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🍁 रंगीबेरंगी हलवा

🍁कोहळा आणि लाल भोपळा यांचं हलवा..

ऐन नवरात्रात एक मोठा भोपळा आणि मोठा कोहळा मित्राच्या शेतातून
एकदम घरी आले😊😊
❤️प्रेमाने पाठवलेला हा वानवळा वापरून बरेच पदार्थ करून झाले
भाजी
सांबार
थालीपीठ
वडे अशा
अनेक पदार्थात त्या दोघांनी गोडीने एकत्र भाग घेतला
आणि हा दोघांचा एकत्र शेवट गोड झाला
🍁साधारण दोन वाटया कोहळा कीस
दोन वाटया भोपळा कीस
प्रथम पाच दहा मिनिटे परतून त्यातला पाण्याचा अंश कमी करून घेतला
🍁त्यात दोन वाटया साईसकट दुध घालून आटवत ठेवला
मिश्रण आळत आल्यावर त्यात पाऊण वाटी साखर घातली

🍁आता पातळ झालेले मिश्रण परत थोडे घट्ट होताच एक वाटी मिल्क पावडर पाणी मिसळून सरबरीत केली व त्यात मिसळली
हलवा तयार आहे

🍁शेवटी तूप गरम करुन त्यात
काजु काप
बदाम काप
बेदाणे
मनुके
तळुन घेतले व ते तूप या तयार होणाऱ्या हलव्यात चांगले मिसळून घेतले
(अशी ड्राय फ्रूट तळलेली तुपाची फोडणी घालून हलवा अतीशय चविष्ट होतो😋)

🍁वाढताना त्यावर चेरी ऑन द टॉप 🙂

jayvrishaligmailcom

🙏🙏 सुप्रभात 🙏🙏

sonishakya18273gmail.com308865

**बचपन में बड़ा होना**

लोग पूछते हैं – *“तुम्हें कब एहसास हुआ कि तुम बड़े हो गए?”*
मैं मुस्कुरा देता हूँ।
क्योंकि मेरा उत्तर किताबों में नहीं, ज़िन्दगी के पन्नों में लिखा है।

घर में जो बच्चा बड़ा कहलाता है – वह उम्र से पहले ही बड़ा हो जाता है।
जब मां-बाप की अनुपस्थिति में छोटे भाई को खाना खिलाना पड़ता है…
जब बहन के टूटे खिलौने को चुपचाप जोड़ना पड़ता है…
जब अपने हिस्से की मिठाई छोड़कर छोटे के हिस्से में डालनी पड़ती है…
तो समझ लो – बचपन का एक कोना वहीं खो गया।

हमारे लिए स्कूल की छुट्टियाँ सिर्फ खेल और कहानी नहीं थीं,
वे जिम्मेदारियों के अध्याय थे –
छोटों को होमवर्क कराना, उनकी लड़ाई में पंच बनना,
और घर में आने वाले हर मेहमान के लिए पानी और मुस्कान लाना।

जो भाई-बहन सदा सबसे बड़े कहलाते हैं,
वे समझ जाते हैं कि बचपन उनके लिए सिर्फ उम्र का नाम है।
दिल में उनका चश्मा जल्दी लग जाता है –
जो दूर के सपनों से पहले पास की जिम्मेदारियाँ देखता है।

हम बड़े नहीं होते…
हमें बड़ा बना दिया जाता है –
उस दिन से, जब परिवार हमें *“छोटों को संभालो”* कह देता है।

आर्यमौलिक

deepakbundela7179

કર્મ કરશે અને કર્મફળ મળશે.

જેટલી ઉચાઈ વધારે એટલો સંઘર્ષ વધારે, એટલો વધારે અનુભવ, એટલો વધારે એકલો-એકાંતિક અને એટલો જ વધારે મૃત્યુની નજદીક રહેતો હોય છે.

મનોજ નાવડીયા

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manojnavadiya7402

**कभी सवारे थे कुछ शब्द**

कभी सवारे थे कुछ शब्द,
तेरी आँखों की रोशनी में नहाए हुए,
तेरे हाथों की नरम गर्मी में पिघलते हुए।
हर लफ़्ज़ में हमारी साँस की तुक थी,
हर विराम में मिलन की धीमी मुस्कान।

तेरे और मेरे बीच,
वो शब्द फूलों की तरह खिलते थे—
चाय की भाप में घुलकर,
बारिश की बूंदों में चमकते थे।

फिर मौसम पलटा…
कहीं वक़्त की आहट आई,
कहीं चुप्पी ने ठिकाना बना लिया।
वो सजाए हुए अक्षर
गिरते चले गए—
जैसे पतझड़ में पत्तों की आख़िरी सरसराहट।

