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Nabiya Khan

Nabiya Khan

@nabiyakhan708360
(578)

खामोश लम्हों की खूबसूरती
ज़िंदगी हमेशा शोर में ही खूबसूरत नहीं होती,
कभी-कभी खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।
वो लम्हे जब दिल सुकून से भर जाता है,
जब तन्हाई भी किसी अपने जैसी लगने लगती है।
सुबह की हल्की-सी रौशनी,
खिड़की से आती ठंडी हवा,
और चाय की प्याली में घुली हुई
ज़िंदगी की मीठी थकान —
बस यहीं से शुरू होती है एक सच्ची खुशी।
हर इंसान भाग रहा है,
किसी मंज़िल की तलाश में,
पर भूल जाता है कि
रास्ते भी कभी-कभी
बहुत हसीन होते हैं।
दिल अगर साफ़ हो,
तो हालात भी आसान लगते हैं।
और अगर सब्र साथ हो,
तो हर मुश्किल भी
एक सबक बन जाती है।
आओ, आज थोड़ा ठहर जाएँ,
अपने दिल से बात करें,
और इस खूबसूरत ज़िंदगी का
शुक्र अदा करें,
क्योंकि हर दिन
ख़ुदा की तरफ़ से
एक नया तोहफ़ा होता है।

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एक ख़ूबसूरत सुबह 🌸
सुबह…
एक ऐसा लम्हा, जब ज़िंदगी नए ख़्वाबों की चादर ओढ़ लेती है।
फ़िज़ा में फैली ठंडी हवा, परिंदों की चहचहाहट और उगते सूरज की हल्की सी तपिश दिल को सुकून दे जाती है। यह सुबह नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से दिया गया एक नया तोहफ़ा होती है।
जब रात की तन्हाई ख़त्म होती है, तब सुबह उम्मीदों की रोशनी लेकर आती है। हर किरण यह पैग़ाम देती है कि बीता हुआ कल चाहे जैसा भी रहा हो, आज को बेहतर बनाया जा सकता है। ओस की बूंदें जैसे ज़मीन से कहती हैं—“सब्र रखो, हर सूखी मिट्टी भी एक दिन हरी हो जाती है।”
ख़ूबसूरत सुबह हमें सिखाती है कि ज़िंदगी में ठहराव नहीं, बल्कि हर दिन एक नई शुरुआत है। अगर दिल में सच्चाई, लबों पर दुआ और इरादों में मेहनत हो, तो हर सुबह कामयाबी का रास्ता बन जाती है।
आइए, इस सुबह को मुस्कान के साथ अपनाएँ, शुक्र के अल्फ़ाज़ बोलें और अपने ख़्वाबों को पूरा करने की एक और कोशिश करें। क्योंकि जो सुबह को समझ गया, उसने ज़िंदगी का मतलब समझ लिया।

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एक ख़ूबसूरत शाम
शाम…
दिन की थकान को चुपचाप समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलने लगता है और आसमान पर हल्की-सी सुरमई चादर बिछ जाती है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून की एक गहरी सांस ले लेता है।
इस ख़ूबसूरत शाम में हवाओं का लहजा बदल जाता है,
चाय की ख़ुशबू में यादों की मिठास घुल जाती है।
पेड़ों की सरसराहट जैसे कोई पुराना किस्सा सुना रही हो,
और दिल उन लम्हों में खो जाता है जो कभी हमारे थे।
शाम हमें सिखाती है कि हर ढलते दिन के बाद भी
उम्मीद का एक दिया जलता रहता है।
थक कर बैठ जाना हार नहीं होता,
कभी-कभी रुक जाना भी ज़िंदगी का हुस्न होता है।
ये शामें गवाह हैं हमारी ख़ामोश दुआओं की,
अनकही मोहब्बतों की और टूटे-बिखरे ख़्वाबों की।
इसीलिए तो हर शाम ख़ास होती है,
क्योंकि ये हमें अपने आप से मिलने का मौका देती है।

