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आज़ के जमाने में कौन किसका होता है बस सिर्फ बातें बड़ी-बड़ी करता है और खुद को ख़ुदा समझता है ।। नरेन्द्र परमार ✍️
सोचा था कि,में खुदकुशी करके अमर हो जाउ फ़िर मैंने सोचा कि 🤔 खामखां में भूत बनकर,निर्दोष लोगों को में क्यूं सताऊं ।। नरेन्द्र परमार ✍️ 😃🤣😂😂
जीसे हम भूल गए हैं,वो फ़िर से वापस आई है अब क्या पता मुझे ??? वो मेरे लिए कौन सी आफ़त लाई हैं ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
अच्छे और बुरे खयालात हर किसी में होते हैं मेरे में भी है ! बस फर्क इतना है कि कोई बताता है तो कोई व्यक्ति छुपाता है बाकी तो अच्छे और बुरे खयालात हर किसी में होते हैं ।। नरेन्द्र परमार ✍️
राज वहीं करता है जो इंसान लाशों पर से गुजरता है दुनिया में कहीं पर भी नजर डालों वहीं होता आया है आम आदमी की कोई वेल्यू नहीं है जो जिगर नहीं रखता है अगर जिंदगी जीना है तो हिम्मत करके जिओ चाहें फिर नर हों नारी,नहीं तो फ़िर तुम्हारी लाश पर से गुज़रकर कोई और जिंदगी जीता है ।। नरेन्द्र परमार ✍️
गुज़रा ज़माना याद करके,में खामखां पछताऊं इनसे अच्छा है कि में तुझे भूलकर,ख़ुद ही ख़ुद न मुस्कुराऊं ।। 😃😁😩 नरेन्द्र परमार " तन्हा "
हर किसी की जिंदगी,एक छाते की नीचे नहीं जाती है ! खुशनसीब होते हैं जो लोग,जिस की जिंदगी एक छत नीचे निकल जाती है ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
ईमानदार लोगों की मोहब्बत,हसीनाओं को पसंद नहीं आती है नक़ाबपोष आशिकों के पीछे हसीनाएं,मेट्रो की तरह भागती हैं ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
संडे हो या फिर मंडे क्या फर्क पड़ता है हमें तेरी यादें,एक भी दिन छूट्टी कहा देती है हमें ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
अपनी हेसियत ऊंची उड़ान में नहीं भरता हूं इसीलिए तो में जो बोलता हूं वहीं करता हूं ।। नरेन्द्र परमार ✍️
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