँ से  बचा  के रखता
     दीवार-ओ-दर गिर चुके थे,

उसे लगा कि वो हाथ थामेगा और
        मैं फिर से मुस्कुराऊँगा,

वो धूप लेकर तब आया  छत पर
        जब साए ढल चुके थे,

अजीब  जि़द है  ये  उसकी  देखो
    कि प्यास बुझाएगा मेरी अब,

घड़ा  तो  उसने  भरा  है  लेकिन
        दरिया ही सूख चुके थे,

कहाँ की  वफ़ा  और  कैसा  रंज
    अब ये सब फ़िज़ूल बातें हैं,

वो ख़त वो अब  पढ़  रहा है बैठ
कर, जिनके हर्फ़ मिट चुके थे...🔥
╭─❀💔༻ 
╨──────────━❥
#Zakhmi -E-Zubani..✍🏼
#LoVeAaShiQ_SinGh
╨──────────━❥

loveguruaashiq.661810

तुम्हीं ने सफ़र करवाया था मोहब्बत की "कश्ती" पर...

अब नज़र ना फेर, मुझे "डूबता" हुआ भी देख।

anisroshan324329

tum pyaar ki sb se pyaari murt ho maa❣️🌸

krishnatadvi838176

अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।

rajukumarchaudhary502010

क्या इतना मुश्किल है?

कोई जो मुझसे पूछे, मेरी खुशी का राज क्या है?
तो कहूंगी, मैंने अपना 'वजूद' संभाल रखा है, इसलिए खुश हूं।
क्योंकि मैं हूं... और मैं ही रहूंगी...

क्यों किसी और के जैसा बनना है तुम्हें?
क्यों दूसरों के सांचे में ढलना है तुम्हें?
तुम जैसे हो, वैसे ही रहो, यही तुम्हारी पहचान है,
तुम्हारा अपना होना ही, सबसे बड़ा सम्मान है।

बस एक बार खुद से प्यार करना सीख लो,
फिर ये सारा जहां तुम्हें हसीन लगेगा।
एक बार खुद से मोहब्बत तो करके देखो,
बस एक बार... खुद से प्यार करके देखो।
​ढमक कहती है
क्या वाकई इतना मुश्किल है... खुद से प्यार करना?
अब वक्त है, खुद पर थोड़ा वक्त खर्च करो...
DHAMAK

heenagopiyani.493689

समझने को तो वो बहुत कुछ समझा..
पर जो समझना था वही नहीं समझा..
समय रहते वो समझा ही कहाँ मोहन..
वक़्त निकलने पर समझा तो क्या समझा..

momosh99

All are cordially invited to the Pujyashree Deepakbhai's Spiritual Discourse and Self-Realization ceremony, organized in Delhi, India.

Get the detailed schedule here: https://dbf.adalaj.org/VxOhqYlf

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dadabhagwan1150