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New bites

यत्र भयस्य समाप्तिः भवति तत्र वास्तविकजीवनं आरभ्यते 🌿



हम कितनी ही कोशिश कर लें — नए कदम उठाने की चाह हो, सपने बड़े हों — पर अगर हमारे अंदर का भय हमें घेरकर रखे रहता है तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। भय हमारी सबसे बड़ी दीवार है।

जब हम अपनी छोटी-छोटी चिंताओं और डर को पहचानकर उनका सामना करते हैं, तभी नयापन, अवसर और सच्चा अनुभव हमारे जीवन में आता है।

nensivithalani.210365

Goodnight friends

kattupayas.101947

प्यार करनेवाले आशिक़ भी
बहोत अजीब होते हैं
समझकर खिलौना चांद को
महबूब के कदमों में रखते हैं

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Niyas KN shows that leadership is a daily choice.

niyaskn

🌸 विश्वकर्मा जी की कहानी

बहुत समय पहले देवताओं को अपने महल, नगर और अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए किसी कारीगर की ज़रूरत थी। तब भगवान ने विश्वकर्मा जी को बनाया।

विश्वकर्मा जी बहुत बड़े शिल्पकार और इंजीनियर थे। उन्होंने ही –

स्वर्ग का सुंदर इन्द्रपुरी बनाया।

भगवान कृष्ण के लिए समुद्र के अंदर द्वारका नगरी बनाई।

रावण के लिए सोने की लंका बनाई।

पांडवों के लिए इन्द्रप्रस्थ नगरी बनाई।


उन्होंने ही देवताओं के लिए कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र भी बनाए –
जैसे भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और इन्द्र का वज्र।

देवताओं को युद्ध में हमेशा जीत इसी वजह से मिलती थी।
इसलिए विश्वकर्मा जी को काम और कला के देवता कहा जाता है।

हर साल लोग अपने औज़ार, मशीन, गाड़ी और काम करने की जगह की पूजा करते हैं ताकि भगवान विश्वकर्मा की कृपा बनी रहे और काम में तरक्की हो।

rajukumarchaudhary502010

मै अपने वजूद को पहचान नही पाया
हवा मुझे छू कर निकली मै जान नही पाया
बादल बसरसने को थे दरिया थे भरने को
मै खड़ा लिये अपनी पतंग की डोर
और वक्त रहते भी उसे उतार नही पाया.

mashaallhakhan600196

🌸 विश्वकर्मा जी की कहानी

बहुत समय पहले देवताओं को अपने महल, नगर और अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए किसी कारीगर की ज़रूरत थी। तब भगवान ने विश्वकर्मा जी को बनाया।

विश्वकर्मा जी बहुत बड़े शिल्पकार और इंजीनियर थे। उन्होंने ही –

स्वर्ग का सुंदर इन्द्रपुरी बनाया।

भगवान कृष्ण के लिए समुद्र के अंदर द्वारका नगरी बनाई।

रावण के लिए सोने की लंका बनाई।

पांडवों के लिए इन्द्रप्रस्थ नगरी बनाई।


उन्होंने ही देवताओं के लिए कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र भी बनाए –
जैसे भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और इन्द्र का वज्र।

देवताओं को युद्ध में हमेशा जीत इसी वजह से मिलती थी।
इसलिए विश्वकर्मा जी को काम और कला के देवता कहा जाता है।

हर साल लोग अपने औज़ार, मशीन, गाड़ी और काम करने की जगह की पूजा करते हैं ताकि भगवान विश्वकर्मा की कृपा बनी रहे और काम में तरक्की हो।

rajukumarchaudhary502010

*सुन्दर वो*
मेरे हुस्न पे फ़िदा यूँ हुए,
कि मेरे क़रीब से गुज़रते हुए
कहीं और भटक गए।

