Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

स्वर्ग की अप्सरा तुम, दिव्य रूप धारी
नृत्य करतीं स्वर्ग में, अप्सरा तुम्हारी
गंधर्वों के साथ में, सुरों की ताल पर
नाचतीं तुम स्वर्ग में, अद्भुत सौंदर्य धार

तुम्हारे बालों में, फूलों की माला
तुम्हारे चेहरे पर, मुस्कान की लहर
तुम्हारे नृत्य में, स्वर्ग की झलक
तुम्हारी सुंदरता, हृदय को छू ले

स्वर्ग की अप्सरा, तुम्हारी कहानी
एक अद्भुत कथा, जो हृदय को छू जाए
तुम्हारी सुंदरता, स्वर्ग की शोभा
तुम्हारा नृत्य, हृदय को मोह ले।https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

कोई और इल्जाम हों तो वो भी रख देते ना हमारे नाम..
तुम्हारे पास कौन से इल्जामों का अकाल पड़ गया..

momosh99

Trachtenberg Speed System of Basic Mathematics


Forgot your calculator? Use Trachtenberg Speed Math instead! ×11 rule explained



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komal14699gmail.com7374

नवभारत टीम का हार्दिक धन्यवाद आज के नवभारत प्लस(मुंबई)में मेरी रचना को प्रकाशित करने के लिए 🙏

daveabha6

💖💖💖

avinashgondukupe96025gmail.com5127

આશા અમર છે.....💐🙏

monaghelani79gmailco

🙃❤️

avinashgondukupe96025gmail.com5127

Do you know that when we satisfy someone’s heart, then the God within that person blesses us?

Read more on: https://dbf.adalaj.org/cnoo7ffF

#lifelessons #lifeadvice #relationshiptips #relationshipadvice #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🙏🙏जो लोग हथियारों का बिजनेस करते हैं,

उन लोगों को,

शांति और शांति-वार्ता ऐ बहुत कम पसंद होती है।🦚🦚

parmarmayur6557

Good morning friends.. have a great week

kattupayas.101947

" હે ઈશ્વર "

નતમસ્તક છું હું, હે ઈશ્વર.
બીજું તો શું કહું? હે ઈશ્વર.

કસોટી સમજીને જીવનની,
કષ્ટો બધાં સહું, હે ઈશ્વર.

આસ્થા ન ડગમગવા દઈસ,
તારા સમીપ રહું, હે ઈશ્વર.

અંત વેળા પણ રહે સામે તું,
ન માંગુ એથી બહુ, હે ઈશ્વર.

"વ્યોમ" પર તું, ભોમ પર હું.
છતાં પણ તને ચહું, હે ઈશ્વર.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

हां हम बड़े हो गए
कविता के भाग 2

हां हमें बड़े होने दो
कविता


पर क्या हम बढ़े हैं



हमें बड़े होने दो
हमें रोने दो हमें जी भर हंसने दो
हमें हमारी राह चुन्नी दो
हमें हमारे पसंद के कपड़े पहने दो
हां हमें हमारे पसंद के जीवन साथी खुद ही ढूंढने दो




हमें अकेला चलना है
हमें सचमुच में बड़े होना है



हां हमें बड़े होने दो
हमें दुनिया से पहले खुद को संभालने दो
हां हमें बड़े होने दो
सचमुच में बड़े होने दो




बड़े होने का मतलब समाज में
बस हाइट बढ़ाना है उम्र बढ़ाना है



पर हमारे लिए हमारी हाइट
हमारी उम्र
हमारे बढ़ाने की कोई एविडेंस नहीं है


बस थोड़ी बढ़ी बात है
हम हाइट और उम्र में बड़े हो गए
पर हम अंदर से अभी बच्चे होते हैं




हमारे सर पर आप अपने ख्वाइओ की बोझ मत डालो
हमें अपने भाढ़ पहले संभालने दो
हम खुद को नहीं संभाल सकते
अभी तक


