Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏

sonishakya18273gmail.com308865

🥲 imran 🥲

imaranagariya1797

Good morning friends

kattupayas.101947

✧ सफलता का धर्म ✧
✍🏻 — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

सफलता अब खोज नहीं रही, व्यापार बन गई है।
वह किताबों में बेची जाती है, मंचों पर बोली जाती है, और विज्ञापनों में सजाई जाती है।
हर धर्म, हर विचारधारा, हर बौद्धिक या वैज्ञानिक प्रणाली अब “सफलता” सिखाती है —
कैसे पहुँचो, कैसे जीत लो, कैसे बनो ‘किसी’ जैसे।

लेकिन कोई भी सचमुच वहाँ नहीं पहुँचता।
क्योंकि वह रास्ता तुम्हारा था ही नहीं — वह किसी और की चाल थी, किसी और के जूते के निशान।
और इस नकल में मनुष्य ने अपनी दिशा, अपना मौलिक कम्पास खो दिया।

---

सफल व्यक्ति अक्सर अंधा होता है।
वह देखता नहीं, दौड़ता है।
जो अंधविश्वासी है, वह अज्ञात को प्रश्न नहीं करता —
और इसी कारण वह कभी-कभी सफलता के नकली द्वार तक पहुँच भी जाता है।
पर जो देखता है, जो सूक्ष्म तल तक झाँकता है —
वह जान लेता है कि यह द्वार दीवार से बना है।

वह सूक्ष्म दृष्टि से देखता है कि “मिलना” का अर्थ है “खोना।”
हर उपलब्धि के भीतर एक कटाव है।
हर उन्नति के पीछे कोई जड़ टूटती है।
वह जितना ऊपर उठता है, उतना ही भीतर गिरता है।

---

मनुष्य की सारी जड़ सफलता — विज्ञान से धर्म तक —
वैसी ही है जैसे कोई अपना बायाँ हाथ काटकर दाएँ में जोड़ ले।
उसे लगता है, “देखो, मेरा दायाँ हाथ कितना शक्तिशाली हो गया।”
वह भूल जाता है कि अब उसके पास दो नहीं, केवल एक हाथ है —
बस आकार बदल गया है।

वह मशीनें बना लेता है, गति पाता है, आंकड़े बढ़ा लेता है —
पर उसके भीतर का संगीत, उसकी संवेदना, उसकी धीमी थिरकन —
सब पीछे छूट जाती है।

सफलता का यह शोर, यह दौड़ —
असल में पराजित आत्माओं का उत्सव है।
यह उन लोगों का जश्न है जो जीतकर भी भीतर हार चुके हैं।
जो सब कुछ पा चुके हैं, पर अपने आप को नहीं।

---

सत्य और हकीकत ने मनुष्य से हमेशा एक मूल्य माँगा है।
तुम आगे बढ़ सकते हो, पर किसी अंग को छोड़े बिना नहीं।
हर उपलब्धि एक अमputation है —
बस फर्क इतना है कि तुम उसे “प्रगति” कह देते हो।

सूत्र—

> “सत्य और हकीकत तय की एक हाथ हमेशा के लिए काट दिया है,
वह पुनः अपने स्थान लगाना मुमकिन नहीं लगता है।”

हाँ, यही है।
मनुष्य ने जो खोया है, वह अब वापस नहीं जोड़ा जा सकता —
क्योंकि उसे खोने में ही उसने अपनी सभ्यता खड़ी की है।
वह उसी कटे हिस्से पर गर्व करता है।

---

सूत्र:

> सफलता वही है जो मनुष्य को संपूर्ण रखे;
बाकी सब, अधूरे हाथों का उत्सव है।

bhutaji

"🇮🇳 मैं जवान हूँ 🇮🇳"


रात ठंडी है, पर मेरा खून उबलता है,
सीमा पर खड़ा हूँ, जब देश मेरा मचलता है।
नींद से भारी ये आँखें नहीं झुकती कभी,
क्योंकि माँ की दुआओं में मेरे लिए आग जलती है।

जब घर में दीप जलते हैं, मैं अंधेरे में देखता हूँ,
हर सिसकती हवा में, वतन की खुशबू सूंघता हूँ।
गोली चलती है तो दिल नहीं डरता,
क्योंकि “भारत माँ” कहने से पहले कोई शब्द नहीं निकलता।