न जाने वो
जो मुझसे छूटकर चले थे,
मंज़िलों पे पहुँचकर भी
ख़ुद को पा न सके।

और मैं...
जब किसी गली को ठुकरा देती हूँ,
जहाँ वो बस चुके होते हैं,
तो लगता है
या तो वो रूह से उतर चुके हैं,
या फिर
मेरे ख़यालों में हमेशा के लिए
क़ैद हो गए हैं।
_Mohiniwrites

neelamshah6821

गीत
कुकुभ छंद
मात्रा भार 16/14

प्रभु मुझको वरदान यही दो,
सुख के कुछ पल दो पुलकन।
दुख से चाहे झोली भर दो,
मानवता की हो धड़कन।।

सदा बनूँ दूजा हित साधक,
नहीं किसी से हो अनबन।।

सत्य कह रहा हूँ मैं तुमसे,
जग से मुझको प्यार मिला।
मात-पिता के काँधे चढ़कर,
उनका बड़ा दुलार मिला।।

जीवन भर यादों की पूँजी,
मिला सदा ही अपनापन।

बड़ा हुआ तो घर में अपने,
छोटों से सम्मान मिला।
सानिध्य वरिष्ठों का पाकर,
नित गोदी में लाड़ मिला।।

दोस्तों से खुशियाँ हैं पाईं,
जिसे निभाया आजीवन।।

यौवन में है साथ निभाया,
गृह लक्ष्मी जब घर आई।
सुलझाया मेरी हर उलझन,
वंश लता तब हर्षाई।।

बचपन से आँगन हर्षाया।
तब भविष्य चिंतन मंथन।।

हुई शारदे की अनुकम्पा,
कलम पकड़ ली हाथों में।
मानव की पीड़ा को लिख लिख,
बसा लिया है साँसों में।।

लेखक का कर्तव्य निभाया,
मानवता हित संवर्धन।

जलूँ दीप सा आँगन-आँगन,
तमस हरूँ जग का हरदम।
सुख समृद्धि की वर्षा नित हो,
यही कामना करते हम।।

राष्ट्रभक्ति जन-जन में मचले,
देश प्रेम का अभिसिंचन।।

प्रभु मुझको वरदान यही दो,
सुख के कुछ पल दो पुलकन।
दुख से चाहे झोली भर दो,
मानवता की हो धड़कन।।

मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'

manojkumarshukla2029

I always wonder where is the destination?

kattupayas.101947

is it true?

kattupayas.101947

Tell me

kattupayas.101947

Against all odds

kattupayas.101947

जो ज़ितना तुम्हारा हैं ...
तुम भी उसके उतने ही रहो ..
ज्यादा दिल की गुलामी में ...
इज्ज़त की निलामी हो जाती है .

dipika9474

Try hard

kattupayas.101947

Good afternoon friends

kattupayas.101947

✨Celebrating 1 year of excellence at our new, advanced hospital! ✨

For 12 years, we've been dedicated to compassionate eye care, and in just one year at our new facility, we've used modern technology to provide brighter vision for countless patients. Here's to many more years of trusted eye care. ❤️😊

netrameyecentre

🙏🙏જો ધનવાન માણસ અપરાધી હોય તો ગરીબ માણસે 'ન્યાયની' અપેક્ષા ઓછી રાખવી જોઈએ.

કદાચ ન્યાય મળી પણ જાય તો તે તેની ખુશી ઝાઝી માણી શકતો નથી કે મનાવવા લાયક રહ્યો હોતો નથી.(કડવું સત્ય)🦚🦚

parmarmayur6557

✨ Exciting News! ✨

My new chapter “Niyati: The Girl Who Waited – 8” is now live on Matrubharti. 💫

Niyati’s journey continues — filled with emotions, surprises, and moments that will touch your heart. 💖



📖 Read here: https://www.matrubharti.com/book/19981518/niyati-the-girl-who-waited-8-by-nensi-vithalani



