🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
वफ़ा की रस्म को बस इक बार
निभाने आजा,
तू मेरे ज़ख्मों पे मरहम ही
लगाने आजा,
माना कि दरमियाँ अब वो पहले
सी बात नहीं,
पर ख़ुद को मेरी नज़रों में सच
दिखाने आजा,
तूने वादे किए थे, कि साथ न
छूटेंगे कभी,
उन झूठे वादों का ही मान बढ़ाने
आजा,
ज़माना तो खड़ा है मेरी रुस्वाई
के इंतज़ार में,
तू अपनी बेरुख़ी का ही, जश्न
मनाने आजा,
अब तो रातों की नींद भी हम से
रूठ गई है,
इन जलती आँखों को, ख़्वाब
दिखाने आजा,
ये आख़िरी बार है कि तुझे
पुकारा है मैंने,
फिर कभी न लौटूंगा, ये यक़ीन
दिलाने आजा…🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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