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rajukumarchaudhary502010

📘 Tree Mindset (एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें) 📘 Tree Mindset

एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें

📘 Tree Mindset

एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें



हर वृक्ष एक छोटे से बीज से शुरू होता है। उसकी राह में बाधाएँ, तूफ़ान, सूखा, और कीट आते हैं फिर भी वह ऊपर बढ़ता है। Tree Mindset हमें सिखाता है कि जीवन में भी इसी तरह मजबूती, धैर्य और अनुकूलन से हम अपनी सर्वोच्च संभावनाएँ प्राप्त कर सकते हैं।



अध्याय 1 बीज का दर्शन

हर वृक्ष सबसे पहले एक छोटा सा बीज होता है। उस बीज में:

संभावनाएँ

जीवन की शक्ति

भविष्य के सपने


बिना मिट्टी में डाले, बिना पानी और धूप मिले, वह जीवन नहीं पा सकता। इसी तरह हमारा mindset भी ‘भूमि’ है अगर हम सकारात्मक सोच, सीखने की भूख और लक्ष्य की चाह को अपने भीतर बोएँ, तो हम जीवन में फल सकते हैं।

Key Insight: खुद को एक बीज मानो जिसमें हर चीज़ बनने की क्षमता है।



अध्याय 2 जड़ें गहरी करें

वृक्ष अपने वातावरण से पानी और पोषक तत्व लेने के लिए गहरी जड़ें फैलाता है।

इंसान के लिए:

आत्मिक जड़ें = आत्मविश्वास

सांस्कृतिक जड़ें = परंपरा और शिक्षा

मानव संबंधों की जड़ें = परिवार और दोस्त


अगर जड़ें मजबूत हैं, तो तूफान भी हिला नहीं सकता।

Daily Habit: हर दिन 10 मिनट अपने लक्ष्य के बारे में सोचें।



अध्याय 3 धैर्य से बढ़ना

वृक्ष रातों रात नहीं बढ़ता। वह हर मौसम में: ☀️ धूप सहता
🌧️ बारिश सहता
❄️ ठंड सहता
और फिर भी बढ़ता है।

इंसान को रोज़ थोड़ा सीखना और अभ्यास करना चाहिए। धैर्य ही सफलता का मूल मंत्र है।



अध्याय 4 तूफानों का स्वागत

जो पेड़ बहुत स्थिर जड़ें नहीं बनाता, वह छोटा ही रह जाता है। लेकिन जिनकी जड़े मजबूत होती हैं वे ही तूफान में भी डटते हैं।

💡 जीवन के तूफ़ान:

असफलताएँ

आलोचना

बदलती परिस्थितियाँ


चुनौतियाँ दर्द देती हैं, लेकिन अनुभव देती हैं।



अध्याय 5 प्रकाश की ओर

वृक्ष हमेशा सूर्य की दिशा की ओर बढ़ता है।

इंसान भी: 🌟 सकारात्मक सोच अपनाएँ
🌟 प्रेरणादायक लोगों के साथ रहें
🌟 लक्ष्य की ओर स्पष्ट दृष्टि रखें

जैसे प्रकाश वृक्ष को ऊँचाई देता है, वैसे सकारात्मकता इंसान को उन्नति देती है।


अध्याय 6 पतों की तरह शाखाएँ फैलाएँ

वृक्ष की शाखाएँ जितनी फैलती हैं, उतना ही वह अधिक सूरज की रोशनी पकड़ सकता है।

इंसान के जीवन में शाखाएँ हैं रिश्ते, दोस्त, सहकर्मी और नेटवर्क।

कहानी: राहुल नाम का लड़का अकेले काम करता था। उसने अपने आस-पास के लोगों की मदद की और उनसे सीखने की कोशिश की। कुछ सालों में वही अकेला लड़का एक बड़े उद्यमी बन गया।

अभ्यास: हर दिन कम से कम एक व्यक्ति से सीखें या मदद करें।


अध्याय 7 फल और फूल

वृक्ष का सबसे सुंदर हिस्सा उसके फल और फूल हैं।

फूल = छोटी उपलब्धियाँ

फल = बड़े लक्ष्य


कहानी: सीमा हर दिन 2 घंटे पढ़ाई करती थी। शुरुआत में नतीजा नहीं दिखा, लेकिन उसने धैर्य रखा। 6 महीने बाद वह स्कूल टॉपर बन गई।