Your support and feedback mean the world to me. 🌸

Do read, share, and let me know your thoughts! 🥰



— Nensi Vithalani

nensivithalani.210365

અનડિસાઈડેડ' (અનિર્ણિત) વિચારો, એનું નામ મન. 'ડિસાઈડેડ' (નિર્ણિત) વિચારો, એનું નામ બુદ્ધિ. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/0kMZthvB

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dadabhagwan1150

🌿 कविता – छोड़ना भी एक जीत है 🌿

कभी लगता है…
सारी दुनिया का बोझ
हमारे ही कंधों पर रख दिया गया हो,
हर रिश्ता, हर उम्मीद, हर जिम्मेदारी
हमें खींचती रहती है—
और हम चुपचाप निभाते रहते हैं।

पर अंदर से…
धीरे-धीरे दरारें बनने लगती हैं,
मुस्कान के पीछे आंसुओं का सैलाब छुपने लगता है।
लोग कहते हैं — "हिम्मत रखो"
पर कोई नहीं समझता,
कि हिम्मत सिर्फ पकड़ने में नहीं,
कभी-कभी छोड़ने में भी होती है।

छोड़ना मतलब हारना नहीं,
बल्कि अपनी टूटी हुई रूह को
फिर से जोड़ना है।
यह वो कदम है
जब इंसान अपने घावों को
मरहम देता है,
अपनी थकी हुई साँसों को
आराम देता है।

रिश्ते अच्छे लगते हैं,
सपने खूबसूरत लगते हैं,
पर जब वही हमें तोड़ने लगें…
तो उन्हें दिल से विदा कर देना ही
सबसे बड़ी बहादुरी होती है।

क्योंकि असली जीत वही है,
जब हम टूटकर भी उठ खड़े हों,
खुद को आईने में देखें
और कह सकें —
"हाँ, मैं बिखरा जरूर था…
पर मैंने खुद को फिर थाम लिया।"

_____दिल से कलम तक _____

✍️
प्रेमलता आर्मों

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dilsekalamtak711812

सुकून की तलाश में

शहर की भीड़ में, शोर में,
हर कोई उलझा है किसी दौड़ में।
कदम रुकते नहीं, साँस थमती नहीं,
दिल को चाहिए बस ठहराव कहीं।

सुकून की तलाश में निकलता हूँ रोज़,
कभी किताबों के पन्नों में, कभी खुद की सोच।
कभी समंदर की लहरों से बातें करता हूँ,
कभी चाँद की चुप्पी में अपनी थकान उतारता हूँ।

पेड़ों की छाँव में जब हवा सरसराती है,
मन की बेचैनी जैसे गीत गुनगुनाती है।
एक कप चाय, एक खुला आँगन,
यही तो है असली जन्नत का दामन।

सुकून बाज़ार में बिकता नहीं,
ये तो दिल के भीतर ही मिलता कहीं।
जहाँ लोभ न हो, जहाँ दिखावा न हो,
बस अपनापन और सच्चाई का बसेरा हो।

आख़िर समझ आया—
सुकून की तलाश बाहर नहीं,
ये तो अपने ही भीतर की रोशनी है।
जब मन का आईना साफ़ हो जाए,
तभी असली सुकून हाथ आए।

DB-arymoulik

deepakbundela7179

नाचाचा....पदन्यास करता. करता..
माझं मनही तुझ्यासोबत ...नाचत असतं..ग..
....माझे हात तुझ्या कमरेभोवती...
..तुझे बाहु माझ्या गळ्यात...
..तुझी मान खाली..झुकलेली..
..माझी नजर तुझ्यात ..गुंतलेली...
माझे उष्ण ,..श्वास..तुझ्या चेहेर्यावर,,,
..तुझ्या आस्तित्वाचा..मंद ..गंध..माझ्या अवती भवती..
तुझी माझी पावलं..एकमेकांना..साथ देत असतात..!
..एका क्षणी..तु अलग होतेस माझ्यापासुन....
आणी ..नाचाचे नवे ..आवर्तन.सुरु.. होते..
..काही क्षण..होते चलबिचल माझी...
..मग परत एकत्र येवुन..थिरकतात..आपली पावले.!!
...खुपच रोमांचकारी..असतात ते..सारे क्षण..!!!