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एक ख़ूबसूरत शाम
शाम…
दिन की थकान को चुपचाप समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलने लगता है और आसमान पर हल्की-सी सुरमई चादर बिछ जाती है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून की एक गहरी सांस ले लेता है।
इस ख़ूबसूरत शाम में हवाओं का लहजा बदल जाता है,
चाय की ख़ुशबू में यादों की मिठास घुल जाती है।
पेड़ों की सरसराहट जैसे कोई पुराना किस्सा सुना रही हो,
और दिल उन लम्हों में खो जाता है जो कभी हमारे थे।
शाम हमें सिखाती है कि हर ढलते दिन के बाद भी
उम्मीद का एक दिया जलता रहता है।
थक कर बैठ जाना हार नहीं होता,
कभी-कभी रुक जाना भी ज़िंदगी का हुस्न होता है।
ये शामें गवाह हैं हमारी ख़ामोश दुआओं की,
अनकही मोहब्बतों की और टूटे-बिखरे ख़्वाबों की।
इसीलिए तो हर शाम ख़ास होती है,
क्योंकि ये हमें अपने आप से मिलने का मौका देती है।

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एक ख़ूबसूरत शाम का एहसास
शाम…
दिन और रात के दरमियान ठहरने वाला वो नाज़ुक सा वक़्त,
जब सूरज अलविदा कहता है और चाँद आने की आहट देता है।
इस वक़्त फिज़ा में एक अजीब सी ख़ामोशी होती है,
जो दिल के हर कोने को सुकून से भर देती है।
ढलती हुई शाम में आसमान गुलाबी और सुनहरी लिबास ओढ़ लेता है।
हवा में घुली होती है यादों की खुशबू,
और दिल बेइख़्तियार किसी अपने को याद कर बैठता है।
ये शाम जैसे कहती है—
थोड़ा ठहरो, थोड़ा महसूस करो,
ज़िंदगी सिर्फ़ दौड़ का नाम नहीं।
चाय की चुस्की, बालकनी की रेलिंग,
और सामने फैला हुआ आसमान…
इस पल में फ़िक्रें भी हल्की लगने लगती हैं।
शाम हमें सिखाती है कि
हर ढलते सूरज के बाद भी
नई रौशनी का यक़ीन ज़िंदा रहता है।
यही तो है एक ख़ूबसूरत शाम—
जो थके हुए दिल को उम्मीद,
और उलझी हुई रूह को सुकून दे जाती है।

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ख़ामोश-सी ख़ूबसूरत शाम
शाम जब अपनी नर्म चादर आसमान पर बिछाती है, तो दिल भी सुकून की गहराइयों में उतर जाता है। सूरज की आख़िरी किरणें जैसे अलविदा कहती हों और हवा में एक मीठी-सी उदासी घुल जाती है। इस वक़्त हर चीज़ ठहर-सी जाती है, शोर भी ख़ामोशी से बातें करने लगता है।
एक ख़ूबसूरत शाम, बीते लम्हों की याद दिलाती है और आने वाले ख़्वाबों को सहलाती है। चाय की चुस्की, ठंडी हवा और अपनों की मुस्कान—यही तो शाम की असली ज़ीनत है। इस पल में अगर दिल को सुकून मिल जाए, तो समझो शाम मुकम्मल हो गई।

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🌙 एक ख़ूबसूरत शाम का एहसास 🌙

शाम…
दिन की थकान को अपनी नर्म आग़ोश में समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलते-ढलते आसमान को सुनहरी और गुलाबी चादर ओढ़ा देता है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून से भर जाता है।

हवा में ठहराव होता है,
पर उस ठहराव में भी एक मीठी सी सरगोशी होती है।
परिंदे अपने घरों की जानिब लौटते हैं
और इंसान अपने दिल के क़रीब।

इस वक़्त चाय की एक प्याली,
बालकनी में बैठा सुकून,
और यादों की धीमी दस्तक —
शाम को और भी ख़ूबसूरत बना देती है।

शाम हमें सिखाती है
कि हर ढलता सूरज अंधेरा नहीं लाता,
बल्कि अगले सवेरे की उम्मीद छोड़ जाता है।
इसीलिए शायद शामें उदास नहीं,
बल्कि सब्र और इत्मीनान से भरी होती हैं।

आज की शाम भी कुछ ऐसी ही है —
न ज़्यादा कहने की चाह,
न कुछ छुपाने की मजबूरी।
बस ख़ुद से मिलने का एक ख़ामोश सा बहाना।


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🌙 एक ख़ूबसूरत शाम का एहसास 🌙