अभ्यास: अपनी छोटी उपलब्धियों को नोट करें और सप्ताह में एक बार खुद को पुरस्कृत करें।


अध्याय 8 मूल्य का सृजन

जैसे वृक्ष अपने फल दूसरों को देता है, वैसे ही इंसान को भी समाज और लोगों को योगदान देना चाहिए।

कहानी: अजय अपनी सफलता के बाद गाँव के बच्चों को पढ़ाने लगा। कुछ सालों में बच्चे बड़े होकर समाज में योगदान देने लगे।

अभ्यास: हर महीने कम से कम एक व्यक्ति की मदद करें और जो आपने सीखा है, किसी को सिखाएँ।



अध्याय 9 प्रकृति से सीख

वृक्ष हर मौसम में संतुलन बनाए रखता है।

इंसान भी:

भावनाओं में संतुलन रखें

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाएँ

बदलावों को स्वीकारें


कहानी: नेहा अपने काम और परिवार के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी। उसने योग, ध्यान और टाइम मैनेजमेंट अपनाया। कुछ महीनों में उसका जीवन शांति और सफलता दोनों से भर गया।

अभ्यास: रोज़ 10 मिनट ध्यान या योग करें।


अध्याय 10 Tree Mindset का अभ्यास

रोज़ाना 3 स्टेप अभ्यास: 1️⃣ सोच का बीज बोना सुबह उठकर कहें: “मैं आज सीखूँगा, बढ़ूँगा और सकारात्मक रहूँगा।”. 2️⃣ जड़ों को मजबूत करना ध्यान, योग, आत्म-निरीक्षण। 3️⃣ शाखाएँ फैलाना और फल देना दूसरों की मदद करें, ज्ञान साझा करें।

Weekly Reflection: इस हफ्ते मैंने क्या नया सीखा? कौन सी चुनौती ने मुझे मजबूत बनाया? अगले हफ्ते मैं किस पर काम करूँगा?


सारांश

Tree Mindset सिखाता है:

सोच को मजबूत बनाना 🌱

धैर्य रखना 🌳

चुनौतियों को अवसर समझना 🍂

सकारात्मकता अपनाना 🌞

रिश्तों को मजबूत करना 🤝

उपलब्धियों का आनंद लेना 🎯

सेवा और समाज में योगदान देना 💖

संतुलन बनाए रखना ⚖️


“एक मजबूत जड़ वाला वृक्ष ही तूफानों में भी ऊँचा खड़ा रहता है।”



प्रेरक उद्धरण

1. “हर बड़ा वृक्ष पहले एक छोटा बीज था।”


2. “चुनौतियाँ ही आपकी जड़ें मजबूत करती हैं।”


3. “सकारात्मक सोच सूर्य की तरह है।”


4. “अपने ज्ञान और अनुभव का फल दूसरों को दें।”


5. “जड़ें मजबूत, शाखाएँ फैली, फल मीठे — यही है Tree Mindset।”

writer by Raju kumar chaudhary

rajukumarchaudhary502010

Thane came alive with devotion and celebration during the grand Pran Pratishtha of a new Trimandir, in the esteemed presence of Pujyashree Deepakbhai.

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dadabhagwan1150

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

तुम मुझसे रूठी हो,
पर मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम है।
हर पल तुम्हारी हँसी की आवाज़ मेरी सांसों में गूंजती है,
और हर खामोश लम्हा तुम्हारी याद से भर जाता है।

मैं जानता हूँ, मेरी बातों में कभी-कभी तूफ़ान आ जाते हैं,
पर मेरे दिल के कोने में सिर्फ़ तुम्हारी जगह है।
तुम्हारे बिना हर रंग फीका लगता है,
और हर गीत अधूरा सा लगता है।

अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बिना दुनिया बेरंग है,
तो क्या तुम मुझे माफ़ कर दोगी?
अगर मैं हाथ बढ़ाऊँ और कहूँ,
“चलो फिर से हँसें, साथ में,”
क्या तुम उस पल को फिर से मेरे साथ जीओगी?