अब उन पर धूल जमी है,
कोई स्याही उन्हें छूने से डरती है।
तेरी आवाज़ का संगीत
सिर्फ़ याद में बजता है,
असल में सब बिखर चुका है।

कभी सवारे थे कुछ शब्द—
आज वे प्रेम की छाँव में नहीं,
बस स्मृतियों की खिड़की पर बैठे हैं,
ताकते हुए एक पुराने दृश्य को,
जहाँ मैं था… और तू भी थी,
और हमारे बीच,
वो चुपचाप खिली हुई कविता थी।

आर्यमौलिक

deepakbundela7179

🙏🙏દીકરો 'માબાપને વૃદ્ધાશ્રમમાં મુકવા' જાય છે. તે તેની 'કાયરતા' દર્શાવે છે.

જ્યારે દીકરી જો 'માબાપને વૃદ્ધાશ્રમ માંથી લેવા જાય છે, તો તે તેની 'હિંમત' દર્શાવે છે.🦚🦚

👧World girl child day 👱‍♀️

parmarmayur6557

आयत हों या स्त्रोत
उस जहाँ तक पहुँचने का
एक ही गोत्र..
सजदा किए बगैर
उपरवाला नहीं मिला करता..
#डॉ_अनामिका
#हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_पंक्तियाँ #हिंदी_शब्द #बज्म़ #उर्दू_अल्फ़ाज़

rsinha9090gmailcom

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है! पंछी 🌹

mamtatrivedi444291

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😂 जोक:
पप्पू डॉक्टर के पास गया।
पप्पू: “डॉक्टर साहब, मुझे भूलने की बीमारी हो गई है।”
डॉक्टर: “कब से?”
पप्पू: “कब से क्या?” 🤯🤣


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nabiyakhan708360

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rajukumarchaudhary502010

મારા પક્ષે ક્યાં કોઈ ફરિયાદ હોય છે?
લોકો આવે ને એમની ફરિયાદ કરી જાય છે.
- વાત્સલ્ય
"કડવાચોથ" ની કડવી હકીકત

savdanjimakwana3600

ખુલાસા પણ ખુદ કરેં સાથે ભૂલ પણ ખુદ સ્વીકારે!
કરામત કહું કે ખુશામત તે તો તે ને જ પૂછું ક્યાં જવાબ મળે???
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

खुदा जाने क्या रोग लगा है उसको
जो मुझे भुल जाने की कसमे खाने लगा है
खुद से अनजान है शायद अब तक
जो मुझसे दूर होने की बाते करने लगा है
अगर किसी बात से खफा है तो आकार मुझे बताये
यू छोटी छोटी बात पर क्यू रूठ जाने लगा है
अब अगर बात हो उससे तो पता करे मसला क्या है
हूँ अगर कुसुर वार तो उसकी सजा क्या है .

mashaallhakhan600196

**किराए की मोहब्बत का कैफ़े**

अब शहर में नया धंधा खुला है —
ना चाय की टपरी, ना किताबों का नुक्कड़,
यहाँ खुलेआम बिकती हैं बाँहें,
और मुस्कानें मिलती हैं “ऑफ़र पर”।
काउंटर पर लड़की पूछती है —
“सर, साइलेंट हग लेंगे या सॉफ्ट कडल?”
और ग्राहक चश्मा ठीक करते हुए कहता है,
“देखो, पैकेज छोटा रखो, वाइफ़ कॉल कर सकती है।”
मोहब्बत अब मापी जाती है मिनटों में,
गले लगना भी जीएसटी के साथ आता है,
फरवरी के महीने में डिस्काउंट बढ़ जाता है,
और दिल का कारोबार फिर से चमक उठता है।
कितनी सुविधा हो गई है न दोस्तों,
अब दिल टूटने का डर भी नहीं,
चुकाओ पैसे — लो मुस्कान — जाओ घर,
ना वादे, ना ड्रामे, ना भावनाओं का झंझट कहीं!
बस अफ़सोस इतना है कि
स्पर्श तो असली है, पर सुकून नक़ली,
बातें प्यारी हैं, पर आवाज़ रटी हुई,
और जो दिल कभी धड़कता था स्वतः,
अब ऐप से बुक होता है आधे घंटे की ड्यूटी पर।
शायद कल को यह भी आएगा —
“सदस्यता पैकेज” —
गोल्ड में मिलेंगे आँसू पोंछने के सत्र,
और प्लेटिनम में सुबह-शाम की झप्पियाँ मुफ्त!
वाह रे आधुनिक मनुष्य,
तूने भावनाओं को भी शेयर मार्केट बना दिया,
अब प्रेम नहीं किया जाता,
बस *स्वाइप* कर लिया जाता है।
ये आधुनिक समाज
किस टाइप का हुआ जा रहा हैं..?