वृषाली ..

jayvrishaligmailcom

सच्चा प्रेम और पति–पत्नी का रिश्ता

सच्चा प्रेम कभी रूप, रंग या तुलना नहीं करता। यह तो वही डोर है जो हर परिस्थिति में मजबूती से थामे रहती है। चाहे बीमारी हो, चाहे आर्थिक स्थिति कमजोर हो, या फिर जीवन में छोटे–बड़े उतार–चढ़ाव आएं—प्रेम हर हाल को अपनाता है।

पति–पत्नी का रिश्ता साइकिल के दो पहियों की तरह होता है। यदि एक पहिया डगमगाए, तो दूसरा उसे संभाले बिना साइकिल आगे नहीं बढ़ सकती। इस रिश्ते में संतुलन, विश्वास और समझदारी सबसे बड़ी पूंजी है।

आजकल कई बार देखने को मिलता है कि कुछ पत्नियाँ अपने पति की तुलना दूसरों से करने लगती हैं। "देखो, वह अपनी पत्नी को गिफ्ट देता है, घूमाने ले जाता है, चॉकलेट्स लाता है, लेकिन मेरा पति तो बिल्कुल कंजूस है।" ऐसी शिकायतें धीरे–धीरे रिश्तों में खटास ला देती हैं। हर पत्नी को यह समझना चाहिए कि उसका पति सबसे पहले अपने परिवार और उसकी आर्थिक स्थिति को देखकर चलता है। वह जो भी कमाता है, उसी से घर का चूल्हा जलता है, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित होता है। ऐसे में पति की आमदनी को लेकर ताने देना या दूसरों से तुलना करना उचित नहीं।

हर पत्नी को यह समझना चाहिए कि उसका पति मेहनत करके उसी के लिए कमाता है। बाहर की दुनिया में संघर्ष कितना कठिन है, यह वही जानता है जो रोज़ मेहनत करके दो वक्त की रोटी घर लाता है। यदि पत्नी उस मेहनत की कद्र नहीं करेगी, तो पति का मन भी टूट जाएगा।

दूसरी ओर, कई पतियों की भी शिकायत रहती है कि पत्नी घरेलू कामों में उतनी निपुण नहीं, समय पर नहीं उठती, खाना कभी नमक–मिर्च में ठीक नहीं बनता। लेकिन पति को यह समझना चाहिए कि उनकी पत्नी भी इंसान है, मशीन नहीं। यदि थोड़ी कमी रह भी गई तो उस पर नाराज़ होने की बजाय प्यार से कहें। सच्ची पत्नी वही होती है जो अपने पति और परिवार की खुशियों में ही अपनी खुशी ढूँढ़ लेती है।

एक पत्नी को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है इज़्ज़त और सम्मान की। वह सोना–चाँदी या महंगी जायदाद नहीं माँगती, बल्कि चाहती है कि उसका पति उसे दो पल का साथ दे, उसका मन समझे और छोटी–छोटी खुशियों में शामिल हो। ठीक वैसे ही पति भी चाहता है कि उसकी पत्नी उसकी मेहनत को समझे, उसका साथ दे और दूसरों से तुलना न करे।

अंततः यही कहा जा सकता है कि पति–पत्नी का रिश्ता तभी सफल होता है जब दोनों एक–दूसरे की परिस्थितियों और भावनाओं को समझें। एक–दूसरे की कमी निकालने की बजाय यदि वे एक–दूसरे की अच्छाइयों को अपनाएँ, तो जीवन की राहें आसान हो जाती हैं। सच्चा प्रेम वहीं है जहाँ न तुलना होती है, न स्वार्थ—बस अपनापन और सम्मान होता है।


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archanalekhikha