मैं वादा करता हूँ,
ना कोई बड़ी बात होगी, ना कोई झगड़ा याद रहेगा।
सिर्फ़ तुम और मैं,
और वो नन्ही-सी मुस्कान जो तुम्हारे होंठों पर लौट आए।

तो क्या तुम मेरी दुनिया में फिर से लौटोगी,
और मेरे हर एक दिन को रोशनी से भर दोगी?

a9560

नाम: खामोशी में तेरी

तुम पास हो, फिर भी दूर हो,
हर नजर मिलती है, पर हाथ नहीं मिलता।
कदम तेरे मेरे पास आते हैं,
पर राहें अचानक किसी अजनबी की तरह मोड़ लेती हैं।

तुम हंसते हो, और मेरी धड़कनें बढ़ जाती हैं,
शब्दों में कहीं दबा सा,
कोई सवाल उठता है—
क्यों हमारी बातें अधूरी रह जाती हैं?

हवा में तेरी खुशबू आती है,
और मैं खुद को रोकता हूँ,
ना छू लूँ, ना बोल दूँ,
पर दिल की ख्वाहिश, हर पल बढ़ती है।

तेरी आँखों में जो झलक है,
वो कहती है—“आओ।”
और आवाज़ मेरी,
सिर्फ़ खामोशी में फँस जाती है।

हर रात यही सोचता हूँ,
क्या मैं सही समय पर पहुँचूँगा?
या हमेशा इस खामोशी में,
तेरे करीब रहकर दूर ही रह जाऊँगा?

a9560

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शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

तुम क्यों हर किसी को दिखाते हो अपना जख़्म खोलकर..
मोहन यहाँ कौन हर किसी के जख्मों पर मरहम लगाता है..

momosh99

​"मैं क्या लिखूँ?
खुद को नवाब लिखूँ या खुद को फ़कीर लिखूँ?
​नवाब लिखता हूँ, तो फ़कीर छूट जाता है,
फ़कीर लिखता हूँ, तो नवाब छूट जाता है।
​हसीना की सूरत देखूँ, तो अपनी सूरत भूल जाता हूँ,
तुम अपने लफ्ज़ों से बयां तो करो—
अपनी स्याही से खुद को नवाब लिखूँ या फ़कीर लिखूँ?
​कदम-कदम चलकर मैं यहाँ तक आया हूँ,
मैं सोचता हूँ... तुम अपने लफ्ज़ों से बयां करो,
गर तुम बयां नहीं करते, तो मैं खुद को फ़कीर ही लिखता हूँ।"
​- सत्येंद्र कुमार "एसटीडी"
कटनी, मध्य प्रदेश
दूरभाष -7648959825

stdmaurya.392853

नेपाल मेरो जान, नेपाल मेरो शानगीत का शीर्षक: नेपाल मेरो जान, नेपाल मेरो शान
अंतरा 1:
नेपाल मेरो मातृभूमि, प्यारको देश मेरो,
पहाड, तराई र हिमाल, गर्व छ यहाँ मेरो।
शहीदको रगतले रंगिएको, धर्ती सुनौलो छ,
एकता, भाइकता र माया, यो देशको आधार हो।
कोरस:
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
अंतरा 2:
जनताको स्वाभिमान, हाम्रो पहिचान हो,
संघर्षको बाटोमा, हाम्रो विश्वास प्रबल छ।
हर कठिनाइ, हर बाधा, सामना गरौं सँगै,
नेपालको चमक सधैं, आकाशमा चम्किरहोस्।
कोरस:
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
अंतरा 3 (संस्कार र भविष्य):
बच्चाहरुको हाँसो, बगैंचामा फूल जस्तै,
शिक्षा र संस्कारले, बनाउँ हामी उज्यालो।
राष्ट्र निर्माणमा हामी, हातेमालो गरौं सधैं,
नेपाल हाम्रो घर हो, यसलाई माया गरौं।
कोरस (दोहरो):
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।
नेपाल! मेरो जान, नेपाल! मेरो शान,
सपना पुरा गरौं हामी, उठाउँ देशको मान।

rajukumarchaudhary502010

अब एकांत ही मेरा सुफर है......

abhi006

સમય દરેક સમયને બદલી નાખે છે,
ફક્ત સમયને પણ થોડો સમય આપો.