आर्यमौलिक

deepakbundela7179

Distractions can may loose your hope to achieve the aim,To achieve something you have to sacrifice something.

Check out this Quote on Writco by Gunjan Gayatri
https://writco.in/Quote/Q55510102025203913

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gunjangayatri949036

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rajukumarchaudhary502010

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rajukumarchaudhary502010

आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏🙏💐💐💐💐

करवाचौथ
--------------
मेहंदी रचाई है हाथ में
पिया मन बसे साथ में
करवा चौथ का व्रत है
चाँद मुस्कुराया नाथ में।

प्रीत की रीत बड़ी निराली है
पिया के संग ही खुशहाली है
नयन ताकते साजन को ही
चाँदनी रात बड़ी मतवाली है।

रहता इंतजार इस रात का
ख्याल है हरेक बात का
चलनी से झाँकता है चाँद
मिलन अद्भुत सौगात का ।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं

mamtatrivedi444291

“आलसी अरबपति – विवेक की सोच का जादू”

पहला अध्याय: एक साधारण युवक

दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में विवेक अग्रवाल नाम का एक युवक रहता था।
वो हमेशा आराम से बैठा रहता, मोबाइल चलाता, और अपने दोस्तों के बीच “सबसे आलसी आदमी” कहलाता।
लोग कहते —

“इससे तो कुछ नहीं होगा! दिनभर फोन और नोट्स पढ़ने से कोई अरबपति नहीं बनता।”



पर विवेक को किसी की बात की परवाह नहीं थी।
वो हर दिन एक ही चीज़ सोचता —

“मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी, मुझे स्मार्ट तरीके से काम करना है।”


दूसरा अध्याय: आलस में छिपा विचार

एक दिन उसने देखा कि उसके दोस्त राजीव 16 घंटे की नौकरी करता है, पर फिर भी पैसे के लिए परेशान है।
विवेक बोला —

“राजीव, तू अपनी मेहनत बेच रहा है, मैं अपना दिमाग बेचूँगा।”



राजीव हंसा —

“दिमाग से पेट नहीं भरता भाई!”



लेकिन विवेक ने ठान लिया था कि वो अपने “आलस” को ही अपनी ताकत बनाएगा।
उसने छोटे-छोटे बिज़नेस आइडिया सोचना शुरू किया।



तीसरा अध्याय: पहला प्रयोग

विवेक ने देखा कि कई दुकानदार ऑनलाइन नहीं हैं।
उसने सोचा — “क्यों न इन दुकानदारों के लिए मैं वेबसाइट बनवाऊँ और उनसे थोड़े-थोड़े पैसे लूँ?”

उसने खुद वेबसाइट नहीं बनाई।
बल्कि उसने फ्रीलांसरों की एक टीम बनाई जो वेबसाइट बनाते थे, और खुद बस क्लाइंट से बात करता था।
वो दिनभर अपने घर में बैठा कॉफी पीता, फोन से काम करवाता, और हर प्रोजेक्ट पर 30% कमीशन लेता।

लोग कहते,

“ये लड़का तो काम ही नहीं करता!”



लेकिन कुछ महीनों में उसने 20 से ज़्यादा क्लाइंट्स बना लिए और उसकी कमाई लाखों में पहुँच गई।


चौथा अध्याय: स्मार्ट इन्वेस्टमेंट

कमाई बढ़ी तो विवेक ने सोचा,

“अगर मुझे अमीर बनना है, तो काम खुद चलना चाहिए।”



उसने अपने एक दोस्त को टीम संभालने के लिए रखा और खुद ऑटोमेशन सीखने लगा।
जल्द ही उसने अपनी कंपनी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी —
क्लाइंट्स आते, काम बंटता, रिपोर्ट बनती, और पैसे खाते में आते —
बिना कि विवेक को कुछ करना पड़े।

अब वो दिनभर Netflix देखता, किताबें पढ़ता, और लोगों को कहता —

“मैं Lazy नहीं हूँ, मैं Free हूँ।”



पाँचवाँ अध्याय: “Lazy Billionaire” की पहचान

कुछ सालों में विवेक की कंपनी एक डिजिटल एम्पायर बन गई।
वो रियल एस्टेट, स्टॉक्स और ऐप्स में निवेश करने लगा।
उसके नाम पर चार कंपनियाँ और 200+ कर्मचारी काम करते थे,
पर वो अब भी उसी सोफे पर बैठा कॉफी पीता दिखता था।