शाम…
दिन की थकान को अपनी नर्म आग़ोश में समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलते-ढलते आसमान को सुनहरी और गुलाबी चादर ओढ़ा देता है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून से भर जाता है।

हवा में ठहराव होता है,
पर उस ठहराव में भी एक मीठी सी सरगोशी होती है।
परिंदे अपने घरों की जानिब लौटते हैं
और इंसान अपने दिल के क़रीब।

इस वक़्त चाय की एक प्याली,
बालकनी में बैठा सुकून,
और यादों की धीमी दस्तक —
शाम को और भी ख़ूबसूरत बना देती है।

शाम हमें सिखाती है
कि हर ढलता सूरज अंधेरा नहीं लाता,
बल्कि अगले सवेरे की उम्मीद छोड़ जाता है।
इसीलिए शायद शामें उदास नहीं,
बल्कि सब्र और इत्मीनान से भरी होती हैं।

आज की शाम भी कुछ ऐसी ही है —
न ज़्यादा कहने की चाह,
न कुछ छुपाने की मजबूरी।
बस ख़ुद से मिलने का एक ख़ामोश सा बहाना।


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🌸 एक नई सुबह का पैग़ाम 🌸

हर नई सुबह अपने साथ उम्मीदों का एक उजाला लेकर आती है।
रात की ख़ामोशी के बाद जब सूरज की पहली किरण ज़मीन को चूमती है, तो लगता है जैसे ज़िंदगी फिर से मुस्कुराने लगी हो। ये सुबह हमें बताती है कि चाहे कल कितना ही मुश्किल क्यों न रहा हो, आज फिर से एक नई शुरुआत मुमकिन है।

हवा में घुली ताज़गी, परिंदों की चहचहाहट, और आसमान का हल्का-सा नीला रंग—सब मिलकर दिल को सुकून दे जाते हैं। इस सुकून में एक दुआ छुपी होती है, कि आज का दिन बीते कल से बेहतर हो।

नई सुबह हमें ये सिखाती है कि उम्मीद कभी पुरानी नहीं होती। टूटे हुए ख़्वाब भी अगर सच्चे हों, तो इस सुबह की रोशनी में फिर से जिंदा हो जाते हैं। बस ज़रूरत है तो अपने दिल के दरवाज़े खोलने की, और ज़िंदगी को एक और मौक़ा देने की।

तो आइए, इस नई सुबह के साथ हम भी अपने अंदर की थकान, शिकवे और मायूसी को पीछे छोड़ दें।
दिल में सब्र, ज़हन में सुकून और लबों पर मुस्कान रखकर आज के दिन का इस्तक़बाल करें।

क्योंकि हर नई सुबह यही कहती है—
“अभी बहुत कुछ बाक़ी है, बस यक़ीन बनाए रखो।” 🌤️


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🌅 एक ख़ूबसूरत सुबह

सुबह की फ़िज़ा में आज कुछ अलग-सी ताज़गी है।
सूरज की नरम किरणें जब ज़मीन को छूती हैं, तो दिल में भी एक मीठी-सी रौशनी उतर आती है।
पंछियों की चहचहाहट जैसे ज़िंदगी को फिर से जागने का पैग़ाम देती है।

यह सुबह हमें सिखाती है कि हर अंधेरी रात के बाद एक नई उम्मीद ज़रूर आती है।
जो बीत गया, उसे ख़ामोशी से अलविदा कहो,
और जो सामने है, उसे मुस्कुराहट के साथ अपनाओ।

सुबह का ये सुकून हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी सिर्फ़ दौड़ का नाम नहीं,
कभी-कभी ठहरकर इस लम्हे को महसूस करना भी ज़रूरी है।
एक कप चाय की खुशबू,
और दिल में बसता थोड़ा-सा एत्मिनान —
यही तो असली ख़ूबसूरती है।

आओ, इस नई सुबह से एक वादा करें—
आज शिकायत कम होगी,
शुक्रगुज़ारी ज़्यादा होगी।
आज लफ़्ज़ों में नर्मी,
और इरादों में सचाई होगी।

क्योंकि हर ख़ूबसूरत सुबह,
हमें एक बेहतर इंसान बनने का
एक और मौक़ा देती है। ☀️


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