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Dhamak

Dhamak Matrubharti Verified

@heenagopiyani.493689
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FIR vahi subah Hai

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फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...

इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)

मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)

तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...

फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...

हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK

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मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास)

मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास
ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास
मैं और मेरा मोबाइल

जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए
रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए
घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है
सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है

कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ
हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ
मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया
मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया

ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं

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स्वार्थ के इस मेले में अब, रिश्ते कैसे परखे जाएँ,
साथ निभाने वाले ही अब, राहों में भटकाएँ।

मीठी मुस्कान के पीछे यहाँ, बरसों पुराने बैर छुपे,
कौन है अपना, कौन है पराया, हर चेहरे में ज़हर भरे।

नहीं है जानता कोई यहाँ, कौन किसका साया है,
अपनी ही राह चलना बेहतर, उम्मीद रखना माया है।

नहीं जानता कोई यहाँ, किसका कौन सा रिश्ता है,
अपनी ही मंज़िल खुद बनानी, बाकी सब माया है।
DHAMAK

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​શિયાળાની એક આરામદાયક સાંજે,
મારા વીચારો😊

​"ખરેખર, જીવનની સાચી શાંતિ
નાની-નાની પળોમાં જ છુપાયેલી હોય છે.
​શિયાળાની ઠંડી સાંજ હોય,
બારીની બહાર શીતળ પવન લહેરાતો હોય,
રૂમમાં ઝીણી કમ્ફર્ટેબલ લાઈટનો મીઠો પ્રકાશ હોય
અને હાથમાં ગરમાગરમ મસાલા ચાનો કપ હોય...
સાથે ગમતું પુસ્તક અને પોચા,નરમ ઓશીકાનો
સાથ હોય, ત્યારે મનને સાચો આરામ મળે છે.
​બસ, થોડા ધીમા પડો, ઊંડો શ્વાસ લો અને
આજની આ સુંદર પળને માણી લો;
આવતીકાલની ચિંતાને થોડીવાર માટે થોભાવી દો."
(મારા આ વિચારો આજની ગુલાબી ઠંડીને નામ)

લી. ઢમક

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बोलती नहीं, फिर भी लफ़्ज़ कहते हैं — वो ढमक है,
मेरा मौन भी बहुत सी बातें कहता है — वो ढमक है।

मैं टूटकर भी कभी बिखरी नहीं,
वक़्त के सामने खड़ी रहने वाली रहती है — वो ढमक है।

नज़रें झुकी हैं, मगर हिम्मत अब भी ज़िंदा है,
कम शब्दों में गहरा अर्थ बहता है — वो ढमक है।

कोई पूछे अगर इस शायरी के पीछे का नाम,
हल्की-सी मुस्कान से कह देना — वो ढमक है।
DHAMAK😂
(શાયરી)

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રંગોની વચ્ચે
સાંભળો મારુ ગીત

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હમ સાથ નહીં હૈ તો ક્યા હે ગમ
કભી કભી મિલતે હૈ વો ભી ક્યા હે કમ
સાંભળો મારુ નવું ગીત નું વર્ઝન

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નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
હે જીવન, થોડી વાર થંભીજા
આજે ખુશી બોલે.

નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
પંખી બોલે ધીમેથી,
મુક્ત થઈને જીવતા શીખી લે.

હે રંગ, હે તાલ,
હે રાત રમઝટ ભરી,
હૈયાં ખૂલે આજ તો,
વાત નવી કરી.

પિંજરું જૂનું છે,
પણ પાંખ હજુ જાગે છે,
એક પગ સંસાર માં,
બીજો સપનામાં ભાગે છે.

નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
પંખી બોલે ધીમેથી, જીવતા શીખી લે.

ઢમક.

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हम साथ नहीं हैं तो क्या है ग़म,
कभी-कभी मिलते हैं, वो भी क्या है कम।
जी लेंगे वही पुरानी यादों के संग,
आज तन्हा सी ख़ामोशी में भी हम रहें बेफ़िक्र रंग।
दूरी में भी एक अपनापन रहता है,
ख़ामोश रहकर भी दिल सब कहता है।
और जब मिलेंगे, बनाएँगे नई यादें,
बिना किसी शिकायत के, बिना किसी फ़रियादें।
जितना मिलना हुआ, वही तो काफ़ी है,
हर एक लम्हा आज भी क़ीमती है।
हम साथ नहीं हैं तो क्या है ग़म,
कभी-कभी मिलते हैं, वो भी क्या है कम।

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