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मेरा दोस्त
इस जीवन में सबकी एक अभिलाषा है अपने-अपने नजरिए से सबके जीवन की परिभाषा है कभी जीत कभी हार कभी मन में भरा दुखों का गुबार सबके जीवन में एक निराशा है इस जीवन में सबकी एक अभिलाषा है।। मीरा सिंह
जब मैं खुद की एक सहेली हूँ फिर कैसे कहूँ अकेली हूँ खुद से खुद में ही हॅस लेना फिर कभी आंख भर रोना मैं उलझी हुई पहेली हूँ फिर कैसे कहूँ अकेली हूँ कभी खुशी के पल झाके तो कभी आंसूओ का झरना कुछ ना कहना बस चुप सा हो जाना कभी चीख-चीख रो लेना मैं एक अनजान पहेली हूँ फिर कैसे कहूँ अकेली हूँ जब मैं खुद की एक सहेली हूँ। । मीरा सिंह
मैनें तुम्हें अपनी जिन्दगी के पंद्रह साल दिए है तुमने मुझे इस कदर तोडने से पहले पंद्रह मिनट भी नही सोचा।। मीरा सिंह
मैनें उसमें खामियाँ होने के बाद भी बेइंतहा मोहब्बत की पर अफसोस उसे मेरी खूबियाँ कभी नही दिखी।। मीरा सिंह
मेरा कहना वो है मेरा सुनना वो है कभी हँसु या चुप हो जाऊँ पर मेरा रोना वो है बहुत शिकायतें नाराज़गी खामोशियाँ मगर मेरा कुछ न कहना वो है उससे मिलना नही है मुझे अब मगर मेरा जीना वो है आँखों के किनारे बसे आंसूओ की चमक वो है जीवन के सफर में हर एक एहसास वो है वो कुछ भी नही मेरा मगर मेरी हर आस वो है।। मीरा सिंह
Hey
मैनें तुमको है चाहा तुम्हारे बिना मैनें हर पल बिताया तुम्हारे बिना खुश रहे तुम हमेशा औरो के संग मुझको जीना न आया तुम्हारे बिना।। मीरा सिंह
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