और आप अपनी दुनिया के सारे भारी भर्कभ बोझ
हमारे आंचल में लाकर रख देते हैं
हां हम अभी बड़े नहीं हुए



हमें पहले अपने पैर बढ़कर
कुछ कदम खुद तो चलने दो
हमें गिरकर
खुद संभालने तो दो
हां मैं बड़े होने तो दो



हम अभी तक बढ़े नहीं हैं
हम खुद को संभाले नहीं सकते हैं
बस सब कुछ संभालते हुए
अंदर से टूट चुके हैं



हम सब संभालते हुए
शरीर से जिंदा है
पर अंदर से मर चुके हैं




उस मासूम बच्ची को
जिसे बड़े होने चाहिए था
उसे अंदर ही दफना चुके हैं



जो दुनिया देखना चाहता था
जो खुलकर जीना चाहता था
जो हमेशा हवाओं की तरह बेहकना चाहता था



वह ख्वाहिश सबके ख्वाहिशों में आकर
दम तोड़ दिया
हां वह मासूम बच्ची
कभी बढ़ी हुई ही नहीं




बस चुप रह गई
बड़े होने कि हुड़ में
समाज के दबाव में
अपनों की उम्मीद में


बस कहीं पीछे छूट गई अपने
ख्वाहिशों के गला दबाते हुए




हां उस बच्चों को भी बड़े होने दो
उसे भी समाज में जिंदा होकर
जीने की आजादी दो
हां उन्हें बड़े होने दो





अगर यह कविता आप सबको पसंद आए तो
आगे बढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखकअभिनिशा❤️🦋💯

abhinisha

हां हम बड़े हो गए पार्ट 1

कविता

हां हम बड़े हो गए



स्कूल छुट्टी कॉलेज खत्म हो गई
हां हम बड़े हो गए


हाथों से खिलौने छोटे
किताबें साइड में रह गए


हाथों में बस झाड़ू पोछा रहेगी
और दिमाग में गरस्ती का जिम्मेदारी
हां हम बड़े हो गए



उम्र में
सच में
पर हम बड़े नहीं हुए कभी
खुद के भावनाओं को संभालने के लिए



हां हम बड़े रहे हमेशा
खुद की भावनाओं को छुपाने के लिए
पर हम बड़े हुए ही नहीं
राहों पर कभी अकेले चलने के लिए




पर हम बढ़े रहे सबको संभालने के लिए
भलो हम खुद को ना संभाल सके
अपनी भावनाओं को ना सामान सके



पर हम जिम्मेदारियां को संभाल सकते हैं
क्योंकि जिम्मेदारियां के लिए
हम बड़े होते हैं
खुद के लिए नहीं



खुद के फैसले लेने के लिए नहीं
क्या करना है हमें
यह फैसला लेने के लिए नहीं
कहां जाना है क्या पहना है
और क्या खाना है
यह डिसाइड करने के लिए
हम कभी बड़े हुई ही नहीं




बस बड़े हो गए हैं
समाज की तरफ से
हम बच्चे नहीं रहे



हम रो नहीं सकते
जब हमें तकलीफ हो
हम जोर-जोर से हंस नहीं सकते
जब हम खुश हो
हम शिकायत भी नहीं कर सकते
जब हमें दर्द हो



हम किसी को ना भी नही कहे सकते
चाहे हम किसी के हमी में खुद को
कुर्बान ही क्यों नाकर दे
इस हद तक हम बढ़े हैं





अगर कविता आप सबको पसंद आए तो
आगे बढ़ते रही
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा❤️🦋💯

abhinisha

मेरा अपना कुछ भी नहीं
देखना कल अप्रैल भी तेरा (13) ही होगा।।

nandiv

My Tamil novel "நிழல் தரும் வசந்தம்"part 7 going to be published @7pm 13/4/26.Tommorow.

kattupayas.101947

who is your MOoN? 🌛

avinashgondukupe96025gmail.com5127

Goodnight friends sleep well

kattupayas.101947

😎

avinashgondukupe96025gmail.com5127

बेवफाई बढ़ गईं है आजकल इश्क़ में मोहन..
वफ़ादार शायद अब इश्क़ से परहेज करने लगे हैँ..