मैं जवान हूँ — मिट्टी की सौगंध खाई है,
हर सांस में तिरंगे की महक समाई है।
मेरी वर्दी पर धूल नहीं, इज़्ज़त का ताज है,
मेरे कंधों पर देश की सांसों का बोझ है।

जब सरहद पर बर्फ गिरती है, मैं हँसता हूँ,
अपने हड्डियों से आग बनाकर रातें गुज़ारता हूँ।
हर ठंडी हवा में माँ की याद आती है,
पर देश की हिफ़ाज़त — मेरी इबादत बन जाती है।

वो जो कहते हैं "जंग क्या देगी?" —
उन्हें क्या पता, वतन के लिए मरना भी ज़िंदगी होती है!
हम हँसते हैं दर्द में, क्योंकि वादा निभाना है,
कसम ली है — इस मिट्टी को फिर गुलाम न बनाना है।

जब तिरंगा लहराता है, आँखें भीग जाती हैं,
सीने पर हाथ रख, रूह मुस्कुराती है।
हर शहीद की कब्र पर जब फूल गिरते हैं,
तो लगता है जैसे आसमान झुककर सलाम करता है।

मैं जवान हूँ — मौत से आँख मिलाई है,
हर गोली में अपने देश की परछाई है।
ना तन की फिक्र, ना जान की कहानी,
बस एक ही धड़कन — "भारत मेरी माँ, तू अमर रहे सदा!"


---

🔥 यह सिर्फ़ कविता नहीं, एक एहसास है...
हर उस बेटे के नाम जो रातों की नींद बेचकर, हमारे सवेरा बनता है।


लेखक - "आदित्य राज राय" ( कार्तिक )

karthikaditya

I still don't know

kattupayas.101947

what a quote

kattupayas.101947

sometimes its the truth

kattupayas.101947

Trust is just like a mirror

kattupayas.101947

Trust issues

kattupayas.101947

Good evening friends

kattupayas.101947

पता है मुझ को कि अब वो तपाक-ए-दिल नहीं है
हमारे दरमियाँ शायद वो पहले मंज़िल नहीं है

नज़र से नूर-ए-उल्फ़त आज-कल है दूर बैठा
ख़ुशी में भी कोई दिल का शगुफ़्ता महफ़िल नहीं है

वो बातें अब फ़क़त रस्मों की इक दीवार बन गईं हैं
जहाँ एहसास की कोई भी ताज़ा शामिल नहीं है

ये ख़ामोशी जो छाई है ये धोका ही नहीं तो क्या है
लबों पे लफ़्ज़ हैं लेकिन वो सच्चा साहिल नहीं है

गुज़र तो वक़्त जाएगा मगर ये याद रखना 'हमदम'
रिश्ते की नज़ाकत में कोई भी ग़ाफ़िल नहीं है

palewaleawantikagmail.com200557

શાયરી

વિથ સ્ટેજ ડાયલોગ યુવાનો અજમાવી જોજો 😊😊

પહેલો:
દરેક શરૂઆત... કોઈ અંતનો પુરાવો હોય છે।
(થોડો વિરામ)

બીજો:
અને દરેક અંત... કોઈ નવી શરૂઆતની ધ્વનિ હોય છે।
(ધીમે ધીમે બોલાય)

પહેલો:
દરેક સ્મિતમાં... કોઈ છુપાયેલું આંસુ વસે છે।
(વિરામ)

બીજો:
અને દરેક આંસુમાં... કોઈ જૂનું સ્મિત ધૂંધળું હસે છે।

પહેલો:
દરેક પ્રકાશ... કોઈ અંધકારનો અંશ છે।
(શાંતિથી બોલાતું વાક્ય)

બીજો:
અને દરેક છાંયો... કોઈ રોશનીની યાદ છે।

પહેલો:
દરેક ક્ષણ... જે હાલ ધબકે છે...
(પલ માટે ચૂપાઈ)

બીજો:
તે કોઈ વીતી ગયેલા સમયનું... ઓસરતું હૃદય છે।

(લાઇટ ધીમે ધીમે ફેડ થાય, એક નરમ સંગીતના સ્વર સાથે અંત...)