ફુરસદ મિલે તો ફરમાઈશ હૈ ચાય કી.......

#Mrugzal
#TeaLover

johanjohan3745

दूरियां तुम्हारी हमें बहुत खलतीं मोहन,,
तुम अगर कभी हमारे करीब से रहे होते,,

momosh99

Do you know that the One whose knowledge and vision have become pure (shuddha), that is the Self and that verily is the shuddha chidroop?

Read more on: https://dbf.adalaj.org/gJVRdTbc

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dadabhagwan1150

क्या कोई बुक लिखी जाये..? 📚🌻🤍
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desaipragati1108gmail.com102305

सपने बड़े रखो📖 सपने बड़े रखो
भाग – 1 : बारिश में भीगता सपना
बारिश ज़ोरों से हो रही थी।
आसमान मानो फट पड़ा हो। काली घटाएँ, तेज़ हवा और सड़क पर बहता पानी—सब कुछ किसी गरीब की ज़िंदगी जैसा ही उथल-पुथल से भरा हुआ।
उसी बारिश में एक लड़का तेज़ कदमों से चला जा रहा था।
फटे हुए चप्पल, भीगे कपड़े और आँखों में थकान।
उसका नाम राहुल था।
राहुल कोई आम लड़का नहीं था, लेकिन उसकी ज़िंदगी बिल्कुल आम से भी बदतर थी।
वह गरीब था—इतना गरीब कि सपने देखना भी उसे कई बार गुनाह लगता था।
बारिश की बूँदें उसके चेहरे पर गिर रही थीं, लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ रहा था।
उसे बस घर पहुँचना था।
तभी अचानक—
सड़ाक… सड़ाक…
एक चमचमाती काली कार उसके बगल से गुज़री।
इतनी तेज़ कि सड़क का गंदा पानी उछलकर राहुल के कपड़ों पर गिर पड़ा।
राहुल रुक गया।
उसने कार को जाते हुए देखा।
कार के अंदर ए.सी. चल रहा होगा…
सूखे कपड़े, मुलायम सीट, मोबाइल पर बात करता कोई अमीर आदमी…
राहुल ने गहरी साँस ली।
“काश… मेरी ज़िंदगी भी ऐसी होती,”
उसने मन ही मन कहा।
उसकी आँखों में एक सपना चमका—
बड़ा घर, अच्छी कार, माँ के चेहरे पर मुस्कान।
लेकिन अगले ही पल हकीकत ने उसे वापस ज़मीन पर ला पटका।
वह फिर चल पड़ा।
टूटा हुआ घर, टूटा हुआ दिल
जब राहुल अपने घर पहुँचा, तो नज़ारा और भी दर्दनाक था।
छोटी-सी झोपड़ी।
टपकती छत।
अंदर जगह-जगह पानी भरा हुआ।
उसकी माँ एक कोने में बैठी थी, पुराने बर्तन के नीचे पानी टपकने से रोकने की कोशिश कर रही थी।
“आ गया बेटा?”
माँ ने थकी हुई आवाज़ में कहा।
राहुल कुछ नहीं बोला।
उसने अपनी माँ के हाथ देखे—
झुर्रियों से भरे, मेहनत से कठोर हो चुके।
“आज भी काम नहीं मिला?”
माँ ने पूछा।
राहुल ने सिर झुका लिया।
“नहीं माँ…”
माँ ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखें बहुत कुछ कह रही थीं।
बेबस माँ, बेबस बेटा।
छत से टप-टप पानी गिर रहा था,
मानो हर बूँद राहुल के दिल पर गिर रही हो।
उसी पल राहुल ने मन ही मन एक कसम खाई—
“मैं ऐसा दिन ज़रूर लाऊँगा
जब मेरी माँ को इस बारिश में डरना नहीं पड़ेगा।”
सपने देखने की हिम्मत
रात को राहुल सो नहीं सका।
बारिश की आवाज़, माँ की चिंता और उस चमचमाती कार की तस्वीर—सब दिमाग में घूम रहा था।
“क्या मैं भी अमीर बन सकता हूँ?”
उसने खुद से पूछा।
दुनिया ने उसे हमेशा यही सिखाया था— गरीब पैदा हुए हो, गरीब ही मरोगे।
लेकिन राहुल का दिल मानने को तैयार नहीं था।
उसने आँखें बंद कीं और खुद को एक बड़े ऑफिस में देखा।
सूट पहने, आत्मविश्वास से भरा हुआ।
लोग उसे “सर” कहकर बुला रहे थे।
उस रात, पहली बार राहुल ने बड़ा सपना देखा।
अगली सुबह
सुबह बारिश रुक चुकी थी।
लेकिन राहुल के अंदर कुछ जाग चुका था।
वह जानता था— रास्ता आसान नहीं होगा।
भूख, ताने, असफलता—सब झेलनी पड़ेगी।
फिर भी वह मुस्कराया।
क्योंकि उसने तय कर लिया था—
“मैं हालात का शिकार नहीं बनूँगा,
मैं अपनी किस्मत खुद लिखूँगा।🌟 प्रेरणा की चमक:
“जब परिस्थितियाँ कठिन हों, सपने बड़े रखो। अगर आज तुम्हारा कदम धीमा है, तो भी याद रखो—हर छोटी कोशिश तुम्हें उस बड़े सपने के करीब ले जाती है। राहुल की तरह, तुम्हें भी अपनी किस्मत खुद लिखनी है। अगली बार देखो कैसे राहुल की मेहनत और हिम्मत उसे उसकी मंज़िल तक ले जाएगी।