momosh99

रिकामा फ्लॅट

दुपारी तीन वाजता
दरवाजा उघडतो मी
आणि आत शिरतो 
हवा स्थिर आहे
टेबलावर धूळ
फ्रिजमध्ये शांतता
गुंजन करत आहे
आणि खिडकीतून येणारा प्रकाश
मला एकटेपणाची आठवण करून देतो 
मी खुर्चीवर बसतो
काहीच न बोलता
फक्त ऐकतो
माझ्या श्वासाची लय
मोजतो आहे...
शांत, संथ ; स्वतःची लय
रिकाम्या फ्लॅटमध्ये
हे रिकामेपण
मला बाहेरच्या गर्दीपेक्षा
जास्त जवळचे वाटते 
इथे काहीही नसते
पण तरीही
सर्व काही असते
फक्त मी
आणि माझा श्वास
आणि हा क्षण
जो पूर्णपणे माझा आहे
वर्तमान इथेच आहे
शांततेच्या या निवाऱ्यात
मी जिवंत आहे
फक्त याच श्वासाने.
© - अजय भुजबळ परभणीकर

ajaymarotraobhujbal128199

प्रेम हमेशा ही पूर्ण होता है प्रेम मे कहा अधूरापन बचता है
इसके #_मिलन और #_विरह ... दो ही आयाम हैं।
मिलन में प्रिय बस सामने होता है....
पर...
विरह में तो वह रोम-रोम में... रग-रग में होता है!!

अगर अधूरापन महसूस कर रहे हैं...
इसका मतलब है आपने प्रेम किया ही नहीं...

narayanmahajan.307843

...प्रवास...."..*
.........नाते"आपल्या..दोघांचे..
.जगरहाटी..च्या.ही."पल्याड"...!
..वेगवेगळ्या..प्रकारे..मी ते जपत.असते."जीवापाड"..
.दुर..दुर.खुप ..एकमेकापासुन....
..पण वाटते.आहोत."आसपास".....!!
..माझ्या.मनात."तु"
..तुझ्या..ह्रुदयात.पण मीच..असते.."खास"..!
...भेटत..तर असतो.रोजच..फोनवर.दिवसभर..!
.तरीही.मन भरत नसते.....!!
.दोन..मनांची.."जवळीक".ईतकी.कशी झाली..?
.हेच,,खरेतर.उमगत.नसते...!!!
.."मागणे"काहीच...नसते...या "नात्यातुन"दोघास...!!
.."फक्त"..चालत रहावासा....वाटतो.....
.निरंतर...असाच.प्रवास"....

......*..**..**....**..**व्रुषाली*..**..**

jayvrishaligmailcom

“अधूरे हिसाबों में हूं”

ए सच कहूं कि आजकल मैं मुश्किलों में हूं,
बस खाली ये वक़्त गुज़रने के प्रयासों में हूं।

कभी हौसला था जो आसमां को छू लेने का,
वो बिखरे हुए एहसासों की टूटी किताबों में हूं।

न रास्ता कोई साफ़ है, न ही मंज़िल का पता,
मैं धुंधले से सफ़र और अधूरे हिसाबों में हूं।

कभी जो अपने थे, वही अब अजनबी से हुए,
मैं रिश्तों की भीड़ में सबसे तन्हा नक़ाबों में हूं।

न अब शिकवा, न शिकायत किसी मोड़ पर,
बस अपने सवालों के अनसुने जवाबों में हूं।

कभी रोशनी थी, वो भी अब सिमट सी गई,
मैं अंधेरों के शहर और खामोश सराबों में हूं।

मैं अपनी ही कहानी का टूटा हुआ हूं, “प्रसंग”,
हर मोड़ पर बिखरा मगर फिर भी यादों में हूं।

प्रसंग
प्रणयराज रणवीर

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