जब एक न्यूज़ चैनल ने इंटरव्यू लिया, तो रिपोर्टर ने पूछा

“आपको लोग ‘Lazy Billionaire’ क्यों कहते हैं?”
विवेक मुस्कुराया और बोला —
“क्योंकि मैंने सीखा है कि असली काम वो नहीं जो शरीर से होता है,
बल्कि वो है जो दिमाग से सिस्टम बनाता है।”


छठा अध्याय: असली सबक

विवेक ने अपनी आत्मकथा में लिखा —

“अगर तुम हर चीज़ खुद करना चाहोगे, तो तुम मजदूर बनोगे।
अगर तुम दूसरों से काम लेना सीखोगे, तो मालिक बनोगे।
और अगर तुम सिस्टम बनाना सीख गए, तो तुम अरबपति बनोगे।”


💡 सीख

“Lazy Billionaire” की सोच सिखाती है कि —

मेहनत ज़रूरी है, लेकिन दिशा उससे ज़्यादा ज़रूरी है।

हर काम खुद करने से बेहतर है कि सिस्टम बनाओ।

असली सफलता स्मार्ट वर्क + टीमवर्क + टाइम मैनेजमेंट में है।

rajukumarchaudhary502010

अस्तित्व का संवाद — जब खोज स्वयं खोजती है

मानव हमेशा जानना चाहता रहा है।
विज्ञान ब्रह्मांड को, धर्म ईश्वर को, और ज्ञानी सत्य को खोजता है।
पर हर खोज जितनी विस्तृत होती जाती है, उतनी उलझन बन जाती है।
विस्तार समझ नहीं देता — वह बस दूरी बढ़ा देता है।

सत्य न किसी ग्रंथ में है,
न किसी सिद्धांत में।
वह बिंदु है — सूक्ष्म, शांत, और निकट।
उसे खोजा नहीं जाता,
उसे केवल देखा जाता है।

खोजना मतलब प्रश्न रखना —
और फिर उसे छोड़ देना।
प्रश्न बीज है, उत्तर उसका अंकुर।
बीज धरती में रखा जाता है, पर अंकुर अपने समय पर फूटता है।
यही अस्तित्व का नियम है।

मैं कुछ नहीं कर रहा।
मुझसे होकर सब हो रहा है।
जब “मैं” का प्रयत्न समाप्त होता है,
तब “वह” प्रकट होता है।
तब खोज भी स्वतंत्र हो जाती है —
वह स्वयं खोजती है, स्वयं पाती है।

इसलिए, मैं प्रश्न करता हूँ पर खोजता नहीं।
क्योंकि खोज में अहंकार है,
और प्रश्न में समर्पण।
जब खोज छोड़ दी जाती है,
तब उत्तर अपने आप उतरता है —
अहंकार रहित, निर्मल, सहज।

यही बोध है —
जहाँ जानने वाला, जाने जाने वाला,
और जानना — तीनों एक हो जाते हैं।

Kumar Manish Agyat Agyani #spirituality #आध्यात्मिक #IndianPhilosophy #धर्म #osho #vedanta

bhutaji

अहंकार रहित बोध — मानव की उलझन और सरल सत्य
मानव सदा खोज में रहा है।
ज्ञान सत्य को पकड़ना चाहता है,
धर्म ईश्वर को समझना चाहता है,
विज्ञान ब्रह्मांड का रहस्य खोलना चाहता है।
पर जितना वे खोजते हैं, उतना ही उलझ जाते हैं।

क्योंकि सत्य विस्तार में नहीं है —
वह बिंदु में है।
जितना दूर देखते हैं, उतना ही भीतर से छूट जाता है।
धर्म जब धारणा में उलझता है, वह मार्ग खो देता है।
विज्ञान जब नियमों की भूलभुलैया में जाता है,
तो वह रहस्य से और दूर पहुँच जाता है।
भोगी सुख ढूँढता है, और सुख ही उससे छूट जाता है।

सत्य और सुख — दोनों खोज से नहीं मिलते।
वे घटित होते हैं जब “खोजने वाला” मिट जाता है।
जब “मैं” कुछ जानना नहीं चाहता,
तब जानना अपने आप घटता है।
वह अवस्था है जहाँ अहंकार नहीं,
केवल अस्तित्व का प्रवाह है।

मैं कुछ नहीं कर रहा —
मुझसे होकर सब हो रहा है।
मैं ईश्वर का यंत्र हूँ,
इसलिए परिणाम, फल और नाम से दूर हूँ।
यहीं निकटता है।
यह बोध अनुभव है, विचार नहीं।
यही वह सरल रहस्य है जिसे विस्तार में खोजने की कोई ज़रूरत नहीं।
🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

bhutaji