heenagopiyani.493689

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
https://youtu.be/Ddld4Zs0DQE?si=0G8dHzG1yMcypVY1

mamtatrivedi444291

स्नेहिल नमस्कार मित्रो
पता नहीं, कहाँ, कहाँ खो गई हैं रचनाएँ😒
पिछले वर्ष एफ़बी महाराज हैक हो गए थे, बहुत सारा मैटर ग़ायब...
अब जहाँ कहीं से कुछ पुराना मिल रहा है, सहेजने का टूटा फूटा प्रयास..
उसी खोज में प्राप्त एक पुरानी रचना।
क्यूँ????
-----------
ये मेरा मन सुबह सुबह ,है आज क्यूँ डरा डरा,
क्यूँ आसमाँ से झाँकता है मन मेरा ज़रा ज़रा।
ये पत्थरों के दरमियाँ घुटे घुटे सवाल हैं,
ज़मीं पे चाँद उग रहा ,ये रेशमी ख़याल हैं।
कडक रही हैं बिजलियाँ,यहाँ सभी धुआँ धुआँ,
ये रास्तों के दरमियाँ खुला हुआ कुआँ कुआँ।
मुहब्बतों के रास्ते,यहाँ हैं किसके वास्ते,
सभी की आँख बंद हैं, सभी हैं बंद रास्ते।
न बात कर तू इश्क की, ये डूबने की राह है,
जो डूब जाए इसमें फिर न आगे कोई चाह है।
ये मन मेरा सुबह सुबह...
पिटारों में क्यूँ बंद हैं,ये बिन तराशे छंद हैं
मलाल ही मलाल है ,ये कागज़ी ख्याल हैं
सभी शरीक दौड़ में ,सभी हैं लक्ष्य के बिना
ये मन मेरा सुबह सुबह....
सलीब पे टंगी हुई ,है प्रश्न याचिका बड़ी
यहाँ है दौड़ लग रही ,टूटती कड़ी कड़ी
आँसुओं से सींच लीं सभी कवारी क्यारियाँ
उत्तरों की खोज में सभी की गुम है दास्ताँ
ये मन मेरा सुबह सुबह....
क्यूँ आसमाँ से झाँकता है मन मेरा ज़रा ज़रा....
ये मन मेरा.....

डॉ. प्रणव भारती
अहमदाबाद

pranavabharti5156

screenshot of Google books

kattupayas.101947

ग़ज़ल ✍🏻

jigyasusaini2900

Very good afternoon friends

kattupayas.101947

दर्द मे भी तुझको बेहन्ताह चाहा है हमने
आंसू छिपाकर तुझको हसाया है हमने

तेरी हर राह मे तेरा हम साया रहे हम
तुझको इस तरह कितनी मंजिल तक लाया हमने

तुझको सब मिल गया जिसकी चाह थी तुझे
मगर अपना सब कुछ खो कर भी कुछ ना पाया हमने

तू चला गया तुझे तो बस जाना था हमे छोड़
मगर तुझको इस दिल से कभी ना भुलाया हमने

बेघर पड़े इस दिले मकां की एक ही चाबी थी तू
तेरे बाद कभी इस दिल से ना ताला हटाया हमने.

mashaallhakhan600196

Do You know that we should only be concerned about that which takes us towards Self-Realization? Thereafter, with the aid of the Real, progress will be made in the relative realm. You have to develop a bhaavna for doing jagat kalyan (salvation of the world). You should not say it just for the sake of saying it. You have to have the bhaavna.

To read more visit: https://dbf.adalaj.org/Xi1gQkMw

#Spirituality #spiritualawakening #salvation #spiritualprogress #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

💔 imran 💔

imaranagariya1797

The Hollow Comfort of Modern Faith

In today’s world, religion has drifted toward the surface of society — a system of rituals and reassurances, more public than personal. It offers comfort in familiar words: Have faith, believe, and happiness will follow. But that promise, repeated for centuries, feels worn. It calms doubt without resolving it.

True religion was once a way of seeing — an inward experiment in awareness. Now it often resists inquiry, handing every seeker the same path as if one prescription could cure every illness. Preachers speak from tradition, not from lived experience. The result is a religion that quotes revelation but forgets observation.

The wisdom of ancient saints still carries light, but their words lose meaning when recited without understanding. Each generation must rediscover truth in its own language. Living spiritually today may simply mean living attentively — being awake to one’s own thoughts, actions, and quiet moments.

Self-development does not arise from strict rules or ornate rituals. It unfolds through awareness in ordinary life — while eating, speaking, laughing, or walking alone. Real joy and peace are not prizes to earn but states to notice. Perhaps that is the only faith still alive: the one that begins within.

— Agyani (The Unknown

bhutaji