rajukumarchaudhary502010

TREE MINDSET गाछी से सीख

जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणादायक किताब


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भूमिका

प्रकृति हमारी सबसे बड़ी गुरु है। अगर हम ध्यान से देखें, तो हर पेड़ (गाछी) हमें जीवन जीने का सलीका सिखाता है। वह बिना बोले बहुत कुछ कह देता है—धैर्य, साहस, संघर्ष, सेवा और शांति। यह किताब उन्हीं सीखों का संग्रह है, जो एक गाछी हमें रोज़ देती है, लेकिन हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।


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अध्याय 1: गाछी क्या है

गाछी सिर्फ लकड़ी और पत्तों का ढांचा नहीं है। वह जीवन का प्रतीक है। वह जन्म लेता है, बढ़ता है, संघर्ष करता है और अंत में दूसरों के काम आता है। गाछी हमें सिखाता है कि जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी होता है।


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अध्याय 2: गाछी निडर है

आंधी हो, तूफ़ान हो या तेज़ धूप—गाछी डटा रहता है। वह डरता नहीं, झुकता नहीं। जीवन में भी जब कठिनाइयाँ आएँ, तो गाछी की तरह निडर बनना चाहिए। डर सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन है।


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अध्याय 3: डरना मना है

जो डर गया, वह हार गया। गाछी हमें सिखाता है कि डर के आगे झुकना नहीं है। हालात चाहे जैसे भी हों, आगे बढ़ते रहना ही जीवन का नियम है।


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अध्याय 4: धैर्य रखो

एक पेड़ एक दिन में बड़ा नहीं होता। उसे फल देने में सालों लग जाते हैं। उसी तरह जीवन में भी धैर्य बहुत ज़रूरी है। जो धैर्य रखता है, वही लंबे समय तक टिकता है।


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अध्याय 5: खामोश रहो

गाछी शोर नहीं मचाता। वह चुपचाप अपना काम करता है—छाया देता है, फल देता है, हवा को शुद्ध करता है। जीवन में भी ज़्यादा बोलने से अच्छा है ज़्यादा काम करना। खामोशी में ही असली ताकत होती है।


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अध्याय 6: सपने बड़े रखो

गाछी हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है। वह कभी ज़मीन से चिपक कर नहीं रहता। यह हमें सिखाता है कि सपने हमेशा बड़े रखने चाहिए। छोटे सपने इंसान

rajukumarchaudhary502010

When the axe came into the forest, the trees said, "The handle is one of us." They didn't fear the blade, because the danger felt familiar. That's how destruction often begins,not from enemies, but from those who look like us, speak like us, and gain our trust. By the time the truth is clear, the damage is already done.

noname414487

Die with memories, not dreams. Dreams are meant to be chased, not stored for "someday." A life well lived is not measured by what you wished for, but by what you experienced, felt deeply, and turned into memories.

noname414487